August 16, 2019

सजन मिल न सकेंगे दो मन एक ही आंगन में -------mangopeople

🎼अबके सजन सावन में ,आग लगेगी बदन में 
घटा बरसेगी , मगर तरसेगी 
सजन मिल न सकेंगे दो मन एक ही आंगन में 🎼

"सोफा क्यों खोल रही हो 🤔 | क्या बात हैं तकिया , पॉपकार्न सब बड़ी तैयारी😃 | आज ड्राइंग रूम में ही सोना हैं क्या | इरादा ठीक नहीं लग रहा तुम्हारा😍😘 "
"एकदम ख़राब इरादा हैं आज😍 | फटाफट बंद करो अपना लैपटॉप ,काम धंधा 😘
" क्यों 🤔 "
" टीवी पर एक बहुत ही रोमांटिक फिल्म आने वाली हैं PS i love you 😍| जानते टॉप टेन रोमांटिक नॉवेल में ये टॉप पर था , उस पर बनी फिल्म सोचो कितनी रोमांटिक होगी | उस पर से कितनी जोरदार बारिश हो रही हैं मौसम भी एकदम रोमांटिक हुआ पड़ा हैं 😍😘"
"बस दस पंद्रह मिनट का काम हैं यार | ये रिपोर्ट बना कर मेल करना हैं बस , फिर साथ में बैठ कर देखेंगे 🥰 "
" बाद में नहीं कर सकते हो 😔"
"जरुरी हैं आज ही सच्ची , कल संडे हैं , बस थोड़ा देर 🥰"
" लो फिल्म भी शुरू हो गई अरे वाह ये तो मैरेड कपल की लव स्टोरी हैं | अब तो देखने में और मजा आयेगा 😃| अरे ये क्या फिल्म शुरू होते ही हीरो मर गया ये कैसी लव स्टोरी हैं 🤔"
"सुनो , तुम ऐसी कमेंट्री करती रहोगी तो मेरा काम खत्म नहीं होगा 🙄"
"मेरे सामने रहोगे तो मैं बोलती रहूंगी😄"
"ठीक हैं मैं बेडरूम में चला जाता हूँ काम ख़त्म करकेआता हूँ जल्दी से😇"
पंद्रह मिनट बाद बेडरूम के दरवाजे पर खटर पटर की आवाज हुई
" तुम दरवाजे पर कुंडी लगा रहें हो इतना डिस्टर्ब कर रहा हैं तुम्हे टीवी की आवाज और आवाज तेज कर देतीं हूँ बंद दरवाजे से भी अंदर जायेगी😲😫"
उसके बाद हमने इंतज़ार में ही पूरी फिल्म अकेले देख ली | खैर सोने के लिए दरवाजा नॉक किया ये सोच कर की वो अब भी काम ही कर रहें होंगे लेकिन दरवाजा खुलते ही मेरा गुस्सा और बढ़ा क्योकि लाइट बंद थी 😡 और उनके चेहरे की हवाइयां उडी थी " ओ माई गॉड 😱"
"भूल गये ना कि मै तुम्हारा इंतजार कर रहीं हूँ और सो गये ना 😔 "
"अरे नहीं वो क्या हुआ की जब मैं कमरे में अंदर आया तो दरवाजे की ऊपर से कुंडी बंद कर दी थी 😔 | जब काम ख़त्म करने के बाद दरवाजे को खोलने की कोशिश की तो खुला नहीं मैंने सोचा तुम ने गुस्से में बाहर से बंद कर दिया होगा 😯😥 | मैंने ऊपर दरवाजे पर देखा ही नहीं की वो अंदर से बंद हैं | फिर तुमने गुस्से में कुछ चिल्ला कर बोला और टीवी का वॉल्यूम बढ़ा दिया तो पक्का हो गया तुमने ही दरवाजा बाहर से बंद किया हैं और मैं भी गुस्से में लेट गया 😅 "
"तुम मजाक कर रहें हो ना 😳🥺 "
"अरे नहीं मजाक नहीं कर रहा 😅 | अभी तुम्हारे नॉक करने पर देखा की ये तो अंदर से बंद हैं "
" वॉव 😡 ! जानते हो आज तुम्हारा लकी दिन हैं आज तुम्हे सोफे पर नहीं सोना होगा क्योकि मैंने उसे पूरा ओपन करके बेड बना दिया हैं , आराम से सोओगे उस पर , निकल जाओ मेरे कमरे से 😠😡 "
"नहीं जाऊंगा , ये मेरा भी बेडरूम हैं 😘 "
"ठीक हैं , फिर तुम ही यहाँ रहो मैं ही जाती हूँ 😩"
"नहीं तुम्हे भी नहीं जाने दूंगा ये हमारा बेडरूम हैं 😅🥰 "
" छोडो मुझे | इतनी बड़ी अक्लमंदी तुम कर कैसे लेते हो 😔 "
"सॉरी यार काम के धुन में याद ही नहीं रहा 😅 "
"😏😔"
#सावन हो या #वसंत जिंदगी में उसे पकड़ कर रखना चाहिए वरना #पतझड़ के आते देर नहीं लगती 😄

August 14, 2019

तू खिंच मेरी फोटो पिया -------mangopeople


                                         ये जानना था कि पत्नी की अच्छी फोटो खींचने वाला पति , पाने के लिए कितने सावन के सोमवार का व्रत रखना पड़ता हैं 😁 | ना ना यहाँ मैं पत्नी को सुन्दर 😍दिखाने वाले फोटो की बात ना कर रहीं , बस पत्नी की ढंग की फोटो खींचने की बात कर रही 😄|
 हम पत्नियां पति बच्चो आदि की सुन्दर सुन्दर अच्छी अच्छी फोटो ले लेते हैं 🥰😍 लेकिन जब बात हमारी फोटो की आती हैं तो हर मामले में खुद को खिलाड़ी साबित करने का असफल प्रयास करने वाला पति फटाफट अनाड़ी बन जाता हैं 🙄😏🤨|
 एक बार बोल दीजिये अच्छी नई ड्रेस ली हैं एक फोटो तो लो | ऐसी फोटो ली जायेगी कि उसमे आपकी पूरी ड्रेस ही नजर नहीं आयेगी , फोटो कमर तक होगी💁‍♀️ | फिर कहिये पूरी ड्रेस तो आने दो , तो आधे फोटो में घर की छत और दीवारे होंगी नीचे कहीं आप खड़ी मिलेंगी जिसमे ना तो हम नजर आएंगे न हमारी ड्रेस |
शिमीला मंसूरी की किसी फोटो में हम तो नजर आएंगे लेकिन उसमे वो सुन्दर वादियां नजर नहीं आयेंगी | या फिर ऐसी फोटो होगी जिसम बस सुन्दर वादियां ही नजर आयेंगी हम कहीं फोटो में एक बिंदु मात्र होंगे |
समंदर के साथ फोटो लेते समय हमारे आस पास इतनी भीड़ होगी कि ये पता करना नामुमकिन हो जायेगा की फोटो असल में ली किसकी गई हैं और भीड़ में आप हैं कहाँ |
कभी कभी फोटो लेने में इतनी देर लगायेंगे की मुस्कराते मुस्कराते😊 गाल दुख जायेगा लेकिन उनकी फोटो क्लिक नहीं होगी और जैसे ही कुछ बोलने के लिए मुंह खोलेंगे 😲😧या गुस्सा 😡 करेंगे बिलकुल उसी समय फोटो क्लिक किया जायेगा | फिर दोष दिया जायेगा थोड़ा और देर और नहीं रुक सकती थी खिंच तो रहा था |
कभी कभी तो हद ही हो जाती हैं , जब आपकी सुंदर सी फोटो आ तो जाती हैं गलती से , लेकिन फिर आप देखेंगी कि फोटो में नीचे दो जूते या चप्पल उलटे पड़े हुए होंगे 🤦‍♀️, या बाहर ली गई फोटो में कोई गंदा सा कुत्ता आपके बगल में खड़ा होगा 🤦‍♀️, शादी ब्याह की फोटो में पीछे कोई बड़ा सा मुंह खोल कर खाना भकोस रहा होगा 🤦‍♀️, या सामने से गुजर रहें लोग कैमरे में इस तरह देख रहें होंगे जैसे फोटो उनकी या उनके साथ ली गई हैं 🤦‍♀️, कभी कोई बच्चा नाक में उंगली करता या जोर जोर से रोता खड़ा होगा 🤦‍♀️ | अब इसके लिए क्या क्या बताया जाये 🤦‍♀️ |
एक बार सीखा पढ़ा दो कि मेरी फोटो ले रहें हो तो सेंटर में मुझे होना चाहिए , एक नजर मेरे बाल कपड़ो और खड़े होने का पोजीशन देख लो , आस पास कोई फालतू की चीज तो नहीं आ रही देख लो फिर फोटो लो | फिर उसके बाद फोटो लेते समय इतना समय लगेगा 😢 कि आपको समझ आ जायेंगे कि पति पत्नी का साथ जन्म जमांतर या सात जनम का क्यों होता हैं | एक जनम तो पत्नी की ढंग की एक फोटो लेने में ही निकल जानी हैं 🥺😩 |
बच्चों के साथ कुछ स्टाइल में , अच्छे पोज़ में फोटो खींचना चाहों तो ऐसे एंगल से ऐसी फोटो ली जायेगी कि कभी कभी पूछना पड़ता हैं कही कोई कोर्स किया हैं क्या " फोटो कैसे बिगाड़े का" 🙄| कभी उनके साथ ही किसी अच्छे पोज़ में फोटो लेना चाहो तो बस फिर तो उस फोटो का बंटाधार होने से कोई नहीं रोक सकता | खुद तो कोई अच्छा स्टाइल , पोज़ करते नहीं और मैंने बताया तो उसकी टांग तोड़ दी 😏 | 
हे महादेव 🙏! ये २१वी सदी हैं कोनो नया व्रत निकालो | १६ सोमवार में अच्छा पति और ३२ सोमवार में अच्छा फोटो खींचने के साथ हर संडे खाना बनाने वाले पति का वरदान हो 🙏

August 12, 2019

मेरी राहें तेरे तक हैं तुझपे ही तो मेरा हक है --------mangopeople


"खोल रहा था इतना क्या घंटी बजाये जा रही थी | लग रहा हैं बरसात में ज्यादा भींग गई हो ठंड लग रही हैं 😄 "

"उफ़ 😫! कोई गैलरी से सुट्टे मार कर गया है | पूरी गैलरी उसके महक से भरी पड़ी हैं , थोड़ा देर करते दरवाजा खोलने में तो यही बेहोश हो जाती "

"अपने फ्लोर पर कोई नहीं पीता 🤔बाहर का कोई रहा होगा "

" ये बताओ तुम दिन के कितने सुट्टे मार लेते हो 😃 "

"शादी के एक साल से ऊपर हो गए और तुम्हे ये नहीं पता की मैं नहीं पीता 😯😮"

"झूठे 🙄, भूल गये इंगेज्मेंट के बाद तुमने ही फोन पर मुझे बताया था की तुम पीते हो "

" हा एक दो पी लेता था , फिर तुमने उस दिन कहा की अच्छा नहीं होता तो छोड़ दिया 😃 "

"सच्ची छोड़ दिया😍😗 "

"इतने दिनों से देखा क्या 🙄 "

" मुझे लगा ऑफिस जा कर पीते होंगे 😅| सच बोलूं तो मुझे आज के पहले ये याद ही नहीं था "

"तुम्हे क्यों याद रहेगा, तुम्हारे बस एक बार कहने पर क्या क्या छोड़ दिया और तुम्हे पता भी नहीं 😇 "

"क्या क्या मतलब इसके आलावा और क्या 🤔 "

"सिगरेट छोड़ दिया बियर छोड़ दिया 😍😗 "

" मैंने कब शराब छोड़ने के लिए कहा🤔 "

"शराब नहीं बियर पीता था 😄 "

"एक ही बात हुई😅 "

"एक बात नहीं होती 🤨 "

"लेकिन एक मिनट मैंने कब तुमसे शराब छोड़ने के लिए कहा 🙄"

"शराब नहीं बियर , बियर कहा था 🙄| कम से कम बियर कहो इतनी देर लग रहा हैं जैसे मैं कितना बड़ा शराबी था और बीबी की डांट सुन रहा हूँ शराब पी के आने पर 😔😔😔"

"हा वही वही 😄| जब मेरे पूछने पर तुमने मुझे बताया की की तुम दोनों पीते हो | तो मुझे लगा अगर दोनों मना किया , क्योकि मुझे दोनों ही चीजे पसंद नहीं , तो तुम क्या सोचोगे अभी से तुम पर रोक टोक लगा रहीं हूँ तुम्हारी आजादी खतरे में हैं | इसलिए दोनों में से के चीज चुनी सिगरेट | वो तुम्हारे हेल्थ के लिए ज्यादा खतरनाक था इसलिए सिर्फ उसे ही छोड़ने के लिए कहा था | और हां वो भी सिर्फ एक ही बार कहा था उस बारे में फिर कभी दुबारा हमारी बात नहीं हुई 😇"

"देखा तुमने बस एक बार कहा और मैंने छोड़ दी 😍😗 "

"लेकिन शराब सॉरी सॉरी😅 बियर के लिए मैंने कब मना किया मुझे तो बिलकुल याद नहीं 🤔"

" जब उस शाम मैं बियर पी के आया था तो तुमने नहीं कहा मुझसे बारह फिट दूर रहो 😔 "

"हा तो मुझसे दूर रहने के लिए कहा था वो भी बस बारह फिट ,बियर छोड़ने के लिए एक बार नहीं कहा था 😇"

"और वो बारह फिट तुमने हमारे बेडरूम की लम्बाई चौड़ाई आँखों से नापने के बाद कहा था | उसके पहले दस कहा था 🙄"

"हां तो 😁, तुम चार फिट मुझसे दूर थे और मैंने बता दिया की तुम कुछ पी के आये हो | सोचो पूरी शाम और रात तुम्हारे साथ कैसे कटती मेरी | मैं तो तुम्हे चार के बाद पांचवी बार डियो भी स्प्रे करने नहीं देती उसकी तेज स्मेल मुझे बर्दास्त नहीं होती | फिर भी मैंने तुमसे कभी बियर छोड़ने के लिए नहीं कहा था | उसके बाद तुम शायद कभी पी के नहीं आये 🤗"

"तुम्हे पसंद नहीं था तो मैंने नहीं पी 😇 "

"और आज एक साल बाद अफ़सोस हो रहा हैं ना बियर और बीबी में से बीबी क्यों चुनी , बियर चुन लेना था एक ही रात की तो बात थी | अभी भी देर नहीं हुई हैं तुम चाहो तो बियर और बीबी में से बियर चुन सकते हो | बस एक ही रात की तो बात हैं 😆"

"कोई जरुरत नहीं हैं | मुझे जो सेलेक्ट करना था कर लिया 😅 "

"चाय पियोगे 😍😙"

" रुको मैं बनता हूँ | तुम चेंज कर लो "

"दो कप बनाना मेरे लिए भी 😊 "

" आज चाय पीने का मन कैसे कर गया तुम्हारा 😀"

" इतनी अच्छी बरसात हो रही हैं सोचा तुम्हारा साथ दे दूँ 🥰😍😘 "

"सब कुछ खोके, तुझको ही पाऊँगा
मैं तेरा बन जाऊँगा
मेरी राहें तेरे तक हैं
तुझपे ही तो मेरा हक है
इश्क़ मेरा तू बेशक है
तुझपे ही तो मेरा हक है"
कुछ गाने बहुत देर से बनते हैं उन एहसासों को बहुत पहले ही जिया जा चुका होता हैं
#सावन 

June 29, 2019

स्त्री और उसकी पवित्रता-------mangopeople


                                      दक्षिणभारतीय गुरु ने मेरा डांस वही रोक दिया जब मैंने  सीता हरण के दृश्य में रावण को सीता का हाथ पकड़ खींचते दिखाया | अरे भाई ये तुमने क्या किया रावण ने सीता का हाथ कैसे पकड़ लिया सीता इतनी पवित्र थी ,  भला रावण की हिम्मत कैसे थी की वो उन्हें हाथ लगा देता | फिर मुझे पता चला की रामायण के अनेको वर्जन में से  दक्षिणभारतीय  वर्जन में रावण हरण के समय सीता का हाथ नहीं पकड़ता बल्कि उनके लक्ष्मण रेखा के बाहर आने पर जहाँ वो खड़ी होती हैं वहां की धरती सहित उन्हें उड़ा लेता हैं |
                                    आश्चर्य हुआ इस पर , नये वर्जन से नहीं ,स्त्री को लेकर पवित्रता की इस भारतीय सोच से | कोई पराया मर्द गलत सही नियत से स्त्री को हाथ लगा दे तो स्त्री की ही पवित्रता नष्ट हो जाती हैं | स्त्री की पवित्रता शुद्धता इसमें हैं कि पराया मर्द की उंगली भी उसे ना छू जाए , हा अपना मर्द उसके साथ जो चाहे करे , चाहे उसमे उसकी मर्जी हो या ना हो | वो चाहे तो उसे प्रेम करे चाहे तो उसे पीट दे | वैसे गलत सही नियत से किसी पराई स्त्री को छूने वाले उस पराये पुरुष की पवित्रता का क्या होता हैं इस बारे में कही कुछ शायद नहीं लिखा बोला गया हैं | या तो उसकी पवित्रता को कुछ नहीं होता हैं या ये पवित्रता जैसी बाते बस स्त्री के लिए ही होती हैं |
                                       वैसे कुछ सवाल पूछने की  इच्छा थी कि जब सीता पवित्र थीं तो फिर उनकी अग्नि परीक्षा क्यों ली गई  और सूर्पनखा के नाक कान काटते समय लक्षण ने मर्यादा का पालन करते हुए  बिना छुए ये काम किया था या मर्यादा तोड़ी थी | नहीं पूछा ये सवाल जानती थी जिस बात का जवाब ही नहीं होगा उसे क्या पूछना | लेकिन समस्या ये हैं कि पुरातन समय में लिखी गई कथा और उसकी सोच का आज भी पालन होता हैं | आज भी स्त्री की पवित्रता चरित्र को लेकर ऊँचे  मानदंड रखे जाते हैं |


June 25, 2019

तृप्ति -----mangopeople


                                                        सेठ जी हाथ में खीर पूड़ी और दो लड्डू लिए अब भी ऊपर पेड़ पर कौवो को खोज रहें थे , जिनकी आवाज तो आ रही थी लेकिन दिख नहीं रहे थे | सामने फुटपाथ पर पड़ा गोबर और थोड़ी घास बता रही थी कि रोज वहां अपनी गाय लाने वाली वाली अपनी गाय लेकर जा चुकी हैं |  अब मुंबई जैसे शहर में उन्हें कहाँ रास्ते में  घूमती गाय मिलेगी  | मन ही मन सोचने लगे क्या इस पितृपक्ष को मेरे पितर अतृप्त ही रह जायेंगे | यहाँ तो कोई जानवर पंछी  दिख ही नहीं रहा जो उनके पितरो तक उनका दिया भोजन पहुंचा सके | तभी किनारे खड़े दो बच्चो पर उनकी नजर गई शायद फुटपाथ पर रहने वालों के थे | एक पांच छह साल का दूसरा सात आठ साल का रहा होगा | उनके गंदे बदन पर फटी गंदी पैंट के सिवा कुछ ना था | उनकी नज़रे पेड़ के नीचे ढेर सारे पत्तलों में रखे तरह तरह के खानो पर थी जिन पर मखियाँ भिनभिना रही थी | सेठ जी ने एक नजर घड़ी पर डाली और अपना पत्तल भी वही उन पकवानो के ढेर के बगल में रख दिया और हाथ जोड़ आगे बढ़ने से पहले आँखों से उन बच्चो को घूर कर हिदायत दे दी की वो उस खाने को खाने के बारे में सोचे भी नहीं | जैसे ही वो आगे बढे एक तेज हवा का झोका ढलान पर रखे लड्डुओं को लुढ़का कर उन पकवानो से दूर कर दिया | सामने खड़े बच्चो ने एक नजर एक दूसरे को देखा और झट उन लड्डुओं को मुट्ठी में भींच पास की दिवार की ओट में छुप गयें  |  दिवार के पीछे दो तृप्त आत्माएं अपनी हथेलियों की मिठास के मजे ले रहीं थी |
#लघुकथा 

June 20, 2019

मम्मीगिरि-----mangopeople


  "पार्थवी ऐसे गद्दे पर स्लाइड मत करो गद्दा ख़राब हो जायेगा " 
" तुम्ही ने तो स्लाइड बनाया हैं | मम्मी तुम भी करो मजा आ रहा है " तीन साल की पार्थवी👧
"मै बेड के अंदर से सामान निकल रहीं हूँ इसलिए गद्दा ऐसे रखा हैं | तुम्हारे ऐसे सरकने के लिए नहीं "
"तुम भी अपने बचपन में ऐसी ही स्लाइड करती होगी इस पर , तभी तुमने गद्दा ख़राब कर दिया होगा 👧 "
"नहीं मैं इस पर सरकती ही नहीं थी "
"क्यों तुम्हे मजा नहीं आता था 🤔 "
" अरे मै अपने बचपन में यहाँ थोड़े रहती थी "
"यहाँ नहीं रहती थी तो कहाँ रहती थी😯 "
"अपने घर अपने मम्मी पापा के पास "
" तुम्हारे भी मम्मी पापा हैं 😯"
"क्यों मेरे मम्मी पापा नहीं होंगे क्या 🤦‍♀️ "
"तो तुम्हारे मम्मी पापा कौन हैं 🤔"
"नाना नानी मेरे मम्मी पापा हैं | तुम्हे नहीं पता था क्या " उस दिन पता चला हमारी बिटिया को मेरे और नाना नानी के रिश्ते के बारे में नहीं पता हैं 🤦‍♀️|
"नाना नानी तुम्हारे मम्मी पापा हैं | फिर तुम अपने मम्मी पापा को छोड़ कर यहाँ कैसे आ गई 😯 "
"तुम्हारे पापा से शादी करके "
" शादी करके पापा लोगों के घर आ जाते हैं क्या "
" हा मम्मी लोग पापा लोगों के घर आ जाती हैं "
चार घंटे बाद पार्थवी शाम को मेरे पास आई और बोला
"मम्मी मै शादी नहीं करुँगी 😌 "
कुछ पलो सोचना पड़ा 😯ये अचानक से क्या हुआ कि मेरी इतनी छुटकी सी लड़की ऐसा बोल रही हैं | फिर सुबह की घटना याद आई और ध्यान गया की ये तब से चुपचाप सोफे पर बैठी हैं ना खेली ना मुझसे बात किया | अपने काम केचक्कर में मैंने भी उस पर ध्यान नहीं दिया और ये तब से उसी बात को सोच रही थी उसे समझने की कोशिश कर रही थी | तो हमने भी अंदर की हँसी दबाते हुए बस मुस्कुरा कर कहा
"ओके ठीक हैं मत करना😇 "
"तुम भी मुझे मत कहना की शादी कर लो🙄 "
"ओके कभी नहीं कहूँगी😄 "
"मैं कभी तुम लोगों को छोड़ कर नहीं जाउंगी 🥺 "
"ओके ठीक हैं , जैसी तुम्हारी मर्जी 🤭"
रात में जब पापा जी आयें तो दरवाजा खुद खोलते ही उन्हें सीधा फरमान सुनाया गया "पापा मैं कभी शादी नहीं करुँगी "पापा बेचारे हैरान परेशान 😲ये तीन साल की बिटिया क्या बक रही हैं | उनकी सवालियां नज़रे सीधा मेरी तरफ हमने कहाँ " मुझे क्या देख रहें हो | पार्थवी ने बोला ना वो शादी नहीं करेगी , चलो तुम तो पार्टी दो , मुझे तो बड़ी ख़ुशी हैं 🤗"
"पार्टी किस ख़ुशी में 🙄"
"पार्टी इस ख़ुशी में क्योकि हमारी बिटिया सोच सकती हैं बातों को समझ कर उस पर विचार कर सकती हैं और उस पर निर्णय भी ले सकती हैं और सबसे बड़ी बात बिना किसी डर के वो हमें आ कर अपना डिसीजन सूना भी सकती हैं | मैंने उससे एक बार भी नहीं कहा कि उसकी शादी होगी उसे घर छोड़ कर जाना होगा | उसने खुद से ही अपना दिमाग लगा कर सोचा और ये भी सोचा लिया की वो ऐसा नहीं करेगी | मेरे लिए तो ये पार्टी की बात हैं भाई | लेकिन तुम्हारे लिए ये टेंशन की बात हैं 😅 "
"क्यों 🤔"
" अपने मन का करने वाली बीबी के बाद अब अपने मन का करने वाली बिटिया भी आ गई हैं , वो भी तुम्हारी सुनने वाली नहीं हैं 😆😆 "
उस दिन ख्याल आया की एकल परिवार होने पर बच्चों को बहुत सी बातों की जानकारी नहीं होती जो मुझे अपनी तरफ से सोच कर उसे समझाना हैं | दूसरे हमारी बिटिया के पास सोचने समझने सवाल करने वाला और निर्णय काने वाला दिमाग हैं | वैसे ये किस्सा यहीं ख़त्म नहीं हुआ कभी बार कही बोली जा रही चीजें बड़ी दूर तक जाती है यही इस किस्से के साथ भी हुआ |

June 18, 2019

साली जिंदगी-------mangopeople

                                                        एक शाम मन किया आज पनीर टिक्का मसाला  बनाया जाये बाकि सब घर में  था बस पनीर लाना था |  पास के ही दुकान पर मलाई पनीर न था , सादा पनीर था |  सोचा जब खाना हैं तो अच्छा खाओ वरना मत खाओ , यहाँ नहीं मिला तो दूर वाली दुकान से लाती हूँ  | लेकिन जब वहां पहुंची तो वो बंद था  तब याद आया दुकान तो पांच बजे खुलती हैं और अभी बीस मीनट बाकि हैं | अब इतनी मेहनत की थी तो वापस क्या आती बीस मीनट फल वाले के पास ना चाहते हुए ढेर सारे फल लिए और अपनी पसंद का मलाई पनीर ले घर आई |
                                                 
                                                      पनीर , शिमला मिर्च , टमाटर और प्याज सब अच्छे से  चौकोर टुकड़ो में काट , मेरिनेट करने के लिए अदरक लहन का पेस्ट तैयार कर  प्लेटफार्म पर सजाया था कि जोरदार बारिश और पतिदेव का आगमन एक साथ हुआ | इस समय मैं रसोई में होती नहीं कुछ खास हैं  सोच पतिदेव सीधा रसोई में ही आये और सारी तैयारी देख खूब खुश हो कर बोला " क्या बात हैं तुम तो मेरे पेट की आवाज सुन लेती हो |  सोच ही रहा था घर चलके तुमको बोलता हूँ लेकिन तुम तो पहले ही पकौड़ो की तैयारी करके बैठी हो | वाह प्याज के साथ पनीर और शिमला मिर्च के भी पकौड़े , बस मजा आ जायेगा जल्दी बनाओ |
                                                   
                                                      मैं हक्का बक्का अरे मेरी तैयारी से इन्हे ये क्यों लगा की पकौड़े बनने वाले हैं , जबकि मेरा मन तो पनीर टिका मसाला खाने का था और ये डिनर की तैयारी हैं | अंदर से स्वार्थनेस ने जोर का धक्का मारा और मैं जैसे ही कहने गई की पकौड़े नहीं बन रहें हैं तभी उछलती हुई बिटिया आ गई मुझे भी पनीर पकौड़े खाने हैं मेरा फेवरेट हैं ( जबकि ऐसा नहीं हैं ) |
                                               
                                                     लो जी अब तो कोई चांस ही नहीं था , उस तैयारी को देखते सोचने लगी बाकी सब तो ठीक हैं लेकिन ये टमाटर कैसे पकौड़े से जुड़ा , तभी पीछे से आवाज आई , अच्छा किया टमाटर की चटनी बना रही हो सॉस में  वो बात नहीं होती |
                                               
                                                     मेरी सारी मेहनत बेकार गई मेरे मन का तो ना हुआ , सबको पकौड़े खिलाये और आखिर में बिना मन के अपनी प्लेट ले ड्राईंग रूम में आई तो सामने जिंदगी आराम से सोफे पर पैर फैलाये पसरी थी | बोली यार ये तुम लोगो का कुछ समझ ना आता मुझे , तुमको शिमीला मिर्च , प्याज ,पनीर, टमाटर खाने थे और मैंने वो सब तुम्हे खिलाया फिर भी खुश नहीं हो | शुक्र मनाओ की स्वाद बढ़ाया मैंने , कितनी बार तुमने पकौड़ो के साथ टमाटर की चटनी बनाई हैं , आज तो तुमको वो भी खिलाया | जरा भी अतिरिक्त मेहनत नहीं कराया जो तुम्हारी तैयारी थी वही मिला तुमको |
                                               
                                                   इधर मैं हैरान परेशान सोचती ये जिंदगी सबके साथ कैसे खेलती हैं | उसने पहले इच्छा जगाई , फिर उसके लिए  मेहनत भी करवाया ,  अपनी  मर्जी का होता देख जब इच्छाएं अपने चरम पर पहुँच गई तो एक झटके में सब पलट कर रख दिया | हां वो सब कुछ था मेरी प्लेट में जिसके खाने की तैयारी मैंने की थी लेकिन सब होने के बाद वो उसका रूप वो नहीं था जिसकी चाहत थी | दिल कहता हैं  ऐसा तो नहीं सोचा था |
                                             
                                                  पकौड़े अपने आप में बुरे नहीं थे शायद मन में कुछ और पाने की इच्छा न होती तो यही बड़ा स्वाद देते , लेकिन अब बेस्वाद लग रहें थे उनमे वो मजा ही नहीं था , क्योकि मन किसी  पर टिका था , चाहते कुछ और पाने की थी , मेहनत तैयारी किसी और चीज के लिए किया गया था |जिंदगी हमेशा ही ऐसा करती हैं वो हसीन ख्वाब किसी और चीज का दिखती हैं और जैसे ही हम उसे छूने चलते हैं वो आप को नींद से जगा देती हैं |

#सालीजिंदगी

June 14, 2019

रक्तदान महादान ------mangopeople

 दोपहर बाहर से घर आई तो देखा पतिदेव ऑफिस से आ चुके हैं | मुझे देखते ही पूछा
 "कहाँ से आ रही हो मैडम , मैं कब का घर आ गया "
"इतनी जल्दी दोपहर में तुम कैसे "
"ऑफिस का काम था सोचा घर से ही कर लेता हूँ "
एक बड़ी ठंडी सांस लेते कहा अच्छा और जानबूझ कर अपना वो हाथ आगे किया जिस पर सफ़ेद चौकोर चिप्पी लगी थी ब्लड टेस्ट वाली | लेकिन बंदा अपने काम में इतना व्यस्त की उसकी नजर ही ना पड़ती | अब तो गुस्सा आने लगा था , एक तो बंदे ने सिर्फ पूछा कहाँ से आ रही हो उसके जवाब में उसका कोई इंट्रेस्ट नहीं हैं , अब मैं उसे कुछ दिखा के इंट्रेस्ट जगाना चाह रहीं हूँ तो उसका ध्यान ही नहीं हैं | एक आखरी कोशिश फिर की इस बार देख ही लिया |
"अरे ये क्या हुआ , ब्लड टेस्ट के लिए गई थी  " बिना चिंता के बिना घबराई सी मुख मुद्रा के एकदम सामान्य तरीके से जब ये सवाल किया गया तो मेरा पारा सांतवे आसमान पर था | दो मीनट चुप रही कि  देखूं इसके जवाब में भी कोई रूचि हैं की नहीं | लेकिन जैसा की उम्मीद थी कोई रूचि नहीं बंदा अपने काम में व्यस्त |  हमने भी कहा अब ऐसा जवाब दिया जायेगा की बंदा ऊपर से नीचे तक झनझना जायेगा , सब काम छोड़ मेरे पीछे ना आये तो कहना |
" अपना एच आई वी टेस्ट कराने गई थी " इतना कह वहां से उठ किचन में चली गई |
अब बताने की जरुरत तो हैं नहीं बंदा लैपटॉप फेक ( मतलब बगल में आराम से रख कर , हमारे ऐसे नसीब कहाँ कि इतनी व्याकुलता हमारे लिए दिखाए ) पीछे पीछे सीधा किचन में आ गए और कहा
" इसमें  मेरी कोई गलती नहीं हैं मैंने कुछ नहीं किया हैं "
"गुर्रर्रर्र "
"अच्छा अच्छा नाक मत फुलाओ ,  बताओ क्या हुआ हैं , बीमार हो ,  क्या हुआ हैं  , किसा लिए टेस्ट कराइ हो , क्या आया रिपोर्ट में "
" ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट एक दिन में आ जाती हैं क्या "
" ओके पूरी बात बताओ सुन रहा हूँ "
"कल घर पर कॉलेज के दो स्टूडेंट आये और बोले पास के उनके कॉलेज में ब्लड डोनेशन का कैंप लगेगा आज , तो मैंने उनसे कह दिया मैं आज आउंगी "
" अच्छा तो ब्लड डोनेशन के लिए गई थी | इसमें कौन सी बड़ी बात हैं मैंने तो कितनी बार किया हैं " इतना कह वो वापस कमरे में चल दिए |
 " देखा इसीलिए तुम पर गुस्सा आता हैं | पूरी बात तो सुनी नहीं चले आयें ना "
" बोलो मैं सुन रहा हूँ "
" मैं हमेशा से ब्लड डोनेशन करना चाहती थी लेकिन कभी कर ही नहीं पाई | शादी के पहले इतनी पतली दुबली थी की सब चिढ़ाते थे , कि कभी डोनेशन के लिए जाना मत , वरना पकड़ कर तुम्हे ही दो बोलत चढ़ा देंगे "
"अच्छा तो पहली बार डोनेशन किया हैं "
"कहाँ कर पाई "
"क्या हुआ हीमोग्लोबिन कम निकला क्या "
"नहीं , वो ठीक था, डॉक्टर ही गदही थी | तुम तो जानते ही हो मेरा ब्लड निकालना आसान तो हैं नहीं ज्यादातर नस ही नहीं मिलती | जूनियर डॉक्टर को देखते समझ गई कि इसके बस का हैं नहीं मेरा ब्लड निकालना | मैंने उसे पहले ही टोक था कि किसी बड़े डॉक्टर को बुला लो लेकिन वो मानी नहीं | पहले ही तीन बार सुई अंदर बाहर करके मेरा हाथ दुखा दिया | ब्लड निकलने का नाम ही ना ले | फिर चौथी बार में किसी तरह निकलना शुरू हुआ तो देखा जो ब्लडप्रेसर की मशीन लगाई थी उससे हवा निकल रही थी | वो थोड़ी देर में आती हवा भरती वो फिर निकल जाता , मेरे हाथ में गेंद दे दिया इसे दबाते रहिये | फिर निचे ब्लड जमा कर रहें पाउच को देख कर तोड़ी टेंशनियाई | और चली गई गेंद दबाने के चक्कर में मेरा हाथ भी दुःख रहा था | फिर अचानक बगल वाले बेड पर मेरा ध्यान गया , जो आदमी मेरे बाद आया था उसका हो भी गया दूसरा आदमी भी आ गया , लेकिन मेरा तो निकले जा रहा हैं | उतने में वो फिर आई हवा भरा आपकी पहले से ज्यादा टेंशनियाई , इस बार तो मैं भी डर गई | मैंने पूछ लिया क्या समस्या हैं तुम किसी बड़े डॉक्टर को बुलाओ | उसके जाने के बाद ही सामने लेटा दूसरा आदमी भी अपना काम करके चला गया | फिर बड़ा डॉक्टर आया उसने पाउच उठाया वो आधा भी नहीं भरा था | उसने सुई निकल कर कहा जाइये आप का हो गया | मैंने तुरंत जूनियर डॉक्टर की शिकायत उससे की कि मैं काम से इन्हे टोक रहीं हूँ और ये सुन नहीं रही हैं | फिर उससे पूछा क्या ये बेकार हो गया  | तो उसने कहा नहीं बेकार नहीं जायेगा , छोटे बच्चो को जरुरत होती हैं उनके काम आ जायेगा "
"वाह क्या बात हैं | जब मच्छर तुम्हे नहीं काटते थे तो लगता था मच्छर के बस का नहीं हैं , लेकिन आज पता चला तुम्हारा खून चूसना डॉक्टर के बस का भी  नहीं हैं "

आज  ब्लड डोनेशन डे हैं तो किसी प्रशिक्षित काबिल अच्छे लोगों के पास ही डोनेशन के लिए जाये | वरना जितना डोनेशन किया नहीं हैं उतना खून जला लेंगे आप |
#पतझड़

June 13, 2019

सावधान रहें सतर्क रहें सुरक्षित रहें ---------mangopeople

अगर आप भी करवाते हैं अपने बच्चों से ये काम तो हो जाये सावधान | 
मासूम से दिखने वाले बच्चो पर आंख बंद करके ना करे भरोसा | 
बच्चों पर रखे अपनी नजर | उनकी शरारते हो  सकती हैं खतरनाक  | 
आखिर मासूम से बच्ची ने ऐसा क्या किया की माँ के उड़ गए होश |  
                      
                                                 प्यारी सी माँ  से ढाई साल की मासूम बच्ची जिद्दी करके मांग लेती है थोड़े से हरे मटर कि वो उन्हें छील कर करेगी माँ की मदद | मासूम की बांतों में आ कर माँ उसे दे देती हैं थोड़े से हरे मटर | थोड़ी देर बाद जब माँ रसोई में बना रही थी मटर की सब्जी तो वही छोटी सी बिटिया कटोरी में ला कर माँ को देती हैं छिले हुए  हरे मटर | 
                                                उसकी शरारत से अनजान माँ , इस काम पर उसे देती हैं शाबासी और वो छिले  मटर बाकि सब्जियों में मिला देतीं है | कुछ देर बाद माँ  वापस खेलती बच्ची के पास आती है तो वहां के दृश्य देख उड़ जाते हैं उसके होश | 
बच्ची की हरकत देख माँ को आ जाता हैं चक्कर | 
उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था की बच्ची कर सकती हैं ऐसा काम | 
बच्ची हरे मटर छिलती हैं दानो को मुंह में डालती हैं उन्हें चुबलाती हैं फिर साबूत मुंह से बहार निकाल कर कटोरी में रख देती हैं और जैसे ही माँ से उसकी नजर मिलती हैं कहती हैं " मम्मी मैंने और मटर छील दिए इसे भी सब्जी में डाल दो " 👧
और माँ सोचती हैं शुक्र हैं मटर अच्छे से धो दिए थे 🤦‍♀️

सत्य घटना पर आधारित , गोपनीयता के कारण बच्ची का नाम अद्रिका हैं आप को नही बताया जायेगा |
चैन से सोना हैं तो जाग कर बच्चों पर नजर रखिये 🙏

June 11, 2019

प्रेम पागल होता हैं और इश्क अँधा ------mangopeople

                                               कभी सोचा हैं वो क्या था जो सोहनी  को तैरना ना जानने के बाद भी मिट्टी का  मटका ले   दरिया में कूदने को मजबूर कर देता था , वह क्या  था जो मजनू को गली गली लैला लैला कह पागल बन घूमने को मजबूर कर दिया , रोमियो जूलियट को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया | इन बड़ी प्रेम कहानियों की  बात छोड़ भी दे तो  ना जाने अपने जीवन में हम सब ने कितने प्रेम के पंछियों को अजीबो गरीब तरीके के पागलपन करते देखा  हैं | प्रेम में क्या नहीं कर गुजरते ये प्रेमी जोड़े |
                                           
                                              प्रेम पागल होता हैं और इश्क अँधा होता हैं युहीं नहीं कहा जाता , असल में सच में ऐसा ही होता हैं | प्रेम में पड़ते ही वास्तव में इंसान का दिमाग काम करना बंद कर देता हैं | दिमाग के जानकारों ने पता लगाया हैं कि दिमाग का आगे का भाग जो  हमें रोजमर्रा  के जीवन के फैसले लेने में मदद करता हैं , जिसे आम भाषा में हम कॉमन सेन्स कहते हैं , वो प्यार में पड़ते ही काम करना बंद कर देता हैं |

                                              होता ये हैं कि जैसे जैसे हम इश्क में डूबते जाते हैं कॉमन सेन्स हमारा साथ छोड़ता जाता हैं  | नतीजा हम सही गलत का फैसला ठीक से नहीं कर पाते हैं | इश्क में पड़े हर किसी से  गाली खाते हैं ताने सुनते हैं, दिमाग काम नहीं कर रहा हैं क्या , सेन्स नाम की कोई चीज होती हैं , कॉमन सेन्स यूज करो पागलो |अब उस चीज का प्रयोग प्रेम में डूबा करे भी तो कैसे जो बंद पड़ा हैं |बंद पड़ा दिमाग दिल से सोचना शुरू कर देता हैं और दिल इश्क के मारों से वो सब करवा लेता हैं जो दिमाग उसे पहले कभी करने नहीं देता |
                                             अगर आप ये सोच रहें हैं कि जिनका दिमाग ख़राब होता हैं या काम नहीं करता वही प्रेम से पड़ते हैं , तो ऐसा नहीं हैं | जो प्रेम में पड़ते हैं उनका दिमाग काम करना बंद करता हैं  चीजों को सही दिशा में समझे |आप ने प्यार कर लिया हैं लेकिन आप का दिमाग अभी भी काम कर रहा हैं और आप कोई पागलपंथी नहीं करते तो समझिये आप ने प्रेम तो कर लिया हैं लेकिन उसमे डूबे नहीं हैं |
 कहतें हैं कि इश्क तो वो आग का दरिया हैं जिसमे डूब के जाना हैं या डूब ही जाना हैं | फिर क्या जेठ की दोपहर में छत पर आना और क्या डामर वाली सड़क पर दौड़ जाना | ये तो इश्क करने वाला दिल ही समझ सकता हैं |
                                        प्यार में पड़े हैं तो दिमाग को किनारे रखिये और फिर इसका असल आंनद लीजिये | क्योकि दिमाग तो सभी के पास होता हैं लेकिन इश्क में डूबा दिल किसी किसी खुशनसीब को ही मिलता हैं |

June 08, 2019

क्या किसी को हालात बदलने हैं -------mangopeople

                                          रेप करने के बाद उसने उसके योनि में बारबार चाकू डाल कर फाड़ डाला और उसकी दोनों अतड़ियां तक खींच ली | फिर चाकू से  पेट फ़ाड़ उसकी दोनों किडनियां तक निकाल ली | पूरी पोस्ट मुझसे ना पढ़ी गई  , इतने विस्तार से पूरी घटना को जितना वीभत्स बना सकते हैं बना कर  वर्णन किया गया था जैसे सबकुछ उनके सामने हुआ हो | अपनी कल्पना से ऐसा वीभत्स वर्णन करने वाले सवाल करते हैं समाज में लोग इतने वीभत्स कैसे हो सकते हैं |
                                       एक पत्रकार  पोस्टमार्टम की रिपोर्ट ट्वीट कर देंती हैं | जिसमे लिखा था शरीर से कौन कौन से अंग गायब थे , जिसके आधार पर ही इस तरह के काल्पनिक वीभत्स वर्णन किया गया था | लेकिन पत्रकार ये तथ्य नहीं बताती कि शरीर सड़ चूका था और कुत्ते उसे नोच कर खा रहें थे | 
                                      कुछ अपनी विचारधारा के साथ सामने हैं | उन्हें अपराधी और इन्साफ में कम इस बात से कष्ट ज्यादा हैं कि कितने प्रगतिशील लोगों ने किसी और अपराध पर कुछ कहा था लेकिन अब चुप हैं | उनमे से कुछ को इसपे समस्या हैं कि तब जिन लोगों ने  कड़े शब्दों में विरोध किया था आज  उनके  शब्द उन्हें उतने कड़े नहीं लग रहें हैं  | विरोध के लिए दुसरो पर सलेक्टिव होने का आरोप लगाने वाले खुद सलेक्टिव हैं | तब वो चुप थे आज कोई और चुप हैं तो उन्हें परेशानी हैं | 
                                     कुछ को पीड़ित से कोई मतलब नहीं हैं उनके लिए अपराधी का धर्म बहुत हैं उसके पुरे धर्म को गाली देने के लिए , अपना एजेंडा प्रचारित करने के लिए | कुछ उससे भी महान हैं वो पीड़ित का सरनेम लिख इसमें जाति  का एंगल भी ले आतें हैं | दलित होती तो लोग कितना शोर करते ऊँची जाति से हैं तो लोग चुप हैं | कुछ अपनी  वही घिसी पीटी राग फिर से गाना शुरू कर दिए कि इसके लिए नग्नता जिम्मेदार हैं विकास जिम्मेदार हैं | 
                                    कुछ के लिए लगता हैं किसी बच्ची को मार देना एक बहुत ही मामूली अपराध हैं इसलिए अपराध को बड़ा बनाने के लिए उसके साथ रेप जुड़ना जरुरी है | रेप ना जुड़ा तो अपराध संवेदनशील सहानभूति के लायक नहीं लगेगा | किसी मासूम बच्ची को निर्मम तरीके से मामूली से पैसो के झगड़े के लिए मार देना , ये भी कोई इन्साफ मांगने आंदोलन करने और विरोध प्रदर्शन के लायक का अपराध हुआ | उसके साथ रेप, वीभत्स आदि आदि ना जुड़ा तो मामले में दम नहीं हैं |  भले पोस्टमार्टम में ये नहीं निकल पाया क्योकि शरीर में जाँच के लिए अंग ही पुरे नहीं थे ठीक हालत में नहीं थे  | पुलिस की जाँच के पहले हम बतायेंगे कि अपराध क्या और कैसे हुआ हैं |
कुछ कल तक महिलाओं लड़कियों  को लेकर बेतुके पोस्ट लिख अपनी भड़ास निकाल रहें थे आज वो वीर रस में समाज में महिलाओं की स्थिति पर पोस्ट लिख रहें हैं | 
                                   कुछ मजबूरी में देर से बोल रहें हैं कही उन्हें चुप रहने के लिए आरोपित ना कर दिया जाए | कुछ को इस बात की चिंता ज्यादा हैं कि मामले को सांप्रदायिक रंग क्यों दिया जा रहा हैं | इससे हमारी धर्मनिरपेक्ष समाज का माहौल ख़राब करने का प्रयास किया जा रहा हैं | 
कुछ को चिंता हैं इस विरोध के चक्कर में समाज हिंसक हो रहा हैं | लोगों का विरोध ही समाज का माहौल ख़राब कर  रहा हैं | 
                                   सबके अपना अपना एजेंडा हैं जिसके लिए सब काम कर रहें हैं | इन्साफ के लिए , समाज में , व्यवस्था में बदलाव  के लिए कोई कुछ भी अपनी तरफ से ना कर रहा हैं ना करना चाहता हैं और ना करेगा | 

June 03, 2019

नृत्य का धरती पर आगमन --------mangopeople

                                                  
                                          कभी सोचा हैं गुजराती इतना नाचते क्यों हैं | क्यों हर बात हर ख़ुशी  पर गरबा के लिए तैयार रहते हैं (नहीं सोचते  तो कभी कभी सोच लेना चाहिए , सोचने से दिमाग तेज होता हैं )  | तो आज इसके पीछे की वजह हम बताते हैं |
                                        त्रिपुरासुर का वध करके जब शिव आये तो उनके क्रोध को शांत करने के लिए पार्वती ने पहली बार लास्य नृत्य उनके सामने किया | इसके पहले शिव ने तांडव किया था जो पुरुषो का नृत्य था |पार्वती का लास्य स्त्रियों का नृत्य बना (लगभग सभी भारतीय शास्त्रीय नृत्य भी इसी लास्य नृत्य पर ही आधारित हैं ) |  यह नृत्य बड़ा कोमल , सुन्दर और स्त्री की तरह ही सौम्य था |यही लास्य नृत्य बाद में पार्वती ने बाड़ासुर की पुत्री उषा को सिखाया | उषा का विवाह बाद में  कृष्ण के पौत्र प्रद्युम्न  के साथ हुआ | इस प्रकार उषा के साथ नृत्य स्वर्ग से उतर कर पृथ्वी पर  आ गया | उषा ने वह लास्य नृत्य सौराष्ट्र गुजरात  की सभी गोपियों को सीखा दिया और उन गोपियों ने सभी जगह इस नृत्य को फैला दिया |
ऐसा नंदिकेश्वर अपनी पुस्तक अभिनयदर्पण में कहते हैं |
                                          चुकी धरती पर पहली बार नृत्य का आगमन सौराष्ट्र गुजरात में आया तो नृत्य के पहले विद्यार्थी होने के कारण गुजराती आज भी सदा नाचने को तैयार रहतें हैं , क्या स्त्रियां क्या पुरुष |
अब आप कहना चाहें की अब तो आगे के पांच साल भी पूरा भारत गुजराती गरबे की धुन पर नाचने वाला हैं तो आप की मर्जी , हम क्या कहें |

May 31, 2019

विकल्प हीनता का गणित -------mangopeople


                                                आज आप से ताकतवर गणित का एक खेल खेलते हैं और उसकी ताकत को बताते हैं | जिसका उपयोग हम अपने नीजि जीवन में अपनी इच्छाएं पूरी करने के लिए भी कर सकते हैं |  मुश्किल नहीं हैं सभी खेल सकते हैं | बस ईमानदारी से जल्दी जल्दी खेलियेगा |
                                                 एक से नौ के बीच का कोई नंबर सोच लीजिये अब उसे नौ से गुणा कर दीजिये | अगर जवाब दो डिजिट में हैं तो उन दो नंबरों को  जोड़ दीजिये और अगर सिंगल डिजिट में हैं तो उसे वैसे ही जाने दीजिये | अब उस नंबर से पांच घटा दीजिये | अब जो  नंबर बचा हैं उसे अंग्रेजी के अक्षर में बदल दीजिये जैसे 1 - A  , २ - B , 3- C , 4 - D , 5 - E आगे जो भी नंबर हो | अब आप के नंबर पर जो अक्षर आया हैं उससे दुनिया के किसी देश का नाम सोचिये | सोच लिया अब उस देश के नाम के आखिरी अक्षर से एक जानवर का नाम सोचिये | याद रखियेगा जानवर का नाम सोचना हैं पक्षी या जलीय जीव का नहीं | अब उस जानवर के नाम के आखिर अक्षर से एक रंग का नाम सोचिये |  सोच लिया ठीक हैं अब हम आप का मन पढ़ लेते हैं और बताते हैं आप का जवाब डेनमार्क , कंगारू और ऑरेंज हैं |  क्यों यही हैं ना !

                                              असल में मैंने आप को विकल्प हीन बना कर जानबूझ कर उसी जवाब के लिए मजबूर किया जो मैं पाना चाहती थी   |  एक से नौ तक की कोई भी नंबर लेकर उसे नौ से गुणा करने के बाद उन नंबरों को जोड़ेंगे तो जवाब नौ ही आएगा | उसमे से पांच घटाने पर जवाब चार होगा सभी लोगो का , चाहे उन्होंने कोई भी नंबर सोचा हो | अब चार नंबर से आप अंग्रेजी के D अक्षर पर पहुंचते हैं | खूब याद कीजिये D अक्षर से आप को एक ही देश का नाम याद आयेगा वो हैं डेनमार्क ( denmark )  | क्योकि D अक्षर से बहुत ही कम देशो के नाम हैं , गूगल कीजियेगा तो शायद दो और देशो के नाम मिल जायेंगे जिनके बारे में आप ने कभी सुना नहीं होगा  | अब डेनमार्क का आखिरी अक्षर हैं K , इस अक्षर से किसी जानवर का पहला नाम ज्यादातर की जुबान पर कंगारू ही आयेगा और कंगारू( kangaroo ) के आखरी अक्षर O से सबसे पहला रंग  ऑरेंज (orange) ही याद आयेगा | असल में आप के पास जवाब सोचने के लिए ज्यादा विकल्प ही नहीं थे और आप ने वही सोचा जो मैं चाहती थी |
                                                 मतलब साफ़ हैं यदि पति बाहर जा कर पनीर लाने को तैयार नहीं हैं और थकान का बहाना मार रहा हैं तो साफ पूछिये , पनीर ला रहे हो या लौकी पका दूँ | फिर देखिये कैसे घर में आप के पसंद की पनीर की सब्जी बनती है | पत्नी आप के मित्र के घर जाने के लिए तैयार नहीं होगी आप को पता है ,  लेकिन आप को जाना हैं ,आसान हैं | सुना आज मेरी बुआ ने और मित्र दोनों ने खाने पर बुलाया है तुम्ही बताओ किसके घर चले , जवाब होगा आप के मित्र के घर | हो गई ना आप के मन की |
                                                  ये विकल्प हीनता या खराब विकल्प का गणित बहुत की ताकतवर हैं | इतना ताकतवर की दुनियां के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देशो  में से एक में दो दो बार किसी की सरकार भी बनवा सकती हैं | इसको हलके में ना लीजेगा इसका उपयोग कर सकते हैं घर में ऑफिस में स्कूल आदि आदि जगहों पर अपने मन की करवाने में |

नोट - हमें पता हैं हमारे मित्र लिस्ट में ढेर सयाने लोग भी हैं जो कहेंगे कि हमने तो कंगारू ना सोचा था हमने तो कोअला बेयर ( koala bear) सोचा था और रंग Ogre , Olive ऑलिव सोचा था | तो बताने की जरुरत ना हैं हमें बता हैं कांग्रेस को ५२ सीटे किनके वोट से मिली हैं |

May 28, 2019

जात तो पूछो साधू की -----mangopeople



                                                       मुंबई आकर मैंने पहली बार मजबूरी में अपना सरनेम अपने नाम के साथ लगाया , क्योकि यहाँ हर फार्म आदि जगहों पर सरनेम के लिए अलग कॉलम होता जिसको भरना अनिवार्य होता था |मेरे किसी भी डिग्री रिजल्ट आदि पर मेरा सरनेम नहीं हैं | मेरे बहुत सारे मित्र मेरा सरनेम नहीं जानते होंगे | लेकिन मै बहुतों का जानती थी क्योकि वो उसे अपने नाम में लगाते थे |
                                                       अपनी जाति उसकी जड़ों के बारे में इतनी अनिभिज्ञ थी की मुझे अभी छः साल पहले इसके बारे में  पता चला कि हम वैश्य जाति के निचे के तीन उपजातियों में हैं | क्योकि हमारे घर में हमारी या  किसी की भी जाति आदि पर कभी कोई बात बहस चर्चा आदि नहीं होती |हमारे यहाँ हमारे ही सरनेम में शादियां होती हैं क्योकि बड़ी जातिंया हमसे विवाह का रिश्ता रखती नहीं और हमसे नीचे वालों से हम नहीं रखतें | इस बात से अनजान हम अपनी बहनो का विवाह पुरे वैश्य समुदाय में खोजते रहें लेकिन कोई करने ना आया |
                                                     जाति से अनभिज्ञ रहने का ये फायदा हुआ कि हममे कभी किसी भी प्रकार की हीन भावना नहीं आई कि हम अपने जाति में सबसे नीचे हैं और ना कभी किसी बड़ी जाति वाले को इसके लिए चव्वनी का भी भाव दिया | हमें कभी लगा ही नहीं की ऊँची जाति का होना कोई इतना ख़ास हैं कि व्यक्ति को अलग नजर से देखा जाये | ना कभी सोचा कि  ऊँची या नीची या किसी के भी सरनेम से हिसाब से व्यवहार किया जाए |
                                                       बहुतों ने सरनेम ना होने पर हमारा पूरा नाम जानने की खूब चेष्टा की और वो हमारी जाति जानना चाह रहें हैं को भले से समझ हमने सीधा कहा जो जानना चाह रहें हैं साफ पूछे क्योकि पूरा नाम तो वही हैं जो बता रहें हैं | बिंदास उन्हें अपनी जाति बताई बिना किसी हीनता के | शायद उन लोगों ने हमारे लिए कोई ग्रंथि पाली होगी , हो सकता हैं अप्रत्यक्ष रूप से कुछ टिप्पणियां भी पास की होंगी लेकिन हम इन सब से अनजान रहें , क्योकि ये चीज हमारे जीवन के लिए कोई मायने ही नहीं रखती थी |तुम खुद को मुझसे बड़ा समझ मुझे कमतर समझ रहे हो या मुझे बड़ा समझ मेरी सामान्य बातों को जाति सूचक समझ अपने पर कटाक्ष समझ रहें हो तो ये तुम्हारी समस्या हैं मेरी नहीं |
                                                      कहने का अर्थ सिर्फ इतना हैं कि बच्चो के मन में अपनी जाति, धर्म, सरनेम, लिंग, आदि के लिए कभी कोई भी किसी भी तरह का हीन या गर्व की  भावना नहीं पनपने देना चाहिए | मैं हमेशा मानती हूँ कि यदि हम किसी भी प्रकार से निचले पायदान पर है तो हमें हमेशा आगे बढ़ने के बारे में ऊँचा उठने के बारे में सोचना चाहिए | ना कि अपनी ऊर्जा समय और पुरुषार्थ इस बात में व्यर्थ करना चाहिए कि किसके कारण हम इस स्थिति में हैं किन लोगों ने हमें इस सामाजिक स्थिति में रखा हैं , कौन हमें किस नजर से देख रहा हैं हमें क्या समझ रहा हैं  | ये बाते हमें कमजोर बनाती हैं अपने लक्ष्य की ओर जाने में रुकावट बनती हैं और मानसिक तनाव भी देती हैं |
                                                       महाराष्ट्र की डॉक्टर पायल की आत्महत्या के बारे में पढ़ कर बहुत दुःख हुआ | क्या वाकई जाति सूचक गाली या किसी भी प्रकार का कटाक्ष उत्पीड़न इतना बड़ा हो सकता था कि इतनी पढ़ी लिखी लड़की आत्महत्या कर ले |मै वामपंथी और दलित विचारधारा वालों से इसलिए भी पसंद नहीं करती क्योकि वो इस हीनता को किसी दलित पिछड़े के मन  से जाने नहीं देते हैं | दलित पिछड़े को बार बार उसकी जाति की याद दिलाना उसे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहन देने की जगह ये बताना की तुम्हारी स्थिति के लिए कौन दोषी हैं , आगे बढ़ने की जगह ब्राह्मणवाद को कोसने में अपनी ऊर्जा लगाने के लिए मजबूर करतें हैं |ऊँची जाति का होने का गर्व जितना बुरा हैं उतना ही बुरा नीची जाति की हीनता भी हैं | ये बातें हमारा ही नुकशान करती हैं हमें पीछे खींचती हैं |

May 25, 2019

दुर्घटना से बचाव भला ---------mangopeople

                                   
                                             निर्भया केस के बाद मैं जब बिटिया के स्कूल जा कर बस उनके ड्राइवर आदि के बारे में जानकारी लेने लगी तो नर्सरी की प्रिंसपल ने कहा आप बेकार का पैनिक हो रहीं हैं | जब अपना घर बनवाया तो मुंबई में सबके घरो की तरह अपने घर में भी ग्रिल लगवाया लेकिन एक सबसे पीछे के ग्रिल में खिड़की बनवाई ताकि कभी आग आदि लग जाए तो आसानी से बाहर निकला जा सके  | पडोसी कहने लगे इतना क्या आगे का सोचना | अभी कुछ  साल पहले फायर सेफ्टी वाले आ कर बिल्डिंग की  सीढ़ियों के आगे के जालीदार हिस्सों को तोड़ कर खुला रखने को कहा | वो करने में भी सालो लगे |

                                                 हमारे घर , स्कूल , ऑफिस आदि  आग जैसी दुर्घटनाओं के हिसाब से खतरनाक हैं | हमने कभी कुछ नहीं किया ना कभी सुरक्षा के उपकरण रखे ना कभी स्कूल ऑफिस  को इसके लिए टोक | बच्चो को कभी ऐसी दुर्घटनाओं के लिए बचने के उपाय नहीं बताये | ऐसे समय में क्या करना चाहिए नहीं सिखाया |
                                              हम खुद कुछ ना करते हैं ना करना चाहते हैं  लेकिन दुसरो को दोष देना हमें खूब आता हैं | अपनी गलती के लिए भी हम दुसरो को दोष देतें  हैं |  फायर डिपार्मेंट से लेकर हम हमारे घरों में लगी आग के लिए मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक को दोषी ठहरा देते हैं |  कुछ भी ना बदलेगा यदि हमने अपना रवैया नहीं बदला | एक के बाद दूसरी दुर्घटनाए ऐसे ही होती रहेंगी |

May 01, 2019

मईदिवस ---------- mangopeople




१- काम करने का कोई निर्धारित घंटा नहीं हैं

२- २४*७ डियूटी पर तैनात

३- पहले से निर्धारित काम के साथ ही कभी भी ओवर टाइम के लिए तैयार रहने की उम्मीद

४- अपने काम के साथ ही दुसरो के काम की करना

५- काम करने का कोई निश्चित क्षेत्र नहीं , कुक , सफाईकर्मी ,  डॉक्टर , नर्स , शिक्षक, ड्राइवर , इंजिनियर , आया , काउंसलर आदि इत्यादि दुनियां में जितने भी प्रोफेशन हैं सब कार्य

६ - कार्य करने का कोई निर्धारित एरिया नहीं  घर  के अंदर  बाहर सभी काम करने की शर्त

७ - शारीरिक और मानसिक दोनों कार्य करने की योग्यता और काम से भावनात्मक लगाव की सबसे बड़ी शर्त

८ - साल में कोई छुट्टी नहीं

९ - कोई वेतन बोनस नहीं , साल के ३६५ दिन काम बिना किसी वेतन के

१० - सिर्फ खाने कपडे और छत की शर्त पर काम * ( कंडीशन अप्लाई ) , लेकिन किसी भी चीज पर आप का हक़ नहीं | ये सब कभी भी बिना नोटिस छिना जा सकता हैं

११ - ये सब करने के बाद भी ताने की घर बैठी हैं कुछ काम नहीं करती घरेलु हैं |

१२ - सरकारे भी इन्हे अनप्रोडक्टिव  नागरिक के तौर पर देख इन्हे भिखारियों की श्रेणी में रखती रही हैं |

१३ - ये सब करने के बाद भी शारीरिक और मानसिक प्रताणना और मौत होने तक अमानवीय पिटाई आम बात |

इनकी हालत मजदूरों से भी बत्तर हैं | अनपढ़ो को छोड़ दीजिये पढ़े लिखे लोग अपना मन टटोले वो घर में काम करने वाली महिलाओं को कितना सम्मान देतें हैं उनके लिए कैसी सोच रखते हैं |

#मईदिवस