January 20, 2020

वो बस आपको थका रहें हैं -----mangopeople

बॉक्सिंग के फ़ाइनल मैच की तैयारी नए खिलाडी को एक ऐसे बॉक्सर के खिलाफ करनी थी जो बहुत आक्रमक था अपने प्रतिद्वंदियों के प्रति | उसकी भाव भंगिमा उससे भी ज्यादा आक्रमक थी | मैच होने से पहले ज्यादा चिल्लाता और उसके बाद भी |
 सुरक्षात्मक खेलना सही ना होता क्योकि लाख बचाव के बाद भी एक एकाध मुक्का  लग ही जाना था | तय हुआ आक्रामक खेल का जवाब और आक्रमक हो कर देना होगा | मैच शुरू हुआ और ताबड़तोड़ हमला शुरू कर दिया गया , लेकिन ये क्या हुआ जो बॉक्सर अभी तक आक्रमक था वो अचानक बचाव की मुद्रा में आ गया | वो मारने के बजाय खुद को बचाने में ही व्यस्त था |
नए खिलाड़ी का और उत्साह बड़ा और उसने और हमला तेज कर दिया | अब तो उसने बचाव की जगह  अपने प्रतिद्वंदी से दूर भागना शुरू कर दिया | वो एक भी हमला नहीं कर पा रहा था | नए खिलाड़ी को जीत की उम्मीद दिखने लगी | अब वो उसकी तरफ भाग भाग कर हमला  कर रहा था | उसके मुक्के लग नहीं रहें थे नामी खिलाड़ी को क्योकि वो सिर्फ बचाव में व्यस्त था लेकिन नया खलाड़ी उम्मीद कर रहा था प्रयास करते करते मार ही लेगा |
मैच ख़त्म होने में कुछ ही समय था कि नामी खिलाड़ी रुका ध्यान केंद्रित किया और एक जोरदार मुक्का अपने प्रतिद्वंदी को दे दिया | नया खिलाड़ी हमला कर कर के और उसके पीछे भाग भाग कर इतना थक चुका था कि उस एक मात्र प्रहार का बचाव भी ना कर सका और नॉक आउट | लोगों ने नामी खिलाडी के उस चालाकी की खूब तारीफ की कि कैसे उसने पहले खिलाडी को खूब  थकाया , छकाया और फिर आखिर में एक पंच में मैच जीत लिया | नए खिलाड़ी के समर्थक भी उसे कोसने लगे इतना हमला किया , क्या फायदा एक भी ढंग का मार ना सका , बेकार था वो |

CAA और NRC को लेकर भी कुछ ऐसा ही मैच चल रहा हैं | अभी तक NRC को संसद में पेश तक नहीं किया गया हैं यहां तक कि उस पर कैबिनेट में चर्चा तक नहीं हुई हैं |  मोदी ने सही कहा था उसकी चर्चा तक नहीं हुई हैं | किसी भी बिल को संसद में रखने के पहले केबिनेट में चर्चा की जाती हैं वहां से मंजूरी मिलने के बाद संसद में पेश होता है , बहस होती हैं , पास होता हैं फिर कहीं जा कर कानून बनता हैं | किसी के घोषणापत्र में होने और गृहमंत्री का संसद या बाहर कहना की कानून बनेगा इस पर,  का कोई महत्व नहीं होता हैं | ऐसी घोषणाएँ तो मंदिर वही बनाएंगे जैसा भी हुआ था लेकिन संसद और सरकार कुछ नहीं कर पाई |  निर्णय उसी कोर्ट से आया जहां से उसका आना तय था , लेकिन नारों का प्रयोग कर उसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया |
   NRC आएगा की घोषणा बार बार लगातार करके लोगों में उसका खौफ पैदा किया गया | जानबूझ कर CAA के साथ ये सब किया गया और क्रोनोलॉजी भी संमझायी गई ताकि लोग आक्रमक हो विरोध करे उन कानूनों का जिसमे से एक उन पर लागु ही नहीं होता और दूसरा तो अभी तक बना ही नहीं |
ऐसे किसी भी कानून को आप कोर्ट में चैलेंज नहीं कर सकतें जो अभी तक बना ही नहीं | आप विरोध करते रहिये कोई उस पर ध्यान भी नहीं देगा | क्या किसी ने भी देखा की शाहीन बाग़ और उसके जैसे दूसरे आंदोलनों को रोकने के लिए किसी भी प्रकार की दिलचस्पी सरकार ने दिखाई हो | अब कोर्ट के कहने पर खानापूर्ति की जा रही हैं और आगे भी जो किया जाएगा वो सब कोर्ट के नाम पर और आम लोगों के परेशानी के नाम पर किया जाएगा |
सरकार की मंसा इसे और लंबा खींचने की हैं ताकि आम जनता सड़क बंद होने रोज रोज के विरोध प्रदर्शन से इतनी परेशान हो जाए कि वो धीरे धीरे आंदोलनकारियों के खिलाफ हो जाए | विरोध करने वाले के अव्यवस्थित होने , कानून का पालन ना करने , हिंसक होने जैसी मान्यताएं समाज में पहले से प्रचलित हैं , ऐसा विरोध उन्ही मान्यताओं को और पुख्ता करेगा | उन आम लोगों में जो राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं लेते , जो  मात्र वोटर हैं ,  वो  NRC का विरोध करने वालों के खिलाफ होतें जायेंगे ये सोच कर कि जो कानून बना ही नहीं उसका विरोध क्यों हो रहा हैं अभी से | जबकि दूसरा कानून उन पर लागू ही नहीं  होता हैं | सरकार के समर्थक तो पहले ही उनके विरोध में हैं |
सरकार विरोध करने वालों को सिर्फ थका रही हैं और इस बात का इंतज़ार कर रही हैं कि कब आप बेवजह का , समय से पहले वार कर कर के थक कर पस्त जाए , उस दिन वो अपना पंच मारेगी | विरोध कर और  उसका कोई नतीजा , असर ना निकला देख कर विरोध करने वाले भी , जिस दिन कानून आयेगा , उस दिन  सिर्फ निराश हताश हो कर कागजों के लिए दौड़ भाग करेंगे विरोध नहीं | और आज का विरोध उन लाखों करोड़ों को उनके खिलाफ कर चुका होगा जो शायद कानून लागू होने के समय उनका साथ देने के लिए सड़क पर आ सकते थे , क्योकि परेशानियां तो उस कानून से उन्हें भी होंगी | लेकिन तब तक ये विरोध एक धार्मिक रंग ले चुका होगा , जनता के लिए परेशानी का कारण हो चूका होगा और विरोध करने वालों में शायद निराशा भर चुका होगा | 

December 31, 2019

जीवनसाथी ------mangopeople


ठकठक ठकठक
"बोलो क्या काम हैं ,  क्यों बाथरूम का दरवाजा इतना पीट रहें हो "
" नहा चुकी हो ना , तो अब क्या कर रही हो बाथरूम में "
" अपने कपडे धो रही हूँ "
" बाहर निकलों मैं नहाते समय धो दूंगा | तुम बस जल्दी से तैयार हो जाओ पहले ही बहुत देर हो चुकी हैं , हम लेट हो जायेंगे "
" ज्यादा नहीं हैं बस एक ब्रा हैं , दो मिनट में हो जायेगा   "
" लाओ इधर दो मुझे , मैं धो देता हूँ "
" इधर दो मुझे |  कोई जरुरत नहीं हैं , मैं कर लुंगी | किसी ने देखा तो कहेगा नई  नवेली अपने कपडे तक धुलवा रही हैं "
" तुम जा कर जल्दी तैयार हो जाओ , उतना ही बहुत हैं |  जीतनी देर तुम बड़बड़ कर रही हो देखों मैंने  धो भी दिया "
" ठीक से नहीं किया "
" वैसे एक बात बताओ  क्या साइज हैं तुम्हारा "
" तुम्हे क्या करना हैं | मेरे लिए खरीद कर लाने वाले हो क्या "
" नहीं ,  मैं नहीं खरीदने वाला | मेरे कहने का मतलब हैं कि शादी के बाद तुम्हारा साइज बदल गया होगा "
" छी ! तुम्हे शर्म नहीं आ रही हैं | तुम शादी के पहले मुझे ऐसे देख रहे थे "
"  इतना गुस्सा क्यों हो रही हो | इसमें शर्म किस बात की , अब तुम्हे देख रहा था तो नजर जाना  नेचुरल था ना |  "
" छी छी ! कितने गंदे हो तुम "
" मैं नहीं सभी की नजर जाती हैं | तुम्हे पता हैं मेरे दोस्त के पापा एक बार दोस्त के लिए लड़की देखने गए थे | आ कर बोलते हैं लड़की इतनी पतली दुबली थी की सामने से तो पता ही नहीं चल रहा था लड़का हैं या लड़की "
" चुप रहों मुझे नहीं सुननी तुम सबकी ये बकवासगिरि "
" अरे यार , तुम गलत मतलब निकाल रही हो "
" अब एकदम चुप रहों |  इसमें सीधा मतलब क्या निकालता हैं , बताओ जरा '
 " मतलब वैसे नहीं देखते , अब ऐसे ही चली जाती हैं नजर, मतलब एकदम नार्मल  सा "
 " तुम मुझे इतना गुस्सा दिला रहें हो की ये बकेट का पानी तुम्हारे ऊपर डाल दूंगी मैं सच कह रही हूँ "
" अरे तुम्हे देखने आया था तो तुम्हे देख ही तो रहा था "
" लो नहाओ इस ठंडे पानी से , अपना दिमाग ठंडा  करों | ताकि ये सब बेशर्मी दुबारा ना करो "

बकेट का पानी उस पर डाल जैसे ही वो गुस्से में जाने के लिए पलटी गिरे पानी में फिसल ही पड़ी थी कि , दो मजबूत हाथों ने उसे थाम कर गिरने से बचा लिया और एक बार फिरउन्ही हाथों की पकड़ दुबारा महसूस कर वो उन यादों के समंदर से बाहर आ गई |

सामने बैठी डॉक्टर अब भी कुछ बोले जा रही थी
" ज्यादा देर नहीं हुई हैं | समझो ये ब्रेस्ट कैंसर का पहला ही स्टेज हैं | कोई समस्या नहीं हैं एकदम ठीक हो जाएगी |  बस इलाज शुरू करने में अब जरा भी देर मत करना "
वो अब भी शून्य में थी लेकिन दो मजबूत हाथों में उसकी हाथ को अब भी मजबूती से पकड़ रखा था |



December 30, 2019

जीवन चलने के नाम ------- mangopeople

" ये नया विज्ञापन देखा "
" क्या हैं 🤔"
" पति अपने मरने के बाद भी बीवी के हर बर्थडे के लिए फूलों का गुलदस्ता बुक कर गया हैं और बीवी के हर बर्थडे पर वो बुके दे जातें हैं 😊 "
" हम्म बढ़िया हैं , प्यार करने वाला पति 🥰 "
" बकवास हैं 😏| काहे का प्यार करने वाला पति | मर गया लेकिन इस बात का इंतजाम कर गया की बीवी कभी उसे भूले नहीं और जिंदगी में आगे ना बढे | सोचो इस तरह कोई हर साल अपनी याद दिलाता रहेगा और ये याद दिलाता रहेगा कि वो उसे कितना प्यार करता था तो कभी कोई आगे बढ़ पायेगा अपने जीवन में | उसकी जिंदगी तो वहीँ ठहर जायेगी | मरने के बाद भी बीवी की जंदगी चले गए पति के ही इर्द गिर्द घूमती रहेगी 😔"
" बताओ प्यार से भी समस्या हैं 😅"
" अच्छा होता विज्ञापन , यदि उसमे यंग कपल की जगह किसी बूढ़े कपल को दिखाया जाता 🥰| मैं तो ऐसा प्यार कभी ना करूँ | सुनो मुझे कुछ हुआ तो तुम हमारी शादी का एलबम समुन्दर में फेक देना और आगे की सोचना , मूव ऑन 😍😘"
" अच्छा मुझे कुछ हुआ तो तुम फटाफट मूव ऑन 😲 "
" तुम्हे कुछ हुआ तो 🤔, तुम्हारी जैसी हरकतें हैं ना मुझे लगता हैं तुम्हारे जीते जी एक दिन सच में मैं ना छोड़ कर चली जाउंगी ये सब 😅😁 "
" मुझसे अच्छा ना , तुम्हे कोई मिलेगा नहीं 😂😂"
" तुम्हे ये क्यों लगता हैं कि मुझे कोई मिलेगा तो ही मैं जाउंगी , या तुम्हे ये क्यों लगता हैं कि मुझे अब भी किसी का इतंजार हैं | खुश हो जाओ ,मैं ऐसे भी जा सकती हूँ 😄 "
कुछ सवाल को माजक में उड़ा दे लेकिन उनके जवाब काफी मुश्किल होते हैं |

December 28, 2019

महिलाओं के लिए जरुरी महिला डॉक्टर ------- mangopeople



                                     दिन भर आप कितना भी सकारात्मक सोच ले , अच्छी बाते बोल दे , शुभ शुभ का मनन कर ले लेकिन सरसत्ती मैया जबान और दिमाग की उसी बात पर विराजेंगी जो ख़राब हो | ख़राब सोचो ,किसी बात से डरो तो वो झट से पूरा हो जाता हैं |

                                    हमारी ही बिल्डिंग में हमारी फैमली डॉक्टर का क्लिनिक हैं | पतिदेव लोग बचपन से उनके पास जाते रहें हैं | विवाह के बाद मेरी भी डॉक्टर बन गईं छोटी मोटी हर समस्या के लिए | १७ सालों में मुझे और मेरी समस्याओं से अच्छे से अवगत भी हो गई थी |

                                   तो हुआ ये कि जुलाई में हमारी डॉक्टर दो महीने बाद अमेरिका से आईं ( उनके भाई , माता जी और बेटी सब वही सेटल हो गए हैं तो ये खुद दो महीने के लिए हर साल मिलने वहीँ चली  हैं )  तो मुझे अचानक से वो कुछ ज्यादा ही वृद्ध और कमजोर दिखने लगी | उनकी आयु का अंदाजा लगाया तो 65 -70  के आस पास लगी |मुझे चिंता होने लगी इनकी तो आयु हो रही हैं , कहीं इन्हे कुछ हो गया तो मेरा क्या होगा | आस पास कोई एमबीबीएस अच्छी महिला डॉक्टर नहीं हैं | इनके साथ तो पारिवारिक रिश्ते जैसा हैं , कितने आराम से इन्हे सब बता देतीं हूँ ,  इन्हे कुछ हुआ तो क्या करुँगी |

                                   इस बारे में पतिदेव से चर्चा भी की , तो वो बोले अरे अभी कुछ नहीं होगा शारीरिक रूप से एकदम ठीक हैं | कल जब उनसे मिलने गई तो उन्होंने बताया वो अब रिटायरमेंट ले रहीं हैं , पहली जनवरी से नहीं आएँगी | उसके जाने का दुःख उसके सामने ही तुरंत प्रकट कर दिया , जो बिलकुल असली थी | क्योकि इस बारे में दो चार महीने पहले ही विस्तार से सोच लिया गया था | उन्होंने भी आश्वासन दिया , घर ज्यादा दूर नहीं हैं फोन करके आ जाना |

                                  माथा ठोक लेने का जी किया , डॉक्टर रिटायर भी होते हैं ऐसा तो हमने कभी सोचा ही नहीं था | पतिदेव को बताया गया देखा मैं ना कहती थी कि मुझे सब कुछ पहले ही पता चल जाता हैं , लो एक और उदहारण सामने हैं | अब हमारा लोहा नहीं सोना पीतल चाँदी सब मान लो |

                                 डॉक्टर यदि स्त्री को तो स्त्री रोगियों के लिए वरदान जैसा होता हैं |  स्त्रियों को अपनी शारीरिक बनावट के चक्कर में कई समस्यांओं से दो चार होना पड़ता हैं , जिसके लिए वो किसी महिला डॉक्टर के पास जाना ही ज्यादा अच्छा समझती हैं | कई बार पुरुष डॉक्टर से कहने में झिझक होती हैं  , तो कई बार लगता हैं बता तो दे लेकिन वो समझेगा नहीं , क्योकि उसने सिर्फ पढाई की हैं उसक अनुभव नहीं किया हैं |

                                आप विश्वास नहीं करेंगे लेकिन स्त्रियों की समस्याओं का ऐसा हैं कि लगता हैं कि बिना इसका अनुभव किये डॉक्टर ठीक से समझ ना पायेगा |  कई बार तो समस्याओं के लिए महिला डॉक्टर को ज्यादा बताना भी नहीं पड़ता एक दो लाइन में ही पूरी बात समझ जाती हैं | फिर इन सब को किनारे रखे तो बहुत सी महिलाऐं ऐसी भी हैं जिन्हे  सामान्य शारीरिक जाँच को लेकर भी पुरुष डॉक्टरों के पास जाने में झिझक होती हैं |


                               तो कुल मिला कर बात इतनी हैं कि यदि अपनी आस पास की सभी स्त्रियों का बेहतर स्वास्थ ,  सेहत चाहतें हैं तो ढेर सारी  लड़कियों को डॉक्टर बनाइये | हम जिस समाज में रहतें हैं वहां महिलाए और उनके  परिवार वाले उनके स्वास्थ के प्रति लापरवाह होते हैं |उनकी छोटी , मोटी  बिमारियों , समस्याओं को जितना हो सके टाल दिया जाता हैं |  ये सब तो महिलाओं को होता रहता हैं अपने आप ठीक हो जाएगा , या ये तो हर महीने की समस्या हैं इसके लिए डॉक्टर के पास क्या जाना , थोड़ा बर्दास्त करों कोई बड़ी बात नहीं जैसे जुमले से उन्हें बहला दिया जाता हैं , या महिलाए आस पास कोई महिला डॉक्टर ना होने से झिझक में नहीं जाती या खुल कर नहीं बताती |

                               नतीजा छोटी बीमारिया , समस्यांए बड़ी और विकराल रूप धारण कर लेती हैं और फिर महिलाए को उसके लिए भी कोसा जाता  हैं कि पहले क्यों नहीं दिखाया डॉक्टर को , लापरवाही क्यों किया आदि इत्यादि | कोई ये नहीं सोचता कि हमने खुद पहले ही क्यों नहीं उन्हें ले जा कर दिखाया डॉक्टर को , हमने उसकी समस्याओं को गंभीरता से क्यों नहीं लिया |


December 26, 2019

हाल कैसा हैं जनाब का -----mangopeople

"  क्या कहा डॉक्टर ने "

" कहूँगी तो तुम  विश्वास करने वाले नहीं हो , तो कहने से क्या फायदा "

" ऐसा क्या कह दिया उसने "

" कहा हैं अभी बुढ़ापा नहीं आया हैं तुम्हारा , ये क्या हर समय बुर्के में रहती हो | थोड़े सॉर्ट्स पहनो  , बैकलेस  पहनो , बाहर घूमो फिरो  क्या घर में पड़ी रहती हो | ऐसे घर में रहोगी तो फंगस लग जायेगा  "

" अच्छा डॉक्टर ने ऐसा कहा "

" और क्या ,  उसने तो मुझे सदा सेक्सी रहो का आशीर्वाद भी दिया हैं "

" हो गई तुम्हारी बकवासगिरी "

" बकवासगिरि नहीं हैं ये , फटाफट मेरी गोवा की टिकट कटाओ , वहां जा कर आराम से सनबाथ लूंगी "

" अच्छा समझा , विटामिन डी की कमी हैं "

" मेरे साथ रहते रहते स्मार्ट होते जा रहे हो "

" दवा क्या दी हैं |  देखो जरा गूगल पर किस किस चीज में विटामिन डी मिलता हैं "

" मैंने मना कर दिया उस दवा को और खाने को "

" क्यों "

" क्यों का क्या मतलब , उसे खा कर अपना धरम भ्रष्ट करूँ |  बोला हैं एक ख़ास मछली में ही  विटामिन डी मिलता हैं या तो मछली खाओ या उसका निकला तेल पियों |  बताओ ,  उससे अच्छा तो मैं गोवा जा कर -----"

" तुम्हे धुप ही सेकना हैं ना मै इंतजाम कर देता हूँ | तुम्हारे घर का टिकट कटा देता हूँ तुम्हारा ठंडी का , छत पर जा कर खूब धुप सेकना वहां और छुट्टियां भी मना लेना | एकदम तबियत ठीक हो जाएगी तुम्हारी "

" पता था मुझे मेरी ऐयासिया बर्दास्त ना होंगी तुम्हे , कुछ ना कुछ अड़ंगा लगाओगे ही "


पापा की परी 2 ------mangopeople


बिटिया एकदम छोटी सी थी तो हम सब हर चीज में उनसे जान बुझ कर हार जाते और वो "मैं वीन मैं वीन" कह कर खूब उछलती | थोड़ी बड़ी हुई स्कूल में स्पोर्ट डे आया तो  इन्होने भी उसमे हिस्सा लिया ,  मैंने सोचा इनकी थोड़ी प्रेक्टिस करा दी जाए बाकी बच्चों के साथ |
शाम को पार्क में दूसरे बड़े बच्चों के साथ इनकी प्रेक्टिस में ये तीसरे स्थान पर आई लेकिन मै वीन मैं वीन कह कर फिर ख़ुशी से उछलने लगी | तब मुझे समझ आया कि ये तो जीतने हारने का मतलब ही नहीं जानती |
उन्हें लाख समझाया कि वो तीसरे स्थान पर थी जीत किसी और की हुई , लेकिन वो मानी ही नहीं |
उसके बाद बिटिया के पापा जी को समझाया गया अब  जानबूझ कर मत हारों , इन्हे जीतने हारने का मतलब भी पता चले और हर बार कोई जीत नहीं सकता कभी कभी हारते भी ये भी सीखे |
लेकिन पापा जी कहाँ मानने वाले थे , बोले इतनी छोटी है उसे कुछ भी पता नहीं होगा | उसे तो लगता होगा वही जीत रही हैं मैं कोई जानबूझ कर थोड़े हार रहा हूँ | मैंने तो जानबूझ कर हारना छोड़  दिया उस दिन से , नतीजा ये हुआ की बिटिया मेरे बजाये अपने पापा के साथ ज्यादा खेलती |
एक दिन पापा जी घर पर बिटिया के लिए कोई  सामान लाये , देखा तो वो  बहुत ख़राब क़्वालिटी का था  | खूब गुस्सा आया और गुस्से में उन्हें डांट लगा दी  |  वो कहने लगे सामान रख दो बाद में बदल दूंगा |
मैंने भी चिढ़ाने के लिए बोला तुम सामान रहने दो इस बार तो मैं उसका पापा ही बदलने वाली हूँ , ये पापा एकदम अच्छा नहीं हैं |
ये बात बिटिया भी सुन ली अब उन्हें ये तो पता चला नहीं कि मम्मी  मजाक कर रहीं हैं ,   बोली नहीं मुझे अपना पापा नहीं बदलना हैं | मुझे उनकी इस बात पर हँसी आई लेकिन मैंने उन्हें भी चिढ़ाने के लिए फिर कहा ये पापा कुछ भी ढंग का काम नहीं करता , मैं पक्का ये पापा बदल दूंगी  |
उस पर वो अपने पापा से लिपटते बोली नहीं मेरे पापा बहुत अच्छे हैं |  इतने में मारे ख़ुशी के पापा जी की तो गर्दन ही अकड़ गई , बिटिया से प्यार जताने लगी | लेकिन बिटिया यहीं नहीं रुकी बोली कितने अच्छे हैं मेरे पापा  , हर खेल में मुझे जीताते हैं , वो खुद हर खेल में जानबूझ कर हार जाते हैं | कल पंजा लड़ाने में भी मुझसे हार गए थे , मुझे मेरे पापा ही चाहिए  |
इतना सुनते ही मैं हँस हँस कर लोट पोट हो गई और पापा जी का चेहरा देखने लायक था | हँसी उन्हे  भी आ रही थी लेकिन शायद खुद पर ज्यादा ,कि वो इतने दिनों से ये सोच रहें थे कि बिटिया कुछ नहीं समझती और बिटिया सब समझ कर भी पापा जी का दिल खुश कर रहीं थी |

December 25, 2019

पापा की परी-------mangopeople


पांच साल की बिटिया स्कूल से आते ही ख़ुशी ख़ुशी अपना हाथ दिखाने लगी |
" मम्मी देखो आज मैम ने मुझे हाथ में एक गोल्डन स्टार दिया हैं और दो दो चॉकलेट दिया हैं "
" अरे वाह ऐसा क्या किया हैं "
" मैम ने एक सवाल पूछा था और उसका जवाब लिखना था | मैंने अच्छा सा लिख दिया तो मैम ने वैरी गुड बोल कर कॉपी में भी थ्री स्टार दिया हैं और दो चॉकलेट दिए "

" क्या पूछा था मैम ने "

" पूछा था तुम्हे सबसे अच्छा दिन कौन सा लगता हैं "
इतना बोल वो खेलने में व्यस्त हो गई और मुझे लगा ऐसा क्या जवाब अपने मन से लिखा हैं कि टीचर ने इतनी शाबासी दे दी हैं | कॉपी निकली तो उस पर लिखा था

" मुझे संडे पसंद हैं क्योकि उस दिन पापा घर पर होते हैं और मैं उनके साथ खूब खेलती हूँ "
ना जाने कितने सालों तक मैंने वो कॉपी संभाल कर रखी थी 🥰 

December 24, 2019

बिल्ली रानी बड़ी सयानी ------mangopeople


                                         बात कुछ साल पहले की हैं एक दिन बाहर से घर वापस आई तो दरवाजा खोलते  देखा खिड़की पर एक बिल्ली बैठी हैं | एकबारगी एकदम से  चौक गई बंद दरवाजे से वो अंदर कैसे आई , शायद जंगले से घुसी हैं तो दूसरी मंजिल तक चढ़ी कैसे | इस बात पर और आश्चर्य हुआ कि वो कमरे के अंदर थी , मेरे आने पर खिड़की पर भागी लेकिन वहां से नहीं गई | थोड़ा अजीब सा ख्याल आया लेकिन  उसे आगे बढ़ कर भगा दिया | थोड़ी देर में बिटिया भी स्कूल से आ गई | वो हाल में बैठी थी और अचानक से चीखते हुए रसोई में आई कि मम्मी घर में बिल्ली आ गई हैं | अब तो आश्चर्य का और  ठिकाना नहीं रहा , दुबारा बिल्ली अंदर क्यों आई |

                                        बिल्लियों को लेकर ना जाने कैसे कैसे बुरी बातें कहीं गई हैं , सब एक साथ याद आने लगा | मुंबई के लिए बिल्ली बड़ी आम बात हैं लेकिन खिड़की से दूसरी मंजिल तक इतने सालों में पहली बार आना , बिलकुल भी आम बात नहीं थी | उसे फिर से भगा के खिड़की को बंद कर दिया | थोड़ी देर बाद बिटिया फिर आई बोली बिल्ली की आवाज आ रही हैं | अब तो दिल की धड़कने भी बढ़ गई लगा बिल्ली जा क्यों नहीं रही हैं शायद जंगले पर बैठी हैं | देखा तो वहां नहीं थी लेकिन बहुत धीमे धीमे उसकी आवाज आ रही थी | फिर ध्यान दिया कि  आवाज घर से ही आ रही हैं सब जगह झुक कर कान लगा कर सुनने लगी तो पता चला सोफे के निचे से आ रही हैं | सोफे के गैप से देखा तो दो चमकती आँखे दिखी |
फिर तुरंत समझते देर ना लगा , बिल्ली अपने बच्चे मेरे घर छोड़ गई हैं |

                                     हाथ डाल उसी छोटी जगह से बिल्ली के बच्चों को ऊपर खिंचा , लगा कहीं सोफे को हिलाया तो कोई उसमे दब  ना जाए ,  एक बच्चा तो होगा नहीं | दो निकले फिर अच्छे से जाँच लिया और कोई तो नहीं हैं | बिटिया  तो दो दो बच्चे देख मारे ख़ुशी के चींख ही पड़ी | उनका जन्मदिन आने वाला था और बहुत सालों से वो अपने लिए एक पेट की मांग कर रहीं थी | उन बिल्लियों को देख उन्हें लगा उनकी तो इच्छा ही पूरी हो गई |
                                   सबसे पहले सोचा उनमे से एक जो लगातार बोले जा रहा हैं शायद वो भूखा हैं उसे दूध कैसे पिलाया जाए |घर में एक भी दवा का ड्रॉपर नहीं मिला , फिर रुई भिंगो कर पिलाने का प्रयास किया लेकिन दोनों ने पीने से ही इंकार कर दिया | हमने बिटिया से कहा कि इन्हे इसी कमरे में छोड़ कर दूसरे कमरे में चलो | इनकी मम्मी फिर से आएगी और इन्हे दूध पीला देगी | उपाय काम किया और बिल्ली आ कर अपने बच्चों को दूध पीलाने  लगी | लेकिन उम्मीद के मुताबिक उन्हें ले कर नहीं गई |

                                  फिर अपने गोदाम से जा कर एक गत्ते का बॉक्स ला उसमे पुराना कपड़ा पीछा उनके रहने का इंतजाम किया गया और उसे खिड़की पर रख दिया गया |  दो दिन में ही ये हाल था की हम वही बैठे रहते बिल्ली चुपचाप आती बॉक्स में जाती और आराम से बच्चों को दूध पिलाती उनकी सफाई करती और चली जाती | कितनी बार तो उसके आने का पता ही नहीं चलता , अचानक से टीवी देखते खिड़की को देखती तो वहां उसे आराम से बैठ कर टीवी देखते अपने बच्चों को दूध पीलाते , उसे देख चौक सी जाती मैं  | लेकिन उसे जरा भी फर्क नहीं पड़ता जैसे मैं उस कमरे में हूँ ही नहीं |

                               बिटिया के दिन गुलजार हो गए , पूरी बिल्डिंग में खबर फ़ैल गई और बच्चों के जमवाड़े हमारे घर लगने लगे | दोनों का नामकरण भी हो गया ब्लैकी और व्हाटी |  बच्चों के मार्फ़त बिल्ली की पूरी रिपोर्ट आ गई , बच्चे ढेड़  हफ्ते के हैं , पहली मंजिल वाले फ़्लैट में पैदा हुए थे ,  कुल चार थे लेकिन दो की मौत हो गई बारी बारी , फिर पहली मंजिल के ही दूसरे फ़्लैट में गए  | हमने भी सुन रखा था बिल्ली अपने बच्चों के लिए दस या सात घर बदलती हैं , हमारा तीसरा था |

                               ये  और दस दिन बाद ही हमें अपने घर जाना हैं याद कर बिटिया को ये समझाया  कि भाई ये बच्चे हमेसा के लिए हमारे पास नहीं रहने वाले , इन्हे जाना होगा | जितना खेलना हैं खेलों लेकिन हमेसा साथ रखने का ख्याल मत रखों | हम चले जायेंगे तो  इनका क्या होगा , खिड़की खुली छोड़ कर नहीं जा सकते हैं | कुछ उपाय करके बिल्ली को ले जाने के लिए मजबूर करना होगा |

                               सात दिन आराम से इन दोनों के साथ खेलते निकल गए | फिर हमने सातवे दिन  से बॉक्स को खिड़की के बाहर रख दिया रात में खिड़की का दरवाजा भी बंद कर देतें | बिल्ली वैसे ही रोज आती खिड़की के बाहर  ही बॉक्स में अपने बच्चों की देखभाल करती | उम्मीद थी बिल्ली हमारा इशारा समझ जाएगी और बिल्ली बड़ी समझदार निकली हमारे जाने वाले दिन ही सुबह अपने बच्चों को लेकर चली गई | पहली को ले जाते हमें तो आहाट भी ना लगी , जब दूसरी को ले जाने लगी तब मेरी नजर गई | शुक्र था की उसी दिन मुझे घर जाना था तो बिटिया थोड़ी दुखी तो हुई लेकिन फिर नानी के घर जाने के ख़ुशी में जल्द ही भूल गई |

                              एक पालतू जानवर  के लिए बिटिया आज भी ज़िद  करतीं हैं , हम साफ़ मना कर देतें हैं | हमारे घर कुत्ता , तोता , खरगोश , गाय , बंदर तक पालतू के रूप रह चुके हैं , जानते हैं उनके साथ कितनी जिम्मेदारियां जुडी होती हैं | घर में ला तो कोई भी देता हैं लेकिन उन्हें संभालने का काम सिर्फ मम्मियों को करना पड़ता हैं | उनके ना होने पर जानवर कितने उदास हो जाते हैं , खाना छोड़ देतें हैं | जिम्मेदारी तो दूसरी तरफ रखिये एक तीसरे मोह के बंधन में तो बिलकुल नहीं पड़ना हैं  , पहले के  दो ही काफी हैं |


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अहिंसक आंदोलन , विरोध और गाँधी जी ------mangopeople



1922 में जब गोरखपुर के चौरी चौरा में भारतीयों ने पुलिस चौकी जला कर पुलिस वालों को जला कर मार दिया तो गाँधी जी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था | उनके अनुसार उनके अहिंसक आंदोलन की शुरुआत हिंसा से हुई इसलिए वो इस आंदोलन की ख़त्म कर रहें हैं |
उनके इस निर्णय से रामप्रसाद बिस्मिल जैसे उनके शिष्यों ने विरोध स्वरुप उनसे खुद को अलग कर लिया और अपना एक गरम आंदोलन शुरू किया | गाँधी जी ने उनका भी कभी समर्थन नहीं किया |
गाँधी जी से बहुत लोग इसलिए भी नाराज होतें हैं आज भी , कि उन्होंने भगतसिंह की फांसी को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया | एक अहिंसक आंदोलन चलाने वाले ये ये उम्मीद करना कि किसी हिंसक आंदोलनकारी के बचाव में आएगा , बहुत ही गलत सोच हैं | भगत सिंह को बचाने का कोई भी उनका प्रयास , उनके तरीकों को समर्थन देना होता | फिर हजारों हजार नौजवान भगत  सिंह के उग्र तरीके का अनुसरण करने आगे आ जाते और अहिंसक आंदोलन से भी लोग दूर हो जाते |
हर दमनकारी सरकार बड़ी आसानी से हिंसक आंदोलनों का दमन कर लेती हैं वो ज्यादा लंबा नहीं चलता और ना कभी अपनी मंजिल तक पहुँच पाता हैं |
वो सभी जो आज के समय में देश में चल रहें विरोध प्रदर्शन में हुए हिंसा पर एक लाइन का भी विरोध नहीं करतें हैं और केवल सरकारी दमन की निंदा करतें हैं | उन सभी को गाँधी जी का नाम नहीं लेना चाहिए | अहिंसा को लेकर उनके मानदंड बहुत ऊँचे थे , उनका पालन करना आपके बस का नहीं हैं | इसलिए गाँधी जो को कम से कम इससे दूर रखिये | बाकी आपकी अपनी जो विचारधारा हैं उसे आगे बढ़ाते रहिये |

December 23, 2019

सीखना सिखाना अब बेटों को हैं --------mangopeople


                                          नीचे  अखबार की खबर पढ़िए और उसमे ये सब करने वाले बच्चों की उमर देखिये | मुंबई में देश के सबसे बड़े उद्योगपति के स्कूल में ये सब हुआ हैं | १३ से १४ साल के लड़कों के व्हाट्सएप्प ग्रुप में लडके स्कूल की कुछ लड़कियों का नाम ले कर एक दूसरे से पूछतें हैं क्या तुमने इसके साथ सेक्स किया हैं उसके साथ सेक्स किया हैं | जवाब  ना  में मिलने पर  कहतें हैं चलों इनका गैंग रेप करतें हैं |

                                          इनकी पोल ऐसे खुली कि एक लड़का जो उस समय सो रहा था वो इस बातचीत में शामिल नहीं हुआ | इस पर बाकी लडके उसका नाम लेकर उसे बुलिंग करने लगे,  उसे गे कहने लगे | अगले दिन जब उसने ये सारा चैट देखा तो उसने पूरी चैट उन लड़कियों से शेयर कर दिया जिनका नाम इसमें लिया जा रहा था | फिर उनके माता पिता ने स्कूल में जा कर शिकायत की और सभी नौ लड़कों को  ( पोल खोलने वाले लड़के को छोड़ कर ) सस्पेंड कर दिया और मामले को वार्षिक समारोह तक के लिए ताल दिया गया |

                                        आई बी स्कूल हैं के ये बच्चे किसी गरीब बस्ती के गरीब , संस्कारहीन  घरों से नहीं आ रहें हैं बल्कि सब के सब मुंबई के  अमीर और पढ़े लिखे के घरों से हैं | इनके माँ बाप की समाज में खूब प्रतिष्ठा हैं और सभी उन्हें जानते हैं | एक सस्पेंड लड़का एक पुराने फिल्मअभिनेता का नाती हैं जिनका राजनीति में भी काफी नाम था और आजकल उनकी बेटी राजनीति  की  विरासत को आगे बढ़ा रही हैं |
आप जानकार आश्चर्य करेंगे कि एक लड़की उसी लडके के मामा की दूसरी पत्नी ( उनसे भी तलाक हो )  दूसरे पति जो एक नामी खिलाड़ी हैं की बेटी हैं |

                                       एक लड़की देश के बहुत बड़े उद्योगपति जो अक्सर आपको पेजथ्री पार्टी में भी नजर आतें हैं , अक्सर उनका ही सरनेम फिल्मो सीरियल में अमीरों के लिए होता है , की बेटी हैं |
एक लड़की के  माता पिता मशहूर मॉडल रह चुके हैं और पिता एक फिल्म स्टार हैं जिनका अभी हाल में ही तलाक हुआ हैं |

                                      चुकी लड़कियां भी बड़े घरों से थी तो कोई दबा नहीं और तुरंत स्कूल में शिकायत की गई | लेकिन नतीजा क्या निकला वही जो आम से स्कूल ऐसे मामलों में करतें हैं , खबर को दबाना , लड़कों को सिर्फ सस्पेंड करना , मामले को किसी ना किसी बहाने आगे के लिए टाल  देना |
लड़कों के माँ बाप का रवैया तो और भी चौकाता हैं |  वो कहतें हैं ये तो लड़कों की चुहलबाजी मजाक था , इसे ऐसे गंभीरता से क्यों लिया जा रहा हैं | लडके तो ऐसा बोलतें ही हैं कि चलो ये करतें हैं चालों वो करतें हैं , पर उनका वो मतलब नहीं होता हैं |

                                     पूरी खबर पढ़ने के बाद आप को कहीं से भी ये नहीं लगेगा  कि ये सब समाज के संभ्रात पढ़े लिखे लोगों के बीच की बात हैं | स्कूल का , या लड़कों के माँ बाप किसी का भी रवैया  वैसा ही हैं जैसे की किसी अन्य भारतीय माध्यम या निम्न घरों के लोगों का होता | लडको को लडके होने के नाम पर कुछ भी करने की आजादी देने वाल |

                                     लड़कियां भी वही आम लड़कियों जैसी ही हैं सबके सब डरी हुई हैं और स्कूल जाने से डर   रही हैं | खबर अखबार में इसलिए आ गई क्योकि लड़कियों  के माता पिता सेलेब्रेटी हैं और पत्रकारों से जुड़े हैं | मन तो ये भी जा रहा हैं कि ये खबर दो हफ्ते बाद जानबूझ कर तब लिक किया गया जब वार्षिक समारोह होने वाला था | ताकि स्कूल पर कोई दबाव पड़े उन लड़कों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने के  लिए |

                                हे प्रभु ,  इस देश में लड़कियां कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं , क्योकि लड़कों की मानसिकता ये समाज सुधारना ही नहीं चाहता हैं |

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December 19, 2019

छेड़ों ना मेरी जुल्फे ------mangopeople


देखिये मैं टीवी दस फिट दूर से देखतीं हूँ | पहले उसी जगह से टीवी पर मैच देखते समय रन विकेट और ओवर तीनों अच्छे दिखता था | लेकिन अब रन और विकेट तो दिखता हैं लेकिन ओवर थोड़ा छोटा लिखा होता हैं वो ठीक से नहीं दिखता हैं |

दो साल पहले ये सुन कर मेरी आँखों की जाँच करने के लिए खड़ा लड़का थोड़ी देर तक मुझे देखता रहा |  शायद जिंदगी में किसी ने ऐसी समस्या अपनी आँखों  की रोशनी के लिए नहीं बोला होगा | फिर पूछता हैं और क्या नहीं दिखता और क्या समस्या हैं | हमने कहा और कुछ नहीं हैं बसओवर नहीं दिखता |

बन्दे ने अपने सभी लेंस लगा कर जाँच लिया बोला नंबर तो नहीं दिख रहा हैं लेकिन आपकी जीतनी उम्र हैं उसमे नजदीक का चश्मा लगाना शुरू कर देना चाहिए | हमने कहा हमें समस्या हैं कि हमें दूर से नहीं दिख रहा हैं और आप हमें नजदीक का चश्मा लगाने का राय दे रहें हैं , आप जाने ही दे |

अपनी आँखों की जवानी पर इतराते चश्मिश पतिदेव को चिढ़ाते  बाहर निकली ही थी कि ऊँची ऊँची सीढ़ियों ने किनारे लगे रेलिंग को पकड़ने पर मजबूर कर दिया | पतिदेव धाड़ धाड़ निचे उतरे और मुड़ कर मुझे ऊपर ही खड़ा देख मुस्कराएं , आधा खून तो उनके इस मुस्कान पर ही जल गया , फिर बोलते  हैं आज की डेट में उतर जाओगी या कल आऊं |

दो साल हो गए आज भी ओवर ना दिखता तो मोबाईल पर स्कोर लगा कर देख लेती हूँ कितने ओवर और कितने बॉल हुए |


December 18, 2019

विरोध को धार्मिक रंग ना दे ------mangopeople


                                          नागरिकता कानून के खिलाफ और समर्थन में  कुल मिला कर साठ याचिका दायर हुआ हैं कोर्ट में | आज  बीस पर सुनवाई होने वाली हैं | कानून के खिलाफ और समर्थन में याचिका लगाने वाले  वकीलों का टीवी पर इंटरव्यू देख रही थी | विरोध करने वाला ये जवाब नहीं दे पा रहा था कि इससे भारतीय नागरिकों पर क्या प्रभाव पडेगा | वो जवाब में बार बार NRC की बात करने लग रहा था और एंकर उसे टोक रहा था कि वो कानून तो अभी आया ही नहीं आपने तो याचिका नागरिकता  संशोधन पर लगाया हैं उसकी बात कीजिये | लेकिन उसके पास इसका कोई जवाब नहीं था वो फिर NRC पर आ जाता और मुस्लिमों की लीचिंग पर चला गया  |

                                         सोचिये कानून के खिलाफ याचिका लगाने वाले के पास एक मामूली से एंकर के सवालों का कोई वाजिब जवाब नहीं था वो कोर्ट में जा कर वह क्या और किस तरह की  दलील रखेगा | वहां तो बड़े बड़े धुरंधर कानून के जानकार होंगे और उनके पास भारी भारी सवाल , उनका जवाब वो क्या दे पायेगा | नतीजा उसकी याचिका ही ख़ारिज हो जाएगी और इस पर  लोग कहेंगे कि कोर्ट और जज सरकार की भाषा बोलती हैं लोगों की नहीं सुनती |

                                         क्या इस तरह की तैयारियों के साथ किसी को कोर्ट में जाना चाहिए | ऐसे लोग तो आम लोगो का भरोषा न्यायलय से भी ख़त्म कर देंगे | एक आम गृहणी होने के बाद भी मैं बता सकती हूँ कि उसको इसका  सीधा सा जवाब ये देना चाहिए था कि  ये याचिका किसी वर्ग विशेष को बचाने के लिए नहीं हैं , मैंने ये याचिका देश के संविधान को बचाने के लिए लगाया हैं | उसके धर्मनिर्पेक्षता  के मूल सोच को बचाने के लिए लगाया हैं | मैं यंहा मुस्लिमो की पैरोकारी करने नहीं आया हूँ मैं यहां संविधान की पैरवी करने आया हूँ |

                                          लेकिन वो ये नहीं बोल पायेगा क्योकि ऐसी उसकी ये सोच ही नहीं हैं , क्योकि विरोध को समर्थन देने वालों में से ज्यादातर की ये सोच नहीं हैं | ज्यादातर सरकार के खिलाफ खड़े लोग बस मुस्लिम के नाम पर इसका समर्थन कर रहें हैं , उनके कंधे पर रख अपने विरोध की बन्दुक चला रहें हैं | किसी को संविधान से मतलब नहीं हैं और ना ही इस बात से फर्क पड़ता हैं कि ये कानून कहीं से भी भारत के किसी नागरिक को प्रभावित नहीं करता हैं और ना ही इस बात से फर्क पड़  रहा हैं कि वो विरोध के नाम पर दूसरी तरफ के लोगों के घार्मिक ध्रुवीकरण के एजेंडे को वह पूरी ताकत से सफल बना रहें हैं | सिर्फ मुस्लिमो की बात कर इस विरोध को पूरी तरह से धार्मिक रंग में रंग चुके हैं |

December 16, 2019

जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध ------mangopeople


जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध ।
                               
                               हे कविवर जो तटस्थ हैं वो देख पा रहें हैं कि ये युद्ध सत्ता की हैं जिसमे आम जन बस मोहरे से ज्यादा कुछ नहीं हैं | वो सत्ताधारी और सत्ता के लालची हैं जो किसी युद्ध , आंदोलन को धर्म युद्ध , जन आंदोलन नाम दे कर उसमे आम जन को आहुति देने का आवाहन करतें हैं और स्वयं बाद को सत्ता का भोग करते हैं उसके करीब पहुंचते हैं | आम जनता पहले भी खाली हाथ होती हैं और ऐसे हर आंदोलन , युद्धों के बाद भी | हां ये जरूर होता हैं कि कई बार उसके पास जो हैं वो भी चला जाता हैं |
                               
                              ज्यादा समय नहीं हुआ जब हमने भी एक बार, एक बड़ी भ्रष्टाचार के खिलाफ चली मुहीम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था | देश बदलने के लिए चली इतनी बड़ी अहिंसक मुहीम जो आजादी की लड़ाई सी रह रह कर मुझे प्रतीत होती थी , जिसे जन आंदोलन नाम दिया गया था | आज उस आंदोलन का क्या परिणाम निकला , केंद्र में सत्ता परिवर्तन हो गया और आंदोलन चलाने वाले बड़े नाम सत्ता पर काबिज हो गए | आज उन्हीं को भ्रष्टाचार करते और वो सब करते अपने आँखों से देख रहें हैं जिनके खिलाफ उन्होंने आंदोलन छेड़ा था |
                               
                              उस आंदोलन में हिस्सा लेने पर मेरे पापा हँसे थे , क्योकि परिणाम उन्हें  पहले ही पता था | एक ज़माने में उन्होंने जेपी आंदोजन में भाग लिया था और उसका अंत भी महज सत्ता परिवर्तन और कुछ लोगों के सत्ता में आने से ज्यादा कुछ नहीं हुआ था | व्यवस्था कभी नहीं बदली और ना ही आम लोगों की समस्याएं | क्योकि ये सभी आंदोलन का आरंभ , जनता में बैठे असंतोष का प्रयोग लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए सत्ता पाने के लिए किया था और वो अपने अभियान में सफल रहें और आहुति देने वाली जनता ठगी गई |
                             
                             कुछ लोग इसे छात्र आंदोलन बता कर इसमें सभी को साथ देने का आह्वान कर रहें हैं , वो अलग बात हैं कि सोशल मिडिया पर बैठ कर क्रांति करने के सिवा वो खुद भी कुछ नहीं कर रहें हैं | सवाल किया जाए क्या हर छात्र आंदोलन समर्थन के लायक होता हैं | एक छात्र अंदोलन 90 के दसक में भी हुआ था बड़ी संख्या में छात्रों ने उसमे हिस्सा लिया और बस ट्रेन को जलाने की जगह खुद को जलाना शुरू कर दिया था | आज जो इस छात्र आंदोलन को समर्थन दे रहें हैं वो उस छात्र आंदोलन के खिलाफ बोलेंगे और जो आज जो इस अंदोलन का विरोध कर रहें हैं वो उस आंदोलन का समर्थन करने आगे आ जायेंगे |

                              आज जिन्हे छात्र मासूम , सही लग रहें हैं वो ९० के छात्रों को जातिवादी , बरगलाये , भड़काए गए घोषित कर देंगे जो एक वर्ग विशेष से थे | उनका आंदोलन जन आंदोलन भी नहीं लगेगा और ना ही समाज के हित में , जबकि उस समय के कानून से छात्र सीधे प्रभावित हो रहें थे | वही आज के आंदोलन का विरोध करने वालों को आज के छात्र भड़काए हुए और वर्ग विशेष के नजर आएंगे |

                               मुझे तो अभी तक समझ नहीं आ रहा कि CAA से भारत के किसी भी नागरिक ( पूर्वोत्तर को छोड़ कर ) पर इसका क्या दुष्प्रभाव पडेगा | छात्रों का साथ किस बात के लिए दिया जाए कि पाकिस्तान बंगलादेश और अफगानिस्तान में मुस्लिमों पर अत्याचार हो रहा हैं , वो भाग कर भारत आ रहें हैं और भारत सरकार उन्हें नागरिकता नहीं दे रही हैं | क्या दूसरे देश के काल्पनिक पीड़ित नागरिकों के लिए हम अपने घर में हिंसा करे ट्रेने ,बसों को जलाएं | जबकि उनका देश ये भी मानने को तैयार नहीं हैं कि उनके यहां किसी का भी उत्पीड़न हो रहा हैं |

                               जिस दिल्ली में जेएनयू के छात्रों ने इतनी बार आंदोलन किया , पुलिस से झड़प हुई , लाठी खाया लेकिन ना कोई पत्थरबाजी हुई और ना ही अंदोलन कभी इतना हिंसक हुआ | उसी दिल्ली के जामिया के अंदोलन में वो कौन लोग थे जो मुंह ढक कर पुलिस पर पत्थर बरसा रहें थे , (छात्र कब से मुंह ढक कर आंदोलन करने लगे ) , आआप के नेता अपने समर्थकों के साथ क्यों किसी छात्र आंदोलन में भाग लेने आये और क्यों उसी दिन आंदोलन हिंसक हो गया |

                             कुल मिला कर कानून लागु करने वाले मोटा भाई लोग (नया नाम रंगा बिल्ला हो गया हैं 😂😂 ) हो या उसका विरोध करने वाले दूसरे राजनितिक लोग दोनों सत्ता की राजनीति कर रहें हैं और आम लोगों , समुदाय का ध्रुवीकरण करने में लगे हैं | ये कोई छात्र आंदोलन नहीं हैं और ना ही इसका भारत के आम लोगों से कोई संबंध हैं | इसलिए कविवर हम तो ना इसका समर्थन करेंगे और ना ही विरोध , तटस्थ रह कर सिर्फ सबकी राजनीति देखेंगे और देखेगें की अब सोशल मिडिया ने आम लोगों को भी कितना बड़ा राजनीतिज्ञ बना दिया हैं जो यहां बैठे बैठे सिर्फ अपनी सोच और विचारधारा के अनुसार छात्रों को उकसा रहें हैं फर्जी खबरे वीडियों लगा कर अफवाहें फैला रहें हैं |

                             मेरी माने तो छात्र दूसरों के हाथ का मोहरा बनने की जगह अपनी ऊर्जा बचा कर रखें अभी उन्हें एक बड़ी लड़ाई में आगे आना हैं जिसमे आम लोग भी उनका साथ देंगे वो हैं NRC | पर याद रखियेगा उसमे भी हिन्दू मुस्लिम मत कीजियेगा उससे सभी को परेशानी होने वाली हैं | गरीब सिर्फ मुस्लिम नहीं होता गरीब धर्म जाति से ऊपर होता हैं उसकी बात कीजियेगा , ना की फिर मुस्लिम गरीब को परेशानी होगी तो मैं अपना धर्म बदल मुस्लिम होने जा रहन हूँ कहने वाले स्वार्थी लोगों की बातों में ना आ जाना |

अच्छाइयों , खुशियों के जीवन में आगमन पर रोक नहीं ---mangopeople


                                 कभी कभी बहुत सारी अच्छी चीजों के साथ एक आध बुरी , ख़राब चींजों को भी अपनाना पड़ता हैं , परेशानियां झेलनी पड़ती हैं | सोशल मिडिया पर सबने अपने अपने बाग़ बगीचों की सुंदर सुंदर फोटो लगा लगा इतना जी कराया कि  कबूतरखाने में रहने वाले हमको भी , हार कर एंटी से पैसे ढीले कर अपनी बगिया भी सवारने का मन हो गया , जो विकास की भेट चढ़ चूका था | मोनो रेल की पटरियों ने हमारी बगिया तक आने वाले सूरज का रास्ता रोक दिया था | तो हमने भी अपनी बगिया और आगे बढ़ा लिया |

                               हमारी बगिया के रास्ते  घर में मोटे मोटे चूहों का भी आगमन हो जाता था रात में , तो कभी पौधे जड़ से कुतर जाते सब | अब जब पैसा खर्च हो रहा था तो जंगले में चूहे रोकने वाली जाली लगाने का विकल्प था | दिल सोच में पड़ गया चूहे तो रुक जायेंगे लेकिन उसके साथ ही बगिया में आने वाली तितलियों , भौरों , गौरैय्या , हनी बर्ड , कौआ , कबूतरों जैसे पंक्षियों आदि का रास्ता भी रुक जायेगा |
तय हुआ भला एक परेशानी के लिए इतने सारी अच्छाइयों का रास्ता क्यों रोका जाए | उस एक परेशानी के लिए कुछ और उपाय कर लिया जाएगा और चूहे की जाली कैंसिल कर दी गई | अब इन पुराने रहिवासियों का घर बदला था तो उनके आने में भी देर हो रही हैं | लेकिन धीरे धीरे सब अपने पुराने ठिकाने लौट रहें हैं | गौरैय्या के लिए घर बना दिया गया , एक घर केरल से भी खरीद कर लाया गया |

                                नए फूल लगा दिए गए , कुछ जड़ जमा लिए तो कुछ नहीं जमा पाए तो  कुछ को समय लग रहा हैं | कुछ बीमार हो गए थे अनदेखा करने से उनका ईलाज हो रहा हैं | इतने के बाद अब और सवारने का काम रोक दिया गया हैं |

                               सूरज अपनी दिशा बदलने वाला हैं , उसका भी इंतजार कर ले , उसके बाद देखतें हैं कि हमारी बगिया में  उनकी पहुँच कहा तक होगी | उसके हिसाब से फिर और फूल पौधों का आगमन होगा |कुछ धुप वाले फूल आएंगे तो कुछ छांव वाले पौधे जिनमे सिर्फ हरियाली होगी शायद फूल नहीं | फूल की जगह हरियाली से ही संतोष करेंगे |

                               जीवन में सब कुछ अपनी इच्छा और मन का होता ही कहाँ हैं |  कुछ अच्छाइयों के लिए कुछ बुराइयां परेशानियां , कुछ मन से इतर बर्दास्त करनी ही पड़ता  हैं | या तो उन्हें ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार कर लीजिये , बर्दास्त कीजिये या उनके लिए कुछ और उपाय कीजिये |  लेकिन उनके चक्कर में हमें अच्छाइयों , खुशियों के जीवन में आगमन पर रोक नहीं लगानी चाहिए |

#सालीजिंदगी

December 14, 2019

भूख और खाने का कदर --------mangopeople



                                 बिटिया जन्म लेने के पहले ही  खाने को लेकर नखरे बाज थी | दो दो बार उन्होंने माँ के पेट में खाना  पीना छोड़ अपना ग्रोथ रोक लिया था , मजबूर हो कर उन्हें समय से पहले बाहर लाना पड़ा था  | जन्म के बाद भी ये जारी रहा हम सहते रहे हर तरह का मान मनौवल करते रहें | नतीजा हमेशा अपने उम्र से उनका वजन बहुत कम होता |

                                 जब कुछ बड़ी  हुई तो जरुरी लगा कि इन्हे समझाया जाए कि खाने का  महत्व क्या हैं और भूखे होने के कष्ट कैसा होता हैं |  तो उन्हें धमकी दी जाती कि खाने से मना करोगी तो खाना ही नहीं दिया जायेगा | कई बार धमकी देती लेकिन फिर मन नहीं मानता कि कैसे उसे भूखा रखूं | खासकर स्कूल से जब आतीं तो लगता सुबह की भूखी हैं टिफिन बॉक्स भी वैसे ही वापस आ गया हैं अब कैसे खाना खिलाने में देर कर सकती हूँ |

                               फिर होता ये हैं कि दो चार बार धमकी देने के बाद बच्चे समझ जाते हैं कि मम्मी खाना तो दे ही देगी या खिला देगी उसकी सुनने की जरुरत नहीं हैं |  फिर वो ऐसी धमकियों को भाव नहीं देते | लेकिन मैं थी तो उनकी अम्मा ही उन्हें समझाने  के लिए उनके  पापा जी से मिली भगत किया गया |
पापा जी को बता दिया गया कि किसी दिन मैंने गुस्से में उसे खाना  नहीं दिया तो ये तुम्हारी ड्यूटी हैं कि तुम कुछ देर बाद उसे समझाओगे , मुझे सॉरी बोलवाओगे और हर हाल में उसे खाना खिलाने के बाद ही सुलाओगे |  बिना खाये वो सो गई तो समझना तुम्हे भी खाना नहीं मिलेगा | उसे समझना चाहिए कि मम्मी सच में ऐसा कर सकती हैं | दो तीन बार में ही कुछ घंटों की भूख ने उन्हें भूख के कष्टों को समझा दिया |

                              लेकिन खाने की कदर करना अभी बाकी था | एक दिन उन्हें स्कूल से लेकर आ रही थी सिग्नल पर एक भिखारी बच्चा आया और कार का शीशा नॉक कर खाना मांगने लगा | बच्चे की हालत ठीक नहीं थी म   मैंने बिटिया से कहा तुम्हारा टिफिन बॉक्स में खाना बचा होगा दो इसे दे देतीं हूँ | पहली बार उनका ध्यान भिखारियों पर गया था और वो पूछने लगी कोई बच्चा इस तरह सड़क पर मुझसे खाना क्यों मांग रहा हैं |

                             घर आ कर उन्हें अच्छे से बताया गया कि कितने लोगों को दुनिया में  खाना नहीं मिलता वो भूखे सोते हैं  और तुम खाना छोड़ देती हो फेक देती हो | मुझे उम्मीद नहीं थी कि वो इस चीज को बहुत अच्छे से एक बार में ही समझ जाएँगी , लेकिन वो समझ गई |

                            वो दिन हैं और आज को दिन ,  वो कभी खाने को नहीं फेकती हैं | ना ना वो अपनी थाली का खाना आज भी पूरा ख़त्म नहीं करती , असल में वो थाली का बचा हुआ खाना या तो अपने पापा को जबरजस्ती खिला कर ख़त्म करतीं हैं या थाली समेत बचा खाना फ्रिज में चुपके से रख देतीं हैं | एक टुकड़ा रोटी छूटा हो या एक दो आलू का टुकड़ा सब मेरे फ्रिज में जाता हैं , जूठी थाली समेत और बाद में जब मुझे दिखता हैं तो वही मेरा उन पर चीखना चिल्लाना आज भी जारी ही हैं | मेरे इन कष्टों से मुझे आज भी मुक्ति नहीं मिली , मेरा चिल्लाना आज भी अनवरत जारी हैं , पता नहीं ये कब उन्हें  समझ आएगा |

#मम्मीगिरि