October 01, 2017

संस्कारी रोमांस और बेडरूम के संस्कार -------- mangopeople




          एक न्यूज साईट पर खबरों को देखते एक हेडिंग पर नजर पड़ी "पहल आप भी कर सकती है " साफ था बात महिलाओ के लिए लिखी थी तो फट से खबर पर चली गई | वहा सवाल था क्या आप का जीवन बहुत बोरिंग होता जा रहा है , दिल से आवाज आई हा , विवाह के एक दसक बितने के के बाद आप दोनों के बीच रोमांस गायब है , दिल ने फिर जवाब दिया हां बिलकुल सही कर रहे हो , क्या आप फिर से अपने जीवन में रोमांस लाना चाहती है जीवन से बोरियत दूर करना चाहती है , दिल चीखा हां भाई हां तुम तो अंतर्यामी हो | तो पहल आप भी कर सकती है अच्छा तो ये हमको रोमांस करना सिखाएंगे सिखाओ भाई हम सीखने को तैयार है | पहला उपाय था पहले अपना बेडरूम बदलिये इस पर दिमाग चिल्लाया पागल है क्या मुंबई में प्रापर्टी के रेट पता है क्या उससे सस्ते में तो पत्नी पत्नी बदल जायेंगे , आगे जब पढ़ा बेडरूम की  साज सज्जा बदलिये तब जान में जान आई | बेड पर नई अच्छी चादर डालिये , लो भाई नये चादर से रोमांस कैसे आयेगा इतने सालो में कितने नये चादरे खरीद  बिछा चुकी हूँ जीवन वैसे ही बोरिंग है खुद का ध्यान उस पर न गया तो दूसरे से क्या शिकायत करे , फिर भी कह रहे हो तो मान लेते है | कमरे ने सुन्दर ताजे फूल रखे वो नयी ऊर्जा भरते है दिल प्रसन्न करते है और महंगे विदेशी फूलो के नाम गिना दिया | हमने कहा अपने भारतीय गुलाब और रजनी गंधा में क्या खराबी है जो फूल रखने से कुछ फायदा हो तो हम तो बगीचा लगा दे ,चलो ये भी किया |

                                                आगे लिखा था अब कमरा देखने में अच्छा हो  उसमे खुसबू भी अच्छी आनी चाहिए और लाइट भी रोमांटिक होनी चाहिए  इसके लिए अच्छी खुसबू वाले कैंडिल जलाइये | अरे कम्बख्त  पहली ही लिखा दिया होता की बहन ये रोमांस वोमंस करना न बड़े लोगो का चोचले है इसमें बड़ा खर्चा है मडिल क्लास और मिडिल क्लास वाला दिमाग रखने वालो के बस का और जेब का नहीं होता ये सब , तो पढ़ते ही नहीं | खुसबू तो हम २० रुपल्ली के मोगरे के गजरे और और मदम रौशनी तो अपने जिरो वॉट वाले बल्ब से भी ला देंगे , मुंबई जैसे गर्म जगह में जो घर में एसी न हो तो ये मोमबत्तिया जलेंगी कैसे पंखे में तो जलने से रही फिर तो लालटेन जलानी पड़ेगी और पता नहीं लालटेन से आती कैरोसिन की खुशबू में रोमांस का क्या होगा | फिर लिखा था कमरे में खाने और पिने  के लिए भी कुछ रखे , स्ट्रबेरी क्रीम के साथ , उनके पसंद की चॉकलेट , अच्छी क्वॉलिटी की शैंपेन | लिखने वाला जरूर विदेशी है वरना कमरे में खाने के लिए कुछ रखने का नाम नहीं लेता | उसका पता नहीं है यहाँ तो भारतीय पति रात में इतना ठूस के खा लेता है या खिला दिया जाता है कि वो पत्नी के मुंह  डकार मार देता है , वो कमरे में आने तक पहले ही गले तक इतना भरा रहता है की वो और क्या खायेगा और कभी भारतीय पुरुषो को आम खाते देखा है , देखा होता तो फिर उनके फल खाने को रोमांस से जोड़ने की गलती कभी नहीं करते | और महाराज भारत में पीने का मतलब एक ही होता है और वो पत्नी के साथ नहीं दोस्तों के साथ होता है और उसके बाद रोमांस नहीं हुल्लड़ होता है | जाने दो ये भारत के लिए कुछ करना तुम्हारे बस का नहीं है  |

                                                उसके बाद बताया गया कि अब जब सब कुछ बदल दिया है तो अपने आप को भी बदलिये | कर दी न वही पतियों वाली बात सारे बदलावों जरुरत हमी लोगो में है मतलब बदलना है तो हम लोग ही बदले मतलब सारी बुराई हमी लोगो में है , मतलब जो करे हमी लोग करे | ये सब सोचते जब दिमाग साँस लेने के लिए रुका तो देखा लिखा था कुछ नये कपडे लीजिये , हाय ये पढ़ते ही दिल गार्डन गार्डन हो गया पहले ही ये लिखना था ना हम लोग तो हमेसा तैयार है कुछ नया ड्रेस खरीदने को बोलिये क्या क्या लेना है | तो जवाब था रेड नाइटी खरीदिये , अब ये क्या बात हुई की सिर्फ लाल रंग में ही  रोमांस जगेगा मतलब की नील पिले हरे में क्या खराबी है उनकी रोमांस से क्या दुश्मनी है  कितने रंगो में नाइटी खरीद पहन चुके है गदहे राम तुमको कुछ नहीं पता , खालीपीली लिखे हो तुम इसमें से कुछ किया विया है नहीं ऐसा लगा रहा है किसी पिच्चर विच्चर का सीक्रिप्ट यहाँ छाप दिए हो , कुछ भी हुंह | अंत में लिखे का लब्बो लुआब ये था कि यदि आप पति पत्नी है तो बहुत कुछ करते ही होंगे लेकिन रोज के कामो में फंस कर एक दूसरे को समय नहीं देते है एक दूसरे से  बात नहीं करते  तो एक पूरी रात जागिये बाते कीजिये अपने बारे , रोमांस कीजिये |

                                                  जब ये सब पढ़ कर निचे बढे तो अचानक पाठको की प्रतिक्रिया पर नजर गई बन्दे ने लिखा था , " क्या बकवास लिखा है हमारे देश की संस्कारी लडकिया ये सब नहीं करेंगी , ये सब हमारे देश की सस्कृति नहीं है | "  ये पढ़ कर पीछे बैकग्राउंड में तीन बार बजा  संस्कारी रोमांस , रोमांस रोमांस  बेडरूम के संस्कार , संस्कार संस्कार और मुंह से निकला ओय धत्त तेरे की ये बेडरूम के कौन से संस्कार होते है और ये संस्कारी तरीके से कैसे रोमांस किया जाता है, ये तो हमें आज तक पता ही न चला   |  मतलब रेड नाइटी की जगह लाल साड़ी पहन लिया जाए मोमबत्ती की जगह अगरबत्ती  जला दिया जाये , स्ट्रबेरी क्रीम , सैपेन  की जगह नारियल पानी और बताशे रख दिए , और खुसबू वाले विदेशी फूलो की जगह गुड़हल के फूल रख दिए जाए | उसके बाद क्या होगा और हम कैसे दिखेंगे अब आप अंदाजा ही लगा लीजिये | बस लगेगा एक चौकी रख कर उस पर बैठ जाये और पति  आते है ही आप के चरणों में गिर बोले,  बोलो पहाड़ो वाले माता की जय , बोलो सच्चे दरबार की जय और दोनों मिल कर माता का जागरण करेंगे रातभर पुरे मोहल्ले के साथ  | जो आप को पता हो ये संस्कारी रोमांस क्या होता है तो हमें भी बताये |

चलते चलते

             ईमारत में किसी ने गांव में   अपने बेटे की शादी की और मुंबई आ कर एक छोटी पार्टी ईमारत में रखी साथ में सत्यनारायण की कथा भी | अब जाने के लिए सोचा पहना क्या जाए कॉटन का सूट नहीं चलेगा पूजा के साथ आखिर शादी की पार्टी है , तो बंधेज वाली सिल्क की लाल साड़ी निकाल लिया | अब साड़ी अकेले कभी नहीं होती उसके साथ बिंदी ,काजल, लिपिस्टिक , चूड़ी आदि सब होता है तो ५ मिनट वाला सूट आधे घंटे की साड़ी बन गया | पहन कर पति से पूछा ठीक है ना , (ना ना कैसी लग रही हूँ वाले धर्म संकट में पति को कभी डालती ही नहीं मतलब कुछ ज्यादा तो नहीं कर लिया एक पूजा के लिए ) पतिदेव २ मिनट देखे फिर उठ कर मेरे पास आये और मेरे घुंघराले बालो से क्लचर निकाल दिया और बालो को पीछे से कंधो तक  फैला दिया फिर पीछे जा कर बोले बस एक चीज की कमी है बस एक त्रिशूल आ जाये तो साक्षात माँ दुर्गा | गुर्रर्र  सही कह रहे हो त्रिशूल की हो कमी है वरना महिसासुर तो मेरे सामने ही है आज ही अंत हो जाना था मैंने गुस्से में बोला | पतिदेव पुरे मूड में थे बस बस इसी क्रोध और आँखे बड़ी करने की ही देर थी बची खुची कसर भी पूरी हुई , जय माता दी | इतने में हमारी बिटिया रानी जो उस समय बस तीन साल की थी आ गई वो भी पापा के साथ उछल उछल बोलना शुरू कर दी जय माता दी | मै गुस्से में बाहर निकल गई लिफ्ट तक बाप बेटी की जय माता दी जोर से बोलो जय माता दी की आवाज आ रही थी गुर्रर्र  |










September 25, 2017

सुनो लड़कियों अब सुधर जाओ ------------ mangopeople





           सुनो लड़कियों अब सुधर जाओ और अपनी सुरक्षा के लिए दुसरो का मुंह तकना बंद कर दो | जिस पितृसत्तात्मक सोच ने लडको को तुम्हे छेड़ने परेशान करने की हिम्मत और सोच दी है उसी सोच से तुम अपनी सुरक्षा की गुहार कैसे लगा सकती हो | तुम्हे क्या लगता है वहां तुम्हारी आवाज सुनी जायेगी | ये गुहारे तुम पर पलट का ग़ाज बन गिरेगी | हॉस्टल से निकलना बंद करावा दिया जायेगा , स्कूल नौकरी छुड़वा कर घर बिठा दिया जायेगा , या आगे पीछे पूंछ की तरह बाप भाई लगा दिए जायेंगे जिससे तुम्ह जल्द ही उनके लिए बोझ की तरह हो जाओगी  | तुम्हारी ही आजादी को कैद में बदल दिया जायेगा | तुम्हे ही लक्ष्मण रेखाओ की याद दिलाई जायेगी और ये सब तुम्हारी सुरक्षा के नाम पर किया जायेगा | फिर महसूस करना पीड़ित हो कर अपराधी सी सजा को |

                  बंद कर दो दुसरो के भरोसे रहना , क्यों रहना चाहती हो अपनी सुरक्षा के लिए दुसरो के भरोसे पर | जब अपना शहर गांव छोड़ दूर स्कूलों में पढ़ने जा रही हो , नौकरी के लिए देश विदेश तक अकेले जा रही हो | लम्बे संधर्ष के बाद इतना आत्मविश्वास जमा किया है कि अपने घर परिवार  से दूर अकेले रह सकती हो तो अपनी सुरक्षा के लिए किसी और की और क्यों देख रही हो | देने वाले ने तुम्हे भी वही दो हाथ पैर और दिमाग दिया है जो तुम्हे छेड़ने परेशान करने वाले के पास है तो उन्हें इतना मजबूत क्यों नहीं बनाती कि अपनी रक्षा खुद कर सको | जब पढाई और नौकरी के लिए इतना आत्मविश्वास पैदा किया है तो अपनी रक्षा के लिए क्यों नहीं करती | जब हर काम के लिए  स्वालंबी बनी हो तो अपनी रक्षा के लिए क्यों किसी पर निर्भर होना चाहती हो | तुम्हारा खुद को कमजोर और उन्हें मजबूत समझना ही उन्हें मजबूत और इतना हिम्मती बनाता है कि वो तुम्हे परेशान कर सके तुम्हारे आगे बढ़ने के रास्ते में एक पत्थर बने | अपने आगे बढ़ने के रास्ते में पड़े इन पत्थरो को खुद उठाओ और किनारे फेक दो | जब तमाम तरह की नौकरियों के लिए तमाम तरीके का प्रशिक्षण ले सकती हो तो अपनी सुरक्षा के लिए शारीरिक प्रशिक्षण भी ले सकती हो | अनेको गैजेट अपने लिए खरीद सकती हो तो अपने बचाव के लिए हथियार भी ले सकती हो | जब झुण्ड में आ कर इन सब का विरोध कर सकती हो धरना देने की हिम्मत कर सकती हो तो ऐसे झुण्ड में आये लफंगो को झुण्ड बना कर सबक खुद सबक भी सीखा सकती हो |
                         आज के समय में तुम्हारे विरोध प्रदर्शनों का केवल राजनैतिक स्तेमाल ही होगा | तुम्हारे मुद्दे कही पीछे छूट जायेंगे बाकी सरकार और विपक्ष अपनी राजनीति चमकायेंगे | सब के सब वही पुरुषवादी सोच के है जिसके खिलाफ तुम लड़ रही हो | ये कभी तुम्हारी बात नहीं समझेंगे आज जो तुम्हारे साथ है वो कल गद्दी पर बैठते ही तुम्हारे खिलाफ होगा और जो आज तुम्हारे खिलाफ है वो गद्दी जाते ही तुम्हे पुचकारने आ जायेंगे | समाज प्रशासन और राजनीति इन में सो कोई भी तुम्हारी मदद नहीं कर सकता इन समस्याओ के लिए क्योकि ये समस्याए उन्ही की पैदा की गई है , वो तुम्हारी रक्षा उससे क्या करेंगी , वो तुम्हे ही सुरक्षा के नाम पर कैद कर जायेंगी | कुछ किया भी तो वो ज्यादा प्रभावी नहीं होगा , एक सड़क पर पुलिस बैठेगी तो गली नुक्कड़ पर छेड़ी जाओगी , हिम्मत करके हर छेड़ने वाले को सबक खुद सिखाओगी तो हर लफंगे में डर बैठेगा | अपनी रक्षा करने का आत्मविवास और हिम्मत आएगी तो एक सड़क एक गली नहीं हर जगह सुरक्षित रहोगी  और हमेसा रहोगी |







August 01, 2017

माँ दूध अमृत नहीं होता ---------- mangopeople

       



                                                       हाल में ही एक लेख पढ़ा जिसमे बताया गया कि माँ का दूध उतना भी अमृत नहीं होता जितना की उसे बताया जाता है | लेख के अनुसार जब  पाउडर का दूध बाजार में आया माँ के दूध के विकल्प में ,तो विकासशील और गरीब देशो के लिए एक समस्या खड़ी हो गई थी वो थी साफ़ पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने की , जिसमे दूध को मिला कर बच्चो को पिलाया जा सके | उन देशों में ये संभव नहीं था इसलिए उन्होंने माँ के दूध के बारे में बढ़ा चढ़ा कर प्रचारित करना आरम्भ किया ताकि माँए पाउडर के दूध से दूर रहे |  गंदे पानी में बना कर दिया दूध बच्चो के लिए और खतरनाक हो सकता था | साफ सफाई का आभाव बच्चो को और बीमार बना सकता था और पहले से ही ऊँचे बाल मृत्युदर वाले  इन देशो में ये दर और बढ़ सकता था |

                                            मै काफी हद तक इस बात से सहमत हूँ कि वास्तव में माँ का दूध उतना अमृत नहीं होता जितना की बताया जाता | मै पाउडर के दूध का समर्थन नहीं कर रही माँ के दूध के विकल्प के रूप में हमारे यहाँ पुराने समय से ही गाय , भैस और बकरी के दूधो का प्रयोग किया जाता रहा है | जानवरो के दूध को बच्चे के लायक सुपाच्य बना कर दिया जाता रहा है | ऐसे बहुत से कारण है जब माँ के दूध की जगह या उसके साथ बाहर से भी दूध बच्चो को पिलाया जाता रहा है | एक सबसे सामान्य कारण है कि बच्चे के जन्म के साथ ही माँ को तुरंत दूध आ जाये ये जरुरी नहीं है ,  बहुत सी महिलाए ऐसी है जिन्हे दूध ना के बराबर आता है या मात्रा बहुत कम होती है जिससे बच्चे का पेट नहीं भरता , कई बार महिलाए बीमार होने के कारण तो कई बार बच्चे के बीमार होने के कारण भी माँ अपना दूध बच्चो को नहीं पिलाती और उन्हें बाहर से दूध दिया जाता है | उपलब्धता के और बच्चे के पचाने की छमता के अनुसार  पाउडर, गाय , भैस और बकरी का दूध दिया जाता रहा है | जो पौष्टिकता के और बच्चे के जरुरत के हिसाब से कही से भी माँ के दूध से कम नहीं होता है |

                                           बच्चे के स्वस्थ के दृष्टि से भी देखे तो इस अतिश्योक्ति पूर्ण माँ के दूध  की महिमा से बाहर आने की भी जरुरत है | कितनी ही बार ऐसा होता है कि माँ को दूध कम आ रहा है जो उसके बच्चे का पेट भरने के लिए पर्याप्त नहीं  है किन्तु बाहर का दूध दिया तो बच्चे के लिए अच्छा नहीं होगा जैसी भ्रान्ति बच्चे के लिए खतरनाक हो जाती है |  कई बार बच्चो में पानी की कमी हो जाती है तो कई बार वो  इस कारण कुपोषित तक हो जाता है | कई बार ऐसा भी होता है कि माँ को अच्छे से दूध आ रहा है किन्तु बच्चे की जरुरत उससे ज्यादा है |  ज्याद सेहतमन्द या ज्यादा ऊर्जा खर्च करने वाले बच्चो की जरूरते अन्य सामान्य बच्चो से ज्यादा होती है | ये जरुरी  नहीं है कि माँ का दूध बस उनके लिए पर्याप्त हो उसे माँ के दूध ( माँ के दूध आने की एक सीमा होती है ) के आलावा भी और पोषण की जरुरत हो सकती है |  इन दोनों ही स्थितियों में भूख के कारण बच्चे चिड़चिड़े होते है , बार बार रोते है और एक अच्छी लम्बी नींद नहीं ले पाते है और जल्दी जाग जाते है | ये सारी ही स्थिति बच्चे के स्वस्थ के लिए और उसकी बढ़त  के लिए अच्छा नहीं होता | इसलिए ये जरुरी है कि इस भ्रान्ति को दूर किया जाये | माँ का दूध बच्चे के लिए बेहतर है ये सही है किन्तु केवल माँ का ही दूध बच्चे के लिए पर्याप्त है और उसे बाहर से किसी पोषण की जरुरत नहीं है या बाहर से दिया गया दूध उसके उसके लिए खतरनाक होगा ये सही नहीं है |


                                     माँ का दूध बच्चे के लिए अमृत होता है जैसी अतिश्योक्तिपूर्ण बाते एक माँ के लिए कितना मानसिक दबाव और ग्लानि ला देता है कई बार इसका अंदाजा भी आम लोगो को नहीं है | बच्चे के जन्म के साथ ही यदि उसे दूध न आये , दूध कम मात्रा में आये , किसी बीमारी या काम की वजह से वो बच्चे को स्तनपान न करा सके तो ये बाते उसे ग्लानि और अपराधबोध से भर देती है जो उसे न केवल तनाव देता है बल्कि कई बार उन्हें डिप्रेशन  में भी ले जाता है | उन्हें लगता है कि केवल स्तनपान न करा पाने के कारण वो एक माँ की जिम्मेदारियां और कर्तव्यों को ठीक से नहीं निभा रही है | कई बार वो ये मानने के लिए भी इसी कारण तैयार नहीं होती की उनका दूध बच्चे के लिए पर्याप्त नहीं है या उनके बच्चे की  जरूरते और ज्यादा पोषण की है तो उन्हें बाहर से भी बच्चे को दूध देना चाहिए | इस तरह का मानसिक दबाव माँ के साथ बच्चे  के लिए भी ठीक नहीं है | एक स्वस्थ और खुश माँ ही किसी बच्चे की बेहतर देखभाल कर सकती है | केवल स्तनपान ही किसी माँ को वर्णित  नहीं करता , स्तनपान माँ के कई कर्तव्यों का एक हिस्सा भर है , ये बात सभी को समझने की आवश्यकता है |

चलते चलते
                     मेरी बेटी करीब नौ महीने की थी तब मै अपने गांव ससुराल गई थी | जिठानी को दो पुत्रियों के बाद मन्नतो से पुत्र हुआ था जो महीने भर का था | एक सुबह वो उठ कर रोने लगा उसकी माँ मंदिर गई थी उन्हें आने में देर था तो मैंने ससुराल की अन्य महिला से कहा मुझे दे दीजिये ही मै उसे तब तक दूध पीला देती हूँ ,  बचपन में मेरे अपने संयुक्त परिवार में अक्सर दो लोगो को एक साथ बच्चे होते थे और वे एक दूसरे  के बच्चो को आराम से स्तनपान करा देती थी ,तो मेरे लिए ये सामान्य बात थी ,किन्तु ससुराल में  रिश्तेदार महिला ने मुझे प्रश्नवाचक दृष्टि से देखा ( संभवतः ये उसके पुत्र होने के कारण  था ) उन्हें अनदेखा कर मै बच्चे को दूध पिलाने लगी | कुछ ही देर में जिठानी आ गई मुझे ऐसा करते देख मुस्कराई बोली ठीक किया | अगले दिन जिठानी रसोई में खाना बना रही थी बच्चा फिर रोया मैंने कहा मै काम करती हूँ आप दूध पीला दीजिये | बोली गर्मी में क्या रसोई में आओगी अच्छा है तुम ही दूध पीला दो | तुरंत मेरे शातिर दिमाग की घंटी बज गई ये सामान्य बात नहीं है कुछ तो पक रहा है उनके दिमाग में , उस समय बात को दिमाग की खुटी पर टांग कर दूध पीला दिया | तीसरे दिन जैसे ही उन्होंने फिर से मुझसे कहा मै शुरू हो गई , पता था की बात कैसे निकलवानी है | मैंने पूछा क्या हुआ आप को दूध नहीं आ रहा तो उनका जवाब था नहीं ऐसी बात नहीं है | तो क्या अपने दूध का दही जमा के दही बड़े बनाने है | तब जा कर पोल खुली नहीं जी तुम वहा फल मेवा दूध मलाई खाती हो तुम्हारा दूध अच्छा होगा हम लोग कहा यहाँ पर ये सब खाते है | माथा ठोक लिया अपना अब ससुरालियों की टांग खिचाई करुँगी का कार्यक्रम बाद के लिए रख उन्हें समझाया , अच्छा खाने से माँ के दूध की क्वांटिटी मात्रा बढती है क्वॉलिटी नहीं ,सभी माँ के दूध एक जैसे होते है चाहे आप कुछ भी खाये |  उन्हें न मानना था और ना वो मानी लेकिन शाम की बैठकी में मैंने टांग खिचाई का कार्यक्रम शुरू किया पतिदेव से कहा भाभी ने सुबह मुझे भैंस कहा और खुद को गाय | सबके सामने ये सुन सकपका गये सारा किस्सा सुनते हुए कहा घुमा कर ही सही लेकिन उनके कहने का मतलब यही था कि मेरा दूध  भैंस की क्वॉलिटी है और उनका गाय का , मै भैंस हु और वो गाय |




#हिन्दी_ब्लॉगिंग 
                                     















July 07, 2017

सतर्क रहना है आप को आखिर पैसा है आप का -------- mangopeople



                                       
                                                                      पांच साल पहले बैंक की सतर्कता देख दिल बाग़ गार्डन सब हो गया था | भाई की शादी के लिए हम शॉपिंग के लिए निकले , मौका विवाह का था तो बिल खूब लम्बे बन रहे थे | जैसे ही तीसरी बार जब पति ने डेबिड कार्ड स्वैप कराया तो बस आधे मिनट के अंदर ही उन्हें बैंक से फोन आ गया की आप के कार्ड से अचानक बहुत सारी शॉपिंग हो रही है , क्या कार्ड आप ही प्रयोग कर रहे है | पति ने उन्हें आश्वस्त किया की कार्ड वही प्रयोग कर रहे है और मैंने तुरंत उन्हें कहा की उसे बताये की शॉपिंग ख़ास मौके के लिए ही किया जा रहा है और अगली बार भी जब कभी हमारे कार्ड से ज्यादा शॉपिंग हो तो तुरंत हमें सूचना दी जाये उसे सामन्य न माना जाये | ये निर्देश जरुरी था कही अगली बार वो ये न समझे की हम तो इतना खर्च करते रहते है ये सामान्य बात है |

                      लेकिन सभी बैंक इतनी सतर्कता दिखाए ये जरुरी नहीं इसका बुरा उदहारण दो साल पहले देखने को मिला | जब बहनोई के अकाउंट से लाख रु से ऊपर की शॉपिंग हो गई रात को १२ बजे और उन्हें बैंक से मैसेज सुबह ९ बजे मिला | उनके होश उड़ गये तुरंत बैंक भागे और पता किया , क्या लिया गया है और कहा | पता चला फ्रॉड अमेरिका से किया गया है  ८५ हजार रु में एक हवाई जहाज का टिकट बुक किया गया है अमेरिका से यूरोप का बाकि के ३०-३५ हजार की शॉपिंग की गई है | बहनोई खुद टूर और ट्रेवलिंग में नौकरी करते है इसलिए बैंक से ही एयरलाइंस का नाम पता किया गया और पुलिस और सारे जरुरी कागजात ले उसके पास पहुँच गए | शुक्र था की टिकट उस दिन शाम की थी और उस पर यात्रा नहीं किया गया था सारे सबूत दे कर टिकट को कैंसिल कराया गया | वो ८५ हजार उन्हें मिल गये , किन्तु अपने प्रयास से और इस कारण की वो दिल्ली जैसी जगह पर थे और उन्हें पता था की क्या और कैसे  करना है | बाकि के पैसो के लिए उन्हें बैंक के खूब चक्कर लगाने पड़े जबकि उनकी मदद एक निजी बैंक के मैनेजर कर रहे थे | उस समय शायद २१ दिन में पैसे वापस आने के रिजर्व बैंक के निर्देश थे जिसकी कोई कीमत नहीं थी | उन्होंने शिकायत की ये एकाउंट उनका निजी है , जिससे कभी भी उन्होंने इतना ज्यादा पैसा एक साथ खर्च नहीं किया है साथ ही  डॉलर और विदेश में पेमेंट तो कभी भी नहीं किया है बैंक ने कैसे पैसे को रिलीज किया और तो और उन्हें समय से एसएमएस भी नहीं किया गया | उनका बैंक सरकारी था और मेरे पति का निजी |

                                      इस तरह के फ्रॉड में ज्यादातर पहले एक दो डॉलर की रकम खर्च कर चेक किया जाता है , ये बहनोई के साथ भी हुआ था लेकिन उन्हें मैसेज ही नहीं आया | उन्होंने और मेरी बहन ने भी बताया उनके ऑफिस में इसके बारे में सभी को पता होता है |  ऑफिस के बिजनेस कार्ड से ऐसा करने के कई प्रयास हुए है बैंक को निर्देश है की वो इतने कम रकम की कोई भी पेमेंट न करे और उन कार्ड से पेमेंट सिर्फ भारत से ही होंगे विदेश से बिलकुल नहीं | विदेश में बैठे ऐसे फ्रॉड लोगो का कभी कुछ नहीं होता , भारत के साइबर सेल वाले कुछ भी नहीं करते और रिजर्व बैंक के बैंको को दिए निर्देश की १० दिनों में पैसे वापस कीजिये इसकी भी कोई कीमत नहीं होती | पैसा आप का है  और सतर्कता भी आप की ही दिखानी होगी | बैंक वाले आप को सही समय पर एक सूचना भेज दे आप तो बस उसी की कामना कीजिये |




#हिन्दी_ब्लॉगिंग 








July 01, 2017

ब्लॉग पोस्ट हिट बनाने के बेजोड़ नुस्खे ----------- mangopeople



                                                               क्या आप अपने हिन्दी ब्लॉग दिवस वाले पोस्ट को हिट बनाना चाहते है , क्या आप चाहते है की ज्यादा से ज्यादा पाठक आप की पोस्ट पर आये , ढेरो टिप्पणियां से मन गार्डन गार्डन हो जाये , फॉलोअर की संख्या रातोरात बढ़ जाये | तो आप निराश न हो , ब्लॉग से आस न छोड़े , हमारे पास आये ,  हम आप को आदिकाल से चला रहा वो नुस्खा बताएँगे जो आप की सभी मनोकामनाये पूर्ण करेगा |  कही और न जाये उसके लिए आप को सबसे काम का नुस्खा यही मिलेगा | " ब्लॉग से पैसे कैसे बनाये " " अश्लील चुटकुले पढ़ना चाहते है तो यहाँ आये " " ब्लॉग जगत के तो बड़े नामी ब्लॉगर मठाधीशो की पोल खुली " " हिंदी ब्लॉग जगत का सबसे बड़ा ब्लॉगर कौन " " इन नारीवादियों से भगवान बचाये " ये वो चुम्बकीय शब्द शीर्षक है जिससे हर बड़ा छोटा ब्लॉगर आप के पोस्ट तक खींचा चला आता है | इन शब्दों में इतना चुम्बक है कि हर ब्लॉगर आयरन मैन और लेडी बन इसके आकर्षण में आ ही जाता है |  पाठक की संख्या बढ़ाना है तो शीर्षक ही काफी है | पूरी पोस्ट लिखने के लिए ज्यादा दिमाग और मेहनत की आवश्यकता नहीं है शीर्षक दे  " ब्लॉग से पैसे कैसे बनाये " और फिर चुपचाप पैसे की ताकत देखिये | जीतनी ताकत पैसे में है उतनी ही ताकत घर बैठे आराम से पैसे कैसे कमाये " जैसे शब्दों में भी है | लोग धड़ाधड़ आप के ब्लॉग का ट्रैफिक जाम कर देंगे |  चाहे तो पोस्ट में  बस ये लिखे भाइयो और बहनो मै तो पूछ रहा था की पैसे कैसे बनाये , किसी के पास तरीका हो तो यहाँ दे जाये ;) |

                                                        दूसरा तकरवार शब्द है " सेक्स " और " अश्लीलता " जिन शब्दों के आगे पीछे जुड़ जाये उन शब्दों को भी मोहनी बना दे और पाठक मोहपाश में बंधा धड़ाम से आप के ब्लॉग पर आ कर गिरेगा | शीर्षक दीजिये "अश्लील चुटकुले पढ़ना चाहते है तो यहाँ आये " पोस्ट में भी कुछ लिखने की जरुरत नहीं है बस लिख दीजिये शीर्षक में ही आप ने अश्लील चुटकुले पढ़ लिया तो अब निचे क्या खोज रहे है ;) |  बस समस्या ये है कि आएंगे सब लेकिन टिप्पणी देने से सब बच के सब छुप छुप निकल जायेंगे , जैसे कि वो आये ही नहीं | सबको पता है यहाँ टिप्पणी करना खतरनाक है , टिप्पणी दी तो फंस जायेंगे नाहक ब्लॉग जगत में बदनाम हो जायेंगे | चुटकुला तो मिला नहीं लोगो के सवालिया नजरो से और खिंचाई में फंस जायेंगे | ब्लॉग पर आने वाले तो बढ़ जायेंगे लेकिन आप की ये खुराफात टिप्पणी नहीं पा पायेगी , पर कितने लोग ब्लॉग पर ईमानदार है ये पता चल जायेगा |


                                                                एक बात अच्छे से समझ लीजिये दुनिया में कितना भी मोदी और ट्रंप का डंका बज जाए , चाहे कितना भी गाय , सूअर पर विवाद हो जाए , राष्ट्रवादी - वामपंथी खुद को एक दूसरे से ज्यादा बड़ा बताये , पूरी दुनिया में कोई भी विषय हिट हो | लेकिन जब बात ब्लॉग जगत में सबसे हिट फार्मूला की होगी तो ब्लॉग जगत में खुद ब्लॉग जगत के लोगो से जुड़े विवादों , उनके बीच के होड़, पुरस्कारों , मठाधीशी आदि पर लिखी गई पोस्टो का मुकाबला कोई नहीं कर सकता | बस आप ब्लॉग जगत के किसी तथाकथित बड़े , हिट , नामी , विवादित आदि आदि ब्लॉगर का नाम लेकर कोई विवादित पोस्ट लिखा दे | दो ब्लोगरो के बीच कौन बड़ा लेखक है लिख दे , किसी को मठाधीस कहके दो चार खरी खरी सुना दे , किसी के बीच हुए विवाद पर थोड़ा मसाला छिड़क कर लिख दे , किसी पुरस्कार की घोषणा कर दे , या पहले से दिए पुरस्कार की समीक्षा कर दे | ये सारे विषय ऐसे है जिस से ब्लॉग के लोग खुद से बड़ा जुड़ा मानते है , अरे ये तो हमारी बात है , ये तो घर की बात है करके सब के सब इसमें दिलचस्पी लेने लगते है | और विषय कोई विवाद हो तो तो पूछो ही मत उनकी सक्रियता चरम पर पहुँच जाती है | आप ने एक ब्लॉगर को दूसरे से बड़ा कहा दुसरा खुद अपना लावा लश्कर ले आप की पोस्ट पर चढ़ाई कर देगा और पहला बचाव में | दोनों तरफ के समर्थक आप की पोस्ट पर भिड़ पड़ेंगे , जितना अपने को अच्छा कहेंगे उससे ज्यादा दूसरे  बुराई बता जायेंगे , फिर समर्थको के भी समर्थक आएंगे और अपने गुरु का साथ  निभाएंगे | बस अँधा क्या चाहे दो आंखे ब्लॉगर क्या चाहे एक विवादित पोस्ट पर कुछ सौ टिप्पणियां और पुरे ब्लॉग जगत में  उसकी चर्चा |

       
                                               इसके आलावा नारिवादिया भी पाठक खींचू विषय है | खुद नारीवादी नारीवादी पोस्टो पर जितने पाठक नहीं ला पाती उन्हें भला बुरा कहने वाले उससे ज्यादा पाठक पा जाते है | घर में पत्नी की खुन्नस यहाँ निकालते है , पत्नी के तानो का जवाब नहीं दे पाते वो यहाँ अपनी भड़ास निकालते है | पत्नी आगे तो मुंह नहीं खोल सकते यहाँ चिंघाड कर अपनी मर्दानगी दिखाते है |  पुरुष हो कर नारीवाद पर पोस्ट भी एक हिट फार्मूला है | राष्ट्रवादी लोग स्त्री को बहन बेटी माँ कह कर पोस्ट लिख सकते है वामपंथी फेमिनिज्म पर कुछ भी लिख दे दक्षिणपन्थियो को दो चार गाली देते हिट है | पति और पत्नी पर लिखे पति और पत्नी पीड़ित के पोस्ट भी हिट है |

तो सभी ब्लॉगर इन फार्मूलों को याद रखे और एक बार आजमा कर जरूर देखे |

#हिन्दी_ब्लॉगिंग 

June 06, 2017

भारत से पहला अंतरिक्ष यात्री कौन ------mangopeople

                             




                                                          भारत अंतरिक्ष विज्ञानं में रोज नई ऊँचाइयाँ छू रहा है | अब सुना है जल्द ही भारत अपने ही जमीन से अपने ही रॉकेट से अपना पहला यात्री अंतरिक्ष में भेजने वाला है | स्पेस सूट तैयार है बस सरकार की तरफ से कुछ हजार करोड़ का आवंटन होना है और एक बार फिर हम पूछ सकेंगे की अंतरिक्ष से गाय , माफ़ कीजियेगा मतलब भारत कैसा दिख रहा है | सोचिये की जब हजार करोड़ रुपये सरकार दे रही है तो अंतरिक्ष यात्री भी कोई ख़ास और सरकार का प्रतिनिधि हो तो क्या बुराई है | मै तो कहती हूँ  प्रतिनिधि क्या खुद सरकार मोदी ही हो तो क्या बुराई है | वैसे भी जो काम उन्हें ५ सालो में करना था वो उन्होंने मात्र ३ सालो में ही दुनिया की गोलाई नाप कर पूरा कर दिया है , बाकि के दो साल अब क्या करेंगे |  अच्छा हो अगले दो सालो में अंतरिक्ष और ग्रहो की नपाई का लक्ष्य रख लिया जाये | इससे साफ साफ दूनिया को सरकार द्वारा हो रहा विकास भी दिखेगा | कहा वो पिछले तीन सालो में हवाई जहाज से बस दुनिया नाप रहे थे और कहा अब रॉकेट से अंतरिक्ष घूम रहे है | रातो रात विकास न केवल पैदा जायेगा उसकी बढ़त भी अंतरिक्ष तक हो जायेगी | हर अत्तवार ( रविवार , ईतवार ) उनके मन की हमने खूब सुनी | वहा ऊपर अंतरिक्ष से बोलेंगे तो सारी दुनिया सुनेगी ( सुनना पड़ेगा ) | क्या पता उनमे मन की फ्रीकवेंसी किसी अंतरिक्षवाले के मन  फ्रीकवेंसी से मेल खा जाये और पहले एलियन या किसी ग्रह पर जीवन की खोज का महा उपलब्धि हमारे हाथ लग जाये | सोचिये कितना सुन्दर दृश्य होगा प्राइम टाइम पर दुनिया के हर चैनल पर लाइव आ रहा होगा , एलियनों की भारी भीड़ में दिया जा रहा उनका भाषण और मोदी मोदी के नारो से गुंजयमान हो रहा पूरा अंतरिक्ष |  आह कितना मनोरम दृश्य मै तो कल्पना मात्र से ही रोमांचित हो रही हूँ |

                                 पर अपने ही देश में मोदी के विरोधी बहुत है इसलिए हो सकता है उनका विरोध हो तो हम देश के युवराज राहुल गाँधी को भी वहा भेज सकते है | वैसे भी वो आज कल गीता उपनिषद आदि पढ़ रहे है  और किताबे पढ़ने के लिए शांति अंतरिक्ष से अच्छी और कही नहीं मिलेगी | हो सकता है ऊपर उनको वो ऊपरवाला भी मिल जाये | सारे भगवानो की तरह गीता का उपदेश देने वाले कृष्ण भी उनको वहा मिल जाये | जो उन्हें ज्ञान दे की वत्स मैंने गीता का उपदेश दुश्मनो से लड़ने के लिए नहीं अपनो से लड़ने में मनुष्य कमजोर न हो जाये तो उसके लिए दिया था | वत्स तुम किताब तो सही पढ़ रहे हो लेकिन रीजन गलत दे रहे हो | पहले तुम्हे कांग्रेस में अपने दुश्मनो से लड़ना होगा उन पर विजय पानी होगी उसके बाद बाहर के दुश्मनो का नंबर आयेगा | तो वत्स पढ़ते रहो अपने आस पास के कौरवो का नाश करो , डरो मत कि वो तुम्हारे अपने है | उनमे से बहुतो ने तुम्हे बड़ा बनाने में सहयोग किया है , लेकिन वत्स उनके पीछे उनका अपना स्वार्थ था , तुम तो बस कर्म करो फल की चिंता तुमको करने की जरुरत नहीं है | कुछ गलत हुआ तो बहुत से कांग्रेसी अपने सर पर लेने के लिए सदा तैयार रहेंगे , सो चिंता न करो |  हो सकता है इतना ज्ञान पाने के बाद समझ आये की वो भले पृथ्वी पर आलू की फैक्ट्री नहीं लगा सके किन्तु अंतरिक्ष में उपग्रहों की खेती आसानी से कर सकते है |


                                       वैसे आजकल फैशन निष्पक्ष होने का है जिसे देखो वही निष्पक्ष हुआ जा रहा है |  इसलिए अंतरिक्ष में भी पक्ष और विपक्ष की जगह किसी निष्पक्ष को भी भेजा जा सकता है और वर्तमान समय में केजरीवाल से ज्यादा निष्पक्ष और कोई हो ही नहीं सकता | तो भारत की तरफ से पहले अंतरिक्ष यात्री होने का सौभाग्य उन्हें भी दिया जा सकता है ,बस वो तैयार हो जाये |  हो सकता है वो कहे की रॉकेट से छेड़ छाड़ की गई है , मोदी उन्हें अंतरिक्ष में भेजने की चाल चल रहे है | हो सकता हो वो कहे कि तुम्हारा ये स्वदेशी मोदी इंजन नहीं चलेगा , हम इसमें अपना  सौरभवाला इंजन लगायेंगे | कल हुए सफल प्रक्षेपण को भी हो सकता है नकार दे  बोले सब मिले हुए है इसरो भी चुनाव आयोग की तरह मोदी से मिला हुआ है | ये सब उन्हें जान से मारने की चाल है | हम अंतरिक्ष में तो जायेंगे लेकिन अपने रॉकेट से ,  सौरभ ले आओ अपना दिवाली  रॉकेट और मान जा ले आ  तेरी खाली की गई बोतले किस दिन काम आयेगी | अब हम बताएँगे इसरो को कि कम पैसे और कम समय में  किसी रॉकेट से अंतरिक्ष में किसी को कैसे भेजा जाता है | वहा जायेंगे और सारे उपग्रहों के मदरबोर्ड बदल डालेंगे फिर सब पर हम नजर रखेंगे | 

April 22, 2017

जो सरकारी डॉक्टर प्राइवेट न बैठे तो -------mangopeople



          जो सरकारी डॉक्टर प्राइवेट न बैठे तो किसी छोटे कस्बे में किसी मरीज का क्या हाल हो सकता है , इससे जुड़ा अपना अनुभव बता रही हूँ |  मेरी बेटी ९ महीने की थी जनवरी का पहला सप्ताह था मै अपने ससुराल में थी , जगह गांव नहीं छोटा शहर था |  बिटिया के लिए पहली ठंडक थी और उसके लिए अचानक से मौसम में आया बदलाव भी था | नतीजा ६ दिन बाद उसकी तबियत ख़राब हो गई अब पूछा गया की किस डॉक्टर को दिखाया जाये |  यहाँ के सरकारी में तो नहीं जाउंगी , पता चला वहा जा कर वो कई दूसरी बीमारियों का संक्रमण ले कर आ जाएगी और निजी में मुझे पूरी आशंका थी की यहाँ ज्यादातर झोलाछाप डॉक्टर मिलेंगे | ननद ने अपने बेटी के डॉक्टर का नाम पता दिया जब पूछा की क्या एमबीबीएस है  तो जवाब था पता नहीं  | फिर जिठानी ने अपने बच्ची के डॉक्टर का पता देने के लिए डॉक्टर का पर्चा दिया उसको देख कर तो मेरे होश ही उड़ गये | वो एक दवा की दुकान का लेटर हेड था जिसमे डॉक्टर का नाम पता भी नहीं था |

                                                      पतिदेव बोले  चलो एक बार दिखा देते है , मैंने साफ इंकार कर दिया एक इतनी छोटी से बच्ची के लिए एक ही गलत टेबलेट बहुत होता है ,ऐसे डॉक्टर को कैसे दिखा दू जिसके पर्ची पर उसका नाम तक नहीं है|  अंत में मैंने कहा चलो ननद वाले डाक्टर के पास जाते है शायद इन्होने ने न देखा हो वो हो ढंग का डॉक्टर | वह जा कर पता चला उनके कम्पाउंडर तक को नहीं पता की डॉक्टर साहब ने कौन सी डिग्री ली पड़ी है | मेरी हालत ख़राब हो गई अब क्या करेंगे तभी जेठ जी का फोन आया की वही पास में ही सरकारी अस्पताल का पुराना डॉक्टर निजी प्रेक्टिस कर रहा है पिछले साल ही उसका ट्रांसफर हुआ है दसियो साल से बाहर अस्पताल बना कर चला रहे है , तो हफ्ते में तीन दिन अब भी आते है | वहां की भारी भीड़ देख मेरी हालत ख़राब हो गई,  लो यहाँ का नजारा तो बिलकुल सरकारी अस्पताल वाला है तभी पड़ोस के लडके मिल गये , क्या हुआ भैया से शुरू हुए और ये तो एमरजेंसी केस है कर के सीधा डॉक्टर के पास ले गये |  डॉक्टर साहब रिटायरमेंट की आयु में लगभग आ गए थे और कमाल के थे झट बिटिया के सर पर हाथ रखा और बता दिया हां बुखार तो है, मैंने कहा कम  से कम थर्मामीटर तो लगा लीजिये , मैंने चेक कर लिया १०१ डॉ साहब ने जवाब दिया और मुंबई से आये है सुन  पर्ची लिख दी , मै समझ गया इसे यहाँ का मौसम सूट नहीं किया है यहाँ मच्छर भी है | इतनी भीड़ में उन्हें और व्यस्त रखना मुझे भी अच्छा नहीं लगा | बाहर आ गई और अपने डॉक्टर को मुंबई फोन किया पूरी हालत बताई और दवा का नाम भी यहाँ पर पति के कॉलेज टाईम में किया एमआरगिरी काम आया , उन्होंने कहा ठीक है दवा दे दो , इतनी दूर से बच्चे ही हालत देखे बिना और  कह नहीं पाऊँगी |
   
                                                         लेकिन दूसरे दिन तो बिटिया उलटी भी करना शुरू कर दी डॉक्टर का वो दिन था नहीं कि मिले सब घर में शुरू हो गये इसे अस्पताल में भर्ती करना होगा | मैंने पति से कहा गाडी  मंगाइये हम अभी बनारस जा रहे है  मेरी बेटी की तबियत सच में बहुत ख़राब हो रही है | वापस से अपने  डॉक्टर को फोन किया उन्होंने तुरंत पूछा मलेरिया की दवा में हनी मिला कर पिलाया था की नहीं वो बहुत कड़वी होती है | मैंने कहा मलेरिया लेकिन इसका मलेरिया का चेकअप तो हुआ ही नहीं , वो भी आश्चर्य में बिना चेकअप के डाक्टर ने मलेरिया की दवा कैसे  दे दी , उन्हें लगा की चेकअप में के बाद दवा दी गई है और उन्होंने वो दवा बंद कराई और बाकि चालू रखने को कहा | शाम को पता चला बिना नाम वाली पर्ची भी असल में वर्तमान सरकारी बच्चो के डॉक्टर की है जो निजी प्रेक्टिस कर रहा है इसलिए अपना नाम नहीं दे सकता | फिर उसे जा कर दिखाया वो थोड़ा यंग था लगा ये आज कल का पढ़ा होगा ढंग से देखेगा ना की वो बाबा आदम के ज़माने के पढ़े हुए सरकारी डॉक्टर की तरह जो सब को एक ही भेड  बकरी की तरह देख रहा था | और वास्तव में उसने अच्छे से बच्ची को चेक किया उसका वजन भी किया , (बिना वजन किये बच्चो को दवा नहीं देते वजन के हिसाब से दवा की मात्रा दी जाती है ) दवाये बदली टेबलेट की जगह बच्चो के सिरप लिखे | बिटिया अगले दिन सुबह तक ठीक ठाक थी | ये हालत एक छोटे शहर की थी किसी गांव की क्या हालत होती होगी जहा सरकरी डॉक्टर भी नहीं मिलता | उस तरफ पहले ध्यान दीजिये योगी जी प्राइवेट प्रेक्टिस बाद में बंद करवाइयेगा , सरकारी अस्पताल के बंद होने के बाद मरीज कहा जाये , थोड़े से पैसे के लालच में ही सही लोगो का कुछ तो इलाज हो रहा है |  





    

March 21, 2017

एक यात्रा वृतांत ऐसा भी ------mangopeople


                                                         क्या आप जानते है केवल घुप और पानी से आप अपने बढे वजन को भी नियंत्रित कर सकती है और वो भी खूब खा पी के मौज उड़ाते हुए । इस वजन घटाओ कार्यक्रम का नाम है घुमक्कड़ी , देश में कही भी घूम फिर कर । सबसे पहले वजन घटाने के लिए मन का खुश होना जरुरी है , इसलिए किसी अच्छी सुन्दर जगह का चुनाव करे जहा आप को अच्छी धुप और पानी प्रसन्न रखे , गोवा उनमे सबसे उत्तम है । सुबह सुबह ही समंदर के किनारे पहुँच जाये नाश्ता करते ही पानी की लहरो में कूद जाये ढेर सारे वॉटर स्पोर्ट का आनंद ले, जम कर वही लंच करे फिर पानी से अपने शैतान बच्चो को निकालने की मस्कत में दो और घंटे पानी में पड़े रहे । दोपहर बिताने पर होटल पर पहुंचे और फिर स्विमिंग पुल में कूद जाये एक घंटे वहां मस्ती करे और फिर आधे घंटे बच्चो को वहा से निकालने का उपक्रम करते छोटे पूल और बड़े पूल के बीच दौड़ते रहे । फिर आधे घंटे और सॉवर ले और थक कर सो जाए दो घंटे बाद सज धज बीच पर पहुँच जाये और डीजे सीजे पर बीच पार्टी में घंटो नाचते रहे जब तक घुटने खड़े रखने से इंकार न कर दे । किसी बोरिंग गाने पर जैसे ही आप थक कर बैठेंगे अगला गाना आप का फेवरेट वाला बजेगा और बिन दाए बाये देखे फिर शुरू हो जाये फिर जम कर डिनर करे पास्ता, पिज्जा, भारतीय या कॉन्टिनेंटल जो चाहे खाये  , इस वजन घटाओ कार्यक्रम का यही तो फायदा है खाने पर कोई रोक टोक नहीं है।


                                                         यही धुप और पानी का कार्यक्रम अगले चार दिन करे कभी स्कूबा डाइविंग के नाम पर, कभी गहरे समंदर में लाइफ जैकेट पहन कर तैरने के नाम कर , कभी अलग अलग बीच की सुंदरता के नाम पर कभी रेत में महल बनाने के नाम पर, तो कभी रेत में गले तक किसी अपने को गाड़ देने के नाम पर । पांचवे दिन आप को लगे की इससे ज्यादा भींगे तो अंकुरित हो जायेंगे अब , तो पांचवे दिन पानी को छोड़ दे और घुप का मजा ले । साथ आये लोगो की मांग पर किसी तथाकथित फोर्ट को देखने चले जाये । उसकी मुश्किल सी चढ़ाई और बन रहे रास्तो पर खीजते हुए जब वहा पहुंचे और फोर्ट के नाम पर खालिस पत्थर की दीवारों को देख साथ आये लोग गुस्से में उसे फोर्ट कहने वाले को भलाबुरा कहे तो वहां  लिखी सूचना को दर किनारा कर अपना ऐतिहासिक ज्ञान बघारे कि ये पुर्तगाली राजस्थान से गुजर रहे थे बाहर से एक किला देखा अच्छा लगा लेकिन अंदर जाने को नहीं मिला तो उन्हें लगा पत्थर की दीवारे ही फोर्ट होती है और अक्लमंदों ने उसे ही बना कर फोर्ट घोषित कर दिया । वहाँ से निकले तो पास ही सुन्दर सा शानदार सा बंगला दिखे तो रुक जाये उसे अपना समझे क्योकि मालिक बैंक से आप के ही पैसे ले कर फरार है । बंगले में आप की भी हिस्सेदारी निकलेगी , अपने बंगले के आगे खड़े हो कर दो चार फोटो जरूर खिंचवाए , एक आधा दर दरवाजे के आप भी मालिक निकलेंगे । दूसरे फोर्ट में जा कर भी आप धोखा ही खायेंगे।  फोर्ट के नाम पर लाईट हाऊस देख आयेंगे ।
                                                         गोवा में पानी रेत साथ आप खुली सड़क पर बिना किसी ट्रैफिक  टेंशन के गाड़ी चलाने और लाँग ड्राइव का भी मजा ले सकते है । वहाँ की जो प्राकृतिक सुंदरता है उसके सही से मज़ा लेने के लिए आप चार की जगह दो पहिये का ही प्रयोग करे और कोई भी अरमान हो उन्हें छोड़े नहीं । यदि आप टुच्ची से स्कूटी पर जा रहे हो और आप को अपने पसंद की हार्ली डविंशन न मिली हो चला के फोटो खीचाने के लिए और तभी सामने से शानदार बाइक गैंग निकले जिसमे १५-२० शानदार बाइक्स हो तो मेरी तरह न शरमाये और न बाद में पछताये उन्हें रोक कर उन्ही की बाइक चला कर अपनी तमन्नाये पूरी करे फोटो शोटो खिचाये और ऍफ़ बी पर लगा के भाव खाये ।


चेतावनी :- १- किसी फिल्म में किसी फोर्ट को सुंदर दिखने पर मुंह उठाये न चले आये फिल्मो में धोबी घाट भी अच्छा दिखता है ।
२ - टैनिंग की चिंता से मुक्त हो और ५ दिन बाद चितकबरे दिखने से परहेज न हो तो आराम से गोवा के माहौल के अनुसार छोटे कपडे पहने । 
३ - यदि आप के साथ कोमलांगनिया भी तो तो उन्हें बुरकिनी पहनाये , वरना बेचारे पांचवे दिन सन बर्न से परेशान होंगे और कुछ दिन बाद केचुलिया छोड़ने लगेंगे ।
 ४- किसी भी आम भारतीय धुप से बचाव वाले क्रीम के भरोसे न रहे । 
५- छठे दिन वजन की मशीन पर चढ़ते हुए कपड़ो में भरे ३ - ४ किलो रेत को निकाल कर वजन करे और सिर्फ ५ दिन में ३ किलो कम वजन को देख कुछ महीनो से दौड़ने , टहलने , कसरत और कम खाने वाली तकनीक को जम कर गरियाए और जल्द ही एक बार फिर गोवा आने का वादा करे । 

February 13, 2017

समझदार ढक्कन का वेल एंड टाईन डे ------mangopeople




                                       शादी के बाद पहला वेल एंड टाईन दिन आने वाला था । इस दिन के बारे में जानकारी तो शादी के दो साल पहले हो गई थी | लगा कुछ दिया नहीं तो पतिदेव क्या सोचेंगे सगाई के बाद भी पड़ा था तो मुझे गिफ्ट कुरियर किया था मुझे भी कुछ करना चाहिए । पर तब तक शहर के बारे में ज्यादा पता नहीं था और नेट का ज़माना नहीं था । पहले निचे फूल वाले के पास गई और उससे कहा सुबह एक गुलदस्ता दे दोगे उसने साफ इनकार कर दिया महंगा वाला बोल दिया , भेजने का और पैसे दे दूंगी बोल दिया फिर भी नहीं माना । घर ले के नहीं जा सकती थी उस समय रेंट पर छोटे से घर में रहते थे और घर में सिर्फ जरुरत की चीजे ही होती थी छुपाने के लिए कोई जगह ही नहीं थी । मन मसोस कर एक चॉकलेट खरीद चले आये । 


                                      सुबह उठ कर बाहर निकली तो देखा पड़ोसन के गमले में सुर्ख लाल गुलाब हवा में डोल रहा था , मुस्कुरा कर उसे तोड़ने की इजाजत मांगी , बड़ी समझदार थी तुरंत बोला हा हा ले जाओ । चलो एक फ्री का गुलाब और चॉकलेट का इंतजाम हो गया । पतिदेव फ्रेस हो कर सीधा किचन में आये रोज की तरह हमने भी गुलाब और चॉकलेट दे विश कर दिया और साथ में फूल वाले ने गुलदस्ता नहीं भेजा इसका दुखड़ा भी रो दिया । कही पति ये न समझे की बड़ी कंजूस बीबी है इत्ते में ही काम चला लिया । जबकि ये सब देख सुन उनके चेहरे की हवाइयां कुछ उडी लगी । हम भी समझदार थे झट समझ लिया बेचारे मेरे लिए कुछ नहीं लाये सो परेशान है । विवाह नया नया हो और हनीमून पीरियड चालू हो तो दोनों को एक दूसरे की परेशानी अपनी लगती है और प्रयास एक दूसरे को कंफर्टेबल करने की होती है । सो हमने भी एक बार भी जिक्र नहीं किया तुम क्या लाये एक दम सामान्य रही । नास्ते के बाद बॉस का फोन आ गया मीटिंग में कब आ रहे हो तो बोल दिया सर इधर रोड पर कुछ हो गया है रोड ब्लॉक कर दिया है आने जाने का मुझे आने में थोड़ा देर होगा सर और हम पीछे खड़े मुस्कुरा रहे है ये क्या है । ओह ! शायद दिन भुलने और कुछ नहीं लाने की गलती को ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है और मेरे साथ कुछ और समय गुजारने के लिए बहाने मारे जा रहे है , हमने भी कहा चलो बढ़िया है । 


                                      लेकिन वो बतिया मुझसे रहे थे पर नज़रे घडी पर बार बार जा रह थी , हमने भी उनकी चिंता दूर की कोई बात नहीं ऑफिस जाओ शाम के कही चलेंगे । वो तैयार होने लगे तभी दरवाजे की घंटी बजी और मैं सोचने लगी इत्ती सुबह कौन आया है । दरवाजा खोलते ही खुश हो गई , सामने बंदा फूलो का गुलदस्ता लिए खड़ा था । मन ही मन सोचा अरे वाह फूल वाले ने आखिर फूल भेज ही दिए , लेकिन गड़बड़ हो गई ना पति को दरवाजा खोलना था , अब मुझे ही जा कर देना होगा । उसके जाने के बाद जैसे ही दरवाजा बंद किया तो फिर अफसोस हुआ अरे उसे तो मैंने कोई टिप ही नहीं दिया , फिर तुरंत ही दूसरा ख्याल आया अरे मैंने तो उसे कल गुलदस्ते के भी पैसे नहीं दिए थे , और फिर तुरंत ही ये ख्याल आया एक मिनट मैंने तो उसे अपने घर का पता भी नहीं दिया था । तब जा कर ढक्कन दिमाग की बत्ती जली ओह ये तो टू मी फ्रॉम वो है :) और तभी वो धीरे से बैडरूम से झाँक कर बोले कौन था , मेरे हाथ में गुलदस्ता देख मुस्करा के बाहर आये और मैं स्वीट हार्ट, जानेमन , जानू , थैंक्यू जैसा कुछ नहीं कहा सीधा नाक फुला कर कहा ये फूल वाला कितना दुष्ट है मेरी नहीं सुनी उसने अभी निचे जाउंगी तो उसे चार सुनाती हूँ ।


                                    वो भी शुरू हो गये शांत रहो दो मिनट अच्छे से साँस लेने दो, जान हलक में अटकी थी कब से, अब जा कर शांति मिली । फिर बताया मैंने फूल के लिए कल ही बोल दिया था लेकिन देर से देने के लिए बोला था ताकि मेरे जाने के बाद तुम्हे मिले जब तुमने सुबह अपना किस्सा सुनाया तभी लगा फस गया मैं तो , अब अगर मैं घर से बाहर गया और गुलदस्ता बाद में आया तो तुम जिंदगी में कभी नहीं मानोगी की मुझे याद था और मैंने पहले ही फूलो के लिए बोला था । तुम्हे लगता तुम्हारी बात सुन कर मैंने फूल भेजे , इसलिए ऑफिस के लिए नहीं निकल रहा था सोच लिया था फूल आ जायेंगे तो ही निकलूंगा घर से । प्यार व्यार का पता नहीं पर इस पर हम दोनों हंसे बहुत देर तक थे ।

February 06, 2017

शर्मा जी बहुत शरीफ है -------mangopeople




                                                                शर्मा जी बहुत शरीफ , नेक इंसान है , पूरा मोहल्ला उनकी शराफत और नेकी का गवाही देगा । बस एक दाग था की उनके साथ उठने बैठने वालो में कुछ लंपट बुढऊ थे और कुछ मोहल्ले के जवान आवारा लौंडे । एक दिन शर्मा जी की जोशी जी से कहा सुनी हो गई शर्मा जी बहुत नाराज हो गये मन ही मन सोचा की इनकी तो हम एक दिन इज्जत उतारेंगे , कही मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहेंगे , वो भी बिना अपनी शराफत छोड़े । शर्मा जी ने एक शाम अपने घर बैठकी की उठने बैठने वाले लगभग सभी आये । शर्मा जी ने बात छेड़ी " जमाना बड़ा ख़राब हो गया है " सब ने हां में हां मिलाई और ज़माने को ख़राब होने पर लानत भेजी । बात और आगे बढ़ाते एक और लाइन जोड़ी "लड़कियों के लिए समाज सुरक्षित नहीं रहा " ज्यादातर ने उनकी हां में फिर हां मिलाई , और कुछ लड़कियों को समझाईश देने लगे तो कुछ युवाओ को ।
     
                                                               अब शर्मा जी उस तरफ मुड़ गये जिस तरफ लड़कियों को ही संभलने की सलाह दी जा रही थी । आवाज थोड़ी और तीखी की और अफसोस करते हुए कहा " आज कल की लडकिया भी कम नहीं है , उनका चरित्तर भी ख़राब हुआ है ।" जिन जिन की बेटिया थी सब ने काम का बहाना बना सबको राम राम कर चल देने में भलाई समझी । बाकी कईयो ने जोर का उनके हां में हां मिलाई और लड़कियों के ख़राब चरित्र के किस्से सुनाये । माहौल गर्म हो गया था कुछ और महफ़िल से चलते बने जो शर्मा जी से कम शरीफ थे समाज में । अब पूरी मंडली वही बची थी जिसकी चाहत शर्मा जी को थी अब वो खुल कर बाहर आये । " जोशी जी की लड़की की क्या उमर होगी १४-१५ साल की " , बीच में एक लौंडे ने टोका "अरे नहीं १६ साल से एक दिन कम न होगी १० वि में है फलाने स्कूल में , बड़ी सुन्दर है " शरीफो की छट चुकी भीड़ को उसने भी भाप लिया था । दूसरा और खुल कर सामने आया "चचा  फलाने कोचिंग में पढ़ती है उतना दूर जाती है साईकिल से आते आते रोज राती को ८ बजे घर पहुचती है।"  मोहल्ले की लड़कियों की रक्षा के लिए उनके हर आने जाने की खबर रखने वालो में से एक और ने बोला "बीच में वो फलाने सड़क से भी गुजरती है , कितना सन्नाटा रहता है वहा देखा है ।"

                                                               अब तक शरीफ शर्मा जी माहौल अच्छे से समझ चुके थे और लौंडे क्या है वो भी भांप चुके थे । शर्मा जी शुरू हुए " क्या बात कर रहा है वो सड़क वो तो बड़ी खतरनाक है लड़कियों के लिए , उस सड़क पर तो कितने कांड हुए है लेकिन आज तक कोई नहीं पकड़ा गया , लाइट उसपे एक दम कम रहती है किसी का चेहरा भी नजर नहीं आता , इसलिए कभी कोई बता ही नहीं सका की कौन और कितने लोग थे । आदमी जो चाहे कर ले , झाड़िया देखि है कितनी बड़ी है । कितनी बार तो लडकिया कुछ कहती ही नहीं है , अब सोचो कौन सी शरीफ घर की लड़की ज़माने को आ कर बतायेगी की उसके साथ क्या क्या हुआ । सब चुपा जाती है , और करने वालो का कुछ नहीं होता । बताओ जोशी जी की लड़की उस रास्ते से आती है । कल तो शनिच्चर है ना कल तो सड़क के बाहर भी सन्नाटा ही रहता है ।" महफ़िल ख़त्म हुई ।

                                                           शनिच्चर रात देर हो गई जोशी जी की लड़की घर नहीं पहुंची जोशी जी चिंता कर रहे थे तभी थाने का हवलदार जोशी जी के घर आया । शर्मा जी की आँखे वही गड़ी थी पुलिस देखते लप्प से जोशी जी के यहाँ दौड़े ।
 " क्या हुआ जोशी जी , पुलिस काहे आई है " जोशी जी के होश उड़ गये थे उनकी पत्नी रोना शुरू कर दी थी ।
 " क्या हुआ भाई बताओगे "
" अरे शर्मा जी बिटिया के साथ कोनो कुछ किये है ई हवलदार अस्पताल बुलाने आया है "
" का कह रहे है हिम्मत रखे चलिये आप के साथ हम भी अस्पताल चलते है "
तब तक मोहल्ला जोशी जी के घर के बाहर इकठ्ठा हो गया था । मोहल्ले वाले को देख शर्मा जी और जोश में आ गये ऊँची आवाज में पूछा ।
" का हुआ है हवलदार बताओ का हुआ , कोई क्या किया है जोशी जी की लड़की के साथ । तुमको मालुम है लड़की घर की इज्जत होती है लड़की को कुछ हुआ तो परिवार कही मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहता । बताइये जोशी जी पर क्या बीतेगी । "
ये सब सुन मोहल्ले में और हलचल मच गई और खुसुर फुसुर शुरू हो गई ।
" देखिये शांति बनाये रखिये क्या हुआ है हमको नहीं पता हमको तो बस अस्पताल से दरोगा जी भेजे है जोशी जी को अस्पताल लियाने को । इससे ज्यादा हम कुछ नहीं जानते । जोशी जी चलिए , कह रहे थे की हालात ख़राब है । "

                                                                    जोशी जी उनकी पत्नी और शर्मा जी के साथ मोहल्ले के कुछ और लोग अस्पताल पहुंचे । देखा अस्पताल के एक बेंच पर जोशी जी की बिटिया एक महिला हवलदार के साथ बैठी थी हाथ में पट्टी बंधा था थोड़ा कपड़ा भी चुमुडियाया था और मुंह पर दू चार ठो खरोच लगा था । जोशी जी की बिटिया अम्मा बाउजी को देखते उनसे लिपट कर रोने लगी । जोशी जी और उनकी पत्नी बार बार पूछे जा रहे थे की क्या हुआ है पर उ रोना ही बंद नहीं कर रही थी । तभी सामने से पुलिस मोहल्ले को दो आवारो को पकड़ कर ले आ रही थी एक के सर में पट्टी बंधी थी और हाथ में पलस्तर और दूसरे की नाक फूली पड़ी थी और मुंह सूजा ।
" पापा आज हम ट्यूशन से आ रहे थे तो रास्ते में ई लोग हमको परेशान करने लगे हमको धक्का दे कर साईकिल से गिरा दिये । ई बबलुआ के तो नाक पर हम एक मुक्का मारे और ई चिंटुआ का तो हाथ ऐसा मरोड़े की टूट गया होगा । अंदर छग्गन चाचा का लड़का है उसके तो आँखि में दुन्नो उँगरिये ही घुसा दिये फुट गई होगी और एक ठो और था उसको हम पहचाने नहीं उसके तो दोनों पैर के बीच ऐसा घुटना मारे है कि अब जिंदगी में कोनो लड़की नहीं देखेगा । "
पुलिस ने कहा वो दोनों अंदर भर्ती है उनकी हालात कुछ ठीक नहीं है उनके घर भी संदेशा भेज दिया है । ई दुन्नो ठीक है थाने ले जा रहे है । जोशी जी थाने आ कर रपट लिखवा जाइये फिर इन सबको जेल भेजते है ।
जोशी जी और उनके पत्नी के जान में जान आई तभी लौंडो के परिवार वाले वहा आ गये और जोशी जी की मिन्नतें करने लगे । जोशी जी जवान लडके है गलती हो जाती है ,छोड़ दीजिये पुलिस में मत जाइये मोहल्ले की बात है जीतनी सजा मिलनी थी आप की बिटिया ने कूट कर दे दी आगे की जिम्मेदारी हम लेते है । हम भी कूट कर ठीक कर देंगे । किसी ने कहा की आप भी दो चार मार लीजिये पर थाने मत जाइये । तो किसी ने उनकी और बेटी की इज्जत की दुहाई दी , इनका तो जो हुआ वो हुवा आप की इज्जत ख़राब होगी । तो किसी ने कहा की मामला बढ़ेगा तो बिटिया का विवाह नहीं होगा । तभी इन सबके बीच शरीफ शर्मा जी बाहर आये और बोले आप सभी को शर्म आनी चाहिए ऐसा कहते , जोशी जी आप को जरूर पुलिस में जाना चाहिए और इन सब पर केस करना चाहिए । तभी सभी के होश ठिकाने आयेंगे और समाज सुरक्षित होगा आप को डरना नहीं चाहिए मैं आप के साथ हूँ चलिये , कोई आप के साथ हो या न हो । आप की बिटिया बड़ी बहादुर है ।   जोशी जी ने शर्मा जी को बहुत धन्यवाद दिया और मोहल्ले में शरीफ शर्मा जी अब बहादुर और हिम्मती  के रूप में भी पहचाने जाने लगे । जबकि ये कह शर्मा जी ने मन ही मन सोचा की चलो मैं इस कांड से बच गया जो किसी ने मेरा कैसे भी नाम लिया तो कह दूंगा मैंने ही पुलिस में जाने के लिए कहा तो मुझे बदनाम कर रहे है ।

                                                                              चारो लडके जेल चले गये , शर्मा जी अब भी शरीफ है , जोशी जी लेकिन अब भी परेशान है क्योकि कुछ महीनो बाद उन्हें सुनाई पड़ा की मोहल्ले में कुछ और ही खुसर फुसुर चल रही थी कि जोशी जी की बिटिया का कोई छेड़ छाड़ नहीं हुआ था वो तो लव ट्रायंगल का नतीजा था । जोशी जी की बिटिया दो दो के साथ चक्कर चला रही थी एक दिन सब आपस में भीड़ गये । जोशी जी की तो बिटिया का चरित्तर ही खराब है । आवारा लडके जेल में है लेकिन शरीफ शर्मा जी अब भी मोहल्ले में ऐस से थे अपनी मंडली  साथ बिलकुल शरीफ बने हुए । 

January 10, 2017

रोओ रुदालियों अपना अपना रोना रोओ -----mangopeople




                                                    बहुत समय पहले की बात है एक बार एक पति ने अपने मरने का नाटक किया ताकि देख सके रुदाली बुला कर रोने का दावा करने वाली पत्नी कितना रोती है । पत्नी ने पति के मरते ही रुदाली बुला ली तय हुआ दो मक्के की रोटी और दो रुपये पर रुदाली रोयेगी । रुदाली ने सर्त रखी कि चूल्हे पर मक्के की रोटी लगा दी जाये उसके पकने तक रो लेगी । पत्नी ने रोटी लगा दी और दोनों ने रोना शुरू कर दिया पत्नी ने रोना शुरू किया कि हाय रुदाली उसके दो समय की रोटी ले जा रही है , एक तो कमाने वाला पति मर गया उस पर से दो रूपये और गये । रुदाली ने रोना शुरू कि हाय रोटियां तो ये देख नहीं रही कही जल गई तो खाने लायक भी न रहेगी पैसे देने से पहले इतना रो रही है पता नहीं पैसे मुझे देगी भी नहीं । कुछ देर दोनों अपना रोना रोती रही मरने का नाटक कर रहा पति झुंझुला कर उठ बैठा , बोला मरा तो मैं हूँ और मेरे लिए कोई रो ही नहीं रहा है , दोनों के दोनों अपने लिए रो रहे है ।

                       कल एक सैनिक ने सीमा पर अपने खाने पिने के ख़राब हालातो के बारे में एक वीडियो पोस्ट की।  मंशा हालात सुधारने की रही होगी , सरकार तक वहां हो रही धांधलियों की खबर देने की रही होगी । किन्तु यहाँ मोदी भक्त और मोदी विरोधी रुदालियाँ अपना रोना ले कर बैठ गई । एक सीमा पर सैनिको को ख़राब खाने की सप्लाई के लिए सीधा प्रधानमंत्री और सरकार को ही दोषी बना रहा है दूसरा पिछले ७० सालो का हिसाब दे सैनिक के अगले पिछले का पोस्मार्टम कर रहे है । उन दोनों को सैनिक उसके बुरे हालातो , उसकी समस्या से अब कोई मतलब ही नहीं है । एक मोदी और सरकार को जिम्मेदार बता कर उसे गालियां दे रहा है और दूसरा बेमतलब के तर्क दे कर उन्हें बचा रहा है । सैनिको की समस्याओ पर चर्चा कौन करेगा , उनके लिए बेहतर हालातो के बारे में कौन आवाज उठाएगा , फिलहाल कोई नहीं , क्योकि सोशल मिडिया की सभी रुटे सीधे जा कर राजनीति के चौराहे पर मिलती है , और हर समस्या को बस एक ही नजर और सोच से देखा जाता है , इसलिए सभी लाईने उसी में व्यस्त है ।


                             ये कोई पहली बार नहीं है , सूना है कि युद्ध के दौरान सैनिको की बंदूके जाम हो गई थी , सूना है की एक रक्षा मंत्री को अफसरों को धमकी देनी पड़ी थी कि यदि सैनिको के लिए बर्फ पर चलने वाली गाड़ियों की फाईल तुरंत पास नहीं किया गया तो उन अफसरों को सियाचिन के सीमा पर भेज दिया जायेगा , सूना है सैनिको के लिए जो ताबूत ख़रीदा गया उसमे भी घोटाले हुए , सूना है मैडल लेने के लिए कुछ बड़े अफसरों ने फर्जी बहादुरी दिखाई , सुना है हथियारों की और सैनिको के लिए लिए जा रहे साजो सामानों पर सेना के अंदर भी कमीशन लिया जाता है , सुना है की तलाशी के नाम पर लोगो को लुटा भी गया है , सूना है सैनिको की विधवाओ के लिए बनी इमारतों में से सैनिको को ही बेदखल कर दिया गया । सुना है सैनिको के मदद के लिए बने एक फंड में  पैसे न के बराबर आये , सोशल मिडिया में जवानों की विरता की कसमे खाने वाले और जवानों के नाम पर सरकारो को कोसने वाले किसी ने भी पैसा वहा नहीं भेजा ।   बहुत कुछ सुना है , पर चर्चा नहीं होती क्योकि इस समय देश में दो ही पंथ और पंथी है , पागलपंथी और घटियापंथी । रोओ रुदालियों अपना अपना रोना रोओ ।












January 09, 2017

चीजो का नॉनवेज एंगल --------- mangopeople




                                                     ज़माने पहले कही पढ़ा  पहले नाइस का अर्थ बेवकूफ होता था फिर धीरे धीरे इसका मतलब बदल गया , सोचा क्या फालतू की बात लिखी है ।  एक शब्द को कई जगह कई तरीके  से प्रयोग कर सकते है ये बात तो समझ आती है किन्तु उसका मतलब ही बदल जाये वो भी बिलकुल विपरीत अर्थ हो जाये, ये कैसे हो सकता है । बाद में समझ आया की हो सकता है ।  सालो बाद एक फिल्म के पोस्टर और प्रचार में " तेरी लूंगा " "तेरी कह कर लूंगा" जैसे वाक्य प्रयोग हुए तो समझ न आया की आखिर कहा क्या जा रहा है ।  इससे जुड़ा और एक वाक्य  "तेरी बजेगी" या " तेरी बजायेंगे " भी सुन रही थी । लगा जब हम छोटे थे तो ली जाती  खबर मतलब आप को डांट पड़ेगी और बजती थी बैंड मतलब अब पिटाई होगी । इससे ज्यादा इसका कोई मतलब नहीं था । लेकिन धीरे धीरे सुन कर और लोगो के बोलने के अंदाज से इसके आधुनिक मतलब पता चल गये और मान लिया की अब आगे से इसका आधुनिक वर्जन यानि नॉनवेज वर्जन को ध्यान में रखा जायेगा और इसका प्रयोग नहीं किया जायेगा । 

                                                     ये पहली बार नहीं था , मुम्बई में जब पहली बार आई तो एक और शब्द सुना  "फटी पड़ी है" । लोगो के बोलने का अंदाज ऐसा था कि कभी लगे वेज कभी लगे नहीं इसमे कुछ तो नॉनवेज है । एक दिन पति से पूछ ही लिया कि ये " फटी पड़ी" में क्या  फट रहा है , हमारा तो दिमाग ही फटता है पर लोग जिस तरीके से बोलते है उससे लगता है कि कुछ नॉनवेज सा फट रहा है ।पति ने हंसते हुए कहा कि है तो नॉनवेज लेकिन तुमको  क्यों जानना है कि क्या फट रही है । जवाब दिया पता तो चले की अंडा है या मिट ताकि कोई बोले तो उसे टोका जा सके , वैसे क्या जहा मिर्ची लगती है वही । ठहाके मारते उन्होंने कहा अरे वाह ये पता है कि मिर्ची कहा लगती है । मैंने कहा नहीं वो भी लगता था कि मिर्ची बदन में  मुंह में लगती होगी एक दिन एक दादी टाईप ने खुल कर पूरा बोला कि तुम्हारी कार में मिर्ची लगी तब पता चला की ये तो बोलने वाले की  इच्छा पर है कि वो मिर्ची कहाँ  लगाये । उन्होंने आश्चर्य में पूछा कार में मिर्ची कैसे लगती है । अरे यार उसका हिंदी सोचो ना , ग्रीन मैंगो मच की तरह ,अभी मेरे दिमाग में  नॉनवेज चल रहा है तो उसको हिंदी में नहीं बोल पा रही , गाली जैसा लग रहा है । उनका हस हस बुरा हाल बोले पर गाली को थोड़ा अलग तरीके से बोलते है । मैंने कहा जाने दो हमें पता है किसे क्या कहते है , अभी दिमाग जरा उधर चल रहा है तो वही लग रहा है नहीं तो बोलने में क्या था । कुछ साल बाद देखा मेरी एक मित्र भी ये बोलती , अच्छा तो नहीं लगता लेकिन कभी टोका नहीं एक दिन उन्होंने बच्चो के लिए बोल दिया तो मुझे लगा की उन्हें भी इसका मतलब  नहीं पता होगा ।  तुरंत उन्हें ज्ञान दिया बेचारी शर्म के मारे हाय हाय मुझे तो पता ही नहीं था करती रही । 


                                               कुछ दिनों पहले फेसबुक पर पढ़ा आलू कचालू बेटा  कहा गए थे जैसा बचपन में गाई कविता , जो हर बच्चा धड़ल्ले से गाता आ रहा है उसका भी एक नॉनवेज एंगल है । वहा लोगो के कमेंट पढने के बाद जब दुबारा इस कविता को पढ़ा "आलू कचालू बेटा कहाँ गये थे मम्मी के बिस्तर पर सो रहे थे " तो लगा बस एक गन्दा दिमाग होना चाहिए आप आराम से इस कविता मतलब नॉनवेज कर सकते है । कविता क्या एक गंदा दिमाग किसी भी चीज का एक नॉनवेज एंगल देख सकता है ।