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June 29, 2022

धूर विरोधियों का एक होना


रूस युक्रन  युद्ध  एक ऐसा मामला था जीसने देश के अंदर ही नही देश के बाहर के धूर विरोधियो को एक ही तरफ साथ खड़ा कर दिया । जिसकी कल्पना भी हाल के समय मे कोई  नही ईर सकता था । 

 जब खबर देखी की यूक्रेन और रूस मामले में भारत पाकिस्तान  संयुक्त राष्ट्र में एक लाइन पर आ गए तो इस खबर ने दिमाग के डायबिटीज को इतना बढ़ाया की बस लगा अब तो सीधा भगवान से मुलाक़ात होगी | मतलब समझ रहे हो आप दोनों जानी दुश्मन एक मुद्दे पर सहमत हो गए दोनों एक ही पक्ष की तरफ खड़े हो गए | जो देश कल तक अमेरिकी सैनिक अड्डा बना हुआ था जिसके सैनिक भाड़े के लड़ाकों की तरह अमेरिका से पैसे लेकर उसका युद्ध लड़  रहें थे वो ना केवल हमारे दोस्त रसिया का दोस्त बन गया बल्कि अपने दोस्त  अमेरिक के दुश्मन रूस का दोस्त  बन गया   |   


मुझे शुरू से दिमागी डायबिटीज हैं ज्यादा मीठी मीठी बातें और प्रेम मोहब्बत ना बर्दास्त होती | दिमाग का शुगर लेवल बढ़ जाता इससे | बताइये किसने सोचा था कि दुनियां में ये दिन भी आएगा जब अपने वामपंथी और दक्षिणपंथी किसी मुद्दे पर एक जैसा  राग अलापेंगे | मतलब एकाध वामपंथी साम्यवादी रूस को भले गलती से  तानाशाह बोल दे लेकिन अंदर से तो यही मनाते हैं ना कि रूस चीन का  इकबाल दुनियां में बुलंद हो | वो दिन भी आये जब वामपंथियों का भारत समेत दुनियां पर राज हो | 


वो रूस के साथ खड़े हो तो समझ में भी आये लेकिन अपने दक्षिणपंथी उनको ढ़ेला भर की समझ नहीं हैं रूस यूक्रेन मामले की , जो कुछ महीने पहले तक चचा ट्रंप की जीत के लिए दुआ मांग रहे थे अमेरिकी बने पड़े थे वो रूस के पक्ष में खड़े हो गये | बस इसलिए की  भारत सॉरी मोदी ने रूस के खिलाफ वोट नहीं किया । तो बस अंधभक्त पुतिन काका के भी भक्त बन गए | रात दिन वामपंथियों को गरियाने वाले एक वामपंथी देश के साथ खड़े हो गये | 


दक्षिणपंथी वामपंथी का ये भरत  मिलाप क्या कम था जो हिंदूवादी मुस्लिमवादी दोनों कट्टर भी एक हो गए | मुस्लिमत्व में डूबे मौलानाओ को भी कहाँ पता था कि दुनियां के नक़्शे में यूक्रेन रूस कहाँ हैं लेकिन वो भी रूस के साथ खड़े हो गए क्यों , क्योकि जब अमेरिका और उसके यार फलीस्तीन , इराक , सीरिया , अफगानिस्तान पर हमला किये तो किसी ने उन्हें नहीं रोका  था | फिर अमेरिका का दुश्मन रूस हमारा दोस्त हुआ  | हम भी उसके साथ खड़े होंगे उसके हमले को जायज बताएँगे भले यूक्रेन में रहने वाले लाखो मुस्लिम मारे जाए बेघर हो कर शरणार्थी बन उसी पश्चिमी देश में भागे जिसके खिलाफ वो रूस के साथ खड़े हैं  | 


बताओ इतना मीठा किसको हजम होता  | अगर इस  तरह सभी एकमत को लड़ाई झगड़ा नफरत छोड़ देंगे तो जिंदगी , सोशल मिडिया का स्वाद ना खराब हो जायेगा | मैं कह रहीं हूँ कुछ ना रखा इस प्रेम मोहब्बत में जीवन का असली मजा लड़ाई झगड़े और नफ़रत से जहर उगलने में हैं | वो शुरू करो तो इस सोशल मिडिया के होने का कोई मतलब हैं वरना क्या फायदा ऐसे प्लेटफार्म का जहाँ अपने अंदर का गुस्सा नाराजगी फ्रस्टेशन भी जहर के रूप में उगल ना सके | 

अब जा कर लोगो ने जीवन से मिठास  गायब की और फिर  जहर उगला शुरू कर दंगा फसाद किया । अब  सब सामान्य  लग रहा है ।