दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करे ना कोय
जो सुख में सुमिरन करें तो दुःख काहें को होये
सन्दर्भ सहित व्याख्या
कवि यहाँ ये कहना चाहता हैं कि वजन बढ़ने पर कैलोरी की चिंता सब करते हैं लेकिन जब वजन कम रहता हैं तो कैलोरी की चिंता कोई नहीं करता और जम कर खाता हैं | जो वजन कम रहते ही चटोरी जबान पर नियंत्रण रखा जाए कैलोरी की चिंता की जाए तो मोटापा किसी को आये ही नहीं |
तो जब वजन कम हो तभी खान-पान जबान पर नियंत्रण रखना चाहिए ताकि कल को ना वजन बढ़े और ना उसको कम करने के लिए जिम डायटिंग वाले अत्याचार सहना पड़े और सेहत भी ठीक रहे । बढ़ा वजन शरीर को बिमारियों का घर बनाता है और डाॅक्टर की कमाई बढ़ाता है ।