इस पोस्ट को हिंसा को बढ़ावा देने के रूप में न देखे
किन्तु जरुरत पड़ने पर अपनी रक्षा में किसी पर हमला करने को मै हिंसा नहीं
मानती हूँ |
कबीर दास अपने एक दोहे में कहते है की दुनिया की सोच बड़ी उलटी होती है जो घटनी है उसे बढ़नी कहती है और जो चलती है उसे गाड़ी | मै इससे बिलकुल सहमत हूँ इसलिए पिछली पोस्ट उलटी लिखी थी ताकि लोग सीधी बात को समझ सके किन्तु लोगो की सोच भी बड़ी अजीब होती है, वो मान कर चलते है की सोचेंगे समझेंगे तो हम वही जो हम चाहते है आप चाहे सीधा लिखे या उलटा , सो आज सीधी बात करते है | आज भी बात गुवाहाटी कांड की करुँगी पिछली पोस्ट पर ही उसे जारी लिखा था जान रही थी की हम किसी भी प्रकार से इस तरह की घटनाओ का विरोध करे किन्तु समाज में एक जो पुरुवादी सोच ( पुरुषवादी सोच जब लिख जाता है तो बात बस पुरुष की नहीं पूरे समाज की होती है जिसमे हर वर्ग और लिंग के लोग शामिल है ) है हम उसे नहीं बदल सकते है इसलिए जरुरी है की हम लड़कियों की सुरक्षा के लिए उठाये जा रहे कदमो की भी बात करे | ( अब ठीक है ना संजय जी ) पहले उन कदमो की बात करते है जो आम तौर पर एक परम्परावादी समाज किसी लड़की की सुरक्षा के लिए चाहता है | रात में आप घर से बाहर न निकालिये , सुन शान इलाको में आप मत जाइये , ऐसी जगहों पर आप कभी भी अकेले न जाये भरोसेमंद पुरुष को साथ रखे , इस तरह के कपडे न पहने जो लड़को को भड़काऊ लगे उन्हें ऐसा करने के लिए प्रेरित करे , ( यदि मुझेसे कोई उपाय छुट गये हो तो याद दिला दे ) किन्तु ये उपाय भी कारगर नहीं है क्योकि इस तरह की घटाने दिन के उजाले में भी होती है , लड़कियों को राह चलते रास्ते में गाड़ी में खीच लेना , या मुंबई में बिलकुल एक व्यस्त सड़क के बीच बने पुलिस केबिन में पुलिस वाले द्वारा बलत्कार जैसी घटनाओ के बारे में सभी ने सुना होगा | भीड़ भाड़ इलाको में तो और भी ज्यादा छेड़छाड़ की घटनाये होती है बसों में ट्रेनों में भीड़ भरे बाजार में , पुरुषो को साथ रहने से कोई फायदा होगा कह नहीं सकते कुछ महीने पहले इस तरह की ही एक घटना में दो लडकिय अपने पुरुष मित्रो के साथ रात में घूम रही थी कुछ लोगो ने उन्हें छेड़ने लगे , उनके पुरुष मित्रो ने उसका विरोध किया तो वो और साथी ले आये और उन दोनों लड़को पर हमला कर दिया जिसमे से एक लडके की मौत हो गई और दूसरे की बड़ी मुश्किल से जान बची , इस तरह की घटनाये हर तरह की महिलाओ के साथ होता है चाहे उसने सलवार कमीज पहन रखी हो साड़ी पहनी हो या बुर्के में ही क्यों न हो सभी जगह होती है , कई बार हमें सुना है की गांवो में दबंगों ने महिला को निर्वस्त्र कर घुमाया , मुझे नहीं लगता है की उसने कोई भड़काऊ कपडे पहन रखे हो वहा भी वही महिला को अपमानित करने का सबसे आसान तरीका अपनाया जाता है उसे इस तरह सार्वजनिक जगहों पर निर्वस्त्र करना | ये सभव नहीं है की लड़किया घर से बाहर निकले ही नहीं स्कुल कालेज बहुत सी जरुरी जगहों के लिए उन्हें हर हाल में घर से तो निकलना ही पड़ेगा | हा यदि आप इन कारणों से भी लड़की को घर से नहीं निकलना देना चाहते है तो उसके आगे मै कुछ नहीं कह सकती हूँ | इसलिए जरुरी है की लड़कियों को इतना शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया जाये की वो किसी अन्य से मदद मांगने और ऐसा कर रहे दुष्टों से माँ बहन की दुहाई देने की जगह खुद ऐसी परिस्थितयो से निपट सके कुछ हद तक उसे रोक सके उसका सामना कर सके |
शारीरिक रूपों से लड़कियों को मजबूत बनाने के साथ साथ जरुरी है की लड़कियों को मानसिक रूप से भी मजबूत बनाया जाये | हम जिस देश में रहते है वहा नारी के साथ एक पवित्रता वाला कांसेप्ट चलता है मतलब की आप का शारीर ही आप का सब कुछ है किसी ने गलत इरादे से आप पर हाथ भी रख दिया तो आप अपवित्र हो जाएँगी | अब आप कहेंगे की इसमे क्या गलत है क्या हम किसी को भी कही भी हाथ लगाने दे | जो लड़किया है नारी है वो इस बात को अच्छे से जानती है जो नहीं है उनके लिए बताते है पहली बात की लड़कियों को उनके शारीर को ले कर इतना संवेदनशील बना दिया जाता है और समाज में तुम्हारे साथ ये हो सकता है वो हो सकता हा जैसी चीजो से इतना डरा दिया जाता है की किसी ने जरा सा गलत हाथ लगाया नहीं या कुछ भद्दी टिपण्णी की नहीं कि उनकी हिम्मत जवाब दे जाती है ,शरीर डर से कापने लगता है दिमाग काम करना बंद कर देता है , मन में विरोध की जगह डर की भावना घर कर जाती है, इसने मुझे गलत छू लिया या अब ये मेरे साथ और गलत कर देगा , अब मै घर वालो को क्या बताउंगी , इस मानसिक स्थिति में तो कोई भी इन्सान सामने वाले का मुकाबला नहीं कर सकता है फिर किसी लड़की से क्या उम्मीद करे जो शारीरिक रूप से ज्यादातर ऐसा करने वालो से कमजोर होती है | हालत ये है की पुरुष क्या किसी महिला का भी मुकाबला करने की हालत में कई बार लड़किया नहीं होती है | महीने भर पहले की बात है लोकल ट्रेन से जा रही थी भीड़ कम थी और मेरा स्टेशन आने वाला था मै दरवाजे पर ही खड़ी थी साथ में कोई १४-१५ साल की चार लड़किया भी खड़ी थी शायद टियुशन जा रही थी उनके कंधो पर बैग था, दो मेरे आगे थी तभी पीछे से खड़ी एक लड़की ने शरारत में धीरे से मेरे बगल से हाथ डाला और आगे खड़ी लड़की के कंधे पर थपकी दे झट हाथ पीछे कर लिया आगे वाली लड़की मुड़ी और मुझे देखने लगी मैंने कुछ नहीं कहा उसने कुछ सेकेण्ड के लिए मुझे देखा और मारे डर के मम्मी मम्मी करने लगी उसका चेहरा बिलकुल डर गया और वो कस कर अपने बगल में खड़ी सहेली से लिपट गई, मुझे देख कर आश्चर्य हुआ की वो किस बात से डर रही है | मैंने कहा तुम क्यों डर रही हो उसकी सहेली ने भी पूछ तो उसने मराठी में कहा की इन्होने मुझे कंधे पर थपकी दी पीछे खड़ी उसकी सहेलियों ने हंसते हुए कहा की अरे वो तो मैंने किया था , मैंने उससे कहा की इसमे डरने की क्या बात है यदि मैंने ही तुमको थपकी दी उसकी सहेलिय भी इस बात पर उसे चिढाने लगी इतने में मेरा स्टेशन आ गया और मै उतर गई | मुझे आश्चर्य हो रह था की एक लड़की किसी महिला के थपकी देने भर से इतना डर जा रही है यदि मेरी जगह कोई पुरुष होता तो इसकी क्या हालत होती | विश्वास कीजिये हमारे देश की ज्यादातर आम लड़किया इस तरह की ही डरपोक होती है , हम उन्हें डरपोक बना देते है वो कई बार सामान्य सी परिस्थिति का भी का सामना नहीं कर पाती है तो किसी मुश्लिक परिस्थिति का क्या करेंगी | लड़को से दूर रहो वो ऐसे होते है वो वैसे होते है वो कुछ भी करेंगे तो उनका तो कुछ नहीं बिगड़ेगा हा तुम्हारी बेइज्जती जरुर हो जाएगी जैसी बात उन्हें लड़को से हर समय डरने की प्रेरणा दे देते है | फिर जब कभी भी उनके सामने इस तरह की घटना होती है तो वो पहले ही मान लेती है की वो मुकाबला कर ही नहीं सकती है वो उसे रोक नहीं सकती है अब ये सामने वाले के ऊपर है की वो हमारे साथ क्या करेगा
|
दूसरी बात है घर की इज्जत वाली, गुवाहाटी कांड हो या इस तरह का कोई अन्य कांड में मैंने देखा की लड़की उन लड़को से मुकाबला करने की जगह बस अपना चेहरा कैमरे में दिखाए जाने से बचाती है , वही दुनिया ने चेहरा देख लिया की तुम्हरे साथ क्या हुआ है तो तुम्हारा क्या होगा तुम्हारे माँ बाप की इज्जत चली जाएगी इसलिए जरुरी है की अपना चेहरा न दिखाओ भले तुम्हारे साथ कुछ भी हो जाये अपनी पहचान छुपाओ न की उनसे कोई मुकाबला करो पहली प्राथमिकता तुम्हारी यही है | ये ठीक है की इस तरह किसी भीड़ से एक अकेली लड़की का मुकाबला करना बड़ा मुस्किल काम है किन्तु बिलकुल ही आत्म समर्पण कर देना भी ठीक नहीं है | हम सदा अपनी बेटियों को शांत शौम्या नजरे नीचे कर सह कर घर चले आने की शिक्षा देते है | हम कभी उन्हें ये नहीं कहते है की किसी भी संकट के समय में जरुरत पड़े तो अपनी रक्षा में हमला करने से मत चुको, हम कभी भी उनमे ये विश्वास क्यों नहीं पैदा करते है की वो स्वयं भी किसी घटना से निपटने में सक्षम है कम से कम किसी अपने या मददगार के आने तक उस घटना का सामना कर सकती है उसे रोक सकती है उसका मुकाबला कर सकती है और ये सब करके वो कुछ भी गलत नहीं कर रही है और उनका परिवार उनके खुद की रक्षा के लिए उठाये गये किसी भी कदमे उनके साथ है | इसलिए जरुरी है की लड़कियों को ऐसी घटनाओ के बाद ये न बताये की देखो ऐसे कपडे पहनने से ऐसे रात में निकालने से या इस जगह जाने से तुम्हारे साथ ये हो सकता है , ये कह कर उन्हें डराए नहीं उन्हें डरपोक न बनाये बल्कि उनमे विश्वास पैदा करे उससे ये कहे की ऐसी स्थिति आने पर कभी भी डरो मत मुकाबला करो , जरुरत पड़ने पर हमला करो , क्योकि इस भीड़ में ज्यादातर भीड़ बहादुर होते है जो भीड़ की शक्ल में तो बड़े बहादुर बनते है किन्तु अकेले में इनकी इतनी हिम्मत भी नहीं होती है की वो एक चूहे को भी मार सके, ज्यादातर बन्दर घुड़की दने वाले होते है जो सामने वाले ही हिम्मत जांचते है यदि आप पीछे जाते तो उनकी हिम्मत बढ़ती है और जब आप हिम्मत से आगे बढ़ते है तो वो पीछे हट जाते है | मानसिक रूप से मजबूर बने घबराए या हडबडाये नहीं हर किसी के पास मोबाईल होता है तुरंत पुलिस को या जो सबसे करीब है उसे कॉल करके बुलाये और जरुरत पड़े तो अपनी आत्म रक्षा में तुरंत हमला बोल दे ( जब आप के पास वहा से भाग जाने का विकल्प न हो तब , जब आप ऐसे लोगो से घिर जाये तब ) किसी पर भी जो भी आप के हाथ में आये उसी से ऐसे समय पर हमला कर दे आप का पर्स, पेन, बालो के काटे से लेकर सड़क पर पड़ा पत्थर भी आप का हथियार बन सकता है | जब मै छोटी थी तो मेरे चाचा हम लोगो से एक बात बोलते थे (सभी के लिए) की जब कभी भी कई लोग तुम पर हमला करे तो सभी से मुकाबला करने की जगह थोडा ध्यान दो और उनमे से जो सबसे कमजोर या डरपोक दिखे बस उसे पकड़ो और बेतहाशा धोना शुरू कर दो, यहाँ पर सभी आप की ताकत देखना चाहते है पर ये नहीं देखते है की ताकत किसके खिलाफ प्रयोग किया जा रहा है उस कमजोर को जब आप बिना दाये बाये देखे कही भी पिटते है तो वो आप से डरता है और उस समय आप ताकतवर दिखते हो और ऐसे भीड़ के साथ बहादुरी दिखाने वाले डर जाते है और फिर उन्हें समझ में आता है की उसके बाद उनका नंबर भी लग सकता है ( आप ने देखा होगा दो चार मजनू लड़कियों को छेड़ते है जैसे ही लड़की पलट कर किसी एक को पकड़ती है बाकि वहा से भाग जाने में ही अपनी भलाई समझते है तब तो और भी जब लड़किया भी झुण्ड में हो )
यहाँ पर
शारीरिक मजबूती के साथ ही मानसिक मजबूती काम आती है जब आप इस बात की परवाह न
करे की आप
को कौन कहा मार रहा है पिट रहा है या आप के किस अंग को छू रहा है तो आप उस
स्थिति से मुकाबला करने के लिए ज्यादा तैयार होते है | किन्तु होता क्या है
की लड़किया कुछ भी हो जाये मुकाबला करने की जगह अपने चहरे या नीजि अंगो को
छुए जाने से बचाने में लगी होती है जबकि ऐसा करने वाला आप के साथ ये करने
की जिद पर आ जाये तो आप उसे बहुत मुश्लिक से ही रोक पाएंगी और जब वो भीड़ की
शक्ल में हो तो शायद ये आप के लिए नामुमकिन हो जाता है , अच्छा हो अपने
दोनों हाथो का प्रयोग उस पर हमला करने उसे पीटने में लगाये क्योकि दोनो ही
स्थिति में आप अपने आप को छुए जाने को रोक नहीं सकती है जब आप मुकाबला नहीं
करेंगी तो ये सब आप के साथ तब तक होता रहेगा जब तक वो चाहेंगे या जब तक कोई
अन्य आप को आ कर वहा न बचाए जबकि जब आप मुकाबला करेंगी तो आप जल्दी से उस
बुरी स्थिति से बाहर आ सकती है | मुकाबला करने के लिए जरुरी ये भी है की
हम पहले से ही अपनी बेटियों को कोमलान्गनी बनाने के बजाये थोडा शारीरिक रूप
से भी मजबूत बनाये उन्हें अपनी सुरक्षा के आत्म रक्षा ट्रेनिग भी दिलवा दे
बिलकुल वैसे ही जैसे आज भी लाखो लोग अपने बेटियों के पढ़ाने लिखाने से
लेकर सिलाई कटाई के स्कुलो में भेज देते है ताकि बुरे समय में काम आये | तो
फिर किसी ऐसी संकट में अपनी रक्षा करने की ट्रेनिग क्यों न उन्हें दी जाये
वो उसका कितना प्रयोग करती है या नहीं ये तो बाद की बात है किन्तु ऐसी कोई
भी प्रशिक्षण उनमे आत्म विश्वास तो पैदा कर ही देगा | ये कभी न सोचे की आप
के साथ या आप के घर की महिलाओ के साथ ये नहीं हो सकता है इस तरह की घटाने
या इससे मिलती जुलती घटाने कभी भी कही भी किसी के साथ भी हो सकता है इसलिए
ऐसे प्रशिक्षण केवल बेटियों के लिए नहीं उनकी माँ को भी दिया जाना चाहिए (
जब मै १२ वि में थी तो मै ताई- क्वांडू सीखती थी हमारे साथ एक १२ साल की
लड़की और उसकी माँ भी सीखने आती थी ) जरुरी नहीं है की ये छेड़ छड कर रहे
व्यक्ति के ऊपर ही काम आये चेन, पर्स खीच कर भाग रहे उच्चके को या घर में
घुसे लुटेरे से बचने के भी काम आ सकता है आप हर समय अपने घर की महिलाओ के
साथ उनकी सुरक्षा के लिए मौजूद नहीं हो सकते है | ये जरुरी नहीं है की इतना
कुछ सीखने के बाद भी आप सुरक्षित हो ही जाएँगी किन्तु जितने उपायों से हम
अपनी रक्षा कर सकते है उतनी तो हमें सिख ही लेनी चाहिए संभव है की आप से
साथ घटी हटाना में अपराधी के पास कोई खतरनाक हथियार हो और आप कुछ न कर सके |
जब लोग हथिहर बंद हो कर हमला करे तो फिर मै यही कह सकती हूँ की तब तो
प्रेरणा लेने के लिए हमारे पास दो महिलाए है हरियाणा की है जिन्हें आप सब
ने आमिर के शो सत्यमे जयते में देखा होगा, तब तो यही कहूँगी की जब समाज के
पुरुषो की हिम्मत इतनी बढ़ जाये तो हम सभी को भी एक आटोमेटिक ............ के लाइसेंस के लिए आवेदन कर देना चाहिए |
चलते चलते
मै धार्मिक महिला नहीं हूँ इस कारण मै देवी देवताओ को उस रूप में नहीं देखती जीस रूप में कोई अन्य देखता है यही कारण है की मै देवी देवताओ को एक सामाजिक जरुरत के कारण समाज द्वारा बनया गया मानती हूँ | इसी के तहत मै ये भी सोचती हूँ की जब संसार में पहले से ही देवी लक्ष्मी , सरस्वती के रूप में नारी के शांत रूप और सती तथा पार्वती के रूप में शक्ति रूप मौजूद था तो क्या कारण था की देवी दुर्गा का निर्माण किया गया | संभव है की समाज ने इस बात की जरुरत समझी हो की नारी को और भी शक्तिशाली और थोडा हिंसक रूप में दिखाया जाये जिससे ये बात स्थापित हो सके की समाज की रक्षा या खुद की रक्षा के लिए नारी को अपना शौम्य, शांता ,संस्कारी, अहिंसक रूप त्याग देने की जरुरत महसूस हो तो वो आसानी से ये कर सके और समाज उसे मान्यता दे सके साथ ही बुरे लोग नारी से भी डर सके | फिर ये भी लगता है की जब दुर्गा जी पहले से ही मौजूद थी तो उनसे भी वीभत्स और रक्त पीने वाली काली का निर्माण क्यों किया गया शायद इस रूप में ये दर्शाना था की दुष्टों को जड़ से ख़त्म किया जाये , इस बार तो उनका संहार हो ही किन्तु इस तरह हो की वो दुबारा जन्म ही न ले सके, दुष्टों दानवों का सम्पूर्ण विनाश करने की शक्ति भी नारी को दी गई शायद कारण ये रहा हो की जन्म देने वाली ही उसे जड़ से ख़त्म कर सकती है , ऐसे दुष्टों का दुबारा जन्म वो ही रोक सकती है साथ की दुर्गा जी के साथ माँ, ममता और दया का जो एक अंश बचा था उसे काली के रूप में बिलकुल भी ख़त्म कर दिया जाये या बहुत कम कर दिया जाये | यही कारण है की कई बार संकट के समय दुष्ट लोगो से खुद को और अपने परिवार को बचाने के लिए नारी से दुर्गा या काली का रूप धारण करने का आवाह्न किया जाता है और इसे कही से भी गलत और हिंसक नहीं माना जाता है | मुझे नहीं लगता है की कोई भी व्यक्ति दुर्गा या काली के रूप में दानवों दुष्टों के विनाश को और समाज दुनिया को बचाने के लिए किये गये संहार को हिंसक मानता होगा | अब ये समाज को तय करना है की क्या वो हर नारी को दुर्गा या उससे भी वीभत्स काली के रूप में बदलने के लिए मजबूर करे या नहीं | ये एक आम महिला की आम सी नीजि राय और सोच है आप इससे विपरीत विचार भी रख सकते है |
कबीर दास अपने एक दोहे में कहते है की दुनिया की सोच बड़ी उलटी होती है जो घटनी है उसे बढ़नी कहती है और जो चलती है उसे गाड़ी | मै इससे बिलकुल सहमत हूँ इसलिए पिछली पोस्ट उलटी लिखी थी ताकि लोग सीधी बात को समझ सके किन्तु लोगो की सोच भी बड़ी अजीब होती है, वो मान कर चलते है की सोचेंगे समझेंगे तो हम वही जो हम चाहते है आप चाहे सीधा लिखे या उलटा , सो आज सीधी बात करते है | आज भी बात गुवाहाटी कांड की करुँगी पिछली पोस्ट पर ही उसे जारी लिखा था जान रही थी की हम किसी भी प्रकार से इस तरह की घटनाओ का विरोध करे किन्तु समाज में एक जो पुरुवादी सोच ( पुरुषवादी सोच जब लिख जाता है तो बात बस पुरुष की नहीं पूरे समाज की होती है जिसमे हर वर्ग और लिंग के लोग शामिल है ) है हम उसे नहीं बदल सकते है इसलिए जरुरी है की हम लड़कियों की सुरक्षा के लिए उठाये जा रहे कदमो की भी बात करे | ( अब ठीक है ना संजय जी ) पहले उन कदमो की बात करते है जो आम तौर पर एक परम्परावादी समाज किसी लड़की की सुरक्षा के लिए चाहता है | रात में आप घर से बाहर न निकालिये , सुन शान इलाको में आप मत जाइये , ऐसी जगहों पर आप कभी भी अकेले न जाये भरोसेमंद पुरुष को साथ रखे , इस तरह के कपडे न पहने जो लड़को को भड़काऊ लगे उन्हें ऐसा करने के लिए प्रेरित करे , ( यदि मुझेसे कोई उपाय छुट गये हो तो याद दिला दे ) किन्तु ये उपाय भी कारगर नहीं है क्योकि इस तरह की घटाने दिन के उजाले में भी होती है , लड़कियों को राह चलते रास्ते में गाड़ी में खीच लेना , या मुंबई में बिलकुल एक व्यस्त सड़क के बीच बने पुलिस केबिन में पुलिस वाले द्वारा बलत्कार जैसी घटनाओ के बारे में सभी ने सुना होगा | भीड़ भाड़ इलाको में तो और भी ज्यादा छेड़छाड़ की घटनाये होती है बसों में ट्रेनों में भीड़ भरे बाजार में , पुरुषो को साथ रहने से कोई फायदा होगा कह नहीं सकते कुछ महीने पहले इस तरह की ही एक घटना में दो लडकिय अपने पुरुष मित्रो के साथ रात में घूम रही थी कुछ लोगो ने उन्हें छेड़ने लगे , उनके पुरुष मित्रो ने उसका विरोध किया तो वो और साथी ले आये और उन दोनों लड़को पर हमला कर दिया जिसमे से एक लडके की मौत हो गई और दूसरे की बड़ी मुश्किल से जान बची , इस तरह की घटनाये हर तरह की महिलाओ के साथ होता है चाहे उसने सलवार कमीज पहन रखी हो साड़ी पहनी हो या बुर्के में ही क्यों न हो सभी जगह होती है , कई बार हमें सुना है की गांवो में दबंगों ने महिला को निर्वस्त्र कर घुमाया , मुझे नहीं लगता है की उसने कोई भड़काऊ कपडे पहन रखे हो वहा भी वही महिला को अपमानित करने का सबसे आसान तरीका अपनाया जाता है उसे इस तरह सार्वजनिक जगहों पर निर्वस्त्र करना | ये सभव नहीं है की लड़किया घर से बाहर निकले ही नहीं स्कुल कालेज बहुत सी जरुरी जगहों के लिए उन्हें हर हाल में घर से तो निकलना ही पड़ेगा | हा यदि आप इन कारणों से भी लड़की को घर से नहीं निकलना देना चाहते है तो उसके आगे मै कुछ नहीं कह सकती हूँ | इसलिए जरुरी है की लड़कियों को इतना शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया जाये की वो किसी अन्य से मदद मांगने और ऐसा कर रहे दुष्टों से माँ बहन की दुहाई देने की जगह खुद ऐसी परिस्थितयो से निपट सके कुछ हद तक उसे रोक सके उसका सामना कर सके |
शारीरिक रूपों से लड़कियों को मजबूत बनाने के साथ साथ जरुरी है की लड़कियों को मानसिक रूप से भी मजबूत बनाया जाये | हम जिस देश में रहते है वहा नारी के साथ एक पवित्रता वाला कांसेप्ट चलता है मतलब की आप का शारीर ही आप का सब कुछ है किसी ने गलत इरादे से आप पर हाथ भी रख दिया तो आप अपवित्र हो जाएँगी | अब आप कहेंगे की इसमे क्या गलत है क्या हम किसी को भी कही भी हाथ लगाने दे | जो लड़किया है नारी है वो इस बात को अच्छे से जानती है जो नहीं है उनके लिए बताते है पहली बात की लड़कियों को उनके शारीर को ले कर इतना संवेदनशील बना दिया जाता है और समाज में तुम्हारे साथ ये हो सकता है वो हो सकता हा जैसी चीजो से इतना डरा दिया जाता है की किसी ने जरा सा गलत हाथ लगाया नहीं या कुछ भद्दी टिपण्णी की नहीं कि उनकी हिम्मत जवाब दे जाती है ,शरीर डर से कापने लगता है दिमाग काम करना बंद कर देता है , मन में विरोध की जगह डर की भावना घर कर जाती है, इसने मुझे गलत छू लिया या अब ये मेरे साथ और गलत कर देगा , अब मै घर वालो को क्या बताउंगी , इस मानसिक स्थिति में तो कोई भी इन्सान सामने वाले का मुकाबला नहीं कर सकता है फिर किसी लड़की से क्या उम्मीद करे जो शारीरिक रूप से ज्यादातर ऐसा करने वालो से कमजोर होती है | हालत ये है की पुरुष क्या किसी महिला का भी मुकाबला करने की हालत में कई बार लड़किया नहीं होती है | महीने भर पहले की बात है लोकल ट्रेन से जा रही थी भीड़ कम थी और मेरा स्टेशन आने वाला था मै दरवाजे पर ही खड़ी थी साथ में कोई १४-१५ साल की चार लड़किया भी खड़ी थी शायद टियुशन जा रही थी उनके कंधो पर बैग था, दो मेरे आगे थी तभी पीछे से खड़ी एक लड़की ने शरारत में धीरे से मेरे बगल से हाथ डाला और आगे खड़ी लड़की के कंधे पर थपकी दे झट हाथ पीछे कर लिया आगे वाली लड़की मुड़ी और मुझे देखने लगी मैंने कुछ नहीं कहा उसने कुछ सेकेण्ड के लिए मुझे देखा और मारे डर के मम्मी मम्मी करने लगी उसका चेहरा बिलकुल डर गया और वो कस कर अपने बगल में खड़ी सहेली से लिपट गई, मुझे देख कर आश्चर्य हुआ की वो किस बात से डर रही है | मैंने कहा तुम क्यों डर रही हो उसकी सहेली ने भी पूछ तो उसने मराठी में कहा की इन्होने मुझे कंधे पर थपकी दी पीछे खड़ी उसकी सहेलियों ने हंसते हुए कहा की अरे वो तो मैंने किया था , मैंने उससे कहा की इसमे डरने की क्या बात है यदि मैंने ही तुमको थपकी दी उसकी सहेलिय भी इस बात पर उसे चिढाने लगी इतने में मेरा स्टेशन आ गया और मै उतर गई | मुझे आश्चर्य हो रह था की एक लड़की किसी महिला के थपकी देने भर से इतना डर जा रही है यदि मेरी जगह कोई पुरुष होता तो इसकी क्या हालत होती | विश्वास कीजिये हमारे देश की ज्यादातर आम लड़किया इस तरह की ही डरपोक होती है , हम उन्हें डरपोक बना देते है वो कई बार सामान्य सी परिस्थिति का भी का सामना नहीं कर पाती है तो किसी मुश्लिक परिस्थिति का क्या करेंगी | लड़को से दूर रहो वो ऐसे होते है वो वैसे होते है वो कुछ भी करेंगे तो उनका तो कुछ नहीं बिगड़ेगा हा तुम्हारी बेइज्जती जरुर हो जाएगी जैसी बात उन्हें लड़को से हर समय डरने की प्रेरणा दे देते है | फिर जब कभी भी उनके सामने इस तरह की घटना होती है तो वो पहले ही मान लेती है की वो मुकाबला कर ही नहीं सकती है वो उसे रोक नहीं सकती है अब ये सामने वाले के ऊपर है की वो हमारे साथ क्या करेगा
|
दूसरी बात है घर की इज्जत वाली, गुवाहाटी कांड हो या इस तरह का कोई अन्य कांड में मैंने देखा की लड़की उन लड़को से मुकाबला करने की जगह बस अपना चेहरा कैमरे में दिखाए जाने से बचाती है , वही दुनिया ने चेहरा देख लिया की तुम्हरे साथ क्या हुआ है तो तुम्हारा क्या होगा तुम्हारे माँ बाप की इज्जत चली जाएगी इसलिए जरुरी है की अपना चेहरा न दिखाओ भले तुम्हारे साथ कुछ भी हो जाये अपनी पहचान छुपाओ न की उनसे कोई मुकाबला करो पहली प्राथमिकता तुम्हारी यही है | ये ठीक है की इस तरह किसी भीड़ से एक अकेली लड़की का मुकाबला करना बड़ा मुस्किल काम है किन्तु बिलकुल ही आत्म समर्पण कर देना भी ठीक नहीं है | हम सदा अपनी बेटियों को शांत शौम्या नजरे नीचे कर सह कर घर चले आने की शिक्षा देते है | हम कभी उन्हें ये नहीं कहते है की किसी भी संकट के समय में जरुरत पड़े तो अपनी रक्षा में हमला करने से मत चुको, हम कभी भी उनमे ये विश्वास क्यों नहीं पैदा करते है की वो स्वयं भी किसी घटना से निपटने में सक्षम है कम से कम किसी अपने या मददगार के आने तक उस घटना का सामना कर सकती है उसे रोक सकती है उसका मुकाबला कर सकती है और ये सब करके वो कुछ भी गलत नहीं कर रही है और उनका परिवार उनके खुद की रक्षा के लिए उठाये गये किसी भी कदमे उनके साथ है | इसलिए जरुरी है की लड़कियों को ऐसी घटनाओ के बाद ये न बताये की देखो ऐसे कपडे पहनने से ऐसे रात में निकालने से या इस जगह जाने से तुम्हारे साथ ये हो सकता है , ये कह कर उन्हें डराए नहीं उन्हें डरपोक न बनाये बल्कि उनमे विश्वास पैदा करे उससे ये कहे की ऐसी स्थिति आने पर कभी भी डरो मत मुकाबला करो , जरुरत पड़ने पर हमला करो , क्योकि इस भीड़ में ज्यादातर भीड़ बहादुर होते है जो भीड़ की शक्ल में तो बड़े बहादुर बनते है किन्तु अकेले में इनकी इतनी हिम्मत भी नहीं होती है की वो एक चूहे को भी मार सके, ज्यादातर बन्दर घुड़की दने वाले होते है जो सामने वाले ही हिम्मत जांचते है यदि आप पीछे जाते तो उनकी हिम्मत बढ़ती है और जब आप हिम्मत से आगे बढ़ते है तो वो पीछे हट जाते है | मानसिक रूप से मजबूर बने घबराए या हडबडाये नहीं हर किसी के पास मोबाईल होता है तुरंत पुलिस को या जो सबसे करीब है उसे कॉल करके बुलाये और जरुरत पड़े तो अपनी आत्म रक्षा में तुरंत हमला बोल दे ( जब आप के पास वहा से भाग जाने का विकल्प न हो तब , जब आप ऐसे लोगो से घिर जाये तब ) किसी पर भी जो भी आप के हाथ में आये उसी से ऐसे समय पर हमला कर दे आप का पर्स, पेन, बालो के काटे से लेकर सड़क पर पड़ा पत्थर भी आप का हथियार बन सकता है | जब मै छोटी थी तो मेरे चाचा हम लोगो से एक बात बोलते थे (सभी के लिए) की जब कभी भी कई लोग तुम पर हमला करे तो सभी से मुकाबला करने की जगह थोडा ध्यान दो और उनमे से जो सबसे कमजोर या डरपोक दिखे बस उसे पकड़ो और बेतहाशा धोना शुरू कर दो, यहाँ पर सभी आप की ताकत देखना चाहते है पर ये नहीं देखते है की ताकत किसके खिलाफ प्रयोग किया जा रहा है उस कमजोर को जब आप बिना दाये बाये देखे कही भी पिटते है तो वो आप से डरता है और उस समय आप ताकतवर दिखते हो और ऐसे भीड़ के साथ बहादुरी दिखाने वाले डर जाते है और फिर उन्हें समझ में आता है की उसके बाद उनका नंबर भी लग सकता है ( आप ने देखा होगा दो चार मजनू लड़कियों को छेड़ते है जैसे ही लड़की पलट कर किसी एक को पकड़ती है बाकि वहा से भाग जाने में ही अपनी भलाई समझते है तब तो और भी जब लड़किया भी झुण्ड में हो )
चलते चलते
मै धार्मिक महिला नहीं हूँ इस कारण मै देवी देवताओ को उस रूप में नहीं देखती जीस रूप में कोई अन्य देखता है यही कारण है की मै देवी देवताओ को एक सामाजिक जरुरत के कारण समाज द्वारा बनया गया मानती हूँ | इसी के तहत मै ये भी सोचती हूँ की जब संसार में पहले से ही देवी लक्ष्मी , सरस्वती के रूप में नारी के शांत रूप और सती तथा पार्वती के रूप में शक्ति रूप मौजूद था तो क्या कारण था की देवी दुर्गा का निर्माण किया गया | संभव है की समाज ने इस बात की जरुरत समझी हो की नारी को और भी शक्तिशाली और थोडा हिंसक रूप में दिखाया जाये जिससे ये बात स्थापित हो सके की समाज की रक्षा या खुद की रक्षा के लिए नारी को अपना शौम्य, शांता ,संस्कारी, अहिंसक रूप त्याग देने की जरुरत महसूस हो तो वो आसानी से ये कर सके और समाज उसे मान्यता दे सके साथ ही बुरे लोग नारी से भी डर सके | फिर ये भी लगता है की जब दुर्गा जी पहले से ही मौजूद थी तो उनसे भी वीभत्स और रक्त पीने वाली काली का निर्माण क्यों किया गया शायद इस रूप में ये दर्शाना था की दुष्टों को जड़ से ख़त्म किया जाये , इस बार तो उनका संहार हो ही किन्तु इस तरह हो की वो दुबारा जन्म ही न ले सके, दुष्टों दानवों का सम्पूर्ण विनाश करने की शक्ति भी नारी को दी गई शायद कारण ये रहा हो की जन्म देने वाली ही उसे जड़ से ख़त्म कर सकती है , ऐसे दुष्टों का दुबारा जन्म वो ही रोक सकती है साथ की दुर्गा जी के साथ माँ, ममता और दया का जो एक अंश बचा था उसे काली के रूप में बिलकुल भी ख़त्म कर दिया जाये या बहुत कम कर दिया जाये | यही कारण है की कई बार संकट के समय दुष्ट लोगो से खुद को और अपने परिवार को बचाने के लिए नारी से दुर्गा या काली का रूप धारण करने का आवाह्न किया जाता है और इसे कही से भी गलत और हिंसक नहीं माना जाता है | मुझे नहीं लगता है की कोई भी व्यक्ति दुर्गा या काली के रूप में दानवों दुष्टों के विनाश को और समाज दुनिया को बचाने के लिए किये गये संहार को हिंसक मानता होगा | अब ये समाज को तय करना है की क्या वो हर नारी को दुर्गा या उससे भी वीभत्स काली के रूप में बदलने के लिए मजबूर करे या नहीं | ये एक आम महिला की आम सी नीजि राय और सोच है आप इससे विपरीत विचार भी रख सकते है |