Showing posts with label कहानी. Show all posts
Showing posts with label कहानी. Show all posts

September 17, 2018

रफ्ता रफ्ता मेरी आँख तुझसे लड़ी है -------- mangopeople




                                                             नया नया  स्कूटी  ख़रीदा लेकिन टशन बिलकुल बुलेट वाला था अपना , वो तो मुंबई में ठंड न पड़ती वरना लेदर जैकेट भी ले लेना था |
खैर जैकेट का अरमान तो न पूरा हुआ लेकिन कही भी जाने आने में अब सोचना न पड़ता जैसा कार के लिए सोचना पड़ता था | जाना कहाँ है ट्रैफिक कितना होगा पार्किंग मिलेगी की नहीं आदि इत्यादि | स्कूटी ने तो जैसे पंख ही दे दिए कभी भी और कहीं भी वाली आज़ादी  |
एक दिन ऑफिस जाने के कुछ ही देर बाद पतिदेव का फोन आया
 " क्या कर रही हो बीस मिनट में दादर आती हो क्या , तुम्हारी शॉपिंग हो जायेगी " |
बहुत दिनों से आज कल टल रहा था फटाफट हामी भरी और दादर अपना स्कूटी ले पहुँच गए | पहुँच कर  एक किनारे पर स्टाइल में साइड स्टैंड लगाया , तिरक्षी स्कूटी पर तिरक्षा सट बॉटम टिका पैर क्रॉस कर खड़े हो गए | पतिदेव को फोन कर बस कहाँ हो आ गई कह फोन बंद ही कर रही थी की आँखों तेज चमक लगी |
गर्दन घुमा बगल में  देखा एक लड़का बाइक के शीशे में अपने बाल बना रहा था | समझ गई उसने बाल बनाने के लिए  शीशा धुमाया होगा तो धुप के कारण मुझ पर घुप की चमक आई होगी |
 हम वापस मोबाईल में आँख गड़ा लिए , लेकिन तुरंत ही फिर आँख चमकी | इस बार दिमाग कौंधा क्या ये वही हो रहा है जो मुझे समझ आ रहा है | इस बार लडके को गौर से देखा , उसकी नजर भी मेरी तरफ थी | चेहरे से साफ़ पता चल रहा था ड्राइविंग लाइसेंस अभी ही मिला होगा और रेजर तो खरीदी भी ना होगी |
उसे गौर से देखने के बाद वो विचार दिमाग से निकाल दिया लगा इस बार शीशा सीधा किया होगा उसकी वजह से चमका होगा |
वापस से नजर सड़क पर डाली की कहाँ रह गए जनाब इंतज़ार करवा रहें हैं |
अब तीसरी बार हमारी आँख चमकी तो लगा नहीं हमारा अंदाजा सही है छोरा पगला गया है इस बार उसे देखा तो उसके चहरे पर हलकी मुस्कान भी थी |
पलट कर अपने आप को गौर से देखने लगे | टाइट जींस फिटिंग का टॉप हाई हिल की सैंडिल और फैशन वाला क्रॉस बैग (ख़ास स्कूटी  के लिए  ख़रीदा था ) और बस पचास इक्यावन का तब का मेरा वजन |
लगा बड़ा फ्रेस्टेटेड लड़का है इसको और कोई ना मिला क्या , नजर तो न खराब हो गई पगले की | चलो कपड़ो बाकी चीजों से धोखा खा गया लड़कियां ऐसे कपडे पहनती है , लेकिन मेरा चेहरा तो दिख ही रहा होगा |  उसके आस पास भी नहीं हूँ |
जैसे ही दिमाग में  बात चेहरे की आई तो लगा कही ऐसा तो नहीं मेरे चेहरे पर कुछ लगा है जल्दी में आई हूँ कुछ क्रीम पाउडर लगा रह गया हो और बेचारा बच्चा कब से मुझे ईशारा कर रहा और मै समझ ही नहीं रही और उसे ही गरिया रही हूँ  |
तुरंत ही अपनी स्कूटी का शीशा अपनी ओर किया और खुद को शीशे में देखते ही इतनी जोर की हंसी छूटी की खुद को रोक ही नहीं पाई और हंसने लगी | उतने में वो पीछे से आ गए |
"अरे अकेले खड़े खड़े सड़क पर हंस रही हो  मुझे भी बताओ मै भी हंस लू  |"
" जानते हो बचपन में एक चुटकुला सूना था याद आ गया | एक बार एक बुर्कानशी जा रहीं थीं , उन्हें देखते एक शोहदे ने उन्हें छेड़ा रफ्ता रफ्ता मेरी आँख तुझसे लड़ी है | बुर्कानशी बुजुर्ग ने फट अपना बुर्का  ऊपर कर गाया आँख जिससे लड़ी तेरी माँ से भी बड़ी है | अभी एक शोहदा यहाँ भी था भाग गया |
" देखा मुझे देखते भाग गया ना "
" तुम्हे देख कर नहीं भागा वो तो मेरे बुर्के मतलब हेलमेट उतारते से भागा और  इतनी तेजी से भागा कि मुझे गाना गाने का भी मौका नहीं दिया  |

 #अधूरीसीकहानी_अधूरेसेकिस्से 







August 25, 2018

पिया तुमसे भला तो ये जमाना है ------ mangopeople



                                                               चार दिन के लिए मायके क्या गई तुम्हारी तो मौज ही आ गई होगी एक दिन भी मेरी याद तो आई नहीं होगी | पिया तुमसे भला तो ये फेसबुक है चार दिन में मेरे बिना मरा जा रहा है | अलर्ट पर अलर्ट दिया जा रहा कि देखो दुनियाँ में कितना कुछ हो गया कितनो ने अपनी प्रोफ़ाइल फोटो बदल डाली और तुम सब मिस कर रही हो, आओ जल्दी आओ हम तुम्हे मिस किये जा रहे है |  सामने रहने पर तो तुम कभी गुडमार्निंग न कहे , न रहने पर कभी  व्हाट्सप्प पर भी हाय हल्लो न कहा | पिया तुमसे अच्छा तो ये गुडमार्निंग और गुडनाइट कहने वाले व्हाट्सप्पीये है | मै कहीं भी रहूं इन्हे देखु ना देखु पर ये हर सुबह हर रात बिना नागा मुझे विश करने के लिए मैसेज जरूर करते है | पिया तुम्हे तो मेरा बाहर जा कर काम करना ना भाया , लेकिन चार दिन बाद मेल खोला तो मेरे लिए नौकरियों की लाइन लगी पड़ी है | आधे तो घर बैठे काम कर, महीने का लाखों कमाने का ऑफर दे रहें है | तुम्हारा कार्ड जरूर मेरे पास है लेकिन उससे खर्च करने की एक लिमिट है | पिया तुमसे भला तो ये बैंक वाले  है जो रोज मुझे अनलिमिटेड खर्च के लिए गोल्डन सिल्वर क्रेडिट कार्ड देने के लिए तड़प रहें हैं |
                                                        सालो से इस मुर्गी के दड़बेनुमा घर में रख मेरे अंदर के इंटीरियर डिजानइर को मारे जा रहे हो | पिया तुमसे भला तो ये बिल्डर और प्रॉपर्टी डीलर है जो रोज दस पंद्रह मैसेज कर लाखों की छूट करोड़ो के फ़्लैट पर दे सिर्फ मेरे लिए बचा कर रखा हुआ है | तुमसे घर की बात करो तो पैसे का रोते हो | पिया तुमसे भला तो वो लोन देने वाले है जो हर दूसरे दिन फोन कर बताते हैं कि उन्होंने देश के सवा सौ करोड़ लोगो में से बस मुझे चुना है लोन देने के लिए, दरवज्जे खड़े है पैसा लिए बस मेरे हा की देर है | चवन्नी भी ना दी तुमने बोनस की मुझे | पिया तुमसे भले तो वो लॉटरी जिताने वाले है जो लाखो पौंड की लॉटरी मेरी तरफ से खरीद भी लेते है और मुझे जीता सीधा पैसा पहुँचाने आ जाते हैं | मर गए ना जाने तुम्हारे कितने रिश्तेदार एक फूटी कौड़ी भी ना दी | पिया तुमसे भले तो वो नाइजेरियन हैं जो अपने चाचा मामा के वसीयत का करोड़ो मुझे दान देने के लिए तैयार है | मेरे यहाँ वहाँ गिरे बालों की शिकायत के सिवा कभी कुछ न किया | पिया तुमसे भला तो वो डॉक्टर बत्रा है जो २०% से ८०% तक की छूट दे मेरे झड़ते बालों का ईलाज करने के लिए हरदम तैयार बैठा है | मेरा बढ़ता वजन देख सिवा मेरे खाने पर नजर लगाने के तुमसे कुछ न हुआ | पिया तुमसे भली तो डॉक्टर अंजलि है जो रोज  मुझे मैसेज भेजती है ताकि मै वजन कम करने के लिए प्रेरित हो सकूँ | घुटनो के दर्द और छोटे अक्षरों के न पढ़ पाने पर मुझे आंटी जी बुलाने के आलावा कोई ख्याल न आया तुम्हे | पिया तुमसे भले तो वो अस्पताल और पैथोलॉजी वाले है जो मुझे फोन कर फूल बॉडी चेकअप के साथ अब तो ब्लड टेस्ट के पैकेज का ऑफर मुझे दे रहे है | सच कहूं तो पिया तुमसे भला तो ये जमाना है | 

#अधूरीसीकहानी_अधूरेसेकिस्से

May 23, 2018

मेरी सोनी मेरी तम्मना झूठ नहीं है मेरा प्यार -------mangopeople



ये कलीना यूनिवर्सिटी कैसे जाते है
तुम्हे वहां क्या काम है
मुंबई आये छः महीने से ऊपर हो गए , अभी तक कही भी अकेले जा नहीं सकती , निकलू भी तो कहा।  इस  तरह कोई मुझे तो जॉब देने से रहा मुझे शहर के बारे में कुछ पता ही नहीं है | इसलिए सोचा कॉलेज ज्वॉइन  कर लेती हूँ , रोज बाहर निकलना हो जायेगा , शहर जान जाउंगी तो खुद से ही जॉब देख लुंगी |
अच्छा तो तुम्हे जॉब करना है
क्यों तुम्हे कोई परेशानी है
नहीं नहीं , कोई परेशानी नहीं है
फिर ऐसे क्यों पूछ रहे हो
नहीं , अभी तक हमारे घर में किसी औरत ने बाहर काम नहीं किया है तो ---
तो क्या
मतलब जॉब क्यों करना चाहती हो
अच्छा अच्छा ये बात है | अब  ये  बताओ  कि मुझे अपने मन की बात बतानी है या तुम्हे कन्विंस करना है
क्या ये दोनों अलग चीजे है
बिलकुल
ओके मान लो , ऐसा  इमैजिन करो सोचो की मै कह रहा हूँ मुझे कन्विंस करो तो
तो सुनो ,  ये जो पत्नियों का प्यार होता है ना अपने पतियों के लिए ये सच्चा नहीं होता इसमें मिलावट होती है अपने स्वार्थ की , क्योकि फाइनेंशली अपने पति पर निर्भर होती है ना | अकेले आदमी से शादी करती ही कहा है , पूरा पॅकेज होता है घर है की नहीं,  जॉब कैसी है , कितना कमाता है , आगे भविष्य कैसा होगा उसके साथ |  सब कुछ ठोक बजाने के बाद पति बनाती है |  बहुत सारी  पत्नियां तो  पति को बस  एटीएम मशीन समझती है | कुछ मजबूरी में प्यार करती है कि उनकी सारी जरूरतों की पूर्ति तो पति करता है अब इसे प्यार न करे तो अपनी जरुरत कैसे पूरी होगी | पति अस्पताल चला जाए या  मर मरा  भी जाये तो उसके जाने का गम कम  गम  और चिंता इस बात की ज्यादा होती है कि अब मेरा क्या होगा पैसे कहा से आयेंगे , घर कैसे चलेगा , बच्चो का क्या होगा | उस   बेचारे  के लिए सच्चा रोने वाला भी कोई नहीं होता |   पत्नी तो छोडो रिश्तेदार भी यही उम्मीद करते है , सब तुमको बस एटीएम मशीन समझते है स्वार्थभरा झूठा प्यार करते है | लेकिन मै ऐसा नहीं करना चाहती।  मै तुम्हारे पैसे से नहीं सिर्फ तुम्हे प्यार करना चाहती हूँ , मै तुमको सच्चा , ट्रू , निस्वार्थ प्यार करना चाहती हूँ , समझे  |
हम्म्म

क्या हुआ कुछ बोलोगे ठीक से कन्वेंस नहीं हुए क्या
कलीना कब चलना है
गुर्ररर
अरे चल तो रहा हु अब क्यों गुस्सा हो
मुझे लेगा था मेरे मन की सुनोगे , पूछोगे मै क्या चाहती हूँ , लेकिन नहीं एक नंबर के  स्वार्थी हो बस अपनी पड़ी है  | बस खुद कन्विंस होना है मै क्या चाहती हूँ किसी को पड़ी ही नहीं है |
नहीं मै बस वही पूछने वाला था
 मिस्टर निश्चल आज की तारीख लिख लो आज से हर बात केवल तुम्हे कन्वेंस करने वाले ही तरीके से बताई जायेगी  और देखना ये तुमको कितना भारी पड़ने वाला | गुर्ररर

#अधूरीसीकहानी_अधूरेसेकिस्से

May 12, 2018

पंजाबी लडके को मद्रासी लड़की से प्यार हुआ और शादी हो गई ------mangopeople



शादी के कुछ ही महीने हुए थे  एक शाम निश्चल मै सब्जी लेने के लिए निकले , उसके पहले उन्हें बनारस की ढ़ेर सारी बाते बता रही थी, बताते बताते पुरे बनारसी मूड में आ गई थी | बाहर निकल दरवाजे में ताला लगाया और हाथ आगे बढ़ा कर बोला ताली दो , उन्होंने झट मेरे हाथ पर अपने हाथ से ताली दे दी | मै  हँसी और फिर हाथ आगे बढ़ा कर बोला ओके वैरी फनी अब ताली दो उन्होंने फिर हाथ आगे बढ़ाया और मेरी हाथ पर अपने हाथ से ताली दे दी | चलो अब मजाक मत करो चाभियाँ दो देर हो रही है | अरे तुमने चाभियाँ कब मांगी |  मांगी तो दो बार और तुमको मजाक सूझ रहा है | तुमने तो ताली मांगी थी मैंने दी |  फिर याद आया कि ना मै बनारस में हूँ और ना ये बनारसी |  अरे यार हमारे बनारस में चाभियों को ही ताली कहते है,  ताला और ताली कितना सिंम्पल है | मैंने कभी सूना ही नहीं तो मुझे क्या समझ आयेगा | उलटा मुझे लग रहा था ये बार बार ताली क्यों मांग रही हो मुझसे | सुनो एक बात बताओ ये कई महीने से मै तुमसे बात कर रही  हूँ तुमको कुछ समझ में आती है कि  मै क्या बोल रही हु , या बस सुन लेते हो | थोड़ा रुके और सोच कर बोले कभी कभी कुछ कुछ बात समझ नहीं आती | तुम्हे मेरी बात समझ नहीं आती और तुम मुझे आज बता रहे हो इतने महीनो बाद | हद है आज मै नहीं पूछती तो मै सारी  जिंदगी बड़बड़ करती और तुमको समझ कुछ नहीं आता |  ये कह हँसते हुए एक गाना गा दिया पंजाबी लडके को मद्रासी लड़की से प्यार हुआ और शादी हो गई | अब ये क्या है | लो अब तुमने ये गाना भी नहीं सुना है | मतलब ऐसे कपल के बीच लैंग्वेज प्रॉबलम हो गई दोनों के एक दूजे की बात समझ ही ना आती |
             दुनियां में लोग ऐसे लोग चाहते है जो उन्हें समझे उनकी बातो को सुने समझे ताकि वो अपना दिल खोल कर उसके सामने रख दे | लेकिन वो भूल जाते है कि  जैसे जैसे हम अपना दिल खोलते है सुनने वाला की अपनी सोच , पूर्वाग्रहों की मिलावट उसमे होती जाती है और हमारी एक छवि उसके मन में बन जाती है | लोग कहने वालो को अपने हिसाब से जज करने लगते है और वो हमारे लिए पूर्वाग्रह पाल कर बैठ जाते है | समझने वाला अपनी समझ से समझने लगता है वो नहीं समझता जो हम कहना चाहते है | मेरे हिसाब से तो अपना दिल खोल कर रखने के लिए सबसे अच्छा वो इंसान है जो असल में आप की बात समझता ही नहीं और  जब समझता है तो बस उतना ही जितना आप उसे समझाते है | जीवन में पहली बार कोई ऐसा मिल गया , जिसे सब कुछ कहा जा सकता है दिल में जितना भी जहर,प्यार, गुस्सा, नाराजगी , ईर्ष्या , जलन सब बक दो जिसे बात ही ठीक से समझ न आ रही हो वो बस सुनेगा लेकिन मुझे जज नहीं करेगा |  इंसानी भावो के आने जाने से होने वाली स्वाभाविक परिवर्तनों से वो हमारे लिए कोई पूर्वाग्रह नहीं बनाएगा , हमारे लिए जजमेंटल नहीं होगा  | जब किसी मित्र की सफलता पर खुश होते कहती कि निश्चल जलन हो रही है उससे,  तो कभी ये नहीं सोचा की जलनखोर मित्र हूँ , समझा तो बस इतना की ख़ुशी के आँसू की तरह एक ख़ुशी वाली जलन भी होती है | जब उसी मित्र के किसी उसके किसी कठिन समय में उसे फोन पर हिम्मत बंधाते मजाक करती और फोन रखते कहती कि  मुझे उसके लिए डर लग रहा है उसकी चिंता हो रही है तो ये न समझा की ढकोसला कर रही हूँ | इंसान समझे या न समझे बाते अवचेतन मन में जाती रहती है , एक सेफ स्टोरेज में और एक दिन जरूर बाहर आयेगी एक विश्वास  भरोसे  रूप  जब उनकी जरुरत होगी |


#अधूरीसीकहानी_अधूरेसेकिस्से




         

       


                 





                                               













May 10, 2018

सुंदरता हॉटनेस ये सब वाकई किसी स्त्री के लिए एक एटीट्यूट है और किसी पुरुष के दिमाग का फितूर ------mangopeople

 

   
सुंदरता लड़की के लिए प्राकृतिक है ये स्त्रीय अंग है लेकिन ये कोई योग्यता नहीं है जिसे बेमतलब का निखारने में समय व्यर्थ किया जाये  |  जिनमे कुछ काबलियत नहीं होती वही आगे बढ़ कर बेमतलब लीपा पोती कर अपनी सुंदरता दिखाते है | बचपन में हमारे मातृसत्तात्मक घर का बिन कहा ये सन्देश बड़ा साफ़ था काबिल बनो सहूर सीखो जीवन में वही काम आएगा  | ये सहूर सलाई कढ़ाई , खाना बनाने से  लेकर पढाई लिखाई कर कुछ बनने तक में से कुछ भी हो सकता था |   लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं था कि अच्छे दिखने के लिए कुछ करो ही मत , खूब स्टाइल में कपडे पहनो , ( हम डिजाइनर कपडे पहनते थे उस जमाने में , क्योकि कपडे घर में सिले जाते थे बुआ , दीदी या मम्मी द्वारा ) सबसे अलग दिखो जो करो अपने लिए करो लेकिन इन सब को योग्यता मत समझो और समय बर्बाद न करो | फिर  सुंदरता का कोई पैमाना उस जगह कैसे तय हो,  जहा हर तरह के लोग रहा रहे हो | कोई सांवला लेकिन नयन नक्श में अच्छा तो कोई गोरा लेकिन लेकिन शकल कोई ख़ास नहीं कोई लंबा तो कोई छोटा कोई अति दुबला तो कोई मोटा | इसलिए खामखा का सुन्दर दिखने के प्रयास में हम लोग कभी पड़े ही नहीं |  हमारे लिए कभी कोई कॉम्लीमेन्ट होता तो पहला "अच्छी" दिख रही हो और सबसे बड़ा , "बड़ी अच्छी" दिख रही हो | मतलब जीवन सुन्दर , प्यारी , ब्यूटीफुल गॉर्जियस जैसे तमाम शब्दों के बिना ही गुजर गया |  ये शब्द कभी तारीफ बने ही नहीं हम लोगो के लिए , उलटा ये एहसास दिलाते की नाकाबिल हो ,उसे मुझ में और कुछ न दिखा |
                                                                  बड़े होने पर एक फिल्म से ज्ञान मिला , फिल्म में सांवली सी आधुनिक हीरोइन बोलती है सुंदरता कुछ नहीं होती , ऐटिट्यूड  सब कुछ होता है | आप खुद को कैसे दुसरो सामने रखते है आप का ऐटिट्यूड कैसा है ये बड़ी बात है , वरना भारत में मेरे सांवले रंग के बाद भी लोग मेरी सुंदरता की इतनी तारीफ नहीं करते | फिर मुझ टेढ़े  ऐटिट्यूड वालो को पता चला  ऐटिट्यूड भी कुछ होता है , और हम सुन्दर क्यों नहीं है , ऐसे टेढ़े  ऐटिट्यूड वाले से लोग डरते है | साथ में ये भी समझ आ गया कि सुन्दर दिखने की जगह लोगो को डराना ज्यादा मजेदार है | उस खूबसूरती के पीछे क्या भागना जिसका कोई भरोसा नहीं वो कब अपना रूप बदल दे | एक सिकुड़ी सी अभिनेत्री आती है और बड़े  ऐटिट्यूड से बोलती है जीरो फिगर ही सुंदरता है और लोग उसे ही सुन्दर मान पैमाना तय कर देते है | अचानक से कर्वी बॉडी वाली भारतीय सौंदर्य मोटापा दिखने लगता है और पचके गाल तेजहीन चेहरा , गर्दन की हड्डिया और जीरो कमर सुन्दर हो जाता है | अभिनेत्री बच्चे को जन्म देती है और उसी अदा से अपनी कर्वी कमर दिखा सुन्दर बताती है और रातो रात खूबसूरती का पैमाना बदल जाता है और भारतीय कर्वी स्थूल शरीर खूबसूरत हो जाता है | अब लोगो की नजर स्त्री के कर्व पर जाने लगती है और जीरो कमर वालो को हसींन लोगो के लिस्ट से छांट दिया जाता है | ऐसी सुंदरता जो नजर के साथ बदल जाये उसे पाना एक मुश्किल क्या लगभग असंभव काम था लेकिन ये पक्की बात है कि ऐटीट्यूड ही आप को हर रूप में सुन्दर बना सकता है लोगो की नजर में | तो असल में सुंदरता किसी स्त्री के लिए बस एक  ऐटिट्यूड है और पुरुषीय दिमाग का मात्र फितूर |  सोशल मिडिया में ऐसी ढेरो महिलाओ को इस नियम का पालन करते देख सच में बड़ा मजा आता है और अच्छा लगता है कि स्त्री ने अब अपने रूप और सौंदर्य को लेकर अपना पैमाना बनाना शुरू कर दिया है |

           हवा में उड़ता जाये लाल दुपट्टा

    विवाह के बाद  हमने हॉटनेस की भी नहीं परिभाषा गढ़ी | मेरे शरीर का तापमान हमेशा सामान्य लोगो से ज्यादा गर्म होता है , नतीजा निश्चल हर दूसरे दिन , तुम्हे बुखार है , नहीं मै ठीक हूँ , नहीं मुझे लग रहा है तुम्हे बुखार है  |  मै ना कहती वो मानते नहीं न जाने कितनी ही बार थर्मामीटर से चेक कर लिया गया सब सामान्य है लेकिन उन्हें विश्वास न हो पूरी तरह | सामान्य थर्मामीटर पर भरोसा न हुआ तो एक दिन डिजिटल थर्मामीटर उठा लाये | उसे देख हैरान होती बोली कोई और होता तो कहता वॉव मेरी बीबी कितनी हॉट है और कुछ ढंग के गिफ्ट लाता , एक तुम हो जो बार बार बुखार बोल कर उसकी हॉटनेस चेक करने के लिए थर्मामीटर लाए हो हद है , इस अरेंज मैरिज का कुछ नहीं हो सकता |  बस जो हॉटनेस किसी आधुनिक लड़की के लिए एक बड़ा कॉम्प्लिमेंट होता वो हमारे घर कॉमेडी बन गई तब से |
                                                        एक फिल्म में सांवली सी आधुनिक हीरोइन बोलती है सुंदरता कुछ नहीं होती , एटीट्यूट सब कुछ होता है | तो ये गांठ बांधी फ़िल्मी ज्ञान एक दिन काम आया | बर्फ में घूमने जाना था , सारी जिंदगी देखी यश चोपड़ा की फिल्मो का असर था कि एक रेड शिफॉन की साड़ी खरीद लाई |  उसे पहन बर्फ में फोटो खिचानी है एक दम कुछ तूफानी करना है सोच लिया | एक्साइटमेंट में घर आते ही फटा फट उस साड़ी को रेड प्लाजो के ऊपर ही  बांध लिया गया और रेड टॉप को पीछे कल्चर लगा ब्लॉउज बना लिया गया | खिड़की के सामने खड़े हो पल्लू पर्दे पर टांग लहराते पल्लू का सीन बनाया और पुरे एटीट्यूट के साथ पोज़ बना  यश चोपड़ा की सारी हीरोइनों की आत्मा को अपने अंदर आत्मसात  किया गया और निश्चल को फोटो खींचने के लिए बोला |  वो बिना मुझे पर ध्यान दिए , कंधे और कान के बीच अपना फोन फंसाये अपने फोन में बतियाते ,चार क्लिक कर दिए | मेरे हर पोज़ पर हम्म्म का जवाब देते |   जब फोटो देख कर कहा अच्छी दिख रही है ना तो बिना फोटो देखे जवाब फिर से था हम्म | बड़ा गुस्सा आया देखो तो मै इतनी एक्साइटेड हूँ और यहाँ से कोई रेस्पॉन्स ही नहीं , फिर उसी  फ़िल्मी ज्ञान का ध्यान आया | वॉव कितनी सेक्सी फोटो है ना और पुरुषीय चेतना जगाने वाले शब्द ने जादू दिखाया | कौन सी , एकदम ध्यान मेरे फोन पर |  वही जो तुमने खींची है , वाह कमाल फोटो ली है चलो फोटो खींचने आ ही गया | तारीफ पर कंधे उचकाते ,मै तो अच्छी फोटो लेता ही हूँ , नजर ध्यान से फोटो पर | मै ,झीनी सी साड़ी में फिगर अच्छा आता है ना , हूँ सही कह रही हो | फिर  खुद की फोटो की ऐसी नख से केश तक की खोज खोज कर तारीफ़ शुरू हुई की अगले कुछ देर तक जारी रही | कुछ ही देर में शब्दों और एटीट्यूट ने अपना काम कर दिया | एक साधारण सी फोटो जो बिना मन के  खींची गई , थकी हालत में आधे अधूरे तरीके से पहने साडी में , बाल तक बिखरे क्योकि कल्चर टॉप में लगाया है , वो फोट ख़ास बन किसी के मुंह से वॉव निकलवाने लायक बन गई और कुछ ही देर पहले मै उन्ही कपड़ो में उतनी ही साधारण और  ध्यान देने लायक नहीं थी जैसे सब्जी खरीदते समय बगल खड़ी महिला , बस हद ही थी |
                                                 
                   अगले दिन तो गजब ही हो गया जब वो फोटो उनके मोबाईल में दिख गई , मुझे दिखा मुस्कुराने लगे |  मन ही मन जोर की हँसी आई पर उसे रोका और बहार एक मुस्कान दे दी | पता न था कि वाकई में एटीट्यूट में जादू होता है | फिर भी चलो अच्छा है अब अपना बुढ़ापा अच्छा गुजरेगा , कभी जब तुम्हारे सर पर अंगुलिया फेरने के लिए बाल न होंगे और मेरे माथे का पसीना कही माथे के सिलवटों में फँसा रहा जायेगा तब ये आइडिया काम आयेगा |


#अधूरीसीकहानी_अधूरेसेकिस्से




           

         

                   





                                                 

December 16, 2017

ये कैसी बतकहीया जो ख़त्म ही न होती -------- mangopeople


किसी शादी में दूल्हे दुल्हन हालत एक कठपुतली जैसे हो जाती है | जिनका अपना कोई दिमाग नहीं चलता रस्मो के नाम पर लोग जो कहते है दोनों करते जाते है | कितनी भी शादिया देख लो कुछ रस्मे ऐसी होती है जो खुद की शादी होने पर ही पता चलती है | न आप उनका कोई लॉजिक पूछते है और न कोई बताने वाला होता है बस होती है और करो और बेचारे दूल्हा दुल्हन पहले से ही इसके लिए तैयार होते है | इन रस्मो के बीच कुछ ऐसा मजेदार हो जाए जो जीवनभर याद रहे तो क्या कहना |  सुनती हूँ की शादी पहले दूल्हे दुल्हन को बात नहीं करनी चाहिए लेकिन हम दोनों तो एक दिन पहले तक फोन पर लगे थे | नतीजा शादी के दिन जयमाल के लिए जाने से पहले खूब तैयारी करनी पड़ी मुझे | एक तो मुझे ये याद रखना था कि मै दुल्हन हूँ और सब कुछ आराम से धीरे धीरे करना है | सगाई वाले दिन रस्मो के बाद जब सभी के पैर छूने की बारी आई तो ससुराल वालो के तो बड़े आराम से धीरे धीरे पैर छुए लेकिन जब अपने घर वालो की बारी है तो पुरे हाल में हिरणी की तरह कुलाचें मार मार सबको ढूंढ ढूंढ पैर छूना शुरू किया की सब हंस हंस के लोटपोट , खुद को बाद में वीडियो  में देख मुझे ही शर्म आई | तो इस बार याद रखना था कि कुछ भी ऐसा न हो पाये | दूसरी बात थी निश्चल से तीसरी  बार सीधा मिलने वाली थी , मुझे डर था कही हम एक दूसरे को देख हंसने लगे या बतियाना ना शुरू  कर दे स्टेज पर , ये बात शायद लोगो को पसंद न आये तो तय किया मुझे उनकी तरफ देखना ही नहीं है |
                                                         जयमाल  के लिए जाते समय एक बार भी उन्हें देखा नहीं फिर जयमाल डालते समय नजर मिली और कुछ रिएक्शन देने से पहले ही फोटोग्राफर की तरफ देखने लगी और दूसरी नजर जब वापस  उन पर डाली तो बिलकुल शॉक उनके हाथ में आरती की थाली थी | मन ही मन चीख पड़ी हे भगवान ये क्या रहा है |  इस बार दोनों की नजरे अच्छे से मिली लेकिन वो आश्चर्य में फैली हुई थी दूसरे ही सेकेण्ड नजर उनके  बगल में खड़ी बहन पर पड़ी वो हंस रही थी | तब तक हमें समझ आ चूका था कि इसके पीछे कौन है वो मुड़े और हँसते हुए पूछा इसका क्या करना है मेरी बहन ने उनके हाथ पकड़े और घुमाना शुरू करते हुए कहा जीजाजी आरती उतारिये दीदी की | हायो रब्बा ऐसी हंसी फूटी हम सब की कि क्या बताऊ | लेकिन मुझे याद था कि मै दुल्हन हु सो एक हाथ से अपना चेहरा छुपाया और ठहाके लगाना शुरू |  बोलो कहा मैंने सोचा था कि ३६ इंच की मुस्कान भी नहीं देना है और मै ठहाके लगा रही थी | दो बार हाथ घुमाने के बाद बहन ने थाली ले ली और हम दोनों की आरती उतारने की रस्म पूरी की | उसके हटते ही निश्चल शुरू तुम मेरी तरफ क्यों नहीं देख रही थी | पहले ये बताओ तुमने आरती की थाल कैसे पकड़ ली मैंने पूछा | मै पुरे टाइम तुम्हे देख रहा था कि तुम कब मुझे देखो और तुम हो सब जगह देख रही हो मुझे छोड़ कर | इसका आरती की थाली पकड़ने से क्या रिश्ता है कौन से दूल्हे को आरती उतारते देखा है तुमने , आज तुमने तो रोल रिवर्स कर दिया हम दोनों का |   मै तो तुम में बीजी था और पता नहीं कब तुम्हारी बहन ने थाली पकड़ा दी मुझे पता ही नहीं चला | लोग आते गये जाते रहे और हम आधे से ज्यादा टाइम एक दूसरे से बतियाने में व्यस्त थे |
                                   तब का दिन है और आज का दिन ये रोल रिवर्स आज भी चला आ रहा है और हमारी बतकहीया भी , बस फर्क है तो इतना की अब एक ही  बोलता है और एक सुनता है |


           



     


                 


           
             




                   
 

December 10, 2017

अधूरी सी कहानी अधूरे से किस्से -----mangopeople




   शायद हमारी शादी का तीसरा दिन था , अपने ससुराल से दूसरे दिन ही हम दोनों वापस आ गये थे , मेरे घर की रस्मे निभाने के लिए | निश्चल को ऊपर के कमरे में रुकने के लिए भेज दिया गया था | अगले दिन सुबह सुबह मुझे नास्ता ले कर भेजा गया उनके पास | जैसे ही उन्हें देखा मुंह से निकला " वॉव अच्छे दिख रहे हो " उन्होंने भी मुझे देख कर कहा तुम भी अच्छी दिख रही हो | मैंने कहा अरे नहीं मै कहने के लिए नहीं कह रही सच में तुम अच्छे दिख रहे हो , वो मुस्करा दिए |   रेड टी शर्ट और जींस पहन रखी थी लग रहा था जैसे किसी ने उनकी एज अचानक से पांच दस साल कम कर दी हो | मन ही मन सोचने लगी केवल कपड़ो से इतना फर्क आ गया अभी तक उन्हें फॉर्मल कपड़ो में ही देख रही थी शायद इसलिए |  या कही ऐसा तो नहीं मैंने अभी तक उन्हें ठीक देखा ही नहीं है | हमारी अरेंज मैरिज , वो मुंबई , मै  बनारस , पांच महिने बतियाये तो खूब फोन पर  लेकिन देखा नहीं , फिर दो दिन से सिर्फ शादी की रस्मे , शायद ध्यान से एक दूसरे को देखा ही नहीं है अभी तक हम दोनों ने  | मै ये सोच  रही थी और वो कुछ ढूंढ रहे थे , पूछा क्या ढूंढ रहे हो तो बोले चश्मे का एक शीशा नहीं मिल रहा | तब लगा अच्छा ये बात है,  चश्मा नहीं लगाया इसलिए इतना फर्क लग रहा है | शीशा मिला नहीं लगा शायद कामवाली से गिर के टूट गया होगा सुबह सफाई के लिए आई थी और उसने फेंक दिया | खैर हम दोनों निचे आये  सभी को पता चल गई कि दामाद जी बिन चश्मे के है |
                                                  उसके बाद पूरा खानदान पूजा के लिए हम दोनों को लेकर गंगा जी गया , वहा ढेर सारी सीढिया और हमारे घरवालों को टांग खिचाई की आदत , लो सब शुरू हो गये | कभी छोटे चचेरे भाई आते "आराम से चलो जल्दी नहीं है"  और जवाब में मै कहती फुट लो यहाँ से वरना अभी बताती हूँ , तो कभी दादा आता , "ध्यान  हाथ पकड़ लो एक एक सीढ़ी उतरो" और मै गुस्से में बोली जाओ जाओ अपनी बीबी को देखो दुल्हन सी इतनी सजी है कही वो ना गिर पड़े | निश्चल कन्फ्यूज एक तरफ खुश है की उनकी अतिरिक्त पूछ हो रही है मेरा इतना भी इतना ख्याल रखा जा रहा है और मै सबको उलटे जवाब दे रही हूँ | मुझे एक बार टोक भी दिया अरे ऐसे क्यों बोल रही हो और मै सोच रही हूँ निश्चल ये देखभाल नहीं हो रही तुमने चश्मा नहीं लगाया है सब टांग खिच रहे है कि तुम्हे ठीक दिख रहा है की नहीं | हमारे बनारस वापस आने पर जब उन्होंने मेरे पुरे खानदान को कार के पास आ कर हमारे स्वागत में देखा तभी से गदगद थे | मुझे कहने लगे तुम्हे कितना मानते है सब , मै चुप रह गई ये जानते भी की ये मेरे घरवालों का सामान्य व्यवहार है घर के बेटी के लिए मै कोई ख़ास नहीं हूँ , पर इससे निश्चल के नजर में अपनी इज्जत बढ़ रही थी , तो हमने भी सोचा ऐसा ही मानो | बनारस घाट वाली देखभाल से वो और खुशफहमी में |
                                                     खैर मेरे घर की रश्मे ख़त्म हो गई और ससुराल पहुंची |  वहा हमारी शादी की फोटो आ गई थी सब फोटो की ही बात कर रहे थे |  हमने भी थोड़ी बाते सुनी और सीधे अपने कमरे में आ कर निश्चल से पूछा तुम चश्मा कब से लगा रहे हो , बोले बस तुम्हे मिलने अगस्त में आया था ना तभी से | कितना नंबर है दूर का है या करीब का वो पूछने लगे क्यों पूछ रही हो , मैंने कहा घर में सब हमारी शादी की फोटो देख कर, गुस्सा कर रहे है तुम पर, कि तुमने चश्मा क्यों पहना हुआ है पूरी एलबम ख़राब कर दी है | जवाब में बोले नहीं ज्यादा नंबर नहीं है , पहले कभी देखा नहीं सबने इसलिए | असल में मै जब तुमसे मिलने आने वाला था उसी समय मेरे दोस्त ने नया शॉप ओपन किया था तो मैंने भी अपनी आँखे चेक करवा ली तो एक आंख में थोड़ा नंबर आया तो मैंने नई शॉप से कुछ  तो लेना है सोच चश्मा ले लिया , सब बोले अच्छा लग रहा है तो लगा कर यहाँ आ गया | मतलब तुम्हे नंबर नहीं है तो फिर तुमने शादी में चश्मा क्यों लगाया था तब तो निकालना था ना | अरे तुम्हारे लिए याद है हमारी इंगेजमेंट के बाद  मैंने तुम्हे फोन पर पूछा था कि तुम्हे चश्मा कैसा लग रहा है तो तुमने कहा कि तुम्हे अच्छा लग रहा है , तुम्हे अच्छा लगा रहा था तो क्यों निकालता | मै उनकी बात सुन पूरी तरह शॉक थी , मैंने कहा तुम मजाक कर रहे हो निश्चल तुम्हे नंबर है , बोले नहीं है तुम चेक कर लो मैंने तुम्हारे कहने पर लगा रखा था | मैंने हैरानी में कहा  तुम्हे पता है मैंने तो बस इसलिए कहा था कि मुझे लगा तुम चश्मा लगाते हो मुझे वो ख़राब तो नहीं लग रहा तुम बस ये जानना चाह रहे हो क्योकि लड़कियों को चश्मे वाले लडके पसंद नहीं होते | बस इसलिए मैंने कह दिया कि मुझे चश्मे से कोई परेशानी नहीं है पसंद है | पर इसका मतलब ये थोड़े था की जो नहीं पहनता वो भी पहन ले | कसम से बड़ा कन्फ्यूजन हो रहा है समझ नहीं आ रहा है की हंसू की गुस्सा करू | तुम्हारी इस बात पर प्यार से आई लव यू बोलू या मेरी इकलौती शादी की एलबम ख़राब करने के लिए तुम्हे आई हेट यू कहु | बोले इकलौती शादी से तुम्हारा क्या मतलब है हमने कहा जो तुमने किया है उस हिसाब से तो मुझे पहली शादी बोलनी चाहिए थी |   वो दिन और आज का दिन   स्टील कन्फ्यूज बंदे के साथ लव किया जाये या हेट किया जाये |


#अधूरीसीकहानी_अधूरेसेकिस्से













October 27, 2017

ये उन दिनों की बात है --------- mangopeople


पहली क़िस्त यहाँ पढ़े |

दूसरा और आखरी भाग
           
                                    ऊपर भाभी के कानो में भी बाउजी की आवाज जा चुकी थी , वो सब काम छोड़ निचे की और भागी |  अब तो मेरा ससुराल और पति दोनों छूटा , सब उसी पर ननद को बिगाड़ने का इलजाम लगायेंगे और सजा के तौर पर उसे उसके घर पंहुचा दिया जायेगा | निचे आई तब तक बाउजी बैठक के दरवाजे पहुँच चुके थे सामने हक्के बक्के खड़े दामाद को देख चौक  पड़े | अरे दामाद जी आप अचानक यहां कैसे और दामाद के जैसे ठंड ने होठ सील दिये हो उसे सूझी नहीं रहा क्या जवाब दे | तभी पीछे से हड़बड़ाई  सी भाभी ने जवाब दिया अरे शारदा चाची से मिलने आये थे इनकी रिश्ते से बुआ लगती है ना पर चाची थी नहीं तो यहाँ गये हम लोगो मिलने | अब जा कर दामाद जी को होश आया और ससुर के पैर पड़ते पूछा भाभी ने बताया आप कचहरी गये है हमें तो लगा किसी से मुलाक़ात ही न हो पायेगी ,क्या हुआ वापस कैसे आ गये | अरे चौक तक ही गया था तो गांव के एक लोग मिल गये बोले वकीलों की हड़ताल हो गई है , जाने से कोई फायदा नहीं है कुछ होने वाला नहीं है | शाम को वकील साहब से पूछ लूंगा फोन कर अगली तारीख कब की पड़ी है | लेकिन भाभी की चिंता दूसरी थी उन्हें कमरे में सीमा कही नहीं दिख रही थी जैसे ही बाउजी अपना झोला अलमारी में रखने के लिए मुड़े उन्होंने इशारो में नन्दोई से पूछा सीमा कहा है | नन्दोई के इशारो में ये बताने पर की सीमा चौकी के निचे है उनके होश उड़ गये | पहले तो उसने सुबह चौकी पर नई चद्दर बिछाते समय चद्दर को आगे लटका के चौकी के निचे के हिस्से को छुपाने के लिए खुद को धन्यवाद दिया फिर दूसरा ख्याल आया हाय राम एक तो उसने कोई शॉल या स्वेटर न पहना है एक हलकी सी साड़ी  ही पहन रखी है उस पर से चौकी के नीचे ठंडी  जमीन पर पड़ी है |   अब कुछ पल के लिए ही बाउजी को किसी तरह भी कमरे से निकाला जाए  तभी कुछ हो पायेगा  |  बाउजी चलिये आप के पैर धुला देती हूँ बाहर से आये है उसने एक प्रयास किया  | अरे उसकी जरुरत नहीं है चौक तक ही तो गया था पैर साफ़ है और वो दामाद के साथ चौकी पर बैठ बातो में लग गए | जबकि उस बेचारे से न बोला जाए न कुछ समझ आये | तभी भाभी वापस कमरे में आई उसने अपने शॉल  के निचे एक और शॉल  छुपा रखा था | धीरे से बाउजी के पीछे जा कर पूछा क्या लाउ बाउजी और इसी बीच उसने शॉल निचे गिरा कर पैरो से उसे चौकी के अंदर धकेल दिया | ये ओढ़ लिया तो कम से कम ननद की जान तो बचेगी नहीं तो आज चाहे शर्म से चाहे ठंड से उसका मरना तो तय है उसने मन की मन सोचा | बाउजी से चाय लाने की बात सुन तुरंत उसके दिमाग में एक उपाय कौंधा | फटा फट वहा रखी चाय उसने गर्म कर उन्हें दिया और ठंड बहुत है कर पुरे आधे ग्लास भर चाय उन्हें पकड़ा दिया |      रसोई में आ कर उसने तय किया की आज बाउजी और ननद की जान में से वो ननद की जान बचायेगी | बाउजी शुगर के मरीज है , अभी आधा ग्लास चाय पीया है अभी मिठाई दे कर एक ग्लास और पानी पिलाऊंगी और फिर दोपहर के लिये बनाई खीर दूंगी उसके बाद एक और ग्लास पानी | इतने के बाद तो जरूर उन्हें हल्का होने गुशलखाने जाना होगा | उतना समय काफी है ननद को वहा से निकालने के लिए | मीठा उन्हें मिलता नहीं और आज कोई रोकने  वाला है नहीं जरूर मेरे जाल में फसेंगे | चाल कामयाब रही लेकिन इन सब में पुरे एक घंटा निकल गया |
                                                                                     
                                                       ईधर बाउजी कमरे से बाहर निकले भाभी और दामाद जी तुरंत चौकी के निचे झुक चद्दर हटाया  | अंदर सीमा अपने पैरो को घुटनो से मोड़ दोनों हाथो से जकड सीने से लगा सिकुड़ कर लेटी पड़ी  ठंड से कांप रही थी और दांतो से आवाज ने निकले इसलिए मुंह में आँचल ठूस रखा था | भाभी ने धीरे से पूछा शॉल  था उसे क्यों नहीं ओढ़ लिया | उसके मुंह से सिर्फ घु घु आवाज आई तब भाभी ने हाथ आगे बढ़ा उसके मुंह से आँचल निकाला | ज़रा भी हिलती डुलती तो पिताजी को पता चल जाता जीते जी मर जाती मै उससे तो अच्छा था कि यही डंठी से धरती मैया के गोद में मेरी अर्थी सज जाती | अच्छा ठीक है अब जल्दी बाहर निकल बाउजी के आने से पहले यहां से चल | अरे भाभी मेरे तो हाथ पैर जाम हो अकड़ गए है खुल ही नहीं रहे | अरे देख क्या रहे है नन्दोई जी इसे बाहर खिचिये भाभी ने अपनी चीख को रोकते कहा | अभी तक हक्का बक्का हो सारा तमाशा देख रहा पति फटाफट थोड़ा अंदर घुसा और गठरी बनी अपनी पत्नी को बाहर खींचा | भाभी ने वहा पड़ी शॉल उसे ओढ़ा कहा जल्दी उठाइये और बगल में रसोई में ले चलिए | उसने भी ठंड से कांपती  पत्नी को गोद में उठाया और रसोई की तरफ चल पड़ा जो बैठक के बगल में ही थी |
                                                       
                                            कोई और मौका या समय होता तो ये पल कितने रोमांटिक और खुशनुमा होता जब पति पत्नी को गोद में लिया जा रहा हो | कुछ देर पहले  जिसे पत्नी के एक  स्पर्श के  लिए  गले लगाने के लिए  पति उतावला हुआ जा रहा था अभी उसी पत्नी को बाहो  में भरे होने के  बाद भी कोई उत्साह और प्रेम नहीं था बल्कि डर और खौफ भरा पड़ा था दोनों के मन में |    भाभी ने उसे  चूल्हे के पास पीढ़े पर बैठाने के लिए कहा चूल्हा गर्म ही था भाभी जल्दी जल्दी अपने हाथ गर्म करके उसके हाथ पॉंव मलने लगी और सीमा अभी भी सर से पैर तक खड़खड़ा रही थी | भाभी को हाथ पैर मलता देख पति को भी होश आया की उसे भी बूत की तरह खड़ा नहीं रहना चाहिए उसे भी अपनी पत्नी के लिए कुछ  करना चाहिए लेकिन जैसे ही उसने पत्नी का दूसरा हाथ पकड़ उसे मलने की कोशिश की |  भाभी बोली नन्दोई जी जल्दी से बैठक में जाइये बाउजी आ गये और आप को देखे लिया तो सारी पोल खुल जायेगी | बेचारा पति जिस पत्नी से मिलने के लिए इतने जतन किये उसी को इस हाल में छोड़ कर जाना पड़ रहा था | लेकिन बड़े बुजुर्गो का डर उस ज़माने में जो करवाये वो कम था | पति महोदय अगले एक घंटे तक ससुर के साथ बातो में उलझे रहे | घंटे भर बाद अचानक से बाउजी ने बड़ी बहु को आवाज लगाई वो अभी भी सीमा को गर्म तेल मल उसे ठंड से बचाने में लगी थी |
                                                         
                                               बैठक में आते ही बाउजी बोले भाई दामाद जी इतनी दूर से आये है सीमा को बुलाओ मिल ले | अब भाभी को काटो तो खून नहीं सीमा की ये हालत ही नहीं थी की उसे यहां लाया जाये | लेकिन बाउजी को जवाब क्या दे वो हा कर चली गई | सीमा को दो स्वेटर पहनाए ऊपर से शॉल भी दिया ताकि उसका ठंड से खड़कना तो बंद हो लेकिन वो रुके तब ना | भाभी किसी तरह उसे पकड़ कर बैठक में ले गई | अब पिता जी के सामने उसने नजर उठा कर भी पति को न देखा | ऐसा है बहु दामाद जी को अम्मा के कमरे में ले  कर चली जाओ दोनों आराम से बाते कर लेंगे | ये सुन तो जैसे तीनो शून्य हो गए ये क्या  हो गया आज बाउजी इतने उदार कैसे हो गए , घर के संस्कार ही बदल दिए | अब ये बदलते जमाने की हवा थी या जमाने बाद इतना मीठा खाने की ख़ुशी लेकिन बाउजी ये बात सुन भाभी की पकड़ सीमा से ढीली हो गई और वो फिर से सर से पांव तक हिलना शुर हो गई | अरे इसे क्या हुआ बहु | कुछ नहीं ज़रा ठंड लग गई है तबियत ठीक नहीं है | अरे इसे तुरंत इसके कमरे में ली जाओ बोरसी जलाओ और इसे रजाई में सुलाओ | ऐसा करो अजवाइन तेल में गर्म करके इसके हथेलियों में मलो ठीक हो जायेगी | जी बाउजी कह भाभी सीमा को लेजाने लगी दामाद जी भी उदारता का लाभ उठाते हुए उनके साथ जाने को उठे ही थे कि पिताजी ने कहा आओ बेटा हमारे पास बैठो सीमा को आराम करने दो |
                               
                                             दमाद जी शाम तक ससुराल  में रुके थे बाउजी से घंटो बात की  भैया लोगो से भी मिले और शाम तक अम्मा भी आ गई उससे भी मिले | लेकिन जिससे मिलने आये थे जिसके लिए इतने किरिया करम किये उसे जी भर देख भी न सके | भाभी सारे दिन दामाद जी के खूब आव भगत में लगी रही साथ में बीमार पड़ी सीमा की भी देखभाल करती रही , रात तक थक कर चकनाचूर हो चुकी थी | और सीमा ऊपर कमरे में रजाइयों में पड़ी रही , उसे तो कुछ होश ही  न था | और तीनो यही सोच रहे थे जो काम बस बाउजी की मिठाईया खिला कर आसानी से हो सकता था उसके लिए सब ने क्या क्या किया और सफल भी न हुए | समाप्त

#ये_उन_दिनों_की_बात_है 

ये उन दिनों की बात है ---------- mangopeople




                                                              ये उन दिनों की बात है जब परिवार के सामने पति पत्नी एक दूसरे से बात क्या एक दूसरे को सीधा देखा भी नहीं करते थे | बेटिया पति के साये से भी दूर भागती थी जब पिताजी या बड़े भाई घर पर हो | शर्म नैतिकता का इतना हाई डोज बेटियों को दिया जाता था कि लडकिया शर्म के बजाये ठंड से मरना ज्यादा अच्छा समझती थी | करीब ८६-८७  की बात होगी बनारस के पास एक गांव की | सीमा की शादी नवम्बर में हुई और दिसम्बर के पहले सप्ताह वो  दो महीने के लिए मायके चली आई |   पति का फोन तो आता लेकिन उन दिनों घरो में एक ही लैंडलाइन होता और जो  बैठके में रखा होता जहा कभी कभी पूरा मोहल्ला तो कभी पूरा खानदान बैठा बाते सुन रहा होता | सीमा पति की बातो का जवाब हां, नहीं, ठीक हूँ, अच्छा, से ज्यादा दे ही नहीं पाती | नया नया विवाह और १८-२२ की कमशीन सी उमर दोनों की,  उस पर भयंकर सा जाड़ा और इतनी लंबी जुदाई | एक दिन उसके पति ने कह दिया की करो कोई जतन मुझे तो मिलने आना है और ध्यान रहे घर में पिताजी और बड़के भैया लोग न हो , क्योकि उनके सामने तो अकेले में मिलना तो दूर लोग उसकी पत्नी को ठीक से देखने भी न देंगे , कम से कम घडी भर तुमसे बात तो कर सकू  | सीमा फोन पर सुनती रही फिर समस्या अपनी बड़ी भाभी को बताया | हाथ जोड़ उपाय करने को कहा क्योकि पति का भरोसा नहीं ,  ना माने और चला आए , फिर कुछ ऐसा ना हो जाए कि उसे पिताजी और भैया के सामने  शर्म की दिवार गिरानी पड़े |

                                                 भाभी ने सोचा भैया लोग समस्या तो है  नहीं रोज ही काम पर जाते है , लेकिन अम्मा और बाउजी तो घर में ही रहते है उन्हें कैसे हटाया जाये | फिर एक रोज खबर आई की कोर्ट की तारीख पड़ गई है और पिताजी को बनारस जाना है | तय हुआ बस अम्मा को टरकाने का बहाना खोजा जाए और अगले ही दिन भाभी अम्मा के सामने नानी और मामा का जिक्र ले बैठ गई फिर क्या था घंटे भर में अम्मा के आँखों से आशु झरने लगे और अपनी माँ  से मिलने को तड़प उठी | भाभी ने भी गर्म तवे पर फट रोटी डाली और अम्मा से कहा कि वो जा कर मिल आये उनसे | लेकिन अम्मा ने वही रोना रोया जिसके बारे में भाभी को पहले से ही पता था | मै गई तो बाउ जी  खयाल कौन रखेगा , दिन भर उनका कुछ न कुछ तो लगा ही रहता है | ऐसा करो अम्मा कोर्ट की तारीख जिस दिन की पड़ी है उसदिन चली जाओ सबेरे की बस पकड़ कर , बाउ जी भी रात के पहले न आयेंगे , जो एक बार बनारस गये आप भी रात तक लौट आना | भाभी की रोटी अच्छे से पकी और अम्मा ने हा कर दिया |
                                                                सीमा ने इशारो में  पति को फोन पर बोला  पिता जी बनारस जा रहे है कोर्ट की तारीख पड़ी है | बंदा समझदार निकला झट बात समझ गया | पति ने इस बीच नई नवेली पत्नी के लिए उपहार लिया और इधर सीमा और भाभी मेहमान की आवभगत की तैयारी में लग गये वो भी बिना किसी के पता चले | वो दिन भी आ गया जब दोनों की मुलाक़ात होनी थी | इधर पिताजी घर से निकले और शायद चौक तक भी न पहुंचे होंगे दामाद जी घर के अंदर | भाभी और सीमा दोनों घबरा गये  ,भाभी ने झट नन्दोई को बैठक में बिठाया और पूछ बैठी कही पिताजी ने देख तो न लिया अभी अभी ही घर से निकले है | भोला सा दामाद तपाक से बोला वो तो सुबह ७ बजे ही आ गया था कब से घर के बाहर वाली चाय की दूकान पर बैठा कितने कुल्लड़ चाय पी गया पिताजी के जाने के इंतज़ार में | ठंड का फायदा मिला और मफलर से पूरा चेहरा ढक रखा था किसी ने पहचाना भी नहीं | भाभी को उनका उतावलापन देख हँसी आ गई इतनी ठंड में सुबह ५ बजे चले होंगे अपने घर से , जबकि पता था वो घर में १० पहले न आ पाएंगे | समझदार भाभी जाते हुए नन्दोई को छेड़ते बोली अभी सीमा को भेजती हूँ लेकिन उसके उसके आते किवाड़ न बंद कर लेना मै बगल की रसोई में ही खाने की तैयारी कर रही हूँ | इधर पति की धड़कने और  उतावलापन बढ़ने लगा इधर सीमा जनवरी की कड़क ठंडी में भी बस साडी पहन पति के सामने आई |   कुछ फैशन का जोश था कुछ पति से मिलने की चाहत में रगो में  दौड़ते गर्म खून की  गर्मी उसे ठंड न लग रही थी ,  तन पर न स्वेटर न शॉल |

                                                दोनों की आँखे मिली और दोनों मुस्कराये पति ने उसकी तरफ बढ़ते हुए  पूछा कैसी हो | सीमा ने तुरंत भाभी के बाहर खड़े होने का इशारा कर उसे रुक जाने को कहा , तभी भाभी दोनों के लिए अंदर चाय रख ये बोलती चली गई कि वो अब न आयेगी दुबारा उन्हें डिस्टर्ब करने जो चाहिए रसोई से ले लेना वो कुछ देर के लिए ऊपर अपने कमरे में जा रही है | अब अंधा क्या चाहे दो आँखे , दोनों के कुछ पलो का एकांत ही चाहिए था जो मिल रहा था | पति की इच्छा तो तुरंत ही आगे बढ़ पत्नी को गले लगा लेने की थी , लेकिन उसने तुरंत ही खुद को रोका | मै पति हूँ ऐसा आवारा प्रेमियों की तरह का व्यवहार मुझे शोभा नहीं देती मुझे संयम रखना चाहिए  | पत्नी से ऐसे खुलेआम प्यार जताया तो सर पर चढ़ जायेगी कभी मेरी इज्जत न करेगी मेरी बात न मानेगी अपनी मनमानी करेगी और वो आखिर में क्या सिखाया था दोस्तों ने उसने बहुत जोर दिमाग पर लगाया लेकिन वो याद न आया | लेकिन जैसे ही उसने सीमा को प्यार से अपनी तरफ बढ़ते देखा तो उसे लगा दोस्तों की सीख को आज के लिए आराम देना  बेहतर है अच्छा हो समय और मौके के हिसाब से व्यवहार किया जाये वरना भोर से ठंडी हवाओ के थपेड़े झेलना बेकार हो जायेगा | पत्नी खुश हो जाए सोच उसने झोले  से गिफ्ट रैप किया उपहार उसकी और बढ़ाया गिफ्ट लेते देते पति के हाथो का स्पर्श सीमा के कानो में प्रेम की घंटिया बजा गया  और उसी घंटियों के बीच उसे अपना नाम सुनाई दिया सीमा लेकिन  ये क्या आवाज पति की नहीं पिता जी की थी | सीमा ने मन ही मन सोचा पिताजी का डर इतना मन में समाया है कि कानो में उनकी आवाजे आ रही है |  लेकिन जो दूसरी आवाज कान पड़ी वो थी बड़ी बहु वो भी पिता जी की ही आवाज थी | अचानक उन दो प्रेम के पंछियो की तन्द्रा टूटी | अरे ये तो पिता जी की आवाज है लेकिन वो वापस कैसे आ गए  और अब तो वो आँगन में आ चुके है अब सीधा बैठक में आयेंगे |
                                                                       सीमा को लगा जैसे उस पर घड़ो पानी पड़ गया हो , अब क्या होगा पिताजी अभी अंदर आयेंगे पति के साथ उसे अकेला कमरे में देख उन पर क्या गुजरेगी | हाय मै कैसे उनका सामना करुँगी , उन्ही क्या बताउंगी की दामाद जी अचानक कैसे आ गए और हम दोनों अकेले यहाँ क्या कर रहे है | दामाद जी कैसे उसी दिन घर आये जब घर में कोई नहीं था | हाय मै आज के बाद कैसे उनका सामना करुँगी | फिर ये बात अम्मा के साथ भैया लोगो को भी पता चलेगी, ओह ! मै तो इस घर में एक पल भी किसी से नजरे नहीं मिला पाऊँगी , अब मेरा क्या होगा  | धीरे धीरे बात पुरे गांव में फ़ैल जायेगी और मै हर जगह बदनाम हो जाउंगी | उसने मन ही मन बोला हे धरती मैया तुम यही और अभी फट जाओ और आज मै उसमे समा जाऊ |  उधर दामाद का दिमाग भी काम नहीं कर रहा नये नये ससुराल में इज्जत उतरेगी बात घर तक भी जायेगी |  किसी को बता के नहीं आया हूँ , बाबूजी खाल उधेड़ेंगे और भाभियाँ भैया जोरुका गुलाम कह चिढ़ाएँगे , अम्मा तो बोल बोल बुरा हाल करेंगे  | तभी सीमा ने न आव देखा न ताव झट चौकी के निचे घुस छुप गई और वही खड़ा उसका पति उसके इस काम को आँखे फाड़ फाड़  देखता रह गया |

क्रमश
                                                                  
दूसरी क़िस्त यहाँ पढ़े

#ये_उन_दिनों_की_बात_है