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August 08, 2011

क्या डरपोक भारतीय मध्यम वर्ग अब अन्ना के साथ आयेगा ? - - - - -mangopeople

                         
                                                         
                                                      16 अगस्त से एक बार फिर अन्ना हजारे लोकपाल बिल को लेकर अनशन पर जाने वाले है किन्तु आज परिस्थितिया वैसी नहीं है जैसी की उनके पहले अनशन के समय थी | तब उन्हें और उनकी टीम को बिल्कुल भी ये अंदाजा नहीं था की उनके आन्दोलन को जनता और मीडिया में इस स्तर तक समर्थन मिलेगा | उन्हें मिला समर्थन उनकी उम्मीदों से परे था और सरकार के भी, इसलिए सरकार भी जल्द ही दबाव में आ गई और फौरी तौर पर इस आन्दोलन से निपटने के लिए बिल बनाने  की कमेटी में सिविल सोसायटी के लोगो को शामिल कर लिया किन्तु उसका अंत कैसा होगा ये सरकार को मालूम था, और अंत में हुआ भी वही सरकार ने लोकपाल बिल को जोकपाल बना कर संसद में रख दिया अब अन्ना हजारे और उनकी टीम इसे उनके और जनता के साथ धोखा बता कर एक बार फिर से इस पर आन्दोलन शुरू करना  चाह रही है और 16 अगस्त से अन्ना हजारे ने फिर से अनशन पर जाने की घोषणा कर दी है |
                      किन्तु अब सवाल ये है कि क्या इस बार भी उन्हें जनता खास कर पढ़े लिखे सुविधाभोगी माध्यम वर्ग से वही समर्थन मिलेगा जो उन्हें पिछली बार मिला था | सवाल उठना लाजमी है क्योकि इस बार जनता से उम्मीदे ज्यादा है और आज की परिस्थिति पहले से काफी अलग है | पिछली बार जनता ने जोश में और बिना किसी परिणाम को सोचे सड़को पर उतर कर एस एम एस कैपेनो सोसल साईटों आदि से इस आन्दोलन को खूब समर्थन दिया था किन्तु इस बार इस माध्यम वर्ग को पता है की सरकार किसी आन्दोलन को कुचलने के लिए क्या कर सकती है और किस हद तक जा सकती है | बाबा रामदेव के आन्दोलन का सरकार ने क्या हाल किया और आज भी बाबा रामदेव और उनके सहयोगियों का क्या हाल कर रही है  उसी से पता चलता है की सरकारे कैसे काम करती है | अब इन सब को देखते हुए लगता है की क्या इस बार पढ़ा लिखा तबका और युवा इस अन्दोलन से उसी तरह जुड़ेगा जैसे इसके पहले जुड़ा था |
                          ९० के दशक में इस माध्यम वर्ग ने अपने सपूतो को इसी तरह के एक आन्दोलन में जलते हुए और मरते हुए देखा था तभी से इनकी रुहे भी किसी आन्दोलन के नाम पर कांप जाती है | सड़क पर किये जा रहे आन्दोलन से कम से कम आम आदमी तो दूर ही रहता था | एक दशक बाद जा कर उसे होश आया की ये भ्रष्टाचार तो हमारे सर के ऊपर तक चला गया है यदि अब इसके खिलाफ नहीं बोले तो ये हम को ही ले डूबेगा | अन्ना की टीम ने लोगो को अपनी बात कहने अपना आक्रोश सामने लाने का मंच दे दिया और लोगो ने उसका उपयोग भी किया किन्तु सभी ये सब करते रहे क्योकि उन्हें सरकार की तरफ से कोई भय नहीं था क्योकि तब तक सरकार ने इस तरह के आन्दोलन को कुचलने का कोई काम नहीं किया था | सिविल सोसायटी को लोकपाल बिल बनाने की कमिटी में शामिल करने को ही सभी ने अपनी जीत मान ली और आन्दोलन को यही सम्पन्न भी मान लिया | किन्तु जब यही लोगों ने टीवी पर बाबा रामदेव के आन्दोलन का हाल देखा सरकारी ज्यादती देखी तो उनके होश उड़ गये , तब इन्हें समझ आया की सरकार किसी आन्दोलन को कुचलने के लिए किसी हद तक जा सकती है और क्या क्या कर सकती है उसके लिए आम आदमी और उसके मुद्दे उसके सवाल कोई मायने नहीं रखेते है | जब सरकारे अपने पर आती है तो इसी तरह सत्ता की ताकत का दुरुपयोग करती है | अब अन्ना हजारे फिर से आन्दोलन करने जा रहे है और इस बार सरकार ने पहले ही दर्शा दिया है की उसे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है सरकार से बाहर सरकारी टट्टू लोगों को डराने के लिए ये भी बता रहे है की हर आन्दोलन का वही हाल होगा जो रामदेव के आन्दोलन का हुआ | अब माध्यम वर्ग को पता है की इस बार पहले वाली बात नहीं है इस बार यदि बाहर निकले तो पुलिसिया ज्यादती का शिकार भी होना होगा और डंडे खाने की नौबत भी आ सकती है |
                                 ऐसा नहीं है की सरकार ने बस युही रामदेव के आन्दोलन को इस तरह कुचल दिया वो चाहती तो बड़े आराम से अन्ना हजारे की तरह बाबा को भी योग शिविर के आड़ में अनशन करने की इजाजत नहीं देती लोगों को वहा आने से ही रोकती और इस आन्दोलन को होने ही नहीं देती | किन्तु उसने ये सब होने दिया क्योकि उसकी मंसा तो एक तीर से दो निशाने लगाने की थी उसने सभी टीवी कैमरो  मीडिया के सामने उन लोगों पर लाठी चार्ज किया लोगों का मारा कम उन्हें घसीटा ज्यादा उसका उद्देश्य लोगों को वहा से भगाने से पहले अच्छे से उनकी इज्जत कैमरों के सामने उतारने की थी | सरकार को अच्छे से पता था की ये सब मीडिया रिकार्ड कर रही है और उसे देश के लाखो लोग टीवी पर देखेंगे और वो चाहती भी यही थी की लोग देखे ओर समझ जाये की सरकार क्या क्या कर सकती है | वो आन्दोलन तो सफलता पूर्वक कुचल दिया गया पर वहा जो किया गया उसका दूसरा निशाना था उन चीजो के देख रहा माध्यम वर्ग जो हमेसा ही अपनी इज्जत को लेकर बड़ा सतर्क रहता है जो आन्दोलन तो कर सकता है पर लाठी नहीं खा सकता सड़क पर घसीटा जाना या पुलिस द्वारा गलिया देना उसे बर्दास्त नहीं होगा वो कभी नहीं बर्दास्त करेगा की उसके घर के युवा या महिलाए या वो खुद इस तरह के आन्दोलन में जाये जहा पर ये सब होने की संभावना है |
                                               सरकार का तीर निशाने पर लगा पहले से ही डरपोक रहा माध्यम वर्ग और भी डर गया और पुरा माध्यम वर्ग सहमा डरा हुआ इधर उधर मुँह छुपा रहा है बहाने तलाश रहा है  अन्ना की टीम से ही सवाल पूछ रहा है की आप इससे ज्यादा और क्या चाहते है, सरकार ने तो काफी कुछ दे दिया, आप लोकपाल के नाम पर एक और सत्ता खड़ी कर रहे है ,आप इतना ईमानदार व्यक्ति लोकपाल के लिए कहा से लायेंगे , आप संसद का अपमान कर रहे है, ये लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है, आप सरकार गिराने का प्रयास कर रहे है, आप देश को अस्थिर कर रहे है ,आप खुद को संसद से सर्वोच्च क्यों मान रहे है, देश में संसद ही सर्वोच्च है उसकी बात हम सभी को मान लेनी चाहिए आदि आदि आदि  |   सिविल सोसायटी वालो पर भी सवाल खड़े किया जाना लगा और रामदेव के आन्दोलन  को तो सरकार ने पहले ही सांप्रदायिक घोषित कर उसकी हवा निकाल दी थी |  सरकार ने बड़ी चालाकी से अपने एक कांटे से दूसरे कांटे को निकालने का काम किया | 
                                                                                    बेचारा माध्यम वर्ग भी क्या करे वो शुरू से ही डरपोक रहा है उसे खुद के कामने खाने और इज्जत की दुहाई दे कर चुप रहने और दूसरो को भी चुप रहने की सलाह देने की आदत है और सरकार ने भी उसकी इसी आदत का खूब फायदा उठाया और उसकी दुखती रग पर हाथ रख दिया | अब वो  खुद को दिलासा भी दे रहा है की उसने तो आन्दोलन को सफल बना दिया था और सरकार से अपनी बात भी मनवा ली थी अब वहा गए लोग अपनी बात नहीं मनवा सके तो हम क्या कर सकते है | इस बात को अन्ना हजारे की टीम भी अच्छे से समझ रही है इसलिए पहले कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई की उसके आन्दोलन में सरकार वो सब ना कर सके जो रामदेव के आन्दोलन में किया ताकि लोगो में कुछ विश्वास पैदा हो लोगो का डर कम हो साथ ही अब जगह जगह जा कर लोगो को फिर से जोड़ने का प्रयास भी किया जा रहा है जो पहले इस तरह नहीं किया गया था | पर दूसरी तरफ सरकार और उनकी टीम भी लोगो को डराने के लिए उन्हें हतोस्साहित करने के लिए रोज नये नये बयान जारी कर रही है कभी ये कहती है की उनके आन्दोलन का भी वही हाल होगा जो रामदेव का हुआ, कभी कहती है की करते रहे आन्दोलन हमें कोई चिंता नहीं है, तो कभी कानून व्यवस्था प्रशासन का नाम लेकर जंतर मंतर पर अनशन की इजाजत ही नहीं दे रही है | किन्तु अन्ना की टीम भी लगी है सरकार से दो दो हाथ करने के लिए |
                                 कोई भी क्रांति बड़ा बदलाव या सरकार से उसकी मर्जी के खिलाफ उससे कोई काम करवाना आसान नहीं होता है और ये काम दो या चार दिन में संभव नहीं है इसके लिए पूरे समाज को उठ कर आगे आना होता है और एक लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है  और कई बार सरकारी ज्यादती का शिकार भी होना पड़ता है | जब कोई समाज इन सब के लिए तैयार होगा तभी वो किसी बदलाव को क्रांति को ला सकता है , नहीं तो छोटे छोटे आन्दोलन विरोधो को सरकारे कभी तव्वजो नहीं देती है और नहीं किसी खास व्यक्ति समूह की सुनती है ,अन्ना तो गाँधीवादी भर है आज के समय में स्वयम गाँधी जी भी आ कर अकेले सरकार से कुछ कहते तो वो उन्हें भी बरगलाने के सिवा कुछ नहीं करती | अब तो १६ अगस्त के बाद ही पता चलेगा की परम्परागत भारतीय माध्यम वर्ग किसी बदलाव को लाने को तैयार है की नहीं , उसमे क्रांति लाने की ताकत है की नहीं , उसने अपने डरपोक प्रकृति को छोड़ा है की नहीं |
                                 

June 17, 2011

अभी हम सभी ने एक हिंदूवादी बाबा को निपटाया है अब भ्रष्ट अन्ना हजारे की बारी है - - - - - - - mangopeople



                                                               लीजिये अन्ना हजारे ने फिर अनशन की धमकी दे कर अपनी राजनीतिक नौटंकी शुरू कर दी | अभी हम सभी ने एक भ्रष्ट, राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले गेरुवा वस्त्रधारी हिंदूवादी बाबा को निपटाया है अब भ्रष्ट अन्ना हजारे की बारी है | आप सभी को आश्चर्य क्यों हो रहा है ,क्या आप को नहीं पता की अन्ना हजारे भी भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गये थे,  बाकायदा उसकी जाँच हुई थी और वो दोषी भी पाये गए थे, वो अलग बात है अपनी ऊँची पहुँच और नाम के चलते वो बच गए | कुछ साल पहले उन्होंने महाराष्ट्र के दो भ्रष्ट कांग्रेसी मंत्रियो के खिलाफ अनशन किया था वहा की सरकार को मजबूर हो कर मंत्रियो को हटाना पड़ा हटाये गए माननीय मंत्री जी ने अन्ना पर अपने ट्रस्ट के पैसे का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया बाकायदा माननीय पूर्व मंत्री जी के आरोप पर एक जाँच बैठाई गई और पता चला अन्ना के जन्मदिवस पर ट्रस्ट के दो लाख रुपये खर्च किये गए | ये भ्रष्टाचार नहीं है तो क्या है क्या लोगो ने ट्रस्ट को पैसे अन्ना के जन्मदिवस के लिए दिया था नहीं, उन्होंने जनता के सेवा के लिए मिले पैसे को अपने निजी कार्यो के लिए खर्चा किया था ( अब उन्होंने किया या उनके लोगो ने किया बात तो एक ही है ना, उन्होंने मना तो नहीं किया तो वो भी इस भ्रष्टाचार में उतने ही दोषी है जितने की कोई अन्य  ) | भ्रष्टाचार तो भ्रष्टाचार होता है चाहे वो हजारो करोड़ का हो या कुछ हजार का ही एक भ्रष्टाचारी को कोई हक़ नहीं बनता की वो किसी दुसरे भ्रष्टाचारी पर किसी तरह का आरोप लगाये उस पर उंगली उठाये या उसे भ्रष्ट तक कहे | जो खुद ये काम कर चूका है हम सभी महान ईमानदार आम जनता उस व्यक्ति का कैसे साथ दे सकते है | इसलिए जरुरी है की हम जैसे उच्च कोटि के ईमानदार आम जनता का नेता बिल्कुल उच्च कोटि का ईमानदार हो | क्योकि गाँधी जी ने कहा था की एक सच्ची और अच्छी चीज को पाने के लिए प्रयोग किये जा रहे साधन भी पवित्र होने चाहिए | क्या आप सभी को गाँधी जी की ये बात याद नहीं है, क्यों नहीं याद है, जब गाँधी जी याद है तो उनके विचार क्यों नहीं याद है शायद इसलिए याद नहीं है की हम सभी भेड़ चाल वाले भारतीय व्यक्ति पूजा में विश्वास करते है हम व्यक्ति का समर्थन करते है व्यक्ति का विरोध करते है, उसने क्या कहा उसके क्या विचार है उससे हमें मतलब नहीं है हम तो उसे सुनने की भी जरुरत नहीं समझते है, तो याद क्या खाक रखेंगे तभी तो गाँधी जी याद है किन्तु उन्होंने कहा क्या था गाँधी जी के विचार क्या थे गांधीवाद क्या था  ये हम सब भूल चुके है | हमें बाबा याद है हमें अन्ना याद है किन्तु वो दोनों कह क्या रहे है वो हममे से किसी को भी याद नहीं है व्यक्ति के आगे मुद्दे गुम हो गये | कोई बाबा का विरोध कर रहा है तो कोई उसका समर्थन कर रहा है हर जगह बस बाबा ही छाये हुए है पर उनके उठाये मुद्दे गुम हो गये है | 
                                   अब अँधा क्या चाहे दो आँखे और सरकार क्या चाहे भ्रष्टाचार के मुद्दे हवा हो जाये और लीजिये जी वो हवा हो गये | अब सरकार से कोई नहीं पूछ रहा है कि आप ने तो बाबा की सारी मांगे मान ली थी तो जरा बतायेंगे की उस पर कमेटिया बनाने के अलावा क्या जमीनी काम चल रहा है क्या बतायेंगे की कमेटिया कब तक अपना काम कर लेंगी, कब तक सरकार को अपनी रिपोर्ट दे देंगी, क्या उनका कोई समय सीमा तय किया है | चलिए वो जाने दीजिये विदेश से जो धन आएगा वो तो आएगा पर देश के अन्दर ही जो कला धन छुपा है उसका क्या हुआ उसको बाहर लाने के लिया आप क्या कर रहे है | सालो पहले आप लोगो ने खूब स्कीम लाई थी इतने प्रतिशत सरकार को दो और अपना सारा कला सफ़ेद में बदला लो | बहुतो ने अपना काला सफ़ेद किया था तब से तो आप को पता होगा ही की किस किस के पास कितना काला है उसके बाद आप लोगो ने उस पर रोक लगाने के लिए क्या कार्यवाही की है | चलिए वो भी छोडिये  कोर्ट ने आप की गर्दन पकड़ कर जब झकझोरा तब जा कर आप ने हसन अली को गिरफ्तार किया अब वो कई राज आप को बता चूका है की उसके पास किस किस का पैसा था सुना था की उसमे दो पूर्व कांग्रेसी मुख्यमन्त्रियो और वर्तमान केन्द्रीय मंत्रियो का पैसा था उनके खिलाफ आप क्या कर रहे है ये सवाल तो आम जनता क्या देश की अदालत भी आप से पूछ पूछ कर परेशान हो चुकी है आप क्या कर रहे है | २ जी में जो सरकारी पैसा डूब गया उसको फिर से पाने के लिए क्या कर रहे है उन कंपनियों पर क्या कार्यवाही कर रहे है जो असल में मंत्रियो द्वारा फर्जी बना कर सारा खेल खेला गया , उन बड़ी कंपनियों पर क्या कार्यवाही कर रहे है जो इन सरे खेल में शामिल थी | इस केस में जो की आप ने एक और विरोधी सांसद के और कोर्ट के दखल के बाद मज़बूरी में कार्यवाही के आलावा दुसरे लोगो के नाम आ रहे है उनके खिलाफ आप क्या करने वाले है आदि आदि आदि सवाल तो कई है  किन्तु आज कोई भी ये सवाल सरकार से नहीं पूछ रहा है क्योकि सरकार ने ऐसे हवा चलाई की ये सारे सवाल हवा में गुम हो गये |
                                                सरकार ने पहले हम सभी को बाबा के कपडे का रंग दिखाया ( वैसे समझ नहीं आता की जब एक दो नहीं तीन तीन केन्द्रीय मंत्री हवाई अड्डे पर बाबा की अगवानी में लगे थे तब क्या उन्हें बाबा के कपड़ो का रंग नहीं दिखाई दे रहा था ) अब वो बता रही है की आन्ना के सफ़ेद कपड़ो के नीचे भी वही गेरुआ कपडे है जिससे हम सभी को डरना चाहिए क्योकि गेरुआ रंग आम जनता के लिए भारत की राजनीति के लिए बड़ा खतरनाक है | पहले उसने बाबा के कपड़ो का रंग दिखा कर उनके मुद्दे को हवा में गुम कर दिया अब वही चाल वो आन्ना के साथ भी चल रही है | और हम व्यक्ति पूजक आम जनता हम तो व्यक्ति के पीछे भागते है हमें तो मुद्दों से कभी ना मतलब था और ना रहेगा हम सदा से व्यक्ति पूजक रहे है और रहेंगे जब तक हमें व्यक्ति अच्छा लगेगा हम उसकी हर बात को कान बंद कर हा में हा मिलाते रहेंगे जिस दिन व्यक्ति हमें ख़राब लगने लगेगा उस दिन हम उसकी अच्छी से अच्छी बात को भी नकारते चलेंगे और इस बात को सरकारे भी खूब जानती है | तभी तो देखिये सरकार के मुंह से जब भी निकालता है तो बाबा या अन्ना ही निकालता है उन्होंने जो सवाल उठाये थे उस बारे में सरकार की मुंह कभी नहीं खुलता है | फिर उसे दिग्गी राजा ने थोड़े काटा है की वो अपने मन से ही इन विषयों पर कुछ बोले जब आम जनता , महान भारितीय बुद्धिजीवी वर्ग और हमारा तथाकथित लोकतंत्र का चौथा खम्बा मिडिया और अपने आप को जबरजस्ती लोकतंत्र का पांचवा खंबा ?? बनाने का प्रयास करने वाला स्वघोषित विद्वान ?? ब्लोगर इस बारे में कुछ नहीं कह रहे है कोई सवाल नहीं कर रहे है तो उसे क्या पड़ी है कुछ भी कहने की | सभी यहाँ अपने निजी विचारो, संकुचित सोच को पोषित करने उसे बढ़ाने सभी से उसे मनवाने और सबसे सही और सभी का भला सोचने वाला साबित करने में लगे है ( मै भी इनमे शामिल हूँ मै कोई दुसरे ग्रह से थोड़े आई हूँ ) | असल में सभी अपने राजनीतिक सोच की खाल से बाहर आने को तैयार नहीं है सभी का अपना ही विचार उत्तम लग रहा है | किसी को तो ये सारा आन्दोलन ही लोकतंत्र पर हमला लग रहा है तो किसी को कांग्रेस विरोधियो बजापा की राजनीतिक साजिस लग रहा है | सही भी है ६० साल से ऊपर चिर निद्रा में सोये हुए हम आम जनता ये कैसे बर्दास्त करे की कोई बेवजह हमारे नीद में खलल डाले हम अपने घरो में सोफे पे पसर कर भ्रष्टाचार पर बकर बकर तो कर सकते है पर जब सड़क पर आ कर कुछ करना हो तो हम हर आन्दोलन में दुनिया जहान के मीन मेख निकाल कर बड़े आराम से इससे बचना चाहते है, हम क्रांति तो चाहते है बदलाव तो चाहते है पर वो सब बस हमारे आराम से बैठे बैठे बकर बकर बकने से आ जाये तो क्या बात है | हा जब बदलाव आ जाये और उसका क्रेडिट लेना होगा तो हम सब माला पहनने के लिए जमीन तक अपना सर और कमर झुकाने के लिए तैयार मिलेंगे | तो चलिए हमारी बकर बकर ख़त्म हुई कुछ आप के मन में हो तो यहाँ बक कर मन हल्का कर लीजिये मेरी तरह , बाकि हम इससे ज्यादा ना तो कर सकते है और ना ही करना चाहते है |