June 28, 2011

किसने कहा की ये "बेशर्मी मोर्चा" बाकि दुनिया से भारत आया है ये तो पूरी तरह से भारतीय है - - - - - - mangopeople




                                                                    आज कल काफी चर्चा है "बेशर्मी मोर्चा" की अब तक तो आप सभी इसकी इतिहास, भूगोल , पृष्ठभूमि और भारत में इसके प्रवेश आदि पर काफी कुछ पढ़ सुन और कह चुके होंगे | किन्तु सभी जगह लगभग यही बात दुहराई जा रही है की ये कनाडा से होते हुए बाकि दुनिया घूम कर भारत आया है किन्तु वास्तव में भारत में इस तरह का विरोध प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है , हा पहले इतनी चर्चा नहीं हुई | कारण दो हो सकते है एक तो ये की अभी तक इस तरह का विरोध गरीब लाचार और कानून के आगे मजबूर तबके ने किया था दूसरा ये की हम सभी भारतीयों को विदेश से आई चीज की ज्यादा चर्चा की आदत होती है पर अफसोस की ये "बेशर्मी मोर्चा " तो भारतीय कांसेप्ट है |
                             भारत में बलात्कार का विरोध करने के लिए और महिलाओ की सुरक्षा के लिए इस तरह का मोर्चा निकालने की एक घटना सालो पहले देश के पूर्वोत्तर भाग में हो चुकी है | किन्तु वो मोर्चा आज के इस "बेशर्मी मोर्चा" से कही ज्यादा बोल्ड था क्योकि उस मोर्चे में महिलाओ ने एक भी वस्त्र धारण नहीं किये थे, सर से पांव तक वो नग्न थी और "आओ और मुझसे बलात्कार करो" के नारे भी लगा रही थी | ये मोर्चा निकाला गया था हमारे ही देश की सुरक्षा में लगे सेना के खिलाफ ( ये भी क्या गजब का संजोग है की कनाडा में भी ये विरोध मार्च सुरक्षा में लगे एक पुलिस वाले की कथन के बाद ही निकला गया था ) जिन पर आरोप था ( मै इसे सिर्फ आरोप नहीं मानती ये अपराध हुए थे ) की सेना के जवान वहा की लड़कियों का अपहरण करके सामूहिक बलात्कार करने के बाद हत्या कर देते है | इस तरह की कई घटाने हुई थी और सेना के जवानों पर आरोप लगाये गये किन्तु सेना ने कोई कार्यवाही नहीं की जिसके विरोध में वहा की ४५ से ६० साल की आम बुजुर्ग महिलाओ ने सेना के खिलाफ निर्वस्त्र हो कर प्रदर्शन किया और नारे लगाये की आओ और हमारा बलात्कार करो | ये सब मिडिया को दिखाने के लिए नहीं किया गया था (शायद वहा तो मिडिया के जाने की इजाजत तक नहीं थी) किन्तु फिर भी इस मोर्चे को घरो से छुप पर सुट किया गया और राष्ट्रिय न्यूज चैनलों ने इसे दिखाया भी गया | किन्तु मिडिया द्वारा इसे उस तरह  चर्चा में नहीं लाया गया ( आप देखिएगा अभी कुछ दिनों बाद आज के "बेशर्मी मोर्चे " को मिडिया कितना हाथो हाथ लेती है कितना इसे उछाला जाता है इस पे परिचर्चा की जाएगी बड़े बड़े लोगो को बुला कर इस पर राय ली जाएगी और महीनो तक प्राइम टाइम में ये छाया रहेगा )  जैसा इसे लाना चाहिए था कारण सरकार का दबाव भी हो सकता है क्योकि ये सेना के खिलाफ था और वैसे भी देश के उस हिस्से से हम सभी हमेसा से सौतेला व्यवहार करते आये है उसके दर्द परेशानी से हमें कभी कोई मतलब नहीं रहा है |
                                                                       ये तो रहा एक समूह द्वारा निकला गया मोर्चा किन्तु इस तरह का मोर्चा एक अकेली महिला ने भी निकला था | शहर था कोई यु पी का ( माफ़ करे घटना कुछ साल पुरानी है इसलिए शहर का नाम तो याद नहीं आ रहा है ) महिला गरीब तबके से थी और २७-२८ साल विवाहित महिला थी |  उसे इलाके का गुंडा काफी परेशान करता था छेड़छाड़ करता था उसको उठा ले जाने की धमकी देता और उसके पति द्वारा रोकने पर उसके साथ भी मारपीट करता था | महिला कई बार उसकी शिकायत पुलिस में कर चुकी थी किन्तु पुलिस कभी उसकी एफ आई आर दर्ज नहीं करती बस मुंह जबानी उसे आश्वासन दे देती थी | एक दिन जब उसके बर्दास्त करने की सारी हदे पार हो गई तो वो घर से निकल पड़ा पुलिस स्टेशन वो भी पहने जाने वाले सबसे कम कपड़ो में ( आप उसे बिकनी कह सकते है हिंदी में उसे जो कहते है उसे ठीक से लिख नहीं पा रही हूँ ) इस तरह के मोर्चे को देख पुलिस भी हडबडा गई और उसे तुरंत महिला की शिकायत दर्ज करनी पड़ी और थोड़ी कड़ी कार्यवाही भी करनी पड़ी और मिडिया के जाने के बाद महिला के इस कदम की खूब आलोचन भी की कि महिला को ये सब करने की कोई जरुरत नहीं थी | अब पुलिस वाले ने सारी कार्यवाही महिला के उस रूप को देख कर किया या मिडिया का मजमा लगने के कारण किया पता नहीं किन्तु जो बात वो महिला शालीनता से कहती रही उसे पुलिस वालो ने अनसुना कर दिया और सुना तभी जब महिला ने शर्म छोड़ बेशर्मी को अपना हथियार बना लिया | वैसे कुछ चैनल वालो का भी जवाब नहीं  उन्होंने ने भी महिला को टीवी पर जस का तस दिखाने में कोई गुरेज नहीं की दो तीन बार पूरी किलिपिंग दिखाने के बाद शायद उन्हें शर्म आई और तब जा कर महिला की तस्वीर को धुंधला करना शुरू किया ( पर यहाँ  भी संजोग देखिये की यहाँ भी बेशर्मी मोर्चा निकालने का कारण सुरक्षा में लगे लोगो की लापरवाही रही )
    
                                                   ये तो एक आध धटनाये है जब महिलाओ ने अपने खिलाफ हो रहे बलात्कार, शारीरिक शोषण और अपनी सुरक्षा के कारण शर्म त्याग कर "बेशर्मी मोर्चा" निकला | किन्तु हमारे भारतीय समाज में तो इस तरह की घटनाओ से भरा पड़ा है जब समाज के लोगो ने शर्म छोड़ कर महिलाओ का इस तरह का बेशर्मी मोर्चा निकाला हो | ये घटनाये इतनी आम सी है की हम तो उस पर ध्यान देने की जरुरत भी नहीं समझते है अख़बार के किसी एक कोने में या टीवी के समाचार में दो लाइनों की ये खबर सुनाई जाती है की फलाने गांव में कुछ दबंग लोगो ने महिला को निर्वस्त्र कर पुरे गांव में घुमाया कुछ दबंग लोग बेशर्म हो कर ये बेशर्मी का मोर्चा निकालते है और बाकि बेशर्म उसे चुपचाप होता देखते है | ये भी हमारे देश में निकाला जाने वाला एक तरह का बेशर्मी मोर्चा है जो समाज में बेशर्मी का सबूत हमें देता है |
      
                                                     समझ नहीं आता की ज्यादा बेशर्म कौन है वो बलात्कार करने वाला जो कुछ पलो के शारीरिक आन्नद के लिए किसी का पूरा जीवन नष्ट कर देता है या उसका जीवन ही ले लेता है या वो समाज और लोग जो ऐसे कृत्य के लिए पीड़ित को ही दोषी करार देते है और जीवित रहते भी उसे हर पल मारते है या वो सरकार, प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था जिसमे महिलाओ को अपने हक़ के लिए इस तरह के मोर्चे निकालने पड़ते है  या वो महिलाये जो अपने इसी शरीर के साथ सुरक्षित जीवन जीने के लिए, अपनी इच्छा का जीवन जीने के लिए एक सुरक्षित समाज की मांग करती है | 

  मुझे तो लगता है की सबसे बेशर्म तो वो महिलाए है जो महिला हो कर खुद को इन्सान समझने की भूल करती है , अपने लिए सुरक्षित समाज की मांग करती है , महिला हो कर भी अपने लिए हक़ और अधिकार जैसी चीजो की मांग करती है बड़ी बेशर्म है ये महिलाये |


नोट - कोई लिंक आदि खोजना और आप को देना मेरे बस कि बात नहीं है जिन घटनाओ का जिक्र किया है सभी के वीडियो सबूत है आप खुद यु ट्यूब पर खंगाले आप को जरुर मिल जायेगा | किन्तु इस मुद्दे पर और जानकारी के लिए ये लिंक दे रही हूँ ( प्रवीण शाह जी के आभार )|
                                                                      
                                                             



June 20, 2011

काश होती मै लता मंगेशकर - - - - - mangopeople



                                                                       अचानक से कुछ महीनो से अपने लता मंगेशकर न होने क अफसोस हो रहा है, काश की मै भी लता जी जैसी कोई बड़ी सेलिब्रेटी होती, नहीं नहीं अचानक से मुझे गाने का शौक नहीं हुआ है असल में मै सोच रही थी की 
यदि होती मै लता मंगेशकर तो मै भी अपने घर की तरफ आने वाले हवा, पानी, धुप को रोकने वाली सारी बाधाओ  को अपनी ऊँची पहुँच और रुतबे का प्रयोग कर रोक लेती किन्तु मै ऐसा कुछ नहीं कर पा रही हूँ | लता जी ने तो एक बार धमकी दी की यदि उनके घर के आगे फ्लाई ओवर बना तो वो मुंबई ही छोड़ कर चली जायेंगी राज्य के मुख्यमंत्री तक से इस विषय में मिल आई और उनके सम्मान और सेहत को ध्यान में रखते हुए उस प्रोजेक्ट को रोक दिया गया | किन्तु मै आम आदमी हूँ मेरे और मेरे परिवार के सेहत की चिंता किसी नेता की किसी भी लिस्ट में नहीं आता है मरता है तो मरे हमें क्या ,जीता है तो हमें वोट दे नहीं तो जा कर कही मरे, बिगड़ती है उसकी सेहत तो बिगड़े हमें क्या |
                                      एक तो पहले से ही मै कंक्रीट के जंगल मुंबई में रहती हूँ जहा हरियाली कम और सीमेंट के बड़े बड़े पेड़ चारो तरफ उगते जा रहे है जो खुद एक दुसरे का भी और कुछ छोटे पौधा का भी हवा पानी धुप रोक रहे है उस पर से विकास के नाम पर चल रहे नए प्रोजेक्ट ने तो हमारा साँस लेना भी मुहाल कर रखा है | पिछले एक दो सालो से अचानक लगने लगा की जैसे गर्मी कुछ ज्यादा ही पड़ रही है अब हवा चलना बंद हो गया है, पश्चिम की तरफ हमारे बेडरूम की खिड़की से अब वैसी हवा नहीं आती जैसी की कुछ समय पहले तक आती थी | राज कुछ महीनो पहले पता चला जब एक दिन सुबह सुबह वो खिड़की खोली और सूरज की तेज रोशनी से आँखे चौंधिया गई | लगा ये भगवान क्या दुनिया ख़त्म होने का समय आ गया है सूरज पश्चिम से क्यों उग आया है | असल में सड़क के उस पार और ठीक हमारी खिड़की के सामने जो टावर खड़ा हो रहा था उस पर बड़े बड़े कांच लगा दिए गए थे जिससे सूरज की रोशनी टकरा कर सीधे हमारी खिड़की के अन्दर आ रहा था और तब पता चला की वही टावर हमारे घर आ रहे हवा को भी रोक रहा था | सड़क के उस पार एक पुरानी बंद पड़ी मिल थी और उसके बाद रेलवे ट्रैक था जिसके कारण दूर दूर तक खुली जगह थी जो बिना किसी बाधा के हमारे घर तक समन्दर से आने वाली हवा लाती थी साथ ही डूबते सूरज का सुन्दर नजारा भी दिखाता था जो उस टावर के खड़े होने के बाद बंद हो गई | वो टावर हमारे इलाके की शान बनता जा रहा है इस प्रचार के साथ की वो दक्षिण मुंबई का सबसे ऊँचा व्यवसायिक ईमारत  है और कोई हम लोगो से पूछे की वो इलाके का शान कैसे पुरे इलाके की हवा को रोका रहा है | मामला यही ख़त्म नहीं होता है मेरे लिविंग रूम की बड़ी खिड़की दक्षिण दिशा में खुलती है वहा पर मैंने ३० -३५ गमले लगा रखे है (पहले गार्डेन में गमले होते थे, मुंबई में तो गमलो में ही गार्डेन है ) वहा पर पौधो को तो अच्छी धुप लगती ही है साथ ही वो रास्ता है मेरे घर में धुप आने का ,किन्तु अब कुछ महीनो बाद उस धुप पर भी रोक लगने वाली है क्योकि हमारे घर के सामने से मोनो रेल का ट्रैक बनने जा रहा है जो हमरी मंजिल से ऊपर बनेगा | हम जो पहले ही दूसरी मंजिल पर रहते है सामने से गुजर रहे फ्लाई ओवर से त्रस्त थे ( शुक्र था की वो मुख्य रास्ता न हो कर बस दो मुख्य सड़को को जोड़ने वाला छोटा रास्ता ही था जहा सुबह शाम ही भीड़ होती थी ) अब हमारे सर पर से मोनो रेल गुजरने वाली है वो लगभग तीसरी मजिल तक बनेगा | मोनो रेल दिल्ली की मैट्रो की तरह ही ब्रिज बना कर उस पर चलाया जायेगा | ये प्रोजेक्ट हमसे हमारी धुप ही नहीं छिनेगा बल्कि बरसात में मिलने वाला नजारा और मेरे पौधो को मिलने वाला बरसाती पानी भी रोकेगा जो बरसात के दिनों में उन्हें मिलता है |
                                                             किसानी के जमीन की और किसानो की , कटते जंगल की वहा रहते आदिवासियों की ,  पर्यावरण को हो रहे नुकशान की सभी को चिंता है आन्दोलन हो रहे है किसानो के हक़ में उद्योगपतियों को भगाया जा रहा है आदिवासियों के लिए आन्दोलन हो रहे है जंगल बचाने के लिए आन्दोलन हो रहे है | पर हम शहरो में रहने वाले मध्यमवर्ग के हवा पानी धुप को जो रोका जा रहा है उसकी सेहत के साथ जो खिलवाड़ हो रहा है उसकी चिंता किसी को नहीं है न केंद्र सरकारों को न राज्य सरकारों को ( कम्बखत दोनों जगह तो एक ही सरकार है तो किसको हमारी चिंता होगी, उड़ीसा ,पश्चिम बंगाल, यु पी की तरह अलग अलग सरकारे होती तो बात कुछ बन सकती थी )  न यहाँ के समाज सेवको को ( मेधा पाटेकर तो उड़ीसा जा रही है कभी हम लोगो का दर्द भी देख लेती ) अब हमारे लिए कौन आन्दोलन करेगा क्योकि हम लता मंगेशकर तो है नहीं जो अकेले कुछ कहे ( मिल कर भी कहे तो कौन सुनने वाला है ) और कोई सुन ले या यहाँ से जाने की धमकी दे तो कई सुन लेगा ( ये तो गलती से भी नहीं कह सकती, यहाँ तो पहले से ही एक नहीं दो पार्टिया हमें भागने में लगी है कह दिया तो जरुर घर तक आ जाएँगी हमारी मदद के लिए सामान बंधवा कर स्टेशन तक छोड़ने के लिए ) | फिर आन्दोलन करे भी तो क्या करे हमारे पास जमीन तो है नहीं जिसके जाने का नाम ले कर लड़े,  हम तो हवा में लटक रहे है न जमीन अपनी है न तो छत अकेले हमारी है और लड़े तो हवा पानी धुप के लिए कितने लोग साथ देंगे और हमारी सुनेगा कौन | हा ये हो सकता है की साथ देने कोई नहीं आये किन्तु आवाजाही की परेशानी झेल रहा एक बड़ा वर्ग हमारा विरोध करने जरुर चला आये |
  मोनो रेल के लिए हमारे घर के सामने खड़े तीन बड़े बड़े पेड़ काट दिए गये जो हमारे घर आने वाली हवा का दूसरा स्रोत था और हमारे घर के आगे से जब वो आगे दो किलीमीटर तक बढ़ता है तो पुरे रास्ते में जो पहले पूरी तरह से पेड़ो से भरा था और पुरे रास्ते को बारह महीने पड़ने वाली मुम्बईया गर्मी से राहत देता था को जड़ से काट दिया गया | फर्क कल नहीं आज से ही पता चल रहा है दिन पर दिन असनीय गर्मी बढ़ती जा रही है अब उस रास्ते पर चलना उतना आराम दायक सकून भरा नहीं रहा , जबकि पहले ऐसा नहीं था पेड़ो से भरा वो रास्ता न केवल सूरज की गर्मी जमीन पर कम कर देता था साथ ही अच्छी हवा भी देता था , जो अब हमें नहीं मिल रहा है उस पर से बीच में ब्रिज बनने रास्ते के सकरे होने के कारण होने वाला ट्रैफिक जाम हमारे लिए बोनस है | जो गाडियों के प्रेट्रोल की खपत और बढ़ा रहा है साथ ही और ज्यादा  धुँआ और ज्यादा शोर की जगह भी बनता जा रहा है | सिर्फ एक दो सालो में ये पूरा क्षेत्र विकास के नाम पर पर्यावरण पुरे वातावरण की बलि चढ़ा चूका है और लोग खुश है की विकास हो रहा है |
                                                                            किन्तु सभी को इससे परेशानी नहीं है कुछ लोगो का नजरिया हमसे बिलकुल अलग है वो हमें मोनो रेल बनने और पुरे क्षेत्र में खड़े हो रहे बड़े बड़े कंक्रीट के जंगलो के लिए बधाई देते है की आप का एरिया तो काफी विकास कर रहा है मोनो रेल के आने से तो आप के घर की कीमत तो और भी बढ़ जायेगी ( जो पहले से ही आसमान पर है ) | आप को कही भी आने जाने के लिए और भी आराम हो जायेगा मुंबई को जोड़ने वाली तीनो लाइने आप के घर के दरवाजे पर होगी ( जिसका प्रयोग हम कभी कादर ही करते है शायद इसीलिए हमारा नजरिया दूसरो से अलग है ) | जबकि हमें अब लगने लगा है जैसे कुछ ही दिनों बाद हमें लगेगा की हम किसी स्लम में रह रहे है सामने ओवर ब्रिज ऊपर मोनो रेल आस पास तीन रेलवे स्टेशन , फिर शोर, भीड़, धुल, गर्मी, तो बोनस में हमें और मिलने ही वाले है |
                                         ये सब हमारे ही क्षेत्र में नहीं हो रहा है ये तो पुरे मुंबई का हाल है | कहने के लिए तो संजय गाँधी नेशनल पार्क मुंबई का सबसे बड़ा हरित क्षेत्र है किन्तु अब ये धीरे धीरे सिकुड़ता जा रहा है लोग नेशनल पार्क को काट काट कर घर बनाते जा रहे है और कुछ तो उनके अन्दर ही पूरी बस्ती बना कर रह रहे है | अब सुना है की सी लिंक परियोजना बंद कर दी जायेगी क्योकि ये महंगा पड रहा है अब उसकी जगह समुन्द्र के किनारों को पाट कर समुन्द्र के किनारे किनारे एक सड़क का निर्माण किया जायेगा | जबकि कई बार समुन्द्र को इस तरह पाटने को लेकर विरोध किया जा चूका है और इससे होने वाले नुकशान को भी बताया जा चूका है पर सुनने वाला कोई नहीं है, तब भी नहीं जब ये मुंबई कुछ साल पहले २६ जुलाई को आई बाढ़ की भयानकता को झेल चूका है जिसके लिए एक बड़ी वजह यहाँ पर बह रही मीठी नदी को पाट कर बिलकुल गायब कर देना भी था ( तभी से मीठी नदी भी गंगा बन चुकी है उसकी सफाई और रख रखाव के नाम पर करोडो हजम हो चुके है पर नदी अब भी वैसी की वैसी ही है जैसे की गंगा के गन्दगी कभी साफ नहीं हुई करोडो रुपये जरुर सरकारी तिजोरी से साफ हो गये ) |
                              ऐसा नहीं है की विकास बिना पर्यावरण को नुकशान पहुचाये हो ही नहीं सकता है किन्तु उसके लिए शायद ज्यादा दिमाग और पैसे खर्च करने पड़े जिसका काफी टोटा है हमारे देश में | नीति निर्माता हर प्रोजेक्ट वर्तमान देख कर बना रहे है भविष्य के बारे में कोई कुछ भी सोचने के लिए तैयार नहीं है और न ही इस अंधाधुंध होने वाले विकास के नाम के बर्बादी के बारे में | सभी हर मुश्किल का फौरी इलाज कर रहे है और इस इलाज से होने वाले साइड इफेक्ट के बारे में कोई भी सोचने के लिए तैयार नहीं है सभी का रवैया वही है तब की तब देख ली जाएगी या तब फिर उसके लिए भी कोई फौरी नीति बना ली जायेगी | इन सब से सबसे ज्यादा नुकशान किसे होगा शायद हमारे बच्चो को जो अभी अपने शारीरिक मानसिक विकास के दौर से गुजर रहे है पता नहीं उन पर क्या असर हो रहा है | बड़ो में दिन पर दिन बढ़ता चिडचिडापन गुस्सा तो हमें दिख रहा है पर बच्चो पर क्या असर हो रहा है हमें नहीं पता क्या पता जब तक हमें पता चले तब तक सब कुछ हमारे हाथ से जा चूका हो और हम सिवाय पछताने के उस समय कुछ न कर पाये |
      
 चलते चलते 
             पेड़ लगाओ पेड़ लगाओ का नारा दिया जा रहा है | करोडो रुपये का हर साल वृक्षा रोपण होता है लोगो से अपील की जाती है की तोहफे में पेड़ दे अपने आस पास पेड़ लगाये पर समझ नहीं आता की पेड़ लगाये कहा पर घर की छत पर या बीच रास्ते पर शहरों में पेड़ लागने के लिए भी जगह कहा है | मुंबई में तो कुत्ता भी अपनी पूंछ दाये बाये नहीं ऊपर निचे हिलाता है |  
                                     
       

June 17, 2011

अभी हम सभी ने एक हिंदूवादी बाबा को निपटाया है अब भ्रष्ट अन्ना हजारे की बारी है - - - - - - - mangopeople



                                                               लीजिये अन्ना हजारे ने फिर अनशन की धमकी दे कर अपनी राजनीतिक नौटंकी शुरू कर दी | अभी हम सभी ने एक भ्रष्ट, राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले गेरुवा वस्त्रधारी हिंदूवादी बाबा को निपटाया है अब भ्रष्ट अन्ना हजारे की बारी है | आप सभी को आश्चर्य क्यों हो रहा है ,क्या आप को नहीं पता की अन्ना हजारे भी भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गये थे,  बाकायदा उसकी जाँच हुई थी और वो दोषी भी पाये गए थे, वो अलग बात है अपनी ऊँची पहुँच और नाम के चलते वो बच गए | कुछ साल पहले उन्होंने महाराष्ट्र के दो भ्रष्ट कांग्रेसी मंत्रियो के खिलाफ अनशन किया था वहा की सरकार को मजबूर हो कर मंत्रियो को हटाना पड़ा हटाये गए माननीय मंत्री जी ने अन्ना पर अपने ट्रस्ट के पैसे का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया बाकायदा माननीय पूर्व मंत्री जी के आरोप पर एक जाँच बैठाई गई और पता चला अन्ना के जन्मदिवस पर ट्रस्ट के दो लाख रुपये खर्च किये गए | ये भ्रष्टाचार नहीं है तो क्या है क्या लोगो ने ट्रस्ट को पैसे अन्ना के जन्मदिवस के लिए दिया था नहीं, उन्होंने जनता के सेवा के लिए मिले पैसे को अपने निजी कार्यो के लिए खर्चा किया था ( अब उन्होंने किया या उनके लोगो ने किया बात तो एक ही है ना, उन्होंने मना तो नहीं किया तो वो भी इस भ्रष्टाचार में उतने ही दोषी है जितने की कोई अन्य  ) | भ्रष्टाचार तो भ्रष्टाचार होता है चाहे वो हजारो करोड़ का हो या कुछ हजार का ही एक भ्रष्टाचारी को कोई हक़ नहीं बनता की वो किसी दुसरे भ्रष्टाचारी पर किसी तरह का आरोप लगाये उस पर उंगली उठाये या उसे भ्रष्ट तक कहे | जो खुद ये काम कर चूका है हम सभी महान ईमानदार आम जनता उस व्यक्ति का कैसे साथ दे सकते है | इसलिए जरुरी है की हम जैसे उच्च कोटि के ईमानदार आम जनता का नेता बिल्कुल उच्च कोटि का ईमानदार हो | क्योकि गाँधी जी ने कहा था की एक सच्ची और अच्छी चीज को पाने के लिए प्रयोग किये जा रहे साधन भी पवित्र होने चाहिए | क्या आप सभी को गाँधी जी की ये बात याद नहीं है, क्यों नहीं याद है, जब गाँधी जी याद है तो उनके विचार क्यों नहीं याद है शायद इसलिए याद नहीं है की हम सभी भेड़ चाल वाले भारतीय व्यक्ति पूजा में विश्वास करते है हम व्यक्ति का समर्थन करते है व्यक्ति का विरोध करते है, उसने क्या कहा उसके क्या विचार है उससे हमें मतलब नहीं है हम तो उसे सुनने की भी जरुरत नहीं समझते है, तो याद क्या खाक रखेंगे तभी तो गाँधी जी याद है किन्तु उन्होंने कहा क्या था गाँधी जी के विचार क्या थे गांधीवाद क्या था  ये हम सब भूल चुके है | हमें बाबा याद है हमें अन्ना याद है किन्तु वो दोनों कह क्या रहे है वो हममे से किसी को भी याद नहीं है व्यक्ति के आगे मुद्दे गुम हो गये | कोई बाबा का विरोध कर रहा है तो कोई उसका समर्थन कर रहा है हर जगह बस बाबा ही छाये हुए है पर उनके उठाये मुद्दे गुम हो गये है | 
                                   अब अँधा क्या चाहे दो आँखे और सरकार क्या चाहे भ्रष्टाचार के मुद्दे हवा हो जाये और लीजिये जी वो हवा हो गये | अब सरकार से कोई नहीं पूछ रहा है कि आप ने तो बाबा की सारी मांगे मान ली थी तो जरा बतायेंगे की उस पर कमेटिया बनाने के अलावा क्या जमीनी काम चल रहा है क्या बतायेंगे की कमेटिया कब तक अपना काम कर लेंगी, कब तक सरकार को अपनी रिपोर्ट दे देंगी, क्या उनका कोई समय सीमा तय किया है | चलिए वो जाने दीजिये विदेश से जो धन आएगा वो तो आएगा पर देश के अन्दर ही जो कला धन छुपा है उसका क्या हुआ उसको बाहर लाने के लिया आप क्या कर रहे है | सालो पहले आप लोगो ने खूब स्कीम लाई थी इतने प्रतिशत सरकार को दो और अपना सारा कला सफ़ेद में बदला लो | बहुतो ने अपना काला सफ़ेद किया था तब से तो आप को पता होगा ही की किस किस के पास कितना काला है उसके बाद आप लोगो ने उस पर रोक लगाने के लिए क्या कार्यवाही की है | चलिए वो भी छोडिये  कोर्ट ने आप की गर्दन पकड़ कर जब झकझोरा तब जा कर आप ने हसन अली को गिरफ्तार किया अब वो कई राज आप को बता चूका है की उसके पास किस किस का पैसा था सुना था की उसमे दो पूर्व कांग्रेसी मुख्यमन्त्रियो और वर्तमान केन्द्रीय मंत्रियो का पैसा था उनके खिलाफ आप क्या कर रहे है ये सवाल तो आम जनता क्या देश की अदालत भी आप से पूछ पूछ कर परेशान हो चुकी है आप क्या कर रहे है | २ जी में जो सरकारी पैसा डूब गया उसको फिर से पाने के लिए क्या कर रहे है उन कंपनियों पर क्या कार्यवाही कर रहे है जो असल में मंत्रियो द्वारा फर्जी बना कर सारा खेल खेला गया , उन बड़ी कंपनियों पर क्या कार्यवाही कर रहे है जो इन सरे खेल में शामिल थी | इस केस में जो की आप ने एक और विरोधी सांसद के और कोर्ट के दखल के बाद मज़बूरी में कार्यवाही के आलावा दुसरे लोगो के नाम आ रहे है उनके खिलाफ आप क्या करने वाले है आदि आदि आदि सवाल तो कई है  किन्तु आज कोई भी ये सवाल सरकार से नहीं पूछ रहा है क्योकि सरकार ने ऐसे हवा चलाई की ये सारे सवाल हवा में गुम हो गये |
                                                सरकार ने पहले हम सभी को बाबा के कपडे का रंग दिखाया ( वैसे समझ नहीं आता की जब एक दो नहीं तीन तीन केन्द्रीय मंत्री हवाई अड्डे पर बाबा की अगवानी में लगे थे तब क्या उन्हें बाबा के कपड़ो का रंग नहीं दिखाई दे रहा था ) अब वो बता रही है की आन्ना के सफ़ेद कपड़ो के नीचे भी वही गेरुआ कपडे है जिससे हम सभी को डरना चाहिए क्योकि गेरुआ रंग आम जनता के लिए भारत की राजनीति के लिए बड़ा खतरनाक है | पहले उसने बाबा के कपड़ो का रंग दिखा कर उनके मुद्दे को हवा में गुम कर दिया अब वही चाल वो आन्ना के साथ भी चल रही है | और हम व्यक्ति पूजक आम जनता हम तो व्यक्ति के पीछे भागते है हमें तो मुद्दों से कभी ना मतलब था और ना रहेगा हम सदा से व्यक्ति पूजक रहे है और रहेंगे जब तक हमें व्यक्ति अच्छा लगेगा हम उसकी हर बात को कान बंद कर हा में हा मिलाते रहेंगे जिस दिन व्यक्ति हमें ख़राब लगने लगेगा उस दिन हम उसकी अच्छी से अच्छी बात को भी नकारते चलेंगे और इस बात को सरकारे भी खूब जानती है | तभी तो देखिये सरकार के मुंह से जब भी निकालता है तो बाबा या अन्ना ही निकालता है उन्होंने जो सवाल उठाये थे उस बारे में सरकार की मुंह कभी नहीं खुलता है | फिर उसे दिग्गी राजा ने थोड़े काटा है की वो अपने मन से ही इन विषयों पर कुछ बोले जब आम जनता , महान भारितीय बुद्धिजीवी वर्ग और हमारा तथाकथित लोकतंत्र का चौथा खम्बा मिडिया और अपने आप को जबरजस्ती लोकतंत्र का पांचवा खंबा ?? बनाने का प्रयास करने वाला स्वघोषित विद्वान ?? ब्लोगर इस बारे में कुछ नहीं कह रहे है कोई सवाल नहीं कर रहे है तो उसे क्या पड़ी है कुछ भी कहने की | सभी यहाँ अपने निजी विचारो, संकुचित सोच को पोषित करने उसे बढ़ाने सभी से उसे मनवाने और सबसे सही और सभी का भला सोचने वाला साबित करने में लगे है ( मै भी इनमे शामिल हूँ मै कोई दुसरे ग्रह से थोड़े आई हूँ ) | असल में सभी अपने राजनीतिक सोच की खाल से बाहर आने को तैयार नहीं है सभी का अपना ही विचार उत्तम लग रहा है | किसी को तो ये सारा आन्दोलन ही लोकतंत्र पर हमला लग रहा है तो किसी को कांग्रेस विरोधियो बजापा की राजनीतिक साजिस लग रहा है | सही भी है ६० साल से ऊपर चिर निद्रा में सोये हुए हम आम जनता ये कैसे बर्दास्त करे की कोई बेवजह हमारे नीद में खलल डाले हम अपने घरो में सोफे पे पसर कर भ्रष्टाचार पर बकर बकर तो कर सकते है पर जब सड़क पर आ कर कुछ करना हो तो हम हर आन्दोलन में दुनिया जहान के मीन मेख निकाल कर बड़े आराम से इससे बचना चाहते है, हम क्रांति तो चाहते है बदलाव तो चाहते है पर वो सब बस हमारे आराम से बैठे बैठे बकर बकर बकने से आ जाये तो क्या बात है | हा जब बदलाव आ जाये और उसका क्रेडिट लेना होगा तो हम सब माला पहनने के लिए जमीन तक अपना सर और कमर झुकाने के लिए तैयार मिलेंगे | तो चलिए हमारी बकर बकर ख़त्म हुई कुछ आप के मन में हो तो यहाँ बक कर मन हल्का कर लीजिये मेरी तरह , बाकि हम इससे ज्यादा ना तो कर सकते है और ना ही करना चाहते है |
                                            

May 20, 2011

ऐसे लड़ेंगे हम आतंकवाद से और दाउद को लायेंगे पाकिस्तान से - - - - -mangopeople



                                                                      टीवी चैनलों पर हम सभी ने देखा होगा ग्राहकों को जागरुक करता सरकारी विज्ञापन " जागो ग्राहक जागो " बताया जाता है की किसी भी चीज को खरीदने से पहले उसकी एक्सपायरी डेड यानि उसको इस्तेमाल करने की आखरी तारीख जरुर देख ले, किन्तु  सरकार आम आदमी को तो जगाती रही पर जब उसकी बारी आई तो शायद खुद ही सो गई | देश की सबसे बड़ी "सरकारी" जाँच एजेंसी सी बी आई  १९९५ के पुरुलिया कांड के मुख्य आरोपी किम डेवी के प्रत्यर्पण के लिए कोपेनहेगन पहुची तो उसे पता चला की वो तो डेवी को ले जाने के लिए जो वारंट लाई है वो एक्सपायर हो चूका है |  इस बात की जानकारी भी उन महान अधिकारियो को खुद नहीं हुई उसकी जानकारी भी डेवी के वकील ने दी | खैर ऐसे वैसे कर तुरंत नया वारंट मगाया गया और वहा की आदालत में पेश किया गया |
                                    सरकार और उसकी जाँच एजेंसियों , सुरक्षा एजेंसियों की तरफ से की गई ये गलती तब बड़ी मामूली लगती है, जब हमें पता चलता है की पाकिस्तान को जो ५० अपराधियों ( भारत के मोस्ट वांटेड ) की लिस्ट दी जा रही है जिनके पाकिस्तान में होने की बात की जा रही है उस लिस्ट में भी बड़ी गड़बड़िया है | पहले तो उस लिस्ट में उस वजाहुल कमर खान का नाम सामने आया जो पहले ही पुलिस के द्वारा पकडे जाने के बाद जमानत पर रिहा है और रोज पुलिस स्टेशन जा कर हाजरी भी लगाता है |  अभी तक इतनी बड़ी गड़बड़ी के बारे में हमारे केन्द्रीय गृह मंत्री जी ठीक से सफाई भी नहीं दे पाए थे की अब उस मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल एक और अपराधी फिरोज अब्दुल रशीद के बारे में कहा जा रहा है की वो तो मुंबई के आर्थर रोड जेल में कसाब के साथ ही बंद है | पहली गलती पर तो केंद्र और राज्य सरकारे एक दुसरे पर दोस मढ़ने लगी वो भी तब जब दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकारे है यदि अलग अलग पार्टी को होती तो इस बड़ी गड़बड़ी को भी राजनीतिक रंग दे दिया जाता और कभी पता ही नहीं चलता की गलती किसकी है | वैसे अधिकारिक रूप से तो अब भी ये नहीं पता चला है की गलती किसकी है और उसे क्या सजा दी जा रही है | किन्तु इन सभी के कारण जो देश की दुनिया के सामने किरकिरी हुई है उसके लिए किसे सजा दिया जाये |   दुनिया के आगे अक्सर हम ये रोना रोते है की अमेरिका से ज्यादा और पहले से तो हम आतंकवाद से पीड़ित है हम तो अपने पडोसी के द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के सताये हुए आदि आदि किन्तु जब इन सब रोने गाने के अलावा काम करने की बारी आती है तो हम ढंग से कागजी कार्यवाही तक नहीं कर पाते है और सपने अमेरिका जैसी कार्यवाही की देखते है | इस कारनामे के बाद क्या लगता है की दुनिया में कोई भी देश हमारे द्वारा पाकिस्तान पर लगाये गए किसी आरोप को गंभीरता से लेगी | क्योकि ये हमारी सुरक्षा और जाँच एजेंसियों द्वारा की गई कोई पहली गलती नहीं है  इसके पहले भी जब २६/११ के मामले में पाकिस्तान को कुछ अपराधियों के फिंगर प्रिंट दिए गए थे तब भी इसी प्रकार की गड़बड़ी की गई थी और दो व्यक्तियों के नाम पर एक ही व्यक्ति का फिंगर प्रिंट दे दिया गया था और उसके पहले भी इसी मामले में डी एन ए दिया गया था तब भी यही गड़बड़ी की गई थी | यानि हम इसे एक मामूली मानवीय भूल समझ कर माफ़ नहीं कर सकते है बल्कि ये सरकार की लापरवाही को दिखा रहा है उसका गंभीर न होना दिखा रहा है  जो बार बार दुहराया जा रहा है |
                                            इस सारे मामले को देख कर हम समझ सकते है की सरकार आतंकवाद से लड़ने को ले कर, २६/११ के मामले में पाकिस्तान से बातचित को लेकर और वहां पर आजाद घूम रहे भारत के  अपराधियों को यहाँ लाने को लेकर कितनी गंभीर है | उसका रवैया बिलकुल उस आम आदमी की तरह है जो सोचता है की खाली पिली होना कुछ है नहीं, दाउद क्या उसका कुत्ते का प्रत्यर्पण भी नहीं होने वाला है, फिजूल में मगज मारी काहे को की जा रही है | यानि सरकार खुद ये मान कर चल रही है की होना कुछ नहीं है बस कागजी खानापूर्ति और दिखावा करना है सो कैसे भी कर दो | अब शायद सभी को समझ में आ गया होगा की मुंबई के २६/११ के अपराधियों पर इतने दबाव और सबूत के बाद भी पाकिस्तान क्यों नहीं कार्यवाही कर रही है | जब हमारी सरकार का ही रवैया इतना ढीला ढाला है तो पाकिस्तान क्या खाक कार्यवाही करेगा  न तो पाकिस्तान के ऊपर और न ही अमेरिका के ऊपर सरकार ने ऐसा कोई दबाव डाला है की वो कार्यवाही के लिए मजबूर हो जाये  बस जनता को बेफकुफ़ बनाने के लिए सतही तौर पर खानापूर्ति की जा रही है | 
                                                        इसे लापरवाही की हद न कहा जाये तो क्या कहा जाये की सरकार को अपने यहाँ पकडे गये आतंकवादियों की कोई खबर नहीं है और दुनिया के सामने दावा ये कर रहे है की हमें पता है जी दाउद से लेकर हमारे सारे मोस्ट वांटेड पाकिस्तान में ही है | और आम आदमी सपने सजा रहा है की हमें भी अमेरिका की तरह पाकिस्तान में घुस कर अपने अपराधियों को मार देना चाहिए | अब सरकार के ये कारनामे देख कर सभी समझ गये होंगे की क्यों मनमोहन सिंह ने अमेरिका जैसी किसी भी कार्यवाही पाकिस्ताने में करने से इंकार कर दिया था | लो जी अपने देश के जेल में बंद अपराधियों का तो हमें पता ही नहीं है पाकिस्तान में कौन कहा छुपा बैठा है इस बात की जानकारी कहा से लायेंगे | अब तो शायद पाकिस्तान कहें की मनमोहन सिंह जी जरा ठीक से अपनी लिस्ट जाँच कर ले ५० में से दो तो आप को भारत में ही मिल गये जरा ध्यान से खोजिये बाकि ४८ भी वही मिल जायेंगे बेकार में हमें बदनाम किये जा रहे है और जिस दाउद को पकड़ने के लिए इतना मारा मारी कर रहे हो उसको पालने पोसने वाला और दाउद को इतना बड़ा बनाने वाला उसका  बाप ही तुम्हारे यहाँ मंत्री बना बैठा है |
                                                             ये सोच कर कोफ़्त होती है की अभी कुछ समय पहले तक हम लादेन के पाकिस्तान में छुपे होने, अमेरिका द्वारा वह घुस कर उसे मारने, पाकिस्तान को इस बारे में कोई जानकारी नहीं होने और सब होने के बाद अंत में पाकिस्तान की स्थिति पर हंस रहे थे उस पर दुनिया भर में चुटकुले बनाये जा रहे थे  और अब शायद पाकिस्तान में हमारे ऊपर चुटकुले बन रहे होंगे |
                                       
                                               ( वैसे मुझे तो अब सक सा हो रहा है की ये गलतिया वास्तव में लापरवाही से हो रही है या हमारी जाँच और सुरक्षा एजेंसियों यहाँ तक की सरकार में बैठा कोई जासूस साजिस तो नहीं कर रहा है, ताकि दुनिया में भारत की किरकिरी हो सके उसके दिए पक्के सबूतों पर भी कोई विश्वास न करे और पाकिस्तान पर लगाये भारत के सारे आरोपों को बस एक राजनीति समझ झुठला दिया जाये | पता नहीं क्या हो रहा है शायद ये भी हो सकता है )
                                                      

May 18, 2011

ये पुरुष का दुर्भाग्य है की वो माँ नहीं बनता - - - - - - - -mangopeople


 मैंने ये कहा था की माँ बनने के दौरान होने वाले कष्टों को देखते हुए हम कह सकते है की शायद पुरुष शौभाग्यशाली है जो उसे माँ नहीं बनना पड़ता और उन कष्टों से नहीं गुजरना पड़ता है जो एक नारी को सहना पड़ता है, किन्तु पुरुषो को कम से कम उन कष्टों के प्रति थोडा संवेदनशील होना चाहिए और माँ बन रही पत्नी को हर संभव मदद करनी चाहिए | आज इस पोस्ट में इस बात का जिक्र करुँगी की ये पुरुष का दुर्भाग्य है की वो माँ नहीं बन सकता, वो माँ बनने के बाद मिलने वाली ख़ुशी को नहीं पाता, जबकि बिना किसी कष्ट , दर्द, परेशानी के वो इसे पा सकता है |


                                               कुछ साल पहले पति और उनके मित्रो के साथ पिकनिक पर गई थी, मित्रो की मंडली में एक के सपुत्र आ कर उनकी गोद में बैठ गये वो बड़े फक्र से बताने लगे की वो अपने बेटे को अकेले अपने पास रख सकते है उसे माँ की जरुरत नहीं है | बताने लगे की कैसे दो बार उन्होंने अपने ढाई साल के बेटे को अकेले दो दिन तक अपने पास रखा, उसे माँ की याद ही नहीं आई और उन्होंने दो दिनों तक बड़े आराम से उसकी देखभाल की, उनकी सुन मेरे पति देव भी कहा चुप रहने वाले थे उन्होंने भी गर्व से सीना फुला कर कहा की मै भी अपनी बेटी को आराम से रख सकता हूँ, ( अभी तक अकेले रखने का मौका नहीं मिला है ) वो भी मेरी लाडली है और माँ के बैगेर भी मेरे पास रह सकती है | बाकियों ने सवाल किया खाना वाना भी खिला लेते हो और तुम्हारे साथ सो भी जाती है ये दो कम तो हम नहीं कर पाते |  दोनों मित्रो ने फिर एक बड़ी मुस्कान के साथ कहा की हा थोड़े नखरे तो खाने में करते है, वो तो माँ के साथ भी करते है, पर बाकि कोई परेशानी नहीं होती है हमारे बच्चे हमारे बड़े करीब है | फिर दुसरे मित्रो ने भी बताना शुरू किया की हा हमारे बच्चे भी आफिस से आने के बाद हमारे ही पास रहते है , हम उन्हें घुमा देते है हमारे साथ खेलते है और घंटो बात करते है |  पर जो गर्व, ख़ुशी, मुस्कान मेरे पतिदेव और उनके उस दुसरे मित्र के चेहरे पर थी वो किसी और के नहीं थी क्योकि उन्हें गर्व इस बात पर था की वो अपने बच्चो के लिए माँ के बराबर ही थे बच्चो के लिए उतने ही महत्वपूर्ण थे जितने की माँ और वो गर्व वो ख़ुशी उनके चेहरे पर अपने बच्चे के माँ बनने की थी ,भले पार्ट टाइम के लिए ही सही |  अपने  बच्चे की पूर्ण रूप से देखभाल उसके लालन पालन करने में जो आन्नद और उसके बदले में उन्हें बच्चे से जो प्यार और लाड मिल रह था वो उनके लिए एक अलग ही एहसास था जो कम से कम भारत में बहुत कम ही पिता को नसीब होता है वजह वही सोच  है की बच्चे पालने का काम माँ का है पिता का नही | इन के बीच एक मित्र और भी थे जिनकी बेटी पुरे समय अपनी माँ की गोद में ही चिपकी रही, वो बाकियों की बातो पर मुंह बिचकाते रहे और बीच बीच में ताने कसते रहे की ये "जनाने" काम उन्हें नहीं करने है, वो अलग बात है जब सभी के बच्चे अपने अपने पापा के साथ खेलने और झरने में नहाने में  मस्ती कर रहे थे तो उनके लाख बुलाने पर भी उनकी बेटी एक बार भी उनके पास नहीं आई और वो इस बात पर भी अपनी बेटी और पत्नी पर खीज रहे थे |

                                                           कई बार कुछ लोग ये भी कहते है की बच्चे हमारे पास आते ही नहीं आते है तो जल्द ही माँ के पास चले जाते है या उसका लगाव हमसे ज्यादा नहीं है या बच्चो की देखभाल जितने अच्छे से माँ कर सकती है पिता नहीं कर सकता इसलिए ये काम माँ को ही करना चाहिए | आप को बताऊ एक प्यार भरे स्पर्स को जितने अच्छे से एक बच्चा महसूस कर सकता है कोई और नहीं कर सकता इसलिए जब पिता बच्चे को एक बोझ की तरह गोद में ले कर चलता है (जैसे की पत्नी बेचारी बच्चे का इतना बोझ ले कर कैसे चल सकती है है सो मै ले लेता हूँ ) तो बच्चा जल्द ही ऐसे पिताओ के गोद से निकल कर माँ के पास चले जाते है  उन्हें पता होता है की कहा उन्हें प्यार से गोद में लिया जायेगा न की बोझा की तरह | बच्चा होना ही अपने आप में किसी को भी उसके प्रति लगाव पैदा कर सकता है किन्तु कुछ लोग इतने पाषाण होते है की उन्हें अपने बच्चे से भी कोई लगाव नहीं होता ( कई बार समझ नहीं आता की वो पिता बनते ही क्यों है शायद वो इस बारे में सोचते ही नहीं उनके लिए पिता बनना अपनी मर्दानगी दिखाने का एक साक्ष्य भर होता है ) अपने आस पास ही देखा है पत्नी को सख्त निर्देश होते है की मेरे आने से पहले बच्चे को सुला देना, रात को उसके रोने की आवाज नहीं आनी चाहिए मेरी नीद ख़राब होगी , उसकी नैपी गन्दी होते ही बदबू की शिकायत कर वह से भगा जाना | जी नहीं मै ये सब किसी पुरातन काल का वर्णन नहीं कर रही हूँ मै आज के समय की ही बात कर रही हूँ यदि आप ऐसे पिता नहीं है या आप के घर में ऐसे पिता नहीं है तो थोड़ी नजर ध्यान से आस पास घुमाइये आप को इस तरह के कई पिता आज भी मिल जायेंगे, बच्चे इनके लिए सदा के पे चिल्ल पो करने वाले मुसीबत ही होते है |
                        एक और आम सी बात प्रचलित है कि बच्चे की देखभाल जितने अच्छे से माँ कर सकती है पिता नहीं कर सकता | मुझे नहीं लगता है की कोई भी नारी ये गुण ले कर पैदा होती है यदि होती तो सभी नारी सभी बच्चो से वैसे ही जुड़ जाती जैसे की अपने बच्चो से, असल में तो ये एक प्रक्रिया है सबसे पहले तो हम दूसरी माँओ को देख कर ये सीखते जाते है और फिर माँ बनने के बाद जैसे जैसे हम बच्चे के साथ समय बिताते है उस पर ध्यान देते है उसकी हर हरकत पर नजर रखते है हम उसको उसकी जरूरतों को उसकी परेशानियों को अच्छे से समझने लगते है और ये काम कोई भी पुरुष अपने बच्चे से थोडा जुड़ाव रख समझ सकता है यदि उसमे थोडा धैर्य हो तो ये काम और भी आसन हो जाता है | जबकि होता ये है की बचपन से ही ये सुन सुन कर की बच्चे तो माँ को पालना है पिता कभी उससे जुड़ने की सोचता ही नहीं है या इस बारे में सोचता तक नहीं तो फिर कैसे उसमे ये गुण आयेंगे | मेरी बात वो कई पिता साबित कर सकते है जो अपने बच्चे की खुद देखभाल करते है उससे जुड़े है और उसकी हर परेशानी बात को समझते है |

                                                                                मुझे याद है जब मेरी बेटी के जन्म के १५ दिन बाद ही मैंने नाउन(  जो बच्चो को नहलाती है उसकी मालिश आदि करती है ) वाली को उसे नहलाने से मना कर दिया की अब मै ही इसे स्नान कराऊंगी, तो वो मुझसे शिकायत करने लगी की ये तो उसका हक़ है उसे ही करना चाहिए, तो मैंने कहा की मुझे तो एक ही बेटी होनी है उसके नहलाने मालिश करने उसे तैयार करने का आन्नद तो मुझे एक ही बार मिलेगा एक बार जो बड़ी हो गई तो फिर ये दिन लौट कर न आयेंगे फिर न होगी मेरी बेटी वापस छोटी तो मै कब इन सब चीजो का आन्नद लुंगी आखिर बेटी तो मेरी है उसकी देखभाल में मिलने वाली ख़ुशी पर पहला हम तो मेरा बनता है | उसके छोटे छोटे हाथो का पकड़ना उसकी नन्ही नन्ही उंगलियों को सहलाना उसके मासूम से चेहरे को घंटो तक देखते रहना, जब वो ठीक से बोल भी नहीं पाती थी तब भी उससे बाते करना और उसकी टूटी फूटी जबान को समझना उसे सीने से लगा थपकी दे सुलाना न जाने कितनी अनगिनत खुशिया है जो हम दोनों उसके साथ पा चुके है जो फिर कभी लौट कर नहीं आयेंगे जिन्हें याद कर के ही हम पति पत्नी का दिलो दिमाग आन्नद से भर जाता है समझ नहीं आता उसे पाने से कैसे कुछ लोग वंचित होना ठीक समझते है उसे मजबूरी एक बोझा एक काम मानते है उसे करने से भागते है | ऐसे पुरुषो को देख कर यही कहा जा सकता है की शायद ये पुरुष का दुर्भाग्य ही है की वो बिना किसी कष्ट के माँ बनने का मौका गवा देता है |

May 08, 2011

पुरुष शौभाग्यशाली है की वो माँ नहीं बन सकता या ये पुरुष का दुर्भाग्य है की वो माँ नहीं बनता - - - - - - - -mangopeople

दुनिया में माँ से महान कोई नहीं होता 
दुनिया में माँ के बराबर का दर्जा कोई नहीं ले सकता 
माँ जितना सहनशील और धैर्यवान कोई नहीं होता 
माँ नाम तो सृजन का है 
माँ से ही परिवार और देश बनता है 
हम कभी माँ की ममता का कर्ज नहीं उतार सकते है
आदि आदि आदि 

                                                      माँ की महानता को लेकर न जाने दुनिया में क्या क्या कहा गया है | यदि आप सभी से भी इस बारे में पूछा जाये तो सभी ये मानने में बिलकुल नहीं हिचकेंगे की माँ बनना एक बड़ी जिम्मेदारी है और ये एक कठिन कार्य है |
लेकिन मेरा मानना है की जितना कठिन और जिम्मेदारी भरा आप काम इसे मान रहे है वास्तव में ये उतनी बड़ी जिम्मेदारी और कठिन काम नहीं है अपने अनुभव से बता सकती हूँ , ये हमारी आप की सोच से कही ज्यादा कठिन काम है जिसका अंदाजा हम तब तक नहीं लगा सकते जब तक की हम स्वयं माँ नहीं बनते है | ज्यादातर महिलाये एक समय आने के बाद इसको समझ भी लेती है किन्तु पुरुष इस बात को कभी नहीं समझ पाते है क्योकि वो कभी माँ नहीं बन सकते है | कई बार मैंने इस बात का एहसास किया है की ज्यादातर पुरुष माँ बनने की कठिनाइयों के बारे में बात तो करते है किन्तु वास्तव में वो उसे समझते नहीं है उसका सम्मान नहीं करते है |

                                         " सारे दिन करती क्या हो घर में बैठ कर" , " एक बच्चा क्या आ गया बाकि काम से तो बिलकुल छुट्टी ही ले लिया है ", " एक घर एक बच्चा नहीं संभाल सकती ", " छोटे से बच्चे तक को नहीं संभाल सकती तो और क्या कर सकती हो ", " जन्म दे कर मुझ पर एहसान नहीं किया है ", " बस जन्म ही तो दिया है और किया क्या है मेरे लिए " इस तरह के न जाने कितने जुमले माँओ को बोला जाता है जिससे साफ लगता है की वास्तव में पुरुष सिर्फ कहने के लिए माँ की महिमा मंडन करता है दिल से उस बात को नहीं मानता या उस कठिनाई को नहीं समझता है | शायद इसी करना मुझे एक बार "नारी" ब्लॉग पर ये लिखा पढ़ने को मिल गया था की " भारतीय महिलाओ के लिए प्रसव पीड़ा वास्तव में पीड़ा न हो कर प्रसव आन्नद होता है " जी हा ये कथन एक पुरुष का था किन्तु वो एक बड़े पुरुष वर्ग की सोचा को दर्शा रहा था साफ था की वो तनिक भी इस दर्द और परेशानी को नहीं समझ रहे थे जो एक नारी को माँ बनते समय सहना पड़ता है | जवाब में मैंने भी  ये  टिपण्णी कर  दी 
                                       "अच्छा है की भगवान ने माँ बनने की शक्ति नारी को दी है यदि पुरुष को दी होती तो समाज में सेरोगेट बाप बनने का व्यापर शुरू हो गया होता लोग पैसे दे कर अपने बच्चे दूसरो से पैदा करवा रहे होते और कुछ दुसरे पुरुष "पैसे" के लिए ये कर रहे होते क्योकि प्रषव पीड़ा दो दूर की बात प्रेगनेंसी के पहले तीन महीनो की परेशानियों को भी वो झेल नहीं पाते और बच्चे पैदा करने का काम भी रेडीमेड बना देते | लेकिन फिर भी जो लोग इस तथा कथित प्रषव आनन्द का आन्नद लेना चाहते है तो उनको उसके पहले के आन्नदो का भी आन्नद लेना चाहिए | सुरुआत कीजिए की हर रोज खाना खाने से पहले नमक पानी का घोल पी लिजिए जब वमन आने लगे तो खाना खाने की कोशिश कीजिए हर रोज माई फेयर लेडी झूले के बीस चक्कर लगाइए जब आप को सारी दुनिया घुमती सी दिखे तो इसी अवस्था में सारे दिन काम कीजिए पैरो में दो दो किलो का वजन और पेट में चार से पांच किलो का वजन बांध कर सारे दिन काम कीजिए और फिर रात में उसी अवस्था में सोने की कोशिश कीजिए नीद आना दूर की बात कभी अभी तो इस अवस्था में किसी भी तरीके से लेटा भी नहीं जाता और पूरी रात एक आराम दायक अवस्था पाने में ही निकाल जाता है | ये सब कुछ नौ महीनो तक करिए फिर बताईये की किस किस को कितना आन्नद आया | प्रषव आन्नद का आनन्द कैसे लिया जाये ये तो मुसकिल है मेरे लिए बताना लेकिन उसके बाद बच्चो की देखभाल बता सकती हु सबसे पहले तो रोज रात में हर दो घंटे बाद का अलार्म लगा ले जब वो बजे तो उठ कर उसे बंद करे और फिर से दो घंटे बाद का अलार्म लगा दे जब तक आप वापस नीद के झोके में जायेंगे तब तक अलार्म दुबारा बज जायेगा ये क्रिया एक साल तक हर रात करे और सुबह बिलकुल फ्रेस मुड में उठिए| सिर्फ इतना ही कीजिए और फिर बताइये की कितना आन्नद आया | बाकि सारी परेशानिया छोड़ दे हफ्ते दस दिन में ही जो सिर्फ इन परेशानियों को झेल लेगा वो समझ जायेगा की पीड़ा और आन्नद में क्या अंतर है प्रषव पीड़ा को सहना तो दूर की बात है |"

May 03, 2011

अश्वाथामा मारा गया - - - - - - mangopeople

                                          अश्वाथामा मारा गया 
                                                               किन्तु हाथी

  जी हा सभी जानते है की आतंकवादी रूपी अश्वाथामा अजर अमर है वो कभी मर नहीं सकता है दुनिया में वो किसी न किसी रूप में मौजूद रहेगा | लादेन रूपी जो अश्वाथामा मारा गया है वो तो इस आतंकवाद के युद्ध में सिर्फ एक हाथी था जिसके मरने से इस युद्ध पर कुछ खास असर नहीं होने वाला है कम से कम हम भारतीयों के आतंकवाद के युद्ध के लिए तो ये ज्यादा महत्व नहीं रखता है | इसलिए जरुरी है की इस हाथी के मरने के शोर  में असली आतंकवाद रूपी अश्वाथामा को नहीं भूलना चाहिए, जैसे पांडव उसे भूल कर युद्ध को समाप्त समझ बैठे थे और उसके बाद उस अश्वथामा ने युद्ध नीति और धर्म के खिलाफ जा कर द्रौपती के पांच पुत्रो की हत्या कर दी थी और उत्तरा के गर्भ में पल रहे पांडव वंश की आखरी निशानी को भी समाप्त कर पांडव वंश को समाप्त करने का प्रयास किया था  |  आतंकवादी भी किसी धर्म या नीति को नहीं मानते है उनके लिए सब कुछ जायज है यदि उन्हें अपनी महत्वाकांक्षाओ को पूरा करने के लिए इस पुरे मानव वंश को भी नष्ट करना पड़े परमाणु युद्ध द्वारा तो वो उससे भी पीछे नहीं हटेंगे | इसलिए अब जरुरत इस बात की है की अपना ध्यान और इस युद्ध पर लगाया जाये ताकि बदले की कार्यवाही से बचा जा सके |
                                                       खुद अमेरिका के लिए भी ये हाथी ही होगा क्योकि पिछले दस सालो में नहीं लगता है की लादेन आतंकवाद को बढ़ाने में और अलकायदा के संचालन में उतना सक्रिय रहा होगा जितना की ९/११ के पहले था , असल में तो अल कायदा की कमान काफी पहले ही कई दुसरे आतंकवादियों के हाथ में चली गई थी और लादेन के मरने से उनके मनोबल तो गिर सकता है किन्तु जमीनी रूप से ज्यादा फर्क उन्हें नहीं पड़ेगा | इसलिए ये जरुरी है कि अमेरिका इसे आतंकवाद के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई का एक पड़ाव भर माने उससे ज्यादा कुछ नहीं | वैसे तो हम सभी जानते है की दुनिया को आतंकवाद से मुक्ति दिलाने के नाम पर आमेरिका अपनी निजी लड़ाई लड़ रहा है और उस नाम पर वो तेल का खेल भी खेल रहा है किन्तु हमें ये तो फायदा हुआ ही है की इन दस सालो में अलकायदा अमेरिका से ही लड़ने में व्यस्त था जिससे उसका ध्यान भारत और कश्मीर में हो रहे आतंकवाद से थोडा हटा था और कश्मीर में कुछ दुसरे पाकिस्तान परस्त गुट ही सक्रीय थे | यदि अलकायदा अमेरिका से उलझा नहीं होता तो शायद वो अपना सारा धन बल हथियार की ताकत भारत के लिखाफ लड़ने में लगा सकता था | साथ ही अमेरिका के पाकिस्तान में मौजूदगी के कारण वो अब जान चूका है की पाकिस्तान किस तरह भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है खुद लादेन तक को अपने यहाँ पनाह दे रखा था वो इस बात को भले सार्वजनिक रूप से न माने क्योकि ये उसकी मजबूरी है वो उस पाकिस्तान के खिलाफ अभी कुछ नहीं कह और कर सकता जिसके बल पर वो अफगानिस्तान में टिका है और उसे पैसे दे कर उसके सैनिको से अपना युद्ध लड़वा रहा है किन्तु अब वो पाकिस्तान की वास्तविकता से अच्छे से परिचित है जो हमारे काम तब आएगा जब अमेरिका अफगानिस्तान से अपनी गर्दन बचा कर बाहर निकल जायेगा | तब तक तो हमें इस तमाशे को देखना ही पड़ेगा | 
                                                   मुझे नहीं लगता है की प्रत्यक्ष रूप से अमेरिका हमारी आतंकवाद से लड़ने में कोई मदद करेगा ये काम तो हमें ही करना होगा | अपने आतंकवाद की लड़ाई हमें ही लड़नी होगी क्योकि एक तो हमारे दुश्मन अलग अलग है वही हमारी और हमारे दुश्मनों की स्थिति दुनिया में अलग अलग है हम उस तरह से अपना युद्ध नहीं लड़ा सकते है जैसे की अमेरिका लड़ रहा है जहा अमेरिका आक्रमण नीति अपना रहा है क्योकि उसकी लड़ाई अविकसित सैन्य शक्ति में कमजोर देशो से है वही हम गुरिल्ला युद्ध जैसी स्थिति में फंसे है जहा हम पर छुप कर पीछे से वार किया जा रहा है हमारे दुश्मन सामने नहीं दिख रहा है | हम भले जानते हो की इसके पीछे कौन है किन्तु उसके खिलाफ हम सीधी लड़ाई नहीं लड़ सकते है वो अन्य देशो से कही ज्यादा सैन्य शक्ति में ताकतवर है और उसे दुनिया के दुसरे ताकतवर देशो और हमारे दुसरे दुश्मनों का साथ भी मिला है साथ ही हम अमेरिका जैसे आर्थिक और सैनिक ताकत भी नहीं रखते है | इसलिए हमें ये युद्ध रक्षात्मक रूप में लड़नी होगी मतलब हमें खुद की इन हमलो के प्रति सुरक्षित बनाना होगा इन हमलो को होने से पहले रोकना होगा अपनी सुरक्षा व्यवस्था और तगड़ी करनी होगी | जो हम अभी तक नहीं कर पाए है सबूत के तौर पर मुंबई हमला करने के लिए आतंकवादी बड़े आराम से समुंद्री रास्ते हमारे देश में घुस गए | जब हमारी सीमाओ का ये हाल है तो हम कैसे इस युद्ध को जितने का सोच सकते है या अमेरिका जैसे किसी सफलता की उम्मीद कर सकते है | 
                         अमेरिका ने तो दस सालो में दुसरे देश में घुस कर अपने दुश्मन को मार दिया और हम तो किसी आतंकवादी हमले का मुक़दमा ही तेरह सालो तक चलाते रहते है वो भी निचली आदालत में जैसे १९९३ के मुंबई हमलो का मुक़दमा | दुसरे मुकदमे का फैसला आ जाये तो उसे सजा देने में इतनी देर करते है जैसे अफजल गुरु और हद तो तब है जब बाहर से आ कर सरेआम लोगो को मारने वालो को जिसकी फोटो हर किसी ने देखी सब करते हुए उसके खिलाफ भी मुक़दमा दो साल तक चलता जा रहा है जैसे कसाब का मुक़दमा अभी भी अदालत में ही है | अब ये देखने के बाद क्या हम कह सकते है की हमें भी अमेरिका की तरह दुसरे देश में घुस कर अपने दुश्मनों को पकड़ लेना चाहिए या उन्हें मार देने चाहिए | जब हम अपने देश के अन्दर उनके खिलाफ कुछ नहीं कर पा रहे है तो किसी दुसरे देश में घुस कर उन्हें क्या खाक पकड़ेंगे |
                                कल टीवी पर देखा दुनिया के साथ ही भारत में भी इस बात की खुशिया मनाई जा रही है की लादेन मारा गया | लगा जैसे लोग खुद को धोखा देने का प्रयास कर रहे है की हम अपने देश के दुश्मनों का तो कुछ नहीं कर सकते अपने लिए हम इस तरह कोई ख़ुशी नहीं मना सकते तो कम से कम दूसरो के दुश्मनों को या अपने दूर के दुश्मन के मरने की ही ख़ुशी मना लेनी चाहिए | अब आम आदमी और कर भी क्या सकता है जिस देश की राजनीतिक इच्छा शक्ति इतनी कमजोर हो जिस देश के नेता मंत्री हर बात में वोट की राजनीति करते हो खबरों में बने रहने के लिए कुछ भी बकते हो उस देश की जनता कर क्या सकती है | दिग्विजय सिंह की बयान रूपी बेफकुफियो की लिस्ट काफी लम्बी है कल उन्होंने उस में एक और जोड़ ली ये कह कर की " कोई कितना बड़ा आतंकवादी क्यों न हो उसके मरने के बाद उसके अंतिम संस्कार में उसके धार्मिक रीति रिवाजो को पूरा किया जाना चाहिए |" ये हमारे देश के नेता है ये इनकी सोच है इस पुरे प्रकरण में इन्हें अपने मतलब की जो सबसे सही बात दिखी वो ये था की एक खूंखार आतंकवादी का धर्म और उसका रीति रिवाज | वास्तव में कहू तो दिग्विजय सिंह की ये बेफकुफिया बर्दास्त के बाहर होती जा रही है |

April 16, 2011

आज हमारी ब्युटीफुल प्रिंसेस का जन्मदिन है उसे ढेर सारा आशीर्वाद दीजिये - - - - - - mangopeople



                                                   आज हमारी ब्युटीफुल प्रिंसेस का हैप्पी वाला बर्थ डे है | ब्यूटीफुल क्यों ? वैसे तो हर माँ के लिए उसके बच्चे दुनिया में सबसे ब्यूटीफुल होते है , लेकिन मुझे बिटिया रानी के ये पूछने पर कि 'मॉमा मै ब्यूटीफुल दिख रही हु ना"  दिन में तीन या चार बार उन्हें ये बताना पड़ता है की वो ब्यूटीफुल दिख रही है और प्रिंसेस इसलिए की उन्हें बड़ी हो कर प्रिंसेस बनना है | लो जी सिंड्रेला , स्नोवाईट , स्लीपिंग ब्यूटी , जास्मिन , प्रिंसेस बैली जैसी कहानियो रोज सुनती है उसका कुछ तो असर होना ही था ना | 

                                  बहुत साल पहले एक खबर पढ़ी थी की भविष्य में आप डिजाइनर बेबी को जन्म दे सकेंगे मतलब की रंग कैटरीना का  आँखे ऐश्वर्य की कद सुष्मिता की और जो भी आप चाहे अपने बच्चे में वो आप को मिल जायेगा, वैज्ञानिक ये सब आप के लिए कर देंगे | सो जब मेरे माँ बनने का समय आया तो हम दोनों ने भी अपने बच्चे को डिजाइन करना शुरू किया मतलब ये सोचना शुरू किया की हमारी बच्ची कैसी होगी | अब हम वैज्ञानिको की तो मदद नहीं ले रहे थे तो सब कुछ पति पत्नी के बिच से ही चुनना शुरू किया वो भी सब अच्छी अच्छी वाली जो कुछ भी हम दोनों में था | तय किया की दिखने में वो पति जसी हो और व्यवहार में माँ जैसी हो ( मेरी बेटी पति जैसी सीधी साधी हम दोनों को ही मंजूर नहीं थी, और मेरे लिए सुन्दरता  के मामले में बेहतर था की वो पिता जैसी ही हो क्योकि सुन्दरता से मेरा दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं है ,  हा हा हा हा हा   ) मुझसे तो वो बस दो ही चीजे पाए एक तो घुंघराले बाल दुसरे गालो पर पड़ते डिम्पल ( मुझे बहुत थोड़े पड़ते है मै चाहती थी उसे खूब गहरे पड़े )  और पुत्री होना तो मेरे लिए हमेसा से ही निश्चित था उसके लिए कोई दो राय या कुछ और की तो बात ही नहीं थी और जब बच्ची हमारे सामने आई तो बाकि बाते तो पता नहीं चल रही थी लेकिन जब वो जन्म के दुसरे दिन मुस्कराई और उसके गालो पर गढ्ढे पड़ते देखा तभी समझ गई की हमारी एंजेल तो बिलकुल वैसी ही होनी है जैसी हमने सोचा है |
       किन्तु सब आप के मन का हो ही जाये ये भी नहीं होता है ना हमने तो इसके जन्म का दिन भी तय किया था आज से 11 दिन बाद का, सब ठीक था किन्तु बीच में डाक्टरों ने अपनी कमाई के लिए ऐसा डराया की जानते हुए भी बेफकुफ़ बन गए क्या करे जब बात बच्चे पर किसी तरह के खतरे की हो तो सभी जान कर भी बेफकुफ़ बनने में ही अपना भला समझते है , वैसे अंत में  ये १६ अप्रैल का दिन भी मैंने ही चुना था डाक्टर के दिए चार दिनों में से | 
                                               दुनिया की ये परम्परा रही है की पिता अपने बेटो को अपना नाम देते है जार्ज और लुई से चला ये रिवाज बुश तक पहुँच गया और हमारे यहाँ भी पिता का नाम जोड़ा जाता है | पर कभी ये रिवाज क्यों नहीं बना की माँ बेटियों को अपना नाम देंगी, सो मैंने भी तय कर लिया था वो भी हमेशा से, की  अपनी बेटी को तो मै अपना नाम दूंगी | उसके जन्म के बाद शुरू हुई नाम की खोज जो पहला नाम पसंद आया वो था "पार्थवि" जिसका अर्थ पार्वती जी का नाम बताया गया पसंद आया क्योकि पार्वती जी नारीत्व गुणों के साथ ही देवी की शक्ति रूप थी ( बाद में पता चला की ये नाम देवी के शक्ति रूप का ही है यानि दुर्गा को भी "पार्थवि" कहते है ) पर ये मेरा नाम नहीं था सो खोज जारी रखी (अब हम लोग हिंदी के बड़े ज्ञानी तो थे नहीं सो अपने नाम की पर्यायवाची खोजना एक मुश्किल काम था वो भी बिना नेट के) और अंत में हमें मिल ही गया नाम  "अनामित्रा"   दोनों नाम पसंद आया सो हमने उसके दो नाम रख दिये एक घर के लिए "पार्थवि" जो हम दोनों को पसंद था और स्कुल के लिए "अनामित्रा" ताकि दुनिया में वो मेरे नाम से ही जानी जाएगी ( जबकि आज की तारीख में हम अपनी ईमारत में और उसके स्कुल में उसके नाम से जाने जाते है की हम "पार्थवि"  के मम्मी पापा है ) |
                                                           कहते है की नाम का असर बच्चो पर होता है इसी का नतीजा है की उनमे जहा लड़कियों वाले सारे गुण, सजना सवरना खुबसूरत दिखने का प्रयास करना गुडियों से खेलना है तो साथ में शारीरिक दम ख़म वाली और अपनी शक्ति दिखाने वाले भी गुण है | पार्क में गई तो ज्यादातर लड़को के साथ ही खेलती है क्योकि वही दौड़ने उछलने कूदने और शरारत करने में इनका साथ देते है | स्कुल में रेस में भी भाग लिया और पहला स्थान पाया , पाना ही था रोज मुझे पकड़ कर पार्क ले जाती और ८-१० साल के लड़को के साथ रेस करके अपना अभ्यास करती थी बिना मेरे कहे खुद से | अब नाम के साथ जुड़ा गुण है तो उसके साथ जुड़े दोषों से कैसे दूर रह सकती थी सो नाम के साथ जुड़े दोष भी है वो है गुस्सा और गर्मी | गुस्सा हर समय नाक पर और १८ के तापमान में भी कहना की गर्मी लग रही है |
                                           उनके जन्म के बारे में जान लिया नाम के बारे में जान लिया और उनके स्वभाव के बारे में जान लिया अब हमारी एंजेल की कुछ फोटो सोटो भी देख लीजिये |


                 

पचपन से कैमरे के लिए पोज  देने की आदत है इन्हें | बचपन में कभी भी इनकी कोई शरारत मै सुट करना चाहती भी थी तो कैमरा देखते ही ये वो करना छोड़ कर बस कैमरा ही देखने लगती थी | देखिये अभी भी कैसे कैमरे के लिए पोज दे रही है |

अपने लम्बे बालो से बड़ा प्यार है इन्हें क्या मजाल की कोई हाथ भी लगा दे या उन्हें कटवाने की बात कर दे और हर समय इन्हें खुले बाल चाहिए , फैशन है | जन्म से अभी तक इसका मुंडन नहीं हुआ है, अब कराना तो भगवान के बस में भी नहीं है अब तो देर भी हो गई है और वो और भी लम्बे हो चुके है |

बस एक बार सैंटा मिल जाये फिर तो खिलौनों की इतनी लम्बी लिस्ट बनेगी की पूरा साल सैंटा हमारे ही घर खिलौने डिलेवर करते रह जायेंगे |


    तीसरे जन्मदिन की फोटो है बार्बी बनने के लिए बार्बी पार्लर गई थी और चुपचाप बैठ कर इस तरह तैयार हुई बाल बनाये की सब आश्चर्य कर रहे थे , तीन साल में ही ये हाल है  बड़ी हो कर क्या करेंगी |

भला हो सागर ब्रदर्स का जो उन्होंने मुझे कृष्ण के रूप में संतान पाने की इच्छा पूरी करवा दी | नया वाला कृष्ण (कृष्णा ) देख कर ये भी मुझे काफी दिनों तक मैया मैया कह कर पुकारती थी |  लग रही है  ना पूरी कृष्ण जैसी |

                                   


देखा हमारी परी कितनी प्यारी है  और बच के रहिएगा अपने मैजिकस्टिक से सभी को फ्राग बना देती है  |
 

हम बड़े भी पहले बचपन में अपने शौक में बच्चो में नई नई आदते डाल देते है फिर जब बच्चे बड़े होने पर वही करते है तो हम शिकायत करते है | अब देखिये ६ माह की है बड़े आराम से गॉगल लगा कर बैठी है क्या मजाल की गिर जाये, अब बड़े हो कर जब बिना गॉगल के बाहर नहीं जाती तो हम कहते है की कितना फैशन करती है |


                   सब तो हो गया अब इनकी शरारतो का और मीठी सी मुस्कान का एक वीडियो देखिये, जरा देखिये तो क्या चीज ये बड़े जतन मेहनत और चाव से खाने का प्रयास कर रही है |




चलते चलते
                                                                   आज चलते चलते में हमारी डॉल का किस्सा | इन्हें सिखाने के क्रम में हमने उन्हें सप्ताह के नाम सिखाये केवल सात दिनों में ये नाम याद कर ली, हमारा उत्साह बढ़ गया सो सोचा की इन्हें महीनो के नाम भी सिखा दे | अब हमने कोई किन्नर गार्डेन का कोर्स तो किया नहीं है जो पता रहे की बच्चो को सिखाना कैसे है सो हमसे सीधे कहा की "बाबु वन इयर में 12 मंथ होते है " इन्होने फाटक से सवाल दागा " मॉमा इयर क्या होता है " तब समझ आया की बच्चो को इस तरह हम नहीं समझा सकते है, फिर भी कोशिश जारी रखा और सोचा की इन्हें इनके मतलब की बातो से समझाते है तो ये जल्दी समझ जाएँगी | हमने कहा कि " बेटा तुम्हारा फर्स्ट बर्थ डे जब हुआ तब तुम वन इयर की हुई सकैंड में तुम टु इयर की हुई थर्ड में थ्री इयर की अब तुम्हारा फोर्थ बर्थ डे आ रह है तुम फोर इयर की हो जाओगी | ये रुकी कुछ सोचा फिर बोला " मॉमा फोर्थ बर्थ डे पर आई हैव फोर इयर(कान) सो हाउ मेनी आइस (आँखे ) मॉमा" | जवाब आप के पास हो तो जरुर दीजियेगा मै तो अभी नहीं दे पाई हूँ |

                                                        आज मेरी प्यारी सी परी को उसके जन्मदिन पर ढेर सारा आशीर्वाद दीजिये ताकि जीवन में वो हमेशा खुश रहे और वो सब पाए जो उसे एक सफल इन्सान बनने में सहयोग करे |
लीजिये खाइये उनकी पसंद का डोरा केक और पूरा ब्लॉग भी उनके पसंद के पिंक कलर में है | मेरी तो पार्टी अभी बाकि है और दस दिन और ब्लोगिंग से छुट्टी अभी बाकि है |

April 06, 2011

आज मेरे ब्लॉग पर बस ये लिंक है - - - - - - mangopeople

आज मेरे ब्लॉग पर बस ये लिंक है यदि आप की इच्छा हो तो यहाँ जा कर मेरे विचार पढ़ ले यदि इच्छा  हो तो वही टिपण्णी भी दे दे नहीं देना है तो भी कोई बात नहीं नहीं आप समय निकल कर पढ़ ले मेरे लिए यही बहुत है | यहाँ टिपण्णी न दे यहाँ के टिपण्णी विकल्प को बंद समझे | 
एक तो तकनीकी  जानकारी कम है उस पर से आज कल समय भी नहीं मिल रहा है इसलिए टिप्पणी का विकल्प बंद नहीं कर पाई लेकिन आप इसे बंद ही समझे इस पोस्ट के लिए यदि इच्छा हो तो वही पर कुछ विचार रखे | धन्यवाद |

April 02, 2011

विश्वास नहीं हो रहा है ,तो कर लीजिये हम सच में विश्वकप जीत चुके है - - - - -mangopeople

                                                      विश्वास नहीं हो रहा है , 
                             तो कर लीजिये
                  हम सच में विश्वकप जीत चुके है 
           अरे मिठाई खरीदने और खाने की फुरसत कहा है  पहले इस पल का आन्नद तो उठा ले |
                 मुबारक हो आप सब को 

April 01, 2011

ब्लॉग ब्लॉगर और स्वप्न सुंदरी - - - - - mangopeople

चमेलिया जी की मुड बिलकुल ख़राब चल रहा था कुछ दिन से घिसु का व्यवहार ही बिलकुल बदल गया था रहे रहे अकेले में ही मंद मंद मुस्कराने लगता या कभी उसकी हंसी निकल जाती तो कभी अचानक से उग्र हो जाता था और पत्नी की हर बात ही उन्हें बुरी लगने लगती थी " तुम नारीवादी समझती क्या हो अपने आप को " अपने लिए नारीवादी शब्द सुन कर उसे धक्का सा लग जाता था | एक दिन तो हद ही हो गई जब वो अपने बचपने के दोस्त रहीम से भीड़ पड़े " साले तुम लोग तो हमारी खाते हो और उनकी बजाते हो वही क्यों नहीं चले जाते "| न दोस्तों रिश्तेदारों से मिलना न कही आना जाना सुबह शाम या कहे कभी कभी तो रात रात भर बस कंप्यूटर के आगे बैठे रहना और खटकगिरी करना | एक दिन परेशान हो कर चमेलिया जी ने पूछ ही लिया की आखिर तुम इस पर करते क्या हो मुझे लगता है की इसी के कारण तुम दिन पर दिन बदलते जा रहे हो अभी के अभी बताऊ मुझे की क्या चक्कर है नहीं तो उठा कर इस टिन के डब्बे को बाहर फेक देती हूँ | धीसू समझ गया की आज तो बताना ही पड़ेगा |   धीसू बोला "कुछ नहीं है मै यहाँ ब्लोगिंग करता हूँ कुछ अपने मन की लिखता हूँ कुछ दूसरो की मन की पढ़ता हूँ बस और कुछ नहीं है "
 "अच्छा ! इ ब्लोगिंग तो बड़े बड़े सेलिब्रेटी लोगो के चोचले है उनका लिखा तो सब पढ़ने के लिए आतुर है तुम कौन से बड़े आदमी हो और तुम्हारा लिखा और तुम्हारे बारे में जानने के लिए कौन बेफकुफ़ बैठा है " चमेलिया जी बोली |
 " अरे तो मुझको क्या किसी सेलिब्रेटी से कम समझती हो क्या , देखो कितने आते है मुझे पढ़ने के लिए मै ब्लॉग जगत का जाना माना नाम हूँ "  घिसु ने फट से जवाब दिया |
 " अच्छा तो इ बात है मुझे भी सिखा दो न ये ब्लोगिंग करना |" चमेलिया जी ने झट सेलेब्रिटी बनने की इच्छा से कह दिया |
 "अरे तुम ब्लोगिंग करोगी तो खाना कौन बनाएगा और ये सब तुम्हारे बस की बात नहीं है ब्लॉग लिखने के लिए लेखन प्रतिभा का होना जरुरी है ये तुम में कहा है और तुम्हारी रूचि भी इन चीजो में नहीं है दो दिन करके छोड़ दोगी " घिसु ने फटाफट जवाब दे दिया |
 "अच्छा तो मै क्या सारे दिन खाना ही बनाती रहती हूँ , ठीक है जाने दो | " इतना कह चमेलिया जी वहा से चली गई  और घिसु ने सोचा चलो पिंड छुटा नहीं तो यदि इनको सिखा देता तो ब्लॉग जगत में मै क्या क्या ढींगे मारता हूँ अपना एक अच्छा सा इमेज बना रखा है सब इनको पता चल जाता और मुझे ब्लॉग जगत से भागना पड़ता | लेकिन वो तो मुगालते में था दुसरे दिन ही चमेलिया जी घिसु के जाते ही कंप्यूटर पर बैठ गई और ब्लॉग खोल पढ़ने लगी कुछ महीनो तक ये चलता रहा पर उनको घिसु नाम का कोई ब्लोगर नहीं मिला किन्तु एक दिन उन्हें घिसु मिल ही गया, फोटो से पकड़ा गया नाम तो बदल कर उसने राहुल कर लिया था किन्तु चेहरा कैसे बदलता सो पकड़ा गया महीने भर उसकी पोस्ट पढ़ इतना तो समझ गई की घिसु बहुत बड़ा फेकू है और जो निजी जीवन में कभी कुछ नहीं कर सहा वो यहाँ आभासी दुनिया में जेम्स बांड बना फिर रहा है | पर उसे खोजने के चक्कर में वो पुरे हिंदी ब्लॉग जगत के "चाल" और "चलन " को अच्छे से समझ गई और ये भी समझ गई की घिसु यहाँ नाम बदल कर है, इसलिए अब मुझे भी नाम बदल कर इस मैदान में उतरना होगा और देखना होगा की आखिर घिसु यहाँ कर क्या रहा है कही किसी के साथ नैन मटका तो नहीं कर रहा या मेरे खिलाफ कोई  साजिस तो नहीं कर रहा क्या पता अपना दुखड़ा यहाँ रो रो कर मेरी इमेज ख़राब कर रहा हो थोड़ी उसकी मन की थाह लेनी होगी और फटाफट चमेलिया जी ने एक ब्लॉग बना दिया और नाम रखा अपनी फेवरेट वाली हेमा मालानी के नाम पर "स्वप्न सुंदरी" और फोटो लगा दी अपनी एक पुरानी सुन्दर सहेली की | चुकी उन्हें ब्लॉग जगत का "चाल" और "चलन" पता चल चूका था सो वो पहले ही सभी को प्यारी प्यारी और सभी के इगो की मालिश करने वाली टिप्पणिया दे दे कर अपनी मुरीद बना चुकी थी लोग तो उन्हें अपना ब्लॉग बना कर लिखने की मिन्नतें तक करने लगे थे नतीजतन उनकी पहली ही पोस्ट सुपर हिट हो गई और टिप्पणियों की संख्या सौ के पार चली गई  टिपण्णी करने वालो में घिसु भी था | " वाह आप क्या लिखती है मै तो पहले से ही कह रहा था की आप कुछ लिखिए आप के अन्दर छुपे लेखन प्रतिभा को तो मै पहले ही समझ गया था आप जैसे अच्छा लिखने वालो के दम पर ही ये हिंदी ब्लॉग जगत टिका है आप जैसी प्रतिभावान महिलाओ को हिंदी ब्लॉग जगत को और ऊपर उठाने और आगे ले जाने में सहयोग करना चाहिए | बहुत अच्छा लिखती है लिखती रहिये किसी सहयोग की जरुरत हो तो बन्दे को याद कीजियेगा फिर हम तो एक ही शहर से भी है |"  बस फिर क्या था चमेलिया जी को यही तो चाहिए था फट उन्होंने घिसु के मेल कर अपना फेक मेल आई डी दे दिया ताकि बात कुछ आगे बढे किन्तु साथ ही उन्हें गुस्सा भी आ रहा था की पत्नी के लिए तो खाना कौन बनाएगा का जूमला बोला जाता है और बाहर की महिलाओ के लिए ये सब, खूब बेटा घिसु खूब कही एक बार तुम्हारी मन का थाह ले लू फिर बताती हूँ तुमको | फिर तो शुरू हो गया दोनों के बीच विचारो का आदान प्रदान और धीरे धीरे ये विचारो का आदान प्रदान घिसु की तरफ से दिल का लगाना बनने लगा | किन्तु स्वप्न सुंदरी का घिसु अकेला दीवाना नहीं था यहाँ तो कई लाइन में लग गए क्या बूढ़े ??? क्या जवान सब उनके दीवाने हो चले और ये दीवानगी उन्हें मिलने वाली टिप्पणियों में दिखने लगा और उन्हें फलो करने वालो की संख्या महीने भर में ही तीन सौ के पार हो गई | उन पर पोस्टे लिखी जाने लगी उनकी तारीफों के बड़े बड़े पुल बना दिए गए ब्लॉग जगत के सभी बड़े पुरस्कार ???  उन्हें दे दिया गया कुछ ही महीनो में वो एक बड़ी ब्लोगर बन गई | आखिर उन्हें भी दिखाना था धीसू को की वो किसी बात में उससे कम नहीं बल्कि ज्यादा ही है |
                                                                            ब्लॉग जगत में विचरण करते हुए उन्हें पता चला की एक ब्लोगर है जो पक्का नारीवाद का विरोधी है हर मामले में ही महिलाओ का विरोध करता है उसको लगता है की महिलाओ को तो घर में रह घर गृहस्थी संभालनी चाहिए उन्हें तो बस बच्चे पैदा करना और उनकी देखभाल करनी चाहिए और अपने पति की सेवा करनी चाहिए | पढ़ कर चमेलिया जी को बहुत गुस्सा आया सीधा उसके ब्लॉग पर गई और उसका प्रोफाइल चेक किया नजर फोटो पर गई तो लगा जैसे कोई पहचाना चेहरा है कही तो देखा है इनको, दिमाग पर जोर डाला तो पता चला अरे ये तो जौनपुर वाली बुआ के दामाद है | उन्हें पहचानते ही चमेलिया जी की हंसी निकल गई और वो हंसते हंसते लोट पोट हो गई अच्छा तो ये मुगलसराय वाले जीजा है बेचारे ये सब यहाँ न कहे तो क्या करे घर में मेरी दबंग दीदी इनको कुछ कहने तो देती नहीं है बेचारे उसके सामने मुंह भी नहीं खोल पाते है और कुढ़ कर रह जाते है एक तो दीदी दबंग उस पर से उसकी नौकरी भी इनसे अच्छी है उसका जलन अलग बेचारे अपनी पत्नी को तो कुछ कह नहीं पाते है सो अपनी पूरी भड़ास यहाँ दूसरी महिलाओ को ऊपर निकालते है | वो समझ गई ये तो दया के पात्र है इन्हें कुछ कहना ठीक नहीं है बेचारे अब यहाँ पर अपनी भड़ास न निकाले तो और क्या करे |
                                                        अब तक जो हाल घिसु का था वो चमेलिया जी का होने लगा चावल गैस पर रखा और भूल गई, लगी नई पोस्ट के बारे में सोचने जब तक मन में पोस्ट पक कर तैयार हुई उतने में तो चावल जल गया | ये रोज की बात होने लगी कभी रोटी कच्ची तो कभी सब्जी जली कभी बाजार से कुछ का कुछ सामान आ जाता था तो कभी घर गन्दा ही पड़ा रहा जाता क्योकि वो लोगो को टिपियाने में व्यस्त रहती तो कभी किसी को गरमा गर्म बहस का जवाब दे रही होती तो पीछे से कुकर सिटी मारता रह जाता | जब बेचारा घिसु इस बारे में पूछता तो कुछ ऐसा बोल देती की बेचारा वो भी स्वप्न सुंदरी के खयालो में खो जाता और कच्चा पक्का सब बिना ना नुकुर के खा जाता |
                                                  इधर घिसु की हालत और भी ख़राब होने लगी वो तो दिन रात बस स्वपन सुंदरी के सपने में खोया रहता था और घर का एक काम भी नहीं करता था | परेशान हो कर चमेलिया जी को ही  काम के लिए सरकारी दफ्तर जाना पड़ा | सामने बैठा आदमी उबंसी ले रह था उससे कहा की मुझे ये फाइल जमा करनी है कहा करू उसने बेमन से फाइल को देखा और कहा करनी तो यही है रखा दीजिये | बड़ा रूखे से बोला, बगल में बैठे दुसरे लोग हंसी मजाक में व्यस्त थे तो उसने उनसे भी बड़ी रूखे से कहा की "आप लोगो को हंसी ठठे के आलावा और कुछ नहीं आता है जब देखिये तब बस मजाक करना हँसना समय की बर्बादी | " सब चुप हो गए वहा बैठी महिला ने चमेलिया जी को अपने पास बुलाया और पूछ "क्या काम है हमें बताइए उन्हें छोडिये बड़े नीरस और बोरिंग आदमी है इसीलिए किसी से उनकी मित्रता नहीं है उनके पास कोई बैठ जाये तो आदमी बोरियत से मर जाये जीवन में आन्नद का मतलब ही उन्हें नहीं पता सो दूसरो को भी हँसता देख इन्हें कष्ट होता है "| चमेलिया जी एक बार फिर उनकी तरफ देखने लगी वो अपने आँखे से चश्मा निकाल कर अपनी आँखे पोछ रहे थे | चश्मा उतारते ही चमेलिया जी ने उन्हें झट से पहचान लिया अरे ये तो ब्लॉग जगत के हास्य सम्राट है ये देखते ही चमेलिया जी का मुंह खुला का खुला ही रह गया | अरे मेरी ब्लॉग पर इनसे कितनी पटती है हमारे हंसी मजाक वाले टिप्पणियों के आदान प्रदान होता रहता है  इनके हास्य के सभी कायल है और ये निजी जीवन में कितने बोरिंग और नीरस है इन्हें तो दूसरो का हँसना भी नहीं गवारा है | हे प्रभु ये कैसी दुनिया है और ये कैसी आभासी दुनिया है जहा आदमी कुछ  का कुछ बन जाता है |
                                                                      पुरे ब्लॉग जगत में ब्लोगर मिट की धूम थी चमेलिया जी को लगा की इस बार जब घिसु ब्लोगर मिट में जायेगा तो वो भी उसकी पत्नी की हैसियत से साथ हो लेंगी और कुछ लोगो से मिल भी लेंगी | जब घिसु जाने लगा तो उन्होंने भी साथ चलने की इच्छा जाहिर कर दी इस पर घिसु ने फिर भाव मारा " अरे वो कोई तुम्हारे भाई की शादी है जो तुमको ले के चलू, वहा सभी विद्वान जन आयेंगे वहा पर बड़ी बड़ी बौद्धिक बाते होंगी नए नए विचारो का जन्म होगा ब्लॉग जगत की तरक्की की बाते होंगी तुम्हारे तो पल्ले भी नहीं पड़ेगा कुछ वो तुम्हारे जाने लायक जगह नहीं है | " बेचारी मन मसोस कर रह गई किन्तु दुसरे दिन उनका माथा ठनका जब मिट की फोटो उन्होंने ब्लॉग पर देखा और माथा पिट लिया | पता चला की ब्लोगर मिट के नाम पर बस मिलना मिलाना, हंसी ठठा और जाम टकराए गए साथ में रात का सुरूर चढ़ने पर वो सब भी हुआ जो उनकी भाई की शादी में जीजा लोग पीने के बाद करते है | उन सब में घिसु भी था और उन फोटो पर वैसे ही टिप्पणिया भी आई जैसी शादी के दुसरे दिन जीजा लोगो की कारस्तानी सुन दीदी लोग खीसे निपोर कर करती है | यानि कुल मिला कर वो बौद्धिक मिलन कम भाई की शादी ही निकली |
                                       एक दिन वो बाजार जाने के लिए घर से निकली तो देखा कुछ दुरी पर मजमा लगा है और दो अल्ट्रा मार्डन छोटे छोटे कपडे पहने लड़किया एक युवक को पिट रही है, वो भी मजे लेने के लिए वहा चली गई और पूछ क्या हुआ तो पता चला की लड़का एक साथ दो दो लड़कियों के साथ चक्कर चला रह था आज पकड़ा गया दोनों उसकी पूजा कर रही है | उन्होंने सोचा की रोकना चाहिए पूछा कितने देर से ये पिट रहा है बगल वाला बोला मै तो बीस मिनट से देख रह हूँ तो ठीक है दस मिनट और पिट लेने दीजिये फिर रोकते है | आधे घंटे होते ही चमेलिया जी ने इन दो लड़कियों को रोका "अब बस करो इसे पिटना, हाल देखो अपने हाथो का, उनमे दर्द होने लगेगा और अब और इसे पिटा तो तुम्हारी सैंडिल भी टूट जाएगी फिर घर क्या पहन कर जाओगी |" लड़का जो बेचारा कब से अपना चेहरा निचे कर उसे बचाने का प्रयास कर रहा था उसमे थोड़ी हिम्मत आ गई वो खड़ा हो गया उसके देखते ही चमेलिया जी की आँखे बड़ी बड़ी हो गई अपने दोनों हाथो को अपने गालो पर रखते  हुए जोर से कहा "तुम" ये सुन लड़का थोडा सकपका गया सोचने लगा की ये कौन है कही मेरी कोई रिश्तेदार तो नहीं | चमेलिया जी ने आगे कहा की " तुम तो वही हो ना जो ब्लॉग पर लिखते हो की लड़कियों को ढंग से रहना चाहिए माँ बाप का कहना मानना चाहिए उन्हें लड़को से दोस्ती नहीं करनी चाहिए उन्हें छोटे छोटे कपडे नहीं  पहनने चाहिए लड़कियों को शालीनता का पाठ पढ़ाते हो और लड़कियों को लड़को के बिगड़ने का दोषी तक मान लेते हो " | ये सुन लड़किया बिलकुल चौक गई और कहा " ये बेफकुफ़ ब्लॉग लिखता  है और उसपे ये सब लिखता है | अरे हम कभी भारतीय कपड़े पहन ले तो कहता है की क्या बहन जी की तरह बन कर आई हो मेरी गर्ल फ्रेंड बनना है तो मार्डन कपडे पहन कर आया करो " | चमेलिया जी बोली " यदि मै पहले इसका चेहरा देख लेती तो इसे आधे घंटे और पिटता छोड़ देती रुको तुम लोग काफी दिन से इसे टिपिया टिपिया कर सुधरने को कह रही थी पर ये सुधर नहीं रहा था आज इसे पिटवा कर सुधारती हूँ " वो भीड़ की तरफ मुड गई : कैसे निर्लज्ज लोग है आप सब दो बेचारी मासूम लड़किया इसे अकेले पिट रही है और आप लोग चुप चाप खड़े खड़े देख रहे है इसे पिट पिट कर इन बेचारियो के हाथ में छाले पड़ गए और इस कम्बखत का तो मुंह भी नहीं सुजा क्या आप के घर में माँ बहन नहीं है क्या,  वो अकेले किसी को ऐसे मारती रहेंगी और आप खड़े  खड़े  देखते रहेंगे आप उनकी कोई मदद नहीं करेंगे लानत है आप लोगो पर पीटीए इसे जब तक इसका मुंह सूज ना जाये जिसके बल पर ये लड़कियों को फंसाता है | " चमेलिया जी के जोशीले भाषण से सभी में जोश आ गया और सब टूट पड़े उस पर चमेलिया जी ने भी उस पर अपने हाथ साफ कर अपनी भड़ास निकाली और उसे भीड़ के हवाले कर घर आ गई |
                                                                              घर आ कर मेल चेक किया तो वहा घिसु का प्रणय निवेदन पड़ा मिला पढ़ कर मारे ख़ुशी के उनका जी भर आया लेकिन तभी उन्हें याद आया की ये तो मेरे लिए नहीं स्वप्न सुंदरी के लिए है ये सोचते ही उनका पारा सातवे आसमान पर पहुँच गया " आज आने दो इस घिसु के बच्चे को आज इनको मै नही छोड़ने वाली हूँ बहुत देख लिया सपना अब इन्हें सपने से जगाने का समय आ गया है | " तुरंत मेल का जवाब दिया और घिसु से मिलने के लिए जगह लिख उसे उसी दिन बुला लिया | वहा आफिस में घिसु सारे दिन बस अपना मेल ही खोल कर बैठा था न जाने उधर से क्या जवाब आये कही उसका दिल न टूट जाये कही वो बुरा न मान जाये कही मुझसे बात करना ही न छोड़ दे | पर जब जवाब पढ़ा तो उसके पैर ही जमीन पर नहीं पड़ रहे थे | फटा फट आफिस में पत्नी के बीमार होने का बहाना बना वो वहा से निकल पड़ा ताकि अपनी स्वप्न सुनदरी के लिए वो कुछ अच्छा सा उपहार ले सके | इधर चमेलिया जी भी घर पर बेलन झाड़ू जैसे अपने हथियारों को दुरुस्त करने लगी आज आने दो घर पर इनका सारा भुत उतार दूंगी | तभी बाहर से बच्चो का शोर आने लगा देखा कोई व्यक्ति बच्चो को डांट रहा था वो भी बाहर आ गई वहा पहुंचते ही वह आदमी इन्ही की तरफ मुखातिब हो गया और कहने लगा "देखिये कितने बदमाश बच्चे है कहते है स्कुल की तरफ से दान देने के लिए पैसे चाहिए सभी से दस दस रुपये जमा कर रहे है सब नौटंकी है ये स्कुल वाले एक रुपये नहीं देते है सब इनके जेब में जाना है फिर दान गे भी तो  स्कुल की तरफ से जाने वाला है हमारा कौन सा नाम होगा और ये बच्चे जबरजस्ती मुझसे पैसे मांग रहे है दान वान देने के चोचले मै नहीं करता हूँ " वो आदमी बोलता जा रहा था और चमेलिया जी उसका चेहरा देखे जा रही थी | तभी पीछे से आवाज आई " अरे आप यहाँ क्या कर रहे है " चमेलिया जी ने पीछे मुड कर देखा तो वो उनके मोहल्ले में नई नई आई मीना थी | मीना ने तुरंत परिचय कराया की ये मेरे पति है दोनों ने उन्हें मुस्करा के देखा और चले गए | और चमेलिया जी सोचने लगी ये तो हमारे गुप्ता जी थे जो ब्लॉग पर बड़ा ढींगे हांकते है की वो बड़ा समाज सेवा कर रहे है बड़े भले आदमी है सभी की चिंता है उन्हें और साथ में स्वप्न सुंदरी के करीब आने का प्रयास करने वालो में ये भी एक है और इनकी इतनी अच्छी सी पत्नी को कुछ पता ही नहीं है | चमेलिया जी ने तुरंत ही अपनी पोल खोलने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया सोचा की मुझे इसमे उन सभी पत्नियों को शामिल करना चाहिए जो अपने पतियों के ब्लोगिंग से त्रस्त है और जो जानती ही नहीं की उनके पति ब्लॉग जगत में और दुसरे सोसल साईट पर बैठ कर क्या क्या कर रहे है | उन्होंने ठान लिया की वो ऐसे सभी पतियों की पोल खोलेंगी और अपनी तरह ही उनकी पत्नियों को भी  फेक ब्लॉग या दुसरे साईट पर झूठा प्रोफाईल बना कर अपने पतियों की सारी कारस्तानी दिखाएंगी |
                                      आज महिना भर हो गया चमेलिया जी के सपथ लिए न जाने किन किन की पत्नियों ने न जाने किन किन नामो से अपना ब्लॉग बनाया होगा या दुसरे साईट पर अपना प्रोफाइल बनाया होगा पता नहीं कौन कौन अपनी ही पत्नी से चैट कर कर खुश हो रहा होगा, पता नहीं कितने ही ब्लॉगर जो घर की मुर्गी साग बराबर मान कर पत्नी के विचारो को जरा भी भाव नहीं दे रहे थे वो ब्लॉग पर उनके तारीफ में कविताए लिख रहे हो या लम्बी लम्बी टिप्पणिया दे रहे हो उन्हें महाश्वेता देवी से लेकर महादेवी वर्मा तक का ख़िताब दे रहे हो, पता नहीं कितनी पत्निया ब्लॉग पर पति का नया रूप देख कर आश्चर्य में पड गई हो ,पता नहीं कितनी पत्निया उनकी लम्बी लम्बी फेकू बाते पढ़ हंस हंस के लोट पोट हो रही हो पता नहीं - - -- - - - --और बेचारे ब्लॉगर पति ये सोच की उनके बारे में घर पर किसी को पता ही नहीं कुछ भी लिख रहे हो | अब उन्हें क्या पता की उनके जाने के बाद पत्निया उनकी खबर रखने के लिए क्या क्या कर रही है |
                 
नोट ----- ब्लॉगर इसे अप्रैल फुल का मजाक ना समझे सच में चमेलिया जी "ब्लॉग पीड़ित पत्नी संगठन " बना चुकी है और अपने काम पर भी लग गई है सो ऐ भाई जरा देख कर टिपियाइये फिर ना कहियेगा की मैंने बताया नहीं |