May 20, 2011

ऐसे लड़ेंगे हम आतंकवाद से और दाउद को लायेंगे पाकिस्तान से - - - - -mangopeople



                                                                      टीवी चैनलों पर हम सभी ने देखा होगा ग्राहकों को जागरुक करता सरकारी विज्ञापन " जागो ग्राहक जागो " बताया जाता है की किसी भी चीज को खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी डेड यानि उसको इस्तेमाल करने की आखरी तारीख जरुर देख ले, किन्तु  सरकार आम आदमी को तो जगाती रही पर जब उसकी बारी आई तो शायद खुद ही सो गई | देश की सबसे बड़ी "सरकारी" जाँच एजेंसी सी बी आई  १९९५ के पुरुलिया कांड के मुख्य आरोपी किम डेवी के प्रत्यर्पण के लिए कोपेनहेगन पहुची तो उसे पता चला की वो तो डेवी को ले जाने के लिए जो वारंट लाई है वो एक्सपायर हो चूका है |  इस बात की जानकारी भी उन महान अधिकारियो को खुद नहीं हुई उसकी जानकारी भी डेवी के वकील ने दी | खैर ऐसे वैसे कर तुरंत नया वारंट मगाया गया और वहा की आदालत में पेश किया गया |
                                    सरकार और उसकी जाँच एजेंसियों , सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से की गई ये गलती तब बड़ी मामूली लगती है, जब हमें पता चलता है की पाकिस्तान को जो ५० अपराधियों ( भारत के मोस्ट वांटेड ) की लिस्ट दी जा रही है जिनके पाकिस्तान में होने की बात की जा रही है उस लिस्ट में भी बड़ी गड़बड़िया है | पहले तो उस लिस्ट में उस वजाहुल कमर खान का नाम सामने आया जो पहले ही पुलिस के द्वारा पकडे जाने के बाद जमानत पर रिहा है और रोज पुलिस स्टेशन जा कर हाजरी भी लगाता है |  अभी तक इतनी बड़ी गड़बड़ी के बारे में हमारे केन्द्रीय गृह मंत्री जी ठीक से सफाई भी नहीं दे पाए थे की अब उस मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल एक और अपराधी फिरोज अब्दुल रशीद के बारे में कहा जा रहा है की वो तो मुंबई के आर्थर रोड जेल में कसाब के साथ ही बंद है | पहली गलती पर तो केंद्र और राज्य सरकारे एक दुसरे पर दोस मढ़ने लगी वो भी तब जब दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकारे है यदि अलग अलग पार्टी को होती तो इस बड़ी गड़बड़ी को भी राजनीतिक रंग दे दिया जाता और कभी पता ही नहीं चलता की गलती किसकी है | वैसे अधिकारिक रूप से तो अब भी ये नहीं पता चला है की गलती किसकी है और उसे क्या सजा दी जा रही है | किन्तु इन सभी के कारण जो देश की दुनिया के सामने किरकिरी हुई है उसके लिए किसे सजा दिया जाये |   दुनिया के आगे अक्सर हम ये रोना रोते है की अमेरिका से ज्यादा और पहले से तो हम आतंकवाद से पीड़ित है हम तो अपने पडोसी के द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के सताये हुए आदि आदि किन्तु जब इन सब रोने गाने के अलावा काम करने की बारी आती है तो हम ढंग से कागजी कार्यवाही तक नहीं कर पाते है और सपने अमेरिका जैसी कार्यवाही की देखते है | इस कारनामे के बाद क्या लगता है की दुनिया में कोई भी देश हमारे द्वारा पाकिस्तान पर लगाये गए किसी आरोप को गंभीरता से लेगी | क्योकि ये हमारी सुरक्षा और जाँच एजेंसियों द्वारा की गई कोई पहली गलती नहीं है  इसके पहले भी जब २६/११ के मामले में पाकिस्तान को कुछ अपराधियों के फिंगर प्रिंट दिए गए थे तब भी इसी प्रकार की गड़बड़ी की गई थी और दो व्यक्तियों के नाम पर एक ही व्यक्ति का फिंगर प्रिंट दे दिया गया था और उसके पहले भी इसी मामले में डी एन ए दिया गया था तब भी यही गड़बड़ी की गई थी | यानि हम इसे एक मामूली मानवीय भूल समझ कर माफ़ नहीं कर सकते है बल्कि ये सरकार की लापरवाही को दिखा रहा है उसका गंभीर न होना दिखा रहा है  जो बार बार दुहराया जा रहा है |
                                            इस सारे मामले को देख कर हम समझ सकते है की सरकार आतंकवाद से लड़ने को ले कर, २६/११ के मामले में पाकिस्तान से बातचित को लेकर और वहां पर आजाद घूम रहे भारत के  अपराधियों को यहाँ लाने को लेकर कितनी गंभीर है | उसका रवैया बिलकुल उस आम आदमी की तरह है जो सोचता है की खाली पिली होना कुछ है नहीं, दाउद क्या उसका कुत्ते का प्रत्यर्पण भी नहीं होने वाला है, फिजूल में मगज मारी काहे को की जा रही है | यानि सरकार खुद ये मान कर चल रही है की होना कुछ नहीं है बस कागजी खानापूर्ति और दिखावा करना है सो कैसे भी कर दो | अब शायद सभी को समझ में आ गया होगा की मुंबई के २६/११ के अपराधियों पर इतने दबाव और सबूत के बाद भी पाकिस्तान क्यों नहीं कार्यवाही कर रही है | जब हमारी सरकार का ही रवैया इतना ढीला ढाला है तो पाकिस्तान क्या खाक कार्यवाही करेगा  न तो पाकिस्तान के ऊपर और न ही अमेरिका के ऊपर सरकार ने ऐसा कोई दबाव डाला है की वो कार्यवाही के लिए मजबूर हो जाये  बस जनता को बेफकुफ़ बनाने के लिए सतही तौर पर खानापूर्ति की जा रही है | 
                                                        इसे लापरवाही की हद न कहा जाये तो क्या कहा जाये की सरकार को अपने यहाँ पकडे गये आतंकवादियों की कोई खबर नहीं है और दुनिया के सामने दावा ये कर रहे है की हमें पता है जी दाउद से लेकर हमारे सारे मोस्ट वांटेड पाकिस्तान में ही है | और आम आदमी सपने सजा रहा है की हमें भी अमेरिका की तरह पाकिस्तान में घुस कर अपने अपराधियों को मार देना चाहिए | अब सरकार के ये कारनामे देख कर सभी समझ गये होंगे की क्यों मनमोहन सिंह ने अमेरिका जैसी किसी भी कार्यवाही पाकिस्ताने में करने से इंकार कर दिया था | लो जी अपने देश के जेल में बंद अपराधियों का तो हमें पता ही नहीं है पाकिस्तान में कौन कहा छुपा बैठा है इस बात की जानकारी कहा से लायेंगे | अब तो शायद पाकिस्तान कहें की मनमोहन सिंह जी जरा ठीक से अपनी लिस्ट जाँच कर ले ५० में से दो तो आप को भारत में ही मिल गये जरा ध्यान से खोजिये बाकि ४८ भी वही मिल जायेंगे बेकार में हमें बदनाम किये जा रहे है और जिस दाउद को पकड़ने के लिए इतना मारा मारी कर रहे हो उसको पालने पोसने वाला और दाउद को इतना बड़ा बनाने वाला उसका  बाप ही तुम्हारे यहाँ मंत्री बना बैठा है |
                                                             ये सोच कर कोफ़्त होती है की अभी कुछ समय पहले तक हम लादेन के पाकिस्तान में छुपे होने, अमेरिका द्वारा वह घुस कर उसे मारने, पाकिस्तान को इस बारे में कोई जानकारी नहीं होने और सब होने के बाद अंत में पाकिस्तान की स्थिति पर हंस रहे थे उस पर दुनिया भर में चुटकुले बनाये जा रहे थे  और अब शायद पाकिस्तान में हमारे ऊपर चुटकुले बन रहे होंगे |
                                       
                                               ( वैसे मुझे तो अब सक सा हो रहा है की ये गलतिया वास्तव में लापरवाही से हो रही है या हमारी जाँच और सुरक्षा एजेंसियों यहाँ तक की सरकार में बैठा कोई जासूस साजिस तो नहीं कर रहा है, ताकि दुनिया में भारत की किरकिरी हो सके उसके दिए पक्के सबूतों पर भी कोई विश्वास न करे और पाकिस्तान पर लगाये भारत के सारे आरोपों को बस एक राजनीति समझ झुठला दिया जाये | पता नहीं क्या हो रहा है शायद ये भी हो सकता है )
                                                      

29 comments:

  1. पूरी सरकार ही साजिश कर रही है .......बहुत लोगों को खुश रखना है......

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  2. नेताओं और नौकरशाहों को तो धन बटोरने से ही फुर्सत नहीं है तो काम क्‍या खाक करेगी? एक कार्टून था कि ढूंढ लो कहीं आपकी लिस्‍ट में से किसी ने चुनाव तो नहीं लड़ा है?

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  3. चिंताजनक स्थिति।

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  4. सही कहा.राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी एक बडी समस्या है.सीबीआई को भी क्या दोष दें.उसे तो बिना नखून और पंजों वाला शेर बना रखा है.हालत ये है कि एक मामूली केस फाईल करने के लिये भी सीबीआई को सचिव स्तर के व्यक्ति से अनुमति लेनी पडती है.ऐसे में कोई कैसे स्वतंत्र और निष्पक्ष रहकर काम कर सकता है.और ये पुरुलिया कांड एक न्यारा ही है,आम आदमी किस किसको याद रखे.

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  5. sarkar hamse hi hai...aur ham jaise hi log hain sarkar me....yani ye manana parega ki ham bhartiya normally kisi bhi baat ke prati bahut sanjeedagi nahi dikha pate...chahe wo atankwaad hi kyon na ho...to hame apne andar jhankna hi hoga....!

    rahi baat grih mantri ke byan ki to....jab bachche se galti ho jati hai...to uske ma-papa uss galti ko dabane ki koshish karte hi hain...!!

    lekin ye manana hoga...aisee galti kar ke bharat sarkar apne ko ek nau-sikhiya desh sabit kar rahi hai...:X

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  6. अंशुमाला जी सी बी आइ ने मोस्ट वांटेड की लिस्ट में हुयी गड़बड़ी मामले की तुरंत जाँच शुरू करते हुए इंस्पेक्टर दर्जे के एक अधिकारी को निलंबित कर दिया और डी एस पी तथा एस पी स्तर के दो अधिकारीयों का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया गया.


    जरा सोचिये निचले दर्जे के अधिकारी का निलंबन और उपरी स्तर के अधिकारीयों का मात्र तबादला. वैसे निलंबन कोई सजा नहीं है पर एक कर्मचारी के लिए बहुत बड़ी मानसिक प्रताड़ना तो है ही. सरकारी न्याय के हिसाब से देखे तो लिस्ट को बनाने में सबसे ज्यादा जिम्मेदार अधिकारी सबसे निचले दर्जे का है. जिस देश में सरकार इतने महत्वपूर्ण कार्य के लिए एक छोटे कर्मचारी पर निर्भर हो उस देश का क्या होगा. हमारे देश में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन लोग इसलिए सुरक्षित रहते हैं क्योंकि जब भी कोई गलती होती है तो उन्हें जेम्मेदार ठहराया ही नहीं जाता बल्कि किसी छोटे स्तर के व्यक्ति को सूली पर चढ़ा दिया जाता है और सभी उच्च अधिकारी अपनी गलतियाँ दोहराने के लिए आजाद घुमते रहते हैं.


    यदि हमारे देश में किसी भी सरकारी महकमे में हुयी गलती के लिए उच्च अधिकारी को सजा दी जय तो शायद ऐसी गलतिय होनी बहुत कम हो जाएँ. जब मैं नौकरी पर लगा था तो एक बार मैंने अपने अधिकारी की गलती खोज निकली और उसे सार्वजनिक भी कर दिया तो मेरे उस अधिकारी ने मुझे धमकी देते हुए कहा था की अगर कहीं कोई जाँच हुयी तो जाँच करने वाले अधिकारी हमेशा अपने कैडर वाले अधिकारी का ही साथ देंगें और अधिनस्त कर्मचारी ही फसेंगा. मैंने तो आज तक अपने देश में ९० प्रतिशत मामलों में यही बात देखि है.

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  7. सही कह रही हैं...
    रोज़ टाइम्स ऑफ इण्डिया के हेड लाइंस देख शर्म से सर झुक जा रहा है.....पाकिस्तान के ख़बरों की हेड लाइंस यही होती होगी...और कितना मजाक उड़ाया जाता होगा,हमारा :(

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  8. टिप्पणी देकर प्रोत्साहित करने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
    बहुत बढ़िया लगा! बिल्कुल सही लिखा है आपने !उम्दा प्रस्तुती!
    मेरे ब्लोगों पर आपका स्वागत है!

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  9. @ देवेन्द्र जी

    धन्यवाद |

    @ मोनिका जी

    हा ये भी हो सकता है |

    @ सुनील जी

    ॐ शांति |

    @ अजित जी

    लड़ा नहीं होगा तो अब लड़वा देंगे हमारे नेता, लिस्ट से दो यहाँ जो मिल गए है |

    @ मनोज जी

    धन्यवाद |

    @ राजन जी

    बात तो आप की ठीक है किन्तु यहाँ तो उन्हें अपने साथ ले जा रहे पेपर की ठीक से जाचना था इसके लिए उन्हें किसी के इजाजत की जरुरत नहीं थी |

    @ मुकेश जी

    बिलकुल सहमत हूँ आप से हम भारतीयों को सब कुछ हलके से लेने की आदत ही है |

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  10. @ दीप जी

    आप ने तो मेरी अगली पोस्ट की सारी बाते यही लिख दी | सही कह रहे है आप असल में ये गलती बार बार इसीलिए दोहराई जाती है क्योकि इन सब के लिए जिम्मेदार असली व्यक्ति को सजा न दे कर सबसे निचे की कमजोर कड़ी को सजा दी जाती है जिससे फायदा कुछ नहीं होता, कुसूरवार अपनी जगह बना रहता है और बार बार वही गलती दोहराता है और हर बार बलि का बकरा कोई और बन जाता है | जिस दिन ये तरीका बदलेगा उसी दिन इस प्रकार की गलतियों पर रोक लगेगी |

    @ रश्मि जी

    हमारे सर तो शर्म से झुक जा रहे है पर हमारी सरकारों को कोई शर्म नहीं आती शायद |

    @ बबली जी

    धन्यवाद |

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  11. अंधेर नगरी चौपट राजा है और क्या...

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  12. ये लिस्ट बनाने में उतनी ही गंभीरता बरती गई जितनी कि घर के लिए तेल, नून मंगाने में पंसारी के लिए लिस्ट बनाई जाती है...

    गाना याद आ रहा है, दिल तो दिल है....उसी की तर्ज़ पर...लिस्ट तो लिस्ट है...सबको पता है न पाकिस्तान ने इस पर कुछ करना है और न ही हमनें अपनी ओर से कोई कार्रवाई करनी है...

    जय हिंद...

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  13. असल में यह हमारा राष्‍ट्रीय चरित्र है। यहां बात मोस्‍ट वांटेड अपराधियों की सूची की हो रही है। इसलिए इतनी हाय तौबा मच रही है। तमाम तरह की सूचियां बनती हैं,उनमें भी इस तरह की गलतियां होती हैं। जो वर्षों पहले सिधार चुके होते हैं,उनके नाम हमारे राशनकार्डों में सालों दर्ज रहते हैं। सिधार हुए लोगों के नाम पर घर,जमीन,गैस के कनेक्‍शन,गाडि़यां और भी न जाने क्‍या रहता है। हम सबको उनके लिए भी इतना ही परेशान हो सर्तक रहना चाहिए।

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  14. बहुत सही। आपने सच कहने का साहस दिखाया वरना यहां तो....

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  15. सरकार की गंभीरता पर आप शक सा, सॉरी सक सा न करें। सरकार, सी.बी.आई आदि बहुत गंभीर हैं। कुछ लोगों का मुँह सीने के लिये इन्हें कारवाई का ड्रामा सा करना पड़ता है अन्यथा अपनी उदार, शान्तिप्रिय, धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील आदि आदि छवियों को लेकर ये बहुत गंभीर हैं। वारंट की डेट एक्सपायर होना आदि वो टैक्निकल लैकूना हैं जिनके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि काम होता हुआ दिखे लेकिन हो नहीं।
    सी.बी.आई. का चरित्र देखना हो तो केन्द्र में सरकार किसकी है, गठबंधन में कौन आ रहा है, कौन आंखें दिखा रहा है, कौन उपयोगी\अनुपयोगी है ये वो फ़ैक्टर्स हैं जो व्यक्ति विशेष पर दर्ज मुकदमों की कार्रवाई कैसे कैसे बदलती है, ट्रैक रिकार्ड देखिये।

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  16. अंशुमाला जी!
    बहुत छोटी सी बात है कहीं पढ़ी थी.. पता नहीं पाकिस्तान TERRORIST COUNTRY है या नहीं लेकिन हमारा देश एक "ERRORIST COUNTRY" तो साबित हो ही चुका है!!

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  17. हम भ्रष्टाचार में ही नहीं बदइन्तजामी और लापरवाही में भी अग्रणी हैं |

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  18. @ शिखा जी

    हा सही कह रही है |

    @ खुशदीप जी

    जी नहीं हम महिलाओ से पूछिये हम वो लिस्ट भी सरकार से ज्यादा गंभीरता से बनाते है क्या मजाल की उसमे एक भी गड़बड़ी आ जाये क्योकि हम उसे एक बार क्रास चेक भी करते है |

    @ राजेश जी

    बिलकुल सही कह रहे है ये हमारा राष्ट्रिय चरित्र ही लापरवाह होने का |

    @ दिनेश जी

    धन्यवाद |

    @ संजय जी

    हमारा शक दूर करने के लिए धनबाद पटना आप का हुआ | जी हा काम होने से ज्यादा जरुरी है की काम होता हुआ दिखे और वही सरकार कर रही है |

    @ सलिल जी

    वास्तव में हम ऐसे ही है |

    @ हेम पाण्डेय जी

    क्या करे अच्छी काम की चीजो में तो हम आगे हो नहीं सकते तो .........

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  19. बिल्कुल सच। आग उगलता ये लेख, सच्चाई की कसौटी पर पूरी तरह खरा है।

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  20. aajkal aap hamare blog pe dustak nahi de rahi hain....plz aisa na karen..

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  21. लगता नहीं कि अभी तक अबू सलेम के खिलाफ भी हम कुछ साबित कर पाए हैं। मोनिका बेदी भी स्टेज पर जब-तब नाचती दिख जाती है। दाउद के खिलाफ भी हमारे पास ठोस सबूत है,कहना मुश्किल है।

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  22. आपके दोनो ही संदेह सत्य हो सकते हैं लापरवाही तो दिखती ही है,जासूसी से भी इंकार नहीं किया जा सकता.
    आपका लेख बहुत कुछ सच्चाई बयां करता है.समय रहते चेतने की
    जरुरत है.

    यधपि अध्यात्म में आपकी रूचि कम है,यह आपने मुझे बताया था,परन्तु इसके बाबजूद भी आप मेरे ब्लॉग पर आयीं और सुन्दर टिप्पणी देकर आपने निहाल किया मुझको.इसी से प्रेरित हो कर पुन:आपसे आग्रह कर रहा हूँ कि आप मेरे ब्लॉग पर आयें.अबकी बार
    'सरयू' स्नान का न्यौता है.मुझे उम्मीद है आप निराश नहीं होंगी.

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  23. अगले चुनाव तक सिर्फ़ इन्तजार करना होगा,

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  24. चिन्ताजन्क स्थिति।

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  25. लीगल सैल से मिले वकील की मैंने अपनी शिकायत उच्चस्तर के अधिकारीयों के पास भेज तो दी हैं. अब बस देखना हैं कि-वो खुद कितने बड़े ईमानदार है और अब मेरी शिकायत उनकी ईमानदारी पर ही एक प्रश्नचिन्ह है

    मैंने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर श्री बी.के. गुप्ता जी को एक पत्र कल ही लिखकर भेजा है कि-दोषी को सजा हो और निर्दोष शोषित न हो. दिल्ली पुलिस विभाग में फैली अव्यवस्था मैं सुधार करें

    कदम-कदम पर भ्रष्टाचार ने अब मेरी जीने की इच्छा खत्म कर दी है.. माननीय राष्ट्रपति जी मुझे इच्छा मृत्यु प्रदान करके कृतार्थ करें मैंने जो भी कदम उठाया है. वो सब मज़बूरी मैं लिया गया निर्णय है. हो सकता कुछ लोगों को यह पसंद न आये लेकिन जिस पर बीत रही होती हैं उसको ही पता होता है कि किस पीड़ा से गुजर रहा है.

    मेरी पत्नी और सुसराल वालों ने महिलाओं के हितों के लिए बनाये कानूनों का दुरपयोग करते हुए मेरे ऊपर फर्जी केस दर्ज करवा दिए..मैंने पत्नी की जो मानसिक यातनाएं भुगती हैं थोड़ी बहुत पूंजी अपने कार्यों के माध्यम जमा की थी.सभी कार्य बंद होने के, बिमारियों की दवाइयों में और केसों की भागदौड़ में खर्च होने के कारण आज स्थिति यह है कि-पत्रकार हूँ इसलिए भीख भी नहीं मांग सकता हूँ और अपना ज़मीर व ईमान बेच नहीं सकता हूँ.

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  26. इतने दिन हो गये कोई पोस्ट नहीं, आप टंकी पर चढ़ी हैं क्या? बता तो देना था ताकि अपील वगैरह कर देते:)

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  27. anshumala jee aajkal aap kahan hai :)

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