December 16, 2017

ये कैसी बतकहीया जो ख़त्म ही न होती -------- mangopeople


किसी शादी में दूल्हे दुल्हन हालत एक कठपुतली जैसे हो जाती है | जिनका अपना कोई दिमाग नहीं चलता रस्मो के नाम पर लोग जो कहते है दोनों करते जाते है | कितनी भी शादिया देख लो कुछ रस्मे ऐसी होती है जो खुद की शादी होने पर ही पता चलती है | न आप उनका कोई लॉजिक पूछते है और न कोई बताने वाला होता है बस होती है और करो और बेचारे दूल्हा दुल्हन पहले से ही इसके लिए तैयार होते है | इन रस्मो के बीच कुछ ऐसा मजेदार हो जाए जो जीवनभर याद रहे तो क्या कहना |  सुनती हूँ की शादी पहले दूल्हे दुल्हन को बात नहीं करनी चाहिए लेकिन हम दोनों तो एक दिन पहले तक फोन पर लगे थे | नतीजा शादी के दिन जयमाल के लिए जाने से पहले खूब तैयारी करनी पड़ी मुझे | एक तो मुझे ये याद रखना था कि मै दुल्हन हूँ और सब कुछ आराम से धीरे धीरे करना है | सगाई वाले दिन रस्मो के बाद जब सभी के पैर छूने की बारी आई तो ससुराल वालो के तो बड़े आराम से धीरे धीरे पैर छुए लेकिन जब अपने घर वालो की बारी है तो पुरे हाल में हिरणी की तरह कुलाचें मार मार सबको ढूंढ ढूंढ पैर छूना शुरू किया की सब हंस हंस के लोटपोट , खुद को बाद में वीडियो  में देख मुझे ही शर्म आई | तो इस बार याद रखना था कि कुछ भी ऐसा न हो पाये | दूसरी बात थी निश्चल से तीसरी  बार सीधा मिलने वाली थी , मुझे डर था कही हम एक दूसरे को देख हंसने लगे या बतियाना ना शुरू  कर दे स्टेज पर , ये बात शायद लोगो को पसंद न आये तो तय किया मुझे उनकी तरफ देखना ही नहीं है |
                                                         जयमाल  के लिए जाते समय एक बार भी उन्हें देखा नहीं फिर जयमाल डालते समय नजर मिली और कुछ रिएक्शन देने से पहले ही फोटोग्राफर की तरफ देखने लगी और दूसरी नजर जब वापस  उन पर डाली तो बिलकुल शॉक उनके हाथ में आरती की थाली थी | मन ही मन चीख पड़ी हे भगवान ये क्या रहा है |  इस बार दोनों की नजरे अच्छे से मिली लेकिन वो आश्चर्य में फैली हुई थी दूसरे ही सेकेण्ड नजर उनके  बगल में खड़ी बहन पर पड़ी वो हंस रही थी | तब तक हमें समझ आ चूका था कि इसके पीछे कौन है वो मुड़े और हँसते हुए पूछा इसका क्या करना है मेरी बहन ने उनके हाथ पकड़े और घुमाना शुरू करते हुए कहा जीजाजी आरती उतारिये दीदी की | हायो रब्बा ऐसी हंसी फूटी हम सब की कि क्या बताऊ | लेकिन मुझे याद था कि मै दुल्हन हु सो एक हाथ से अपना चेहरा छुपाया और ठहाके लगाना शुरू |  बोलो कहा मैंने सोचा था कि ३६ इंच की मुस्कान भी नहीं देना है और मै ठहाके लगा रही थी | दो बार हाथ घुमाने के बाद बहन ने थाली ले ली और हम दोनों की आरती उतारने की रस्म पूरी की | उसके हटते ही निश्चल शुरू तुम मेरी तरफ क्यों नहीं देख रही थी | पहले ये बताओ तुमने आरती की थाल कैसे पकड़ ली मैंने पूछा | मै पुरे टाइम तुम्हे देख रहा था कि तुम कब मुझे देखो और तुम हो सब जगह देख रही हो मुझे छोड़ कर | इसका आरती की थाली पकड़ने से क्या रिश्ता है कौन से दूल्हे को आरती उतारते देखा है तुमने , आज तुमने तो रोल रिवर्स कर दिया हम दोनों का |   मै तो तुम में बीजी था और पता नहीं कब तुम्हारी बहन ने थाली पकड़ा दी मुझे पता ही नहीं चला | लोग आते गये जाते रहे और हम आधे से ज्यादा टाइम एक दूसरे से बतियाने में व्यस्त थे |
                                   तब का दिन है और आज का दिन ये रोल रिवर्स आज भी चला आ रहा है और हमारी बतकहीया भी , बस फर्क है तो इतना की अब एक ही  बोलता है और एक सुनता है |


           



     


                 


           
             




                   
 

December 10, 2017

अधूरी सी कहानी अधूरे से किस्से -----mangopeople




   शायद हमारी शादी का तीसरा दिन था , अपने ससुराल से दूसरे दिन ही हम दोनों वापस आ गये थे , मेरे घर की रस्मे निभाने के लिए | निश्चल को ऊपर के कमरे में रुकने के लिए भेज दिया गया था | अगले दिन सुबह सुबह मुझे नास्ता ले कर भेजा गया उनके पास | जैसे ही उन्हें देखा मुंह से निकला " वॉव अच्छे दिख रहे हो " उन्होंने भी मुझे देख कर कहा तुम भी अच्छी दिख रही हो | मैंने कहा अरे नहीं मै कहने के लिए नहीं कह रही सच में तुम अच्छे दिख रहे हो , वो मुस्करा दिए |   रेड टी शर्ट और जींस पहन रखी थी लग रहा था जैसे किसी ने उनकी एज अचानक से पांच दस साल कम कर दी हो | मन ही मन सोचने लगी केवल कपड़ो से इतना फर्क आ गया अभी तक उन्हें फॉर्मल कपड़ो में ही देख रही थी शायद इसलिए |  या कही ऐसा तो नहीं मैंने अभी तक उन्हें ठीक देखा ही नहीं है | हमारी अरेंज मैरिज , वो मुंबई , मै  बनारस , पांच महिने बतियाये तो खूब फोन पर  लेकिन देखा नहीं , फिर दो दिन से सिर्फ शादी की रस्मे , शायद ध्यान से एक दूसरे को देखा ही नहीं है अभी तक हम दोनों ने  | मै ये सोच  रही थी और वो कुछ ढूंढ रहे थे , पूछा क्या ढूंढ रहे हो तो बोले चश्मे का एक शीशा नहीं मिल रहा | तब लगा अच्छा ये बात है,  चश्मा नहीं लगाया इसलिए इतना फर्क लग रहा है | शीशा मिला नहीं लगा शायद कामवाली से गिर के टूट गया होगा सुबह सफाई के लिए आई थी और उसने फेंक दिया | खैर हम दोनों निचे आये  सभी को पता चल गई कि दामाद जी बिन चश्मे के है |
                                                  उसके बाद पूरा खानदान पूजा के लिए हम दोनों को लेकर गंगा जी गया , वहा ढेर सारी सीढिया और हमारे घरवालों को टांग खिचाई की आदत , लो सब शुरू हो गये | कभी छोटे चचेरे भाई आते "आराम से चलो जल्दी नहीं है"  और जवाब में मै कहती फुट लो यहाँ से वरना अभी बताती हूँ , तो कभी दादा आता , "ध्यान  हाथ पकड़ लो एक एक सीढ़ी उतरो" और मै गुस्से में बोली जाओ जाओ अपनी बीबी को देखो दुल्हन सी इतनी सजी है कही वो ना गिर पड़े | निश्चल कन्फ्यूज एक तरफ खुश है की उनकी अतिरिक्त पूछ हो रही है मेरा इतना भी इतना ख्याल रखा जा रहा है और मै सबको उलटे जवाब दे रही हूँ | मुझे एक बार टोक भी दिया अरे ऐसे क्यों बोल रही हो और मै सोच रही हूँ निश्चल ये देखभाल नहीं हो रही तुमने चश्मा नहीं लगाया है सब टांग खिच रहे है कि तुम्हे ठीक दिख रहा है की नहीं | हमारे बनारस वापस आने पर जब उन्होंने मेरे पुरे खानदान को कार के पास आ कर हमारे स्वागत में देखा तभी से गदगद थे | मुझे कहने लगे तुम्हे कितना मानते है सब , मै चुप रह गई ये जानते भी की ये मेरे घरवालों का सामान्य व्यवहार है घर के बेटी के लिए मै कोई ख़ास नहीं हूँ , पर इससे निश्चल के नजर में अपनी इज्जत बढ़ रही थी , तो हमने भी सोचा ऐसा ही मानो | बनारस घाट वाली देखभाल से वो और खुशफहमी में |
                                                     खैर मेरे घर की रश्मे ख़त्म हो गई और ससुराल पहुंची |  वहा हमारी शादी की फोटो आ गई थी सब फोटो की ही बात कर रहे थे |  हमने भी थोड़ी बाते सुनी और सीधे अपने कमरे में आ कर निश्चल से पूछा तुम चश्मा कब से लगा रहे हो , बोले बस तुम्हे मिलने अगस्त में आया था ना तभी से | कितना नंबर है दूर का है या करीब का वो पूछने लगे क्यों पूछ रही हो , मैंने कहा घर में सब हमारी शादी की फोटो देख कर, गुस्सा कर रहे है तुम पर, कि तुमने चश्मा क्यों पहना हुआ है पूरी एलबम ख़राब कर दी है | जवाब में बोले नहीं ज्यादा नंबर नहीं है , पहले कभी देखा नहीं सबने इसलिए | असल में मै जब तुमसे मिलने आने वाला था उसी समय मेरे दोस्त ने नया शॉप ओपन किया था तो मैंने भी अपनी आँखे चेक करवा ली तो एक आंख में थोड़ा नंबर आया तो मैंने नई शॉप से कुछ  तो लेना है सोच चश्मा ले लिया , सब बोले अच्छा लग रहा है तो लगा कर यहाँ आ गया | मतलब तुम्हे नंबर नहीं है तो फिर तुमने शादी में चश्मा क्यों लगाया था तब तो निकालना था ना | अरे तुम्हारे लिए याद है हमारी इंगेजमेंट के बाद  मैंने तुम्हे फोन पर पूछा था कि तुम्हे चश्मा कैसा लग रहा है तो तुमने कहा कि तुम्हे अच्छा लग रहा है , तुम्हे अच्छा लगा रहा था तो क्यों निकालता | मै उनकी बात सुन पूरी तरह शॉक थी , मैंने कहा तुम मजाक कर रहे हो निश्चल तुम्हे नंबर है , बोले नहीं है तुम चेक कर लो मैंने तुम्हारे कहने पर लगा रखा था | मैंने हैरानी में कहा  तुम्हे पता है मैंने तो बस इसलिए कहा था कि मुझे लगा तुम चश्मा लगाते हो मुझे वो ख़राब तो नहीं लग रहा तुम बस ये जानना चाह रहे हो क्योकि लड़कियों को चश्मे वाले लडके पसंद नहीं होते | बस इसलिए मैंने कह दिया कि मुझे चश्मे से कोई परेशानी नहीं है पसंद है | पर इसका मतलब ये थोड़े था की जो नहीं पहनता वो भी पहन ले | कसम से बड़ा कन्फ्यूजन हो रहा है समझ नहीं आ रहा है की हंसू की गुस्सा करू | तुम्हारी इस बात पर प्यार से आई लव यू बोलू या मेरी इकलौती शादी की एलबम ख़राब करने के लिए तुम्हे आई हेट यू कहु | बोले इकलौती शादी से तुम्हारा क्या मतलब है हमने कहा जो तुमने किया है उस हिसाब से तो मुझे पहली शादी बोलनी चाहिए थी |   वो दिन और आज का दिन   स्टील कन्फ्यूज बंदे के साथ लव किया जाये या हेट किया जाये |


#अधूरीसीकहानी_अधूरेसेकिस्से













November 25, 2017

ट्रेजिडी क्वीन नहीं खुशमिजाज औरते ---------mangopeople


             


                                                          एक है श्रीमान सुरेश त्रिवेणी उन्होंने एक फिल्म बनाई है "तुम्हारी सुलु " चोर राम ( लिखना तो चोट्टा चाहती थी पर वो गाली टाइप  हो जाती ना  ) ने कहानी चुरा कर एक फिल्म बना दी और न ही जिनकी कहानी चुराई है उन्हें कोई रॉयल्टी दी और न ही क्रेडिट दिया है | कहानी भी किसी एक से नहीं कई अलग अलग जगह से चुराई है और किसी का भी नाम देने तक की जरुरत नहीं समझी है | उन्होंने मुंबई जैसे बड़े शहरों में रह रही मुझे जैसी ;)  खुशमिजाज और अपनी मर्जी  और अपने तरीके से जीवन जी रही महिलाओ के जीवन से छोटी छोटी सच्ची कहानियां चुराई है और फिल्म बना दी लेकिन एक पैसे का क्रेडिट  न दिया है , बड़ी ज्यादती है | फिल्म देखते कई बार वो इतनी अपनी लगती है कि मुंह से निकल जाता है अरे कम्बख्त ने मेरा किस्सा चुरा कर फिल्म बना दी है , अरे ये  वाला किस्सा तो मेरी दोस्त का है ,मतलब की बस  हद ही  है | कोई ट्रेजडी क्वीन नहीं , कोई बड़े बड़े सपने नहीं , कुछ कर गुजरेंगे का कोई तूफानी जज़्बा नहीं , सिंपल स्वीट सी लाइफ और सिंपल सी इच्छाए | खुशमिजाज औरत , खुराफाती औरत , कुछ भी कर सकने का आत्मविश्वास वाली औरत  , छोटी छोटी खुशियों का बड़ा सेलिब्रेशन करने वाली औरत | सबसे ज्यादा शुक्र है कि  पति बड़ा रियल सा और सामान्य सा है , शुक्र है कि उन्होंने पति को पत्नी के जीवन का "विलेन" नहीं बनाया है शुक्र है कि उन्होंने पति की भूमिका के साथ कोई अत्याचार नहीं किया है  | इस फिल्म को सिर्फ किसी स्त्री की कहानी मत सोचिये ,उन्होने बड़े शहरों में रह रहे पति पत्नी के बदलते रिश्तो को दिखाया है , दिखाया है बड़े शहरों में परिवारों में गृहणी की भूमिका , सोच  उसके  प्रति पति के नजरिये में बहुत बदलाव आया है और  पत्नी का भी पति के प्रति वो ,आप , सुनो जी , तम्हे जैसा ठीक लगे वाला , मेरी दुनियां तेरे बिना कुछ नहीं टाईप से बहुत बदल गया है | फिल्म में तो लव मैरिज है किन्तु असल जीवन में बहुत सारे अरेंज मैरिज भी अब एक तरफे प्रेम  और समर्पण पर नहीं टिके है |
                                                         
                                                              पति विलेन नहीं है लेकिन पत्नी के अचानक काम करने से उसके इतर खुशियो से  थोड़ी जलन में जो प्रतिक्रिया है वो बड़ी वास्तविक सी है | एक सीन में मन किया जोरदार ताली बजाउ ,पति अपनी पत्नी को काम करने से रोकने के लिए कहता है उसे बेटी चाहिए और उसने उसका नाम तक सोच लिया है उनका पहले से ही १० -१२ साल का बच्चा है |  बिलकुल यही मेरी पड़ोसन के साथ हुआ था  वो ग्रहणी थी मुझे जॉब करता देख उनकी भी इच्छा हुई और जैसे ही ये पति को बोला पति के अंदर दूसरे बच्चे की इच्छा जाग गई थी और तीन महीने बाद प्रेग्नेंट होने की खुशखबरी भी  |  बड़ा ही कॉमन सा फंडा है महिलाओ को काम पर जाने से रोकने का उन्हें बच्चो में फंसा कर रखो | वैसे फिल्म में उसे पत्नी के काम करने से नहीं  आरजे वाले काम से परेशानी है और उसका भी एक कारण है , वो आप फिल्म देखेंगे तभी समझेंगे | पति के ये कहने पर विद्या हँस कर पति को चिढ़ाती है मजाक उड़ाती है कि इस उमर में बेटी के दादा जी लगोगे | ( मेरे पतिदेव ऐसा कहते तो मेरी प्रतिक्रिया भी यही होती ) लेकिन वो विद्या पर कोई दबाव नहीं डालता अपनी तरफ से बस एक ट्राई मारता है और ऐसी बातो को सुलझे रिश्ते ऐसे ही हलके में उड़ा देते है |  विद्या का एक  मायके का परिवार भी है जो   उनके १२ वि फेल  होने पर पर बार बार ताने भी देता है और उनके लिए फ़िक्र भी करता है | परिवार  उन्हें पहले काम करने के लिए फिर काम छोड़ने के लिए कहता है  | एक बार उनकी बहन कहती है काम छोड़ दे वरना बाद में पछ्तायेगी फिर रोते हुए हमारे पास आयेगी , विद्या  गुस्से  में  पलट कर बोलती है हां आउंगी बिलकुल आउंगी  तुमलोग परिवार हो मेरे |  हाय राम ये भी मेरा डायलॉग है , जब किसीने एक बार कहा कि भाई  के विवाह के बाद बहनो को  अपने घर से दुरी बना लेनी  चाहिए , मैंने यही कहा फिर परिवार के होने का मतलब क्या है , यदि उसमे एक दूसरे का ख्याल न रखा जाये | एक बेटा है उनका अंत में दिखाता है कि कैसे बच्चे   घर में हो रही सारी बातो को समझते है और हम उन्हें बस बच्चा ही समझते रह जाते है |  फिल्म का अंत जिस पॉजिटिव नोट पर होता है वो बड़ा कमाल है , नहीं नहीं आखरी सीन नहीं वो तो फ़िल्मी है , जब लगता है कि एक स्टोरी एक सैड एंड पर ख़त्म होगी तभी उसकी खुशमिजाजी  वापस आना बड़ा सही और वास्तविक लगता है |

                                                                        जब मुंह से निकले क्या एक्टिंग की है कमाल है तो वो बड़ी बात नहीं है , बड़ी बात तो वो है जब ये बोला जाये , क्या ये एक्टिंग कर रही थी | विद्या और उनके पति की भूमिका निभा रहे मानव कौल दोनों ने इतनी सहज एक्टिंग की है कि आप को ये नहीं लगता कि किसी एक्टिंग को देख रहे है |  जरा भी लाऊड नहीं इसके लिए डॉयरेक्टर भी तारीफ के काबिल है उन्हें अच्छे से पता था कि  सुलु  को किस रूप में पर्दे पर दिखाना है और विद्या का बेस्ट चुनाव उन्होंने किया मानव कौल का भी | एक रिव्यू फिल्म देखने बाद पढ़ी "फिल्म के कुछ सीन आप को गुदगुदाएंगे"  कम्बख्त उस सीन में मै बगल वाली खाली सीट पर गिर गिर कर हँसे जा रही थी , पहली बार हँसने के कारण मेरे इतने आँसू गिरने लगे की शर्ट की बाहे गीली हो  गई , क्यकि पर्स से टिशू या रुमाल निकालने के चक्कर में मै सीन मिस नहीं करना चाहती थी , क्योकि उसमे से एक खुराफात तो मै भी करती हूँ और  पहली बार फिल्म देखते  पतिदेव को मिस किया ये फिल्म दिखाने उन्हें क्यों नहीं लाई  | यदि आप खुराफाती , कुछ नया करते रहने वाले नहीं है या छोटे शहरों से है तो आप को ये फिल्म समझ नहीं आयेगी | एक सीन में तो नेहा धूपिया भी आश्चर्य से पूछती है क्या तुम अपने हसबैंड  से ऐसे बाते करती हो , तो फिल्म तो किसी किसी  लिए है |

 नोट :- वैसे त्रिवेणी जी आप को बता दू खुराफाती होने के लिए १२ वि में दंडी मार या या बैकबेंचर होने की जरुरत नहीं है , वो फर्स्ट बेंचर भी हो सकते है |

  #tumharisulu         

November 06, 2017

अच्छी कहानियों के बुरे पहलू --------- mangopeople




                                                                      बिटिया का तीसरे जन्मदिन का दूसरा दिन था वो उपहार में मिले सभी खिलौनों से एक साथ खेलना चाहती थी और मेरा नियम बना था हर महीने एक खिलौना निकलेगा | क्योकि बच्चे के लिए एक खिलौने की आयु अधिकतम २०-२५ दिन होता है उसके बाद उससे बोर हो कर भूल जाता है और नये की मांग करता है एक साथ सब दिया तो २५ दिनों में सब से बोर | उन्हें बहलाने के लिए उन्हें काम में उलझने के इरादे से उन्हें कहा सभी खिलौने बेडरूम में लाओ बारी बारी , उसे करने के बाद जाओ अब स्टूल लाओ , चलो अब मै स्टूल पर चढ़ती हूँ एक एक खिलौना मुझे दो ऊपर रख दू , एक जो पसंद है उसे रहने दो | दो तीन खिलौने देने के बाद उन्होंने मुझसे कहा , क्या तुम मेरी स्टेप मम्मी हो | कानो में पिघला शीशा डाल देना , दिल में जहर बुझा खंजर घोप देना जैसी बाते सुन रखी थी महसूस उस दिन पहली बार किया था | इसे अतिश्योक्ति न समझे मुझे लगा जैसे मुझे चक्कर आ रहे है और मैंने टेक न लिया तो स्टूल से गिर पड़ूँगी | निचे उतरी और बेटी को गले लगाते फिर से पूछा क्या कहा बेटा और उसने बात दोहरा दी | जैसा की हर माँ का ख्याल होता है मेरा बच्चा दुनिया का सबसे मासूम बच्चा है और लोगो से ये देखा नहीं जाता और वो उसे गलत बाते सिखा कर उसे बिगाड़ते है और माँ से उसके रिश्ते ख़राब करते है वही मैंने भी सोचा  | तुम्हे ये किसने सिखाया की मै तुम्हारी स्टेप मम्मी हो | तो तुम मुझसे इतना काम क्यों करवा रही हो सिंड्रेला और स्नोवाइट की स्टेप मॉम की तरह  |

                                                                  इन बच्चो के लिए बनी प्यारी प्यारी राजकुमारियों के कहानियों से भी हम बच्चो को कुछ गलत सीखा सकते है उनमे कोई पूर्वाग्रह भर सकते है ऐसा तो सपने में भी नहीं सोचा था | ऐसे ही जाने अनजाने हम सभी अपने दिलो दिमाग की सारी बुराइयाँ सारे गलत विचार , पूर्वाग्रह अपने अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाने के लिए दे देते है | जब कहानियां सुनाते है तो बुरे पात्रों को और बुरा बताते समय उसे अपनी भावभंगिमाओं से और डरावना बुरा बनाते है मन में भरा पूरा जहर उगल देते है |  खुद हम कितना ग्रसित है इन ऊलजलूल विचारो से , जीवन में कभी किसी सौतेली माँ  से नहीं मिली हूँ , सौतेले मामा है लेकिन उनसे रिश्ते सामान्य है , फिर भी खुद के लिए सौतेला सुनना , जहर बुझा लग रहा था | मुझे याद है उसके बाद जब मैंने उन्हें कृष्ण की कहानी सुनाई तो एक बार भी कंस के साथ मामा शब्द नहीं लगाया , क्या पता मामा के लिए कुछ गलत भर दूं  | याद रखिये बच्चो में भरा गया एक गलत विचार , किसी के लिए नफरत , किसी के लिए कोई पूर्वाग्रह एक दिन पलट कर किसी न किसी रूप में आप के ही सामने जरूर आयेगा | खुद को सुधारे न सुधारे विरासत में बच्चो को कुछ ख़राब न दे कम से कम |

#माँबापगिरी 

November 01, 2017

शुद्ध राजनीति है विचारधारा का नाम न दे -----mangopeople


                                                                       बात कुछ साल पहले की है जब श्रीलंका और भारत के बीच एक समुंद्री संरचना को तोड़ने को लेकर खूब बवाल हुआ था | उस समय की सरकार उस संरचना को तोडना चाहती थी क्योकि वो संमुद्री आवागमन में एक बड़ी बाधा थी जहाजों को घूम कर आना जाना होता था | उसे तोड़ने से रास्ता छोटा होता और सरकार को बहुत आर्थिक फायदा होना था | तब की विपक्ष ने कहा कि वो एक धार्मिक संरचना है और राम से जुडी है उसे नहीं तोड़ने दिया जायेगा | मामला अदालत तक गया और सरकार ने राम के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिया | आम लोग भी दो भागो में बट गए , प्रगतिशील लोग सरकार के साथ खड़े हो गये और राम भक्त विपक्ष के साथ | बड़ी आसानी से सरकार और विपक्ष ने अपने वोट के लालच में एक बड़े पर्यावरण से जुड़े मुद्दे से लोगो का ध्यान पूरी तरह हटा कर उसे केवल धार्मिक मुद्दा बना दिया |
       
                                                                      पर्यावरण के नजर से वो कोई आम संरचना नहीं थी असल में वो लाखो सालो में बनी मूंगे की चट्टानें थी जो एक तरह से समुंद्र के अंदर का जंगल था और जलीय जीवन उस पर वैसे ही निर्भर थे जैसे कि हमारे दूसरे जंगल में जानवरो का जीवन उस पर निर्भर है | एक तरह से उन्हें तोड़ना एक पुरे जंगल को काटने जैसा था , जो उस स्थान के जलीय जीवन को पूरी तरह नष्ट कर देता | सरकार इस बात से अच्छे से जानती थी इसलिए उसने विपक्ष के भावनात्मक और धार्मिक मुद्दों को इतना उछाला की पर्यापरण का मुद्दा कभी सामने आ ही नहीं पाया | नतीजा जो प्रगतिशील समाज पर्यावरण आदि मुद्दों को लेकर बड़ा सजग दिखता है वो भी उस तरफ ध्यान न दे कर सरकार के साथ खड़ा था | दूसरी तरफ विपक्ष भी इन मुद्दों से अनिभिज्ञ नहीं था किन्तु उसने भी इन मुद्दों को नहीं उठाया | जबकि इस मुद्दे को उठा कर वो उस संरचना को बड़े आसानी से तोड़ने से बचा सकती थी और जागरूक लोगो को भी अपनी तरफ कर सकती थी किन्तु उसने ऐसा नहीं किया | क्योकि हमारे देश में पर्यावरण जैसे मुद्दे वोट नहीं दिलाते है जबकि धार्मिक भावनात्मक मुद्दे वोट दिलाते है जो राजनैतिक रूप से आप को मजबूत करते है |
                                                                    इसलिए विचारधारा के नाम पर आम लोगो को बहस करते और लड़ते देख लगता है कि कैसे सरकार और विपक्ष मुख्य मुद्दों से ध्यान हटा कर लोगो को विचारधारा के नाम पर मुर्ख बना लेती है |

October 27, 2017

ये उन दिनों की बात है --------- mangopeople


पहली क़िस्त यहाँ पढ़े |

दूसरा और आखरी भाग
           
                                    ऊपर भाभी के कानो में भी बाउजी की आवाज जा चुकी थी , वो सब काम छोड़ निचे की और भागी |  अब तो मेरा ससुराल और पति दोनों छूटा , सब उसी पर ननद को बिगाड़ने का इलजाम लगायेंगे और सजा के तौर पर उसे उसके घर पंहुचा दिया जायेगा | निचे आई तब तक बाउजी बैठक के दरवाजे पहुँच चुके थे सामने हक्के बक्के खड़े दामाद को देख चौक  पड़े | अरे दामाद जी आप अचानक यहां कैसे और दामाद के जैसे ठंड ने होठ सील दिये हो उसे सूझी नहीं रहा क्या जवाब दे | तभी पीछे से हड़बड़ाई  सी भाभी ने जवाब दिया अरे शारदा चाची से मिलने आये थे इनकी रिश्ते से बुआ लगती है ना पर चाची थी नहीं तो यहाँ गये हम लोगो मिलने | अब जा कर दामाद जी को होश आया और ससुर के पैर पड़ते पूछा भाभी ने बताया आप कचहरी गये है हमें तो लगा किसी से मुलाक़ात ही न हो पायेगी ,क्या हुआ वापस कैसे आ गये | अरे चौक तक ही गया था तो गांव के एक लोग मिल गये बोले वकीलों की हड़ताल हो गई है , जाने से कोई फायदा नहीं है कुछ होने वाला नहीं है | शाम को वकील साहब से पूछ लूंगा फोन कर अगली तारीख कब की पड़ी है | लेकिन भाभी की चिंता दूसरी थी उन्हें कमरे में सीमा कही नहीं दिख रही थी जैसे ही बाउजी अपना झोला अलमारी में रखने के लिए मुड़े उन्होंने इशारो में नन्दोई से पूछा सीमा कहा है | नन्दोई के इशारो में ये बताने पर की सीमा चौकी के निचे है उनके होश उड़ गये | पहले तो उसने सुबह चौकी पर नई चद्दर बिछाते समय चद्दर को आगे लटका के चौकी के निचे के हिस्से को छुपाने के लिए खुद को धन्यवाद दिया फिर दूसरा ख्याल आया हाय राम एक तो उसने कोई शॉल या स्वेटर न पहना है एक हलकी सी साड़ी  ही पहन रखी है उस पर से चौकी के नीचे ठंडी  जमीन पर पड़ी है |   अब कुछ पल के लिए ही बाउजी को किसी तरह भी कमरे से निकाला जाए  तभी कुछ हो पायेगा  |  बाउजी चलिये आप के पैर धुला देती हूँ बाहर से आये है उसने एक प्रयास किया  | अरे उसकी जरुरत नहीं है चौक तक ही तो गया था पैर साफ़ है और वो दामाद के साथ चौकी पर बैठ बातो में लग गए | जबकि उस बेचारे से न बोला जाए न कुछ समझ आये | तभी भाभी वापस कमरे में आई उसने अपने शॉल  के निचे एक और शॉल  छुपा रखा था | धीरे से बाउजी के पीछे जा कर पूछा क्या लाउ बाउजी और इसी बीच उसने शॉल निचे गिरा कर पैरो से उसे चौकी के अंदर धकेल दिया | ये ओढ़ लिया तो कम से कम ननद की जान तो बचेगी नहीं तो आज चाहे शर्म से चाहे ठंड से उसका मरना तो तय है उसने मन की मन सोचा | बाउजी से चाय लाने की बात सुन तुरंत उसके दिमाग में एक उपाय कौंधा | फटा फट वहा रखी चाय उसने गर्म कर उन्हें दिया और ठंड बहुत है कर पुरे आधे ग्लास भर चाय उन्हें पकड़ा दिया |      रसोई में आ कर उसने तय किया की आज बाउजी और ननद की जान में से वो ननद की जान बचायेगी | बाउजी शुगर के मरीज है , अभी आधा ग्लास चाय पीया है अभी मिठाई दे कर एक ग्लास और पानी पिलाऊंगी और फिर दोपहर के लिये बनाई खीर दूंगी उसके बाद एक और ग्लास पानी | इतने के बाद तो जरूर उन्हें हल्का होने गुशलखाने जाना होगा | उतना समय काफी है ननद को वहा से निकालने के लिए | मीठा उन्हें मिलता नहीं और आज कोई रोकने  वाला है नहीं जरूर मेरे जाल में फसेंगे | चाल कामयाब रही लेकिन इन सब में पुरे एक घंटा निकल गया |
                                                                                     
                                                       ईधर बाउजी कमरे से बाहर निकले भाभी और दामाद जी तुरंत चौकी के निचे झुक चद्दर हटाया  | अंदर सीमा अपने पैरो को घुटनो से मोड़ दोनों हाथो से जकड सीने से लगा सिकुड़ कर लेटी पड़ी  ठंड से कांप रही थी और दांतो से आवाज ने निकले इसलिए मुंह में आँचल ठूस रखा था | भाभी ने धीरे से पूछा शॉल  था उसे क्यों नहीं ओढ़ लिया | उसके मुंह से सिर्फ घु घु आवाज आई तब भाभी ने हाथ आगे बढ़ा उसके मुंह से आँचल निकाला | ज़रा भी हिलती डुलती तो पिताजी को पता चल जाता जीते जी मर जाती मै उससे तो अच्छा था कि यही डंठी से धरती मैया के गोद में मेरी अर्थी सज जाती | अच्छा ठीक है अब जल्दी बाहर निकल बाउजी के आने से पहले यहां से चल | अरे भाभी मेरे तो हाथ पैर जाम हो अकड़ गए है खुल ही नहीं रहे | अरे देख क्या रहे है नन्दोई जी इसे बाहर खिचिये भाभी ने अपनी चीख को रोकते कहा | अभी तक हक्का बक्का हो सारा तमाशा देख रहा पति फटाफट थोड़ा अंदर घुसा और गठरी बनी अपनी पत्नी को बाहर खींचा | भाभी ने वहा पड़ी शॉल उसे ओढ़ा कहा जल्दी उठाइये और बगल में रसोई में ले चलिए | उसने भी ठंड से कांपती  पत्नी को गोद में उठाया और रसोई की तरफ चल पड़ा जो बैठक के बगल में ही थी |
                                                       
                                            कोई और मौका या समय होता तो ये पल कितने रोमांटिक और खुशनुमा होता जब पति पत्नी को गोद में लिया जा रहा हो | कुछ देर पहले  जिसे पत्नी के एक  स्पर्श के  लिए  गले लगाने के लिए  पति उतावला हुआ जा रहा था अभी उसी पत्नी को बाहो  में भरे होने के  बाद भी कोई उत्साह और प्रेम नहीं था बल्कि डर और खौफ भरा पड़ा था दोनों के मन में |    भाभी ने उसे  चूल्हे के पास पीढ़े पर बैठाने के लिए कहा चूल्हा गर्म ही था भाभी जल्दी जल्दी अपने हाथ गर्म करके उसके हाथ पॉंव मलने लगी और सीमा अभी भी सर से पैर तक खड़खड़ा रही थी | भाभी को हाथ पैर मलता देख पति को भी होश आया की उसे भी बूत की तरह खड़ा नहीं रहना चाहिए उसे भी अपनी पत्नी के लिए कुछ  करना चाहिए लेकिन जैसे ही उसने पत्नी का दूसरा हाथ पकड़ उसे मलने की कोशिश की |  भाभी बोली नन्दोई जी जल्दी से बैठक में जाइये बाउजी आ गये और आप को देखे लिया तो सारी पोल खुल जायेगी | बेचारा पति जिस पत्नी से मिलने के लिए इतने जतन किये उसी को इस हाल में छोड़ कर जाना पड़ रहा था | लेकिन बड़े बुजुर्गो का डर उस ज़माने में जो करवाये वो कम था | पति महोदय अगले एक घंटे तक ससुर के साथ बातो में उलझे रहे | घंटे भर बाद अचानक से बाउजी ने बड़ी बहु को आवाज लगाई वो अभी भी सीमा को गर्म तेल मल उसे ठंड से बचाने में लगी थी |
                                                         
                                               बैठक में आते ही बाउजी बोले भाई दामाद जी इतनी दूर से आये है सीमा को बुलाओ मिल ले | अब भाभी को काटो तो खून नहीं सीमा की ये हालत ही नहीं थी की उसे यहां लाया जाये | लेकिन बाउजी को जवाब क्या दे वो हा कर चली गई | सीमा को दो स्वेटर पहनाए ऊपर से शॉल भी दिया ताकि उसका ठंड से खड़कना तो बंद हो लेकिन वो रुके तब ना | भाभी किसी तरह उसे पकड़ कर बैठक में ले गई | अब पिता जी के सामने उसने नजर उठा कर भी पति को न देखा | ऐसा है बहु दामाद जी को अम्मा के कमरे में ले  कर चली जाओ दोनों आराम से बाते कर लेंगे | ये सुन तो जैसे तीनो शून्य हो गए ये क्या  हो गया आज बाउजी इतने उदार कैसे हो गए , घर के संस्कार ही बदल दिए | अब ये बदलते जमाने की हवा थी या जमाने बाद इतना मीठा खाने की ख़ुशी लेकिन बाउजी ये बात सुन भाभी की पकड़ सीमा से ढीली हो गई और वो फिर से सर से पांव तक हिलना शुर हो गई | अरे इसे क्या हुआ बहु | कुछ नहीं ज़रा ठंड लग गई है तबियत ठीक नहीं है | अरे इसे तुरंत इसके कमरे में ली जाओ बोरसी जलाओ और इसे रजाई में सुलाओ | ऐसा करो अजवाइन तेल में गर्म करके इसके हथेलियों में मलो ठीक हो जायेगी | जी बाउजी कह भाभी सीमा को लेजाने लगी दामाद जी भी उदारता का लाभ उठाते हुए उनके साथ जाने को उठे ही थे कि पिताजी ने कहा आओ बेटा हमारे पास बैठो सीमा को आराम करने दो |
                               
                                             दमाद जी शाम तक ससुराल  में रुके थे बाउजी से घंटो बात की  भैया लोगो से भी मिले और शाम तक अम्मा भी आ गई उससे भी मिले | लेकिन जिससे मिलने आये थे जिसके लिए इतने किरिया करम किये उसे जी भर देख भी न सके | भाभी सारे दिन दामाद जी के खूब आव भगत में लगी रही साथ में बीमार पड़ी सीमा की भी देखभाल करती रही , रात तक थक कर चकनाचूर हो चुकी थी | और सीमा ऊपर कमरे में रजाइयों में पड़ी रही , उसे तो कुछ होश ही  न था | और तीनो यही सोच रहे थे जो काम बस बाउजी की मिठाईया खिला कर आसानी से हो सकता था उसके लिए सब ने क्या क्या किया और सफल भी न हुए | समाप्त

#ये_उन_दिनों_की_बात_है 

ये उन दिनों की बात है ---------- mangopeople




                                                              ये उन दिनों की बात है जब परिवार के सामने पति पत्नी एक दूसरे से बात क्या एक दूसरे को सीधा देखा भी नहीं करते थे | बेटिया पति के साये से भी दूर भागती थी जब पिताजी या बड़े भाई घर पर हो | शर्म नैतिकता का इतना हाई डोज बेटियों को दिया जाता था कि लडकिया शर्म के बजाये ठंड से मरना ज्यादा अच्छा समझती थी | करीब ८६-८७  की बात होगी बनारस के पास एक गांव की | सीमा की शादी नवम्बर में हुई और दिसम्बर के पहले सप्ताह वो  दो महीने के लिए मायके चली आई |   पति का फोन तो आता लेकिन उन दिनों घरो में एक ही लैंडलाइन होता और जो  बैठके में रखा होता जहा कभी कभी पूरा मोहल्ला तो कभी पूरा खानदान बैठा बाते सुन रहा होता | सीमा पति की बातो का जवाब हां, नहीं, ठीक हूँ, अच्छा, से ज्यादा दे ही नहीं पाती | नया नया विवाह और १८-२२ की कमशीन सी उमर दोनों की,  उस पर भयंकर सा जाड़ा और इतनी लंबी जुदाई | एक दिन उसके पति ने कह दिया की करो कोई जतन मुझे तो मिलने आना है और ध्यान रहे घर में पिताजी और बड़के भैया लोग न हो , क्योकि उनके सामने तो अकेले में मिलना तो दूर लोग उसकी पत्नी को ठीक से देखने भी न देंगे , कम से कम घडी भर तुमसे बात तो कर सकू  | सीमा फोन पर सुनती रही फिर समस्या अपनी बड़ी भाभी को बताया | हाथ जोड़ उपाय करने को कहा क्योकि पति का भरोसा नहीं ,  ना माने और चला आए , फिर कुछ ऐसा ना हो जाए कि उसे पिताजी और भैया के सामने  शर्म की दिवार गिरानी पड़े |

                                                 भाभी ने सोचा भैया लोग समस्या तो है  नहीं रोज ही काम पर जाते है , लेकिन अम्मा और बाउजी तो घर में ही रहते है उन्हें कैसे हटाया जाये | फिर एक रोज खबर आई की कोर्ट की तारीख पड़ गई है और पिताजी को बनारस जाना है | तय हुआ बस अम्मा को टरकाने का बहाना खोजा जाए और अगले ही दिन भाभी अम्मा के सामने नानी और मामा का जिक्र ले बैठ गई फिर क्या था घंटे भर में अम्मा के आँखों से आशु झरने लगे और अपनी माँ  से मिलने को तड़प उठी | भाभी ने भी गर्म तवे पर फट रोटी डाली और अम्मा से कहा कि वो जा कर मिल आये उनसे | लेकिन अम्मा ने वही रोना रोया जिसके बारे में भाभी को पहले से ही पता था | मै गई तो बाउ जी  खयाल कौन रखेगा , दिन भर उनका कुछ न कुछ तो लगा ही रहता है | ऐसा करो अम्मा कोर्ट की तारीख जिस दिन की पड़ी है उसदिन चली जाओ सबेरे की बस पकड़ कर , बाउ जी भी रात के पहले न आयेंगे , जो एक बार बनारस गये आप भी रात तक लौट आना | भाभी की रोटी अच्छे से पकी और अम्मा ने हा कर दिया |
                                                                सीमा ने इशारो में  पति को फोन पर बोला  पिता जी बनारस जा रहे है कोर्ट की तारीख पड़ी है | बंदा समझदार निकला झट बात समझ गया | पति ने इस बीच नई नवेली पत्नी के लिए उपहार लिया और इधर सीमा और भाभी मेहमान की आवभगत की तैयारी में लग गये वो भी बिना किसी के पता चले | वो दिन भी आ गया जब दोनों की मुलाक़ात होनी थी | इधर पिताजी घर से निकले और शायद चौक तक भी न पहुंचे होंगे दामाद जी घर के अंदर | भाभी और सीमा दोनों घबरा गये  ,भाभी ने झट नन्दोई को बैठक में बिठाया और पूछ बैठी कही पिताजी ने देख तो न लिया अभी अभी ही घर से निकले है | भोला सा दामाद तपाक से बोला वो तो सुबह ७ बजे ही आ गया था कब से घर के बाहर वाली चाय की दूकान पर बैठा कितने कुल्लड़ चाय पी गया पिताजी के जाने के इंतज़ार में | ठंड का फायदा मिला और मफलर से पूरा चेहरा ढक रखा था किसी ने पहचाना भी नहीं | भाभी को उनका उतावलापन देख हँसी आ गई इतनी ठंड में सुबह ५ बजे चले होंगे अपने घर से , जबकि पता था वो घर में १० पहले न आ पाएंगे | समझदार भाभी जाते हुए नन्दोई को छेड़ते बोली अभी सीमा को भेजती हूँ लेकिन उसके उसके आते किवाड़ न बंद कर लेना मै बगल की रसोई में ही खाने की तैयारी कर रही हूँ | इधर पति की धड़कने और  उतावलापन बढ़ने लगा इधर सीमा जनवरी की कड़क ठंडी में भी बस साडी पहन पति के सामने आई |   कुछ फैशन का जोश था कुछ पति से मिलने की चाहत में रगो में  दौड़ते गर्म खून की  गर्मी उसे ठंड न लग रही थी ,  तन पर न स्वेटर न शॉल |

                                                दोनों की आँखे मिली और दोनों मुस्कराये पति ने उसकी तरफ बढ़ते हुए  पूछा कैसी हो | सीमा ने तुरंत भाभी के बाहर खड़े होने का इशारा कर उसे रुक जाने को कहा , तभी भाभी दोनों के लिए अंदर चाय रख ये बोलती चली गई कि वो अब न आयेगी दुबारा उन्हें डिस्टर्ब करने जो चाहिए रसोई से ले लेना वो कुछ देर के लिए ऊपर अपने कमरे में जा रही है | अब अंधा क्या चाहे दो आँखे , दोनों के कुछ पलो का एकांत ही चाहिए था जो मिल रहा था | पति की इच्छा तो तुरंत ही आगे बढ़ पत्नी को गले लगा लेने की थी , लेकिन उसने तुरंत ही खुद को रोका | मै पति हूँ ऐसा आवारा प्रेमियों की तरह का व्यवहार मुझे शोभा नहीं देती मुझे संयम रखना चाहिए  | पत्नी से ऐसे खुलेआम प्यार जताया तो सर पर चढ़ जायेगी कभी मेरी इज्जत न करेगी मेरी बात न मानेगी अपनी मनमानी करेगी और वो आखिर में क्या सिखाया था दोस्तों ने उसने बहुत जोर दिमाग पर लगाया लेकिन वो याद न आया | लेकिन जैसे ही उसने सीमा को प्यार से अपनी तरफ बढ़ते देखा तो उसे लगा दोस्तों की सीख को आज के लिए आराम देना  बेहतर है अच्छा हो समय और मौके के हिसाब से व्यवहार किया जाये वरना भोर से ठंडी हवाओ के थपेड़े झेलना बेकार हो जायेगा | पत्नी खुश हो जाए सोच उसने झोले  से गिफ्ट रैप किया उपहार उसकी और बढ़ाया गिफ्ट लेते देते पति के हाथो का स्पर्श सीमा के कानो में प्रेम की घंटिया बजा गया  और उसी घंटियों के बीच उसे अपना नाम सुनाई दिया सीमा लेकिन  ये क्या आवाज पति की नहीं पिता जी की थी | सीमा ने मन ही मन सोचा पिताजी का डर इतना मन में समाया है कि कानो में उनकी आवाजे आ रही है |  लेकिन जो दूसरी आवाज कान पड़ी वो थी बड़ी बहु वो भी पिता जी की ही आवाज थी | अचानक उन दो प्रेम के पंछियो की तन्द्रा टूटी | अरे ये तो पिता जी की आवाज है लेकिन वो वापस कैसे आ गए  और अब तो वो आँगन में आ चुके है अब सीधा बैठक में आयेंगे |
                                                                       सीमा को लगा जैसे उस पर घड़ो पानी पड़ गया हो , अब क्या होगा पिताजी अभी अंदर आयेंगे पति के साथ उसे अकेला कमरे में देख उन पर क्या गुजरेगी | हाय मै कैसे उनका सामना करुँगी , उन्ही क्या बताउंगी की दामाद जी अचानक कैसे आ गए और हम दोनों अकेले यहाँ क्या कर रहे है | दामाद जी कैसे उसी दिन घर आये जब घर में कोई नहीं था | हाय मै आज के बाद कैसे उनका सामना करुँगी | फिर ये बात अम्मा के साथ भैया लोगो को भी पता चलेगी, ओह ! मै तो इस घर में एक पल भी किसी से नजरे नहीं मिला पाऊँगी , अब मेरा क्या होगा  | धीरे धीरे बात पुरे गांव में फ़ैल जायेगी और मै हर जगह बदनाम हो जाउंगी | उसने मन ही मन बोला हे धरती मैया तुम यही और अभी फट जाओ और आज मै उसमे समा जाऊ |  उधर दामाद का दिमाग भी काम नहीं कर रहा नये नये ससुराल में इज्जत उतरेगी बात घर तक भी जायेगी |  किसी को बता के नहीं आया हूँ , बाबूजी खाल उधेड़ेंगे और भाभियाँ भैया जोरुका गुलाम कह चिढ़ाएँगे , अम्मा तो बोल बोल बुरा हाल करेंगे  | तभी सीमा ने न आव देखा न ताव झट चौकी के निचे घुस छुप गई और वही खड़ा उसका पति उसके इस काम को आँखे फाड़ फाड़  देखता रह गया |

क्रमश
                                                                  
दूसरी क़िस्त यहाँ पढ़े

#ये_उन_दिनों_की_बात_है 












October 01, 2017

संस्कारी रोमांस और बेडरूम के संस्कार -------- mangopeople




          एक न्यूज साईट पर खबरों को देखते एक हेडिंग पर नजर पड़ी "पहल आप भी कर सकती है " साफ था बात महिलाओ के लिए लिखी थी तो फट से खबर पर चली गई | वहा सवाल था क्या आप का जीवन बहुत बोरिंग होता जा रहा है , दिल से आवाज आई हा , विवाह के एक दसक बितने के के बाद आप दोनों के बीच रोमांस गायब है , दिल ने फिर जवाब दिया हां बिलकुल सही कर रहे हो , क्या आप फिर से अपने जीवन में रोमांस लाना चाहती है जीवन से बोरियत दूर करना चाहती है , दिल चीखा हां भाई हां तुम तो अंतर्यामी हो | तो पहल आप भी कर सकती है अच्छा तो ये हमको रोमांस करना सिखाएंगे सिखाओ भाई हम सीखने को तैयार है | पहला उपाय था पहले अपना बेडरूम बदलिये इस पर दिमाग चिल्लाया पागल है क्या मुंबई में प्रापर्टी के रेट पता है क्या उससे सस्ते में तो पत्नी पत्नी बदल जायेंगे , आगे जब पढ़ा बेडरूम की  साज सज्जा बदलिये तब जान में जान आई | बेड पर नई अच्छी चादर डालिये , लो भाई नये चादर से रोमांस कैसे आयेगा इतने सालो में कितने नये चादरे खरीद  बिछा चुकी हूँ जीवन वैसे ही बोरिंग है खुद का ध्यान उस पर न गया तो दूसरे से क्या शिकायत करे , फिर भी कह रहे हो तो मान लेते है | कमरे ने सुन्दर ताजे फूल रखे वो नयी ऊर्जा भरते है दिल प्रसन्न करते है और महंगे विदेशी फूलो के नाम गिना दिया | हमने कहा अपने भारतीय गुलाब और रजनी गंधा में क्या खराबी है जो फूल रखने से कुछ फायदा हो तो हम तो बगीचा लगा दे ,चलो ये भी किया |

                                                आगे लिखा था अब कमरा देखने में अच्छा हो  उसमे खुसबू भी अच्छी आनी चाहिए और लाइट भी रोमांटिक होनी चाहिए  इसके लिए अच्छी खुसबू वाले कैंडिल जलाइये | अरे कम्बख्त  पहली ही लिखा दिया होता की बहन ये रोमांस वोमंस करना न बड़े लोगो का चोचले है इसमें बड़ा खर्चा है मडिल क्लास और मिडिल क्लास वाला दिमाग रखने वालो के बस का और जेब का नहीं होता ये सब , तो पढ़ते ही नहीं | खुसबू तो हम २० रुपल्ली के मोगरे के गजरे और और मदम रौशनी तो अपने जिरो वॉट वाले बल्ब से भी ला देंगे , मुंबई जैसे गर्म जगह में जो घर में एसी न हो तो ये मोमबत्तिया जलेंगी कैसे पंखे में तो जलने से रही फिर तो लालटेन जलानी पड़ेगी और पता नहीं लालटेन से आती कैरोसिन की खुशबू में रोमांस का क्या होगा | फिर लिखा था कमरे में खाने और पिने  के लिए भी कुछ रखे , स्ट्रबेरी क्रीम के साथ , उनके पसंद की चॉकलेट , अच्छी क्वॉलिटी की शैंपेन | लिखने वाला जरूर विदेशी है वरना कमरे में खाने के लिए कुछ रखने का नाम नहीं लेता | उसका पता नहीं है यहाँ तो भारतीय पति रात में इतना ठूस के खा लेता है या खिला दिया जाता है कि वो पत्नी के मुंह  डकार मार देता है , वो कमरे में आने तक पहले ही गले तक इतना भरा रहता है की वो और क्या खायेगा और कभी भारतीय पुरुषो को आम खाते देखा है , देखा होता तो फिर उनके फल खाने को रोमांस से जोड़ने की गलती कभी नहीं करते | और महाराज भारत में पीने का मतलब एक ही होता है और वो पत्नी के साथ नहीं दोस्तों के साथ होता है और उसके बाद रोमांस नहीं हुल्लड़ होता है | जाने दो ये भारत के लिए कुछ करना तुम्हारे बस का नहीं है  |

                                                उसके बाद बताया गया कि अब जब सब कुछ बदल दिया है तो अपने आप को भी बदलिये | कर दी न वही पतियों वाली बात सारे बदलावों जरुरत हमी लोगो में है मतलब बदलना है तो हम लोग ही बदले मतलब सारी बुराई हमी लोगो में है , मतलब जो करे हमी लोग करे | ये सब सोचते जब दिमाग साँस लेने के लिए रुका तो देखा लिखा था कुछ नये कपडे लीजिये , हाय ये पढ़ते ही दिल गार्डन गार्डन हो गया पहले ही ये लिखना था ना हम लोग तो हमेसा तैयार है कुछ नया ड्रेस खरीदने को बोलिये क्या क्या लेना है | तो जवाब था रेड नाइटी खरीदिये , अब ये क्या बात हुई की सिर्फ लाल रंग में ही  रोमांस जगेगा मतलब की नील पिले हरे में क्या खराबी है उनकी रोमांस से क्या दुश्मनी है  कितने रंगो में नाइटी खरीद पहन चुके है गदहे राम तुमको कुछ नहीं पता , खालीपीली लिखे हो तुम इसमें से कुछ किया विया है नहीं ऐसा लगा रहा है किसी पिच्चर विच्चर का सीक्रिप्ट यहाँ छाप दिए हो , कुछ भी हुंह | अंत में लिखे का लब्बो लुआब ये था कि यदि आप पति पत्नी है तो बहुत कुछ करते ही होंगे लेकिन रोज के कामो में फंस कर एक दूसरे को समय नहीं देते है एक दूसरे से  बात नहीं करते  तो एक पूरी रात जागिये बाते कीजिये अपने बारे , रोमांस कीजिये |

                                                  जब ये सब पढ़ कर निचे बढे तो अचानक पाठको की प्रतिक्रिया पर नजर गई बन्दे ने लिखा था , " क्या बकवास लिखा है हमारे देश की संस्कारी लडकिया ये सब नहीं करेंगी , ये सब हमारे देश की सस्कृति नहीं है | "  ये पढ़ कर पीछे बैकग्राउंड में तीन बार बजा  संस्कारी रोमांस , रोमांस रोमांस  बेडरूम के संस्कार , संस्कार संस्कार और मुंह से निकला ओय धत्त तेरे की ये बेडरूम के कौन से संस्कार होते है और ये संस्कारी तरीके से कैसे रोमांस किया जाता है, ये तो हमें आज तक पता ही न चला   |  मतलब रेड नाइटी की जगह लाल साड़ी पहन लिया जाए मोमबत्ती की जगह अगरबत्ती  जला दिया जाये , स्ट्रबेरी क्रीम , सैपेन  की जगह नारियल पानी और बताशे रख दिए , और खुसबू वाले विदेशी फूलो की जगह गुड़हल के फूल रख दिए जाए | उसके बाद क्या होगा और हम कैसे दिखेंगे अब आप अंदाजा ही लगा लीजिये | बस लगेगा एक चौकी रख कर उस पर बैठ जाये और पति  आते है ही आप के चरणों में गिर बोले,  बोलो पहाड़ो वाले माता की जय , बोलो सच्चे दरबार की जय और दोनों मिल कर माता का जागरण करेंगे रातभर पुरे मोहल्ले के साथ  | जो आप को पता हो ये संस्कारी रोमांस क्या होता है तो हमें भी बताये |

चलते चलते

             ईमारत में किसी ने गांव में   अपने बेटे की शादी की और मुंबई आ कर एक छोटी पार्टी ईमारत में रखी साथ में सत्यनारायण की कथा भी | अब जाने के लिए सोचा पहना क्या जाए कॉटन का सूट नहीं चलेगा पूजा के साथ आखिर शादी की पार्टी है , तो बंधेज वाली सिल्क की लाल साड़ी निकाल लिया | अब साड़ी अकेले कभी नहीं होती उसके साथ बिंदी ,काजल, लिपिस्टिक , चूड़ी आदि सब होता है तो ५ मिनट वाला सूट आधे घंटे की साड़ी बन गया | पहन कर पति से पूछा ठीक है ना , (ना ना कैसी लग रही हूँ वाले धर्म संकट में पति को कभी डालती ही नहीं मतलब कुछ ज्यादा तो नहीं कर लिया एक पूजा के लिए ) पतिदेव २ मिनट देखे फिर उठ कर मेरे पास आये और मेरे घुंघराले बालो से क्लचर निकाल दिया और बालो को पीछे से कंधो तक  फैला दिया फिर पीछे जा कर बोले बस एक चीज की कमी है बस एक त्रिशूल आ जाये तो साक्षात माँ दुर्गा | गुर्रर्र  सही कह रहे हो त्रिशूल की हो कमी है वरना महिसासुर तो मेरे सामने ही है आज ही अंत हो जाना था मैंने गुस्से में बोला | पतिदेव पुरे मूड में थे बस बस इसी क्रोध और आँखे बड़ी करने की ही देर थी बची खुची कसर भी पूरी हुई , जय माता दी | इतने में हमारी बिटिया रानी जो उस समय बस तीन साल की थी आ गई वो भी पापा के साथ उछल उछल बोलना शुरू कर दी जय माता दी | मै गुस्से में बाहर निकल गई लिफ्ट तक बाप बेटी की जय माता दी जोर से बोलो जय माता दी की आवाज आ रही थी गुर्रर्र  |










September 25, 2017

सुनो लड़कियों अब सुधर जाओ ------------ mangopeople





           सुनो लड़कियों अब सुधर जाओ और अपनी सुरक्षा के लिए दुसरो का मुंह तकना बंद कर दो | जिस पितृसत्तात्मक सोच ने लडको को तुम्हे छेड़ने परेशान करने की हिम्मत और सोच दी है उसी सोच से तुम अपनी सुरक्षा की गुहार कैसे लगा सकती हो | तुम्हे क्या लगता है वहां तुम्हारी आवाज सुनी जायेगी | ये गुहारे तुम पर पलट का ग़ाज बन गिरेगी | हॉस्टल से निकलना बंद करावा दिया जायेगा , स्कूल नौकरी छुड़वा कर घर बिठा दिया जायेगा , या आगे पीछे पूंछ की तरह बाप भाई लगा दिए जायेंगे जिससे तुम्ह जल्द ही उनके लिए बोझ की तरह हो जाओगी  | तुम्हारी ही आजादी को कैद में बदल दिया जायेगा | तुम्हे ही लक्ष्मण रेखाओ की याद दिलाई जायेगी और ये सब तुम्हारी सुरक्षा के नाम पर किया जायेगा | फिर महसूस करना पीड़ित हो कर अपराधी सी सजा को |

                  बंद कर दो दुसरो के भरोसे रहना , क्यों रहना चाहती हो अपनी सुरक्षा के लिए दुसरो के भरोसे पर | जब अपना शहर गांव छोड़ दूर स्कूलों में पढ़ने जा रही हो , नौकरी के लिए देश विदेश तक अकेले जा रही हो | लम्बे संधर्ष के बाद इतना आत्मविश्वास जमा किया है कि अपने घर परिवार  से दूर अकेले रह सकती हो तो अपनी सुरक्षा के लिए किसी और की और क्यों देख रही हो | देने वाले ने तुम्हे भी वही दो हाथ पैर और दिमाग दिया है जो तुम्हे छेड़ने परेशान करने वाले के पास है तो उन्हें इतना मजबूत क्यों नहीं बनाती कि अपनी रक्षा खुद कर सको | जब पढाई और नौकरी के लिए इतना आत्मविश्वास पैदा किया है तो अपनी रक्षा के लिए क्यों नहीं करती | जब हर काम के लिए  स्वालंबी बनी हो तो अपनी रक्षा के लिए क्यों किसी पर निर्भर होना चाहती हो | तुम्हारा खुद को कमजोर और उन्हें मजबूत समझना ही उन्हें मजबूत और इतना हिम्मती बनाता है कि वो तुम्हे परेशान कर सके तुम्हारे आगे बढ़ने के रास्ते में एक पत्थर बने | अपने आगे बढ़ने के रास्ते में पड़े इन पत्थरो को खुद उठाओ और किनारे फेक दो | जब तमाम तरह की नौकरियों के लिए तमाम तरीके का प्रशिक्षण ले सकती हो तो अपनी सुरक्षा के लिए शारीरिक प्रशिक्षण भी ले सकती हो | अनेको गैजेट अपने लिए खरीद सकती हो तो अपने बचाव के लिए हथियार भी ले सकती हो | जब झुण्ड में आ कर इन सब का विरोध कर सकती हो धरना देने की हिम्मत कर सकती हो तो ऐसे झुण्ड में आये लफंगो को झुण्ड बना कर सबक खुद सबक भी सीखा सकती हो |
                         आज के समय में तुम्हारे विरोध प्रदर्शनों का केवल राजनैतिक स्तेमाल ही होगा | तुम्हारे मुद्दे कही पीछे छूट जायेंगे बाकी सरकार और विपक्ष अपनी राजनीति चमकायेंगे | सब के सब वही पुरुषवादी सोच के है जिसके खिलाफ तुम लड़ रही हो | ये कभी तुम्हारी बात नहीं समझेंगे आज जो तुम्हारे साथ है वो कल गद्दी पर बैठते ही तुम्हारे खिलाफ होगा और जो आज तुम्हारे खिलाफ है वो गद्दी जाते ही तुम्हे पुचकारने आ जायेंगे | समाज प्रशासन और राजनीति इन में सो कोई भी तुम्हारी मदद नहीं कर सकता इन समस्याओ के लिए क्योकि ये समस्याए उन्ही की पैदा की गई है , वो तुम्हारी रक्षा उससे क्या करेंगी , वो तुम्हे ही सुरक्षा के नाम पर कैद कर जायेंगी | कुछ किया भी तो वो ज्यादा प्रभावी नहीं होगा , एक सड़क पर पुलिस बैठेगी तो गली नुक्कड़ पर छेड़ी जाओगी , हिम्मत करके हर छेड़ने वाले को सबक खुद सिखाओगी तो हर लफंगे में डर बैठेगा | अपनी रक्षा करने का आत्मविवास और हिम्मत आएगी तो एक सड़क एक गली नहीं हर जगह सुरक्षित रहोगी  और हमेसा रहोगी |







August 01, 2017

माँ दूध अमृत नहीं होता ---------- mangopeople

       



                                                       हाल में ही एक लेख पढ़ा जिसमे बताया गया कि माँ का दूध उतना भी अमृत नहीं होता जितना की उसे बताया जाता है | लेख के अनुसार जब  पाउडर का दूध बाजार में आया माँ के दूध के विकल्प में ,तो विकासशील और गरीब देशो के लिए एक समस्या खड़ी हो गई थी वो थी साफ़ पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने की , जिसमे दूध को मिला कर बच्चो को पिलाया जा सके | उन देशों में ये संभव नहीं था इसलिए उन्होंने माँ के दूध के बारे में बढ़ा चढ़ा कर प्रचारित करना आरम्भ किया ताकि माँए पाउडर के दूध से दूर रहे |  गंदे पानी में बना कर दिया दूध बच्चो के लिए और खतरनाक हो सकता था | साफ सफाई का आभाव बच्चो को और बीमार बना सकता था और पहले से ही ऊँचे बाल मृत्युदर वाले  इन देशो में ये दर और बढ़ सकता था |

                                            मै काफी हद तक इस बात से सहमत हूँ कि वास्तव में माँ का दूध उतना अमृत नहीं होता जितना की बताया जाता | मै पाउडर के दूध का समर्थन नहीं कर रही माँ के दूध के विकल्प के रूप में हमारे यहाँ पुराने समय से ही गाय , भैस और बकरी के दूधो का प्रयोग किया जाता रहा है | जानवरो के दूध को बच्चे के लायक सुपाच्य बना कर दिया जाता रहा है | ऐसे बहुत से कारण है जब माँ के दूध की जगह या उसके साथ बाहर से भी दूध बच्चो को पिलाया जाता रहा है | एक सबसे सामान्य कारण है कि बच्चे के जन्म के साथ ही माँ को तुरंत दूध आ जाये ये जरुरी नहीं है ,  बहुत सी महिलाए ऐसी है जिन्हे दूध ना के बराबर आता है या मात्रा बहुत कम होती है जिससे बच्चे का पेट नहीं भरता , कई बार महिलाए बीमार होने के कारण तो कई बार बच्चे के बीमार होने के कारण भी माँ अपना दूध बच्चो को नहीं पिलाती और उन्हें बाहर से दूध दिया जाता है | उपलब्धता के और बच्चे के पचाने की छमता के अनुसार  पाउडर, गाय , भैस और बकरी का दूध दिया जाता रहा है | जो पौष्टिकता के और बच्चे के जरुरत के हिसाब से कही से भी माँ के दूध से कम नहीं होता है |

                                           बच्चे के स्वस्थ के दृष्टि से भी देखे तो इस अतिश्योक्ति पूर्ण माँ के दूध  की महिमा से बाहर आने की भी जरुरत है | कितनी ही बार ऐसा होता है कि माँ को दूध कम आ रहा है जो उसके बच्चे का पेट भरने के लिए पर्याप्त नहीं  है किन्तु बाहर का दूध दिया तो बच्चे के लिए अच्छा नहीं होगा जैसी भ्रान्ति बच्चे के लिए खतरनाक हो जाती है |  कई बार बच्चो में पानी की कमी हो जाती है तो कई बार वो  इस कारण कुपोषित तक हो जाता है | कई बार ऐसा भी होता है कि माँ को अच्छे से दूध आ रहा है किन्तु बच्चे की जरुरत उससे ज्यादा है |  ज्याद सेहतमन्द या ज्यादा ऊर्जा खर्च करने वाले बच्चो की जरूरते अन्य सामान्य बच्चो से ज्यादा होती है | ये जरुरी  नहीं है कि माँ का दूध बस उनके लिए पर्याप्त हो उसे माँ के दूध ( माँ के दूध आने की एक सीमा होती है ) के आलावा भी और पोषण की जरुरत हो सकती है |  इन दोनों ही स्थितियों में भूख के कारण बच्चे चिड़चिड़े होते है , बार बार रोते है और एक अच्छी लम्बी नींद नहीं ले पाते है और जल्दी जाग जाते है | ये सारी ही स्थिति बच्चे के स्वस्थ के लिए और उसकी बढ़त  के लिए अच्छा नहीं होता | इसलिए ये जरुरी है कि इस भ्रान्ति को दूर किया जाये | माँ का दूध बच्चे के लिए बेहतर है ये सही है किन्तु केवल माँ का ही दूध बच्चे के लिए पर्याप्त है और उसे बाहर से किसी पोषण की जरुरत नहीं है या बाहर से दिया गया दूध उसके उसके लिए खतरनाक होगा ये सही नहीं है |


                                     माँ का दूध बच्चे के लिए अमृत होता है जैसी अतिश्योक्तिपूर्ण बाते एक माँ के लिए कितना मानसिक दबाव और ग्लानि ला देता है कई बार इसका अंदाजा भी आम लोगो को नहीं है | बच्चे के जन्म के साथ ही यदि उसे दूध न आये , दूध कम मात्रा में आये , किसी बीमारी या काम की वजह से वो बच्चे को स्तनपान न करा सके तो ये बाते उसे ग्लानि और अपराधबोध से भर देती है जो उसे न केवल तनाव देता है बल्कि कई बार उन्हें डिप्रेशन  में भी ले जाता है | उन्हें लगता है कि केवल स्तनपान न करा पाने के कारण वो एक माँ की जिम्मेदारियां और कर्तव्यों को ठीक से नहीं निभा रही है | कई बार वो ये मानने के लिए भी इसी कारण तैयार नहीं होती की उनका दूध बच्चे के लिए पर्याप्त नहीं है या उनके बच्चे की  जरूरते और ज्यादा पोषण की है तो उन्हें बाहर से भी बच्चे को दूध देना चाहिए | इस तरह का मानसिक दबाव माँ के साथ बच्चे  के लिए भी ठीक नहीं है | एक स्वस्थ और खुश माँ ही किसी बच्चे की बेहतर देखभाल कर सकती है | केवल स्तनपान ही किसी माँ को वर्णित  नहीं करता , स्तनपान माँ के कई कर्तव्यों का एक हिस्सा भर है , ये बात सभी को समझने की आवश्यकता है |

चलते चलते
                     मेरी बेटी करीब नौ महीने की थी तब मै अपने गांव ससुराल गई थी | जिठानी को दो पुत्रियों के बाद मन्नतो से पुत्र हुआ था जो महीने भर का था | एक सुबह वो उठ कर रोने लगा उसकी माँ मंदिर गई थी उन्हें आने में देर था तो मैंने ससुराल की अन्य महिला से कहा मुझे दे दीजिये ही मै उसे तब तक दूध पीला देती हूँ ,  बचपन में मेरे अपने संयुक्त परिवार में अक्सर दो लोगो को एक साथ बच्चे होते थे और वे एक दूसरे  के बच्चो को आराम से स्तनपान करा देती थी ,तो मेरे लिए ये सामान्य बात थी ,किन्तु ससुराल में  रिश्तेदार महिला ने मुझे प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा ( संभवतः ये उसके पुत्र होने के कारण  था ) उन्हें अनदेखा कर मै बच्चे को दूध पिलाने लगी | कुछ ही देर में जिठानी आ गई मुझे ऐसा करते देख मुस्कराई बोली ठीक किया | अगले दिन जिठानी रसोई में खाना बना रही थी बच्चा फिर रोया मैंने कहा मै काम करती हूँ आप दूध पीला दीजिये | बोली गर्मी में क्या रसोई में आओगी अच्छा है तुम ही दूध पीला दो | तुरंत मेरे शातिर दिमाग की घंटी बज गई ये सामान्य बात नहीं है कुछ तो पक रहा है उनके दिमाग में , उस समय बात को दिमाग की खुटी पर टांग कर दूध पीला दिया | तीसरे दिन जैसे ही उन्होंने फिर से मुझसे कहा मै शुरू हो गई , पता था की बात कैसे निकलवानी है | मैंने पूछा क्या हुआ आप को दूध नहीं आ रहा तो उनका जवाब था नहीं ऐसी बात नहीं है | तो क्या अपने दूध का दही जमा के दही बड़े बनाने है | तब जा कर पोल खुली नहीं जी तुम वहा फल मेवा दूध मलाई खाती हो तुम्हारा दूध अच्छा होगा हम लोग कहा यहाँ पर ये सब खाते है | माथा ठोक लिया अपना अब ससुरालियों की टांग खिचाई करुँगी का कार्यक्रम बाद के लिए रख उन्हें समझाया , अच्छा खाने से माँ के दूध की क्वांटिटी मात्रा बढती है क्वॉलिटी नहीं ,सभी माँ के दूध एक जैसे होते है चाहे आप कुछ भी खाये |  उन्हें न मानना था और ना वो मानी लेकिन शाम की बैठकी में मैंने टांग खिचाई का कार्यक्रम शुरू किया पतिदेव से कहा भाभी ने सुबह मुझे भैंस कहा और खुद को गाय | सबके सामने ये सुन सकपका गये सारा किस्सा सुनते हुए कहा घुमा कर ही सही लेकिन उनके कहने का मतलब यही था कि मेरा दूध  भैंस की क्वॉलिटी है और उनका गाय का , मै भैंस हु और वो गाय |




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July 07, 2017

सतर्क रहना है आप को आखिर पैसा है आप का -------- mangopeople



                                       
                                                                      पांच साल पहले बैंक की सतर्कता देख दिल बाग़ गार्डन सब हो गया था | भाई की शादी के लिए हम शॉपिंग के लिए निकले , मौका विवाह का था तो बिल खूब लम्बे बन रहे थे | जैसे ही तीसरी बार जब पति ने डेबिड कार्ड स्वैप कराया तो बस आधे मिनट के अंदर ही उन्हें बैंक से फोन आ गया की आप के कार्ड से अचानक बहुत सारी शॉपिंग हो रही है , क्या कार्ड आप ही प्रयोग कर रहे है | पति ने उन्हें आश्वस्त किया की कार्ड वही प्रयोग कर रहे है और मैंने तुरंत उन्हें कहा की उसे बताये की शॉपिंग ख़ास मौके के लिए ही किया जा रहा है और अगली बार भी जब कभी हमारे कार्ड से ज्यादा शॉपिंग हो तो तुरंत हमें सूचना दी जाये उसे सामन्य न माना जाये | ये निर्देश जरुरी था कही अगली बार वो ये न समझे की हम तो इतना खर्च करते रहते है ये सामान्य बात है |

                      लेकिन सभी बैंक इतनी सतर्कता दिखाए ये जरुरी नहीं इसका बुरा उदहारण दो साल पहले देखने को मिला | जब बहनोई के अकाउंट से लाख रु से ऊपर की शॉपिंग हो गई रात को १२ बजे और उन्हें बैंक से मैसेज सुबह ९ बजे मिला | उनके होश उड़ गये तुरंत बैंक भागे और पता किया , क्या लिया गया है और कहा | पता चला फ्रॉड अमेरिका से किया गया है  ८५ हजार रु में एक हवाई जहाज का टिकट बुक किया गया है अमेरिका से यूरोप का बाकि के ३०-३५ हजार की शॉपिंग की गई है | बहनोई खुद टूर और ट्रेवलिंग में नौकरी करते है इसलिए बैंक से ही एयरलाइंस का नाम पता किया गया और पुलिस और सारे जरुरी कागजात ले उसके पास पहुँच गए | शुक्र था की टिकट उस दिन शाम की थी और उस पर यात्रा नहीं किया गया था सारे सबूत दे कर टिकट को कैंसिल कराया गया | वो ८५ हजार उन्हें मिल गये , किन्तु अपने प्रयास से और इस कारण की वो दिल्ली जैसी जगह पर थे और उन्हें पता था की क्या और कैसे  करना है | बाकि के पैसो के लिए उन्हें बैंक के खूब चक्कर लगाने पड़े जबकि उनकी मदद एक निजी बैंक के मैनेजर कर रहे थे | उस समय शायद २१ दिन में पैसे वापस आने के रिजर्व बैंक के निर्देश थे जिसकी कोई कीमत नहीं थी | उन्होंने शिकायत की ये एकाउंट उनका निजी है , जिससे कभी भी उन्होंने इतना ज्यादा पैसा एक साथ खर्च नहीं किया है साथ ही  डॉलर और विदेश में पेमेंट तो कभी भी नहीं किया है बैंक ने कैसे पैसे को रिलीज किया और तो और उन्हें समय से एसएमएस भी नहीं किया गया | उनका बैंक सरकारी था और मेरे पति का निजी |

                                      इस तरह के फ्रॉड में ज्यादातर पहले एक दो डॉलर की रकम खर्च कर चेक किया जाता है , ये बहनोई के साथ भी हुआ था लेकिन उन्हें मैसेज ही नहीं आया | उन्होंने और मेरी बहन ने भी बताया उनके ऑफिस में इसके बारे में सभी को पता होता है |  ऑफिस के बिजनेस कार्ड से ऐसा करने के कई प्रयास हुए है बैंक को निर्देश है की वो इतने कम रकम की कोई भी पेमेंट न करे और उन कार्ड से पेमेंट सिर्फ भारत से ही होंगे विदेश से बिलकुल नहीं | विदेश में बैठे ऐसे फ्रॉड लोगो का कभी कुछ नहीं होता , भारत के साइबर सेल वाले कुछ भी नहीं करते और रिजर्व बैंक के बैंको को दिए निर्देश की १० दिनों में पैसे वापस कीजिये इसकी भी कोई कीमत नहीं होती | पैसा आप का है  और सतर्कता भी आप की ही दिखानी होगी | बैंक वाले आप को सही समय पर एक सूचना भेज दे आप तो बस उसी की कामना कीजिये |




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July 01, 2017

ब्लॉग पोस्ट हिट बनाने के बेजोड़ नुस्खे ----------- mangopeople



                                                               क्या आप अपने हिन्दी ब्लॉग दिवस वाले पोस्ट को हिट बनाना चाहते है , क्या आप चाहते है की ज्यादा से ज्यादा पाठक आप की पोस्ट पर आये , ढेरो टिप्पणियां से मन गार्डन गार्डन हो जाये , फॉलोअर की संख्या रातोरात बढ़ जाये | तो आप निराश न हो , ब्लॉग से आस न छोड़े , हमारे पास आये ,  हम आप को आदिकाल से चला रहा वो नुस्खा बताएँगे जो आप की सभी मनोकामनाये पूर्ण करेगा |  कही और न जाये उसके लिए आप को सबसे काम का नुस्खा यही मिलेगा | " ब्लॉग से पैसे कैसे बनाये " " अश्लील चुटकुले पढ़ना चाहते है तो यहाँ आये " " ब्लॉग जगत के तो बड़े नामी ब्लॉगर मठाधीशो की पोल खुली " " हिंदी ब्लॉग जगत का सबसे बड़ा ब्लॉगर कौन " " इन नारीवादियों से भगवान बचाये " ये वो चुम्बकीय शब्द शीर्षक है जिससे हर बड़ा छोटा ब्लॉगर आप के पोस्ट तक खींचा चला आता है | इन शब्दों में इतना चुम्बक है कि हर ब्लॉगर आयरन मैन और लेडी बन इसके आकर्षण में आ ही जाता है |  पाठक की संख्या बढ़ाना है तो शीर्षक ही काफी है | पूरी पोस्ट लिखने के लिए ज्यादा दिमाग और मेहनत की आवश्यकता नहीं है शीर्षक दे  " ब्लॉग से पैसे कैसे बनाये " और फिर चुपचाप पैसे की ताकत देखिये | जीतनी ताकत पैसे में है उतनी ही ताकत घर बैठे आराम से पैसे कैसे कमाये " जैसे शब्दों में भी है | लोग धड़ाधड़ आप के ब्लॉग का ट्रैफिक जाम कर देंगे |  चाहे तो पोस्ट में  बस ये लिखे भाइयो और बहनो मै तो पूछ रहा था की पैसे कैसे बनाये , किसी के पास तरीका हो तो यहाँ दे जाये ;) |

                                                        दूसरा तकरवार शब्द है " सेक्स " और " अश्लीलता " जिन शब्दों के आगे पीछे जुड़ जाये उन शब्दों को भी मोहनी बना दे और पाठक मोहपाश में बंधा धड़ाम से आप के ब्लॉग पर आ कर गिरेगा | शीर्षक दीजिये "अश्लील चुटकुले पढ़ना चाहते है तो यहाँ आये " पोस्ट में भी कुछ लिखने की जरुरत नहीं है बस लिख दीजिये शीर्षक में ही आप ने अश्लील चुटकुले पढ़ लिया तो अब निचे क्या खोज रहे है ;) |  बस समस्या ये है कि आएंगे सब लेकिन टिप्पणी देने से सब बच के सब छुप छुप निकल जायेंगे , जैसे कि वो आये ही नहीं | सबको पता है यहाँ टिप्पणी करना खतरनाक है , टिप्पणी दी तो फंस जायेंगे नाहक ब्लॉग जगत में बदनाम हो जायेंगे | चुटकुला तो मिला नहीं लोगो के सवालिया नजरो से और खिंचाई में फंस जायेंगे | ब्लॉग पर आने वाले तो बढ़ जायेंगे लेकिन आप की ये खुराफात टिप्पणी नहीं पा पायेगी , पर कितने लोग ब्लॉग पर ईमानदार है ये पता चल जायेगा |


                                                                एक बात अच्छे से समझ लीजिये दुनिया में कितना भी मोदी और ट्रंप का डंका बज जाए , चाहे कितना भी गाय , सूअर पर विवाद हो जाए , राष्ट्रवादी - वामपंथी खुद को एक दूसरे से ज्यादा बड़ा बताये , पूरी दुनिया में कोई भी विषय हिट हो | लेकिन जब बात ब्लॉग जगत में सबसे हिट फार्मूला की होगी तो ब्लॉग जगत में खुद ब्लॉग जगत के लोगो से जुड़े विवादों , उनके बीच के होड़, पुरस्कारों , मठाधीशी आदि पर लिखी गई पोस्टो का मुकाबला कोई नहीं कर सकता | बस आप ब्लॉग जगत के किसी तथाकथित बड़े , हिट , नामी , विवादित आदि आदि ब्लॉगर का नाम लेकर कोई विवादित पोस्ट लिखा दे | दो ब्लोगरो के बीच कौन बड़ा लेखक है लिख दे , किसी को मठाधीस कहके दो चार खरी खरी सुना दे , किसी के बीच हुए विवाद पर थोड़ा मसाला छिड़क कर लिख दे , किसी पुरस्कार की घोषणा कर दे , या पहले से दिए पुरस्कार की समीक्षा कर दे | ये सारे विषय ऐसे है जिस से ब्लॉग के लोग खुद से बड़ा जुड़ा मानते है , अरे ये तो हमारी बात है , ये तो घर की बात है करके सब के सब इसमें दिलचस्पी लेने लगते है | और विषय कोई विवाद हो तो तो पूछो ही मत उनकी सक्रियता चरम पर पहुँच जाती है | आप ने एक ब्लॉगर को दूसरे से बड़ा कहा दुसरा खुद अपना लावा लश्कर ले आप की पोस्ट पर चढ़ाई कर देगा और पहला बचाव में | दोनों तरफ के समर्थक आप की पोस्ट पर भिड़ पड़ेंगे , जितना अपने को अच्छा कहेंगे उससे ज्यादा दूसरे  बुराई बता जायेंगे , फिर समर्थको के भी समर्थक आएंगे और अपने गुरु का साथ  निभाएंगे | बस अँधा क्या चाहे दो आंखे ब्लॉगर क्या चाहे एक विवादित पोस्ट पर कुछ सौ टिप्पणियां और पुरे ब्लॉग जगत में  उसकी चर्चा |

       
                                               इसके आलावा नारिवादिया भी पाठक खींचू विषय है | खुद नारीवादी नारीवादी पोस्टो पर जितने पाठक नहीं ला पाती उन्हें भला बुरा कहने वाले उससे ज्यादा पाठक पा जाते है | घर में पत्नी की खुन्नस यहाँ निकालते है , पत्नी के तानो का जवाब नहीं दे पाते वो यहाँ अपनी भड़ास निकालते है | पत्नी आगे तो मुंह नहीं खोल सकते यहाँ चिंघाड कर अपनी मर्दानगी दिखाते है |  पुरुष हो कर नारीवाद पर पोस्ट भी एक हिट फार्मूला है | राष्ट्रवादी लोग स्त्री को बहन बेटी माँ कह कर पोस्ट लिख सकते है वामपंथी फेमिनिज्म पर कुछ भी लिख दे दक्षिणपन्थियो को दो चार गाली देते हिट है | पति और पत्नी पर लिखे पति और पत्नी पीड़ित के पोस्ट भी हिट है |

तो सभी ब्लॉगर इन फार्मूलों को याद रखे और एक बार आजमा कर जरूर देखे |

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June 06, 2017

भारत से पहला अंतरिक्ष यात्री कौन ------mangopeople

                             




                                                          भारत अंतरिक्ष विज्ञानं में रोज नई ऊँचाइयाँ छू रहा है | अब सुना है जल्द ही भारत अपने ही जमीन से अपने ही रॉकेट से अपना पहला यात्री अंतरिक्ष में भेजने वाला है | स्पेस सूट तैयार है बस सरकार की तरफ से कुछ हजार करोड़ का आवंटन होना है और एक बार फिर हम पूछ सकेंगे की अंतरिक्ष से गाय , माफ़ कीजियेगा मतलब भारत कैसा दिख रहा है | सोचिये की जब हजार करोड़ रुपये सरकार दे रही है तो अंतरिक्ष यात्री भी कोई ख़ास और सरकार का प्रतिनिधि हो तो क्या बुराई है | मै तो कहती हूँ  प्रतिनिधि क्या खुद सरकार मोदी ही हो तो क्या बुराई है | वैसे भी जो काम उन्हें ५ सालो में करना था वो उन्होंने मात्र ३ सालो में ही दुनिया की गोलाई नाप कर पूरा कर दिया है , बाकि के दो साल अब क्या करेंगे |  अच्छा हो अगले दो सालो में अंतरिक्ष और ग्रहो की नपाई का लक्ष्य रख लिया जाये | इससे साफ साफ दूनिया को सरकार द्वारा हो रहा विकास भी दिखेगा | कहा वो पिछले तीन सालो में हवाई जहाज से बस दुनिया नाप रहे थे और कहा अब रॉकेट से अंतरिक्ष घूम रहे है | रातो रात विकास न केवल पैदा जायेगा उसकी बढ़त भी अंतरिक्ष तक हो जायेगी | हर अत्तवार ( रविवार , ईतवार ) उनके मन की हमने खूब सुनी | वहा ऊपर अंतरिक्ष से बोलेंगे तो सारी दुनिया सुनेगी ( सुनना पड़ेगा ) | क्या पता उनमे मन की फ्रीकवेंसी किसी अंतरिक्षवाले के मन  फ्रीकवेंसी से मेल खा जाये और पहले एलियन या किसी ग्रह पर जीवन की खोज का महा उपलब्धि हमारे हाथ लग जाये | सोचिये कितना सुन्दर दृश्य होगा प्राइम टाइम पर दुनिया के हर चैनल पर लाइव आ रहा होगा , एलियनों की भारी भीड़ में दिया जा रहा उनका भाषण और मोदी मोदी के नारो से गुंजयमान हो रहा पूरा अंतरिक्ष |  आह कितना मनोरम दृश्य मै तो कल्पना मात्र से ही रोमांचित हो रही हूँ |

                                 पर अपने ही देश में मोदी के विरोधी बहुत है इसलिए हो सकता है उनका विरोध हो तो हम देश के युवराज राहुल गाँधी को भी वहा भेज सकते है | वैसे भी वो आज कल गीता उपनिषद आदि पढ़ रहे है  और किताबे पढ़ने के लिए शांति अंतरिक्ष से अच्छी और कही नहीं मिलेगी | हो सकता है ऊपर उनको वो ऊपरवाला भी मिल जाये | सारे भगवानो की तरह गीता का उपदेश देने वाले कृष्ण भी उनको वहा मिल जाये | जो उन्हें ज्ञान दे की वत्स मैंने गीता का उपदेश दुश्मनो से लड़ने के लिए नहीं अपनो से लड़ने में मनुष्य कमजोर न हो जाये तो उसके लिए दिया था | वत्स तुम किताब तो सही पढ़ रहे हो लेकिन रीजन गलत दे रहे हो | पहले तुम्हे कांग्रेस में अपने दुश्मनो से लड़ना होगा उन पर विजय पानी होगी उसके बाद बाहर के दुश्मनो का नंबर आयेगा | तो वत्स पढ़ते रहो अपने आस पास के कौरवो का नाश करो , डरो मत कि वो तुम्हारे अपने है | उनमे से बहुतो ने तुम्हे बड़ा बनाने में सहयोग किया है , लेकिन वत्स उनके पीछे उनका अपना स्वार्थ था , तुम तो बस कर्म करो फल की चिंता तुमको करने की जरुरत नहीं है | कुछ गलत हुआ तो बहुत से कांग्रेसी अपने सर पर लेने के लिए सदा तैयार रहेंगे , सो चिंता न करो |  हो सकता है इतना ज्ञान पाने के बाद समझ आये की वो भले पृथ्वी पर आलू की फैक्ट्री नहीं लगा सके किन्तु अंतरिक्ष में उपग्रहों की खेती आसानी से कर सकते है |


                                       वैसे आजकल फैशन निष्पक्ष होने का है जिसे देखो वही निष्पक्ष हुआ जा रहा है |  इसलिए अंतरिक्ष में भी पक्ष और विपक्ष की जगह किसी निष्पक्ष को भी भेजा जा सकता है और वर्तमान समय में केजरीवाल से ज्यादा निष्पक्ष और कोई हो ही नहीं सकता | तो भारत की तरफ से पहले अंतरिक्ष यात्री होने का सौभाग्य उन्हें भी दिया जा सकता है ,बस वो तैयार हो जाये |  हो सकता है वो कहे की रॉकेट से छेड़ छाड़ की गई है , मोदी उन्हें अंतरिक्ष में भेजने की चाल चल रहे है | हो सकता हो वो कहे कि तुम्हारा ये स्वदेशी मोदी इंजन नहीं चलेगा , हम इसमें अपना  सौरभवाला इंजन लगायेंगे | कल हुए सफल प्रक्षेपण को भी हो सकता है नकार दे  बोले सब मिले हुए है इसरो भी चुनाव आयोग की तरह मोदी से मिला हुआ है | ये सब उन्हें जान से मारने की चाल है | हम अंतरिक्ष में तो जायेंगे लेकिन अपने रॉकेट से ,  सौरभ ले आओ अपना दिवाली  रॉकेट और मान जा ले आ  तेरी खाली की गई बोतले किस दिन काम आयेगी | अब हम बताएँगे इसरो को कि कम पैसे और कम समय में  किसी रॉकेट से अंतरिक्ष में किसी को कैसे भेजा जाता है | वहा जायेंगे और सारे उपग्रहों के मदरबोर्ड बदल डालेंगे फिर सब पर हम नजर रखेंगे | 

April 22, 2017

जो सरकारी डॉक्टर प्राइवेट न बैठे तो -------mangopeople



          जो सरकारी डॉक्टर प्राइवेट न बैठे तो किसी छोटे कस्बे में किसी मरीज का क्या हाल हो सकता है , इससे जुड़ा अपना अनुभव बता रही हूँ |  मेरी बेटी ९ महीने की थी जनवरी का पहला सप्ताह था मै अपने ससुराल में थी , जगह गांव नहीं छोटा शहर था |  बिटिया के लिए पहली ठंडक थी और उसके लिए अचानक से मौसम में आया बदलाव भी था | नतीजा ६ दिन बाद उसकी तबियत ख़राब हो गई अब पूछा गया की किस डॉक्टर को दिखाया जाये |  यहाँ के सरकारी में तो नहीं जाउंगी , पता चला वहा जा कर वो कई दूसरी बीमारियों का संक्रमण ले कर आ जाएगी और निजी में मुझे पूरी आशंका थी की यहाँ ज्यादातर झोलाछाप डॉक्टर मिलेंगे | ननद ने अपने बेटी के डॉक्टर का नाम पता दिया जब पूछा की क्या एमबीबीएस है  तो जवाब था पता नहीं  | फिर जिठानी ने अपने बच्ची के डॉक्टर का पता देने के लिए डॉक्टर का पर्चा दिया उसको देख कर तो मेरे होश ही उड़ गये | वो एक दवा की दुकान का लेटर हेड था जिसमे डॉक्टर का नाम पता भी नहीं था |

                                                      पतिदेव बोले  चलो एक बार दिखा देते है , मैंने साफ इंकार कर दिया एक इतनी छोटी से बच्ची के लिए एक ही गलत टेबलेट बहुत होता है ,ऐसे डॉक्टर को कैसे दिखा दू जिसके पर्ची पर उसका नाम तक नहीं है|  अंत में मैंने कहा चलो ननद वाले डाक्टर के पास जाते है शायद इन्होने ने न देखा हो वो हो ढंग का डॉक्टर | वह जा कर पता चला उनके कम्पाउंडर तक को नहीं पता की डॉक्टर साहब ने कौन सी डिग्री ली पड़ी है | मेरी हालत ख़राब हो गई अब क्या करेंगे तभी जेठ जी का फोन आया की वही पास में ही सरकारी अस्पताल का पुराना डॉक्टर निजी प्रेक्टिस कर रहा है पिछले साल ही उसका ट्रांसफर हुआ है दसियो साल से बाहर अस्पताल बना कर चला रहे है , तो हफ्ते में तीन दिन अब भी आते है | वहां की भारी भीड़ देख मेरी हालत ख़राब हो गई,  लो यहाँ का नजारा तो बिलकुल सरकारी अस्पताल वाला है तभी पड़ोस के लडके मिल गये , क्या हुआ भैया से शुरू हुए और ये तो एमरजेंसी केस है कर के सीधा डॉक्टर के पास ले गये |  डॉक्टर साहब रिटायरमेंट की आयु में लगभग आ गए थे और कमाल के थे झट बिटिया के सर पर हाथ रखा और बता दिया हां बुखार तो है, मैंने कहा कम  से कम थर्मामीटर तो लगा लीजिये , मैंने चेक कर लिया १०१ डॉ साहब ने जवाब दिया और मुंबई से आये है सुन  पर्ची लिख दी , मै समझ गया इसे यहाँ का मौसम सूट नहीं किया है यहाँ मच्छर भी है | इतनी भीड़ में उन्हें और व्यस्त रखना मुझे भी अच्छा नहीं लगा | बाहर आ गई और अपने डॉक्टर को मुंबई फोन किया पूरी हालत बताई और दवा का नाम भी यहाँ पर पति के कॉलेज टाईम में किया एमआरगिरी काम आया , उन्होंने कहा ठीक है दवा दे दो , इतनी दूर से बच्चे ही हालत देखे बिना और  कह नहीं पाऊँगी |
   
                                                         लेकिन दूसरे दिन तो बिटिया उलटी भी करना शुरू कर दी डॉक्टर का वो दिन था नहीं कि मिले सब घर में शुरू हो गये इसे अस्पताल में भर्ती करना होगा | मैंने पति से कहा गाडी  मंगाइये हम अभी बनारस जा रहे है  मेरी बेटी की तबियत सच में बहुत ख़राब हो रही है | वापस से अपने  डॉक्टर को फोन किया उन्होंने तुरंत पूछा मलेरिया की दवा में हनी मिला कर पिलाया था की नहीं वो बहुत कड़वी होती है | मैंने कहा मलेरिया लेकिन इसका मलेरिया का चेकअप तो हुआ ही नहीं , वो भी आश्चर्य में बिना चेकअप के डाक्टर ने मलेरिया की दवा कैसे  दे दी , उन्हें लगा की चेकअप में के बाद दवा दी गई है और उन्होंने वो दवा बंद कराई और बाकि चालू रखने को कहा | शाम को पता चला बिना नाम वाली पर्ची भी असल में वर्तमान सरकारी बच्चो के डॉक्टर की है जो निजी प्रेक्टिस कर रहा है इसलिए अपना नाम नहीं दे सकता | फिर उसे जा कर दिखाया वो थोड़ा यंग था लगा ये आज कल का पढ़ा होगा ढंग से देखेगा ना की वो बाबा आदम के ज़माने के पढ़े हुए सरकारी डॉक्टर की तरह जो सब को एक ही भेड  बकरी की तरह देख रहा था | और वास्तव में उसने अच्छे से बच्ची को चेक किया उसका वजन भी किया , (बिना वजन किये बच्चो को दवा नहीं देते वजन के हिसाब से दवा की मात्रा दी जाती है ) दवाये बदली टेबलेट की जगह बच्चो के सिरप लिखे | बिटिया अगले दिन सुबह तक ठीक ठाक थी | ये हालत एक छोटे शहर की थी किसी गांव की क्या हालत होती होगी जहा सरकरी डॉक्टर भी नहीं मिलता | उस तरफ पहले ध्यान दीजिये योगी जी प्राइवेट प्रेक्टिस बाद में बंद करवाइयेगा , सरकारी अस्पताल के बंद होने के बाद मरीज कहा जाये , थोड़े से पैसे के लालच में ही सही लोगो का कुछ तो इलाज हो रहा है |  





    

March 21, 2017

एक यात्रा वृतांत ऐसा भी ------mangopeople


                                                         क्या आप जानते है केवल घुप और पानी से आप अपने बढे वजन को भी नियंत्रित कर सकती है और वो भी खूब खा पी के मौज उड़ाते हुए । इस वजन घटाओ कार्यक्रम का नाम है घुमक्कड़ी , देश में कही भी घूम फिर कर । सबसे पहले वजन घटाने के लिए मन का खुश होना जरुरी है , इसलिए किसी अच्छी सुन्दर जगह का चुनाव करे जहा आप को अच्छी धुप और पानी प्रसन्न रखे , गोवा उनमे सबसे उत्तम है । सुबह सुबह ही समंदर के किनारे पहुँच जाये नाश्ता करते ही पानी की लहरो में कूद जाये ढेर सारे वॉटर स्पोर्ट का आनंद ले, जम कर वही लंच करे फिर पानी से अपने शैतान बच्चो को निकालने की मस्कत में दो और घंटे पानी में पड़े रहे । दोपहर बिताने पर होटल पर पहुंचे और फिर स्विमिंग पुल में कूद जाये एक घंटे वहां मस्ती करे और फिर आधे घंटे बच्चो को वहा से निकालने का उपक्रम करते छोटे पूल और बड़े पूल के बीच दौड़ते रहे । फिर आधे घंटे और सॉवर ले और थक कर सो जाए दो घंटे बाद सज धज बीच पर पहुँच जाये और डीजे सीजे पर बीच पार्टी में घंटो नाचते रहे जब तक घुटने खड़े रखने से इंकार न कर दे । किसी बोरिंग गाने पर जैसे ही आप थक कर बैठेंगे अगला गाना आप का फेवरेट वाला बजेगा और बिन दाए बाये देखे फिर शुरू हो जाये फिर जम कर डिनर करे पास्ता, पिज्जा, भारतीय या कॉन्टिनेंटल जो चाहे खाये  , इस वजन घटाओ कार्यक्रम का यही तो फायदा है खाने पर कोई रोक टोक नहीं है।


                                                         यही धुप और पानी का कार्यक्रम अगले चार दिन करे कभी स्कूबा डाइविंग के नाम पर, कभी गहरे समंदर में लाइफ जैकेट पहन कर तैरने के नाम कर , कभी अलग अलग बीच की सुंदरता के नाम पर कभी रेत में महल बनाने के नाम पर, तो कभी रेत में गले तक किसी अपने को गाड़ देने के नाम पर । पांचवे दिन आप को लगे की इससे ज्यादा भींगे तो अंकुरित हो जायेंगे अब , तो पांचवे दिन पानी को छोड़ दे और घुप का मजा ले । साथ आये लोगो की मांग पर किसी तथाकथित फोर्ट को देखने चले जाये । उसकी मुश्किल सी चढ़ाई और बन रहे रास्तो पर खीजते हुए जब वहा पहुंचे और फोर्ट के नाम पर खालिस पत्थर की दीवारों को देख साथ आये लोग गुस्से में उसे फोर्ट कहने वाले को भलाबुरा कहे तो वहां  लिखी सूचना को दर किनारा कर अपना ऐतिहासिक ज्ञान बघारे कि ये पुर्तगाली राजस्थान से गुजर रहे थे बाहर से एक किला देखा अच्छा लगा लेकिन अंदर जाने को नहीं मिला तो उन्हें लगा पत्थर की दीवारे ही फोर्ट होती है और अक्लमंदों ने उसे ही बना कर फोर्ट घोषित कर दिया । वहाँ से निकले तो पास ही सुन्दर सा शानदार सा बंगला दिखे तो रुक जाये उसे अपना समझे क्योकि मालिक बैंक से आप के ही पैसे ले कर फरार है । बंगले में आप की भी हिस्सेदारी निकलेगी , अपने बंगले के आगे खड़े हो कर दो चार फोटो जरूर खिंचवाए , एक आधा दर दरवाजे के आप भी मालिक निकलेंगे । दूसरे फोर्ट में जा कर भी आप धोखा ही खायेंगे।  फोर्ट के नाम पर लाईट हाऊस देख आयेंगे ।
                                                         गोवा में पानी रेत साथ आप खुली सड़क पर बिना किसी ट्रैफिक  टेंशन के गाड़ी चलाने और लाँग ड्राइव का भी मजा ले सकते है । वहाँ की जो प्राकृतिक सुंदरता है उसके सही से मज़ा लेने के लिए आप चार की जगह दो पहिये का ही प्रयोग करे और कोई भी अरमान हो उन्हें छोड़े नहीं । यदि आप टुच्ची से स्कूटी पर जा रहे हो और आप को अपने पसंद की हार्ली डविंशन न मिली हो चला के फोटो खीचाने के लिए और तभी सामने से शानदार बाइक गैंग निकले जिसमे १५-२० शानदार बाइक्स हो तो मेरी तरह न शरमाये और न बाद में पछताये उन्हें रोक कर उन्ही की बाइक चला कर अपनी तमन्नाये पूरी करे फोटो शोटो खिचाये और ऍफ़ बी पर लगा के भाव खाये ।


चेतावनी :- १- किसी फिल्म में किसी फोर्ट को सुंदर दिखने पर मुंह उठाये न चले आये फिल्मो में धोबी घाट भी अच्छा दिखता है ।
२ - टैनिंग की चिंता से मुक्त हो और ५ दिन बाद चितकबरे दिखने से परहेज न हो तो आराम से गोवा के माहौल के अनुसार छोटे कपडे पहने । 
३ - यदि आप के साथ कोमलांगनिया भी तो तो उन्हें बुरकिनी पहनाये , वरना बेचारे पांचवे दिन सन बर्न से परेशान होंगे और कुछ दिन बाद केचुलिया छोड़ने लगेंगे ।
 ४- किसी भी आम भारतीय धुप से बचाव वाले क्रीम के भरोसे न रहे । 
५- छठे दिन वजन की मशीन पर चढ़ते हुए कपड़ो में भरे ३ - ४ किलो रेत को निकाल कर वजन करे और सिर्फ ५ दिन में ३ किलो कम वजन को देख कुछ महीनो से दौड़ने , टहलने , कसरत और कम खाने वाली तकनीक को जम कर गरियाए और जल्द ही एक बार फिर गोवा आने का वादा करे । 

February 13, 2017

समझदार ढक्कन का वेल एंड टाईन डे ------mangopeople




                                       शादी के बाद पहला वेल एंड टाईन दिन आने वाला था । इस दिन के बारे में जानकारी तो शादी के दो साल पहले हो गई थी | लगा कुछ दिया नहीं तो पतिदेव क्या सोचेंगे सगाई के बाद भी पड़ा था तो मुझे गिफ्ट कुरियर किया था मुझे भी कुछ करना चाहिए । पर तब तक शहर के बारे में ज्यादा पता नहीं था और नेट का ज़माना नहीं था । पहले निचे फूल वाले के पास गई और उससे कहा सुबह एक गुलदस्ता दे दोगे उसने साफ इनकार कर दिया महंगा वाला बोल दिया , भेजने का और पैसे दे दूंगी बोल दिया फिर भी नहीं माना । घर ले के नहीं जा सकती थी उस समय रेंट पर छोटे से घर में रहते थे और घर में सिर्फ जरुरत की चीजे ही होती थी छुपाने के लिए कोई जगह ही नहीं थी । मन मसोस कर एक चॉकलेट खरीद चले आये । 


                                      सुबह उठ कर बाहर निकली तो देखा पड़ोसन के गमले में सुर्ख लाल गुलाब हवा में डोल रहा था , मुस्कुरा कर उसे तोड़ने की इजाजत मांगी , बड़ी समझदार थी तुरंत बोला हा हा ले जाओ । चलो एक फ्री का गुलाब और चॉकलेट का इंतजाम हो गया । पतिदेव फ्रेस हो कर सीधा किचन में आये रोज की तरह हमने भी गुलाब और चॉकलेट दे विश कर दिया और साथ में फूल वाले ने गुलदस्ता नहीं भेजा इसका दुखड़ा भी रो दिया । कही पति ये न समझे की बड़ी कंजूस बीबी है इत्ते में ही काम चला लिया । जबकि ये सब देख सुन उनके चेहरे की हवाइयां कुछ उडी लगी । हम भी समझदार थे झट समझ लिया बेचारे मेरे लिए कुछ नहीं लाये सो परेशान है । विवाह नया नया हो और हनीमून पीरियड चालू हो तो दोनों को एक दूसरे की परेशानी अपनी लगती है और प्रयास एक दूसरे को कंफर्टेबल करने की होती है । सो हमने भी एक बार भी जिक्र नहीं किया तुम क्या लाये एक दम सामान्य रही । नास्ते के बाद बॉस का फोन आ गया मीटिंग में कब आ रहे हो तो बोल दिया सर इधर रोड पर कुछ हो गया है रोड ब्लॉक कर दिया है आने जाने का मुझे आने में थोड़ा देर होगा सर और हम पीछे खड़े मुस्कुरा रहे है ये क्या है । ओह ! शायद दिन भुलने और कुछ नहीं लाने की गलती को ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है और मेरे साथ कुछ और समय गुजारने के लिए बहाने मारे जा रहे है , हमने भी कहा चलो बढ़िया है । 


                                      लेकिन वो बतिया मुझसे रहे थे पर नज़रे घडी पर बार बार जा रह थी , हमने भी उनकी चिंता दूर की कोई बात नहीं ऑफिस जाओ शाम के कही चलेंगे । वो तैयार होने लगे तभी दरवाजे की घंटी बजी और मैं सोचने लगी इत्ती सुबह कौन आया है । दरवाजा खोलते ही खुश हो गई , सामने बंदा फूलो का गुलदस्ता लिए खड़ा था । मन ही मन सोचा अरे वाह फूल वाले ने आखिर फूल भेज ही दिए , लेकिन गड़बड़ हो गई ना पति को दरवाजा खोलना था , अब मुझे ही जा कर देना होगा । उसके जाने के बाद जैसे ही दरवाजा बंद किया तो फिर अफसोस हुआ अरे उसे तो मैंने कोई टिप ही नहीं दिया , फिर तुरंत ही दूसरा ख्याल आया अरे मैंने तो उसे कल गुलदस्ते के भी पैसे नहीं दिए थे , और फिर तुरंत ही ये ख्याल आया एक मिनट मैंने तो उसे अपने घर का पता भी नहीं दिया था । तब जा कर ढक्कन दिमाग की बत्ती जली ओह ये तो टू मी फ्रॉम वो है :) और तभी वो धीरे से बैडरूम से झाँक कर बोले कौन था , मेरे हाथ में गुलदस्ता देख मुस्करा के बाहर आये और मैं स्वीट हार्ट, जानेमन , जानू , थैंक्यू जैसा कुछ नहीं कहा सीधा नाक फुला कर कहा ये फूल वाला कितना दुष्ट है मेरी नहीं सुनी उसने अभी निचे जाउंगी तो उसे चार सुनाती हूँ ।


                                    वो भी शुरू हो गये शांत रहो दो मिनट अच्छे से साँस लेने दो, जान हलक में अटकी थी कब से, अब जा कर शांति मिली । फिर बताया मैंने फूल के लिए कल ही बोल दिया था लेकिन देर से देने के लिए बोला था ताकि मेरे जाने के बाद तुम्हे मिले जब तुमने सुबह अपना किस्सा सुनाया तभी लगा फस गया मैं तो , अब अगर मैं घर से बाहर गया और गुलदस्ता बाद में आया तो तुम जिंदगी में कभी नहीं मानोगी की मुझे याद था और मैंने पहले ही फूलो के लिए बोला था । तुम्हे लगता तुम्हारी बात सुन कर मैंने फूल भेजे , इसलिए ऑफिस के लिए नहीं निकल रहा था सोच लिया था फूल आ जायेंगे तो ही निकलूंगा घर से । प्यार व्यार का पता नहीं पर इस पर हम दोनों हंसे बहुत देर तक थे ।

February 06, 2017

शर्मा जी बहुत शरीफ है -------mangopeople




                                                                शर्मा जी बहुत शरीफ , नेक इंसान है , पूरा मोहल्ला उनकी शराफत और नेकी का गवाही देगा । बस एक दाग था की उनके साथ उठने बैठने वालो में कुछ लंपट बुढऊ थे और कुछ मोहल्ले के जवान आवारा लौंडे । एक दिन शर्मा जी की जोशी जी से कहा सुनी हो गई शर्मा जी बहुत नाराज हो गये मन ही मन सोचा की इनकी तो हम एक दिन इज्जत उतारेंगे , कही मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहेंगे , वो भी बिना अपनी शराफत छोड़े । शर्मा जी ने एक शाम अपने घर बैठकी की उठने बैठने वाले लगभग सभी आये । शर्मा जी ने बात छेड़ी " जमाना बड़ा ख़राब हो गया है " सब ने हां में हां मिलाई और ज़माने को ख़राब होने पर लानत भेजी । बात और आगे बढ़ाते एक और लाइन जोड़ी "लड़कियों के लिए समाज सुरक्षित नहीं रहा " ज्यादातर ने उनकी हां में फिर हां मिलाई , और कुछ लड़कियों को समझाईश देने लगे तो कुछ युवाओ को ।
     
                                                               अब शर्मा जी उस तरफ मुड़ गये जिस तरफ लड़कियों को ही संभलने की सलाह दी जा रही थी । आवाज थोड़ी और तीखी की और अफसोस करते हुए कहा " आज कल की लडकिया भी कम नहीं है , उनका चरित्तर भी ख़राब हुआ है ।" जिन जिन की बेटिया थी सब ने काम का बहाना बना सबको राम राम कर चल देने में भलाई समझी । बाकी कईयो ने जोर का उनके हां में हां मिलाई और लड़कियों के ख़राब चरित्र के किस्से सुनाये । माहौल गर्म हो गया था कुछ और महफ़िल से चलते बने जो शर्मा जी से कम शरीफ थे समाज में । अब पूरी मंडली वही बची थी जिसकी चाहत शर्मा जी को थी अब वो खुल कर बाहर आये । " जोशी जी की लड़की की क्या उमर होगी १४-१५ साल की " , बीच में एक लौंडे ने टोका "अरे नहीं १६ साल से एक दिन कम न होगी १० वि में है फलाने स्कूल में , बड़ी सुन्दर है " शरीफो की छट चुकी भीड़ को उसने भी भाप लिया था । दूसरा और खुल कर सामने आया "चचा  फलाने कोचिंग में पढ़ती है उतना दूर जाती है साईकिल से आते आते रोज राती को ८ बजे घर पहुचती है।"  मोहल्ले की लड़कियों की रक्षा के लिए उनके हर आने जाने की खबर रखने वालो में से एक और ने बोला "बीच में वो फलाने सड़क से भी गुजरती है , कितना सन्नाटा रहता है वहा देखा है ।"

                                                               अब तक शरीफ शर्मा जी माहौल अच्छे से समझ चुके थे और लौंडे क्या है वो भी भांप चुके थे । शर्मा जी शुरू हुए " क्या बात कर रहा है वो सड़क वो तो बड़ी खतरनाक है लड़कियों के लिए , उस सड़क पर तो कितने कांड हुए है लेकिन आज तक कोई नहीं पकड़ा गया , लाइट उसपे एक दम कम रहती है किसी का चेहरा भी नजर नहीं आता , इसलिए कभी कोई बता ही नहीं सका की कौन और कितने लोग थे । आदमी जो चाहे कर ले , झाड़िया देखि है कितनी बड़ी है । कितनी बार तो लडकिया कुछ कहती ही नहीं है , अब सोचो कौन सी शरीफ घर की लड़की ज़माने को आ कर बतायेगी की उसके साथ क्या क्या हुआ । सब चुपा जाती है , और करने वालो का कुछ नहीं होता । बताओ जोशी जी की लड़की उस रास्ते से आती है । कल तो शनिच्चर है ना कल तो सड़क के बाहर भी सन्नाटा ही रहता है ।" महफ़िल ख़त्म हुई ।

                                                           शनिच्चर रात देर हो गई जोशी जी की लड़की घर नहीं पहुंची जोशी जी चिंता कर रहे थे तभी थाने का हवलदार जोशी जी के घर आया । शर्मा जी की आँखे वही गड़ी थी पुलिस देखते लप्प से जोशी जी के यहाँ दौड़े ।
 " क्या हुआ जोशी जी , पुलिस काहे आई है " जोशी जी के होश उड़ गये थे उनकी पत्नी रोना शुरू कर दी थी ।
 " क्या हुआ भाई बताओगे "
" अरे शर्मा जी बिटिया के साथ कोनो कुछ किये है ई हवलदार अस्पताल बुलाने आया है "
" का कह रहे है हिम्मत रखे चलिये आप के साथ हम भी अस्पताल चलते है "
तब तक मोहल्ला जोशी जी के घर के बाहर इकठ्ठा हो गया था । मोहल्ले वाले को देख शर्मा जी और जोश में आ गये ऊँची आवाज में पूछा ।
" का हुआ है हवलदार बताओ का हुआ , कोई क्या किया है जोशी जी की लड़की के साथ । तुमको मालुम है लड़की घर की इज्जत होती है लड़की को कुछ हुआ तो परिवार कही मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहता । बताइये जोशी जी पर क्या बीतेगी । "
ये सब सुन मोहल्ले में और हलचल मच गई और खुसुर फुसुर शुरू हो गई ।
" देखिये शांति बनाये रखिये क्या हुआ है हमको नहीं पता हमको तो बस अस्पताल से दरोगा जी भेजे है जोशी जी को अस्पताल लियाने को । इससे ज्यादा हम कुछ नहीं जानते । जोशी जी चलिए , कह रहे थे की हालात ख़राब है । "

                                                                    जोशी जी उनकी पत्नी और शर्मा जी के साथ मोहल्ले के कुछ और लोग अस्पताल पहुंचे । देखा अस्पताल के एक बेंच पर जोशी जी की बिटिया एक महिला हवलदार के साथ बैठी थी हाथ में पट्टी बंधा था थोड़ा कपड़ा भी चुमुडियाया था और मुंह पर दू चार ठो खरोच लगा था । जोशी जी की बिटिया अम्मा बाउजी को देखते उनसे लिपट कर रोने लगी । जोशी जी और उनकी पत्नी बार बार पूछे जा रहे थे की क्या हुआ है पर उ रोना ही बंद नहीं कर रही थी । तभी सामने से पुलिस मोहल्ले को दो आवारो को पकड़ कर ले आ रही थी एक के सर में पट्टी बंधी थी और हाथ में पलस्तर और दूसरे की नाक फूली पड़ी थी और मुंह सूजा ।
" पापा आज हम ट्यूशन से आ रहे थे तो रास्ते में ई लोग हमको परेशान करने लगे हमको धक्का दे कर साईकिल से गिरा दिये । ई बबलुआ के तो नाक पर हम एक मुक्का मारे और ई चिंटुआ का तो हाथ ऐसा मरोड़े की टूट गया होगा । अंदर छग्गन चाचा का लड़का है उसके तो आँखि में दुन्नो उँगरिये ही घुसा दिये फुट गई होगी और एक ठो और था उसको हम पहचाने नहीं उसके तो दोनों पैर के बीच ऐसा घुटना मारे है कि अब जिंदगी में कोनो लड़की नहीं देखेगा । "
पुलिस ने कहा वो दोनों अंदर भर्ती है उनकी हालात कुछ ठीक नहीं है उनके घर भी संदेशा भेज दिया है । ई दुन्नो ठीक है थाने ले जा रहे है । जोशी जी थाने आ कर रपट लिखवा जाइये फिर इन सबको जेल भेजते है ।
जोशी जी और उनके पत्नी के जान में जान आई तभी लौंडो के परिवार वाले वहा आ गये और जोशी जी की मिन्नतें करने लगे । जोशी जी जवान लडके है गलती हो जाती है ,छोड़ दीजिये पुलिस में मत जाइये मोहल्ले की बात है जीतनी सजा मिलनी थी आप की बिटिया ने कूट कर दे दी आगे की जिम्मेदारी हम लेते है । हम भी कूट कर ठीक कर देंगे । किसी ने कहा की आप भी दो चार मार लीजिये पर थाने मत जाइये । तो किसी ने उनकी और बेटी की इज्जत की दुहाई दी , इनका तो जो हुआ वो हुवा आप की इज्जत ख़राब होगी । तो किसी ने कहा की मामला बढ़ेगा तो बिटिया का विवाह नहीं होगा । तभी इन सबके बीच शरीफ शर्मा जी बाहर आये और बोले आप सभी को शर्म आनी चाहिए ऐसा कहते , जोशी जी आप को जरूर पुलिस में जाना चाहिए और इन सब पर केस करना चाहिए । तभी सभी के होश ठिकाने आयेंगे और समाज सुरक्षित होगा आप को डरना नहीं चाहिए मैं आप के साथ हूँ चलिये , कोई आप के साथ हो या न हो । आप की बिटिया बड़ी बहादुर है ।   जोशी जी ने शर्मा जी को बहुत धन्यवाद दिया और मोहल्ले में शरीफ शर्मा जी अब बहादुर और हिम्मती  के रूप में भी पहचाने जाने लगे । जबकि ये कह शर्मा जी ने मन ही मन सोचा की चलो मैं इस कांड से बच गया जो किसी ने मेरा कैसे भी नाम लिया तो कह दूंगा मैंने ही पुलिस में जाने के लिए कहा तो मुझे बदनाम कर रहे है ।

                                                                              चारो लडके जेल चले गये , शर्मा जी अब भी शरीफ है , जोशी जी लेकिन अब भी परेशान है क्योकि कुछ महीनो बाद उन्हें सुनाई पड़ा की मोहल्ले में कुछ और ही खुसर फुसुर चल रही थी कि जोशी जी की बिटिया का कोई छेड़ छाड़ नहीं हुआ था वो तो लव ट्रायंगल का नतीजा था । जोशी जी की बिटिया दो दो के साथ चक्कर चला रही थी एक दिन सब आपस में भीड़ गये । जोशी जी की तो बिटिया का चरित्तर ही खराब है । आवारा लडके जेल में है लेकिन शरीफ शर्मा जी अब भी मोहल्ले में ऐस से थे अपनी मंडली  साथ बिलकुल शरीफ बने हुए ।