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June 12, 2022

ज़िन्दगी की ड्रेजिडियत



  सुबह टहलने के लिए जब निकलती तब पतिदेव जागते और थोड़ी देर बाद में मेरे साथ टहलने पार्क में आते | अक्सर पार्क के दरवाजे पर  रुके रहते जब मैं चक्कर लगाते वहां तक पहुंचती तब मेरे साथ चलते | लेकिन दो चक्कर साथ लगाने के बाद जल्दी जल्दी चल कर मुझसे आगे निकल जाते | 


एक दिन उन्हें बिल्डिंग  से निकलते मैंने पार्क से ही देख लिया | सोचा आज इन्हे मजा चखाती हूँ रोज जल्दी जल्दी चल कर आगे चले जाते हैं आज इन्हे मैं तेज टहलाती हूँ | अपनी रफ़्तार इतनी बढ़ाई कि उनके पार्क के दरवाजे से अंदर आने के जस्ट पहले  पार्क के दरवाजे से आगे बढ़ जाऊ बिना उन्हें देखे  | मुझे तुरंत ही आगे बढ़ा देख  मेरे साथ चलने के लिए  तेज तेज  कदम चलेंगे | 

एकदम यही हुआ भी लेकिन हमने बात और बढ़ाई और अपन चलने की रफ़्तार उसके बाद भी तेज ही रखी  ताकि  कुछ देर और ज़रा  भागें वो  | आध पार्क पार करने के बाद मैंने महसूस किया की  पीछे पतिदेव अपनी रफ़्तार और बढ़ा रहें हैं | 

वापस दरवाजे के पास आते ही वो लगभग भागते मेरे पास आये | कंधे पर हाथ रख हांफते हुए धीरे से मेरे कान में कहा  तुमने टीशर्ट उलटी पहनी हैं | स्यापा अब क्या ही बताऊ की कितना दिमाग खराब हुआ | सोये हुए बाप बेटी को परेशानी ना हो इसके लिए  बिना लाइट जलाये कपडे बदलती हूँ और बाल बनाती हूँ बस वही गड़बड़ी हो गयी थी | 


मैंने कहा पहले ही आवाज दे कर रोककर नहीं  बोल सकते थे | तो बोले अरे मैंने भी तभी देखा जब एकदम तुम्हारे पास आया तुम तो आज भागे जा रही थी  | मैंने कहा ये बात थी और  मैं कब से सोच रही थी कि वो दोनों लड़कियां मास्क पहन कर टहलने के कारण मुझे बार बार देख रही हैं  | 

#लाइफकेस्यापास
#ज़िन्दगीकीड्रेजिडियत