Showing posts with label घोटाला. Show all posts
Showing posts with label घोटाला. Show all posts

February 14, 2013

"दी" इटैलियन जॉब -----------mangopeople

"  इटैलियन जॉब " हालीवुड की की एक प्रसिद्द और हिट फिल्म थी , इसी फिल्म का एक फ्लाप और घटिया संस्करण भारत में भी बना " प्लेयर " बिलकुल भारतीय हिंदी फिल्मो की स्टाईल में गाना बजाना सब था , गाने तो खूब हिट रहे फिल्म के,  किन्तु फिल्म बिलकुल ही फ्लाप हो गई । बहुतो ने इटैलियन जॉब का फ़िल्मी घटिया संस्करण देखा होगा और बहुतो ने नहीं किन्तु अब सभी को एक और इटैलियन जॉब का घटिया भारतीय संस्करण बिना मर्जी के देखना होगा । इटली के एक कंपनी से हेलिकॉप्टर  ख़रीदा गया और अब इटली में हुए एक जाँच से पता चला की भारत को वो   हेलिकॉप्टर  बेचने के लिए यहाँ पर लोगो को घुस दिया गया वो भी तिन सौ करोड़ से ऊपर की रकम , इटली में एक शानदार जाँच हुई और एक  सी इ ओ की गिरफ़्तारी भी हुई चार्जशीट तक बन गई । अब इस शानदार और हिट इटैलियन जांच का एक घटिया और फ्लाप भारतीय जाँच संस्करण हम सभी को जल्द ही देखने को मिलेगा ,जिसमे फिल्म के गाने की तरह घोटाले की चर्चा तो हिट रहेगी  किन्तु फिल्म की तरह जाँच फ्लाप होने वाली है , जिसका नतीजा होगा की कही कोई पैसा नहीं लिया गया , कही पैसा लेने के कोई सबुत नहीं है , हमने सारी जाँच कर ली सारे आरोप झूठे है । यानि पैसा दिया तो गया किन्तु वो लिया नहीं गया , पैसा देने वाले पैसा दे कर फंस गए उन्हें सजा भी संभव है की हो जाये किन्तु पैसा किसने लिया यही बात कभी सामने नहीं आएगा तो सजा की बात सोचना तो दूर की बात है । मजबूरी ये है की फिल्म देखने हम नहीं गए और हमारे पैसे बच गए किन्तु इस बार तो हमारे पैसे भी चले गए और जबरजस्ती हम इस घटिया जाँच संस्करण को देखने के लिए मजबूर है ।
                                   
                                                       जैसा की होना था हर घोटाले की तरह यहाँ भी अपने से पहले के विरोधियो की सरकारों पर दोषारोपण होने लगा और फट से जाँच का जिम्मेदारी सरकारी जाँच विभाग सी बी  आई को दे दी गई , एक साल से इस बारे में सवाल किये जा रहे थे , अखबारों में खबर आ रही थी किन्तु किसी भी जाँच की जरुरत नहीं समझी गई और कहा गया की एक औपचारिक रिपोर्ट मिलने के बाद कार्यवाही की जाएगी जो सरकार  को एक साल तक नहीं मिली , किन्तु वही सरकार आज मिडिया रिपोर्टो के आधार पर तुरंत जाँच के आदेश दे कर अपनी पीठ खुद थपथपा रही है । जबकि हाल तो ये है हमारे यहाँ सी बी आई की जाँच इसलिए नहीं होती की कोई पकड़ा जाये , बल्कि जाँच इसलिए होती है की कोई पकड़ा न जाये , सभी आरोपी  बाइज्जत  बरी हो जाये । कभी कभी ये भी लगता है की तुरंत सी बी आई की जाँच इसलिए बिठा दी जाती है ताकि उस घोटालो से जुड़े कागजात कही किसी और के हाथ न लग जाये , बल्कि जल्द से जल्द घोटालो से जुड़े हर कागजात जाँच के नाम पर इस सरकारी विभाग के पास आ जाये और उससे जुड़े लोगो को बचाया जा सके , यदि वो सरकारी पक्ष का है तो उस पर लगे सभी आरोपों से उसे बरी किया जाये  और यदि विरोधी पक्ष का है तो उससे सौदेबाजी की जाये , ताकि सरकारे आराम से अपना काम करती रहे । इस घोटाले को ही ले लीजिये यदि कोई गड़बड़ी पूर्व की सरकारों की थी तो वर्तमान सरकार को जाँच में क्या तकलीफ थी उसे एक साल पहले ही जाँच के आदेश दे देने थे , किन्तु ऐसा नहीं हुआ क्योकि सभी जानते है की चोर चोर मौसेरे भाई होते है , कितने ही दलों  की सरकारे आई और गई आज तक बोफोर्स घोटाले का कोई नतीजा नहीं निकला , यहाँ तक की वो सरकारे भी कुछ नहीं कर सकी जो इसे मूद्दा बना कर चुनाव लड़ी । ये सारे घोटाले राजनैतिक दलों  के लिए मात्र चुनावी मुद्दा भर होती है उन्हें न किसी जाँच से मतलब है और न किसी आरोपी के पकडे जाने से ।

                                           अन एक नया शगूफा शुरू हो गया है की मिडिया ट्रायल न हो , क्योकि ये  देश की छवि , सेना की छवि , को ख़राब कर रहा है सैनिको का मनोबल गिरेगा और किसी पूर्व  सेनाध्यक्ष से हम इस तरह सवाल नहीं कर सकते है । इसका क्या मतलब है , यही की भाई मिडिया इस बारे में बात न करे इन घोटालो को उजागर न करे , लोग अपना मुंह बंद करके रखे , ताकि जाँच के नाम पर लिपा पोती होती रहे अपने राजनैतिक समीकरण को ठीक किया जा सके , और मामला अदालत तक पहुँच भी गया तो वहा क्या हो रहा है ये बात हम 2 जी घोटाले में देख ही रहे है कि  कैसे सी बी आई के वकील तक घोटालेबाजो से मिल कर काम कर रहे है उन्हें बचाने का काम कर रहे है ।  हमारी सी बी आई तो इतनी भी सक्षम नहीं है की वो ये भी देख सके की खुद उसके ही लोग घोटालेबाजो से मिले हुए है , अभी 2 जी मामले में जिस वकील को हटाया गया है उनके बारे में बाहर के व्यक्ति ने सी बी  आई को जानकारी दी थी,  बातचीत का टेप दिया था , तब जा कर सी बी आई को इस बारे में पता चला था , अब वो उसकी भी जाँच कर रही है ।पूर्व वायु सेनाध्यक्ष कहते है की कोई सीधे मुझे कैसे घुस देने की बात कर सकता है ये सम्भव नहीं है , जबकि अभी हाल में ही एक पूर्व थल सेनाध्यक्ष ने साफ कहा था की एक ट्रक सौदे में उन्हें सीधे सीधे घुस देने की पेशकश की गई थी जब वो पद पर थे और ये बात उन्होंने रक्षा मंत्री तक को बताई थी ,( उसकी भी जाँच हुई थी और उसमे भी कुछ नहीं निकला ) अब किसकी बात को सच माना जाये ।  सेना से  जुड़ा ये कोई पहला घोटाला नहीं है , और न हीं पहला मामला है जिसमे किसी सेना से जुड़े व्यक्ति पर आरोप लग रहा है,  तहलका ने तो एक स्टिंग में दिखा भी दिया था सब कुछ कि कैसे सेना से जुड़े लोग कमीशन खाते है । इसके बाद भी सेना को ले कर इतना ढकाव छुपाव क्यों हो रहा है , बल्कि अब समय आ गया है की अब सेना के अन्दर छुप छुपा कर हो रहे इन कमीशनबाजी को भी बाहर लाया जाये और उसकी भी अच्छे से सफाई की जाये । सेना का मनोबल इसलिए नहीं गिरता है की उससे जुड़े लोगो पर आरोप लग रहे है बल्कि इससे होता है की जहा एक तरफ खबरे आती है की सेना में गोल बारूद , और गोलियों तक की कमी है वहा वी वी आई पी  के सुरक्षा के नाम पर उनके लिए इतने अरबो रुपये के     हेलिकॉप्टर ख़रीदे जा रहे है , उन पर खर्च होने वाली रकम को  घुस ले कर महंगे हथियारो  और कई बार बेकार हथियार को खरीदने में और कभी कभी बिना जरुरत के चीजो को खरीदने में खर्च किये जा रहे है । इसलिए मिडिया ट्रायल के नाम पर लोगो की आवाज को बंद करने का प्रयास सरकारे न करे तो अच्छा है , क्योकि इससे ये आवाजे तो बंद नहीं होगी उलटे सेना की छवि की लोगो की नजर में ख़राब होगी , सरकरो की छवि की तो बात छोड़ ही दीजिये वो तो कभी अच्छी थी ही नहीं । एक उम्मीद लोगो को सेना से है अब उस उम्मीद को सेना न तोड़े तो ही अच्छा होगा , और लोगो को चुप कराने के बजाये  एक बार अपनी साफ सफाई कर ले , सरकारों से तो हम इसकी भी उम्मीद नहीं कर पाते है ।


चलते चलते  

                  कांग्रेस और सरकार के ग्रह नक्षत्र ठीक नहीं चल रहे है , घोटालो के आरोपों से परेसान हो कर उसने क्या क्या नहीं किया , कैश सब्सिडी को गेम चेंजर का नाम दे कर जनता के बिच उतारा, राहुल को कांग्रेस में नंबर दो बनाया , उन्हें प्रधानमंत्री के पद के लिए प्रोजेक्ट किया , मोदी,  साम्प्रदायिकता , हिन्दू आतंकवाद का नाम ले कर चर्चा का रुख मोड़ा , पहले कसाब  और फिर अफजल को फांसी दे कर घोटालो से बड़ी मुश्किल से जनता का ध्यान हटाया था किन्तु वाह रे किस्मत घूम फिर कर फिर एक और घोटाला सामने आ गया और जनता के बिच फिर घोटाला ही मुद्दा बना गया , अब बजट एक मात्र उपाय है उसके लिए चुनावों से पहले जनता के बिच अपनी छवि को ठीक करने के लिए , देखते है की अब बजट कितना लोकलुभावना आता है या फिर एक और घोटाला उसके किये धरे पर पानी फेरने वाला है । वैसे नेताओ में अब पहले वाली काबलियत नहीं रही की घोटाला करो और उसे सामने भी न आने दो ।




October 12, 2012

सर नोचने के लिए अपने हाथ कम पड़े तो मदद लीजिये ------------mangopeople




1-करीब दशक भर पहले महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई में एक बड़े बिल्डर समूह को जो महंगे बड़े आलिशान फ़्लैट बनाने के लिए जाना जाता है, उसे मुंबई के बाहर एक बेसकिमती जमीन दे दी ताकि गरीब और माध्यम वर्ग के लिए छोटे और उनके बजट में आने वाले फ़्लैट बनाये ( वो भी तब जबकि महाराष्ट्र में भी डी डी  ए  की तरह म्हाडा नाम का सरकारी विभाग है जो खुद भी लोगो के लिए सस्ते घर बनाता है ) नतीजा बिल्डर ने उस जमीन पर बड़े बड़े आलिशान फ़्लैट बना दिया ( ये भी आश्चर्य की बात है की नक्शा  पास हुआ एक पूरा टावर खड़ा हो गया और सरकार को कुछ भी पता नहीं चला ) खबर लगी हो हल्ला हुआ और सम्बंधित विभागों की तरफ से बिल्डर समूह पर पर हजारो करोड़ ( शायद 2 हजार करोड़ ) का जुर्माना  लगा दिया गया , किन्तु जल्द ही महाराष्ट्र के "पावरफुल" नेता की कृपा से ये हजार से सौ करोड़ ( 2 सौ करोड़ ) में बदल गया । मामला आज भी आदालत में है । बिल्डर और नेताओ का शानदार मजबूत गठजोड़ देखिये , कहा कहा से पकड़ियेगा जहा एक रास्ते बंद कीजिये दुसरे खोल देंगे ।

   2-   नोयडा मे गरीब किसानो की जमीन का अधिग्रहण करके उसे अमीरों को फार्म हॉउस के लिए दे दिया गया और नीलामी में कहा गया की वो किसान भी जिनसे सरकार ने 25 पैसे में इस जमीन को ख़रीदा था वो भी अपनी ही जमीन को अब सरकार से 1 रु में खरीद सकते है और वापस से खेती माफ़ कीजियेगा अंग्रेजी में फार्मिंग कर सकते है ।  सरकार और बाबु की शानदार नीतियों का,  सोच का और गरीब किसान की हालत का नजारा देखिये , जनता के लिए बनी सरकार के जमीन के दलाल बन जाने का नजारा देखिये ।


3- मुंबई में सैनिको की विधवाओ के लिए ईमारत बनने वाली थी 7 मंजिला,  जिस विभाग के पास वो क्लियरेंस के लिए जाती उसी विभाग के बाबु और मंत्री को एक फ़्लैट उपहार में मिला जाती और धीरे धीरे ईमारत की ऊंचाई आसमान छूने लगी सैनिक और उनकी विधवाए कही पीछे ही छुट गए , सामने की सड़क की चौड़ाई कम कर दी गई, बगल में बस डिपो की जमीन  भी इसमें मिला दी गई ताकि और ज्यादा बड़ी ईमारत बने और उनके विभागों के बड़े बाबु, मंत्री को भी घर दे दिए गए । हो हल्ला हुआ जाँच शुरू हुई तो अंत में बात ये आ गई की न तो जमीन सैनिको की थी न ईमारत सैनिको की विधवाओ के लिए बन रहे थे तो काहे का घोटाला । किस्सा सुना है , एक रेगिस्तान  में आदमी तंबू लगा कर सोया था रात को ऊंट ने कहा थोड़ी जगह दे दो उसने दे दी सुबह उठा तो देखा की वो तंबू से बाहर है और ऊंट तंबू में बैठा है ।

4-  किसानो से खेती लायक उपजाऊ जमीने ली जाती है क्योकि घरो की कमी है और लोगो के लिए घर बनाना है किन्तु वहा बनते है अमीरों के लिए फार्मूला वन रेस का ट्रैक , गोल्फ कोर्स  ( निजी रूप से इस दोनों के बनाने से मुझे कोई आपत्ति नहीं है किन्तु वो खेती की जमीन सस्ते में गरीब किसानो से लेकर न बने जाये करोडो कमाते है तो खुद बाजार भाव पर जमीने ख़रीदे और उस पर बनाये ) और बड़ी बड़ी शानदार हर आलिशान सुविधाओ से युक्त इमारते, जो बस अमीरों की पहुँच में होती है, गरीब तो छोडिये माध्यम उच्च वर्ग के बस की बात भी नहीं होती है , बना दी जाती है और सरकारे कहती है की सब कानून के अंतर्गत हुआ है सब जनहित है । इस जन को भी देखिये और  जनहित का नजारा भी देखिये ।

5-कोर्ट ने कहा की देश की प्राकृतिक और खनिज सम्पदा को यदि सरकार चाहे तो देश हित में किसी भी नीजि  पार्टी को दे सकती है ।( पूर्व कानून मंत्री ने  जेटली  जी ने कहा की जज दो तरह के होते है एक वो जो कानून को जानते है और एक वो जो कानून मंत्री को जानते है, मैंने कुछ नहीं कहा ) वो सरकार जो जमीन अधिग्रहण बिल को सालो से अपने अंटी में दबा के बैठी है ( शायद इंतजार कर रही है की जब सभी जमीनों का अधिग्रहण हो जायेगा तब ये बिल लायेंगे ) क्योकि वो अभी तक इस बात को भी परिभाषित नहीं कर पाई है की बिल में जनहित की परिभाषा क्या रखे,  क्या ऐसी सरकारे भरोसे के लायक है । मोटरसाइकिल पर बैठ का युवराज जब भट्टा पर्सौला गए जल्द कानून का निर्माण करने का आश्वासन दे कर हीरो बन गए पर ये हिरोगिरी अपने सरकार से क्यों नहीं दिखा पा रहे है ।


6-अस्पताल के लिए ली गई जमीन पर एक दसक तक अस्पताल नहीं बनता है किन्तु सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता है,  फिर अस्पताल नहीं बना तो वो जमीन बिल्डर को दे देती है क्योकि उसे अधिकार है की वो जमीन का प्रयोग , बदल सकती है । बड़े अस्पतालों , स्कुलो कालेजो को कौड़ियो के दाम में  जमीने दे दी जाती है इस शर्त के साथ की वह गरीबो का इलाज और पढाई मुफ्त में होगी किन्तु वहा गरीबो के लिए कुछ नहीं होता और सरकारों को कई फर्क नहीं पड़ता है । क्या ऐसी सरकारों से हम उम्मीद करे की वो जनहित के बारे में सोचेंगी या इस बात को आगे भी लागु करवाएंगी की उनकी नीतियों से गरीबो का हित होता रहे । सरकारों का काम केवल नीतिया बना देना नहीं होता है उन्हें ठीक से लागु करवाना भी उन्ही का काम है ।

7-जरा सरकारी मुआवजे का भी हाल देखिये , किसानो को उनकी फसल बर्बाद होने पर 10 रु से लेकर 50 रु तक का मुआवजे का चेक दिया गया बेचारो को बैंक तक पहुँचने में ही 20 रु खर्च हो गए ( भुनाना जरुरी था क्योकि नहीं भुनाया तो अगली बार मुआवजा नहीं मिलेगा ) , टिहरी गांव जब डूबा तो लोगो को जमीन दी गई और मकान बनाने के लिए इतने कम रुपये ( 20 से 25 हजार रुपये दिए गए थे शायद ) दिए गए की उससे तो दो कमरों का ढ़ांचा भी खड़ा न होता , इंदिरा विकाश योजना में आज भी लगभग 20 हजार रुपये दिए जाते है लोन में घर बनाने के लिए (सरकारे खुद इतने में घर बना के दिखा दे )  । जमीन अधिग्रहण के लगभग हर केस में चाहे वो सेज, बांध , इमारते , सड़क आदि आदि किसी के नाम पर भी लिए गए, जमीने कौड़ियो के दाम में ख़रीदे गए और वह रहने खेती करने वालो को फिर से ठीक से बसाया नहीं गया स्थापित नहीं किया गया । गरीब के दो कौड़ी की औकत देखिये ।


8-करीब 50 हजार भूमिहीन मजदूरों ने मोर्चा निकला दिया और अंत में सरकार ने एक बार फिर उन्हें बेफकुफ़ बनाने हुए कहा की उनकी बाते मान ली गई है और लोगो को उनकी जरूरतों के हिसाब से घर खेती के लिए जमीने दी जाएँगी । क्या कहे एक तरह तो सरकारे किसानो से जमीने ले कर उन्हें भूमिहीन बना रही है दूसरी तरह वो भूमिहीन किसानो मजदूरो को जमीन देने का वादा  कर रहे है । संभव ये भी है की कल को  जंगल की जमीनों को इन्हें दे दिया जाये क्योकि गरीबो के नाम पर पर्यावरण मंत्रालय भी ज्यादा कुछ रोक नहीं पायेगा और मंजूरी आसानी से मिल जाएगी उसके बाद यही मजदुर जब उस जमीन को अपनी मेहनत से काम खेती के लायक बना देंगे तो उनका भी ऐसी ही अधिग्रहण कर लिया जायेगा,  बिलकुल वैसे ही जैसे राजनीति में पहुँच रखने वाला कोई किसी बिल्डर से लोन ले कर जमीन अपने नाम पर ले फिर उस जमीन का प्रयोग सरकार द्वारा बदलवाये जैसे खेती की या अस्पताल की जमीन पर ईमारत बनाने की इजाजत क्योकि बिल्डर के मुकाबले वो ये काम आसानी से और कम समय में करा सकता है और फिर उस जमीन को उसी बिल्डर को ऊँचे दाम पर बेच दे जिससे उसने लोन ले कर जमीन खरीदी थी । सत्ता में बैठी और उनके करीबी लोगो का तिकड़मी दिमाग देखिये ।


9-जो लोग ये सोच रहे है की ये एक दलीय कार्यक्रम है वो जान ले की ये घपले घोटाले भी अन्य  सभी घपले घोटाले की तरह ही सर्वदलीय है , इसमे सभी दल की सरकारे और लोग मिले हुए  है , और सभी इन कंपनियों से बराबर का रिश्ता रखती है और फायदा लेती है । जैसे अब खबर आ रही है की डी एल ऍफ़ को गुजरात में भी जमीने दी गई है बिना किसी नीलामी के,  वहां वही कांग्रेस हल्ला मचा रही है जो कहती है की हरियाणा में कुछ भी गलत नहीं हुआ  और ये रिश्ता भी आज का नहीं है जैसे डी  एल ऍफ़ का रिश्ता राजीव से बहुत ही घनिष्ठ रहा है और इस घनिष्ठता ने ही उसे इतना आगे बढाया था । रिश्तो के इस मजबूत और लम्बी जोड़ को देखिये ।


10-कल टीवी पर एक और खिजाने वाले केस के बारे में सुना की कर्नाटक टूरिज्म विभाग ने अपनी जरूरतों के लिए जमीन अधिग्रहित की जमीन लेने के बाद कहती है की उसके पास मुआवजे के लिए पैसे नहीं है ( लो कल्लो बात अंटी  में नहीं कौड़ी अम्मा भुनाने दौड़ी ) बाद में उसने कहा की एक दूसरी प्राइवेट पार्टी  है जो पैसे देने के लिए तैयार है बस एक छोटी सी शर्त है वो ये की ये सारी जमीने उसे देनी  होंगी हा हा हा हा हा हा हा हा सुकर  है की मामला कोर्ट में गया और कोर्ट ने विभाग की  अच्छी खबर ली और किसानो को न्याय दिया ।  टीवी पर ये सुन कर मैंने कहा की बिटिया रानी मेरे दो हाथ मेरा सर नोचने के लिए कम पड़  रहे है दो अपने भी लगाना , आप के अपने हाथ भी अपने सर नोचने के लिए कम पड़े तो मित्रो से मदद लीजिये और हमारी तरह ही कुछ न कर पाने की खीज में अपने खिजाने वाले किस्सों की एक पोस्ट बना दीजिये । 



चलते चलते 
       
              कहा जा रहा था की वालमार्ट आएगा तो भारत में रोजगार मिलेगा , अच्छा वेतन मिलेगा , काम   की सही सुविधा जनक जगह मिलेगी आदि आदि , अब सुना है की अमेरिका में वालमार्ट के कर्मचारी कम वेतन , काम के ज्यादा घंटे , सुविधाओ की कमी आदि आदि को लेकर हड़ताल पर चले गए है ।










July 12, 2011

कल से देश में भ्रष्टाचार घोटाले बंद राम राज का आगमन हो गया - - - - - - -mangopeople

कल से देश से भ्रष्टाचार मिट जायेगा अब कल से देश में कोई नया घोटाला नहीं होगा अब कल से महंगाई कम होने लगेगी कल से देश का आम आदमी ज्यादा सुरक्षित होगा अब कल से कोई नई रेल दुर्घटना नहीं होगी, हर मुसाफिर एक साफ सुथरी सुरक्षित रेल यात्रा करेगा | क्योकि इन सारे  सवालो को दर किनारा कर या ये कहे की जनता द्वारा सरकार से पूछे जा रहे इन सारे सवालो के जवाब में हमारे "ईमानदार" प्रधानमंत्री ने अपने कुनबे का या मंत्री मंडल का या घोटालेबाजो का जो आप चाहे कह ले उसका विस्तार कर लिया है | लीजिये जी हो गया मंत्री मंडल का विस्तार अब देश में राम राज होगा | जनवरी में भी हमारे "ईमानदार" साहब ने अपने कुनबे का इसी तरह विस्तार किया था या ये कहिये की अपने कुनबे के लोगों को तास के पत्तो की तरह फेट दिया था लेकिन उससे क्या बदला कुछ भी नहीं आम आदमी का जीवन तो आज भी वैसे का ही वैसा ही है मंहगाई वैसे की वैसे ही है | लेकिन सरकार को शायद जनता के सवालो का कोई जवाब ना सुझा तो उन्होंने भी हवा में उछाल दिया मंत्री मंडल के विस्तार की खबर और इस खबर को पकड़ लिया हमारे खबरनवीसो ने  जिस भी चैनल को देखीये सभी के सभी लगे थे हफ्ते भर से ये बताने में की मंत्री मंडल के फेरबदल में कौन कौन नया मंत्री बनेगा किसका कद बढेगा, किसका विभाग बदलेगा और किसका मंत्री मंडल से छुट्टी होना तय है | सभी के अपने अपने सूत्र है सभी के सूत्र कोई ना कोई दावा कर रहे थे और सभी लगे है मंत्री मंडल के विस्तार होने के पहले ही सारी जानकारी जनता को दे देने में | पर सवाल ये है की क्या जनता ये जानने के लिए उत्सुक थी कि मंत्री मंडल के विस्तार में क्या होने वाला है, कोई पूछे इन खबर देने वालो से की कुछ दिन पहले या कुछ घंटो पहले इस बात को जान लेने से क्या फर्क पड़ेगा की कौन मंत्री बनने वाला है और कौन नहीं क्योकि जब मंत्री शपथ लेंगे तो अपने आप ही सारी बाते साफ पता चल जायेगी, पहले से जानने में जनता का तो कोई भला होने वाला नहीं है और यदि जनता बाद में भी जान जाये तो भी उसका कोई भला नहीं होने वाला है | मंत्रियो के विभागों में फेरबदल हो या किसी को निकाला जाये या किसी को रखा जाये जनता को किसी भी बात से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है जनता पहले भी त्रस्त थी और कैबिनेट विस्तार के बाद भी वैसे ही त्रस्त रहेगी | मंत्री मंडल में चाहे कोई भी नया मंत्री आ जाये महंगाई नहीं घटने वाली है घोटाले नहीं रुकने वाले है, भ्रष्टाचार कम नहीं होने वाला है सब कुछ वैसा ही रहेगा जैसा पहले था | रेल मंत्री कोई भी हो रेल दुर्घटनाओ में कोई कमी नहीं आने वाली है और ना ही रेल प्रशाशन द्वारा हर दुर्घटना के बाद उसके कारणों के ले कर वही लिपा पोती करना बदलने वाला है | ना तो कोई मंत्री देश की सेवा या जनता की सेवा के लिए बनता है और ना ही किसी मंत्री मंडल में फेर बदल जनता के लिए या उसकी परेशानियों को दूर करने के लिए होता है | पूरी कवायद सरकार का,  सरकार के लिए, सरकार द्वारा किया जाता है | मतलब की मंत्री मंडल में नये चेहरों को लाना कुछ पुराने को इधर उधर करना और कुछ की छुट्टी करना सरकार अपने मतलब के लिए करती है, कही किसी को संतुष्ट करना है, कही सरकार की बिगड़ी छवि को ठीक करना है, कही किसी का कद उसके चमचागिरी से बढ़ना है, तो किसी के उग आये ज्यादा परो को काटना है | जो भी होगा वो सरकार केवल और केवल अपने लिए करती है आम आदमी के बारे में ना तो सोचा जाता है ना उसकी कोई सुध ली जाती है, यदि उसके बारे में कुछ सोचा जाता है तो ये कि कैसे सरकार की आम आदमी के सामने हो रही बदनामी कम हो जाये, या फिर काम हो या ना हो पर आम आदमी को लगना चाहिए की काम हो रहा है सरकार को उसकी चिंता है तभी तो देखो कैसे सरकार ने जनता के भलाई के लिए तुरंत कुछ मंत्रियो को हटाया बढाया है नये लोगो को लाया है जो जनता की अच्छी सेवा करेंगे | पर असल में होगा क्या की अब नये मंत्री नये घोटाले करेंगे नये तरीके के भ्रष्टाचार होंगे अब मंहगाई बढ़ने के शायद कुछ नये कारण गिनाये जायेंगे या एक और नई तारीख दे दी जाएगी महंगाई कम होने के, अब नये लोग कुछ तो नया करेंगे ही बाकि जनता के लिए तो बस नेताओ मंत्रियो के नाम बदलने के अलावा और कुछ भी नहीं बदलने वाला है | पर हा इन सभी बातो के बीच कम से कम जनता का ध्यान कुछ सरकार विरोधी मुद्दों से तो हट ही जाता है और इसे हटाने में सबसे बड़ा साथ देता है मीडिया | मंत्री मंडल में होने वाले फेरबदल या विस्तार को इस तरह बड़ी खबर बना कर पेश करने लगा था जैसे की बस इसके बाद तो देश में क्रांति ही आ जाएगी सब कुछ सुधर जायेगा देश से भ्रष्टाचार कम हो जायेगा घोटाले बंद हो जायेंगे महंगाई रुक जाएगी सभी देशवासी नेताओ की तरह ही सुरक्षित जिंदगी जियेंगे, अब तो देश में सब कुछ अच्छा हो जायेगा | ये भी कम नहीं था जो अब नेताओ के संतुष्ट असंतुष्ट इस्तीफे की नौटंकी को बड़ी खबर बना कर पेश किया जा रहा है | पर जनता भी अब पहले की तरह ना तो भोली रही और ना ही बेफकुफ़ जो वो इन तिकड़मो को समझ ना सके सरकार की इन चालबाजियो को समझ नहीं सके | जनता ना तो भ्रष्टाचार के मुद्दे को भूलेगी ना महंगाई के मुद्दे को भूलेगी और ये बात सरकार के साथ मीडिया भी समझ ले तो उसके लिए ज्यादा अच्छा होगा |