Showing posts with label विपरीत विचार. Show all posts
Showing posts with label विपरीत विचार. Show all posts

October 07, 2011

आलोचना ,विपरीत विचार, असहमति या खिंचाई इसका फर्क ब्लॉगर को समझना चाहिए - - - - -mangopeople

                   



                                       ब्लॉग जगत में इस बात को ले कर कई बार बहस हो चुकी है की लोगो को अपनी आलोचना बर्दाश्त नहीं होती है लोग आलोचनात्मक टिप्पणियों को पचा नहीं पाते है अक्सर उन्हें या तो प्रकाशित नहीं किया जाता या फिर हटा दिया जाता है | कई बार तो लोग आलोचनात्मक टिप्पणी करने वाले को ही भला बुरा कहने लगते है | किंतु क्या कभी किसी ने इस बात पर भी ध्यान दिया है की आलोचना है किस बला का नाम क्योंकि यहाँ तो यदि कोई आप की बात से असहमत हो जाये या आप की विचारों के विपरीत विचार रख दे,  जो उसके अपने है तो लोग उसे भी अपनी आलोचना के तौर पर देखने लगते है , जबकि वास्तव में कई बार ऐसा नहीं होता है है कि दूसरा ब्लॉगर आप को कोई टिप्पणी दे रहा है जो आप के विचारों से मेल नहीं खा रहा है तो वो आप की आलोचना ही करना चाह रहा है | कई बार इसका कारण ये होता है की वो बस उस विषय में अपने विचार रख रहा है जो संभव है की आप के सोच से मेल न खाता हो , कई बार सिक्के का दूसरा पहलू भी दिखाने का प्रयास किया जाता है | इसका कारण ये है की अक्सर हम अपनी पोस्टो में वो लिखते है जो हमारे विचार है जो हमने अपने आस पास घटते देखा है या हमने किसी चीज के बस एक ही पहलू का देखा है और वही पोस्ट में लिख दिया,  परिणाम स्वरूप पाठक बस विषय के उसी रूप को देख कर अपने विचार रखने लगते है ,  जबकि कुछ विषयों में सिक्के का दूसरा पहलू भी होता है जो हो सकता है जाने अनजाने में लेखक नहीं लिख सका  | दूसरे ब्लॉगर कई बार ऐसी जगहों पर सिक्के का दूसरा पहलू भी वहा टिप्पणी के रूप में दे देते है ताकि अन्य पाठक दोनों बातों को समझ ले फिर अपने विचार रखे संभव है की दोनों पहलुओं को देख कर पाठक अपना सही विचार बना सके भले टिप्पणी में वो लेखक की "वाह वाह"  करके चले जाये  |  हमारे जो भी विचार या सोच होती है वो एक दिन में नहीं बनती है कई बार उसे बनने में सालों लगते है और उसके लिए जिम्मेदार होते है हमारा परिवेस जिसमे हम बड़े होते है,  उसमे उन लोगो के विचार और व्यवहार का भी मिश्रण होता है जो हमारे आस पास होते है , और हम वही लिखते है जो हम देखते है किंतु इसका ये अर्थ नहीं होता की जो हमने देखा नहीं जो हमने सोचा नहीं वो है ही नहीं और यदि  किसी ने वो पहलू हमारे सामने रख दिया तो वो हमारी आलोचना कर रहा है या हमारी खिचाई कर रहा है | मैं ऐसा नहीं मानती की ये कही से भी आप की आलोचना है इसलिए कई पोस्टो पर मैं विषय के दूसरे रूपों को टिप्पणी के रूप में देती आई हूँ | 
                                              
                                               उसी तरह असहमतियो को भी अपनी आलोचना के तौर पर देख लिया जाता है | किसी के विचारों से असहमत होना कई बार उसकी आलोचना करना नहीं होता है बल्कि हम जब उन विषयों को खुद के तर्क की कसौटी पर कसते है और वो हमें सही नहीं लगता है तो हम लेखक से असहमत हो जाते है किंतु इसके ये अर्थ नहीं है  कि लेखक के विचार गलत ही है,  उसने विषय को अपनी नजर से अपने तर्क से देखा है और दूसरे ने अपनी विचार और तर्क से और एक ही विषय में दो लोगो के दो विचार हो सकते है जो दोनों ही अपनी जगह सही भी हो सकते है और उन विचारों को रखना कही से भी दूसरे की आलोचना करना नहीं होता है | हिंदी ब्लॉग जगत में ज्यादातर जगह टिप्पणियों के लेने देने का खेल होता है लोग अक्सर लेखक के विचारों से अपने विचार मेल न खाने के बाद भी "वाह वाह" "बहुत अच्छा लिखा"  लिख कर चले जाते है , कुछ के पास समय नहीं होता और वो बहुतों को पढ़ना चाहते है सो एक लाइन की भी टिप्पणी दे कर चले जाते है | किंतु कुछ ब्लागरो के लिए हिंदी ब्लॉग इन सब से अलग भी बहुत कुछ है जो टिप्पणी टिप्पणी खेलने की जगह इसे  विचारों के आदान प्रदान की जगह मानते है और जो पढ़ते है उस पर अपने निजी सोच अवश्य रखते है वो लेखक के विचारों से मेल भी खा सकता है और नहीं भी ,  पर ये ज़रुरी नहीं है की उसमे टिप्पणी कर्ता लेखक की आलोचना ही करना चाह रहा है | आलोचना, असहमति, विपरीत विचार और खुद की खिंचाई का फर्क लोगो को समझना चाहिए और जिस तरह लोग ये कहते है की हम आलोचना का स्वागत करते है तो उन्हें ये भी समझना चाहिए की हर बार आप की आलोचना नहीं की जा रही है दूसरे के विपरीत विचारों को भी एक विचार की तरह सम्मान से देखना चाहिए न की हर बार उसे अपनी आलोचना समझ कर उसके प्रति कोई ये विचार बना लेने चाहिए की फला मेरा आलोचक है या वो हर बार मेरी खिंचाई कर के जाता है | इस तरह के विचार उन ब्लोगरो के लिए ठीक नहीं है जो हिंदी ब्लॉग जगत को एक स्वस्थ बहस,  एक विचारों के आदान प्रदान की जगह मानते है इस तरह तो निश्चित रूप से वो आप के भी ब्लॉग पर अपने विचार खुल कर रखना छोड़ देंगे | वैसे ये भी संभव है की कुछ लोग हिंदी ब्लॉग जगत में  अपने विचार रखने अपने विचार दूसरों के साथ बांटने भर आये है वो इस तरह के किसी भी संवाद विचार विमर्श या बहस का हिस्सा नहीं बनाना चाहते है या उनके पास ये सब करने का समय ही नहीं है |  जिन ब्लोगरो को ये पसंद नहीं है जो नहीं चाहते की इस तरह का कोई भी काम उनके ब्लॉग पर हो तो उन्हें खुल कर ये कह देना चाहिए की उन्हें इस तरह की टिप्पणियों की आवश्यकता नहीं है और वो इस तरह का कोई संवाद कायम नहीं करना चाहते है जब तक आप कहेंगे नहीं तब तक मुझे नहीं लगता ही की किसी को भी आप के विचार इस सम्बन्ध में पता चलेगा इसलिए दूसरा बेचारा ब्लॉगर तो अपनी इच्छा का करता ही जायेगा और आप को बुरा भी लगता जायेगा अच्छा है की उसे समय रहते उसे बता दे और सबसे अच्छा तरीका तो होता है टिप्पणी बाँक्स के ऊपर साफ लिख दे की कैसी टिप्पणियाँ आप को चाहिए |
                                                              
                                                         ये सच है की हिंदी ब्लॉग जगत में ऐसे कई लोग है जो किसी को निशाना बना कर हर बार उसकी आलोचना ही करते है , या कुछ ऐसे भी है जो बस आलोचना करने के लिए ही किसी किसी के ब्लॉग पर जाते है या जानबूझ कर आप की आलोचना करते है या आप की टाँग खिचाई करते है या आप को अपमानित करते है ऐसे लोगों के होने से इनकार नहीं क्या जा सकता है लेकिन सभी में फर्क करना तो ब्लॉग स्वामी का काम है और ये बात उसे ही समझनी होगी की कौन टिप्पणी के रूप में क्या लिख कर जा रहा है और उसका क्या इरादा है | पर ये फर्क टिप्पणी की भाषा से आसानी से पहचानी जा सकती है आलोचना करने वाले की भाषा तीखी व्यंग्य करती होगी और विपरीत  विचार वाली बात बस सीधे शब्दों में अपनी बात कहने वाली होगी पर इसका अंतर कारण तो ब्लॉग स्वामी को ही होगा यदि ब्लॉगर ये करने में असमर्थ होते है तो ये कही से भी हिंदी ब्लॉग जगत के लिए ठीक नहीं है फिर ये भी अपने मान की भड़ास निकालने की जगह भर बन कर रहा जाएगी जहा सभी अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग छेड़ रहे होंगे और कुछ भी सार्थक निकाल कर यहाँ से नहीं आयेगा |


                                                                        अपनी कहूँ तो मैं स्वयं ये कई जगह ऐसा करती आई हूँ बिना ये सोचे की मेरी टिप्पणियों को ब्लॉग स्वामी अपनी आलोचना या अपनी खिचाई के रूप में ले रहा है | एक ब्लॉगर ने इस बारे में मुझे मना किया था की उसे ऐसी टिप्पणियाँ नहीं चाहिए तो मैंने उन्हें टिप्पणी देना बंद कर दिया क्योंकि ये ब्लॉग स्वामी का अधिकार है की वो बताये की उसे कैसी टिप्पणियाँ चाहिए | अत: किसी अन्य को मेरे टिप्पणी देने का तरीका पसंद ना हो तो खुल कर कह दे क्योंकि बिना कहे मुझे कुछ सुनाई नहीं देता है और जब तक कोई कहेगा नहीं मैं अपना तरीका बदल नहीं सकती हूँ  :)