कभी सोचा हैं गुजराती इतना नाचते क्यों हैं | क्यों हर बात हर ख़ुशी पर गरबा के लिए तैयार रहते हैं (नहीं सोचते तो कभी कभी सोच लेना चाहिए , सोचने से दिमाग तेज होता हैं ) | तो आज इसके पीछे की वजह हम बताते हैं |
त्रिपुरासुर का वध करके जब शिव आये तो उनके क्रोध को शांत करने के लिए पार्वती ने पहली बार लास्य नृत्य उनके सामने किया | इसके पहले शिव ने तांडव किया था जो पुरुषो का नृत्य था |पार्वती का लास्य स्त्रियों का नृत्य बना (लगभग सभी भारतीय शास्त्रीय नृत्य भी इसी लास्य नृत्य पर ही आधारित हैं ) | यह नृत्य बड़ा कोमल , सुन्दर और स्त्री की तरह ही सौम्य था |यही लास्य नृत्य बाद में पार्वती ने बाड़ासुर की पुत्री उषा को सिखाया | उषा का विवाह बाद में कृष्ण के पौत्र प्रद्युम्न के साथ हुआ | इस प्रकार उषा के साथ नृत्य स्वर्ग से उतर कर पृथ्वी पर आ गया | उषा ने वह लास्य नृत्य सौराष्ट्र गुजरात की सभी गोपियों को सीखा दिया और उन गोपियों ने सभी जगह इस नृत्य को फैला दिया |
ऐसा नंदिकेश्वर अपनी पुस्तक अभिनयदर्पण में कहते हैं |
चुकी धरती पर पहली बार नृत्य का आगमन सौराष्ट्र गुजरात में आया तो नृत्य के पहले विद्यार्थी होने के कारण गुजराती आज भी सदा नाचने को तैयार रहतें हैं , क्या स्त्रियां क्या पुरुष |
अब आप कहना चाहें की अब तो आगे के पांच साल भी पूरा भारत गुजराती गरबे की धुन पर नाचने वाला हैं तो आप की मर्जी , हम क्या कहें |