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July 13, 2022

टीचर से असहमति का अधिकार

 पतिदेव का एक मित्र मैथ में बहुत अच्छा था | एक दिन स्कूल में मैथ के टीचर को बोल दिया की उसका तरीका टीचर के मुकाबले  ज्यादा आसान हैं | टीचर ने पुरे क्लास के सामने उसे इतना कुटा कि आज से दो चार साल पहले जब उस टीचर की  मौत हुई तो ग्रुप में उसने नमन भी ना लिखा | 


पिछले साल आठवीं में बिटिया के मैथ के सर  को बीच में अचानक बदल दिया गया तो सब बहुत दुखी हुए क्योकि बदले में जो टीचर आ रही थी वो अच्छा नहीं पढ़ाती थी | एक दिन ऑनलाइन क्लास मे किसी ने मैथ समझ नहीं आने पर डिसलाइक का बटन दबा दिया | फिर क्या था उसका देखा देखी सबने वही शुरू कर दिया | थोड़ी देर बाद जब टीचर की नजर पड़ी तो उन्होंने बड़ी शांति से कहा वो चैप्टर दुबारा पढ़ा देंगी |


बिटिया के स्कूल टीचरों का ये व्यवहार नया नहीं था ऐसे मामले को पहले भी वो बड़े आराम से लेती थी  | जब सामान्य दिनों में पहले भूगोल की एक  क्लास में एक लड़की ने कह दिया था मैंम बहुत बोरिंग हैं नींद आ रही हैं | तो जवाब में टीचर ने कहा चलो थोड़ा देर कुछ और इंट्रेस्टिंग बाते करते हैं फिर पढ़ायेंगे क्योकि  वास्तव में भूगोल बोरिंग होता है |  


हमारे समय में हम किसी टीचर से ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद भी नहीं कर सकते  थे |  ज्यादातर अध्यापक ऐसी बातो को अपने ईगो पर ले लेते हैं | वो ये बात नहीं समझते कि क्लास में जब चालीस से ज्यादा  छात्र हैं तो उनके समझने की क्षमता अलग अलग हो सकती हैं | क्लास में बताया पढ़ाया किसी के लिए आसान तो किसी के लिए मुश्किल हो सकता हैं | 

 टीचर से असहमत होने का हर बार अर्थ ये नहीं होता कि टीचर गलत हैं |  बच्चे को ना समझ आया तो वो आपके बताये पढ़ाये से असहमत ( समझ ना आया , पसंद नहीं आया , ठीक से नहीं पढ़ाया , बेकार पढ़ाते/ती जैसा कुछ भी )  हो संकता हैं | ये अच्छे शिक्षक की जिम्मेदारी की वो क्लास के कमजोर बच्चो को भी समझने लायक पढ़ा सके | स्मार्ट बुद्धिमान छात्रों को तो कोई भी पढ़ा सकता हैं | 


कुछ समय पहले मित्र लिस्ट में से एक टीचर ने अपना अनुभव लिखा कि कैसे उनके बनाये पीपीटी को सभी ने पसंद किया लेकिन एक बच्चे ने उसे डिस लाइक किया था | उन्हें इसका दुःख हुआ और उन्होंने उस बच्चे को भविष्य का ट्रोलर कह दिया | उनके डिसलाइक पर दुःख जताने पर बच्चे ने डिसलाइक वापस ले लिया | मेरे लिए ये आश्चर्य की बात थी कि एक डिसलाइक पर नाराज होने वाली टीचर के सामने अपनी असहमति कैसे दर्ज करूँ , तो हमारी तो हिम्मत ही ना हुयी वहां कुछ कहने की ।  आज अपनी दिवार पर लिख दिया उम्मीद है सभी लोग पढ़ लेंगे | 


मुझे तो लगा उन्होंने भविष्य में सच कहने वाले , विरोध की एक आवाज को आज ही दबा दिया | बिना ये पूछे कि असहमति किस बात पर थी ,समस्या क्या थी |  अब वो बच्चा  या तो  भविष्य में सबकी तरह हां में हां मिलाएगा भले वो बातों से सहमत हो या ना हो या विरोध करने की जगह मौन रहेगा |  

#क्लास_चालू_आहे 

September 23, 2019

स्कूलों में मिलती ये कैसी सीख -------mangopeople

                                       हम अपने बच्चों को अच्छे से अच्छे महंगे नीजि स्कूलों में भेजते हैं इस उम्मीद में कि वो वहां अच्छी पढाई के साथ कुछ अच्छे संस्कार , अच्छी बातें और पढाई से इतर एक अच्छे मनुष्य बनने की शिक्षा लेंगे | लेकिन वही महंगे पब्लिक स्कूल उन बच्चों को क्या सीखा सकता , उन्हें कितनी गलत बातें और झूठ सीखा सकता हैं हम अंदाजा भी नहीं लगा सकतें हैं |
                                       बहन के घर के बगल में एक पार्क हैं उजड़ा हुआ , अभी तक हरियाणा सरकार के विकास के मैप में वो पार्क  नहीं आया हैं , इसलिए खाली मैदान के रूप में पड़ा हुआ हैं |
पिछले शनिवार कुछ सरकारी स्कूल के बच्चे और टीचर वहां आ कर ढेर सारे पेड़ लगा गए | संभव हैं कि किसी सरकारी आदेश पर्यावरण संरक्षण आदि के तहत ऐसा किया गया हो |छठी या सातवीं के छोटे बच्चे अपने साथ ढेरो पेड़ लायें थे और तेज बारिश होने के बाद भी गीली मिटटी में गंदे होते हुए भी गड्ढे खोद कर अच्छे से पेड़ लगा दिया | दो दिन बाद और भी बच्चे आये और किसी दूसरे पार्क में भी पेड़ लगा गयें | साथ में पेड़ों को लगाते और उनके साथ फोटो भी खिंचवायें गयें बच्चों और टीचर के |
                                       दो तीन दिन बाद  अचानक से वहां दो बसों में भर कर  किसी दूसरे  सेक्टर के एक नामी और बड़े नीजि स्कूल के बच्चे फिर उसी पार्क में अपनी टीचर के साथ आयें और सरकारी स्कूल के बच्चों द्वारा लगाएं गयें पेड़ों के साथ फोटो खिंचवाने लगे | जब बहन ने पूछा ये क्या हो रहा हैं तो बताया गया हम सब पेड़ लगाने आयें हैं | बहन ने सवाल किया कि  पेड़  कहाँ लगाया तो उसने वहां पहले से ही लगे पेड़ की और इशारा कर दिया जिसके साथ उसकी फोटो उसकी टीचर ले रही थी | फिर बहन ने  टोका ये तो पेड़ पहले से ही लगा था जो सरकारी स्कूल के बच्चों ने लगाया था तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और अपना फोटो लेना जारी रखा |
                                     घंटे भर तक बच्चे सरकारी स्कूल के बच्चों की मेहनत को अपनी मेहनत बताने के लिए सभी पेड़ों के साथ फोटो लेते रहें | हद तो तब हो गई जब उन टीचरों ने लोगों के घरों के आगे लगे पेड़ , पौधों के साथ भी फोटो लेना शुरू कर दिया | उसके लिए बाकायदा बच्चों को निर्देश दिए जा रहें थे कि जिनके आगे लोहे के जंगले लगे हैं उनके साथ फोटो ना ली जाए | इस तरह उन्हें अपने पकड़े जाने का डर रहा होगा |
                                    सोचिये स्कूल के टीचर , प्रिंसपल बच्चों का कितना कुछ  गलत सीखा रहें थे | झूठ बोलना , बेईमानी करना , दूसरों की मेहनत को अपना बताना , एक तरह से अपराध करना ना केवल सीखा रहें थे उनसे वो करवा भी रहें थे | संभव हैं इसके पीछे सरकारी पैसे की लूट भी हो | बहन ने बस फोटो नहीं लिया हैं उन लोगों का , लिया होता तो फोटो के साथ  शिक्षा विभाग और स्कूल की  को भी टैग करती इस अपराध के लिए | एक पेड़ लगाना किसी नीजि स्कूल के लिए क्या इतना मुश्किल था कि वो इतना निचे गिर कर बच्चों से ऐसे अपराध करवा रहें थे | ये तो हद के बहुत आगे का अपराध हैं |