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July 21, 2022

हर सरकार से सही सवाल करते रहिये

 गडकरी ने बयान दिया कि अगले पांच साल मे पेट्रोल  देश मे बैन हो जायेगा  इस बयान से हम मे से ज्यादातर ये अंदाजा लगा लेते है कि वो इलेक्ट्रिक वाहनो के आने को बात कर रहे है । चुकी वो एक नेता और मंत्री है तो पांच साल जैसे जुमले कहना उनकी प्रोफेशनल मजबूरी है । हमे पता है कि आगे बीस साल भी पेट्रोल बंद होने को संभावना नही है । 

लेकिन किसी बड़े पत्रकार की इस फोटो पर कुछ ऐसी टिप्पणी हो कि हमे पंख लग जायेगे हम उड़ कर जाने लगेगे , तो आश्चर्य होता है । क्या पत्रकार को ये समझ नही आ रहा है कि वो इलेक्ट्रिक वाहन की बात कर रहे है । नतिजा सैकड़ो लोग बस इस पर गड़करी और  सरकार का मजाक उड़ाने के चक्कर मे जरूरी सवाल पुछना , उठाना पीछे छोड़ देते है । 

सवाल  होना चाहिए  था कि जिस तरह एक के बाद  एक इलेक्ट्रिक  वाहनो मे आग लगने की घटना हो रही है क्या वो सुरक्षित है । क्या ऐसी दुर्घटनाएं और इतनी ज्यादा किमत उसे आम आदमी की इतनी पसंद  बना पायेगा कि पेट्रोल बंद हो जाये । 

एक अखबार  की कटिंग देखी जिसमे इंदौर नगर निगम इन वाहनो के चार्जिंग पर टैक्स  लगाने की बात  कर रही थी तो क्या पुरे देश मे ऐसा हुआ तो ये वाहन महंगे नही पड़गे।  इसके अलावा सर्विस सेंटर की संख्या, लंबी दूरी की यात्रा मे चार्जिंग पांइट की व्यवस्था , लोकल मैकेनिक को ट्रेनिंग की व्यवस्था ताकि मरम्मत  के लिए ग्राहक कंपनियो की बंधक ना बने आदि इत्यादि अनेक सवालो को चुटकुलेबाजी और  सिर्फ सरकार की आलोचना के नाम पर भुला  दिया गया । 

कई बार जरूरी सवाल उठने पर उसे दबा भी दिया जाता है फिजूल के सवालो के आगे । जैसे  अशोक स्तंभ के अनावरण और पूजा पर पहले तो सही सवाल उठे कि संसद भवन से जुड़े किसी मामले मे नेतृत्व सभा अध्यक्ष को करना चाहिए ना कि परधानमंत्री को । संसद सरकार की नही सांसदो की होती है इसलिए इसमे विपक्षी दलो को आमंत्रित करना चाहिए था । 

सरकार या बीजेपी जो करती आ रही है उसे देखते पूजा पर आपत्ति और सेक्यूलर देश वाली बात उनके पिच पर खेलने जैसा था । उन्होंने ये सब किया ही इसलिए था कि देश फिर से उन्ही मुद्दो मे उलझे जो उनके वोटबैंक को जागृत रखे । वरना नीव पूजा के बाद  सीधा गृह प्रवेश  की पूजा होती है ,  तल्ला बनने पर  , हर सजावट की पूजा का कोई प्रावधान हमे तो याद नही आ रहा । 


वैसे उनकी तैयारी भी उसी पर थी । टीवी चैनलो पर उनके प्रवक्ता सबसे पहले इसी मुद्दे पर कुद रहे थे ,पूजा जरूरी है  हमारे देश की सभ्यता संस्कृति और ब्ला ब्ला । 

लेकिन दोपहर बाद जिस सवाल पर लोगो ने अपना समय और उर्जा दी वो था शेर का मुंह,  उसके एक्सप्रेशन । सच मे , वाकई ये इस मामले मे सबसे जरूरी सवाल था । संसद की सर्वोच्चता, सरकार  का उस पर हावी होने का प्रयास आदि सब बेकार  के सवाल हो गये ।

मोदी के आठ साल के कार्यकाले मे हजारो मुद्द है जब जरूरी सवाल पीछे छोड़ दिये गये और बेकार, फिजूल के सवाल पर बहस किया गया । बार बार हर बार सरकार उनके पिच और मुद्दो पर लोग उलझे रहे और उनकी मंसा पूरी करते रहे । 

इसलिए अगली बार अपना दिमाग  लगाये गम्भीर ,तकनीकि, जरूरी सवाल उठाये । सही व्यक्ति के सामने उठाये । सरकार किसी भी दल की हो और कहीं की भी हो सबसे सवाल करे तब उसका कोई  मतलब है । वरना चिल्लाते रहिये कि सवाल  किजिए उसका होगा कुछ नही । 

July 20, 2022

सही सवाल किजिए और सही व्यक्ति से किजिए

 जमाने पहले इंदिरा गाँधी बनारस गयी थी । उस दौरे मे उन्होने स्थानीय पत्रकारो से बातचीत की या प्रेस कांप्रेंस जैसा कुछ कर रही थी । इतने मे एक स्थानी नया नवेला पत्रकार उनसे पुछता है कि ये गौदोलिया चौराहे पर कुड़ा घर बना है इसके लिए  आप क्या करने वाली है । इंदिरा गाँधी और  दिल्ली  से उनके साथ आये नेता अगल बगल झांकने लगे । मतलब ये क्या मामला है भाई , जो देश की प्रधानमंत्री से इस पर सवाल  किया जा रहा है । स्थानीय  कुड़ाघर हटाने के लिए किससे सवाल करना चाहिए, ये उस नवेले पत्रकार  को नही पता था । 

ये खबर संभव है कि गुगल  करने पर आप लोगो को ना मिले , पुरानी है और मामूली है । एक दूसरी खबर बताती हूँ जो बस नौ दस साल पुरानी है और जिसकी खबर विडिओ भी आप को मिल जायेगा । 


तब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण थे । उन्होंने जनता से मिलने का एक कार्यक्रम मुंबई  मे रखा । नही नही ये यूपी बिहार या बाकी जगहों की तरह जनता दरबार  जैसा नही था , जहां बेचारी सी निरीह जनता अपने जन सेवको के सामने रोते गिड़गिड़ाते अपनी व्यथा कहती है । और राजा साहब बिना ध्यान  से सुने उसके हाथ से अप्लिकेशन ले कर अपने पीए की तरफ बढ़ा कर अपने कर्तव्यो की इतिश्री कर लेते है । 

बकायदा दक्षिण मुंबई के सबसे पाॅस इलाके के एसी  ऑडिटोरियम मे कार्यक्रम रखा गया । वहा पहुँचने वाला तबका पढ़ा लिखा और पैसे से भरपूर लोग थे । सबको बारी बारी सवालो के लिए माइक दिया जा रहा था और मुख्यमंत्री जवाब दे रहे थे । अब जरा सुनिये की लोग सवाल क्या कर रहे थे , हमारे इलाके मे मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है आप क्या कर रहे है , कुड़ा , सफाई,  ट्रैफिक,  सड़क पर गटर के ऊपर नीचे ढक्कनो से समस्या है आदि इत्यादि । 


बेचारे मुख्यमंत्री यही जवाब देते रहे कि ये नगरपालिका यानी बीएमसी का अधिकार क्षेत्र  है मेरा नही आप वहां शिकायत किजिए । वो कांग्रेस से थे बीएमसी मे सालो साल से  विपक्षी शिवसेना का कब्जा था । इसलिए वो आश्वासन भी नही दे सकते थे । 

लोग कहते है इतिहास  पढ़िये , सरकारो से सवाल किजिए  । हम कहते है गड़े मुर्दो के बारे मे पढ़ने से कुछ नही होगा नागरिक  शास्त्र  पढ़ना और  ठीक से पढ़ना अनिवार्य किजिए  । इससे जनता कम से  कम सही सवाल  करना और सही व्यक्ति से सवाल करना सीखेगी । अगर जनता का सवाल  ही गलत है या जवाब  गलत व्यक्ति से मांगेगा तो उसे कुछ हासिल नही होगा । तो गुगल किजिए और देखिए की किस सरकार  का क्या काम है किसका अधिकार क्षेत्र क्या है । तब समझ पायेगे कि कौन से सवाल  मेयर , नगरपालिका से करने है कौन  से मुख्यमंत्री , राज्य सरकार से और कौन से प्रधानमंत्री , केंद्र  सरकार  से । 

वैसे बता दूं सरकारे बहुत  चालाक होती है । जैसे मुंबई मे जनता से बातचीत  मे  सवालो के लिए  उस वर्ग  को चुनती है जो राज्य  सरकार के अधिकार क्षेत्र मे आने वाले शिक्षा और स्वास्थ्य का प्रयोग  ही नही करती और दक्षिण  मुंबई  मे सड़क, बिजली ,पानी की समस्या वैसे भी नही होती । 

तो अपने खुद का दिमाग  प्रयोग  करना शुरू किजिए, सही सवाल  करना शुरू किजिए, और  सही व्यक्ति से करना शुरू किजिए। आजकल के पत्रकार और सोशल मिडिया वाले सेलीब्रेटी , क्रान्तिकारी  चुटकुलो और विरोध  के नाम पर सही सवालो को खा जा रहे है । इसका उदाहरण कल दूँगी विस्तार से |