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December 18, 2019

विरोध को धार्मिक रंग ना दे ------mangopeople


                                          नागरिकता कानून के खिलाफ और समर्थन में  कुल मिला कर साठ याचिका दायर हुआ हैं कोर्ट में | आज  बीस पर सुनवाई होने वाली हैं | कानून के खिलाफ और समर्थन में याचिका लगाने वाले  वकीलों का टीवी पर इंटरव्यू देख रही थी | विरोध करने वाला ये जवाब नहीं दे पा रहा था कि इससे भारतीय नागरिकों पर क्या प्रभाव पडेगा | वो जवाब में बार बार NRC की बात करने लग रहा था और एंकर उसे टोक रहा था कि वो कानून तो अभी आया ही नहीं आपने तो याचिका नागरिकता  संशोधन पर लगाया हैं उसकी बात कीजिये | लेकिन उसके पास इसका कोई जवाब नहीं था वो फिर NRC पर आ जाता और मुस्लिमों की लीचिंग पर चला गया  |

                                         सोचिये कानून के खिलाफ याचिका लगाने वाले के पास एक मामूली से एंकर के सवालों का कोई वाजिब जवाब नहीं था वो कोर्ट में जा कर वह क्या और किस तरह की  दलील रखेगा | वहां तो बड़े बड़े धुरंधर कानून के जानकार होंगे और उनके पास भारी भारी सवाल , उनका जवाब वो क्या दे पायेगा | नतीजा उसकी याचिका ही ख़ारिज हो जाएगी और इस पर  लोग कहेंगे कि कोर्ट और जज सरकार की भाषा बोलती हैं लोगों की नहीं सुनती |

                                         क्या इस तरह की तैयारियों के साथ किसी को कोर्ट में जाना चाहिए | ऐसे लोग तो आम लोगो का भरोषा न्यायलय से भी ख़त्म कर देंगे | एक आम गृहणी होने के बाद भी मैं बता सकती हूँ कि उसको इसका  सीधा सा जवाब ये देना चाहिए था कि  ये याचिका किसी वर्ग विशेष को बचाने के लिए नहीं हैं , मैंने ये याचिका देश के संविधान को बचाने के लिए लगाया हैं | उसके धर्मनिर्पेक्षता  के मूल सोच को बचाने के लिए लगाया हैं | मैं यंहा मुस्लिमो की पैरोकारी करने नहीं आया हूँ मैं यहां संविधान की पैरवी करने आया हूँ |

                                          लेकिन वो ये नहीं बोल पायेगा क्योकि ऐसी उसकी ये सोच ही नहीं हैं , क्योकि विरोध को समर्थन देने वालों में से ज्यादातर की ये सोच नहीं हैं | ज्यादातर सरकार के खिलाफ खड़े लोग बस मुस्लिम के नाम पर इसका समर्थन कर रहें हैं , उनके कंधे पर रख अपने विरोध की बन्दुक चला रहें हैं | किसी को संविधान से मतलब नहीं हैं और ना ही इस बात से फर्क पड़ता हैं कि ये कानून कहीं से भी भारत के किसी नागरिक को प्रभावित नहीं करता हैं और ना ही इस बात से फर्क पड़  रहा हैं कि वो विरोध के नाम पर दूसरी तरफ के लोगों के घार्मिक ध्रुवीकरण के एजेंडे को वह पूरी ताकत से सफल बना रहें हैं | सिर्फ मुस्लिमो की बात कर इस विरोध को पूरी तरह से धार्मिक रंग में रंग चुके हैं |