Showing posts with label सालीजिंदगी. Show all posts
Showing posts with label सालीजिंदगी. Show all posts

December 16, 2019

अच्छाइयों , खुशियों के जीवन में आगमन पर रोक नहीं ---mangopeople


                                 कभी कभी बहुत सारी अच्छी चीजों के साथ एक आध बुरी , ख़राब चींजों को भी अपनाना पड़ता हैं , परेशानियां झेलनी पड़ती हैं | सोशल मिडिया पर सबने अपने अपने बाग़ बगीचों की सुंदर सुंदर फोटो लगा लगा इतना जी कराया कि  कबूतरखाने में रहने वाले हमको भी , हार कर एंटी से पैसे ढीले कर अपनी बगिया भी सवारने का मन हो गया , जो विकास की भेट चढ़ चूका था | मोनो रेल की पटरियों ने हमारी बगिया तक आने वाले सूरज का रास्ता रोक दिया था | तो हमने भी अपनी बगिया और आगे बढ़ा लिया |

                               हमारी बगिया के रास्ते  घर में मोटे मोटे चूहों का भी आगमन हो जाता था रात में , तो कभी पौधे जड़ से कुतर जाते सब | अब जब पैसा खर्च हो रहा था तो जंगले में चूहे रोकने वाली जाली लगाने का विकल्प था | दिल सोच में पड़ गया चूहे तो रुक जायेंगे लेकिन उसके साथ ही बगिया में आने वाली तितलियों , भौरों , गौरैय्या , हनी बर्ड , कौआ , कबूतरों जैसे पंक्षियों आदि का रास्ता भी रुक जायेगा |
तय हुआ भला एक परेशानी के लिए इतने सारी अच्छाइयों का रास्ता क्यों रोका जाए | उस एक परेशानी के लिए कुछ और उपाय कर लिया जाएगा और चूहे की जाली कैंसिल कर दी गई | अब इन पुराने रहिवासियों का घर बदला था तो उनके आने में भी देर हो रही हैं | लेकिन धीरे धीरे सब अपने पुराने ठिकाने लौट रहें हैं | गौरैय्या के लिए घर बना दिया गया , एक घर केरल से भी खरीद कर लाया गया |

                                नए फूल लगा दिए गए , कुछ जड़ जमा लिए तो कुछ नहीं जमा पाए तो  कुछ को समय लग रहा हैं | कुछ बीमार हो गए थे अनदेखा करने से उनका ईलाज हो रहा हैं | इतने के बाद अब और सवारने का काम रोक दिया गया हैं |

                               सूरज अपनी दिशा बदलने वाला हैं , उसका भी इंतजार कर ले , उसके बाद देखतें हैं कि हमारी बगिया में  उनकी पहुँच कहा तक होगी | उसके हिसाब से फिर और फूल पौधों का आगमन होगा |कुछ धुप वाले फूल आएंगे तो कुछ छांव वाले पौधे जिनमे सिर्फ हरियाली होगी शायद फूल नहीं | फूल की जगह हरियाली से ही संतोष करेंगे |

                               जीवन में सब कुछ अपनी इच्छा और मन का होता ही कहाँ हैं |  कुछ अच्छाइयों के लिए कुछ बुराइयां परेशानियां , कुछ मन से इतर बर्दास्त करनी ही पड़ता  हैं | या तो उन्हें ख़ुशी ख़ुशी स्वीकार कर लीजिये , बर्दास्त कीजिये या उनके लिए कुछ और उपाय कीजिये |  लेकिन उनके चक्कर में हमें अच्छाइयों , खुशियों के जीवन में आगमन पर रोक नहीं लगानी चाहिए |

#सालीजिंदगी

June 18, 2019

साली जिंदगी-------mangopeople

                                                        एक शाम मन किया आज पनीर टिक्का मसाला  बनाया जाये बाकि सब घर में  था बस पनीर लाना था |  पास के ही दुकान पर मलाई पनीर न था , सादा पनीर था |  सोचा जब खाना हैं तो अच्छा खाओ वरना मत खाओ , यहाँ नहीं मिला तो दूर वाली दुकान से लाती हूँ  | लेकिन जब वहां पहुंची तो वो बंद था  तब याद आया दुकान तो पांच बजे खुलती हैं और अभी बीस मीनट बाकि हैं | अब इतनी मेहनत की थी तो वापस क्या आती बीस मीनट फल वाले के पास ना चाहते हुए ढेर सारे फल लिए और अपनी पसंद का मलाई पनीर ले घर आई |
                                                 
                                                      पनीर , शिमला मिर्च , टमाटर और प्याज सब अच्छे से  चौकोर टुकड़ो में काट , मेरिनेट करने के लिए अदरक लहन का पेस्ट तैयार कर  प्लेटफार्म पर सजाया था कि जोरदार बारिश और पतिदेव का आगमन एक साथ हुआ | इस समय मैं रसोई में होती नहीं कुछ खास हैं  सोच पतिदेव सीधा रसोई में ही आये और सारी तैयारी देख खूब खुश हो कर बोला " क्या बात हैं तुम तो मेरे पेट की आवाज सुन लेती हो |  सोच ही रहा था घर चलके तुमको बोलता हूँ लेकिन तुम तो पहले ही पकौड़ो की तैयारी करके बैठी हो | वाह प्याज के साथ पनीर और शिमला मिर्च के भी पकौड़े , बस मजा आ जायेगा जल्दी बनाओ |
                                                   
                                                      मैं हक्का बक्का अरे मेरी तैयारी से इन्हे ये क्यों लगा की पकौड़े बनने वाले हैं , जबकि मेरा मन तो पनीर टिका मसाला खाने का था और ये डिनर की तैयारी हैं | अंदर से स्वार्थनेस ने जोर का धक्का मारा और मैं जैसे ही कहने गई की पकौड़े नहीं बन रहें हैं तभी उछलती हुई बिटिया आ गई मुझे भी पनीर पकौड़े खाने हैं मेरा फेवरेट हैं ( जबकि ऐसा नहीं हैं ) |
                                               
                                                     लो जी अब तो कोई चांस ही नहीं था , उस तैयारी को देखते सोचने लगी बाकी सब तो ठीक हैं लेकिन ये टमाटर कैसे पकौड़े से जुड़ा , तभी पीछे से आवाज आई , अच्छा किया टमाटर की चटनी बना रही हो सॉस में  वो बात नहीं होती |
                                               
                                                     मेरी सारी मेहनत बेकार गई मेरे मन का तो ना हुआ , सबको पकौड़े खिलाये और आखिर में बिना मन के अपनी प्लेट ले ड्राईंग रूम में आई तो सामने जिंदगी आराम से सोफे पर पैर फैलाये पसरी थी | बोली यार ये तुम लोगो का कुछ समझ ना आता मुझे , तुमको शिमीला मिर्च , प्याज ,पनीर, टमाटर खाने थे और मैंने वो सब तुम्हे खिलाया फिर भी खुश नहीं हो | शुक्र मनाओ की स्वाद बढ़ाया मैंने , कितनी बार तुमने पकौड़ो के साथ टमाटर की चटनी बनाई हैं , आज तो तुमको वो भी खिलाया | जरा भी अतिरिक्त मेहनत नहीं कराया जो तुम्हारी तैयारी थी वही मिला तुमको |
                                               
                                                   इधर मैं हैरान परेशान सोचती ये जिंदगी सबके साथ कैसे खेलती हैं | उसने पहले इच्छा जगाई , फिर उसके लिए  मेहनत भी करवाया ,  अपनी  मर्जी का होता देख जब इच्छाएं अपने चरम पर पहुँच गई तो एक झटके में सब पलट कर रख दिया | हां वो सब कुछ था मेरी प्लेट में जिसके खाने की तैयारी मैंने की थी लेकिन सब होने के बाद वो उसका रूप वो नहीं था जिसकी चाहत थी | दिल कहता हैं  ऐसा तो नहीं सोचा था |
                                             
                                                  पकौड़े अपने आप में बुरे नहीं थे शायद मन में कुछ और पाने की इच्छा न होती तो यही बड़ा स्वाद देते , लेकिन अब बेस्वाद लग रहें थे उनमे वो मजा ही नहीं था , क्योकि मन किसी  पर टिका था , चाहते कुछ और पाने की थी , मेहनत तैयारी किसी और चीज के लिए किया गया था |जिंदगी हमेशा ही ऐसा करती हैं वो हसीन ख्वाब किसी और चीज का दिखती हैं और जैसे ही हम उसे छूने चलते हैं वो आप को नींद से जगा देती हैं |

#सालीजिंदगी

February 02, 2019

जिंदगी कैसी है पहेली हाय ------------- mangopeople



नीमो खो जाता है उसके महा समझदार पापा एक भुलक्कड़ मछली डॉरी  के साथ उसे खोजते बड़ी से ब्लू व्हेल के मुंह में चले जाते है , लेकिन पेट में गिरने से पहले उसके अलिजिह्वा ( uvula ) पकड़ लटक जाते हैं |
डॉरी  व्हेल की आवाज सुन उसे कहती है इसे छोड़ कर नीचे कूद जाओ |
समझदार पापा नीचे पाचन वाले झारीय अमलो का सागर देख ऐसा करने से मना कर देते हैं , उन्हें लगता है नीचे गिरे तो पचा लिए जायेंगे |
व्हेल से उसकी भाषा में बात करती डॉरी  बार बार उसे कहती है कि व्हेल कह रही है सब कुछ छोड़ कर बस बहो तो तुम ऐसा ही करो |
पर समझदार पापा उसे समझाते ये सही नहीं है |
अंत में डॉरी  कहती है ये आखरी मौका है अब तो तुम्हे वो छोड़ कर कूदना ही होगा |
उसकी बात पर भरोषा करके वो पेट में कूद जाता है और तभी व्हेल अपने अंदर का अतिरिक्त पानी जोर से बाहर फेकती है उसके साथ वो दोनों भी व्हेल के मुंह से बाहर आ कर समुन्द्र में गिर जातें है |
जीवन में कई बार ऐसा ही होता है हम अपनी ही समझदारी को पकड़े जिद्द पर अड़े होते हैं और जीवन बार बार इशारा करती है कि सब छोडो और चुपचाप बहो असल में वो हमें सही जगह ले जाने का प्रयास करती है और हम ही उसके साथ बहने के लिए राजी नहीं होते |