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August 12, 2022

सरकार का तुगलगी फरमान

बीच बीच मे कोरोना काल वाली यादे भी ताजा कर लेनी चाहिए , ताकि सनद रहे ।   एक व्यंग्य लिखा था कोरोना की दूसरी लहर के बाद कि कैसे सोशल मीडिया पर हम सभी डाॅक्टर बन सभी को हर तरह की सलाह दिये जा रहे थे । 


इंडिया अब आपने घबराना हैं क्योकि सरकार का एक तुगलगी फरमान आ गया हैं और वो हमारी बातें नहीं सुन रही हैं | सरकार का कहना हैं कि एमबीबीएस कोर्स  पंचा साल की पढाई के बाद ही पूरा होता हैं उसके बाद ही डॉक्टर (मेडिकल वाला ) माना जाएगा | 


सरकार का कहना हैं कि एक साल में कोरोना से जुड़े तमाम इलाज, दवा,  ट्रीटमेंट आदि की सारी सोशल मिडिया वाली जानकारी होने के बाद भी हम आम लोगों को सोशल मिडिया वाला डॉक्टर की मान्यता नहीं देगी | मतलब ऐसे कैसे चलेगा | कोरोना मतलब  कोविड 19 जब से शुरू हुआ हैं हम सभी ने बहुत गंभीरता से उसे फॉलो  किया हैं |  


अब तक हमें कोरोना कैसे होता हैं ,  क्यों होता हैं , किसको होता हैं , उससे बचने के उपाय क्या क्या हैं , उसकी तमाम दवाएं , हाइड्रोक्विन से लेकर फैबिफ्यू , रेमडेसिविर तक की जानकारी हैं | हां ठीक हैं हाइड्रोक्विन और  रेमडेसिविर जैसो का उच्चारण करने में शुरू शुरू में समस्या होती थी लेकिन अब तो सीख ही गए हैं | ठीक हैं स्पेलिंग नहीं पता हिंदी मीडियम वालों को , लेकिन हमें कौन सा अंग्रेजी में नाम लिखना हैं | सोशल  मिडिया पर तो हिंदी  में ही सबको सलाह देनी हैं वो तो हम लोग  कर ही लेंगे | लेकिन सरकार मानने को तैयार नहीं हैं | 


हमने कहा हम लोगों ने खान सर की यूटुब क्लास भी की हैं हमें RT -PCR  टेस्ट क्या हैं , कोरोना कैसे हमारे फेफड़े में प्रोटीन कवर का  धोखा  दे कर घुसता हैं कैसे अपना फोटो कॉपी बनाता हैं , सब पता हैं | ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन पल्स नापने से लेकर ऑक्सीजन कब कम ज्यादा समझा जाए तक पता हैं | हमे तो प्रोन पोजीशन सोने के फायदे तक पता हैं | हम किसी डॉक्टर से ज्यादा बेहतर सलाह मरीजों को दे सकते  हैं और वो भी मुफ्त  लेकिन ये फांसीवादी सरकार सुनने और हमें मान्यता देने को तैयार  ही नहीं हैं | 



हमने कहा एक साल का कोर्स किया  हैं तो 20 % डॉक्टर मान लो | दूसरा साल तो हम लोगों का शुरू हो  भी हो गया हैं और बहुत कुछ नया हम लोगों ने सीख भी लिया हैं | अफ्रीकन वेरियंट , ब्राजीलियन वेरियंट , इंडियन वेरियंट , आंध्र वेरियंट , अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी वेरियंट तक की जानकारी हो चुकी हैं हम लोगों को | पांच साल का क्या  मुंह देखते हो | 

वो देखो सामने दिवाली , छठ और दिसंबर में शादियों का सीजन साफ़ दिख रहा हैं और साथ में हमारा तीसरे साल का कोर्स भी | हमें धीरे धीरे 20- 20 परसेंट की मान्यता साथ में देते चलो | तब तक हम लोग  अपनी सोशल मिडिया वाली डॉक्टरी सलाह से ना जाने कितनो की   जान सांसत में डालने  सॉरी सॉरी बचाने में मदद कर सकते हैं | लेकिन इस निकम्मी सरकार के कानू पर जूं भी नहीं रेंग रही | 

हमने कहा चलो हमें छोड़ दो लेकिन अपने देशी , शुद्ध भारतीय , लोकल - वोकल के नाम पर आयुर्वेदिक वैद्य की मान्यता हमारे अजवाइन , कपूर , लौंग , गठरी , नाक में अणु का तेल , निम्बू करने वाले मित्रो को तो दे दो | बेचारे कहाँ कहाँ से घर के मसालों के डिब्बों से , पूजाघर से आयुर्वेदिक इलाज खोज पर ला रहें हैं | कम से कम आयुर्वेद के नाम पर उन्हें वैद्य की मान्यता दे दो लेकिन सरकार इस पर भी तैयार नहीं हैं | 


हाई स्कूल फेल हो कर भी घर बैठे डॉक्टर बनिये वाला कोर्स करके होम्योपैथ के डॉक्टर बन मीठी गोलियां की सलाह बांटने वालों को भी सरकार मान्यता नहीं  दे रही हैं  | कोई बात नहीं,  ना दे मान्यता सरकार,  एकबार हम सभी का कोरोना कोर्स पूरा होने दीजिये हम सभी कोरोना टेस्ट देंगे | अरे नहीं आरटी पीसीआर टेस्ट नहीं लिखित टेस्ट मिल कर देंगे कोरोना से जुडी जानकारियों पर | फिर हम सब खुद एक दूसरे को ५७ सत्तावन   ( सांत्वना ) पुरुष्कार ले दे लेंगे | 

तब तक सोशल मिडिया पर बैठ कर सबको अपनी मुफ्त डॉक्टरी    सलाह  देते रहिये भले  कोई लाख मना करे |  

February 06, 2017

शर्मा जी बहुत शरीफ है -------mangopeople




                                                                शर्मा जी बहुत शरीफ , नेक इंसान है , पूरा मोहल्ला उनकी शराफत और नेकी का गवाही देगा । बस एक दाग था की उनके साथ उठने बैठने वालो में कुछ लंपट बुढऊ थे और कुछ मोहल्ले के जवान आवारा लौंडे । एक दिन शर्मा जी की जोशी जी से कहा सुनी हो गई शर्मा जी बहुत नाराज हो गये मन ही मन सोचा की इनकी तो हम एक दिन इज्जत उतारेंगे , कही मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहेंगे , वो भी बिना अपनी शराफत छोड़े । शर्मा जी ने एक शाम अपने घर बैठकी की उठने बैठने वाले लगभग सभी आये । शर्मा जी ने बात छेड़ी " जमाना बड़ा ख़राब हो गया है " सब ने हां में हां मिलाई और ज़माने को ख़राब होने पर लानत भेजी । बात और आगे बढ़ाते एक और लाइन जोड़ी "लड़कियों के लिए समाज सुरक्षित नहीं रहा " ज्यादातर ने उनकी हां में फिर हां मिलाई , और कुछ लड़कियों को समझाईश देने लगे तो कुछ युवाओ को ।
     
                                                               अब शर्मा जी उस तरफ मुड़ गये जिस तरफ लड़कियों को ही संभलने की सलाह दी जा रही थी । आवाज थोड़ी और तीखी की और अफसोस करते हुए कहा " आज कल की लडकिया भी कम नहीं है , उनका चरित्तर भी ख़राब हुआ है ।" जिन जिन की बेटिया थी सब ने काम का बहाना बना सबको राम राम कर चल देने में भलाई समझी । बाकी कईयो ने जोर का उनके हां में हां मिलाई और लड़कियों के ख़राब चरित्र के किस्से सुनाये । माहौल गर्म हो गया था कुछ और महफ़िल से चलते बने जो शर्मा जी से कम शरीफ थे समाज में । अब पूरी मंडली वही बची थी जिसकी चाहत शर्मा जी को थी अब वो खुल कर बाहर आये । " जोशी जी की लड़की की क्या उमर होगी १४-१५ साल की " , बीच में एक लौंडे ने टोका "अरे नहीं १६ साल से एक दिन कम न होगी १० वि में है फलाने स्कूल में , बड़ी सुन्दर है " शरीफो की छट चुकी भीड़ को उसने भी भाप लिया था । दूसरा और खुल कर सामने आया "चचा  फलाने कोचिंग में पढ़ती है उतना दूर जाती है साईकिल से आते आते रोज राती को ८ बजे घर पहुचती है।"  मोहल्ले की लड़कियों की रक्षा के लिए उनके हर आने जाने की खबर रखने वालो में से एक और ने बोला "बीच में वो फलाने सड़क से भी गुजरती है , कितना सन्नाटा रहता है वहा देखा है ।"

                                                               अब तक शरीफ शर्मा जी माहौल अच्छे से समझ चुके थे और लौंडे क्या है वो भी भांप चुके थे । शर्मा जी शुरू हुए " क्या बात कर रहा है वो सड़क वो तो बड़ी खतरनाक है लड़कियों के लिए , उस सड़क पर तो कितने कांड हुए है लेकिन आज तक कोई नहीं पकड़ा गया , लाइट उसपे एक दम कम रहती है किसी का चेहरा भी नजर नहीं आता , इसलिए कभी कोई बता ही नहीं सका की कौन और कितने लोग थे । आदमी जो चाहे कर ले , झाड़िया देखि है कितनी बड़ी है । कितनी बार तो लडकिया कुछ कहती ही नहीं है , अब सोचो कौन सी शरीफ घर की लड़की ज़माने को आ कर बतायेगी की उसके साथ क्या क्या हुआ । सब चुपा जाती है , और करने वालो का कुछ नहीं होता । बताओ जोशी जी की लड़की उस रास्ते से आती है । कल तो शनिच्चर है ना कल तो सड़क के बाहर भी सन्नाटा ही रहता है ।" महफ़िल ख़त्म हुई ।

                                                           शनिच्चर रात देर हो गई जोशी जी की लड़की घर नहीं पहुंची जोशी जी चिंता कर रहे थे तभी थाने का हवलदार जोशी जी के घर आया । शर्मा जी की आँखे वही गड़ी थी पुलिस देखते लप्प से जोशी जी के यहाँ दौड़े ।
 " क्या हुआ जोशी जी , पुलिस काहे आई है " जोशी जी के होश उड़ गये थे उनकी पत्नी रोना शुरू कर दी थी ।
 " क्या हुआ भाई बताओगे "
" अरे शर्मा जी बिटिया के साथ कोनो कुछ किये है ई हवलदार अस्पताल बुलाने आया है "
" का कह रहे है हिम्मत रखे चलिये आप के साथ हम भी अस्पताल चलते है "
तब तक मोहल्ला जोशी जी के घर के बाहर इकठ्ठा हो गया था । मोहल्ले वाले को देख शर्मा जी और जोश में आ गये ऊँची आवाज में पूछा ।
" का हुआ है हवलदार बताओ का हुआ , कोई क्या किया है जोशी जी की लड़की के साथ । तुमको मालुम है लड़की घर की इज्जत होती है लड़की को कुछ हुआ तो परिवार कही मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहता । बताइये जोशी जी पर क्या बीतेगी । "
ये सब सुन मोहल्ले में और हलचल मच गई और खुसुर फुसुर शुरू हो गई ।
" देखिये शांति बनाये रखिये क्या हुआ है हमको नहीं पता हमको तो बस अस्पताल से दरोगा जी भेजे है जोशी जी को अस्पताल लियाने को । इससे ज्यादा हम कुछ नहीं जानते । जोशी जी चलिए , कह रहे थे की हालात ख़राब है । "

                                                                    जोशी जी उनकी पत्नी और शर्मा जी के साथ मोहल्ले के कुछ और लोग अस्पताल पहुंचे । देखा अस्पताल के एक बेंच पर जोशी जी की बिटिया एक महिला हवलदार के साथ बैठी थी हाथ में पट्टी बंधा था थोड़ा कपड़ा भी चुमुडियाया था और मुंह पर दू चार ठो खरोच लगा था । जोशी जी की बिटिया अम्मा बाउजी को देखते उनसे लिपट कर रोने लगी । जोशी जी और उनकी पत्नी बार बार पूछे जा रहे थे की क्या हुआ है पर उ रोना ही बंद नहीं कर रही थी । तभी सामने से पुलिस मोहल्ले को दो आवारो को पकड़ कर ले आ रही थी एक के सर में पट्टी बंधी थी और हाथ में पलस्तर और दूसरे की नाक फूली पड़ी थी और मुंह सूजा ।
" पापा आज हम ट्यूशन से आ रहे थे तो रास्ते में ई लोग हमको परेशान करने लगे हमको धक्का दे कर साईकिल से गिरा दिये । ई बबलुआ के तो नाक पर हम एक मुक्का मारे और ई चिंटुआ का तो हाथ ऐसा मरोड़े की टूट गया होगा । अंदर छग्गन चाचा का लड़का है उसके तो आँखि में दुन्नो उँगरिये ही घुसा दिये फुट गई होगी और एक ठो और था उसको हम पहचाने नहीं उसके तो दोनों पैर के बीच ऐसा घुटना मारे है कि अब जिंदगी में कोनो लड़की नहीं देखेगा । "
पुलिस ने कहा वो दोनों अंदर भर्ती है उनकी हालात कुछ ठीक नहीं है उनके घर भी संदेशा भेज दिया है । ई दुन्नो ठीक है थाने ले जा रहे है । जोशी जी थाने आ कर रपट लिखवा जाइये फिर इन सबको जेल भेजते है ।
जोशी जी और उनके पत्नी के जान में जान आई तभी लौंडो के परिवार वाले वहा आ गये और जोशी जी की मिन्नतें करने लगे । जोशी जी जवान लडके है गलती हो जाती है ,छोड़ दीजिये पुलिस में मत जाइये मोहल्ले की बात है जीतनी सजा मिलनी थी आप की बिटिया ने कूट कर दे दी आगे की जिम्मेदारी हम लेते है । हम भी कूट कर ठीक कर देंगे । किसी ने कहा की आप भी दो चार मार लीजिये पर थाने मत जाइये । तो किसी ने उनकी और बेटी की इज्जत की दुहाई दी , इनका तो जो हुआ वो हुवा आप की इज्जत ख़राब होगी । तो किसी ने कहा की मामला बढ़ेगा तो बिटिया का विवाह नहीं होगा । तभी इन सबके बीच शरीफ शर्मा जी बाहर आये और बोले आप सभी को शर्म आनी चाहिए ऐसा कहते , जोशी जी आप को जरूर पुलिस में जाना चाहिए और इन सब पर केस करना चाहिए । तभी सभी के होश ठिकाने आयेंगे और समाज सुरक्षित होगा आप को डरना नहीं चाहिए मैं आप के साथ हूँ चलिये , कोई आप के साथ हो या न हो । आप की बिटिया बड़ी बहादुर है ।   जोशी जी ने शर्मा जी को बहुत धन्यवाद दिया और मोहल्ले में शरीफ शर्मा जी अब बहादुर और हिम्मती  के रूप में भी पहचाने जाने लगे । जबकि ये कह शर्मा जी ने मन ही मन सोचा की चलो मैं इस कांड से बच गया जो किसी ने मेरा कैसे भी नाम लिया तो कह दूंगा मैंने ही पुलिस में जाने के लिए कहा तो मुझे बदनाम कर रहे है ।

                                                                              चारो लडके जेल चले गये , शर्मा जी अब भी शरीफ है , जोशी जी लेकिन अब भी परेशान है क्योकि कुछ महीनो बाद उन्हें सुनाई पड़ा की मोहल्ले में कुछ और ही खुसर फुसुर चल रही थी कि जोशी जी की बिटिया का कोई छेड़ छाड़ नहीं हुआ था वो तो लव ट्रायंगल का नतीजा था । जोशी जी की बिटिया दो दो के साथ चक्कर चला रही थी एक दिन सब आपस में भीड़ गये । जोशी जी की तो बिटिया का चरित्तर ही खराब है । आवारा लडके जेल में है लेकिन शरीफ शर्मा जी अब भी मोहल्ले में ऐस से थे अपनी मंडली  साथ बिलकुल शरीफ बने हुए । 

September 27, 2016

आम नेता की किस्मे





रिपोर्टर :-  आज हम आप को मिलवाते है एक ऐसे व्यक्ति से जो आमो की नई नई किस्मे  बनाने के लिए मशहूर है , आज उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नाम का एक नये किस्म को बनाया है । हा जी तो बताइये इस आम का स्वाद कैसा है । 
आम विशेषज्ञ :- यह एक बहुत खास तरह का आम है , इस आम की रंगत को देखिये वही आप को सबसे खास दिखेगी ये दो रंगों में रंग हुआ है ऊपर का हिस्सा आप को हरा दिखेगा और निचे का आप देख सकते है ये पिला है और इसकी खुशबू का तो कहना ही क्या, पका हुआ क्या कच्चा भी होगा तो दूर तक इसकी खुशबू जाएगी -------
रिपोर्टर बीच में टोकते हुए :- जी अच्छी बात है इस आम का स्वाद कैसा है । 
आम विशेषज्ञ :- जी हा जी है वही बता रहा हु अब जरा इस आम के आकार को देखिये , लंगड़े की तरह नोकीला दशहरी की तरह लंबा -----
रिपोर्टर :- जी जी ठीक है ठीक है  इसका स्वाद -----
आम विशेषज्ञ :- और आप को एक सबसे खास बात बताऊ की इसका छिलका देखिये इतना पतला और अंदर बिना रेशे वाला गुदा , मतलब आदमी देखते ही खरीदने के लिए आतुर हो जायेगा । 
रिपोर्टर:- जी देखिये हमारे पास समय कम है तो ये बताइये इसका स्वाद कैसा है । 
आम विशेषज्ञ :-  जी वो को कोई खास नहीं है । 
 रिपोर्टर:- क्या मतलब । 
 आम विशेषज्ञ :- अब आप को क्या लगा इसका नाम मोदी क्यों रखा है । 
 हडबडाया रिपोर्टर:-जी जी समझ गया तो आप ने देखा लिया मोदी आम अब दर्शको से विदा ले.---------  एक मिनट ठहरिये । मैं दर्शको को दिखाना चाहता हूँ एक बहुत है खास आम मुझे यहा मेज पर रखा दिख रहा है । रिपोर्टर आम विशेषज्ञ को किनारे हटाते हुए आगे बढ़ जाता है । ये देखिये ये एक खास आम यहाँ रखा है इसकी खुशबू ही इतने तेज है की मैं तो खीचा चला आया इसके पास इसकी रंगत तो देखिये हल्का पीलापन लिए कितना सुन्दर आम है तो मैंने आज तक नहीं देखा , बिलकुल लाजवाब आम दिख रहा है ये , मैं  कहता हु की ये आम बाजार में आया तो तहलका मच जायेगा ।  ये कहते हुए उसने आम को हाथ में उठा लिया । 
तभी आम विशेषज्ञ लपक कर उससे आम लेकर मेज पर रख देता है । 
रिपोर्टर :- इस खास आम को आप ने कहा छुपा रखा था और इसको आप ने क्या नाम दिया है । 
आम विशेषज्ञ :- जी ये ऐसा ही आम मैंने बनाया है की मिडिया वाले और लोग देखते है खुद बा खुद इसकी तारीफ करने लग जायेंगे । ये उन लोगो के लिए है जो दुनिया को दिखाना चाहते है की उनके घर में भी अच्छी किस्म का आम है , इसे मैंने राहुल नाम दिया है । 
रिपोर्टर :- लेकिन एक बात बताइये जब मैंने इसे उठाया तो ये काफी हल्का था । ये इतना हल्का क्यों है । 
आम विषयज्ञ :- क्योकि ये सिर्फ दिखाने के लिए है खाने के लिए नहीं , ये प्लास्टिक का है , इसे मैंने रंग कर आम की खुशबू का सेंट डाला है । 
सकपकाया सा रिपोर्टर बात संभालने की कोशिश करने लगा । अच्छा ये बताइये आप ने देश के बड़े बड़े नेताओ के नाम कर आम की किस्मे ईजाद की है , एक और नेता आज कल देश में बहुत प्रसिद्द है । केजरीवाल जी उनके नाम का कोई आम ईजाद नहीं किया है , क्या बाद में करेंगे । 
आम विशेषज्ञ ने मुंह बिचकाते हुए कहा भाई साहब मैं आम की किस्मे बनाता हु "रायते" का नहीं ;)  



नोट :- तकनीकि  समस्या के कारण किसी और के ब्लॉग और स्वयं के ब्लॉग पर भी टिपण्णी नहीं कर पा रही हूँ । इन दो सालो में तकनीक में कुछ फेर बदल हुआ है , क्या गूगल प्लस आदि पर भी अकाउंट बनाना होगा । 

August 28, 2012

आखिर प्रधानमंत्री ने जवाब दिया की इतना सन्नाटा क्यों है भाई ! - - - - - mangopeople


कई दसको  से पूछा जा रहा  इस सवाल का जवाब ठीक से नहीं मिल पाया था कि "इतना सन्नाटा क्यों है भाई ! अब इस सवाल का जवाब ठीक तरीके से और संतुष्टि के लायक दिया है प्रधान मंत्री ने कि
हजार जवाबो से बेहतर है मेरी ख़ामोशी,
न जाने कितने सवालो की आबरू रखी है |
सोचिये कि यही सब एक आम आदमी को कही और भी सुनने को मिल जाये तो क्या होगा
  , आम आदमी सुबह उठता है और देखता है फोन का नेटवर्क गायब है , ना फोन आ रहा है ना जा रहा है बस नम्बर डायल करते ही पैसा कट रहा है  , वो घबडा कर कस्टमर केयर को फोन करता है दना दन सवालो की झड़ी लगा देता है और उधर से मिलती है ख़ामोशी और वो कहता है इतना सन्नाटा क्यों है भाई , जवाब मिलता है की
हजार जवाबो से बेहतर है मेरी ख़ामोशी
न जाने कितने सवालो की आबरू रखी है |
"भाई इसका क्या मतलब है , मै आप का ग्राहक हूं आप मेरे प्रति जवाब देह है आप को जवाब देना होगा | "
" सर इसका मतलब है की हम यहाँ आप की सेवा के लिए नहीं पैसे कमाने के लिए बैठे है , आप जैसे टुच्ची ग्राहक कोई रिंग टोन नहीं लेते, कालर टियून नहीं लगाते, कोई गेम नहीं खेलते , नेट का प्रयोग नहीं करते है , बस खालिस फोन सुनना और घडी देख कर फोन करना , क्या आप जैसे ग्राहकों से हमारी हजारो करोड़ की कम्पनी चलेगी , दो चार रूपये कट क्या गये फ्री में मिल रही कस्टमर सेवा का नाजायज प्रयोग करने चले आये , दिन में दस बारह मिनट बात करेंगे और नेटवर्क हर दम फुल चाहिए, ये कंपनी आप जैसो को फोन सेवा देने के लिए नहीं खोली गई है और ना ही आप के दम पर चलती है , आप को ये भी बता दे की जल्द ही हमारी हर सेवा का दाम बढ़ने वाले है क्योकि कंपनी को बहुत घाटा हुआ है , पहले नेताओ को खिला पिला कर कम दाम में  3G में आप को बीजी रखा था लेकिन वो पैसा डूब गया अब फिर से कंपनी को बोली लगानी होगी , जो खिलाने पिलाने में कंपनी का पैसा डूब गया उसकी भरपाई कौन करेगा , तो तैयार रहिये  |
  आम आदमी परेशान ये क्या हो रहा है " अरे लगाता है गलत नंबर लगा दिया क्या  "
जवाब मिलता है नहीं सर,  मैंने तो पहले ही कहा था की मेरी ख़ामोशी बेहतर है आप के सवालो पर चुप रह कर मैंने सवालो के साथ आप की भी आबरू बचाई थी किन्तु आप समझे नहीं , तो भुगतिये |
बेचारा आम आदमी घबरा कर फोन रख देता है |
सोचता है नहा धो कर आफिस चला जाये लेकिन ये क्या नल में सन्नाटा छाया है पानी नहीं है , परेशान हो कर जल बोर्ड को फोन लगाता है " ये नलो में इतना सन्नाटा क्यों छाया है भाई"  , जवाब में उसे भी सन्नाटा और ख़ामोशी ही मिलती है | " कोई है कोई जवाब देगा मुझे " और जवाब मिलता है कि
हजार जवाबो से बेहतर है मेरी ख़ामोशी
न जाने कितने सवालो की आबरू रखी है |
वो परेशान ये क्या हो रहा है जिससे भी सवाल करो वो कोई जवाब ही नहीं देता है और ये शेर बक देता है किसी की कोई जवाब देहि है की नहीं | वो फिर से निवेदन करता है"  भाई साहब क्या बताएँगे की नलों में पानी क्यों नहीं आ रहा है और यदि आयेगा तो कब आयेगा |"
" तो आप को जवाब चाहिए तो सुनिये जनाब की सुबह ५ बजे १० मिनट के लिए पानी आया था आप ने नहीं भरा तो ये आप की गलती है | पानी का संकट चल रहा है बचा पानी वी आई पी इलाको के लिए है आप जैसे टुच्ची से आम लोगों के लिए नहीं | वो वी आई पी देश की धरोहर है उनके जाने से देश को काफी नुकशान होता है उनके ना नहाने से देश की इज्जत को कितना बट्टा लगेगा आप को पता है , उनके खाली स्वीमिंग पुल और सूखे बगीचे देश की नाक नीची कर देंगे और आप ठहरे आम आदमी यहाँ हम लोग आप की सेवा के लिए नहीं बल्कि इस लिए बैठे है की पानी को बड़े लोगों के इलाको में ठीक से बचा कर सप्लाई किया जा सके कुछ बचा गया तो आप लोगों को भी दे दिया जायेगा , और जरा अन्ना के इस सोच से बाहर आइये की आप मालिक है और हम सब आप के नौकर ...................|
इसके पहले की उधर से कुछ और कहा जाता उसने फोन रख दिया |
किसी तरह तैयार हुए तो देखा की रात की गई बिजली अभी तक नहीं आई है , गर्मी से बेहाल हो कर बाहर निकले तो पता चला की पूरी कालोनी में ही बिजली गायब है , तो टहलते हुए बगल के ही बिजली विभाग के आफिस चले गये  "भाई क्या इरादा है आज बिजली देनी है की नहीं "
" जी जब आना होगा तो आ जायेगी "
" ये क्या जवाब हुआ भला " लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं मिला सन्नाटा पसरा रहा | "कम से कम इतना तो बता दीजिये की कोई बड़ी परेशान तो नहीं है " तो  फिर से वही शेर दुहराया गया
हजार जवाबो से बेहतर है मेरी ख़ामोशी
न जाने कितने सवालो की आबरू रखी है |
" हे प्रभु यहाँ भी जवाब के बदले ये शेर कोई जवाब नहीं मिलेगा क्या  "
" तो आप को जवाब चाहिए तो सुनिये की बिजली का उत्पादन बहुत कम है सो राज्य को बिजली बहुत कम मिल रही है जो मिल रही है वो मंत्री नेताओ और वी आई पी  इलाको के लिए है उस पर से आप के राज्य में चुनाव हो चुके है नये चुनाव होने में अभी तीन साल बाकि है जबकि दूसरे चार राज्यों में कुछ ही महीनो बाद चुनाव होने है , कुछ वो राज्य है जिनके सरकारों के सहारे केंद्र की सरकार टिकी है,  सरकार के हिसाब से वहा पर लोगो को आप से ज्यादा बिजली की जरुरत है उन्हें वोट देना है और आप पहले ही अपने वोट दे कर अपने हाथ कटा  चुके है आप के पास सरकार को बिजली के बदले देने के लिए कुछ भी नहीं बचा है इसलिए जरा ठंड रखिये और गर्मी के मजे चार महीने और लीजिये और आम आदमी है और आम आदमी ही बन कर रहिये काहे वी आई पी बनने की चेष्टा करते है और ऐसे मुँह उठाये चले आते है जैसे की हम आप की सेवा के लिए ही बैठे है | "
आम आदमी परेशान कुछ तो गड़बड़ है कुछ है जो उसे नहीं पता चल रहा है , सोचा बाहर निकले तो कुछ पता चले बाहर आ कर देखा तो विधायक जी अपने चेले चपाटो के साथ मोहल्ले के दौरे पर निकले है , पता चला की अभी अभी हत्या , अपहरण फिरौती के केस में बरी हुए है , असल में दो गवाह थे और दोनों ही गवाहों की एक मामूली सी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई सो बच गये | आम आदमी को अच्छा मौका मिला वो फट विधायक से पास गया और फुल माला से लदे सभी को देख हाथ जोड़े उनका अभिवादन कर रहे विधायक जी रुक गये , उनके रुकते ही आम आदमी ने बिजली पानी सड़क सब चीजो का रोना शुरू कर दिया , लेकिन ये क्या विधायक जी कोई जवाब ही नहीं दे रहे है यहाँ भी सन्नाटा आम आदमी ने फिर निवेदन किया तो फिर से वही शेर हाजिर था |
हजार जवाबो से बेहतर है मेरी ख़ामोशी
न जाने कितने सवालो की आबरू रखी है |
ये सुनते ही आम आदमी का दिमाग सटक गया वो झल्लाया और  सीधे उनके सामने ही खड़ा हो गया " विधायक जी मैंने आप को वोट दिया है अब आप हमें जवाब दीजिये "
" अच्छा तो तुमको जवाब चाहिए तो सुनो आप की आधी अवैध कालोनी को मैंने बड़ी उम्मीद से क़ानूनी जामा पहनाया था की वोट की खेती होगी किन्तु आप लोगों में से आधो ने वोट नहीं डाला और बाकियों ने किसे दिया पता ही नहीं चला यदि इतनी मेहनत मैंने बगल के फलाने समुदाय वालो और जाति वालो की कालोनी को वैध करने में की होती वो पुरा वोट बैंक बना गया होता , आप कोई वोट बैंक है आप की औकात एक या दो वोट से ज्यादा की नहीं है और हम से जवाब मंगाते है , शुक्र मनाईये ही रहने को छत है ना तो वो भी नहीं होती जो मिल गया उसी का संतोष कीजिये ज्यादा की उम्मीद कर ज्यादा महत्वाकांक्षी ना बनिये , वैसे भी आज कल आम आदमी की कमाई ज्यादा हो गई है उसको पैसे की क्या कमी है पानी बाजार से खरीदिये और घरो में इनवर्टर लगाइये और हर बात में हमसे जवाब मांगना बंद कर दीजिये वोटर है और वही बन कर रहिये , वो आप लोग ही है जिनकी वजह से मेरे गरीब वोटरों को महंगाई का भर सहना पड़ रहा है आप ज्यादा कमा और खा रहे है जिससे खाने की कमी हो गई है और महंगाई बढ़ रही है   |
आम आदमी को लगा की विघायक जी ने तो आज नहाने की कसर सबके सामने पानी डाल कर पूरी कर दी , अब उसे सबके कहे जा रहे शेर सवाल जवाब , ख़ामोशी , आबरू का मतलब कुछ कुछ समझ आने लगा था |
घबराये और कुछ डरे हुए आम आदमी आफिस पहुंचता है वहा भी सन्नाटा छाया है , घुसते ही पता चलता है की इस साल भी  उसकी प्रमोशन नहीं हुई उलटे वेतन बढ़ोतरी भी उम्मीद के मुताबिक नहीं है | सारे मिल कर बात करते है और तय किया जाता है की चल कर बॉस से सीधी बात की जाये , साल भर इतनी मेहनत की गई है पसीने बहाए गये है उसका कुछ तो फल मिलना चाहिए ना और सभी का प्रतिनिधि बना कर उसेको ही बॉस के केबन में ढकेल दिया जाता है | पसीने से तर बतर वो सवाल करता है सर ये क्या इस बार भी प्रमोशन मेरे हिस्से नहीं आया उस पर से सारे टार्गेट पुरा करने के बाद भी वेतन में इतनी कम वृद्धि | जवाब के इंतजार में खड़ा उसको मिलती है ख़ामोशी , सर कुछ तो बोलिये |
हजार जवाबो से बेहतर है मेरी ख़ामोशी
न जाने कितने सवालो की आबरू रखी है , बॉस का जवाब |
अब वो सुबह से ये सुन सुन कर पक चूका है तय किया की इस बार तो जवाब ले कर ही रहूँगा , सर ऐसे नहीं चलेगा कुछ तो बताना होगा |
" तो सुनो की टार्गेट पुरा कराने के लिए दो चार अच्छी अच्छी बाते मोटिवेशन के लिए कहा दिया कि तुम लोग तो कंपनी के असली ताकत हो , कंपनी तुम लोगो से चलती है आदि आदि लगता है  तुम लोगो ने उसे कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया  | तुमको क्या लगता है की ये कंपनी तुम्हारे बल पर तुम्हारे काम से चल रही है तो ये गलतफहमी दिमाग से निकाल दो , तुम्हारे जैसे हजारो अपनी प्रतिभा फईलो में लिए बाहर लाइन लगा कर खड़े है, तुमसे आधे में नौकरी पर आ जायेंगे और गधो की तरह बिना कुछ पूछे काम करेंगे , लाख करोड़ कंपनी में तुम बस चवन्नी भर हो जो चलना बंद भी हो जाये तो किसी को कोई फर्क भी नहीं पड़ेगा | कहते हो की मेहनत किया है उसका फल चाहिए तो जो हर महीने वेतन घर ले जाते हो वो क्या है, ये सरकारी आफिस नहीं है ,  यहाँ हराम की खाने आये हो क्या , जीतनी मेहनत की है उतना हर महीने तुमको मिल जाता है , अब क्या इस टुच्ची सी मेहनत के लिए कंपनी के शेयर तुम्हारे नाम लिखा दिया जाये , और चले आये नेता गिरी करने ज्यादा चू चपेड करोगे तो कंपनी ही यहाँ बंद कर कही और शिफ्ट कर दी जाएगी , फिर करते रहना ये यूनियन गिरी ,  जो मिल रहा है उससे भी हाथ धो दोगे |
केबन के साथ ही  उसके दिमाग में भी सन्नाटा छा जाता है और अपनी आबरू गवा के केबन से बाहर आ जाता है |
शाम थके हारे घर में आता है सर दर्द से फटा जा रहा है  , एक तरफ बैग फेका दूसरी तरफ जूता कपडे निकाल पर बिस्तर पर फेका और सोफे पर धस गए " एक कप चाय मिलेगी " कोई जवाब नहीं मिलता है और ना ही चाय " वो दुबारा आवाज लगाता है " ये घर कितना फैला रखा है ,  कब से एक कप चाय मांग रहा हूं कोई जवाब क्यों नहीं दे रही हो " एक बार फिर सन्नाटा ! तभी पत्नी जी अवतरित होती है उनकी बड़ी हो रही आखे देख कर ही इस सन्नाटे से वो डर जाता है दिल जोर जोर से धड़कने लगता है उसे सामने आ रह तूफान साफ दिख जाता है | " क्या कहा तुम्हे जवाब चाहिए " वो दोनों हाथ जोड़ कर घुटनों के बल पर जमीन में गिर जाता है और गिडगिडाने लगता है " नहीं नहीं मुझे कोई जवाब नहीं चाहिए , मैंने तो कोई सवाल किया ही नहीं फिर जवाब किस बात का , मेरे नादानी में किये गये सवालो को चूल्हे में डालो , मेरी बची खुची आबरू की रक्षा करो जो आज कई बार लुट चुकि है " |
" नहीं नहीं आज मै खामोश नहीं रहूंगी और सब जवाब दुँगी , मुझे समझ क्या रखा है तुम्हारे बाप की नौकरानी हूं , बैग यहाँ फेका जूते कपडे वहा फेके और मुझी से पूछते हो की घर क्यों फैला रखा है , मेरे लिए  कौन सा सोने का पालना डाल रखा है या नौकरों की फौज खड़ा कर रखा है, सारे दिन खटती रहती हूं तब भी ये तुम्हारा ये दो कमरों का महल ढंग का नहीं दिखता है , और आते ही लाट सहाबी झाड़ने लगते हो    टुच्ची से आप आदमी इतना कम कमाते हो की सारा जीवन एक एक पैसे की जुगत लगाते हिसाब किताब करते बीत रहा है , सारे अरमान मेरे एक एक कर दम तोड़ रहे है , और लाट साहब को चाय चाहिए , कभी पूछा है की दूध और चाय का भाव क्या चल रहा है गैस की कीमते कितनी बढ़ती जा रही है, बच्चो कि फ़ीस कैसे दे रही हूं महीने का राशन कैसे पुरा हो पा रहा है  | अरे सारी जिंदगी तुम्हारी और तुम्हारे बाप की आबरू ही बचाती रही खामोश रह कर कम बोल कर , उन्हें सादा ही गऊ कहा, हमेसा कहा की तुम्हारे गऊ जैसे पिता ने मेरे बाप से लाखो का दहेज़ लिया और शादी के पहले तुम्हारे बारे में इतनी ढींगे हांकी की मै विवाह के लिए राजी हो गई और बदले में तुम्हे और ये दो कमरों का महल हमारे लिए छोड़ गये ,  गऊ का मतलब जानते हो ग से गदहा और ऊ से उल्लू गधे और उल्लू के कम्बीनेशन को कहते है गऊ लेकिन साफ साफ कभी नहीं कहा ! अरे ये तो मेरे संस्कार थे की कभी तुम्हे सार्वजनिक रूप से अबे गधे नहीं कहा हमेसा उसे छोटा कर ए जी कह कर बुलाती रही |  टुच्ची से आम आदमी मुझसे सवाल करते हो , मुझे आँखे दिखाते हो धमकी देते हो , शोर शराबा करते हो , मुझसे जवाब चाहिए तुम्हे , तुम्हारा तो बोलना ही बंद कर देती हूं , देख रही हूं आज कल कभी चेहरा की किताब पर बोलते हो तो कभी चिडियों की तरह चहकते हो , जरुरत से ज्यादा बोल रहे हो , तुम्हारी तो मै बोलती ही बंद कर देती हूं  "|

                                                  बेचारा आम आदमी घर में जो बची खुची आबरू थी वो भी अब नहीं बची थी , " सरकार हाथ जोड़ता हूं अब कोई सवाल नहीं करूँगा अब मै समझा गया हूं की एक आम आदमी के लिए ख़ामोशी में ही उसकी इज्जत है उसे कभी किसी से सवाल नहीं करना चाहिए , देश में किसी की कोई जवाबदेही नहीं बनती है इस आम आदमी के प्रति और इस आम आदमी को कोई जवाब चाहिए भी नहीं ,क्योकि जवाब सुन कर भी वो कर कुछ नहीं सकता है बस उसे यही लगेगा की उसकी संपत्ति लुटा जा रहा है और उसे पता ही नहीं है और सही भी है पता चल भी गया तो वो कर ही क्या लेगा ,  अच्छा है की उसे पता ही ना चले की उसकी  इज्जत और जरुरत किसी को है ही नहीं , ख़ामोशी में ही वो अपनी गलत फहमी में जीता है , अपने आप को देश का नागरिक समझता है जबकि असल में तो वो मात्र एक वोट है जिसे हर ५ साल बाद कोई भी अपने तिकड़म से जोड़ घटाने से ले लेता है और उसे लूटने में लगा होता है | ५ साल तक ना वो कुछ बोल सकता है ना सवाल कर सकता है ,  अब अच्छे से समझा में आ गया की
हजार जवाबो से बेहतर है ये ख़ामोशी
इसी में देश और आम आदमी की आबरू रखी है |

आज चार दसक बाद  जवाब मिल गया कि  इतना सन्नाटा क्यों है भाई !


चलते चलते

 " ये कपडे प्रेस कर दो " आम आदमी आयरन करने का काम करने वाले से |
" साहब दो कपड़ो के २० रु लगेंगे " प्रेस करने का काम करने वाला |
" अरे कपडे प्रेस करने को कहा है धोने के लिए नहीं "
" साहब प्रेस का ही दाम बता रहा हूं "
" अरे इतना महंगा "
"साहब बिजली कितने महँगी हो गई है आप को पता है "
" लेकिन बिजली महँगी कैसे हो गई सरकार तो कोयला लगभग मुफ्त में दे रही है "
" ये तो सरकार से पूछिये हम को तो कुछ भी सस्ते में नहीं मिल रहा है उलटे साल दर  साल बिजली के दाम बढ़ते ही जा रहे है "
बेचारे परेशान सोचा आगे कोयले से आयरन करने का काम करता है उससे पूछता हूँ |
" साहब २० रुपये लगेंगे "
" अरे भैया कोयले से भी इतना महंगा "
" साहब हमें थोड़े कोयले की खदान मुफ्त में मिली है हमें तो बाजार भाव से ही खरीदना पड़ता है कोयला , उनके पास जाइये जिन्हें कम दाम में खदाने मिली है "




July 15, 2011

इन हमलो में बेचारे मंत्री पुलिस का क्या दोष है - - - - -- - mangopeople

                                                           देखीये ये जीवन क्या है बस एक छड भंगुर है हर किसी को एक दिन इस दुनिया से जाना है कोई आज जायेगा, कोई कल जायेगा किन्तु याद रखियेगा की हम सभी की आत्मा नहीं मरती है, मरता है तो ये शरीर आत्मा तो जीवित रहती है और जल्द ही किसी और शरीर में प्रवेश कर जाती है किसी और बम ब्लास्ट में मरने के लिए किसी और आतंकवादी हमले में किसी रेल दुर्घटना में मरने के लिए, उसके जाना का दुख नहीं करना चहिए |  जो लोग मुंबई में हुए विस्फोटो में घायल हुए है तो लोगों को उनके लिए दुखी होने की जरुरत नहीं है क्योकि ये आतंकवादियों के कृत्य नहीं है असल में तो ये उनके ही पूर्व जन्मो के और इस जन्म के कर्मो का नतीजा है उनके बुरे कर्मो का फल है जिसको उन्हें भोगना ही पड़ेगा आतंकवादी तो बस उसे पुरा करने में हमारी मदद करते है वो तो बस निमित्य मात्र है साधन है हमारे कर्मो का फल हमें देने में | अब इन सबके बीच बेचारे हमारे मंत्री गण हमारी सुरक्षा एजेंसिया क्या कर सकती है आखिर वो ऊपर वाले के काम में दखलंदाजी क्यों करे | अब कुछ लोग केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल और महाराष्ट्र के गृह मंत्री भुजबल से पूछ रहे है की- - - --- -- क्या कहा मैंने गलत नाम लिखे है अच्छा तो ठीक है आप को यदि लगता है की सही नाम या कुछ और नाम लिखने से देश की आतंरिक सुरक्षा व्यवस्था सुधर जाएगी देश सुरक्षित हो जायेगा तो मुझे वो नाम बता दीजिये मै उसे वहा लिख दुँगी - - - -  की २६/११ के बाद जो करोडो के अत्याधुनिक हथियार ख़रीदे गये बख्तर बंद गाड़िया खरीदी गई उसक क्या फायदा है वो क्या काम आये अब कोई इन मूर्खो से पूछे की भाई इसमे मंत्री क्या कर सकता है इस बार जब आतंकवादियों ने बिना बताये अपना पैटर्न बदल दिया वो वापस से अपने पुराने तरीके पे आ गये, तो बेचारे मंत्री क्या कर सकते है उन्होंने तो ये सोच कर बख्तर बंद गाड़ी ली थी की २६ /११ की तरह फिर से दस बारह आतंकवादी देश में घुस जायेंगे ( देश के  युवराज  ने कहा है की हम १००% सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते है एक दो घटनाये तो हो ही सकती है सो आतंकवादी इतनी बार घुसपैठ करते है एक दो बार घुस कर हमला तो कर ही सकते है इतनी छुट तो हमारे भविष्य के प्रधान मंत्री भी आतंकवादियों को देते है )  तो हमारे पुलिस वाले कम से कम सुरक्षित हो,  बख्तर बंद गाडियों के अंदर से वो आतंकवादियों से आसानी से लड़ सकते है अपना मुँह छुपा सकते है, और रही अत्याधुनिक हथियारों की बात तो उसी से तो उन्हें मारते पर कम्बख्त आये ही नहीं पिछले हमले की तरह ,ये भी कोई बात हुई एक बार में आतंकवादी कुछ तय नहीं कर रहे है की उन्हें हम पर कैसे हमला करना है वो एक तरह से हमला करते है हम उस तरीके से लड़ने के सारे इंतजाम करते है वो दूसरे तरीके से हमला कर देते है अब इसमे बेचारे हमारे मंत्री सुरक्षा एजेंसियों का क्या दोष है | वैसे कुछ शक उन्हें पहले से था की इस बार आतंकवादी सामने से हमला नहीं करने वाले है इसलिए सारे हथियार बेकार जाने वाले है सो उन हथियारों को पहले से ही बेकार कराने के लिए सभी आधुनिक हथियार सीलन वाली जगहों पर ख़राब होने के लिए सुरक्षित रख दिये गये थे  और वो इतनी कड़ी सुरक्षा में थी की उनके ख़राब होने की खबर देने वाले पत्रकार  को भी  नहीं बख्सा गया उसे ना केवल पकड़ कर जेल में बंद कर दिया गया बल्कि कई धाराओ में सुरक्षा भंग करने के लिए मुकदमे भी दायर  कर दिये गये |
                                               पर लोगों को कुछ भी समझ नहीं आता है लोग बेकार में मंत्रियो को पुलिस वालो को बुरा भला कहने से बाज नहीं आते है लोग कहते है की सुरक्षा के लिए कुछ भी नहीं किया जा रहा है लोग मर रहे है | अब बताइये जब संसद पर हमला हुआ था तो कैसे सारे संसद की किले की तरह सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई थी रातो रात करोडो के सुरक्षा उपकरण बाकायदा योजना बना कर ख़रीदे गये और वही उपकरण ख़रीदे गये जिससे सच में सांसद की कुछ सुरक्षा हो सके | बताइये उसके बाद हुआ संसद पर हमला उसके बाद हुआ किसी नेता मंत्री पर आतंकवादी हमला राजीव जी के बाद आज तक मरा कोई बड़ा ढंग का नेता आतंकवादी हमले में नहीं ना फिर भी लोग कहते है की इन्हें किसी के जान की परवाह नहीं है,  देखीये कितनी है मंत्री नेता सांसद के जान की परवाह क्या उनकी परवाह करना उनकी सुरक्षा के लिए कुछ करना कुछ नहीं होता है |
                                          लोग कहते है की सुरक्षा एजेंसियों के पास अंदर की ख़ुफ़िया खबर नहीं होती लीजिये अभी ज्यादा दिन नहीं हुए है जब सभी जगह शोर हुआ था की वित्त मंत्री की जासूसी हो रही थी उसके पहले राडिया, टाटा, बरखा की जासूसी हुई यहाँ तो अमर सिंह जैसे टुच्ची नेता तक की जासूसी की जाती है और लोग इल्जाम लगते है की हमारी सुरक्षा एजेंसियों के पास ख़ुफ़िया खबर नहीं होती | लोग कहते है की हमारे पुलिस को कुछ खबर ही नहीं होती हमले हो जाते है और वो कुछ नहीं कर पाती | देश के किसी भी कोने के पुलिस स्टेशन में चले जाइये इलाके के एक एक अपराध के बारे में उन्हें पहले से पता होता है पुलिस वालो की धाक तो इतनी है की खुद अपराधी आ कर बताता है की उसने कहा कौन सा अपराध किया है और उसके हाथ कितना पैस लगा है अरे उसी हिसाब से तो हफ्ता बनता है सभी पुलिस वालों का |
                               लोगों के पास कुछ काम नहीं है इल्जाम लगाने के सिवा उन्हें पता नहीं है किसी देश को चलाना किसी बच्चे का काम नहीं है हमें हर जगह संतुलन बना कर रखना पड़ता है | अब मुंबई में भीड़ कितनी बढ़ गई है यदि सरकारे किसी से बोलेंगे की भाई यहाँ मत आओ तो कोई भी उनकी बात सुनने वाला नहीं है तो दो उपाय है एक तो इस जगह पर हमलो की खुद छुट दो एक तो यहाँ की कुछ भीड़ कम ( चुपचाप रहिये इस भीड़ को लोग जनता आदि कहने की भूल मत करीये ) होगी दुसरे ये जगह इतनी असुरक्षित हो जाएगी की लोग खुद बा खुद यहाँ आने से डरने लगेंगे | पर ये सब बाते भीड़ तो समझती नहीं है ये सब काम देश के हित के लिए जनसंख्या के नियंत्रण के लिए करना पड़ता है कभी बाढ़ के नाम पर तो कभी आतंकवादी हमलो के नाम पर ये नियंत्रण का काम होते रहना चाहिए संतुलन बनाने के लिए जरुरी है |
                                        फिर हर एक दो साल में एक बम ब्लास्ट होना या कोई आतंकवादी हमला मुंबई की सुरक्षा के लिए भी जरुरी है और यहाँ के सुरक्षा में लगे लोगों के लिए भी |  अब देखीये साल दो साल के लिए मुंबई पूरी तरह सुरक्षित है क्योकि एक बार बम ब्लास्ट हो जाते है तो दूसरे को होने में इतना ही समय लगता है इस बीच सभी लोग बिकुल सुरक्षित हो कर रहते है साथ ही सुरक्षा एजेंसियों को भी आराम की नीद आती है की चलो अब कुछ दिन आतंकवादी हमला नहीं होगा नहीं तो साल दो साल होते ही सभी की नीद ख़राब हुई रहती है की कब कहा कोई हमला हो जाये | एक बार जब हमला हो जाये तो चलो शांति क्योकि आतंकवादियों को दूसरी आतंकवादी टीम बनने नई जगह की खोज करने और बम बनाने में इतना ही समय लगता है तब तक तो सभी सुरक्षित ही रहते है |
                                      इसलिए कम अक्ल वाली भीड़ हर बात के लिए मंत्री संत्री  नेता परेता और पुलिस वालो को दोष ना दिया करे कुछ अपनी भी अक्ल लगाये और एक आतंकवादी हमले की उपयोगिता को समझे |



 चलते चलते

                       
आतंकवादी देश पर इतनी बार हमला करते है खासकर पाकिस्तान परस्त आतंकवादी इतनी बार हमला करते है पर वो कभी भी सीधे किसी नेता मंत्री आदि के ऊपर हमला क्यों नहीं करते है उन्हें मारने का प्रयास क्यों नहीं करते है   क्योकि उन्हें देश के लोगों को दुखी करना है उन्हें परेशान करना है उन्हें दहशत में डालना है उन्हें खुशिया मानने का मौका नहीं देना है | ये अच्छा काम कम्बख्त बस अपने यहाँ ही करते है |
      ( याद रखे की १३ दिसंबर को हुआ हमला संसद पर था किसी नेता मंत्री पर नहीं | वो हमला प्रतीकात्मक ज्यादा था नुकशान पहुचने के उद्देश्य से कम था तभी कोई नेता नहीं मरा और बाकि मंत्री नेता पर  आतंकवादी हमले होने के पहले ही पकडे जाने की कई खबरे हम सुनते है उनका असली सच सभी जानते है  )