September 09, 2010

अल्लाह ने कहा मेरे बंदे ज्यादा मुर्ख है भगवान ने कहा मेरे भक्त ज्यादा मुर्ख है बोलो कौन सही है_- - - - - - mangopeople

अल्लाह अपने पीसी को देख कर जोर जोर से हसे जा रहे थे भगवान से रहा नहीं गया बोले यार क्यों इतने जोर से हसे जा रहे हो मुझे भी बताओ मैं भी थोड़ा हस लू अल्लाह ने कहा ये देखो इस ब्लॉग में क्या लिखा है लिखते है की आओ ईद पर अल्लाह से दुआ करे की फैसला  हमारे पक्ष में हो और उस ज़मीन पर अल्लाह का घर हम बनाये बोलो अब मेरे इतने बुरे दिन आ गये है की जो हमारे दिए घर में रह रहा है वो हमारे लिए कैपेन कर रहा है मुझ पर विश्वास करने वाला ये कितना मुर्ख है तो भगवान ने कहा मुझ  पर विश्वास करने वाला भी कम नहीं है कह रहा था की यदि उस ज़मीन पर मेरे लिए घर बनने का ठेका उसे नहीं मिला तो वो सड़क पर हजारों लोगों को लेकर उतरेगा और आन्दोलन करेगा कमबख्त पीछे मुड़ कर भी नहीं देख रहा है की उसके पीछे तो कोई है ही नहीं | अल्लाह ने कहा मेरे बंदे ज्यादा मुर्ख है मैंने तो उनसे कहा की मुझे याद करना है तो कही भी एक दिशा की और मुँह करके मुझे याद कर लेना काफी है पर वो अड़े है की वो मुझे याद करेंगे तो उसी एक जगह पर भगवान ने कहा नहीं मित्र मेरे भक्तो की मुरखता के आगे तेरे कुछ भी नहीं है मैंने तो कहा था की मैं तो हर दिशा में हुं कण कण में हुं तुम्हारे अंदर भी हुं जहा चाहो जब चाहो जिस अवस्था में चाहो मुझे याद कर सकते हो पर वो भी अड़ा बैठा है की मैं तो पुजूंगा तुमको तो उसी ज़मीन पर | फिर अल्लाह ने कहा नहीं दोस्त मेरे वाले ज्यादा बेवकूफ़ है मैंने तो यहाँ से एक को भेजा था वो वहा जा कर दो बन गये दोनों ही मुझे मानते है पर एक दूसरे के दुश्मन बन बैठे है एक दूसरे को ही मार रहे है हद तो तब हो गई जब एक तरफ उनके ही भाई बंधु बाढ़ में बहे जा रहे है बजाय उनके मदद करने के ये कमबख्त लगे है  दूसरी तरफ एक दूसरे को मारने में | भगवान ने कहा नहीं मेरे भाई मेरे वाले ज्यादा गधे है मैंने भी उनको एक बना कर भेजा था इन्होंने अपने को इतने हिस्सों में बाट लिया है की मुझसे तो गिना भी नहीं जा रहा है जात के नाम पर क्षेत्र के नाम पर भाषा के नाम पर और पता नहीं किस किस नाम पर और लगे है एक दूसरे को नीचा दिखने एक दूसरे की टाँग खींचने एक दूसरे को मारने और भगाने में अब मैं इनका क्या करूँ | अल्लाह ने कहा असल में बंधु ये सब के सब जाहिल और गावर है इनको क्या पता है हमने भी एक बड़ी कंपनी की तरह बाजार में कई तरह के साबुन उतर रखे है ताकि सभी अपनी सहूलियत के हिसाब से हमारी ही कंम्पनी का साबुन प्रयोग करे ग्राहक कही और ना जाये भगवान ने कहा हा यार जिसे दिन में पांच बार नहाने का शौक है उसके लिए अलग साबुन जो दिन में एक बार रोज नहाये उसके लिए अलग साबुन और जो हफ्ते में बस एक बार नहाने में विश्वास रखता है उसके लिए अलग साबुन और ये नालायक एक ही कंपनी के प्रोडक्ट को कह रहे है की मेरी कंपनी का साबुन तुम्हारे कंपनी के साबुन से ज्यादा अच्छा है क्या आपने इनको हमारे प्रोडक्ट का विज्ञापन करने का कांट्रेक्ट दिया है क्या ? नहीं मेरे भाई जान अल्लाह ने कहा हमारा  दिमाग ख़राब है क्या की मैं ऐसा करो जिनको ये भी नहीं मालूम की सभी साबुन में एक ही चीज मिली है और सब के सब साबुन एक ही काम करता है वो है उनके बदन पर जमी गन्दगी साफ करना हर साबुन को हमी दोनों ने मिल कर बनाया है बस नाम अलग अलग दे दिए है भला मैं उनको ऐसा कोई कांट्रेक्ट क्यों दूँगा | भगवान ने कहा वही तो मेरे साथी हमने जब इन नमाकुलो को बनाया था इनकी अच्छी संरचना को देख कर इनको इंसानियत रूपी एक सुन्दर मजबूत और खास खाल दी थी ताकि ये दूसरे प्राणियों से अलग लगे और इनके लिए खास साबुन भी बनाया ताकि ये उस खास खाल की देखभाल अच्छे से कर सके उस पर कोई मैल न बैठने दे उसे हमेशा चमकदार बनाये रखे पर सब के सब साबुन को लेकर उसका विज्ञापन करने में लगे है की मेरा साबुन तुम्हारे साबुन से ज्यादा अच्छा है इससे तन का मैल अच्छे से साफ होगा पर खुद अपने खाल की मैल उससे साफ नहीं कर रहे है | सही कहा महोदय आपने अल्लाह बोले ये सब के सब नहाने का नाटक करते है उस साबुन से नहाते नहीं है देखिये इनकी खाल कितनी गंदी हो गई है मैल की एक इतनी मोटी परत चढ़ चुकी है की हमारी दी खाल अब तो दिखाई भी नहीं दे रही है | तभी तो ये भी हमारे बनाये बाकी जीवों जानवरों की तरह हो गये है चलो जब इनमें से कुछ को इस खाल की जरुरत है नहीं है तो निकल देते है उनके शरीर से ये खाल और पहना देते है जानवरों की खाल उसी के लायक है सब नालायक | नहीं नहीं ऐसा मत करियेगा भगवान ने कहा ये जंगल में गये तो वहा भी दंगल करेंगे ये तो बड़े खतरनाक हो गये है | तो किया क्या जाये मेरे प्रियवर अल्लाह ने कहा | जानशीन हमें तो कुछ और करना होगा भगवान ने कहा ऐसा करते है की जिन लोगों की खाल पर मैल ज्यादा  है उनकी खाल निकल कर उनको जानवरों की खाल पहना कर ये बताते है की तुम्हारी  पुरानी खाल कितनी अच्छी थी पर तुमने उसकी कदर नहीं की अब भोगो जिनकी खाल पर थोड़ी मैल है उन्हें साफ करने की वार्निग दे कर और जो ये खाल पहले ही उतर चुके है पर कपड़े से अपना शरीर ढक कर मानव होने का फर्जीवाड़ा कर रहे है उसको तो हम सीधे अपने पास ही बुला लेते है उसका हिसाब किताब तो हम लोग यही करते है | राम राम भगवान कसम एक बार वो हमारे  हाथ आये मैं फिर उसे बताता हुं अल्लाह ने कहा | तौबा तौबा अल्लाह कसम भगवान ने कहा उसे एक बार मेरे हाथ आने दो मैं उसे और जोर का बताता हुं |
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अब आप मुझे क्यों ढूँढ रहे है मैं तो जा रही हुं अपनीखाल साफ करने देख रही हुं इस पर भी मैल चढ़ गई है पर परेशानी ये है की मैं तो इस कम्पनी पर विश्वास ही नहीं करती हुं तो उसका साबुन कैसे प्रयोग करूँ कही रिएक्शन कर गया तो सो जा रही हुं हॉकिंग बाबा की शरण में वो कह रहे थे की ये पूरी कंपनी ही फ़र्ज़ी है उन्ही से पूछती हुं की क्या हमारे लिए कोई साबुन  उनके पास है |

15 comments:

  1. क्या बात है ........


    यहाँ भी अपने विचार प्रकट करे ---
    ( कौन हो भारतीय स्त्री का आदर्श - द्रौपदी या सीता.. )
    http://oshotheone.blogspot.com

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  2. दोनों सही है | यहाँ तो भेडिये भी इन्सान की खाल पहन कर बैठे है पहले उन्ही की खाल उतारो |

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  3. anshumala ji,dekh raha hun ki aap likhti kam hai par achcha likhti hai.is baar bhi aapne vishaya achcha chuna hai.blog ke dusre lekh bhi padhe.vyangya me mahaarat hasil hai apko q. lekin imaandari se archana puran singh style me kahu to is baar punches thode kam lage mujhe, pahle ki tulna me.khaaskar ke saabun wali baat me. lekin phir bhi.............ha ha ha ha [ye navjot siddhu tha]

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  4. waise main galat bhi ho sakta hun.par maine pichle lekhon se tulna karne par hi kaha tha.keep writing.

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    1- ईश्वर अल्लाह तेरो नाम...
    सबको सन्मति दे भगवान !

    2- " मैं तो जा रही हुं अपनी खाल साफ करने देख रही हुं इस पर भी मैल चढ़ गई है पर परेशानी ये है की मैं तो इस कम्पनी पर विश्वास ही नहीं करती हुं तो उसका साबुन कैसे प्रयोग करूँ कही रिएक्शन कर गया तो सो जा रही हुं हॉकिंग बाबा की शरण में वो कह रहे थे की ये पूरी कंपनी ही फ़र्ज़ी है उन्ही से पूछती हुं की क्या हमारे लिए कोई साबुन उनके पास है|"

    यह मैल ऐसी पोस्टें लिखने से बहुत अच्छे तरीके से धुलती है...अत: लिखती रहें !

    आभार!


    ...

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    Hi Anshu,

    It's a great post ! soul stirring !

    I checked my skin , it was clean and glowing, but then I realized , the filth is skin deep, it has traversed our soul and flowing in our blood. Our souls need a thorough wash indeed.

    We truly need to realize where we are leading to. Before fighting over religion we ought to think about people in need.

    ..

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  7. राजन जी

    ये पंच सभी के लिए नहीं था जिसके लिए था उसको जोर से लगा होगा बाकियों के लिए हल्का रखा वार्निग के लिए कि अभी भी मौका है सुधर जाओ नहीं तो कहते है कि ऊपर वाले का पंच में आवाज नहीं होती है पर लगती जोर कि है |

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  8. प्रवीन शाह जी

    धन्यवाद मेरे मन का मैल तो साफ हो जायेगा पर जो चिल्ला चिल्ला कर पूरा संसार मैला कर रहे है उनका क्या किया जाये |

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  9. दिव्या जी

    आपने पोस्ट कि आत्मा को अच्छे से समझा पर कुछ नासमझो को ये बाते कभी समझ नहीं आती है |

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  10. हम सभी आँख से अंधे है हमें बस दुसरे के तन का मैल दिखता है अपने तन का नहीं | यदि धर्म रूपी साबुन से हम अपने मन को हमेशा साफ कर सकते तो दुनिया की सारी फसाद ही ख़त्म हो जाती |

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  11. aap hamesha aise vishyon par sahi aur sateek mat pesh karati hain jo sachmuch samaj ki dishaa badal sakte hain. is shandar post ke liye aabhar....... Kash ki hum sab yeh baat samajh jayen......

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  12. .interesting !
    पंच सच में जोरदार :-)

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  13. पोस्ट बहुत अच्छी लगी आपकी। बिना लाऊड हुये आपने गलतियों का अहसास करवाया है, बोले तो अच्छे से धोया है। हम कितनी आसानी से सारे समाज के ठेकेदार बन जाते हैं, जबकि कोई धर्म किसी दूसरे मतावलंबियों पर जोर जबरदस्ती को जायज नहीं ठहरा सकता।
    अन्यथा मत लीजियेगा, मासूम फ़िल्म का गाना थोड़े से बदलाव के साथ लिख रहा हूँ -
    "बहुत खूबसूरत है हर बात लेकिन,
    वर्तनी की गलती न होती तो क्या बात होती"

    इस पोस्ट में वर्तनी की बहुत गलती दिखीं मुझे, और दूसरों के दोष ज्यादा देखने का आदी होने के कारण प्वायंट आऊट भी कर रहा हूँ। वैसे तो मैं खुद सक्षम नहीं हूँ, लेकिन हमारे आधिकारिक आचार्य गिरिजेश जी आजकल कुछ व्यस्त हैं तो मैं इस मौके का फ़ायदा उठा रहा हूँ। जहाँ-जहाँ मैं जाता हूँ और आशा रहती है कि गलत नहीं समझा जायेगा, वहाँ टोकाटाकी कर आता हूँ। वैसे भी दूसरों को नीचा दिखाने में मजा बहुत आता है।

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  14. वर्तनी की गलती बताने के लिए धन्यवाद आगे से और ज्यादा ध्यान रखूंगी | क्या करू इससे तो मेरे साथ ही मेरे संपादक महोदय भी हमेशा परेशान रहते थे पर सुधरती नहीं सुधारना मुश्किल नहीं है पर शायद मै ठीक से चाह नहीं रही हु काम चल जाता है तो चलाती रहती हु | अब गंभीरता से प्रयास करना होगा |

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