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June 07, 2018

छठवांवेद ---------mangopeople

भाग -१
धार्मिक न होने के कारण धार्मिक किताबो को देखने का नजरिया मेरा बाकियों से अलग है मेरे लिए वो नैतिक शिक्षा देने वाले साहित्य है | किसी और के लिए जो महाभारत कृष्ण की लीला है वह मेरे लिए कृष्ण नामक लेखक द्वारा लिखी गई रचना है  | जो समाज में नैतिक मूल्यों को बढ़ाने , लोगो को सही से आचरण अर्थात धर्म अनुसार आचरण करने की प्रेरणा देने के लिए लिखा गया है | महाभारत की रचना सिर्फ धर्म और धर्म के अनुसार कर्म की महत्ता स्थापित करने के लिए की गई है | एक एक पात्र और एक एक घटना सिर्फ धर्म की समाज को महत्व बताने अर्थात धर्म की स्थापना के लिए है | यहाँ  धर्म का अर्थ हिन्दू मुस्लिम वाले से नहीं है बल्कि सही अच्छे कर्मो से है | कौरवों का १०० भाई होना , क्या संभव है ऐसा होना , नहीं , किन्तु चमत्कारिक रूप से १०० पुत्रो का जन्म होता है | संदेश साफ़ है १०० पुत्रो वाले वंश का भी नाश हो जायेगा यदि वो धर्म पर नहीं चल रहे है | पांच पुत्र ही हो लेकिन वो धर्म पर चले तो वंश का नाम रौशन करते है और १०० पुत्रो वाले अधर्मी वंश का नाश |

                                    अधर्म के साथ जो भी खड़ा होगा वो नष्ट होगा चाहे वो कितना बड़ा धर्मनिष्ठ , वचनपालन करने वाला ,  शूरवीर या अच्छा व्यक्तित्व हो | भीष्म वचन से बंधे अपने कर्तव्यों के नाम पर अधर्म के साथ खड़े हुए , द्रोणाचार्य पुत्र मोह में , कर्ण अपने लिए सम्मान पाने के लिए  , मित्रता का फर्ज और  एहसान का कर्ज चुकाने के लिए अधर्म के साथ खड़े रहे और महारथी होने के बाद सब हारे | यहाँ तक स्वयं भगवान की सेना अधर्मियों के साथ होने के कारण हार गई | कर्ण , भीष्म , द्रोणाचार्य आदि पत्रों की रचना ही इस उद्देश्य से किया गया कि संदेश दूर तक जाए और गहरा जाए | ध्यान दीजिये कि  ये पात्र और कई अन्य अच्छे पात्र जो कौरवो के साथ खड़े है वो सभी समाज के अलग अलग तबके से आये हुए , अलग अलग पदों और भिन्न परिस्थियों से आये हुए दिखाये गए है लेकिन सभी का अंत समान है , क्योंकि वो गलत के साथ खड़े हुए |  कलयुग में भी हम बैठ कर इन पत्रों के साथ सहानभूति जताते कहे कि वाह ये पात्र और  व्यक्तित्व कितना अच्छा था लेकिन ओह ! फिर भी मारे गए | ये ओह ये टिस मनुष्य को याद दिलाती रहे की अधर्मी होना और अधर्म के साथ खड़े होने से आप के सभी गुण बेकार हो जाते है वो अधर्म को जीत नहीं दिला सकते | उनका बुरा अंत हमें याद दिलाये की हमें खड़ा किसके साथ होना है | गलत के साथ खड़े होने के लिए आप कोई बहाना/ कारण नहीं दे सकते है |
                                                     इन पत्रों की रचना ही इस उद्देश्य के लिए किये गए कि मनुष्य समझे की केवल अच्छे होने और शूरवीर होने से कृति यश नहीं मिलता उसका प्रयोग हमेशा सही कार्यो में सहयोग के लिए ही होना चाहिए | मनुष्य के सौ अच्छे कर्म और बुद्धिमत्ता एक गलत काम की छूट नहीं देता है | आप को निरंतर केवल धर्म की राह चलना है चाहे परिस्थिति कुछ भी हो और समाज का व्यवहार आप के प्रति कुछ भी हो या समाज में आप का स्थान कुछ भी हो | ये मान कर चलिए महाभारत के सभी पात्र सिर्फ वही कर सकते थे जो उन्होंने किया इससे इतर वो यदि कुछ कर सकते कहानी की दिशा मोड़ने की जरा भी क्षमता उनमे होती तो वो पात्र  कृष्ण की इस रचना/लीला में कहीं नहीं होते |


#छठवांवेद 

October 15, 2016

आओ नास्तिको सोहर गाये नये धर्म का जन्म होने वाला है - - - - - - mangopeople

आओ नास्तिको सब मिल सोहर गाये अपने देश में एक नये धर्म का जन्म होने वाला है ।

                                                         अभी तक देश दुनिया के नास्तिक अनाथ टाइप के थे बिखरे थे अब उन सभी को एक करने का प्रयास शुरू हो गये है ताकि वो भी अपनी शक्ति और नास्तिकता के प्रति अपनी भक्ति दिखा सके । बिन शक्ति सब सून ॥ इसलिए सभी को इकठ्ठा कर उसे शक्ति के रूप में दिखाना जरुरी है , एक दूसरे के तर्क सून अपनी अपनी भक्ति को बढ़ाना है । कुछ दिन बाद नास्तिकता भी अपने आप में धर्म होगा जैसे अब तक लोग कहते आये की मैं हिन्दू मुस्लिम आदि इत्यादि हु उसी प्रकार धर्म के कालम में नास्तिक भरेंगे । अन्य धर्मो की तरह नास्तिकता का भी प्रचार प्रसार किया जायेगा ज्यादा से ज्यादा लोगो को इस महान धर्म से अवगत करा कर उन्हें शांति के पथ पर बढ़ाया जायेगा ।
                                                  फिर उनकी बढती संख्या देख उन्हें संभालने के लिए नियम कायदों की एक किताब बनेगी जिसे बाद में नास्तिको का धर्म ग्रन्थ मान लिया जायेगा । जिसमे बताया जायेगा की एक नास्तिक को कैसे रहना सहना चाहिए , कैसे खाना पीना चाहिए और कैसे पकड़े पहनने चाहिए । स्त्रियों के लिए वहाँ भी अलग से सबका वर्णन होगा , स्त्रियां ज्यादा खुश न हो यहाँ भी उनका दर्जा दोयम ही होगा ।
                                                           इन ग्रंथो को लिखने वाले महान तर्कवादियों को उच्च दर्जा मिलेगा वो ब्राह्मण समान होंगे और उसे पालन कराने वाले क्षत्रिय , उसका अर्थ से प्रचार प्रसार करने वाले वैश्य और हम जैसे नास्तिक जो दुसरो की आस्था पर बे मतलब के सवाल न उठाते हो वो शुद्रो के समान हिकारत की नजरो से देखे जायेंगे और उन्हें धर्म भ्रष्ट करने वालो में रखा जायेगा । नास्तिकता पर बड़े बड़े तर्क देने वाले भाषण बाजो को बाबा माना जायेगा वो हमें बताएँगे की दूसरे धर्मो में क्या क्या खामिया है और अपना धर्म कितना महान। बहुसंख्यक धर्म की बुराई बताने वाला अच्छा और सभी धर्म में सामान रूप से बुराई देखेने वालो को सेक्युलर नास्तिक होने ही गाली दी जायेगी । पुरे साल दुसरो के भगवान के अस्तित्व को नकारा जायेगा और तीज त्यौहारो पर उनके भगवान की बुराइयो को गिनाया जायेगा ।
                                                                फिर इतिहास को खंगाल महान नास्तिको को निकाल उन्हें पूजा जायेगा उनसे मन्नते मांगी जाएगी और उन्हें पूरा होने पर उन्हें उनका चमत्कार घोषित कर उन्हें नास्तिको का भगवान बनाया जायेगा । वामपंथियो और गैर वामपंथी नास्तिको में इस बात पर तर्क होगा की वामपंथियो को ही नास्तिक होने के कारण अपना राजनितिक दल घोषित कर दे या अपना नया राजनीतिक दल बना अपने लोगो को सत्ता तक पहुंचाया जाये । बिन सत्ता शक्ति सून ॥
नास्तिको का अपना धर्म होगा अपनी धार्मिक किताब होंगे अपने भगवान होंगे और उन्हें पूजने के अपने कर्मकांड । एक दिन ये सब बहुत बढ़ जायेगा , धर्म और राजनीति का घालमेल हो जायेगा , दोनों जगह सत्ता का संघर्ष चरम पर होगा , फिर एक दूसरा सुधारक निकलेगा और बतायेगा सब गलत हो रहा है , यहाँ आडम्बर बहुत बढ़ गए है हम दूसरा पंथ बनाएंगे । नास्तिक धर्म के दो पंथ हो जायेंगे आस्तिक नास्तिक और दूसरे उसमे से बाहर आये नास्तिक नास्तिक ।
                                                                 अभी ये जन्म न हो सका क्योकि कल तक जो बहुसंख्यक कुछ अल्पसंख्यको को तलाक विवाह आदि पर देश के संविधान कानून को सर्वोपरी रख सभी के लिए समान कानून और कानून का सम्मान करने की सिख दे रहे थे वो आज खुद कानून हाथ में ले हाजिर थे इस जन्म को रोकने अपना झंडा विथ डंडा लिए ।