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October 07, 2016

भंवरे ने खिलाया फूल , फूल को दे रहे खाद पानी राजकुँवर - - - - - mangopeople


                                                           जिस दिन सर्जिकल स्ट्राइक हुई उसके दूसरे दिन रविस ने अपने प्राइम टाइम में बताया की कैसे सरकार की तरफ से इस मामले में सब आज चुप है और सामान्य तरीके से काम कर रहे है जैसे कुछ हुआ ही नहीं है । सन्देश साफ था की इस मामले को ज्यादा तूल नहीं देना है । हा छूट भैये नेता और भक्तगड़ जरूर लगे हुए थे , सीन फुलाने नापने और स्तुति गान में किन्तु ये कितने दिन चलता बहुत हुआ तो हफ्ते दस दिन फिर कोई नया मुद्दा मिल जाता और सर्जिकल स्ट्राइक सिर्फ चुटकुलों में बचा रहता । किन्तु हमारे यहाँ लोग कुल्लहाणी को पैर पर नहीं मारते पैर ही कुल्लहाणी पर दे मारते है , जो मुद्दा अपने आप ही समाप्त हो जाने वाला था उस पर नकारात्मक बयानबाजी करके उसे खाद पानी दे जीवित रखने का काम किया , पहले अरविन्द और अब राहुलगांधी ने ।

                                                              मोदी ने हमेसा एक रणनीति पर काम किया है कि लोगो को अपने दिए मुद्दे में उलझा कर रखो ताकि लोग उसी पर बात करते रहे और वो अपने मुद्दे उठाना तो दूर उसे याद भी न रख पाये । कई बार लोग उनकी रणनीति में फंसे है किन्तु इस बार तो लोग खुद ब खुद उनके जाल में घुस रहे है वो भी जबरजस्ती । इतनी लंबी किसान यात्रा करके आये राहुल किसानों पर बोल अपने मुद्दे उठाने की जगह सर्जिकल स्ट्राइक पर बेतुका बयान दे बैठे , किसने सलाह दी थी, दिग्विजय सिंह ने क्या उसके पहले पीके से पूछा था जिन्होंने उनके इस किसान रैली की सारी रणनीति बनाई थी ,( बेचारे पीके को भगवान ये सब सहने की शक्ति दे, उसका अपना कैरियर दांव पर है ) होना ये चाहिए था कि , जय जवान जय किसान का नारा लगाते हुए कहना चाहिए था की जवानों का बदला ले लिया अब किसानों की बात की जाये , अपने मुद्दों का केंद्र में लाना था पर किया उसका उलटा अपना मुद्दा पीछे छोड़ वो मोदी पोलिटिकली ज्यादा फायदा न उठा ले इस चक्कर में पड उनके मुद्दों में उलझ पड़े । प्यास क्या चाहे दो घुट पानी लीजिये अब मोदी और उनके भक्तो को और मौका मिल गया इस सारे मामले को और लंबा खीचने और इस पर चर्चा करने का ।

                                                            किसी सैनिक कार्यवाही पर वोट नहीं पडते ये बात शायद इन नेताओ को समझ नहीं आती । याद कीजिये ७१ का युद्ध जितने के कुछ साल बाद भी इंदिरा गाँधी को देश में आपातकाल लगने की नौबत आ गई , अटल जी के साथ बुद्धा मुस्कराने और कारगिल के बाद भी क्या हुआ पता है सभी को । यू पी के किसी गांव में जब आप कहेंगे की हमें किसी की जमीन नहीं हड़पनी तो वो बोलेंगे की आप मत हड़पो किन्तु यहाँ दबंगो की पूरी फ़ौज है जो हमारी जमीने हड़प रहा है उसकी बात करो , गोवा वाला बोलेगा ये क्या युद्ध का मौहाल बना दिया सारे पर्यटक ही गायब हो गए , और तमिलनाडु कर्नाटक वालो बोलेंगे कौन सा सिंधु जल यहाँ हम अपने कावेरी में उलझे है उसकी बात करो । आज भी भारत में आतंकवाद और पाकिस्तान जैसे मुद्दे बड़े और कुछ छोटे शहरो के उन लोगो तक ही सीमित है जो टीवी अख़बार और सोशल मिडिया से जुड़े है , उसके बाहर के ज्यादातर भारतीयों के लिए ये कोई मुद्दा ही नहीं है और न जाने किस अदृश्य राजनीतिक फायदे के लिए हमारे महान नेतागड़ इस मामले को लंबा और लंबा खीचते जा रहे है ।


                                                            मोदी को इतना बड़ा बनाने में उनके काम से ज्यादा फायदा उनके खिलाफ जगह जगह नकारात्मक बोलने और लिखे जाने से हुआ है , ये पहले भी हुआ है और अब फिर से होने जा रहा है । ये नकारात्मकता सकरात्मक और सही सवालो को दबा देती है , वो जवाबो से बच जाते है और पीड़ित से नजर आते है । जिससे उनके वोटो का ध्रुवीकरण आसानी से होता है । धन्यवाद मोदी की तरफ से राहुल , कांग्रेस और अरविन्द को ।

September 27, 2016

आम नेता की किस्मे





रिपोर्टर :-  आज हम आप को मिलवाते है एक ऐसे व्यक्ति से जो आमो की नई नई किस्मे  बनाने के लिए मशहूर है , आज उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नाम का एक नये किस्म को बनाया है । हा जी तो बताइये इस आम का स्वाद कैसा है । 
आम विशेषज्ञ :- यह एक बहुत खास तरह का आम है , इस आम की रंगत को देखिये वही आप को सबसे खास दिखेगी ये दो रंगों में रंग हुआ है ऊपर का हिस्सा आप को हरा दिखेगा और निचे का आप देख सकते है ये पिला है और इसकी खुशबू का तो कहना ही क्या, पका हुआ क्या कच्चा भी होगा तो दूर तक इसकी खुशबू जाएगी -------
रिपोर्टर बीच में टोकते हुए :- जी अच्छी बात है इस आम का स्वाद कैसा है । 
आम विशेषज्ञ :- जी हा जी है वही बता रहा हु अब जरा इस आम के आकार को देखिये , लंगड़े की तरह नोकीला दशहरी की तरह लंबा -----
रिपोर्टर :- जी जी ठीक है ठीक है  इसका स्वाद -----
आम विशेषज्ञ :- और आप को एक सबसे खास बात बताऊ की इसका छिलका देखिये इतना पतला और अंदर बिना रेशे वाला गुदा , मतलब आदमी देखते ही खरीदने के लिए आतुर हो जायेगा । 
रिपोर्टर:- जी देखिये हमारे पास समय कम है तो ये बताइये इसका स्वाद कैसा है । 
आम विशेषज्ञ :-  जी वो को कोई खास नहीं है । 
 रिपोर्टर:- क्या मतलब । 
 आम विशेषज्ञ :- अब आप को क्या लगा इसका नाम मोदी क्यों रखा है । 
 हडबडाया रिपोर्टर:-जी जी समझ गया तो आप ने देखा लिया मोदी आम अब दर्शको से विदा ले.---------  एक मिनट ठहरिये । मैं दर्शको को दिखाना चाहता हूँ एक बहुत है खास आम मुझे यहा मेज पर रखा दिख रहा है । रिपोर्टर आम विशेषज्ञ को किनारे हटाते हुए आगे बढ़ जाता है । ये देखिये ये एक खास आम यहाँ रखा है इसकी खुशबू ही इतने तेज है की मैं तो खीचा चला आया इसके पास इसकी रंगत तो देखिये हल्का पीलापन लिए कितना सुन्दर आम है तो मैंने आज तक नहीं देखा , बिलकुल लाजवाब आम दिख रहा है ये , मैं  कहता हु की ये आम बाजार में आया तो तहलका मच जायेगा ।  ये कहते हुए उसने आम को हाथ में उठा लिया । 
तभी आम विशेषज्ञ लपक कर उससे आम लेकर मेज पर रख देता है । 
रिपोर्टर :- इस खास आम को आप ने कहा छुपा रखा था और इसको आप ने क्या नाम दिया है । 
आम विशेषज्ञ :- जी ये ऐसा ही आम मैंने बनाया है की मिडिया वाले और लोग देखते है खुद बा खुद इसकी तारीफ करने लग जायेंगे । ये उन लोगो के लिए है जो दुनिया को दिखाना चाहते है की उनके घर में भी अच्छी किस्म का आम है , इसे मैंने राहुल नाम दिया है । 
रिपोर्टर :- लेकिन एक बात बताइये जब मैंने इसे उठाया तो ये काफी हल्का था । ये इतना हल्का क्यों है । 
आम विषयज्ञ :- क्योकि ये सिर्फ दिखाने के लिए है खाने के लिए नहीं , ये प्लास्टिक का है , इसे मैंने रंग कर आम की खुशबू का सेंट डाला है । 
सकपकाया सा रिपोर्टर बात संभालने की कोशिश करने लगा । अच्छा ये बताइये आप ने देश के बड़े बड़े नेताओ के नाम कर आम की किस्मे ईजाद की है , एक और नेता आज कल देश में बहुत प्रसिद्द है । केजरीवाल जी उनके नाम का कोई आम ईजाद नहीं किया है , क्या बाद में करेंगे । 
आम विशेषज्ञ ने मुंह बिचकाते हुए कहा भाई साहब मैं आम की किस्मे बनाता हु "रायते" का नहीं ;)  



नोट :- तकनीकि  समस्या के कारण किसी और के ब्लॉग और स्वयं के ब्लॉग पर भी टिपण्णी नहीं कर पा रही हूँ । इन दो सालो में तकनीक में कुछ फेर बदल हुआ है , क्या गूगल प्लस आदि पर भी अकाउंट बनाना होगा ।