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August 07, 2022

सील लोढा चकरी और स्त्री-पुरुष की सेहत

समय समय पर पुरुष याद दिलाते रहते है कि घर का काम करने से महिलाएं स्वास्थ रहती है या आजकल महिलाए इसलिए मोटी होती जा रही है क्योंकि उन्होने घर से सील लोढ़ा , चकरी आदि हटा कर मीक्सी ला दिया है । इससे वो अपनी सेहत भी खो रही है और खाने का स्वाद भी खराब हो रहा है । ऐसी ही एक टिप्पणी किसी ना की कि

'अगर आप स्वस्थ रहने के इच्छुक हैं तो योगा या रस्सा कूदने की ज़रूरत नहीं है। स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए अच्छे पाकशास्त्री बनिये। घर में सिल-बट्टा और दरतिया ज़रूर रखिए। कैथा, मेथी दाना और नारियल की चटनी सिर्फ सिल-बट्टे से ही बन सकती है।'

'औरतों ने किचेन के सुस्वादु भोजन का जायका बिगाड़ दिया है'....

एक बात ध्यान रखिये कि स्त्री का धर्म ही त्याग तपस्या हैं  | जिस घर में स्त्री इन गुणों का त्याग करती हैं घर बिखरते हैं | तो अब समय आ गया हैं कि स्त्री एक बार फिर त्याग के लिए तैयार हो जाए और   अपने शरीर को कष्ट दे | लोग कहते है कि   सील लोढ़ा की चटनी और घर की चकरी  के आटे में ज्यादा स्वाद होता हैं साथ में शरीर का व्यायाम अलग से | मेरी खुद की सौ  प्रतिशत की सहमति हैं इन दोनों बातों से | 


आप आस  पास किसी भी  जिम या अखाड़े को देखिये व्यायाम करते और शरीर बनाते पुरुष ही पुरुष दिखेंगे महिलाऐं बस नाम मात्र की | ये जरुरी भी हैं कि पुरुष शरीर से तगड़े हो महिलाओं के मुकाबले ,  क्योकि उन्हें घरों  कर बाहर दुनियां का सामना करना हैं | तो अब समय आ गया हैं कि स्त्रियां घरों के कुछ कामों का त्याग करे मिक्सी आदि  का त्याग करे सील लोढ़ा और चकरी लाये और पुरुषो को काम पर लगाये | पुरुषो द्वारा भांग की घोटाई से हम सब समझ सकते हैं कि सील लोढ़ा के प्रयोग की  प्राकृतिक  क्षमता उनमे होती हैं |   स्वाद का स्वाद और उनका घर में व्यायाम कसरत आदि भी हो जायेगा | जिम आखाड़े में व्यर्थ जाने वाले  पैसे  और समय भी बचेगा | 


हम स्त्रियों का क्या हैं सह लेंगे ,  थोड़ा आराम कर लेंगे | उससे कुछ वजन बढ़ेगा तो वो बोझा भी परिवार की ख़ुशी के  लिए उठा लेंगे | सामने सील लोढ़ा और चकरी का नतीजे में जो घर में ऋतिक रौशन , टाइगर श्राफ जैसे शरीर बनाये पुरुष  घुमेगे तो अपना त्याग व्यर्थ ना लगेगा 😂😂😂

July 18, 2022

स्त्रियां रिटायर नही होती

 दो दिन  पहले  रिटायर्मेंट ले चुकी अपनी फैमिली  डॉक्टर के पास  उनके घर गयी । सुबह  सुबह  घर पहुंची तो वो रसोई  मे सब्जी बना रही थी । देखकर  लगा रिटायर्मेंट शब्द  स्त्रियों के लिए  नही बना है । 

अपने प्रोफेशन से तो रिटायर्मेंट  ले लिया लेकिन  ये अवैतनिक  काम घर गृहस्थी से कभी उनको छुट्टी नही मिलती । सत्तर  साल से ज्यादा की आयु  हो चुकी  है लेकिन गृहस्थी रसोई  अब भी उनकी जिम्मेदारी और कर्तव्यों मे है । 


संभव है कि काम वाली हो और उस दिन  ना आयी हो तो भी उस दिन  के लिए  ही सही सारे काम की ज़िम्मेदारी हर घर मे स्त्रियों की ही होती है । उनके पति भी डॉक्टर  ही थे लेकिन  बहुत  पहले ही उन्होंने भी काम से विदाई  ले ली थी । पैरो मे कुछ  समस्या हो गयी थी उन्हे । 

मेरे पड़ोस मे जो परिवार  रहता है वहां भी वही हाल है । पति नेवी मे थे जमाने पहले रिटायर हो गये लेकिन  सत्तर  साल से भी ज्यादा की पत्नी ही घर के सारे काम करती है । दो बेटियों एक बेटे  की शादी हो गयी सबकी अलग अपनी गृहस्थी है । 


छोटी बेटी साथ रहती है लेकिन  वो सुबह आठ बजे ही अपनी नौकरी पर निकल जाती है और  रात सात आठ तक आती है । इस बीच  खाना बनाने से लेकर  बाजार  से सामान लाने आदि सारे घर का काम वो खुद  ही करती है । बेटी से थोड़ा-बहुत  ही मदद मिल पाती होगी । 

हम तो अपना सोच रहे है हमारा क्या होगा । हम तो पतिदेव  से कहते तुम्हारा तो बढ़ियां है साठ मे नौकरी से छुट्टी मिल जायेगी फिर  मन है तो कुछ  करो नही तो आराम करो । लेकिन  मेरे रिटायर्मेंट  की तो कोई  डेट ही नही है । 

June 21, 2022

सारी नसीहत रोक बस स्त्री पर

जमाना  बड़ा ख़राब हैं , लड़कियों के लिए बाहर निकलना सुरक्षित नहीं हैं  बेहतर हैं रात में लड़कियां ,  महिलाएँ घरो में रहें बाहर ना निकले  | पुरुष उन्हें बाहर परेशान करते हैं तो लड़कियां स्कूल कॉलेज भी ना जाये | लडकिया खजाने की तरह हैं उन्हें तिजोरी में बंद करके रखे | लड़कियां पर्दा करे , घुघंट करे , बुर्का पहने तभी वो लोगों की बुरी नज़रों से सुरक्षित हैं | 


ये सब कितना अलग हैं , उससे जो कुछ  समय  पहले पढ़े लिखे , समझदार , उदारवादी , स्त्री विमर्श करने वाले , नारीवादियों द्वारा सुल्ली , बुल्ली बाई कांड के बाद कहा जा रहा हैं कि सोशल मिडिया पर लड़कियां महिलाऐं अपनी तस्वीरें ना लगाए , अपनी फोटो यहाँ  लगाना खतरनाक हैं | लोग महिलाओं की तस्वीरों का गलत उपयोग  कर सकते हैं |  महिलाऐं लड़कियां खुद  को सोशल मिडिया पर सिमित रखे , अपनी  तस्वीरें पोस्ट पब्लिक ना करे | 


ये सब नसीहत महिलाओं को ही देना , उन्ही को सिमित और छुपने के लिए कहना उन्हें दंड देने जैसा नहीं हैं क्या  | अपराध पुरुष करे और सजा नसीहतें महिलाओं को दिया जाए ये कौन सा आधुनिक सोच हैं भाई | वास्तव में ये उसी पुरातनपंथी सोच का एक हिस्सा हैं तो  बलात्कार जैसे पुरुष के अपराध को , स्त्री की इज्जत मान सम्मान के लूट जाने से जोड़ देता हैं | 


आप एक बार सोच कर देखिये की अगर  पुरुषो की फोटो लगा कर कहा जाता की गधे हैं , जागोला हैं , कुत्ते हैं आओ इनकी बोली लगाओ तो क्या इसे पुरुषो की  इज्जत से जोड़ कर देख फोटो ना लगाने की नसीहत दी जाती | क्या ये कहा जाता कि पुरुषो का चीरहरण  किया गया |  एक मशहूर कार्टूनिस्ट ने इसे महिलाओं के ऑनलाइन चीरहरण से जोड़ दिया |


 कोई घटिया बद दिमाग पुरुष , समूह , किसी  विचारधारा के लोग  किसी महिला के लिए कुछ सोच ले , सार्वजनिक रूप से कुछ कह दे तो क्या  इतने भर से किसी महिला का सम्मान चला जाता हैं वो भरे बाजार नग्न होने जैसा हैं |  किसी का सम्मान उसके अपने  ख़राब बुरे कृत्य से जाता हैं किसी और के  उस पर कीचड़ उछालने या घटिया सोच से नहीं | 


कोई भी समाज हो  , वर्ग हो स्त्री के खिलाफ होने वाले अपराध पर उसे पीड़ित की जगह अपराधी बनाने की ही सोच रखता हैं |  पहले ये जानकर किया जाता था अब जाने अनजाने में पढ़े लिखे भी करते हैं और रूढ़िवादियों को मौका मिल जाता हैं | 


वास्तव में ये  बुल्ली सुल्ली बाई कांड एक गंभीर अपराध था जिसके खिलाफ पहली बार में ही सख्त कार्यवाही किये जाने की जरुरत थी | पहली बार में ही सायबर सेल  और कोर्ट में इसके खिलाफ शिकायत की जाती तो ऐसे अपराध दुबारा  नही होते उन्हे होने से रोका जा सकता था । 


May 13, 2022

विवाह स्त्री जीवन की धुरी नहीं हैं

स्त्रियों से जुड़े तीन अलग अलग मामलों में कोर्ट का फैसला आया हैं और फैसले हमें स्त्रियों की समाजिक स्थिति सोच पर ज्यादा काम करने को कहती हैं | 

पहले मामले में एक पिता अपनी चौदह साल की बेटी  से लगातार  रेप कर उसे गर्भवती  कर देता हैं और जब अस्पताल से मामला पुलिस तक पहुंचता हैं तो माँ बेटी दोनों पिता का नाम लेने से इंकार कर देती हैं | पुलिस का दबाव बढ़ने पर किसी और का नाम ले लेती हैं | 

पुलिस उनके आस पास के लोगों से पूछताछ और भ्रूण का टेस्ट कर पिता के  खिलाफ मुक़दमा  दर्ज करती हैं अब कोर्ट ने पिता को बीस साल की सजा दी हैं लेकिन माँ बेटी ने   पिता के   खिलाफ गवाही नहीं दी | 

दूसरा मामला ज्यादा महत्वपूर्ण हैं क्योकि इस फैसले से कोर्ट ने पति के खिलाफ रेप का मामला दर्ज करने के लिए कहा हैं | पत्नी दस सालो से ज्यादा समय तक क्रूर तरीके का यौन दुर्व्यवहार  सहती हैं जिसमे बार अप्राकृतिक  यौन सम्बन्धो के साथ बेटी के सामने यौन सम्बन्ध बनाने जैसे आरोप हैं | 


पत्नी ने क़ानूनी मदद तब ली जब नौ साल की बेटी के सामने यौन सम्बन्ध बनाने के बाद बेटी का भी यौन शोषण किया गया | पहले पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज किया गया था फिर कोर्ट ने फैसला दिया कि पत्नी से रेप के भी चार्जेस लगाये जाए क्योकि रेप तो रेप होता हैं चाहे वो कोई भी पुरुष करे | 

तीसरे मामले में कोर्ट ने अपने जीवनसाथी के चरित्र पर शक करने या चरित्र को लेकर निराधार आरोप बार बार  लगाने को क्रूरता माना हैं और इसके आधार पर तलाक को स्वीकार किया हैं | ये फैसला पत्नी के खिलाफ और पति के पक्ष में दिया हैं | 

1 - पहले मामले में पत्नी गरीब और पति पर निर्भर है | उन्हें ऐसे अपराधों से संरक्षण और सजा के लिए पहले से कानून मौजूद हैं लेकिन उनकी सामाजिक स्थिति और खुद उनकी सोच के आगे कानून का संरक्षण बेकार हैं | स्त्री सशक्तिकरण और अपराधों से उनके बचाव के लिए बना हर कानून तब तक इन जैसी स्त्रियों के लिए बेकार हैं  जब तक नीचे के स्तर तक स्त्रियों की सोच को नहीं बदला जाता | 


2 - दूसरे मामले में महिला काम तो नहीं करती लेकिन एक करोड़ से ज्यादा की संपत्ति उनके नाम है | जिसके  सहारे वो अपनी बेटी के साथ अलग जीवन बिता सकती थी इस विवाह से बाहर निकल कर | लेकिन एक दशक तक वो अत्याचार सहती हैं  जब तक पानी सर के ऊपर नहीं चला जाता और बेटी का भी   शोषण शुरू होता हैं  |  वो कानून का सहारा पहले भी लेकर अपना और अपनी बेटी को बुरे अनुभवों से बचा सकती थी  | 

3 - तीसरे मामले में महिला ना केवल पढ़ी लिखी है बल्कि एक कॉलेज में पढ़ाती भी हैं मतलब हर तरीके से आत्मनिर्भर  हैं  | लेकिन जिस पति  के चरित्र पर  शक है वो उसी के साथ रहने की ज़िद पर अड़ी है तब भी जब पति उन्हें तलाक देना चाहता हैं | आखिर वो कौन सी सोच हैं जो उन्हें उसी पति के साथ रहने के लिए मजबूर कर रहा हैं जिसको वो पसंद नहीं करती | 


जब तक स्त्रियां विवाह को अपने जीवन की धुरी , आधार मानना बंद नहीं करेंगी | जब तक वो  विवाह की सफलता असफलता को अपने जीवन की सफलता असफलता से जोड़ना बंद नहीं करेगी उनका कोई भला होने वाला नहीं हैं | उनके बचाव के लिए बने सैकड़ों कानूनों का कोई मतलब नहीं होगा जब तक वो अपने रूढ़िवादी सोच से बाहर नहीं निकलेंगी |


August 24, 2019

मेरी मर्जी -------mangopeople


१- कड़कती धुप से बचने के लिए कोई लड़की छाते और क्रीम की जगह कपडे से सर मुंह ढक ले तो ये उसकी मर्जी हैं | लेकिन दूसरों की बुरी नजर ना पड़े या स्त्री का शरीर देख कर किसी पुरुष की भावनाएं ना भड़के , उसका धर्म ऐसा कहता हैं इसके लिए घूँघट और बुर्का कोई लड़की पहने तो वो उसकी मर्जी नहीं होती |
२- कोई  किसी कपड़ें  को पहनना आरामदायक नहीं समझता और नहीं पहनता तो ये उसकी मर्जी हैं | लेकिन लोग गलत नजर से देखेंगे उसे छेड़ेंगे इसलिए किसी कपडे को ना पहनना उसकी मर्जी नहीं होती |
३- अपने जीवनसाथी से प्यार है इसलिए उससे झगड़े के बाद भी उसके साथ रहना उसकी मर्जी हैं | लेकिन पति के घर डोली जाती हैं तो अर्थी भी वही से उठेगी कि सोच के साथ कोई रोज पिटने के बाद भी वही रहें  तो ये उसकी मर्जी नहीं हैं |
४- कोई घर बच्चे और ऑफिस तीनो नहीं संभाल सकता , कोई अपना समय केवल अपने बच्चे परिवार को देना चाहे इसलिए नौकरी छोड़ दे या ना करे तो ये उसकी मर्जी हैं | लेकिन पति , पिता, परिवार को उसका काम करना नहीं पसंद इसलिए घर की शांति के लिए उसका नौकरी ना करना उसकी मर्जी नहीं हैं |

                              दुनियां के दबाव में , बचपन से धर्म की पिलाई गई घुट्टी के कारण  किसी तरह का निर्णय लिया गया हैं तो वो  किसी लड़की की  मर्जी नहीं होती | अपनी स्वतंत्र  सोच से निर्णय लेना और किसी तरह के दबाव में लिए गए निर्णय में फर्क होता हैं | अक्सर लड़कियां लोगों के दबाव में उनके कहने पर या परेशान हो कर कोई ऐसा निर्णय ले लेती हैं जो धर्म और समाज के ठेकेदारों के नजरिये से ठीक होता हैं लेकिन उनके अपने लिए नहीं , ऐसे निर्णयों को स्त्री का निर्णय नहीं कहा जा सकता और ना ही उसकी व्यक्तिगत सोच कह कर छोड़े जाने लायक |

June 29, 2019

स्त्री और उसकी पवित्रता-------mangopeople


                                      दक्षिणभारतीय गुरु ने मेरा डांस वही रोक दिया जब मैंने  सीता हरण के दृश्य में रावण को सीता का हाथ पकड़ खींचते दिखाया | अरे भाई ये तुमने क्या किया रावण ने सीता का हाथ कैसे पकड़ लिया सीता इतनी पवित्र थी ,  भला रावण की हिम्मत कैसे थी की वो उन्हें हाथ लगा देता | फिर मुझे पता चला की रामायण के अनेको वर्जन में से  दक्षिणभारतीय  वर्जन में रावण हरण के समय सीता का हाथ नहीं पकड़ता बल्कि उनके लक्ष्मण रेखा के बाहर आने पर जहाँ वो खड़ी होती हैं वहां की धरती सहित उन्हें उड़ा लेता हैं |
                                    आश्चर्य हुआ इस पर , नये वर्जन से नहीं ,स्त्री को लेकर पवित्रता की इस भारतीय सोच से | कोई पराया मर्द गलत सही नियत से स्त्री को हाथ लगा दे तो स्त्री की ही पवित्रता नष्ट हो जाती हैं | स्त्री की पवित्रता शुद्धता इसमें हैं कि पराया मर्द की उंगली भी उसे ना छू जाए , हा अपना मर्द उसके साथ जो चाहे करे , चाहे उसमे उसकी मर्जी हो या ना हो | वो चाहे तो उसे प्रेम करे चाहे तो उसे पीट दे | वैसे गलत सही नियत से किसी पराई स्त्री को छूने वाले उस पराये पुरुष की पवित्रता का क्या होता हैं इस बारे में कही कुछ शायद नहीं लिखा बोला गया हैं | या तो उसकी पवित्रता को कुछ नहीं होता हैं या ये पवित्रता जैसी बाते बस स्त्री के लिए ही होती हैं |
                                       वैसे कुछ सवाल पूछने की  इच्छा थी कि जब सीता पवित्र थीं तो फिर उनकी अग्नि परीक्षा क्यों ली गई  और सूर्पनखा के नाक कान काटते समय लक्षण ने मर्यादा का पालन करते हुए  बिना छुए ये काम किया था या मर्यादा तोड़ी थी | नहीं पूछा ये सवाल जानती थी जिस बात का जवाब ही नहीं होगा उसे क्या पूछना | लेकिन समस्या ये हैं कि पुरातन समय में लिखी गई कथा और उसकी सोच का आज भी पालन होता हैं | आज भी स्त्री की पवित्रता चरित्र को लेकर ऊँचे  मानदंड रखे जाते हैं |