December 01, 2019

विरोध का रचनात्मक रूप -------mangopeople

दुनियां भर के युवा किसी ना किसी बात पर विरोध प्रदर्शन कर रहें हैं और उनका विरोध प्रदर्शन कई बार कितना मजेदार और रचनात्मक हैं उसके कुछ उदहारण देखिये |
इराक में वहां की हालातों को लेकर कई तरह के विरोध प्रदर्शन हो रहें हैं | फिर सरकार ने तय किया कि अब इन विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए पुलिस अपने प्रशिक्षित कुत्तों को भी लेकर जाएगी | इस पर प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अब वो भी विरोध में अपने पालतू जानवरों को लेकर विरोध करेंगे | कोई मामूली जगह तो वो हैं नहीं वो तो इराक था तो एक बंदा विरोध में अपना पालतू शेर ले कर आ गया |
गर कुत्ता मुकाबिल हो तो शेर निकालिये

हांगकांग के विरोध प्रदर्शन से तो सभी वाकिफ़ ही हैं | वहां तो अब युवाओं ने पुलिस के हथियार के मुकाबले अपना तीर धनुष भी बना लिया हैं | जब एक बिल्डिंग में घुसे प्रदर्शनकारियों को , पकड़ने के लिए पुलिस गई , तो उन लोगों ने पहले ही इंतजाम कर रखा था | उन सब ने अपनी बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग तक रस्सियां बाँध रखी थी | कुछ उस पर से लटक कर , तो कुछ उस पर चल कर तो कुछ महान खिलाड़ी उस पर मोटरसाइकिल चला कर निकल गए |
तू पात पात मैं डाल डाल

सबसे ज्यादा अत्याचार लेबनान के लोगों पर हो रहा हैं | सुनेंगे तो आपके भी आँखों में आँसू आजायेंगे भविष्य अंधकारमय और डरावना लग़ने लगेगा | वहां की सरकार ने शोसल मिडिया के प्रयोग पर टैक्स लगा दिया हैं | सुन कर चीख निकल गई ना , डर कर दिल की धड़कन बढ़ गई होगी बस ये सोच भर के कि ऐसा हमारे देश में हो गया तो क्या होगा | अब इस बात पर तो बड़े से बड़ा भक्त भी मोदी के खिलाफ हो जायेगा तो सोचिये लेबनानी का विरोध प्रदर्शन कितना बड़ा होगा | तो उन सबो ने वहां की संसद के सामने डीजे वाले को बिठा दिया जो दिन रात जोर जोर से डीजे बजाता हैं और लोग चौबीस घंटे वहां नाच गा कर विरोध प्रदर्शन कर रहें हैं |
डीजे वाले बाबू गौरमेंट की बैंड बजा दे

सब छोड़िये अपना पडोसी अपना खानदानी दुश्मन अपना पकिस्तान भी इसमें पीछे नहीं हैं | इमरान ने ताव में भारत से व्यापार बंद करा दिया नतीजा वहां टिमाटर ( टमाटर ) के भाव ढाई सौ रुपये से ऊपर तक चला गया | एक मोहतरमा अपने निकाह में टिमाटर के बने गहने पहन पर बैठ गई | भाव तो चिलगोजो के भी बढ़ गए थे तो उन्होंने बताया लोगो ने निकाह में जो लिफाफे थमाए उसमे पैसे नहीं चिलगोजे थे |
ये गौरमेंट सच में बिक गई हैं

बताओं हमारे यहाँ भी ना जाने कितने विरोध प्रदर्शन हो रहें हैं लेकिन एक भी ढंग का नहीं हैं जिसका उदहारण यहाँ दिया जा सके | बहुत अफसोस की बात हैं अपने देश के युवाओं की रचनात्मकता ख़त्म हो गई हैं , काहें की विरोध के नाम पर सब सियासत ज्यादा कर रहें हैं , विरोध कम |


November 30, 2019

मम्मी तुम डेड होने वाली हो --------mangopeople

जब बिटिया को पता चला कि उनके मम्मी के भी मम्मी पापा होते हैं तो स्वाभाविक रूप से ये भी याद आया की पापा के भी मम्मी पापा होंगे | तो पापा से सवाल किया गया
"तुम्हारे मम्मी पापा कौन हैं पापा "
" तुम्हारे दादा दादी  मेरे मम्मी पापा हैं "
"वो कौन हैं "
"तुम नहीं मिली हो | वो भगवान जी के पास हैं  " तब तक बिटिया को इसका मतलब पता चल चुका था |
"वो कैसे डेड हो गए "
"वो बीमार थे "
"तुम उनकी देखभाल नहीं करते थे क्या " बच्चे कभी कभी इतनी क्रूरता से सवाल कर सकते हैं या ऐसी बाते बोल सकते हैं अपनी मासूमियत में कि हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं | ये बाते पापा जी के लिए असहज करने वाली थी और उनकसे जवाब देते ना बना | फिर इस बातचीत के बीच मम्मी को आना पड़ा |
"अरे नहीं बाबू ऐसा नहीं हैं | उनकी मम्मी बहुत बीमार थी तब पापा बहुत छोटे थे वो उनकी देखभाल नहीं कर सकते थे "
" तो बहुत बीमार होने पर लोग डेड हो जाते हैं "
"नहीं हर बार ऐसा नहीं होता कभी कभी हो जाता हैं " इस बार सावधान थी कि कोई गलत मैसेज बिटिया तक ना जाये | वो ये ना समझ ले की बीमार होने के बाद लोग मर जाते हैं |
" और दादा जी की डेथ कैसे हुई "
"वो भी बीमार थे ओल्ड हो गए थे , इसलिए उनकी डेथ हो गई | सभी लोग धीरे धीरे ओल्ड हो जाते हैं और उनकी डेथ हो जाती हैं " लग रहा था किसी तरीके से उसके मन से ये निकाल दूँ की पापा की वजह से उनके मम्मी पापा की डेथ हो गई और यही हो गई असावधानी जो कुछ समय बाद समझ आई |
महीने बीते और एक दिन अपनी मित्र  से फोन पर लंबी बात मजे से किये जा रही थी | बीच में बिटिया दो चार बार मम्मी सुनो कहा हमने उन्हें चुपचाप खेलने को कह बतियाते रहें | जब फोन रखा तो देखा ये दूसरे कमरे में सुबक सुबक रो रहीं हैं | मैं घबरा गई क्या हो गया , बार बार पूछा क्या हुआ तब जा कर इनकी जुबान खुली |
" मम्मी तुम डेड होने वाली हो "
"क्या "  अब ऐसे मौके पर हर भारतीय माँ के मन में जो आता हैं वही मेरे मन में आया |  हाय मेरी मासूम सी बच्ची जरूर किसी ने  मेरी बिटिया से अनाप शनाप सीखाया हैं | कोई तो हैं जिसे हमारी खुशियों से समस्या हैं बताओ ये क्या सीखा दिया इसे |
" नहीं बाबू ऐसा नहीं हैं किसने कहा तुमसे कि  मम्मी की डेथ होने वाली हैं "
" तुम फोन पर कह रही थी ना तुम ओल्ड हो गई हो ,  अब तुम डेड हो जाओगी "
स्यापा सावधानी हटी दुर्घटना घटी | फोन पर बात करते समय मजाक में अपनी मित्र से किसी बात पर मजाक में कह दिया कि ओल्ड हो गई हूँ और बिटिया उसे सुन अपना पिछले मिला ज्ञान से मिला इस नतीजे पर पहुँच गई खुद ब खुद |
"नहीं बाबू मैं ओल्ड नहीं हुई हूँ और ना ही मैं डेड होने वाली हूँ "
" और पापा "
"पापा भी नहीं हुए हैं अभी हमें ओल्ड होने में बहुत समय हैं तुम बहुत बड़ी हो जाओगी तब होंगे "
" मैं बड़ी हो जाऊँगी तब तुम लोग डेड हो जाओगे " ये सुन वो और रोना शुरू कर दी | अब बताइये एक तीन चार साल की बच्ची को जीवन मृत्यु का रहस्य और गीता  तो सुनाया नहीं जा सकता था कि सब नश्वर हैं | बड़ी मुश्किल से उस दिन उन्हें समझाया कि उनके मम्मी पापा अभी बहुत दिन उनके साथ रहने वाले हैं कहीं नहीं जाने वाले |
फिर लगा कितनी भी सावधानी रखो लेकिन बच्चो को एक बात समझाओ तो उससे जुड़े तमाम चीजों के बारे में कितना भी सोच लो कहीं ना कहीं कुछ गलती हो ही जाती हैं |
#मम्मीगिरि

November 29, 2019

प्यार का राग सुनो रे ----------mangopeople

" कब से कह रही थी पार्टी से चलो लेकिन तुम्हारे आने का मन ही नहीं था देखो कितनी रात हो गई है | मै थक गई हूँ बिलकुल  "
" ठीक है रात हो गई है लेकिन ये लिफ्ट में टॉप फ्लोर का बटन क्यों दबाया है हमारे फ्लोर का क्यों नहीं "
" मेरे जीवन साथी प्यार किये जा -------
" इरादा तो ठीक हैं ना  "
" जवानी दीवानी खूबसूरत जिद्दी पड़ोसन सत्यम शिवम सुंदरम "
"  ये कौन सा गाना है "
" ये लिफ्ट में इश्क फरमाने वाला गाना है स्वीटहार्ट  ये  लिफ्ट में हमारा आखरी रोमांस है "
" क्यों इसके बाद लिफ्ट में नहीं आएंगे क्या "
" लिफ्ट में  कैमरा लगने वाला है "
" क्या ! अच्छा हुआ बता दिया वरना हम दोनों तो पकड़े जाते "

" अब हो गया नीचे चले "
"अरे जब टॉप फ्लोर तक आएं हैं तो छत पर चलते हैं मैंने आज तक छत नहीं देखी है अपने बिल्डिंग की | चलो निकलो लिफ्ट से "
" कहाँ खींचे ले चल रही हो दरवाजा   बंद होगा "
" देखो बंद नहीं है खुला है आ जाओ   |  हे भगवान लेकिन यहाँ ये चाँद तारे क्यों नहीं दिख रहें है  "
" बादल है इसलिए नहीं दिख रहा "
" मुझे एक और गाना याद आ रहा है | लग जा गले की फिर हंसी रात हो ना हो शायद फिर इन जनम में मुलाकात हो ना हो "
" लो गले तो लग गया लेकिन इस छत पर मुझे दूसरा गाना और उससे ज्यादा रोमांटिक सीन याद आ रहा है "
"तुम्हे और गाना कौन सा "
"भींगे होठ तेरे "
" ये बैंकॉक नहीं है मुंबई है अभी कोई टंकी के नीचे सोता हुआ जाग कर बाहर आ जायेगा तो सारा छत वाला रोमांस फुर्र हो जायेगा "
" एक बजने जा रहा है कौन आएगा "
" एक बज गया क्या | मर गए आज एक बजे लिफ्ट बंद होने वाली थी "
" चलिए अब सीढ़ियों से नीचे चलिए बहुत छत देखने का शौक था ना  "
" नहीं मै बहुत थक गई है मुझसे चला नहीं जायेगा | काश की तुम मुझे गोद में उठा कर नीचे ले चलते "
" क्यों सीढ़ियों पर रोमांस वाला कोई गाना नहीं है क्या "
" हैं ना उसके लिए भी है | तेरे घर के सामने नूतन देवानंद और कुतुबमीनार की सीढियाँ "
" सीढ़ियों पर भी रोमांस वाह "
" दिल का भंवर करे पुकार ,प्यार का राग सुनो ,प्यार का राग सुनो रे हुंम हुंम "
" धीरे गाओ पूरी बिल्डिंग तुम्हारे प्यार का राग सुन जाग जाएगी जायेगी "
#वसंत
#अधूरीसीकहानी_अधूरेसेकिस्से 

November 28, 2019

मम्मीगिरि --------mangopeople


                                  तीन साल से भी कम की बिटिया को डॉक्टर को दिखा कर आई तो  बुखार एक सौ तीन देख हाथ पैर फूल गए | पापा जी पर चीखते हुए दवा लाने को कहा , क्योकि मेरे कहने पर भी उन्होंने डॉक्टर के पास की दूकान से दवा नहीं लिया था | डॉक्टर ने कहा पानी वाली पट्टी बर्दास्त नहीं कर पा रही तो तुरंत कपडे निकाल कर एसी के सामने बिठा दो | बिटिया कुछ देर तो सामान्य रहीं फिरअचानक से रोना शुरू कर दिया , घबरा कर पूछा कि क्या हुआ तो सुबुकते हुए बोली तुम पापा से प्यार नहीं करती हो |
                               
                                 बचपन से सुन रखा था बुखार तेज होता हैं तो दिमाग में चढ़ जाता हैं और लोग कुछ भी बकने लगते हैं | मुझे भी लगा बिटिया का बुखार दिमाग में चढ़  गया हैं और वो कुछ भी बोल रही हैं | दुबारा चेक किया तो बुखार एक सौ चार हो गया था , मैं एकदम से डर गई  | अबकी तो पापा जी को फोन कर बिफर ही पड़ी कि इतनी देर क्यों कर रहे हो दवा लाने में  | इस पर बिटिया और रोने लगीं , " देखा तुम सच में पापा से प्यार नहीं करती उन्हें डांट दिया , पापा तुमसे कितना  प्यार करते हैं " |सब बर्दास्त था लेकिन ये बात तो सीने में जहर बुझा खंजर लगने जैसा थी कि पापा तो प्यार करतें हैं लेकिन मम्मी नहीं करती | मतलब एक तरफ़ा आरोप मुझ पर , दोनों तरफ लगता तो इतना टेंशन ना होता |

                                 जैसे की हर माँ के मन में ऐसे समय में ख्याल आता हैं कि उसका बच्चा तो कितना   मासूम हैं किसी ने उसे सीखा पढ़ा दिया हैं , माँ के खिलाफ भड़का दिया हैं | तुरंत पूछा किसने कहा ये सब तुमसे , मैं तो कितना प्यार करती हूँ पापा से |
" नहीं तुम नहीं करती , पापा को अपने साथ बैठने भी नहीं देती , पापा को हग भी नहीं करने देती , पापा किस करते हैं तो तुम वो भी मना कर देती हो क्योकि तुम पापा को प्यार नहीं करती |"  बिटिया की मुख कमलों से ये सुन कर माथा ठोक  लिया  मैंने |

                                   दो साल  की बिटिया प्ले स्कूल जाना शुरू हुई , तो वहां हमें मिली एक गुरु माँ , क्योकि हम सभी के पहले बच्चे वहां पढ़ रहें थे जबकि उनका ये दूसरा था | उनके पास बच्चे के लालन पालन का अनुभव हम लोगों से ज्यादा था जो वो अक्सर हम सभी से बांटा करतीं थी | एक दिन उन्होंने देखा उनकी बिटिया स्लमडॉग फिल्म का दृश्य देख अपने गुड़िया के आँख में तेल डाल रही थी | उन्होंने हमें सावधान किया कि बच्चों के सामने कुछ भी करने से पहले सोच लो " बच्चे सब देख समझ रहें हैं " |  फिर चर्चा यहाँ तक पहुंची की भाई पति के साथ रोमांस करते भी सावधान रहो बच्चे  सब समझ रहें हैं |  फिर क्या था घर आते ही पतिदेव को फरमान सूना दिया गया , अब से सारे रोमांस बंद , मतलब बिटिया के सामने   |

                                   जो पति पत्नी विवाह के बाद घर में अकेले रहतें हैं उन्हें अच्छे से पता होगा कि जब वैवाहिक जीवन की शुरुआत सिर्फ आप दोनो घर में अकेले रह कर कर रहें हों तो दोनों के बीच खूब सारा रोमांस पनपता हैं | आपको रोमांस करने , बतियाने, पास बैठने  आदि के लिए रात होने या बैडरूम में जाने का इंतज़ार नहीं करना पड़ता | एक दूसरे को गले लगाना हो , घंटों करीब बैठ कर फिल्म देखना हो , एक दूसरे के गोद में सर रख या हाथ पकड़े बतियाना हो , किचन में साथ साथ  काम करते हुए  एक दूसरे के पास रहना हो या एक दूसरे को किस करना हो , इन सब को करने के लिए समय या जगह का ख्याल नहीं रखना पड़ता हैं | जब ये सब जीवन में पांच साल चले तो फिर ये सब आदत में शुमार हो जाता हैं , खाने नहाने जैसा जरुरी हो जाता हैं और अचानक से उन्हें बंद कर देने का फरमान , अत्याचार था दोनों पर ही  |

                                    नया नया मुल्ला पांच बखत का नमाजी बनता हैं | गुरु माँ की बात का पालन शुरू हुआ , शुरुआत बिटिया के सामने किस न करने से हुआ , गाल , माथे तक पर नहीं , और उसके बाद तो मेरे गोद में सर मत रखों , मुझे गले मत लगाएं , मेरे इतने पास मत बैठे , मुझे ऐसी नजर से मत देखों , मुझे फालतू के इशारे मत करों , सुनो तुम तो मुझे बिटिया के सामने देखों तक मत , तक पहुँच गया | पति बेचारा इस नए नियम से हैरान परेशान | इतने सालों की आदत जाती नहीं और हम उनके आगे बढ़ते ही गुर्राना शुरू कर देतें |

                                   जल्द ही  घर का कामदेव रति वाला श्रृंगारिक माहौल अचानक से रामसीता वाले सात्विक माहौल में बदल गया | सब बच्चे की भलाई के लिए हो रहा था सो कोई कुछ बोल भी नहीं सकता था | उस पर से पतिदेव के लिए बीवी बच्चे के बाद मरकहिं गैय्या जैसी हो गई थी | देखा होगा सीधी से सीधी गैय्या भी बच्चे होते ही हर बात पर सींग चला देती हैं बस वैसे ही हमारी जबान भी पापा जी की एक गलती  बिटिया के प्रति मैं  डांट देती  |

                                  जैसा कि गुरु माँ ने कहा था बच्चे सब देखते और समझते हैं , हमारे घर का भी बच्चा इस बदलते माहौल को देख रहा था और जो समझा वो करीब चार छ महीने बाद मेरे सामने था | मेयर स्थिति होम करत हाथ जरत जैसी थी , जिस बिटिया के लिए ये सब किया गया वही हमें सूना रही थी और  हम माथा पकड़े बैठे थे | "  पापा मुझे प्यार करते हैं हग करते हैं तुम्हे भी करते हैं तो तुम मना  कर देतीं हो , मैं तुमको प्यार करती हूँ तुमको किस करतीं हूँ , पापा भी करते हैं लेकिन तुम उनको मना कर देती हो | क्योकि तुम उनको प्यार ही नहीं करती हो " |

                                  कोई और समय होता तो दिमाग कुछ काम भी करता और उनको जवाब भी देता लेकिन उस समय तो उनका बुखार इतना तेज था कि जो कह रहीं हैं सुनते रहों और  बस  कैसे भी  इन्हे दवा खिला दी जाए और बुखार कम हो पहले | घर आने पर हमारे प्यारे पतिदेव को जब सारा कांड मालुम हुआ तो मुझे इतना प्यार करते थे  कि महीनो तक मुझे ये सूना सूना कर ताना मारते  रहें चिढ़ाते रहें |

                                 क्या करे हम सब ऐसे ही हैं कई बार हम दूसरों की बात पर बिना ज्यादा दिमाग लगाएं सोचे ऐसे अमल करने लगतें हैं जैसे वो बिलकुल सच और सही ही हो | कई बार बातों का गलत मतलब निकाल कुछ ही कर बैठतें हैं | बच्चों की भलाई के नाम पर हम सब करने को तैयार रहतें हैं उसका आगे का परिणाम जाने बिना |

                                 खैर घर का माहौल बिटिया के आने से  पहले वाला तो ना हुआ , आखिर हम थे तो भारतीय मिडिल क्लास सोच वाले , लेकिन उस दिन के बाद कुछ तो सामान्य हो गया था इस सोच के साथ जब बच्चों को किया जा रहा किस हग प्यार हैं और उसे हमें जाताना चाहिए , तो अपने जीवन साथी के साथ किया गया ऐसा व्यवहार कुछ और कैसे हो सकता हैं वो भी उतना ही प्यार है जिसे जताते रहना चाहिए |

#मम्मीगिरि

November 19, 2019

शहरों में जंगल के वासी ------mangopeople



                                      हाथियों के लिए ये जगह स्वर्ग की तरह हैं | ये सर्कस नहीं हैं जहाँ सारे दिन उनसे  मेहनत करवाई जाए , छोटे से पिंजरे में रखा जाए और ठीक से खाना भी ना दिया जाए | इतने खुले में रहतें हैं , बस इतनी सी दुरी में यात्रियों को घूमाते हैं फिर सारा दिन आराम और भरपूर खाना | वो बहुत आराम से यहाँ रहते हैं |
                                     हमारे आगे हाथी की सवारी करने के लिए खड़े लोगों को कर्मचारी समझा रहा था | हम और भाई दोनों इस पर मुस्करा पड़े और बोले हाथियों के पैरो में पड़ी लोहे की जंजीर बता रही हैं कि ये स्वर्ग हैं | मेरी बारी आतें ही मैंने पूछा , कितने हाथी हैं यहाँ , ज्यादातर तो हथिनी दिख रहीं हैं | तो बोल पड़ा एक भी हाथी नहीं हैं सब हथिनियाँ ही हैं | हाथी को संभालना एक मुश्किल काम हैं और वो सुरक्षित भी नहीं होते | केरल एक पारंपरिक लोगों की जगह हैं इसलिए मैंने पूरा संभलते हुए पूछा  यहाँ एक भी बच्चे नहीं दिख रहें हैं तो क्या आप इन सबकी शादी  नहीं करातें | मेरी इस बात पर वो केवल मुस्करा दिया | लेकिन हम यहीं नहीं रुकने वाले थे हमने जारी रखा , ये तो गलत बात हैं और बिलकुल भी प्राकृतिक नहीं हैं | हर मादा जीव  को जन्म देने और माँ बनने का अधिकार हैं आप इन सभी को इससे दूर रख रहें हैं |
उसके पास जवाब नहीं था वो बस मुस्कराता रहा | मुझे पूरा विश्वास हैं कि  उसे स्वर्ग और नर्क का अंतर तब भी नहीं समझ आया होगा और ना मेरी कही बात का मतलब | 
                                 अगले दिन जब हथिनियों को नहलाने के लिए  दुबारा गए तो उसके महावत से भी मैंने ये शिकायत की जवाब उसके पास भी नहीं था | अब लग रहा हैं , मुझे ये बात वहां की विजिटर डायरी में लिख देना चाहिए था शायद मैनेजमेंट को कुछ समझ आती , खैर |

                                मनुष्य पशुओं को कब से पालतू बना रहा हैं पता नहीं और किन पशु पक्षियों को पालतू बनाना चाहिए और किनको नहीं इस पर बड़ा कन्फ्यूजन हैं | मेनका गाँधी ने कहा खरगोश पालतू नहीं हैं उन्हें ना पाले , हमने पाला था , तोते , कुत्ता , बंदर , सब पाले थे | अब तो लोगों को शेर बाघ तक पालते देखतीं हूँ और उन खूंखार जानवरों का अपने मालिकों के प्रति अपार प्रेम भी देखा हैं | ऐसी पंक्षी भी देखें हैं जो पिंजरे में रहते ही नहीं आराम से पूरा घर घूमते हैं और उड़ कर नहीं जाते | जानवर कोई भी हो पालने वाले और पलने वाले  का आपसी  प्रेम देख ये कहना मुश्किल हो जाता हैं कई बात कि उस पर अत्याचार हो रहा हैं |

                           अगले दिन जब सुबह सुबह उस जगह गए तो सभी महावत अपने अपने हथिनियों को खूब मेहनत से रगड़ रगड़ नहला रहें थे और पाइपों से पानी डाल उनको  मन भर तर कर रहें थे ,  कुछ खाना खिलाने में व्यस्त थे |  कुछ हथिनियां झूम रहीं थी , एक को ऊपर निचे  झूमता देख मैंने बिटिया से कहा जैसे ये कर रहीं हैं वैसा ही करो बिटिया ने किया लेकिन जैसे ही बिटिया ने अपने झूमने का तरीका बदल  दाएं बाएं झूमना शुरू किया  अचानक से हथिनी ने मेरी बिटिया का नक़ल करना शुरू कर दिया और उसकी तरह ही झूमने लग |  जाते समय  बच्चे जब उन्हें बाय बाय कहने लगे तो वो भी अपना सूंड हिला प्रतिक्रिया दे रहीं थी |  मुन्नार में रास्ते से गुजरते जंगली हाथी परिवार से भी मुलाकात हुई खाने पीने में व्यस्त थे , उन्हें दूर से ही निहारते रहें  |



November 18, 2019

रियलटी शो की में कुछ भी रियल नहीं ------mangopeople

                          मुझे हमेशा से पता था कि  टीवी पर आने वाले सभी रियलटी शो फर्जी होते हैं , चाहे वो डांस का हो या गाने का | उसमें सब कुछ  वैसा नहीं होता जैसा दिखाया जाता हैं | ना तो एक टेक में पूरा डांस होता हैं और ना ही गाने वाले सीधे वहां पर गा रहे होते हैं और ना ही जो आवाज हम सुन रहें हैं उनकी , वो असल में बिना किसी बदलाव के उनकी हैं |
                         
                         कल स्टार प्लस पर सबसे ज्यादा रेटिंग वाला डांस शो डांस प्लस देख रही थी | लड़कियों का एक समूह भरतनाट्यम करने के लिए आया जो एक आधुनिक फ़िल्मी गाने पर भरतनाट्यम कर रहा था | डांस करते समय उनमे से एक लड़की की करधनी ढीली हो कर लटकने लगी ,  क्लोजअप शॉट में साफ दिख रहा था | लेकिन जब तुरंत ही लॉन्ग शॉट ( दूर से)   दिखा तो उसकी करधनी एकदम सही थी | फिर तुरंत एक क्लोज शॉट हुआ और करधनी फिर से ढीली थी और फिर वही निरंतर चल रहे डांस में फिर लॉन्ग शॉट में वो करधनी ठीक हो जाती | तीसरी बार जब शॉट क्लोज हुआ तो हद ही हो गई उसके कमर में करधनी थी ही नहीं और फिर लॉन्ग शॉट में करधनी आ गई | डांस ख़त्म हुआ जज के सामने कमेंट लेते समय फिर से करधनी उसके कमर में एकदम सही से था |
                         
                        लगभग सभी डांस शो में अच्छे डांसरों के डांस को कई बार करवा के कई तरह  से शूट  किया जाता हैं और उस शूटिंग में से सबसे अच्छे शॉट को मिला कर उसे टीवी पर दिखाया जाता हैं | जो हम टीवी पर देखते हैं वो कई बार किये डांस से लिया गया सबसे अच्छा शॉट भर होता हैं | आज उसी शो में डांस करते समय एक लडके के गिर जाने को लेकर खूब नौटंकी दिखाई गई कि उसे फिर मौका दिया जाए या नहीं डांस करने का |

                       इसी तरह गाने के रियलटी शो में भी तकनीक की मदद से आवाज की कमियों को ठीक करके उन्हें दर्शको को सुनाया जाता हैं तो कई बार उन्हें पहले ही रिकॉर्डिंग स्टूडियों में रिकार्ड करने के बाद स्टेज कर बस मुंह चलाते शूट कर दर्शकों को दिखा दिया जाता हैं |

                      उसी तरह बड़े एवार्ड फंक्शन में जो कलाकार डांस करते हैं उन्हें एक दिन पहले ही या उसी दिन सुबह  उसी स्टेज पर शूट कर लिया जाता हैं टीवी पर दिखाने के लिए | फिर समारोह वाले दिन भी शूट कर दोनों को मिला कर टीवी के दर्शकों को दिखाया जाता हैं |

                     अगली बार किसी रियलटी शो के किसी कलाकार को देखते समय वाह वाह करते समय ध्यान रखियेगा कि जो जज लोग इस कलाकार की इतनी तारीफ कर  रहें हैं वो शो ख़त्म होने के बाद उन्हें काम क्यों नहीं देते हैं |


November 07, 2019

घुमक्कड़ी और भोजन -------mangopeople



                                         ये बात तो हमेशा से पता थी कि  हम जैसे चाइनीज खाने वाले अगर चीन जा कर चाइनीज खाना खाये तो हमारे गले भी ना उतरेगा वो खाना | भारतीय चाइनीज खाना भारतीय स्वाद के अनुसार ढाल दिया गया हैं | उसी तरह ये भी पता था कि  कभी दक्षिण भारत जा कर इडली डोसा सांभर आदि खाया तो उसका स्वाद शायद ना भाये जैसा अपने यहाँ अच्छा लगता हैं | हमने दक्षिण भारतीय खाने को उत्तर भारतीय स्वाद में बदल रखा हैं |
                                         लेकिन शुक्र हैं जिस पहले होटल में कोच्चि से मुन्नार जाते रास्ते में केले के पत्ते पर केरला का भोजन सद्या खाया उसमे बहुत स्वाद था और सभी को पसंद भी आया | अनानास से बनी एक सब्जी खूब पसंद आई | चटनी में स्वाद था और गुड़ नारियल से बना खीर भी स्वादिष्ट था | लेकिन शंका थी कि ये होटल ख़ास टूरिस्टों के लिए था इसलिए इसके भोजन में उत्तर भारतीय स्वाद की मिलावट जरूर की गई होगी | शंका जल्द ही सही भी हो गई जब थेकड़ी , पेरियार में खाने बैठे और उसने पूछा केरल चावल या  प्लेन तो केरल के खाने के  अति उत्साह में बिना देखे कह दिया केरल का चावल दीजिये | लाई  जैसे मोटे मोटे और कुछ कुछ लालिमा लिए चावल को खाना  सच में आसान नहीं था | फिर उनकी सब्जियों और सांबर का स्वाद भी पसंद नहीं आया |
                                         नाश्ते में रोज ही इडली उत्पम ढोसा और कोई  उत्तर भारतीय खाने के विकल्प में से दक्षिण भारतीय ही खा रहें थे लेकिन पहला वाला छोड़ कर  कहीं का भी सांभर और रसम पसंद नहीं आया चाहे वो अच्छा होटल हो या सड़क पर कोई रेस्टुरेंट | हां ये था कि इडली उत्तपम आदि हमारे यहाँ के मुकाबले ज्यादा सॉफ्ट और स्वादिष्ट थे | होटल में नाश्ते में रोज वो केले से बना अलग अलग तरीके का मीठा पकवान रख रहा था | पहले दिन कैरेमल और मेवे के साथ रोस्टेड केले से बना कुछ मीठा रखा था ( नाम भूल गई ) वो बहुत पसंद आया लेकिन बाकी के दो दिन जो मीठा रखा गया उसमे  मजा ना आया | लाल वाले केले में लगा हमारी पसंद का स्वाद नहीं हैं | लेकिन नारियल को मिला कर बनाया पैन केक बहुत पसंद आया | उसमे सूखे नारियल और मेवें का स्टफिंग भी किया गया था | मीठे में तो बस हाथ लगा कुछ पसंद आया कुछ नहीं |
                                        कोवलम के समुन्द्र के किनारे में खोजते खोजते एक शाकाहारी रेस्टुरेंट में पुट्टु  मिला  पहले लगा कहीं सादा सा चावल और सांभर जैसा ना लगे , लेकिन चावल से बना भोजन ,  चावल का स्वाद नहीं दे रहा था बल्कि अपने आप में एक अच्छी अलग सी डिश लग रही थी | अप्पम बहुत खोजा नहीं मिला सब बोलते रहें कि दो दिन उसकी तैयारी में लगते हैं अभी नहीं मिलेगा | डोसा हर जगह उपलब्ध था और उसे जम कर खाया भी गया | बहुत कुछ खाया बहुत कुछ छूट भी गया , अभी तो बहुत सारी  जगह बची हैं अगली बार कसर पूरी कर ली जाएगी |
                                         बाकि मासांहारी में तो बीफ ,  डक , खरगोश जैसो के बारे में पहली बार अपने जीवन में , मेनू में पढ़ा | मुंबई में से मांशाहारी खाना परोसने वाले रेस्टुरेंट में चले जाते हैं कभी कभी और शाकाहारी खाते हैं | विश्वास रहता हैं कि कोई मिलावट नहीं होगी लेकिन पता नहीं क्यों वहां पर भरोसा ना हो रहा था | मुंबई की तरह जैन और मारवाड़ी लोग तो ना रहते थे ना वहां | लेकिन मेरी उम्मीदों से परे  वहां ढेर सारे मारवाड़ी , शुद्ध शाकाहारी भोजनालय मिल गए | कोवलम के उस समुन्द्र के किनारे भी जहाँ फिरंगी भरे पड़े थे और हर होटल के बाहर मछलियां सजा कर रखी गई थी , अपनी पसंद का चुन लीजिये वही पका कर खिलाएंगे |
                                     



पहले मुंबई का भी सांभर पसंद नहीं आता था लगता जो बात बनारस में हैं वो और कहाँ मिलेगी | अब सत्रह सालों में धीरे धीरे ये पसंद आने लगा हैं | कुछ चीजे खाते खाते ही पसंद आती हैं |

November 02, 2019

धर्म परिवर्तन का धर्म संकट ---------mangopeople



                                  कुछ अच्छे ईसाई नाम महिलाओं के बताइयें ,  नाम बिलकुल नए और अलग तरीके के होने चाहिए आम से नाम नहीं चलेंगे | साथ में कुछ अच्छे सरनेम भी हो तो फिर सोने पर सुहागा | क्या हैं कि धर्म परिवर्तन करने जा रहीं हूँ तो सोचा इस बार जब अपना नाम खुद ही रखना हैं तो फिर कुछ बहुत ही अच्छा और ख़ास नाम रखा जाए |
                                  हुआ ये कि जैसे ही कोच्चि पहुंचे जोरदार बारिश ने स्वागत किया , लगा कहीं पूरी छुट्टियां बर्बाद ना हो जाए | होटल जा कर पता चला बस शाम में बारिश हो रही हैं दिन साफ़ रहता हैं , ये सुन हमने भी शुक्र मनाया | बारिश ने मुन्नार के चाय बागानों को और भी सुंदर बना दिया और बारिश में पहाड़ी रास्ते से गुजरना सफर  हसीन बना गया |
                                 लेकिन जब कोवलम में नींद खुली तो स्वागत जोरदार बारिश और आंधी तूफ़ान ने किया | रिसोर्ट में चारो तरफ नारियल और फल जमीन पर गिरे पड़े थें और नारियल के पेड़ और झुके गिरे जा रहे थे | गूगल बाबा ने बताया दो दिन लगातार बारिश होने वाली हैं | सोचा कन्याकुमारी निकल  जाते हैं आज ,  लेकिन गूगल ने बताया वहां का भी वही हाल हैं | फिर खबर लगी दो दिन का ऑरेंज अलर्ट जारी हुआ हैं |
                                दोनों मम्मियों ने रोना रोया हमारे पैसे बर्बाद हुए , दोनों बच्चों ने रोना रोया सामने स्वीमिंग पूल हैं हम जा नहीं पा रहें हैं और दोनों मर्द लोग अब भी चुपचाप अपने अपने लैपटॉप फोन पर अपने काम में लगे थे उन्हें कोनो फर्क ही नहीं था |
                              तीन दिन से हर गलि , मोड़ , सड़क , चौराहे पर क्रॉस और वेटिकन वाले बाबा की मूर्ति और मंदिर का असर था या रिसोर्ट में उस समय वेटिकन वाले बाबा जी का हो रहा भजन का असर था कि भाई से कहा चार दिन बारिश ना हो तो (हमें अभी चार दिन और घूमना था इसलिए )  धर्म परिवर्तन कर लुंगी |
                             लो जी ये कहना था की घंटे भर में मेरी मन्नत ने ऐसा असर किया कि गूगल बाबा से लेकर मौसम विभाग सरकार सब फेल हो गए और बारिश बंद हो गई | बच्चे पिताओं के संग स्वीमिंगपूल में कूद पड़े और मैंने कहा कन्याकुमारी निकल लेते हैं | कल बारिश हो तो कहीं विवेकानंद रॉक  ना रह जाए | कन्याकुमारी भी घूम लिया कोवलम भी त्रिवेंद्रम और अलेप्पी भी और बारिश नहीं हुई चार दिन | गूगल की भविष्यवाणी और सरकार की चेतावनी के बाद भी |
                           पहले दिन से ही लगने लगा कि लो अब तो धर्म परिवर्तन करना ही पड़ेगा लेकिन अभी तो तीन , दो , एक दिन बाकी हैं का बहाना मारते रहें | लेकिन चारो दिन हमारी यात्रा ठीक ठाक बिना बारिश के विघ्न के संप्पन हो गई | अब तो कोई बहाना नहीं चलेगा और धर्म परिवर्तन तो करना ही पड़ेगा |

नोट - वैसे ठीक से याद करूँ तो मैंने ये कभी नहीं कहा था कि  किस धर्म में परिवर्तन करुँगी और कब करुँगी तो फिलहाल अपने मन का कोई धर्म आने तक जो अफीम चरस ना हो का इंतज़ार करने का समय हैं मेरे पास

October 30, 2019

ताश , जुआ और दिवाली पर निबंध --------mangopeople

                                       बात चार साल पहले के दिवाली की हैं , दिवाली की छुट्टियों में बिटिया को कहा गया था कि हिंदी में दिवाली पर एक निबंध भी लिखना हैं | दिवाली बिताने के बाद बिटिया ने पूछा क्या लिखूं निबंध में , मैंने कहा जो जो किया हैं सब लिख दो , दिवाली खूब  खरीदारी की , रंगोली बनाया , घर सजाया , लाइटें लगाईं , खूब तरह तरह के खाना खाया वही सब जो तुमने किया हैं |
                                     
                                       दो घंटे की अथक मेहनत के बाद बिटिया ने निबंध लिख कर रख लिया | स्कूल खुलने के दो दिन पहले मैंने कहा एक बार मैं देख लेती हूँ , स्पेलिंग जरूर गलत होगी , ठीक कर दूंगी ( हा  ठीक हैं मेरी स्पेलिंग भी गलत होती हैं लेकिन बच्चे की तो ठीक कर ही सकती  हूँ ) | शुरू के तीनो पैरा बिलकुल वैसा ही लिखा था जैसा मैंने कहा था लेकिन समापन इतना भयानक था कि अगर टीचर के हाथ लगता तो मम्मी पापा की स्कूल तक परेड हो जानी थी |
                                   
                                     असल में उसके एक साल पहले की दिवाली पर मैं अपने घर गई थी और दिवाली की रात खूब ताश की बाजियां हुई वो पैसों के साथ वाली  ,  बिटिया पैसा जीती उन्हें बड़ा मजा आया | इस दिवाली वो बोली उन्हें अपने दोस्तों के साथ भी खेलना हैं वही |  बिल्डिंग के मित्रो को रात में ताश , जुआ खेलने का न्यौता हमसे बिना पूछे पहले ही दे दिया गया था | रात तो तीनो मित्र पधारी तो हमें पता चला इनका कार्यक्रम | लगा पैसे की बाजी लगी तो बच्चों के परिवार वाले क्या सोचेंगे , कोई हार कर रोने लगा तो अलग मुसीबत | अब बिटिया और वो सब सादा ताश खेलने को तैयार नहीं , कोई जीत हार ना हुआ तो क्या मजा आएगा |
                                   
                                  तो मैंने  उपाय के तहत कहा चलो असली पैसे से नहीं बिजनेस वाला पैसा निकालों उससे खेलते हैं | मजा भी आएगा और किसी को कोई समस्या भी नहीं होगी | रात के बारह बजे तक जुए की बाजी चलती रही जब तक की एक के घर से उसका भाई बुलाने नहीं आ गया और यही सब बिटिया ने अपने दिवाली वाले निबंध में सविस्तार लिख मारा था |

                                  अब उसे समझाते ना बने कि जब ये खेला जाना  बुरा नहीं हैं तो निबंध में लिखा जाना क्यों बुरा हैं | फिर सविस्तार युधिष्ठिर का कथा व्यथा , मुसीबत दुष्परिणाम , छोटा जुआ बड़ा जुआ , स्वयं पर नियंत्रण आदि इत्यादि लम्बा चौड़ा प्रवचन के बाद सब ठीक ठाक हुआ  | बाद में हमें डर बना हुआ था कि कहीं बिटिया को मैंने ये तो ना सीखा दिया कि किया धरा सब जाता हैं बताया सब नहीं जाता |

                                  वैसे इस साल कुछ चालीस रूपया हार गई जुए में , पहली बार , वो भी कुल पतिदेव जीते  ये भी हुआ पहली बार , फिर उलाहना भी सुने इस बार इतनी किस्मत तेज थी तो बेकार में दो दो रुपये की चाल में व्यर्थ किया किसी कैसिनो में जा कर आजमाना था | सात रु लेकर बैठे थे और अस्सी  रुपये लेकर उठे , हजार की बाजी होती तो कितना जीत चुके होते | 

#मम्मीगिरि   

September 27, 2019

लिफ्ट , घुटनो का दर्द और मर्फी के नियम -------mangopeople


हम दूसरी मंजिल पर रहते हैं इतने सालों में भी लिफ्ट के उपयोग की आदत ना बनी | लिफ्ट का उपयोग तभी करते जब हाथो में भारी सामान हो | दो साल पहले तक जिस आदत को अच्छा मानते थे उसे फिजियोथेरेपिस्ट ने ना केवा ख़राब आदत घोषित कर दिया बल्कि उतरने चढने के लिए लिफ्ट का उपयोग करने की सलाह दे दी | अब अचानक से लिफ्ट के इंतज़ार में खड़े होने की आदत कहाँ से आती , तो सीढ़ियों का उपयोग जारी रहा लेकिन हील की सैंडिल के प्रेम ने लिफ्ट के दरवाजे दिखा दिए और शुरू हुआ हमारी ईमारत के एकमात्र लिफ्ट पर मर्फी का पता नहीं कौन से नंबर का नियम लागू होना |
१- हम अगर बाहर से आये तो लिफ्ट कभी भी ग्राउंड फ्लोर पर नहीं होती | वो सैकेंड से लेकर टॉप फ्लोर पर कहीं भी अटकी रहती हैं |
२- हम सैकेंड फ्लोर पर हैं तो लिफ्ट पक्का वहां नहीं होगी वो ग्राउंड या टॉप पर होगी या हमारे सामने से ऊपर जा रही होगी |
३- हम बाहर से आते हैं और लिफ्ट सामने खड़ी दिखती हैं जैसे ही उसकी तरफ बढ़ते हैं वो हमें लेने से पहले ही ऊपर की और चल देती हैं |
४- अगर हम इंतज़ार करे की चलो वो नीचे आयेगी फिर जायेंगे , तो वो पक्का टॉप फ्लोर तक जायेगी और कभी कभी तो हर फ्लोर पर रुकती हुई जाएगी |
५- ऊपर जाती लिफ्ट को देखकर जिस दिन हम सोचते हैं कि छोडो इंतजार क्या करे सीढ़ी से चढ़ जाते हैं तो लिफ्ट पक्का फर्स्ट फ्लोर पर ही हमारा इंतज़ार कर रही होती हैं |
६- जिस दिन हम सोचते हैं आज तो टॉप फ्लोर से बुला कर लिफ्ट से ही नीचे उतरेंगे चाहे कुछ हो जाये | उस दिन लिफ्ट जब दूसरी मंजिल पर हर मंजिल पर रुकते हुए आती हैं तो इतनी भरी रहती हैं कि उसमे समाया नहीं जा सकता हैं |
७- कई बार तो ऐसा होता हैं बिटिया को दौड़ा कर भेजते हैं जाओ लिफ्ट रोको मैं सामान ले कर आ रहीं हूँ तो उस दिन तो लिफ्ट ही बंद मिलती हैं , या तो ख़राब होगी या फिर मेन्टेन्स हो रहा होता हैं |
८- कभी कभी लिफ्ट के पास पहले से ही इतने लोग खड़े होते हैं और वो भी सबके सब सबसे ऊपरी मंजिल वाले की लगता हैं इनका जाना ज्यादा जरुरी हैं | अपना बोझा सीढ़ी से ही ढोना बेहतर हैं |
९- कभी कभी कचरे वाली अपने कचरे के गंदे डब्बे के साथ खड़ी मिलेगी लिफ्ट की इंतज़ार में | फिर लगेगा नाक बंद करके लिफ्ट से जाने से अच्छा हैं साँस फुला कर सीढ़ियों से चले जाए ज्यादा सही रहेगा |
१०- कभी उत्साहित बच्चों की भीड़ रहेगी और दो चार बुजुर्ग , तो आप को अपने नागरिक कर्तव्यों को याद करना होता हैं , पहले आप जाए , हमारा क्या हैं ईमारत में ये सीढियाँ हमारे लिए ही बनी हैं |
११ - कभी कभी लिफ्ट के बाहर इंतज़ार करती पहली मंजिल पर रहने वाली वो पड़ोसन मिलेगी जिसका वजन सवा सौ किलो से पाव भर भी कम ना होगा | उसके देखते ही वजन बढ़ने की चिंता इतने भयानक होती हैं कि मारों गोली घुटनों को , कम से कम सीढियाँ चढ़ उतर कर सौ दो सौ ग्राम वजन रोज तो बढ़ने से रोक ही सकते हैं | तो सीढियाँ जिंदाबाद |
१२ - फिर कभी सामने से लिफ्ट एकदम से हमारे सामने नीचे आती और रुकती दिखती हैं और हम पूरी तरह से ऊपरवाले को धनबाद , पटना दे ही रहे होते हैं कि उसमे से चिपकू बकबकिया पड़ोसन हमें देखते मुस्कराते निकलेंगी और अरे बड़े दिनों के बाद दिखी से शुरू होती हैं तो खड़े खड़े दस पंद्रह मिनट निकल जाते हैं | उतने के बीच लिफ्ट चार बार ऊपर नीचे कर लेती हैं और जब वो जाती हैं तो लिफ्ट भी उनके साथ ऊपर की और जाते देख मन मसोस हम फिर सीढ़ियों की शरण में होते हैं |

फिर इन तमाम तरह की दुश्वारियों से तंग आ कर हमने तय किया कि बस अब और लिफ्ट को भाव ना दिया जायेगा और उसकी जगह अपनी प्यारी हील के सैंडिलों की ही तिलांजलि दी जायेगी | बहुत जरुरत हुआ तो सैंडिल हाथ में लेकर सीढियाँ उतर जायेंगे और क्या 😁


September 25, 2019

छिछोरा कृष्ण -------mangopeople

                                         एक बार कृष्ण की  राधा से लड़ाई हो जाती हैं | राधा कृष्ण से नाराज हो उनसे बात करना बंद कर देतीं हैं | कृष्ण परेशान हो कर बार बार उन्हें मनाने का प्रयास करतें हैं  लेकिन राधा नहीं मानती हैं | अंत में  कृष्ण कहतें हैं ठीक हैं राधा तुम्हे  इतना मना रहा हूँ लेकिन तुम नहीं मान रहीं हो मैंने अपने तरफ से सभी तरह के प्रयास कर लिए अब तो एक ही काम बचा हैं कि तुम अपने पांव उठा कर मेरे सिर पर धर  दो और ऐसा कहते हुए बदमाश कृष्ण घाघरा पहनी हुई राधा के एक पांव को ऊपर उठा कर अपने सर के ऊपर  रख लेतें हैं | कृष्ण बदमाश क्यों , सोचिये घाघरा पहनी हुई किसी महिला का एक पांव उठा कर अपने सर पर रखेंगे तो आपके नेत्र क्या देखेंगे |
                                       
                                          गोपियाँ माता यशोदा से शिकायत करतीं हैं कि ये बदमाश कृष्ण यमुना से नहा कर निकल रहीं गांयों के बहाने  हम गोपियों की गिनती करता हैं उंगलियां दिखा दिखा आँखें मटकाते इशारे करते हुए  | ये इतना बड़ा बदमाश हैं कि गांयों के हांकने के लिए जो लाठी ले कर जाता हैं उसे पर अपने हाथ ऐसे उल्टा टिका कर ( हथेलियों की वह मुद्रा  जैसे हम हाथ से इशारा कर पूछते हैं कौन है जिसमे उंगलिया फैली होती हैं , अलपद्म कहते हैं उसे ) ऐसे खड़ा हो हमें घूरता हैं जैसे वो उन हांथो से हमारे उरोजो को तौल रहा हो | इसके अलावा हम शास्त्रीय नृत्यों में  कृष्ण और गोपियों के छेड़छाड़ के ना जाने कितने प्रसंग को देखतें हैं

                                          जब हम कृष्ण को प्रेम , ममता आध्यात्म , ज्ञान जैसी चीजों से जोड़ कर ही मात्र देखतें हैं तो इस तरह के गीत और प्रसंग कानों में शीशा घोल कर डाले जाने के समान लगते हैं | भरतनाट्यम के क्लास में जब इस तरह के प्रसंगो और गीतों को सुना तो हमने कहा मैम ये सब कृष्ण नहीं हैं | असल में ये लिखने वाले का अपना छिछोरा , गंदा दिमाग हैं जिसने कृष्ण के नाम पर  उलट कर उसे गीत काव्य भक्ति श्रृंगार कह दिया हैं | ये सब भक्ति के बाद रति काल में जन्मे कवियों की ये अपनी रति सोच हैं जिससे कृष्ण को रंग पर खुद की छिछोरी सोच को स्वीकारे जाने योग्य  बनाये जाने की चेष्टा की हैं |
#हेकृष्णा!    

September 23, 2019

स्कूलों में मिलती ये कैसी सीख -------mangopeople

                                       हम अपने बच्चों को अच्छे से अच्छे महंगे नीजि स्कूलों में भेजते हैं इस उम्मीद में कि वो वहां अच्छी पढाई के साथ कुछ अच्छे संस्कार , अच्छी बातें और पढाई से इतर एक अच्छे मनुष्य बनने की शिक्षा लेंगे | लेकिन वही महंगे पब्लिक स्कूल उन बच्चों को क्या सीखा सकता , उन्हें कितनी गलत बातें और झूठ सीखा सकता हैं हम अंदाजा भी नहीं लगा सकतें हैं |
                                       बहन के घर के बगल में एक पार्क हैं उजड़ा हुआ , अभी तक हरियाणा सरकार के विकास के मैप में वो पार्क  नहीं आया हैं , इसलिए खाली मैदान के रूप में पड़ा हुआ हैं |
पिछले शनिवार कुछ सरकारी स्कूल के बच्चे और टीचर वहां आ कर ढेर सारे पेड़ लगा गए | संभव हैं कि किसी सरकारी आदेश पर्यावरण संरक्षण आदि के तहत ऐसा किया गया हो |छठी या सातवीं के छोटे बच्चे अपने साथ ढेरो पेड़ लायें थे और तेज बारिश होने के बाद भी गीली मिटटी में गंदे होते हुए भी गड्ढे खोद कर अच्छे से पेड़ लगा दिया | दो दिन बाद और भी बच्चे आये और किसी दूसरे पार्क में भी पेड़ लगा गयें | साथ में पेड़ों को लगाते और उनके साथ फोटो भी खिंचवायें गयें बच्चों और टीचर के |
                                       दो तीन दिन बाद  अचानक से वहां दो बसों में भर कर  किसी दूसरे  सेक्टर के एक नामी और बड़े नीजि स्कूल के बच्चे फिर उसी पार्क में अपनी टीचर के साथ आयें और सरकारी स्कूल के बच्चों द्वारा लगाएं गयें पेड़ों के साथ फोटो खिंचवाने लगे | जब बहन ने पूछा ये क्या हो रहा हैं तो बताया गया हम सब पेड़ लगाने आयें हैं | बहन ने सवाल किया कि  पेड़  कहाँ लगाया तो उसने वहां पहले से ही लगे पेड़ की और इशारा कर दिया जिसके साथ उसकी फोटो उसकी टीचर ले रही थी | फिर बहन ने  टोका ये तो पेड़ पहले से ही लगा था जो सरकारी स्कूल के बच्चों ने लगाया था तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और अपना फोटो लेना जारी रखा |
                                     घंटे भर तक बच्चे सरकारी स्कूल के बच्चों की मेहनत को अपनी मेहनत बताने के लिए सभी पेड़ों के साथ फोटो लेते रहें | हद तो तब हो गई जब उन टीचरों ने लोगों के घरों के आगे लगे पेड़ , पौधों के साथ भी फोटो लेना शुरू कर दिया | उसके लिए बाकायदा बच्चों को निर्देश दिए जा रहें थे कि जिनके आगे लोहे के जंगले लगे हैं उनके साथ फोटो ना ली जाए | इस तरह उन्हें अपने पकड़े जाने का डर रहा होगा |
                                    सोचिये स्कूल के टीचर , प्रिंसपल बच्चों का कितना कुछ  गलत सीखा रहें थे | झूठ बोलना , बेईमानी करना , दूसरों की मेहनत को अपना बताना , एक तरह से अपराध करना ना केवल सीखा रहें थे उनसे वो करवा भी रहें थे | संभव हैं इसके पीछे सरकारी पैसे की लूट भी हो | बहन ने बस फोटो नहीं लिया हैं उन लोगों का , लिया होता तो फोटो के साथ  शिक्षा विभाग और स्कूल की  को भी टैग करती इस अपराध के लिए | एक पेड़ लगाना किसी नीजि स्कूल के लिए क्या इतना मुश्किल था कि वो इतना निचे गिर कर बच्चों से ऐसे अपराध करवा रहें थे | ये तो हद के बहुत आगे का अपराध हैं |