October 15, 2018

भूत मरने वालो के विश्वास पर नहीं जिंदा रहने वालों के विश्वास पर बनतें हैं ---------mangopeople



" सुनो अगर मै मर गई तो मेरा कोई धार्मिक कर्म कांड मत करना | तुमको पता है अपना आँख कान किडनी लिवर सब दान कर दी हूँ और ये सब काम का नहीं रहा तो शरीर भी दान कर चूँकि हूँ | अभी से बता दे रहीं हूँ सुन लो बाद में बताने बोलने नहीं आउंगी ना ☺️ "
हमेशा की तरह एक बार में पूरी बात न सुनने की आदत और अपने काम में व्यस्त बंदा " हा तो क्यों नहीं आओगी क्यों नहीं बोलोगी 🤔 "

" तुम क्या चाहते हो मै मरने के बाद भी बोलती रहूं 😱 | मतलब सोचो मै मर गई हूँ लेकिन मेरा बोलना बंद नहीं हुआ है | मतलब कल्पना करू वो दृश्य कैसा होगा 😅 तुम कर्मकांड कर रहे होंगे और मै बोलती जा रही होंगी | अरे तुमने मेरी बॉडी जमीन पर क्यों रखी , हे भगवान मुझे ठन्डे पानी से क्यों नहला रहे हो गर्म पानी नहीं कर सकते , इतनी बेकार साड़ी पहना रहे हो , मेरी बनारसी साड़िया क्या मेरी शौतन के लिए रख छोड़ा है , ये कफ़न कितने गंदे रंग का लाये हो मेरी साड़ी से मैच भी नहीं कर रहा , इतने पुराने फैशन का है मेरे दादा जी ने ऐसा पहना था, इतने कबाड़ा गाड़ी में ले जा रहे हो ढंग की एसी गाड़ी नहीं मिली क्या तुमको ----------😂😂😂

" हो गया तुम्हारा बकवास या और बाकी है 🙄😣 "
"शुरुआत तो तुमने की है पूछ कर कि मै बोलूंगी क्यों नहीं 🤭🤭 "
" मुझे पता है सब दान कर दिया है हम दोनों ने बताने की जरुरत नहीं है 🤨 "
"नहीं तुम्हारा भरोसा नहीं है | कोई आ कर तुम्हे बोल देगा ऐसा नहीं ऐसा करो दसवा करो तेरही करो तुम सब करने लगोगे मेरी आत्मा की शांति के लिए | लेकिन बता दे रही हूँ ये सब किया तो मेरी आत्मा शांत न होगी और अशांत हो भूत बन कर वापस आजाऊंगी तुम्हे वापस परेशान करने 😈👿😈 "
" लेकिन तुम भूत कैसे बनोगी ---------🤔
और मन ही मन सोचते हुए अगर मुझे वो दो कौड़ी का चुटकुला सुनाया कि तुम भूत नहीं चुड़ैल बनोगी तो देखना फिर क्या होता है "क्यों मै भूत क्यों नहीं बनूँगी 🙄😏 "
"तुम तो भूत पर विश्वास नहीं करती ना फिर भूत कैसे बनोगी 🤗 "
जानती थी वो घटिया चुटकुला तुम नहीं सूना सकते मन ही मन 😘😘😘
"सुनो ऐसा है भूत मरने वालो के विश्वास पर नहीं जिंदा रहने वालों के विश्वास पर बनतें हैं | मै नहीं मानती तो क्या हुआ तुम तो विश्वास करते हो ना 😂😂😂 "












September 17, 2018

रफ्ता रफ्ता मेरी आँख तुझसे लड़ी है -------- mangopeople




                                                             नया नया  स्कूटी  ख़रीदा लेकिन टशन बिलकुल बुलेट वाला था अपना , वो तो मुंबई में ठंड न पड़ती वरना लेदर जैकेट भी ले लेना था |
खैर जैकेट का अरमान तो न पूरा हुआ लेकिन कही भी जाने आने में अब सोचना न पड़ता जैसा कार के लिए सोचना पड़ता था | जाना कहाँ है ट्रैफिक कितना होगा पार्किंग मिलेगी की नहीं आदि इत्यादि | स्कूटी ने तो जैसे पंख ही दे दिए कभी भी और कहीं भी वाली आज़ादी  |
एक दिन ऑफिस जाने के कुछ ही देर बाद पतिदेव का फोन आया
 " क्या कर रही हो बीस मिनट में दादर आती हो क्या , तुम्हारी शॉपिंग हो जायेगी " |
बहुत दिनों से आज कल टल रहा था फटाफट हामी भरी और दादर अपना स्कूटी ले पहुँच गए | पहुँच कर  एक किनारे पर स्टाइल में साइड स्टैंड लगाया , तिरक्षी स्कूटी पर तिरक्षा सट बॉटम टिका पैर क्रॉस कर खड़े हो गए | पतिदेव को फोन कर बस कहाँ हो आ गई कह फोन बंद ही कर रही थी की आँखों तेज चमक लगी |
गर्दन घुमा बगल में  देखा एक लड़का बाइक के शीशे में अपने बाल बना रहा था | समझ गई उसने बाल बनाने के लिए  शीशा धुमाया होगा तो धुप के कारण मुझ पर घुप की चमक आई होगी |
 हम वापस मोबाईल में आँख गड़ा लिए , लेकिन तुरंत ही फिर आँख चमकी | इस बार दिमाग कौंधा क्या ये वही हो रहा है जो मुझे समझ आ रहा है | इस बार लडके को गौर से देखा , उसकी नजर भी मेरी तरफ थी | चेहरे से साफ़ पता चल रहा था ड्राइविंग लाइसेंस अभी ही मिला होगा और रेजर तो खरीदी भी ना होगी |
उसे गौर से देखने के बाद वो विचार दिमाग से निकाल दिया लगा इस बार शीशा सीधा किया होगा उसकी वजह से चमका होगा |
वापस से नजर सड़क पर डाली की कहाँ रह गए जनाब इंतज़ार करवा रहें हैं |
अब तीसरी बार हमारी आँख चमकी तो लगा नहीं हमारा अंदाजा सही है छोरा पगला गया है इस बार उसे देखा तो उसके चहरे पर हलकी मुस्कान भी थी |
पलट कर अपने आप को गौर से देखने लगे | टाइट जींस फिटिंग का टॉप हाई हिल की सैंडिल और फैशन वाला क्रॉस बैग (ख़ास स्कूटी  के लिए  ख़रीदा था ) और बस पचास इक्यावन का तब का मेरा वजन |
लगा बड़ा फ्रेस्टेटेड लड़का है इसको और कोई ना मिला क्या , नजर तो न खराब हो गई पगले की | चलो कपड़ो बाकी चीजों से धोखा खा गया लड़कियां ऐसे कपडे पहनती है , लेकिन मेरा चेहरा तो दिख ही रहा होगा |  उसके आस पास भी नहीं हूँ |
जैसे ही दिमाग में  बात चेहरे की आई तो लगा कही ऐसा तो नहीं मेरे चेहरे पर कुछ लगा है जल्दी में आई हूँ कुछ क्रीम पाउडर लगा रह गया हो और बेचारा बच्चा कब से मुझे ईशारा कर रहा और मै समझ ही नहीं रही और उसे ही गरिया रही हूँ  |
तुरंत ही अपनी स्कूटी का शीशा अपनी ओर किया और खुद को शीशे में देखते ही इतनी जोर की हंसी छूटी की खुद को रोक ही नहीं पाई और हंसने लगी | उतने में वो पीछे से आ गए |
"अरे अकेले खड़े खड़े सड़क पर हंस रही हो  मुझे भी बताओ मै भी हंस लू  |"
" जानते हो बचपन में एक चुटकुला सूना था याद आ गया | एक बार एक बुर्कानशी जा रहीं थीं , उन्हें देखते एक शोहदे ने उन्हें छेड़ा रफ्ता रफ्ता मेरी आँख तुझसे लड़ी है | बुर्कानशी बुजुर्ग ने फट अपना बुर्का  ऊपर कर गाया आँख जिससे लड़ी तेरी माँ से भी बड़ी है | अभी एक शोहदा यहाँ भी था भाग गया |
" देखा मुझे देखते भाग गया ना "
" तुम्हे देख कर नहीं भागा वो तो मेरे बुर्के मतलब हेलमेट उतारते से भागा और  इतनी तेजी से भागा कि मुझे गाना गाने का भी मौका नहीं दिया  |

 #अधूरीसीकहानी_अधूरेसेकिस्से 







September 13, 2018

मैनु इश्क तेरा लै डूबा मैनु इश्क तेरा लै डूबा -------- mangopeople



"लो हो गई ना उलटी | रात से ही बोल रहा हूँ खाना खा लो , लेकिन खाई ही नहीं | कभी तो एक बात सुन लिया करो 😥 " 


"तीज का व्रत ऐसे नहीं तोड़ते और ये उलटी तुम्हारी बात मानने से ही हुआ है समझे 🙄 "


"लो मैंने क्या किया 😮| उलटा मै १२ बजे रात से बोल रहा हूँ डेट बदल गया तीज ख़त्म , खाना खा लो | "


" तारीख बदलने से दिन नहीं बदलता सूरज उगने के बाद दिन बदलता है और ये जो तुमने मुझे खाली पेट जबरजस्ती दूध पिलाया है , उलटी उससे हुआ है 😣 | "


"ऐसा होता है क्या 🤔"

"मुझे गैस भी बन गई थी 😢 | व्रत रहने की आदत नहीं है ना 😔😔| "

"तुम व्रत नहीं रहती हो 😰😰"

"व्रत स्रत पूजा पाठ मै नहीं करती 😋"

"तो फिर कल क्यों नहीं बताया , नहीं रहना था व्रत 🤔"

"कल नहीं बताया क्योकि मै नहीं चाहती थी की तुमको तीज के दिन हार्ट अटैक आ जाये 😂😂😂"

"कुछ भी 🙄😏"

"जाने दो तुम नहीं समझोगे 🤗"

"अरे नहीं मुझे फर्क नहीं पड़ता , तुम ना रहती ☺️☺️

"सच्ची , तो ये बात परसो क्यों नहीं बोला , जब मैंने बताया की मम्मी ने कहा है पहला तीज है व्रत रख लेना | मैंने तुमको ये बात बताई ही इसलिए थी कि देखु तुम क्या सोचते हो | तो उलटा तुम मुझे कहने लगे रात में तो सब खाना खा लेते है ये भी कोई व्रत हुआ | मुझे चैलेंज दे दिया दिया 🙄"

"नहीं मेरा वो मतलब नहीं था 😅"

"मतलब तो तुम जाने दो | ना रहती तो सारी जिंदगी सुनाते मेरे लिए एक दिन भूखा नहीं रह सकती | सामने भले ना दिखाते अंदर ही अंदर निराश होते कुढ़ते मेरी बीबी मेरे लिए व्रत भी नहीं रहती 😁"

"मेरा विश्वास करो मै ऐसा नहीं नहीं सोचता 😯"

"देखो ऐसा है कि मै ऐसा कोई मौका ही किसी को नहीं देती कि कोई मुझे कुछ सूना सके | हा मै सबको सुनाऊं 😁"

" फिर कल पुजा क्यों की 🤔"

" वो तो तुम भगवान की फोटो माला फूल प्रसाद सब लेकर आ गये तो कर दिया । वरना तुमको पता चलता तो पहले जबरदस्ती खाना खिला देते फिर बाद में कहते काहे का व्रत रात में तो खाना खा लिया था 😒"

"मैं ऐसा कुछ नहीं करता 🙁"

"देखो अब ये सब जाने ही दो । मैने एक बार पूरा व्रत रख कर अपने प्यार की अग्नि परीक्षा दे दी है । अब तुम्हारी बारी है , तो तैयार रहो जब मेरा मन होगा तुमसे अग्नि परीक्षा ले लुंगी 😂😂😂 "

"😰😱"

आज इतने साल हो गये मैने आज तक वो वाली अग्नि परीक्षा ली नहीं । वो अलग बात है की बंदे को लगता है कि वो तो हर दूसरे दिन परीक्षा देता है 🙄😏😒

 #अधूरीसीकहानी_अधूरेसेकिस्से

September 08, 2018

पहले स्वयं को जाँच ले की हम कितने प्राकृतिक कर्म करतें हैं --------mangopeople






                                                                नहाने  के बाद चेहरे के रूखेपन और खिचाव को दूर करने के लिए क्रीम लगाते ख्याल आया कहीं कोई अप्राकृतिक कर्म तो नहीं कर रही | अब प्रकृति ने रूखी त्वचा दी है तो उसे वैसे ही स्वीकार कर लेना चाहिए काहे क्रीम तेल लगा उसकी प्रकृति बदलने की चेष्टा की जाए | अक्सर लोगों को अभिनेत्रियों को ताने मारतें देखा सुना की उनकी सुंदरता प्राकृतिक नहीं है | खुद के बारे में सोचू तो लगता है अपना भी कितनी प्राकृतिक बचा हुआ है | रूखेपन से बचने के लिए तो बचपन से क्रीम तेल उबटन और न जाने क्या क्या का प्रयोग करती रही , अब तो जमाना हो गया झुर्रियो से बचने की क्रीम लगाते , पार्लर जा कर शरीर की कितनी की प्रकृति आम लोग बदल आते है | इन सब को प्राकृतिक माने या अप्राकृतिक | हम तो अपने शरीर पर प्रकृति की मार भी नहीं सह पाते धुप बारिश ठंड सबसे बचने के हजारो तरीके अपनाते है क्या ये अप्राकृतिक नहीं है | 
                   

                                                         प्रकृति ने तो मादा को बनाया ही इस लिए है की वो बच्चे को जन्म देती रहे और जीवन चक्र चलता रहे और हम है की प्रकृति  के इस क्रिया को रोक अप्राकृतिक कर्म किये जा रहे है | प्रकृति के अनुसार तो बच्चे जन्म देने की शक्ति आते ही ,  इंसानी रूप के लिए १२ से १५ की आयु में इस कार्य की शुरुआत कर देनी चाहिए लेकिन इंसानी बस्ती में आज इस प्राकृतिक काम को अप्राकृतिक घोसित किया जा चूका है | प्रकृति तो मादा को ये भी निर्देशित करती है की वो केवल शक्तिशाली जीवन जीने के संघर्षो का सामना करने लायक बच्चो को जन्म दे जिसके लिए उसे सबसे शक्तिशाली नर का ही साथ लेना चाहिए  | कमजोरो को तो ऐसे ही अपनी वंश बेल को बढ़ाये बिना ही मर जाने के लिए प्रकृति कहती है | लेकिन आज कमजोर से कमजोर इंसानी नर अपनी वंश बेल बढ़ा कमजोरो को जन्म देने की आप्रकृतिक कार्य कर रहे है | हम ऐसा कर पा रहें हैं क्योंकि हमने बीमारियों और मृत्यु जैसे प्राकृतिक चीजों को कुछ हद तक अपने नियंत्रण में कर पहले ही अप्राकृतिक काम कर दिया है | 

                                
                                                    प्रकृति तो कहती है बीमार पड़े तो उसे अपने आप प्राकृतिक रूप से उसे ठीक होने दो | प्रकृति का सच्चा स्वरुप जंगल में बीमार पड़ने पर क्या कोई जाता है अस्पताल , खाता है कोई दवा नहीं ना | अस्पताल और दवा भी प्राकृतिक नहीं है | अगर कुछ प्राकृतिक है तो वो है जन्म और मृत्यु बस , लेकिन कितने इसको स्वीकार कर पाते है | बीमारिया से बचने के लिए दुनियाँ जहान के ईलाज दवाये सभी तो भागते है अप्राकृतिक कर्म की ओर | हम इंसानो की फितरत है हमारे लिए वही सही होता है जो हम करते है दुसरो का किया हर कर्म हमें अप्राकृतिक ही लगता है | 


August 25, 2018

पिया तुमसे भला तो ये जमाना है ------ mangopeople



                                                               चार दिन के लिए मायके क्या गई तुम्हारी तो मौज ही आ गई होगी एक दिन भी मेरी याद तो आई नहीं होगी | पिया तुमसे भला तो ये फेसबुक है चार दिन में मेरे बिना मरा जा रहा है | अलर्ट पर अलर्ट दिया जा रहा कि देखो दुनियाँ में कितना कुछ हो गया कितनो ने अपनी प्रोफ़ाइल फोटो बदल डाली और तुम सब मिस कर रही हो, आओ जल्दी आओ हम तुम्हे मिस किये जा रहे है |  सामने रहने पर तो तुम कभी गुडमार्निंग न कहे , न रहने पर कभी  व्हाट्सप्प पर भी हाय हल्लो न कहा | पिया तुमसे अच्छा तो ये गुडमार्निंग और गुडनाइट कहने वाले व्हाट्सप्पीये है | मै कहीं भी रहूं इन्हे देखु ना देखु पर ये हर सुबह हर रात बिना नागा मुझे विश करने के लिए मैसेज जरूर करते है | पिया तुम्हे तो मेरा बाहर जा कर काम करना ना भाया , लेकिन चार दिन बाद मेल खोला तो मेरे लिए नौकरियों की लाइन लगी पड़ी है | आधे तो घर बैठे काम कर, महीने का लाखों कमाने का ऑफर दे रहें है | तुम्हारा कार्ड जरूर मेरे पास है लेकिन उससे खर्च करने की एक लिमिट है | पिया तुमसे भला तो ये बैंक वाले  है जो रोज मुझे अनलिमिटेड खर्च के लिए गोल्डन सिल्वर क्रेडिट कार्ड देने के लिए तड़प रहें हैं |
                                                        सालो से इस मुर्गी के दड़बेनुमा घर में रख मेरे अंदर के इंटीरियर डिजानइर को मारे जा रहे हो | पिया तुमसे भला तो ये बिल्डर और प्रॉपर्टी डीलर है जो रोज दस पंद्रह मैसेज कर लाखों की छूट करोड़ो के फ़्लैट पर दे सिर्फ मेरे लिए बचा कर रखा हुआ है | तुमसे घर की बात करो तो पैसे का रोते हो | पिया तुमसे भला तो वो लोन देने वाले है जो हर दूसरे दिन फोन कर बताते हैं कि उन्होंने देश के सवा सौ करोड़ लोगो में से बस मुझे चुना है लोन देने के लिए, दरवज्जे खड़े है पैसा लिए बस मेरे हा की देर है | चवन्नी भी ना दी तुमने बोनस की मुझे | पिया तुमसे भले तो वो लॉटरी जिताने वाले है जो लाखो पौंड की लॉटरी मेरी तरफ से खरीद भी लेते है और मुझे जीता सीधा पैसा पहुँचाने आ जाते हैं | मर गए ना जाने तुम्हारे कितने रिश्तेदार एक फूटी कौड़ी भी ना दी | पिया तुमसे भले तो वो नाइजेरियन हैं जो अपने चाचा मामा के वसीयत का करोड़ो मुझे दान देने के लिए तैयार है | मेरे यहाँ वहाँ गिरे बालों की शिकायत के सिवा कभी कुछ न किया | पिया तुमसे भला तो वो डॉक्टर बत्रा है जो २०% से ८०% तक की छूट दे मेरे झड़ते बालों का ईलाज करने के लिए हरदम तैयार बैठा है | मेरा बढ़ता वजन देख सिवा मेरे खाने पर नजर लगाने के तुमसे कुछ न हुआ | पिया तुमसे भली तो डॉक्टर अंजलि है जो रोज  मुझे मैसेज भेजती है ताकि मै वजन कम करने के लिए प्रेरित हो सकूँ | घुटनो के दर्द और छोटे अक्षरों के न पढ़ पाने पर मुझे आंटी जी बुलाने के आलावा कोई ख्याल न आया तुम्हे | पिया तुमसे भले तो वो अस्पताल और पैथोलॉजी वाले है जो मुझे फोन कर फूल बॉडी चेकअप के साथ अब तो ब्लड टेस्ट के पैकेज का ऑफर मुझे दे रहे है | सच कहूं तो पिया तुमसे भला तो ये जमाना है | 

#अधूरीसीकहानी_अधूरेसेकिस्से

August 12, 2018

माँ बापगिरी के मुश्किल फंडे ------ mangopeople


एक मित्र  ने एक मुद्दा उठाया बच्चो को फोन देना चाहिए की नहीं | आखिर हम सब बिना मोबाईल फोन के ही पले  बढे है तो हमारे बच्चे वो कैसे नहीं कर सकते है | मेरा मानना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें एक समय बाद फोन देना ही चाहिए । आज बच्चे अकेले कई जगहों पर जाते है किसी मुसीबत मे फंस गये तो हमे 

कैसे फोन करेगे । खुद हमे उनसे बात करनी हुई उनकी चिंता हुई तो क्या करेगे । ज्यादा हुआ तो स्मार्ट फोन 
नहीं देगे फोन करने लायक साधारण फोन देगें ।

                                                                        हमारे और हमारे बच्चो के जीवन में जमीन आसमान का फर्क हैं | हम केवल स्कूल के लिए  निकलते और उसके बाद सीधा घर | बाकि जगह परिवार के साथ,  हमारा अपना कोई जीवन नहीं था | कहीं गए भी तो अँधेरा घर वापसी का सिग्नल होता | बिटिया का जीवन इससे कही ज्यादा अलग है |  सुबह छ बजे उन्हें बास्केटबॉल के सलेक्शन के लिए लेकर गई घर आ नाश्ता कर तुरंत पेंटिंग क्लास के लिए फिर वहां से आ कर फिर प्रोजेक्ट के सामान के लिए बाजार फिर वापस से पेंटिंग क्लास क्योकि अगले महीने परीक्षा है | कल बैडमिंटन का सलेक्शन था | रोज स्कूल भी छोड़ने जाना होता है गेम्स  के लिए | दोस्तों की बर्थडे पार्टी में रात नौ दस बजते है | शुक्र है अभी टियूशन नहीं लगाया वरना वहां तो रोज ही जाना होगा |  अभी छोटी है तो भाग रहीं हूँ लेकिन कब तक , एक दिन अकेले छोड़ना ही पड़ेगा इन सब भाग दौड़ के लिए फिर उनसे कनेक्ट रहने के लिए फोन देना ही होगा | बिजनेस शुरू किया तो उन्हें अकेले घर में छोड़ कई बार जाना हुआ | कुछ हुआ तो मुझे कैसे फोन करती लैंड लाइन का जमाना गया फोन तो देना ही पड़ा | दर्जन भर उनके स्कूल , क्लास, प्रोजेक्ट , गेम , स्कूल वैन के व्हाट्सप्प समूह है | पहले सब मै देखती थी  अब मैंने वो हैंडिल करना छोड़ दिया है | बिटिया का काम है देखे और अपना काम खुद करे |  ख़राब कोई आधुनिक चीज नहीं होती हम उनका प्रयोग गलत करते है  |
                                                        हमें बच्चो को चीजों का मिस यूज गलत प्रयोग न करने के लिए समझाना चाहिए | वो क्या कर रहे है उन पर नजर रखनी चाहिए | हम खुद फोन का प्रयोग कम करेंगे तो बच्चे भी उसका प्रयोग कम करेंगे | मै किसी को गुडमार्निंग के मैसेज , फिजूल के चुटकुले , वीडियो फॉरवर्ड करना , फालतू की चैटिंग , सेल्फी लेना जैसे काम नहीं करती बिटिया भी ये नहीं करती है |   फोन के जितने भी गलत प्रयोग हो सकते है उनके बारे में जैसे ही सुनती हूँ तो तुरंत बातो बातो में उन्हें उसके नुकशान के बारे में बता देतीं हूँ | अभी महीने भर पहले वो सभी अपना डांस वीडियो यूट्यूब पर देने के बारे में पूछ रहीं  थीं |  तुरंत उसके बारे में उन्हें समझाया उनसे ये भी पूछा की वो ऐसा करना ही क्यों चाहतीं है  | फिर उसके जरुरत और दुष्प्रभावों के बारे में उनसे और उनकी दोस्तों से भी बात किया ,वो सब समझ भी गई और मान भी गई | जबकि ढंग की चीजों के लिए कोई मनाही भी नहीं है | दर्जनो  कलाकारी , क्राफ्ट बनाना , पेंटिंग करना , कीबोर्ड बजाना , हेयर स्टाइल बनाना , जादू के ट्रिक करना , नेल आर्ट , पहेलियाँ बनाना बूझना , बाँसुरी की अनेको धुन सीखना जैसे कितनी ही चीजे बीटिया ने यूट्यूब से सीखे  और हमें भी सिखाया है | मोबाईल के पियानो पर कई गाने मुझे सीखाया  | अभी हाल में बिटिया ने बांसुरी पर हीरो की धुन बजाना भी सिखाया है ,वो स्कूल बैंड में बाँसुरी बजाती है | मै उन्हें कई गेम्स भी खेलने देतीं हूँ जो हिंसक ना हो और जिसमे उनके हर चीज पर ध्यान देने की आदत भी पड़े थोड़ा दिमाग भी तेज चले | कितनी ही बार तो टीचर बोलती है नेट पर ये देख लो | ये सब करने के लिए उन्हें फोन कंप्यूटर आदि ना दे तो जरुरत के समय वो अनाड़ी ना रह जाए |

                                                     इन सब को छोड़ भी दे तो कई अन्य जरुरी चीजें भी है जो दुसरो के लिए जरुरी है | जैसे  हमारे स्टॉप से बच्ची जाती है सिंगल मदर है शाम को वैन पालना घर में छोड़ती है माँ फोन पर उसके स्कूल से निकलने से पहले और पहुंचने के तुरंत बाद  फोन करती है | स्कूल में फोन ले जाने की इजाजत नहीं है इसलिए वह फोन जमा करना पड़ता है और छुट्टी के बाद उन्हें मिलता है | मुंबई में ऐसे हजारो बच्चे है जो घर अकेले पहुंचते है या सभी जगह उन्हें अकेले ही जाना पड़ता है माँ बाप के लिए फोन ही संपर्क बनाये रखने में सहायता देता है | कुछ चीजे वक्त की जरुरत होती है जिन्हे समय के साथ अपना लेने में कोई बुराई मुझे नहीं लगता है | बाकि ये भी सही है कि जरुरी तो कुछ भी नहीं है , देश के हजारो लाखो बच्चे इसके बिना भी जी ही रहे है | इसलिए इस मामले में सभी माँ बाप की अपनी सोच हो सकती है | क्योंकि बच्चे पालने का कोई एक फंडा नहीं होता |

July 03, 2018

छठवांवेद ---------mangopeople


              भाग दो
धार्मिक न होने के कारण धार्मिक किताबो को देखने का नजरिया मेरा बाकियों से अलग है मेरे लिए वो नैतिक शिक्षा देने वाले साहित्य है इससे ज्यादा कुछ नहीं |                 

                          एक समय ऐसा आया जब हिंदू धर्म की हर शाखा ,हर विचारधारा , दर्शन सिर्फ और सिर्फ मोक्ष की ही बात करते और उसे ही जीवन का अंतिम लक्ष्य मानते | उन सभी के अनुसार मनुष्य जीवन का एक मात्र लक्ष्य  मोह माया और सुख दुःख के बंधनो से मुक्त हो मोक्ष प्राप्त करना है और हर व्यक्ति को उसी को प्राप्त करने का  प्रयत्न करना चाहिए |  कर्म को उन्होंने सभी मोह , बंधन , दुःखों  का कारण माना और मनुष्य को उससे मुक्त हो मोक्ष अर्थात बंधन मुक्ति की और बढ़ने के लिए प्रेरित किया | संभवतः इस कारण समाज में अव्यवस्था , कर्महीनता ही स्थिति बनी होगी | सोचिये यदि मनुष्य अपने कर्म करना छोड़ दे तो वो समाज में दूसरे लोगों को कितना प्रभावित कर सकता है |  किसान अनाज उत्पादन करना छोड़ दे , व्यापारी व्यापर करना , सैनिक रक्षा करना , राजा राज काज करना आदि आदि | सब कर्म करने की जगह मोक्ष  के लिए सिर्फ  ईश्वर को याद करने लगे तो संसार में कोई व्यवस्था ही न होगी | ये कर्म हीनता संसार के चक्र को ही रोक देगा | शायद उसी समय किसी कृष्ण ने कर्म की महत्ता को समझा होगा और मनुष्य को फिर से कर्म के मार्ग  की और मोड़ने के लिए महाभारत और गीता की रचना की होगी | 

                                       गीता में कृष्ण ने कर्म को दुःखो का कारण नहीं बल्कि कर्म करने के बाद उसके फल की चिंता को दुःख का कारण  बताया और उससे दूर रहने , आगे क्या होगा की चिंता से मुक्त रहने को कहा | उन्होंने मोक्ष की अवधारणा को ख़ारिज नहीं किया और ना ही उसे महत्वहीन बताया | शायद इसका कारण ये रहा हो की मोक्ष की अवधारणा तब तक भारतीय जनजीवन में इतने गहराई से बैठ गया था कि उसे आम लोगो के दिल और दिमाग से निकालना एक मुश्किल सा कार्य रहा होगा | उसे हटाने में अपना समय बर्बाद करने की बजाये कृष्ण ने माध्यम मार्ग अपना और मोक्ष प्राप्ति के लिए कर्म को एक बड़ा जरिया बताया | उनके अनुसार ईश्वर ने एक खास कर्म को करने के लिए ही मनुष्य का जीवन प्रदान किया है | फिर कोई मनुष्य उस कर्म को करने से पीछे कैसे हट सकता है | मोक्ष के रास्ते में जो दुःख है मोह है वो कर्म नहीं बल्कि वो कर्म के बाद का वो लालच है जब हम कर्म के बदले कुछ चाहते है | अर्थात कर्म करो और फल की चिंता छोड़ दो उसी से मोक्ष पा सकते हो  | फल देना ईश्वर का कार्य है और वो उसी पर छोड़ देना चाहिए | कर्म भी ईश्वर तक जाने का उससे योग ( मिलने )  का एक मार्ग है , इसलिए गीता को कर्मयोग और कृष्ण को उसका संस्थापक भी माना जाता है | कृष्ण ने बड़ी चतुराई से आम लोगो की भावनाओ को सोच को  एक दूसरी बिलकुल विपरीत दिशा में मोड़ दिया और लोगों के जीवन और समाज में एक व्यवस्था स्थापित कर दी बिना किसी हो हल्ले के क्रांति के | कृष्ण , गीता और महाभारत ना होता तो शायद भारत और हम वो नहीं होते जो आज है | मोक्ष हमारे अपने कर्म को ईमानदारी से करने में है कर्महीन होने में नहीं | 
#छठवांवेद 











July 01, 2018

अपराध में कुछ नए रंग ---------mangopeople




                                                         

                                                       आज का माहौल कुछ ऐसा है कि देश में होने वाली लगभग हर घटना का रुख एक ही तरफ मुड़ जाता है और बाकि के जरुरी सवाल कही पीछे छूट जाते है | किसी अपराध और अपराधी के लिए इससे अच्छा माहौल क्या होगा जब उसके अपराध को भी धर्म के रंग में रंग कर लोग अपनी सुविधानुसार और राजनैतिक विचारो के अनुसार प्रतिक्रियाए दे या उसका विरोध करे  | नतीजा ऐसे ज्यादातर अपराधों में धर्म और राजनीति का खतरनाक कॉकटेल अपराधी  के बचाव में भी लोगों को खड़ा कर देता है या कुछ लोग अगर मगर का पेंच इसमें लगा देते है | इस खतरनाक मिश्रण ने तो लोगों का  भरोसा भी कानून और पुलिस पर ख़त्म सा कर दिया है | यही कारण है की आज भीड़ द्वारा लोगो को मारे जाने की घटनाए दिन पर दिन बढ़ रही है | लोगो की प्रतिक्रियाए इतनी ज्यादा उग्र है कि वो बड़ी आसानी से किसी भी अफवाह झूठ पर विश्वास कर  अजनबी को संदेह की नजर से देखने लगे है और खुद कानून को हाथ में ले सजा देना शुरू कर दिया है |

                                                      किसी भी अपराध के असली कारणों को जब नहीं देखा जाता उसकी रोकथाम नहीं की जाती |  जब तक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार लोगों और लापरवाही दिखाने वाले लोगों को दंडित नहीं किया जाता |  किसी भी तरह के अपराध को रोकना क्या कम करना भी असंभव है | हाल में भी मंदसौर में एक मासूम बच्ची के साथ जिस तरह बर्बर तरीके से रेप किया गया और उसकी हत्या करने की कोशिश की गई | उसके अपराधी को फांसी की सजा मिलना तो तय है | लेकिन ये भी जरुरी है कि लापरवाही बरतने वाले स्कूल के खिलाफ भी कार्यवाही की जाए और पुलिस के खिलाफ भी जाँच बिठाई जाए की ऐसे मामलों में  रिपोर्ट लिखे जाने के पुलिस कार्यवाही में कितनी  तत्परता दिखाती है  |  जिस तरह अपराधी तीसरे ही दिन सीसीटीवी कैमरे में कैद होने के कारण पकड़ा गया उससे लगता है कि यदि पुलिस उसी शाम से तेजी दिखती और इलाके  कैमरों की जाँच शुरू कर अपराधी को पकड़ने का प्रयास करती  तो शायद इतनी बर्बर घटना को होने से रोका जा सकता था | कार्यवाही उस स्कूल के खिलाफ भी होना चाहिए जिसने इतनी छोटी बच्ची को स्कूल से अकेले घर जाने दिया | जबकि रोज उसके पिता उसे लेने आते थे तो ये साफ तौर पर स्कूल की जिम्मेदारी थी कि जब तक उसके घर से कोई आ नहीं जाता बच्ची स्कूल से बाहर न जाए | ये जरुरी है कि ऐसी घटनाओं में ऐसे लापरवाह लोगों की भी जिम्मेदारी  तय की जाए और उन्हें उसकी सजा भी दी जाये | जिससे अन्य लोग भी सबक सीखे और ऐसी गलतियों से बचा जा सके  |

                                                  अक्सर ऐसे हर मामलों के बाद कड़े कानूनों और फांसी की सजा की मांग सभी करते है लेकिन कोई भी इसके पीछे के सामाजिक सोच को बदलने का कोई प्रयास नहीं करता है | आज भी खुलेआम महिलाओं को सोशल मिडिया में रेप की घमकी या उसे अश्लील मैसेज भेजे जाते है और कोई भी ऐसे लोगों का विरोध नहीं करता उनका बहिष्कार नहीं करता | सभी वही अगर मगर , महिलाओं को दोष देने और राजनैतिक सोच के हिसाब से प्रतिक्रिया देने का काम करते है | इससे ऐसी मानसिकता वाले लोगो को अपराध करने का बढ़ावा ही मिलता है | उन्हें लगता समाज में फिर हमारे लिए लोग खड़े हो जायेंगे और दोष महिला को दे दिया जायेगा  या मुद्दे को एक अलग रंग | जब  अपराध और अपराधी का विरोध में कुछ दूसरे रंग डाल दिए जाते है तो अपराध कम नहीं होते , उन्हें बढ़ावा मिलता है |


                       



June 22, 2018

तेरे प्यार का पंचनामा -------mangopeople






                                                                           डिस्कवरी पर कुछ समय पहले एक कार्यक्रम देखा , एक लड़की अपना लिंग बदल  लड़का बनना चाह रही थी | वैज्ञानिको ने उसके साथ कुछ मनोवैज्ञानिक रिसर्च के तहत उसके दिमागी परिवर्तन को जांचा | जब लड़की थी तो उसे कुछ तस्वीरें दिखाई गई | तस्वीरों को उसने  अपने दिमाग का केवल  पांच प्रतिशत ( ५ % )  ही खर्च कर पहचान लिया | तस्वीरों में ख़ास ये था की वो भावनाओं के साथ थी जैसे खिलखिलाता बच्चा , शांत सा बूढ़ा , मुस्कुराती लड़की , उदास सी महिला कुछ इस तरह की ही तस्वीरें थे | बस टेस्टोस्टेरोन के इंजेक्शन   के पुरे डोज के बाद  लड़का बन गई अंदर से तो बिलकुल उन्ही जैसी तस्वीरों को  पहचानने में उसे अपने दिमाग का पछत्तर ( ७५ % ) प्रतिशत भाग प्रयोग करना पड़ रहा था | चुकी तस्वीरों का विश्लेषण दिमाग अपने हिसाब से करता है अगर तस्वीर बच्चे के हंसने की है तो दिमाग उसे सिर्फ बच्चे की फोटो नहीं पढ़ता उसके भाव को भी  पढ़ता है और इसी में दिमाग ज्यादा प्रयोग हो जाता है |


                                                                  मतलब पुरुष भाव नहीं पढ़ पाते भावनाए नहीं समझ पाते  तो उनका दोष नहीं है ये पुरुष होने का केमिकल लोचा है अगर ऐसा आप सोच रहे है तो पोस्ट फिर से पढ़िए | मैंने नहीं कहा की पुरुष भाव नहीं पढ़ सकते बस दिमाग ज्यादा खर्च करना पड़ता है जो की वो  खर्च करने की जरुरत नहीं समझते और सीधा डायलॉग मार देते है कि इन औरतो को तो समझना मुश्किल है | जो पुरुष  दिमाग शादी के पहले किसी लड़की को पटाने , ताडने , प्रेमिका बनाने , मनाने में तीन सौ प्रतिशत जी हा पुरे तीन सौ प्रतिशत लगा देता है | खुद का डेढ़ सौ प्रतिशत औकात से ज्यादा , फिर उस कमीने दोस्त का पूरा दिमाग  जिससे खुद एक भी लड़की न पटी लेकिन बनता लव गुरु है और पचास प्रतिशत दिमाग उस गधे दोस्त का  जिसके पास असल में दिमाग है ही नहीं लेकिन  इस यज्ञ में वो भी अपनी आहुति देता है  | इस प्रकार तीन सौ प्रतिशत दिमाग लगाने वाला शादी के बाद पछ्त्तर प्रतिशत भी दिमाग खर्च करने को राजी नहीं होता ताकि पत्नी की कही गई बातो के साथ उसके भावनाओं को समझ सके | तो आगे से दिमाग  खर्चिये बचा के रखने पर न ब्याज मिलेगा और न बढ़ेगा |

#तेरेप्यारकापंचनामा


     














                

June 07, 2018

छठवांवेद ---------mangopeople

भाग -१
धार्मिक न होने के कारण धार्मिक किताबो को देखने का नजरिया मेरा बाकियों से अलग है मेरे लिए वो नैतिक शिक्षा देने वाले साहित्य है | किसी और के लिए जो महाभारत कृष्ण की लीला है वह मेरे लिए कृष्ण नामक लेखक द्वारा लिखी गई रचना है  | जो समाज में नैतिक मूल्यों को बढ़ाने , लोगो को सही से आचरण अर्थात धर्म अनुसार आचरण करने की प्रेरणा देने के लिए लिखा गया है | महाभारत की रचना सिर्फ धर्म और धर्म के अनुसार कर्म की महत्ता स्थापित करने के लिए की गई है | एक एक पात्र और एक एक घटना सिर्फ धर्म की समाज को महत्व बताने अर्थात धर्म की स्थापना के लिए है | यहाँ  धर्म का अर्थ हिन्दू मुस्लिम वाले से नहीं है बल्कि सही अच्छे कर्मो से है | कौरवों का १०० भाई होना , क्या संभव है ऐसा होना , नहीं , किन्तु चमत्कारिक रूप से १०० पुत्रो का जन्म होता है | संदेश साफ़ है १०० पुत्रो वाले वंश का भी नाश हो जायेगा यदि वो धर्म पर नहीं चल रहे है | पांच पुत्र ही हो लेकिन वो धर्म पर चले तो वंश का नाम रौशन करते है और १०० पुत्रो वाले अधर्मी वंश का नाश |

                                    अधर्म के साथ जो भी खड़ा होगा वो नष्ट होगा चाहे वो कितना बड़ा धर्मनिष्ठ , वचनपालन करने वाला ,  शूरवीर या अच्छा व्यक्तित्व हो | भीष्म वचन से बंधे अपने कर्तव्यों के नाम पर अधर्म के साथ खड़े हुए , द्रोणाचार्य पुत्र मोह में , कर्ण अपने लिए सम्मान पाने के लिए  , मित्रता का फर्ज और  एहसान का कर्ज चुकाने के लिए अधर्म के साथ खड़े रहे और महारथी होने के बाद सब हारे | यहाँ तक स्वयं भगवान की सेना अधर्मियों के साथ होने के कारण हार गई | कर्ण , भीष्म , द्रोणाचार्य आदि पत्रों की रचना ही इस उद्देश्य से किया गया कि संदेश दूर तक जाए और गहरा जाए | ध्यान दीजिये कि  ये पात्र और कई अन्य अच्छे पात्र जो कौरवो के साथ खड़े है वो सभी समाज के अलग अलग तबके से आये हुए , अलग अलग पदों और भिन्न परिस्थियों से आये हुए दिखाये गए है लेकिन सभी का अंत समान है , क्योंकि वो गलत के साथ खड़े हुए |  कलयुग में भी हम बैठ कर इन पत्रों के साथ सहानभूति जताते कहे कि वाह ये पात्र और  व्यक्तित्व कितना अच्छा था लेकिन ओह ! फिर भी मारे गए | ये ओह ये टिस मनुष्य को याद दिलाती रहे की अधर्मी होना और अधर्म के साथ खड़े होने से आप के सभी गुण बेकार हो जाते है वो अधर्म को जीत नहीं दिला सकते | उनका बुरा अंत हमें याद दिलाये की हमें खड़ा किसके साथ होना है | गलत के साथ खड़े होने के लिए आप कोई बहाना/ कारण नहीं दे सकते है |
                                                     इन पत्रों की रचना ही इस उद्देश्य के लिए किये गए कि मनुष्य समझे की केवल अच्छे होने और शूरवीर होने से कृति यश नहीं मिलता उसका प्रयोग हमेशा सही कार्यो में सहयोग के लिए ही होना चाहिए | मनुष्य के सौ अच्छे कर्म और बुद्धिमत्ता एक गलत काम की छूट नहीं देता है | आप को निरंतर केवल धर्म की राह चलना है चाहे परिस्थिति कुछ भी हो और समाज का व्यवहार आप के प्रति कुछ भी हो या समाज में आप का स्थान कुछ भी हो | ये मान कर चलिए महाभारत के सभी पात्र सिर्फ वही कर सकते थे जो उन्होंने किया इससे इतर वो यदि कुछ कर सकते कहानी की दिशा मोड़ने की जरा भी क्षमता उनमे होती तो वो पात्र  कृष्ण की इस रचना/लीला में कहीं नहीं होते |


#छठवांवेद 

May 26, 2018

श्रृंगार प्रेम है वासना नहीं -------mangopeople

   
हम अपने परिवार के सभी सदस्यों से जैसे चाहे वैसे अपने प्रेम का प्रदर्शन कर सकते है | माँ की गोद में सर  रख सो गए , भाई बहन को गले लगा लिया , पिता का हाथ पकड़ पार्क में दौड़ भाग लिए , दोस्तों के कंधे पर हाथ रख बतिया लिया , तो अपने बच्चो को  हमने चुम लिए | ये सभी हमारे परिवार के सदस्य है और हम सार्वजनिक रूप से इन सभी  के साथ अपने प्यार का इजहार भावनात्मक रूप से और शारीरिक रूप से कर सकते है | समाज और लोग सभी सहज और सामान्य रहते है उन्हें कोई समस्या नहीं होती , लेकिन जैसे ही बात जीवनसाथी पति या पत्नी की आती है उनके प्रेम दर्शाने के तरीको पर तुरंत  पाबन्दी लगा दी जाती है | कितना अजीब है ना जिन दो लोगो को प्रेम से रहने के लिए जोड़ा जाता है उनके ही प्रेम का प्रदर्शन समाज  स्वीकार नहीं करता है | शारीरिक ( गले लगाना ,  हाथ पकड़ना , करीब बैठे रहना ,  चूमना ) तो दूर की बात यहाँ भावनात्मक रूप से भी प्रेम के प्रदर्शन पर लोगो की भवे तन जाती है |  ऐसा नहीं है की हमारी संस्कृति में प्रेम था ही नहीं कृष्ण और राधा का होना बताता है कि प्रेम हमारी संस्कृति धर्म का हिस्सा  है | एक कदम और बढे तो रति और कामदेव के रूप में पति पत्नी के प्रेमी जोड़ी भी विद्यमान है | जहा शिव पार्वती और राम सीता सात्विक जोड़ियां थी वही विष्णु  लक्ष्मी और रति कामदेव के रूप में रजो जोड़े  का होना बताता है कि कम से कम धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से ये हमारे लिए यह वर्जित नहीं है | मंदिरो , स्तूपों और गुफाओं में हजारो आलिंगनबद्ध , प्रेमरत , श्रृंगारिक मुर्तिया और पेंटिंग गवाह है कि ये भारतीय समाज के लिए वर्जित कभी नहीं थे |  फिर न जाने कब हमारे समाज ने पति पत्नी के बीच से श्रृंगारिक प्रेम को निकाल दिया और उनके प्रेम दर्शाने को लज्जा का पाप का विषय बना दिया |
                                   


                                                  अंग्रेजो ने हमारे पुराणिक ग्रंथ हमसे पहले पढ़े और श्रृंगार का अनुवाद इरॉटिक यानि कामुकता बना दी ,  जबकि हम प्रेम और  कामुकता (वासना) के फर्क को जानते है | नतीजा हम भारतीय भी इसी घालमेल में फंसते  चले गए और पत्नी प्रेम की जगह भोग्य वस्तु बनती चली गई | इसे बढ़ाने में साथ दिया वो विचार जो तथाकथित भारतीय संस्कृति को बचाने के लिए उनके नाम की दुहाई  के साथ बोला जाता था | ज्यादा नियंत्रण न हो रहा तो विवाह कर लो , ये सब शादी के बाद , शादी के बाद जो चाहे वो करो ,  आदि इत्यादि इन संस्कृति बचाओ विचारो ने विवाह को शारीरिक जरूरते पूरी करने वाली संस्था और पत्नी को साधन बना दिया | पत्नी प्रेम की जगह कामुक नजरो से देखी जाने लगी उसकी कदर और इज्जत नजरो में गिरती गई | संस्कृति बचाते बचाते  विवाह प्रेम और पत्नी तीनो को मार दिया | पति पत्नी के बीच से प्रेम गायब और बस बची तो वासना नतीजा उनके हर क्रिया कलाप को वासना युक्त समझा गया | आप माँ  बाप भाई बहन दोस्त चाचा चाची जिसे चाहे उसे प्रेम कर सकते है लेकिन जैसे ही बात पत्नी की आती है , प्रेम का स्वरुप बदल जाता है और लोगो की सोच भी | पत्नी का प्यार से हाथ पकड़ लेना , उसे गले लगाना  , उसकी गोद में सर रख सो जाना , उसके करीब बैठ जाना जैसे प्रदर्शन आप कर ही नहीं सकते है  क्योंकि   समाज की नजर में आप पत्नी को प्रेम कर ही नहीं सकते उसे एक ही नजर से देख सकते है और उस वासना युक्त नजर से देख कुछ भी सार्वजनिक रूप से नहीं कर सकते है , वह वर्जित है | नतीजा विवाह है पत्नी  है लेकिन श्रृंगारिक प्रेम के लिए वहां  कोई जगह नहीं है |



             






                                             











     


                   


                                 
               







May 24, 2018

मार्लिन मुनरो प्रेग्नेंट है -------mangopeople

 गोवा में एक फोर्ट में गई और उसके बुर्ज पर बैठ एक अच्छी फोटो खिचवाई और  बिलकुल उसी जगह खड़े हो कर अफसोस किया की कोई वन पीस मिडी या स्कर्ट  क्यों ना पहना आज, वरना आज एक और इच्छा गोवा में पूरी हो जानी थी  | खैर छोटा भाई और उसकी पत्नी यहाँ खड़े हो गए और टायटेनिक वाली पोज़ में , छोटे भाई की पत्नी को बोला जल्दी ठीक से पोज़ बनाओ फोटो लेलु वरना अभी तुम्हारे टायटेनिक का मार्लिन मुनरो हो जाना है , उसने घटनो तक का  वन पीस ड्रेस पहन रखा था | उसके कौन मार्लिन मुनरो के सवाल का जवाब दिया फोटो लेने दो जवाब मिल जाएगा | जल्दी करने के बाद भी बस दो क्लिक ही कर पाई थी और एक जोरदार हवा निचे समंदर से आई और उसके दोनों तरफ फैले हाथ तुरंत स्कर्ट पर आ गये , हम सब हस पड़े , ये है मार्लिन मुनरो समझी | फिर तुरंत उन्हें मार्लिन मुनरो की प्रसिद्द पोज़ वाली फोटो दिखा ज्ञान बढ़ाया गया | टायटेनिक पोज़ वाली फोटो भाई ने फेसबुक पर लगाई सभी ने अपनी श्रद्धानुसार उस पर टिप्पणी दी , लेकिन सबसे धांसू कमेंट सीधे मम्मी को फोन पर मिला शाम को कोलकता वाली मौसी से |  बधाई हो तुम फिर से दादी बनने वाली हो , हमें बताया भी नहीं | मम्मी बोली लो मै फिर से दादी बनने वाली हूँ मुझे ही नहीं पता और तुमको पता चल गया उतनी दूर | फेसबुक पर बहु की फोटो देखी प्रेग्नेंट लग रही थी |
              किस्सा ये था कि मौसी को एक बेटा और बेटी है , दीदी ने जुड़वा बच्चे एक लड़का , लड़की कर एक बार में काम निपटा दिया | लेकिन सुपुत्र को एक बेटी थी और थाइराइड के कारण बहु दुबारा कंसीव नहीं कर पा रही थी , प्रयास करते करते बेटी १० साल की हो गई फिर दवा दारू के बाद बहु ने दूसरे का नंबर लगा दिया | अब इतने समय बाद दूसरा बच्चा और वही सामाजिक ताना बेटे के लिए किया होगा इतने सालो बाद का शायद दबाव , जो भी रहा हो मौसी इस ताक में थी कि कोई और भी दूसरे न नंबर लगा दे तो उनका दबाव कम हो , मुझ तक से पूछ डाला दूसरे के बारे में नहीं सोच रही ,उनकी पोती मेरी बेटी से आठ महीने ही छोटी है और भाई मुझसे एक साल ही छोटा है , मै हँस पड़ी क्या मौसी इस उमर में , दिमाग नहीं ख़राब मेरा | उस समय अंदाजा नहीं था कि वो क्यों पूछ रही है | अब जैसे सावन के अंधे को बस हरियाली नजर आती है उसी तरह उस फोटो में भाई की पत्नी की ड्रेस में थोड़ी सी हवा भर गई थी ठीक मार्लिन मुनरो पोज़ के पहले और उसी से उन्होंने अंदाजा लगा कर बधाई तक दे दी | अच्छी खासी हमारी रोज़ मार्लिन मुनरो को प्रेग्नेंट बना दिया | 
आप कुछ भी पोस्ट लिखिये , कई बार पाठको के मन में अपना ही कुछ चल रहा होता है और वो अपनी श्रद्धानुसार उस पर टिप्पणी दे देते है और पोस्ट और आप कि सोच  का  अंदाजा भी लगा लेते है |