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August 12, 2018

माँ बापगिरी के मुश्किल फंडे ------ mangopeople


एक मित्र  ने एक मुद्दा उठाया बच्चो को फोन देना चाहिए की नहीं | आखिर हम सब बिना मोबाईल फोन के ही पले  बढे है तो हमारे बच्चे वो कैसे नहीं कर सकते है | मेरा मानना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें एक समय बाद फोन देना ही चाहिए । आज बच्चे अकेले कई जगहों पर जाते है किसी मुसीबत मे फंस गये तो हमे 

कैसे फोन करेगे । खुद हमे उनसे बात करनी हुई उनकी चिंता हुई तो क्या करेगे । ज्यादा हुआ तो स्मार्ट फोन 
नहीं देगे फोन करने लायक साधारण फोन देगें ।

                                                                        हमारे और हमारे बच्चो के जीवन में जमीन आसमान का फर्क हैं | हम केवल स्कूल के लिए  निकलते और उसके बाद सीधा घर | बाकि जगह परिवार के साथ,  हमारा अपना कोई जीवन नहीं था | कहीं गए भी तो अँधेरा घर वापसी का सिग्नल होता | बिटिया का जीवन इससे कही ज्यादा अलग है |  सुबह छ बजे उन्हें बास्केटबॉल के सलेक्शन के लिए लेकर गई घर आ नाश्ता कर तुरंत पेंटिंग क्लास के लिए फिर वहां से आ कर फिर प्रोजेक्ट के सामान के लिए बाजार फिर वापस से पेंटिंग क्लास क्योकि अगले महीने परीक्षा है | कल बैडमिंटन का सलेक्शन था | रोज स्कूल भी छोड़ने जाना होता है गेम्स  के लिए | दोस्तों की बर्थडे पार्टी में रात नौ दस बजते है | शुक्र है अभी टियूशन नहीं लगाया वरना वहां तो रोज ही जाना होगा |  अभी छोटी है तो भाग रहीं हूँ लेकिन कब तक , एक दिन अकेले छोड़ना ही पड़ेगा इन सब भाग दौड़ के लिए फिर उनसे कनेक्ट रहने के लिए फोन देना ही होगा | बिजनेस शुरू किया तो उन्हें अकेले घर में छोड़ कई बार जाना हुआ | कुछ हुआ तो मुझे कैसे फोन करती लैंड लाइन का जमाना गया फोन तो देना ही पड़ा | दर्जन भर उनके स्कूल , क्लास, प्रोजेक्ट , गेम , स्कूल वैन के व्हाट्सप्प समूह है | पहले सब मै देखती थी  अब मैंने वो हैंडिल करना छोड़ दिया है | बिटिया का काम है देखे और अपना काम खुद करे |  ख़राब कोई आधुनिक चीज नहीं होती हम उनका प्रयोग गलत करते है  |
                                                        हमें बच्चो को चीजों का मिस यूज गलत प्रयोग न करने के लिए समझाना चाहिए | वो क्या कर रहे है उन पर नजर रखनी चाहिए | हम खुद फोन का प्रयोग कम करेंगे तो बच्चे भी उसका प्रयोग कम करेंगे | मै किसी को गुडमार्निंग के मैसेज , फिजूल के चुटकुले , वीडियो फॉरवर्ड करना , फालतू की चैटिंग , सेल्फी लेना जैसे काम नहीं करती बिटिया भी ये नहीं करती है |   फोन के जितने भी गलत प्रयोग हो सकते है उनके बारे में जैसे ही सुनती हूँ तो तुरंत बातो बातो में उन्हें उसके नुकशान के बारे में बता देतीं हूँ | अभी महीने भर पहले वो सभी अपना डांस वीडियो यूट्यूब पर देने के बारे में पूछ रहीं  थीं |  तुरंत उसके बारे में उन्हें समझाया उनसे ये भी पूछा की वो ऐसा करना ही क्यों चाहतीं है  | फिर उसके जरुरत और दुष्प्रभावों के बारे में उनसे और उनकी दोस्तों से भी बात किया ,वो सब समझ भी गई और मान भी गई | जबकि ढंग की चीजों के लिए कोई मनाही भी नहीं है | दर्जनो  कलाकारी , क्राफ्ट बनाना , पेंटिंग करना , कीबोर्ड बजाना , हेयर स्टाइल बनाना , जादू के ट्रिक करना , नेल आर्ट , पहेलियाँ बनाना बूझना , बाँसुरी की अनेको धुन सीखना जैसे कितनी ही चीजे बीटिया ने यूट्यूब से सीखे  और हमें भी सिखाया है | मोबाईल के पियानो पर कई गाने मुझे सीखाया  | अभी हाल में बिटिया ने बांसुरी पर हीरो की धुन बजाना भी सिखाया है ,वो स्कूल बैंड में बाँसुरी बजाती है | मै उन्हें कई गेम्स भी खेलने देतीं हूँ जो हिंसक ना हो और जिसमे उनके हर चीज पर ध्यान देने की आदत भी पड़े थोड़ा दिमाग भी तेज चले | कितनी ही बार तो टीचर बोलती है नेट पर ये देख लो | ये सब करने के लिए उन्हें फोन कंप्यूटर आदि ना दे तो जरुरत के समय वो अनाड़ी ना रह जाए |

                                                     इन सब को छोड़ भी दे तो कई अन्य जरुरी चीजें भी है जो दुसरो के लिए जरुरी है | जैसे  हमारे स्टॉप से बच्ची जाती है सिंगल मदर है शाम को वैन पालना घर में छोड़ती है माँ फोन पर उसके स्कूल से निकलने से पहले और पहुंचने के तुरंत बाद  फोन करती है | स्कूल में फोन ले जाने की इजाजत नहीं है इसलिए वह फोन जमा करना पड़ता है और छुट्टी के बाद उन्हें मिलता है | मुंबई में ऐसे हजारो बच्चे है जो घर अकेले पहुंचते है या सभी जगह उन्हें अकेले ही जाना पड़ता है माँ बाप के लिए फोन ही संपर्क बनाये रखने में सहायता देता है | कुछ चीजे वक्त की जरुरत होती है जिन्हे समय के साथ अपना लेने में कोई बुराई मुझे नहीं लगता है | बाकि ये भी सही है कि जरुरी तो कुछ भी नहीं है , देश के हजारो लाखो बच्चे इसके बिना भी जी ही रहे है | इसलिए इस मामले में सभी माँ बाप की अपनी सोच हो सकती है | क्योंकि बच्चे पालने का कोई एक फंडा नहीं होता |

September 23, 2016

स्मार्ट फोन से ज्यादा स्मार्ट




                                                         लोगो को इतना तो स्मार्ट होना ही चाहिए  जितना की उनका फोन है , किन्तु ऐसा होता नहीं है । कल दो बच्चो ने मुम्बई के पास संदिग्ध लोगो को देखने की सूचना क्या दी , स्मार्ट फोन का सही प्रयोग करना सभी ने शुरू कर दिया । बच्चो ने स्कुल का नाम भी लिया था , नतीजा आधी रात तक सभी स्कुल के व्हाट्सएप्प के ग्रुप में यही चर्चा चलती रही की फला फला स्कुल ने बंद डिक्लेयर कर दिया है , मुम्बई हाई अलर्ट पर है अपने स्कुल का क्या ।  लाख समझाने के बाद भी की कुछ नहीं हुआ है फिर भी किसी को शंका हो तो सुबह स्कुल में फोन कर पता कर ले , हर नई माँ स्कुल बंद डिक्लेयर करने वाले नये स्कुलो की लिस्ट ला कर वही सवाल दोहरा देती थी । ये हाल लगभग पूरी मुम्बई का था और नया भी नही था । पिछले साल भी मुम्बई में एक अफवाह  फैली की एक स्कुल के बाहर से कुछ लोग बच्चे उठा कर गये , एक ही फारवर्ड खबर में कई अलग अलग स्कुलो के नाम बारी बारी लिए गए , एक स्कुल का नाम देख मेरी एक मित्र ने टोका भी कि उस स्कुल में उनका बेटा पढता है और वहाँ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है , बल्कि वहा से भी उन्हें ये फारवर्ड न्यूज़ मिली है किन्तु उसमे स्कुल का नाम दूसरा था । हम दोनों की बहस भी हो गई लोगो से की इस तरह की अफवाह फ़ैलाना बंद करे  और कुछ भी भेजने से पहले अपना भेजा प्रयोग किया करे । हालात ये हो गये की पुलिस कमिश्नर को सामने आ कर लोगो को बताना पड़ा की ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है । लोगो के पास स्मार्ट फोन तो आ गये पर उसको प्रयोग करने की स्मार्टनेस अभी तक नहीं आई , दोनों  बार मैंने लोगों को टीवी या किसी न्यूज़ साईट पर जा कर अपनी खबर पक्की करने के लिए कहा किन्तु ज्यादातर ने इसकी जरूरत नहीं समझी , जबकि स्मार्ट फोन का सही प्रयोग यही था । 
                                     
                                                            ऐसे ही एक बार स्कुल प्रोजेक्ट  के समय कई मातापिता  एप्प पर सवाल के जवाब दुसरो मांग रहे थे , दे कोई नहीं  रहा था , घंटो से प्लीज प्लीज किये पड़े थे मेरी नजर जब उस पर पड़ी तो मैंने तुरंत कहा  यही सवाल यदि आप ने अभी तक गूगल पर किया होता तो जवाब कब का मिल गया होता , बाद में लोगो ने वही किया । नई तकनीक लोगो को स्मार्ट बनाना तो छोड़िये मुझे लग रहा है और ज्यादा मुर्ख और अन्धविश्वासी बना रहा है । हर खबर पर आँख मूंद कर भरोशा कर बड़ा ही परोपकारी भाव में उसे आगे भी भेज देने में लोग जरा भी कोताही नहीं करते । इसे ११ लोगो को भेजिये से लेकर , तुरंत इन्हें खून की जरुरत है , गरीब के बच्चे को पैसे चाहिए ईलाज के लिए लिए , या मेरे दोस्त का ये बच्चा खो गया है जैसे एक ही फारवर्ड खबर सालो तक चलती है और घूम घाम कर साल में एक बार आप के पास आ जाती है , उन लोगो की कृपा से जिन्होंने कुछ समय पहले ही स्मार्ट फोन लिया है । ये सब करने में जाति , धर्म , अमीर , गरीब , छोटे , बड़े आदि आदि का कोई फर्क नहीं होता सब बराबर शामिल है । 
                                     लोग करे भी क्या जब आज सुबह ६ बजे फोन की घंटियां भी घनघनाने लगी की स्कुल चालू है की नहीं तो लगा की एक बार टीवी ऑन की कर लेते है , पर ये क्या सुबह ६ बजे तो वहा अलग की स्यापा चल रहा था , " पाकिस्तान युद्ध को तैयार , पाकिस्तान युद्धाभ्यास कर रहा है ,  लड़ाकू विमान उड़ते रहे कल रात पाकिस्तान में, ब्रेकिंग न्यूज़ , हद है किसी का कुछ नहीं हो सकता फोन जाने दीजिये इनका तो पालतू भी इनसे स्मार्ट होगा ।