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July 17, 2022

कोरोना ने भविष्य की टाइम लाइन ही बदल दी हैं |

सुपर हीरो फ्लैश को टाइम ट्रैवेल  की  शक्ति मिल जाती है |  पास्ट में जाकर कुछ बदलने के दुष्परिणामों को जानते हुए भी वो भावनाओं में बह पर पास्ट में जा कर उसके  बचपन में माँ की हुयी हत्या , जिसके झूठे आरोप में उसके पिता को आजीवन जेल मे गुजरना पड़ता हैं , को रोक देता हैं | 


जब वर्तमान में वापस आता हैं तो सबकुछ बदल चुका होता हैं | उसके माता पिता तो उसके साथ होते हैं लेकिन उसकी प्रेमिका उसी पहचानती तक नहीं | पहले के जीवन में पिता की तरह उसे पालने वाला भी उसे नहीं जानता और वो  एक शराबी का जीवन जी रहा होता हैं क्योंकि फ्लैस के पालने के दौरान ही वो बदला था पहले |  आस पास सब कुछ   बदल जाता हैं कुछ भी पास्ट बदलने के पहले जैसा अब नहीं रह जाता | 

कोरोना ना होता तो बिटिया  अपने हाउस  की स्पोर्ट्स कैप्टन होती | अपने हाउस में वो हमेशा से सबसे ज्यादा खेलों में भाग लेती और  मैडल जीतती थी तो उनका कैप्टन बनना तय था  |  पिछले साल और इस साल वो अपने मैडल की संख्या बढ़ा सकती थी लेकिन ये सब नहीं हो सका कोरोना के कारण | 

कोई बच्ची हाउस की तो कोई स्कूल की कैप्टन बनती तो   कोई क्लास का मॉनिटर बन कर ही अपनी लीडरशिप दिखाता | बहुत सारे बच्चे तो अपने पहले  मैडल से ही महरूम हैं पिछले दो सालों से | ना जाने कितने बच्चे खेलो में अपना कैरियर बना सकते थे , स्पोर्ट्स को पसंद करना शुरू कर सकते थे लेकिन वो सब बंद रहा कोरोना काल मे  | 


ना जाने कितने बच्चे अपने पहले स्कूल पिकनिक , स्कूल ट्रिप पर नहीं जा सके | कितनो का आत्मविश्वास बढ़ता हैं इससे , परिवार के बिना खुद को संभालना सीखते हैं | ना जाने कितने ही बच्चो की हॉबी ही डेवलप नहीं हो सकी | कोई डिबेट में भाग लेता तो कोई कला प्रतियोगिता में , कोई जुडो कराटे में जाता तो कोई योग जिम्नास्टिक में और कोई डांस करने मे | लेकिन ये सब कुछ ना हो रहा हैं स्कूल जाने के ना जाने कितने अदृश्य से फायदे होते हैं उन सब से दूर रहे सारे बच्चे | 


हमारी भांजी अद्रिका बोली फ्रेंड्सीप डे पर बैंड बांधने के लिए कोई फ्रेंड्स ही नहीं हैं उनके पास | अंदाजा भी हैं कि ना जाने कितने बच्चे  अपना पहला दोस्त ही नहीं बना सके कोरोना के कारण | कितने बच्चो के फ्रेंड उनके बेस्ट फ्रेंड नहीं बन सके हैं | दोस्तों के साथ की जाने वाली कितनी मस्तियों , शरारतों , हँसी मजाक के आभाव में जी रहें हैं बेचारे बच्चे | 

 बचपन स्कूल की सुखद यादे होती हैं और लाखो बच्चे ये यादे बना ही नहीं पाये| इस कोरोना ने भविष्य की टाइम लाइन बिलकुल बदल दी हैं | वास्तव में जैसा होना चाहिए अब हमारा भविष्य वैसा होगा नहीं | 





August 12, 2018

माँ बापगिरी के मुश्किल फंडे ------ mangopeople


एक मित्र  ने एक मुद्दा उठाया बच्चो को फोन देना चाहिए की नहीं | आखिर हम सब बिना मोबाईल फोन के ही पले  बढे है तो हमारे बच्चे वो कैसे नहीं कर सकते है | मेरा मानना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें एक समय बाद फोन देना ही चाहिए । आज बच्चे अकेले कई जगहों पर जाते है किसी मुसीबत मे फंस गये तो हमे 

कैसे फोन करेगे । खुद हमे उनसे बात करनी हुई उनकी चिंता हुई तो क्या करेगे । ज्यादा हुआ तो स्मार्ट फोन 
नहीं देगे फोन करने लायक साधारण फोन देगें ।

                                                                        हमारे और हमारे बच्चो के जीवन में जमीन आसमान का फर्क हैं | हम केवल स्कूल के लिए  निकलते और उसके बाद सीधा घर | बाकि जगह परिवार के साथ,  हमारा अपना कोई जीवन नहीं था | कहीं गए भी तो अँधेरा घर वापसी का सिग्नल होता | बिटिया का जीवन इससे कही ज्यादा अलग है |  सुबह छ बजे उन्हें बास्केटबॉल के सलेक्शन के लिए लेकर गई घर आ नाश्ता कर तुरंत पेंटिंग क्लास के लिए फिर वहां से आ कर फिर प्रोजेक्ट के सामान के लिए बाजार फिर वापस से पेंटिंग क्लास क्योकि अगले महीने परीक्षा है | कल बैडमिंटन का सलेक्शन था | रोज स्कूल भी छोड़ने जाना होता है गेम्स  के लिए | दोस्तों की बर्थडे पार्टी में रात नौ दस बजते है | शुक्र है अभी टियूशन नहीं लगाया वरना वहां तो रोज ही जाना होगा |  अभी छोटी है तो भाग रहीं हूँ लेकिन कब तक , एक दिन अकेले छोड़ना ही पड़ेगा इन सब भाग दौड़ के लिए फिर उनसे कनेक्ट रहने के लिए फोन देना ही होगा | बिजनेस शुरू किया तो उन्हें अकेले घर में छोड़ कई बार जाना हुआ | कुछ हुआ तो मुझे कैसे फोन करती लैंड लाइन का जमाना गया फोन तो देना ही पड़ा | दर्जन भर उनके स्कूल , क्लास, प्रोजेक्ट , गेम , स्कूल वैन के व्हाट्सप्प समूह है | पहले सब मै देखती थी  अब मैंने वो हैंडिल करना छोड़ दिया है | बिटिया का काम है देखे और अपना काम खुद करे |  ख़राब कोई आधुनिक चीज नहीं होती हम उनका प्रयोग गलत करते है  |
                                                        हमें बच्चो को चीजों का मिस यूज गलत प्रयोग न करने के लिए समझाना चाहिए | वो क्या कर रहे है उन पर नजर रखनी चाहिए | हम खुद फोन का प्रयोग कम करेंगे तो बच्चे भी उसका प्रयोग कम करेंगे | मै किसी को गुडमार्निंग के मैसेज , फिजूल के चुटकुले , वीडियो फॉरवर्ड करना , फालतू की चैटिंग , सेल्फी लेना जैसे काम नहीं करती बिटिया भी ये नहीं करती है |   फोन के जितने भी गलत प्रयोग हो सकते है उनके बारे में जैसे ही सुनती हूँ तो तुरंत बातो बातो में उन्हें उसके नुकशान के बारे में बता देतीं हूँ | अभी महीने भर पहले वो सभी अपना डांस वीडियो यूट्यूब पर देने के बारे में पूछ रहीं  थीं |  तुरंत उसके बारे में उन्हें समझाया उनसे ये भी पूछा की वो ऐसा करना ही क्यों चाहतीं है  | फिर उसके जरुरत और दुष्प्रभावों के बारे में उनसे और उनकी दोस्तों से भी बात किया ,वो सब समझ भी गई और मान भी गई | जबकि ढंग की चीजों के लिए कोई मनाही भी नहीं है | दर्जनो  कलाकारी , क्राफ्ट बनाना , पेंटिंग करना , कीबोर्ड बजाना , हेयर स्टाइल बनाना , जादू के ट्रिक करना , नेल आर्ट , पहेलियाँ बनाना बूझना , बाँसुरी की अनेको धुन सीखना जैसे कितनी ही चीजे बीटिया ने यूट्यूब से सीखे  और हमें भी सिखाया है | मोबाईल के पियानो पर कई गाने मुझे सीखाया  | अभी हाल में बिटिया ने बांसुरी पर हीरो की धुन बजाना भी सिखाया है ,वो स्कूल बैंड में बाँसुरी बजाती है | मै उन्हें कई गेम्स भी खेलने देतीं हूँ जो हिंसक ना हो और जिसमे उनके हर चीज पर ध्यान देने की आदत भी पड़े थोड़ा दिमाग भी तेज चले | कितनी ही बार तो टीचर बोलती है नेट पर ये देख लो | ये सब करने के लिए उन्हें फोन कंप्यूटर आदि ना दे तो जरुरत के समय वो अनाड़ी ना रह जाए |

                                                     इन सब को छोड़ भी दे तो कई अन्य जरुरी चीजें भी है जो दुसरो के लिए जरुरी है | जैसे  हमारे स्टॉप से बच्ची जाती है सिंगल मदर है शाम को वैन पालना घर में छोड़ती है माँ फोन पर उसके स्कूल से निकलने से पहले और पहुंचने के तुरंत बाद  फोन करती है | स्कूल में फोन ले जाने की इजाजत नहीं है इसलिए वह फोन जमा करना पड़ता है और छुट्टी के बाद उन्हें मिलता है | मुंबई में ऐसे हजारो बच्चे है जो घर अकेले पहुंचते है या सभी जगह उन्हें अकेले ही जाना पड़ता है माँ बाप के लिए फोन ही संपर्क बनाये रखने में सहायता देता है | कुछ चीजे वक्त की जरुरत होती है जिन्हे समय के साथ अपना लेने में कोई बुराई मुझे नहीं लगता है | बाकि ये भी सही है कि जरुरी तो कुछ भी नहीं है , देश के हजारो लाखो बच्चे इसके बिना भी जी ही रहे है | इसलिए इस मामले में सभी माँ बाप की अपनी सोच हो सकती है | क्योंकि बच्चे पालने का कोई एक फंडा नहीं होता |

November 06, 2017

अच्छी कहानियों के बुरे पहलू --------- mangopeople




                                                                      बिटिया का तीसरे जन्मदिन का दूसरा दिन था वो उपहार में मिले सभी खिलौनों से एक साथ खेलना चाहती थी और मेरा नियम बना था हर महीने एक खिलौना निकलेगा | क्योकि बच्चे के लिए एक खिलौने की आयु अधिकतम २०-२५ दिन होता है उसके बाद उससे बोर हो कर भूल जाता है और नये की मांग करता है एक साथ सब दिया तो २५ दिनों में सब से बोर | उन्हें बहलाने के लिए उन्हें काम में उलझने के इरादे से उन्हें कहा सभी खिलौने बेडरूम में लाओ बारी बारी , उसे करने के बाद जाओ अब स्टूल लाओ , चलो अब मै स्टूल पर चढ़ती हूँ एक एक खिलौना मुझे दो ऊपर रख दू , एक जो पसंद है उसे रहने दो | दो तीन खिलौने देने के बाद उन्होंने मुझसे कहा , क्या तुम मेरी स्टेप मम्मी हो | कानो में पिघला शीशा डाल देना , दिल में जहर बुझा खंजर घोप देना जैसी बाते सुन रखी थी महसूस उस दिन पहली बार किया था | इसे अतिश्योक्ति न समझे मुझे लगा जैसे मुझे चक्कर आ रहे है और मैंने टेक न लिया तो स्टूल से गिर पड़ूँगी | निचे उतरी और बेटी को गले लगाते फिर से पूछा क्या कहा बेटा और उसने बात दोहरा दी | जैसा की हर माँ का ख्याल होता है मेरा बच्चा दुनिया का सबसे मासूम बच्चा है और लोगो से ये देखा नहीं जाता और वो उसे गलत बाते सिखा कर उसे बिगाड़ते है और माँ से उसके रिश्ते ख़राब करते है वही मैंने भी सोचा  | तुम्हे ये किसने सिखाया की मै तुम्हारी स्टेप मम्मी हो | तो तुम मुझसे इतना काम क्यों करवा रही हो सिंड्रेला और स्नोवाइट की स्टेप मॉम की तरह  |

                                                                  इन बच्चो के लिए बनी प्यारी प्यारी राजकुमारियों के कहानियों से भी हम बच्चो को कुछ गलत सीखा सकते है उनमे कोई पूर्वाग्रह भर सकते है ऐसा तो सपने में भी नहीं सोचा था | ऐसे ही जाने अनजाने हम सभी अपने दिलो दिमाग की सारी बुराइयाँ सारे गलत विचार , पूर्वाग्रह अपने अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाने के लिए दे देते है | जब कहानियां सुनाते है तो बुरे पात्रों को और बुरा बताते समय उसे अपनी भावभंगिमाओं से और डरावना बुरा बनाते है मन में भरा पूरा जहर उगल देते है |  खुद हम कितना ग्रसित है इन ऊलजलूल विचारो से , जीवन में कभी किसी सौतेली माँ  से नहीं मिली हूँ , सौतेले मामा है लेकिन उनसे रिश्ते सामान्य है , फिर भी खुद के लिए सौतेला सुनना , जहर बुझा लग रहा था | मुझे याद है उसके बाद जब मैंने उन्हें कृष्ण की कहानी सुनाई तो एक बार भी कंस के साथ मामा शब्द नहीं लगाया , क्या पता मामा के लिए कुछ गलत भर दूं  | याद रखिये बच्चो में भरा गया एक गलत विचार , किसी के लिए नफरत , किसी के लिए कोई पूर्वाग्रह एक दिन पलट कर किसी न किसी रूप में आप के ही सामने जरूर आयेगा | खुद को सुधारे न सुधारे विरासत में बच्चो को कुछ ख़राब न दे कम से कम |

#माँबापगिरी