August 09, 2010

हाय ये क्या हुआ मेरा तो पंद्रह अगस्त मनाने का सारा उत्साह ही ठंडा हो गया

        उनका हाल देख कर मन बैठ गया चेहरा लटका हुआ उदास, बातों में भी कोई उत्साह नहीं, मुझसे रहा  नहीं गया पड़ोसी धर्म निभाते हुए मैंने पूछ ही लिया क्या हुआ भाई साहब कोई बात हो गई, मेरा पूछना था कि वो शुरु हो गये हाय ये  क्या हो गया पूरे साल जिस पन्द्रह अगस्त का इंतजार रहता था उसने इस बार ये क्या किया सारा उत्साह ही ख़त्म हो गया उसे मनाने का, उसने तो हम पर इतना बड़ा तुसारापात किया जिसकी हमें उम्मीद ही नहीं थी साल के पहले दिन जब नया  कलैंडर घर में आता है तो सबसे पहले हम उसमे २६ जनवरी और १५ अगस्त को ही देखते है और उस दिन को कैसे मानना है  सारा कार्यक्रम आठ महीने पहले ही बना लेते है पर इस बार ये क्या हो गया जिस पंद्रह अगस्त का इंतजार था वो पड़ा भी तो सन्डे के दिन छुट्टी के दिन, चली गई हमारी एक सरकारी छुट्टी हमारी सरकारी हराम खो------मतलब आराम का दिन | अब क्या खाक मनाये पंद्रह अगस्त सोचिये की आखिर हम सभी लोग क्यों भागते है किसी सरकारी नौकरी के पीछे इसीलिए न की हमें ज्यादा से ज्यादा सरकारी वेतन सहित छुट्टियाँ  मिल सके अब सोचिये की इसी तरह सारे तीज त्यौहार पर्व इसी तरह सन्डे के दिन पड़े तो क्या होगा हम सब का | हम तो सोचते है कि कोई न कोई ऐसी व्यवस्था होनी ही चाहिए कि कोई भी पर्व शनिवार या रविवार को ना पड़े | हा ये तो है की कुछ सालो बाद वह पड़ सकते है तो हमारी कामना है की वो साल लिप ईयर पड़ जाये जिससे वो अपने आप ही एक दिन आगे बढ़ जायेगा | तीज त्योहारों का तो जी कोई झंझट नहीं है पंडित जी से कह कर वो सब सेटिंग हो जाता है जी पहले ही हवा में  बात उड़ा दी जाती है की जी फला त्यौहार तो शाम से लगेगा सो दो दिन मनाया जायेगा बस संडेवाली छुट्टी बड़े आराम से मंडे को खसका दिया जाता है | पंडित भी खुश की एक दिन के त्यौहार में सारे जजमान निपटाना मुश्किल होता था अब दो दिन पड़ेंगे तो किसी को पहले दिन निपटा देंगे किसी को दूसरे दिन और हम तो जी हैप्पी ही हैप्पी  |
                 अब आप ही सोचिये अगर हमको आराम ना मिले तो हम पूरी लगन से काम कैसे करेंगे और आप सभी तो जानते ही होंगे की हम सरकारी कर्मचारी कितनी मेहनत से पूरे आठ घंटे काम करते है क्या कहा की काम तो हम सिर्फ छ: घंटे करते है जी बस के धक्के खा कर जो आँफिस आते है और जो पेट पूजा करते है उसे क्या हमारे काम के घंटे में नहीं जोडियेगा अरे हम क्या अपने लिए खाते है जी हम तो दूसरों के लिए खाते है न खाए तो सोचिये क्या होगा, खाने से पहले हमारे काम की रफ़्तार देखिये क्या मजाल की कोई फाइल  एक मेज से आगे पढ़ जाये और खाने के बाद देखिये बदन में क्या स्फूर्ति आती है फटा फट फाइल पास हो जाती है तो बताई ये की क्या हम अपने लिए खाते है | देखिये आप ने बातों बातों में  मुद्दे से भटका दिया ना हा तो हम छुट्टियों की बात कर रहे है आप तो जानती है की हमारे यहाँ तो कहावत ही है की सात वार और नौ त्यौहार और इस मामले में हम सभी बड़े सामाजिक सदभाव  वाले  है हमसे बड़ा धर्मनिरपेछ  तो कोई है ही नहीं, क्या ईद क्या दीवाली होली क्या क्रिस्मस क्या बैशाखी जी हम त्यौहार मनाने में कुछ नहीं देखते हम सब त्यौहार मिल कर मानते है और हर छुट्टी का दिल से स्वागत करते है | त्यौहार क्या जी हम तो महा पुरुषों की जयंतियो का भी दिल खोल के स्वागत करते है  गाँधी जयंती नानक जयंती आम्बेडकर जयंती सब हमारे लिए बराबर है | हम तो कश्मीर से कन्याकुमारी तक पता लगाते है की कही किसी महापुरुष के साथ ज़्यादती तो नहीं हो रही है उसके सम्मान में छुट्टी की माग करते है | अरे  किसी को सम्मान देने का इससे बड़ा और क्या ज़रिया होगा की उसके लिए छुट्टी घोषित किया जाये |  भाई हम सरकारी कर्मचारियों  के सम्मान देने का तो यही तरीका है | हम तो आप लोगों से भी विनती करते है की आप के नजर में है कोई ऐसा महा पुरुष या कोई तीज त्यौहार जिसको सरकार उचित सम्मान नहीं दे रही है तो तुरंत  हमारे पास उनका लेख जोखा भेजिए हम सरकार की तरफ से उन्हें उचित सम्मान दिलवायेगे | घबराइये  नहीं हम इसमे जात पात धर्म जैसे आडम्बर नहीं पालते हम सम्मान दिलाने के मामले में सबको समान रूप से देखते है |
और अंत में
हमारा देश ने फिर से  हमारे पांच हजार साल पुराने वैभव को पा लिया हर तरफ दूध की नदिया बह रही है मंदिर फिर से सोने चाँदी से मढ़ गए है हमारा ख़ज़ाना हीरो जवाहरातो से भरा पड़ा है कही कोई गरीबी नहीं है हर जगह उल्लाश फैला है देश में पैसे की कोई कमी नहीं है इसलिए अब किसी को भी रोज काम करने की जरुरत नहीं है व्यवस्था को उलटा कर दिया गया है अब छ: दिन छुट्टी होगी और सिर्फ एक दिन काम करना होगा सिर्फ सन्डे को काम करना होगा | ये सुनते है एक चीख  की आवाज़ आई  और कोई जोर से  चिल्लाया  क्या कहा सन्डे तो छुट्टी का दिन है एक दिन काम करना होगा क्या ख़राब दिन आगये है |
                

23 comments:

  1. सही कहा चाहे गणतंत्र दिवस हो या स्वतत्रता दिवस हम उसे केवल छुट्टी के दिन के रूप में याद करते है और उसी तरह मनाते है | ना तो हम देश को आजाद कराने वाले शहीदों को याद करते है और न ही देशा के बारे में सोचते है | अच्छा लेख |

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  2. हम भारतीयों के कामचोरी का एक और दिन वाकई हम पंद्रह अगस्त मनाते है स्वतंत्रता दिवस नहीं | हमें तो बस छुट्टियों का बहाना चाहिए इस मामले में हम सब एक हो जाते है हमारे विचार सोच सब एक हो जाते है |

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  3. sach byan kiya aapne.............lekin kuchh ho nahi sakta.......

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  4. दिल्ली प्रेस की पाक्षिक पत्रिका "चंपक" में
    जानवरों से संबंधित बहुत-सी कहानियाँ छपती हैं!
    --
    यह पत्रिका हिंदी के साथ-साथ
    कई अन्य भारतीय भाषाओं में भी छपती है!

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  5. bahut sahi farmaya aapne..
    aaj ke waqt me yahi hota hai...
    Meri Nai Kavita padne ke liye jaroor aaye..
    aapke comments ke intzaar mein...

    A Silent Silence : Khaamosh si ik Pyaas

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  6. ... prabhaavashaalee abhivyakti !!!

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  7. bahut badhiya likha hai..aam aadmi ki aam si soch..khas ko bhi aam kar deti hai..gud one :)

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  8. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  9. मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! आप बहुत ही सुन्दर लिखते है ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है !

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  10. hum bhartiya har samasya se chhutkara pa lenge siway kaamchori ke.phir se ek sundar prastuti.keep writing.

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  11. बिकुल सच कह रही है आप |क्या देश प्रेम अब स्कूली रस्म बन कर रह गया है ?उसमे भी माँ बाप को कही बाहर जाना हो तो बच्चो की गलत ढंग से छुट्टी करवा देते है |

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  12. बहुत नाइन्साफ़ी है।
    घुघूती बासूती

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  13. क्या कहने साहब
    जबाब नहीं निसंदेह
    यह एक प्रसंशनीय प्रस्तुति है
    satguru-satykikhoj.blogspot.com

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  14. इत्ती नाइंसाफ़ी मत करो जी, संडे को छुट्टी होती है फ़िर उस दिन भी काम करवाना जरूरी है क्या?
    अपने शानदार कमेंट्स से फ़त्तू का उत्साह बढ़ाने के लिये बहुत बहुत धन्यवाद।


    भारतीय स्वतंत्रता दिवस की आपको व आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनायें।
    आइये कामना करें कि हम अपनी आजादी को अक्षुण्ण रख सकें।
    आभार।

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  15. एक बार फिर से ब्लॉग का टाइटल " मेंगो पीपल " से जुड़ा हुआ सार्थक और सच्चा लेख
    इस लेख के लिए धन्यवाद
    हाँ ...एक बात कहना चाहूँगा की जहां तक "खाने" की बात है हर कर्मचारी के "खाने वाला कर्मचारी" बन जाने के पीछे अनेक स्वार्थी नागरिकों का भी बराबर हाथ होता है , हम सब को अपना काम जल्दी करवाने की जल्दी होती है , रिश्वत देने वाला अपने आप को समझदार साबित करने में सफल हो जाता है , इमानदार बेवकूफ कहा जाता है
    खैर "मेंगो पीपल" और "मांगो पीपल" को छोड़िये , लेख बहुत अच्छा और सार्थक है
    एक बार फिर से आभार

    स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

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  16. ये एक कड़ुवा सच है ,... पर है तो सच ही ... इस बार एक छुट्टी मारी गयी ....

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  17. बहुत सही बात कही आपने....और ये सच्चाई है...
    १५ अगस्त, २६ जनवरी अपना अर्थ खो चुके हैं...ये दिन अब सिर्फ एक सरकारी छुट्टी में तब्दील हो चुके हैं....और फिर जब छुटियों की आदत हो तो यह बात खल ही जाती है लोगों को...गौर से देखा जाए तो कितना काम करते हैं सभी सरकारी संस्थाओं में ...बेचारे ..देखिये न..!

    सरकारी नौकर नहीं दामाद/बहू इस तरह से काम करते हैं..
    कुल मिला कर ३६५ दिन होते हैं साल में ...ये रहा काम करने का लेखा जोखा.....
    ५२ दिन -Sunday
    ५२ दिन -Saturday
    ६५.५ दिन -एक घंटा देर से आना और एक घंटा पहले जाना
    ४० दिन -लंच
    १६ दिन-चाय
    ८ दिन-सिगरेट/गप्प
    २० दिन-त्यौहार
    १५ दिन-ऑफिस के टाइम में पर्सनल काम करने में
    १२ दिन-Casual Leave
    ३० दिन-मेडिकल
    पूरे साल में हम सिर्फ ५४.५ दिन सही मायने में काम करते हैं...
    हाँ नहीं तो...!!

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  18. हा हा हा
    गजब का रीसर्च किया है अदा जी ने

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  19. यह तो आपने हिन्‍दुस्‍तान के केवल तीस प्रतिशत लोगों की ही बात की। सत्‍तर प्रतिशत आबादी को इतवार भी नसीब नहीं होता। क्‍योंकि वे अगर काम नहीं करें तो खाएंगे क्‍या। छुट्टी तो उनके लिए बेकारी लेकर ही आती है।
    सवाल और चिंता सही है।

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  20. .
    देश प्रेम या सिर्फ रस्म ?
    दुखद ।
    .

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