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October 15, 2011

भारतीय क्रिकेट टीम का माइंड सेट कुछ तस्वीरों की जुबानी - - - - - -mangopeople

Ganguly: Do or die. 

Sehwag: Do before you die.

Dravid: Do until they die.

Tendulkar: Do that will never die.

Laxman: Do when everyone else dies.

Dhoni: Do everything before luck dies.


Sreesanth: Die but never do...!!!

Bajji : Slap till they die

Zahir : Die when doing    

                                  Yuvraj: Do, die, reborn, do, die, reborn (repeat)....
Yuvraj: Do,

die,

reborn  

   ई मेल से प्राप्त                                                      

March 28, 2011

" MOTHER OF ALL MACH'S " खिलाडियों पर ये जानलेवा दबाव - - - - - - - - - mangopeople

                                        क्वार्टर फ़ाइनल मैच में अभी भारत को आस्ट्रेलिया के खिलाफ जितने के लिए २५ रन और बनाने थे तभी एक विदेशी कमेंटेटर ने कहा की अब ३० मार्च का सेमीफाइनल मैच होगा " MOTHER Of ALL MACH'S " यानी ये बात पुरे क्रिकेट जगत को पता है की भारत और पाकिस्तान के बीच कोई मैच और वो भी विश्व कप के सेमीफाइनल जैसे मैच का होने का क्या मतलब है | दोनों देशो में क्रिकेट को धर्म का दर्जा प्राप्त है और क्रिकेट यहाँ बस एक खेल न हो कर जूनून है और ये जूनून तब और सर चढ़ कर नाचने लगता है जब ये खेल इन दो देशो के बीच हो रहा हो और जब मैच विश्व कप का सेमीफाइनल हो तो फिर तो पूछिये ही मत फिर तो खेल खेल न हो कर जंग हो जाता है | जरा अखबारों की और न्यूज चैनलों की भाषा तो पढ़िए और सुनिये उनकी बोली जो इस जूनून को और ऊपर चढ़ा कर सातवे आसमान पर पहुंचा देता है " ये खेल नहीं ये युद्ध है " " इस जंग को हमें जितना ही है " और न जाने क्या क्या |  सच कहूँ तो इस समय मुझे भारत पाकिस्तान दोनों के खिलाडियों के ऊपर दया आ रही है | बेचारे किस तरह के भारी दबाव में जी रहे होंगे उस पर से मैच के बीच इतने ज्यादा दिनो का अंतर उन्हें और भी खलता होगा | रोज रोज टीवी अखबारों में इस मैच के दबावों, लोगो की उम्मीदों की खबरे देख पढ़ सुन उन्हें भी लगता होगा की अब बस कल ही मैच हो सब ख़त्म हो तब जा कर शांति मिले | इस समय तो उनका खाना पीना सोना जागना सब दुस्वार हो चूका होगा | बोलते समय भी सौ बार सोचते होंगे की कही कुछ ऐसा न बोल जाये जो कल को हम पर ही भारी पड़े या लोगो को हमारे हतोत्साहित , अति उत्साहित , अति आत्म विश्वास से लबरेज या दबाव में होने का एहसास न करा दे लोगो को बोलो तो बस ऐसा की हम सब शांत चित हो कर बिना किसी दबाव के बस मैच की तैयारी कर रहे है | एक बार इमरान खान का एक साक्षात्कार देखा था जिसमे वो बता रहे थे कि १९९२ के फ़ाइनल मैच के पहले आलू के बोरे उप्स मतलब इंजमाम को पेट दर्द होने लगा था वो बोले की मै समझ गया की वो झूठ बोल रहा है कई बार ऐसे अति दबाव वाले मैच के पहले कई युवा खिलाडी ये सोचने लगते है की काश हम बीमार पड़ जाये घायल हो जाये और ये मैच न खेलना पड़े | बेचारे सोचते होंगे की कम से कम हारने के बाद हम पर दोष नहीं आएगा, कि हम बेकार खेले या हमारी वजह से टीम हार गई और जीत गए तो पिछले मैचो में जो प्रदर्शन किया है उसका कुछ तो क्रेडिट मिल ही जायेगा | मै तो दाद देती हूँ खिलाडियों को जो इस भारी तनाव को सहते हुए खेलते है और जब कभी मैच के बीच कोई बुरी स्थिति आ जाती है तो उस समय खुद पर काबू रखते हुए अपने नर्वसनेस को दबाते हुए वो बल्ला या गेद थामे रहते है और अच्छा प्रदर्शन भी करते है या उसका प्रयास करते है | पिछले मैच में जब धोनी आउट हो गए तो लगा सब ख़त्म हुआ किन्तु जब युवराज और रैना टीम को जीत के करीब ले जाने लगे तो हर बाल पर जान हलक में आ जाती थी की कही ये दोनों आउट न हो जाये जब तक टीम जीत नहीं गई खुद पर कंट्रोल करना कितना मुश्किल हो जाता है जब हम देखने वालो का ये हाल है तो सोचिये की खेलने वाले का मैदान में क्या हाल होता होगा वो कैसे ये सब झेलते होंगे |
                                                    बेचारे दोनों टीमो के खिलाडियों की हालत तो युद्ध में जा रहे सैनिको जैसी होगी या ये कहूँ की उससे भी ज्यादा दवाब पूर्ण क्योकि सैनिक जीते या हारे उनकी आलोचना नहीं होती है और पूरा जोर लगाने के बाद भी हार जाये और मारे जाये, तो मरने के बाद शहीद का दर्जा मिलता है और हार को भी सम्मान की नजर से देखा जाता है | किन्तु यहा तो लोगो को हर हाल में जीत ही चाहिए हार के बारे में तो लोग सोच ही नहीं रहे है,  लोग तो खेल के बारे में भी नहीं सोच रहे है वो तो बस और बस जीत जाने के बारे में सोच रहे है, बाते कर रहे है | खिलाडी अपना जी जान लगा दे किन्तु उसके बाद भी हार जाये, आखिर है तो खेल ही एक को तो हराना ही पड़ेगा , तो यहाँ तो सिर्फ और सिर्फ आलोचना वो भी न सहने लायक ही मिलेगी  |  वैसे मैच टाई हो जाये तो कौन जीतेगा तो क्या लीग मैच के नंबर देखे जायेंगे या रन रेट, १९९९ के सेमीफाइनल की तरह, तो उस हिसाब से तो पाकिस्तान जीत जायेगा | यानि हम टाई में भी हार जायेंगे मतलब की भारतीयों को हर हाल में जितना ही है, लो भाई मै भी जीत की ही बात करने लगी
                                                          दोनों टीमो में से जो भी ये मैच हारेगा वो  उत्तेजित , आक्रोशित और अतिस्योक्ति पूर्ण अपनी आलोचना सुनने, पुतले जलाये जाने , विरोध प्रदर्शन होने , खिलाडियों के घरो पर पत्थरबाजी  के बाद एक बार जरुर ये सोचेगा की काश हम क्वार्टर फ़ाइनल में ही हार गए होते तो अच्छा होता क्योकि यहाँ पर सेमीफाइनल हारने का गम से बड़ा गम  भारत या पाकिस्तान से हारने का गम होगा साथ में बेभाव की पुरे देश की आलोचना भी झेलना पड़ेगा वो अलग ,पहले ही हार जाते तो बात सिर्फ हारने तक ही होती | वैसे टीम के हारने के बाद उसकी आलोचना करने का ये तरीका अभी तक दो देशो भारत और पाकिस्तान के लोगो के पास ही था किन्तु इस बार इसमे बांग्लादेश के लोगो ने भी बराबर साथ दिया बल्कि एक कदम और आगे चले गए और वेस्टइंडीज से हारने के बाद खिलाडी के घर पथराव कर घर में मौजूद उनकी माँ और बहन को भी घायल कर दिया | 
                             दुनिया जहान में किसी खेल के सौ दो सौ या  ज्यादा से ज्यादा हजार विशेषज्ञ होते है जो बारीकी से खेल का विश्लेषण करते है किन्तु हमारे यहाँ क्रिकेट के एक अरब से भी ज्यादा विशेषज्ञ है जो खेल और खिलाडी की ऐसे बाल की खाल निकालते है और ऐसे एक्सपर्ट कमेन्ट देते है की बड़ा से बड़ा खिलाडी भी खुद पर शक करने लगे | जो इस खेल को नहीं देखते है वो भी ये तो कमेंटे कर ही देत है की ये बकवास खेल है दुसरे खेल की तरफ कोई क्यों नहीं ध्यान देता है या लोग इस खेल को देखने में अपना समय क्यों बर्बाद करते है | मतलब वो खेल देख ये तो बता ही देता है की क्रिकेट से ज्यादा अच्छे दुसरे खेल है या काम है | आकडे देने वाले आकडे दे रहे है की हम तो विश्वकप में कभी पाकिस्तान से हारे ही नहीं है एक दो बार नहीं कुल चार बार पाकिस्तान को हराया है सो इस बार नहीं हराने का तो सवाल ही नहीं होता है पिछले आकडे हमारे साथ है | तो वो भूल जाते है की कोई भी खेल आकड़ो पर नहीं जीता या हारा जाता है पिछले को भूल जाइये क्योकि यदि आकड़ो से जीत और हार तय होती तो , तो हम आस्ट्रेलिया से जीतते ही नहीं क्योकि उसने हमें सात में से पांच बार हराया था और दुसरे हम इस बार विश्वकप नहीं जीत सकते क्योकि आकडे कहते है की मेजबान देश कभी भी कप नहीं जीतता है १९९६  में विश्वकप जितने वाली श्रीलंका सह मेजबान थी जैसे इस बार है | मतलब ये की जीतता तो वो है जो इन सारे दबावों को झेल कर उस एक दिन अच्छा खेल दिखाये | किसकी टीम मजबूत है किसकी टीम कमजोर है किसकी बैटिंग लाइन अच्छी है तो किसकी बोलिंग अच्छी है किसने पहले कैसा प्रदर्शन किया है ये सब मायने नहीं रखता है यदि रखता तो २००३ में हम सेमीफाइनल में केन्या जैसी टीम के साथ मैच नहीं खेलते |  यदि कुछ मायने रखता है तो वो है उस दिन का खिलाडियों का प्रदर्शन |
                                                                                   वैसे इतने सारे दबाव क्या कम थे खिलाडियों पर जो मनमोहन सिंह भी चले आ रहे है मैच देखने खुद तो आ ही रहे है लावा लश्कर ले कर साथ में जरदारी गिलानी को भी न्योता दे दिया क्या करेंगे ये लोग मैदान में बैठ कर ,
क्या कहा खिलाडियों का उत्साह बढ़ायेंगे ?
 हा हा हा हा
 जो हाल आज की तारीख में इन दोनों प्रधानमंत्रियो का अपने अपने देशो में है, मुझे तो लगता है खिलाडियों से हाथ मिलाते समय खिलाडी ही इन दोनों का उत्साह बढ़ायेंगे, सर जी घबराइये मत सोनिया मैडम है ना और गिलानी के लिए जनाब घबराइए नहीं अंकल सैम है ना जब तक खुदा मेहरबान तब तक गधे भी पहलवान |
                
 मेरी इच्छा ! मैच किसी भी टीम के लिए एक तरफ़ा जीत वाला ना हो मैच का रोमांच आखरी गेंद तक बना रहे | मेरे लिए तो अभी तक दोनों टीम का पलड़ा बराबर का है कोई भी जीत सकता है |
                                                            


चलते चलते 

              पाकिस्तानी मुल्लाओ ने अल्लाह को और भारतीय पंडितो ने भगवान को फोन लगाया और पूछा की यदि लोग पूछे की सेमी फ़ाइनल मैच कौन जीतेगा तो मै क्या जवाब दू तो भगवान और अल्लाह ने कहा कि कह दो " नो आइडिया सर जी " | 

 पाकिस्तान ने भारत को एक ख़ुफ़िया रिपोर्ट दी कि उन्हें पता चला है की भारत में होने वाले फ़ाइनल मैच पर आतंकवादी हमला करने वाले है और आतंकवादियों ने फ़ाइनल के १७ टिकट भी खरीद लिया है और पाकिस्तानियों ने  एक आतंकवादी को इस मामले में पकड़ा भी है | भारत हैरान की आखिर पाकिस्तान को क्या हो गया है वो भला हमसे ऐसी सुचनाये क्यों शेयर कर रहा है पहले तो ऐसी कोई सूचना नहीं थी, क्वार्टर फ़ाइनल मैच शुरू होने के बाद ये खबर अचानक कहा से आ गई | जवाब भारत को जल्द मिल गया जब रहमान मालिक ने पकडे गए आतंकवादी का बयान भारत को भेजा जिसमे आतंकवादी  कहता है कि "हजूर जो आतंकवादी टिकट ले कर मैच देखने जाने वाले है वो सब क्रिकेट के बड़े मुरीद है यदि फ़ाइनल में पाकिस्तान गया तो वो जेहाद भूल चुपचाप मैच का मजा लेंगे और अपनी टीम का उत्साह बढ़ाएंगे टिकट के पैसे वसूल कर घर आ जायेंगे किन्तु यदि पाकिस्तान फ़ाइनल में नहीं गया तो फिर मैच उनके किस काम का फिर तो उन्हें जेहाद ही याद आयेगा और वो आत्मघाती हमला कर देंगे | अब ये भारत तय कर ले की उसे सेमीफाइनल मैच जितना है या फ़ाइनल मैच शांति से पूरा करवाना है | "

             जब मनमोहन सिंह ने गिलानी और जरदारी को मैच देखने का न्योता भेजा , तो गिलानी सीधे हुजी के पास गए और उससे कहा की मैच देखने जरदारी जा रहे है उड़ा दो साले को वही पर वापस नहीं आना चाहिए  एक तीर से दो निशाने | फिर जरदारी हुजी के पास गए और कहा की मैच देखने मै गिलानी को भेज रहा हूँ उड़ा दो साले को वही पर वापस नहीं आना चाहिए एक तीर से दो निशाने | किन्तु अमेरिका से फोन आ गया की भाई भारत मैच देखने दोनों को जाना चाहिए ताकि दोनों देशो के बीच अच्छी बात हो सके | दोनों का आना तय हो गया अब पाकिस्तानी जनता हुजी के पास गई और कहा उड़ा तो दोनों सालो को वापस नहीं आना चाहियें दोनों के दोनों, भले हमें इसके लिए अपने ग्यारह बकरों की बलि देनी पड़े |

                        भारत सेमीफाइनल मैच हार गया दुसरे दिन पाकिस्तान के अखबारों में खबर छपी  " भारत को पाकिस्तानियों ने पीट विश्वकप से बाहर किया , अब कप हमारा है " और सारे पाकिस्तानी इस खबर को ऐसे पढ़ रहे ( उनके कान बज रहे है ६० साल अन्दर दबी इच्छा बाहर आ रही है ) है "  भारत को पाकिस्तानियों ने पीट कश्मीर से बाहर किया अब कश्मीर हमारा है " |
दिल बहलाने के लिए ख्याल अच्छा है |