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July 04, 2012

पीड़ित कौन और मांफी देने वाला कौन - - - - mangopeople

                                                                   
                                                                मुद्दे को ठीक से समझने के लिए उसे एक कहानी किस्से की तरह सुनाती हूँ, मान लीजिये की एक गांव क़स्बा शहर जैसा कुछ है, जहा सब एक दूसरे को जानते है जैसे की अपना ब्लॉग जगत है, कुछ वैसा ही, वहा कई तरह के लोग है ,उनमे एक ऐसा भी व्यक्ति है जिसकी आदत है चर्चा में बने रहने के लिए कुछ भी करने की,  सब उसकी बाते करे उसे देखे उसके लिए वो कुछ भी करता है , तो कभी बस अपने  आन्नद के लिए,  महिलाए उसके निशाने पर ज्यादा रहती है महिलाए के लिए अपने घर की छत पर चढ़ कर अश्लील टिप्पणिया करना उसके सबसे प्रमुख आदतों में एक थी , ये सबसे आसान तरीका है चर्चा में आने के लिए और मजे लेने के लिए तैयार कुछ लोगो को अपने पास बुलाने के लिए | कुछ लोगो को गलतफहमी थी की वो बड़े आदमी है ( अभी हाल में ही ननद की बेटी की शादी थी, गाने वाले लडके की तरफ किसी ने इशारा कर कहा बहुत बड़ा सिंगर है,  मैंने कहा वो आर्केस्ट्रा वाला,  तो उन्होंने कहा की अरे नहीं भाई टीवी पर एक प्रतियोगिता में आया था बड़ा सिंगर है,  मैंने कहा काहे का बड़ा आज भी शादियों के आर्केस्ट्रा में गा बजा रह है, तो जबाब मिला आर्केस्ट्रा मत कहिये बैंड  है | मतलब टीवी पर आने के बाद आदमी बड़ा हो जाता है और आर्केस्ट्रा बैंड बन जाता है ) कुछ एक लोग बड़ा आदमी है के कारण उन्हें कुछ कहते नहीं थे कुछ अपने मतलब के लिए उन्हें समय समय पर उकसा कर मजे लिया करते थे ( कई बार लोग खुद कई गिरी हुई हरकते नहीं कर पाते है तो ऐसे लोगो को सहारा लेते है अपना दामन भी साफ और खुद की खुन्नस भी निकल गई ) सालो तक उनकी यही हरकते रही लोगो को व्यक्तिगत टिप्पणी  करना उल जुलूल हरकते करना आदि आदि | एक दिन उनको ये एहसास  हुआ की इन हरकतों के कारण वो बड़े आदमी बस माने जाते है कुछ लोगो के लिए,  किन्तु उन्हें वो सम्मान नहीं मिलता है कोई पुरुस्कार नहीं मिलता है उनकी हरकते बीच में आ जाती है , तो उन्होंने सोच लिया की अब से वो ये सारी हरकते बंद कर देंगे ताकि उन्हें वो सब मिल सके और उन्होंने अपने घर की छत पर चढ़ चिल्लाना शुरू किया की पिछले किये की माफ़ी मांगता हूँ आगे से ऐसी कोई हरकत नहीं करूँगा सब लोग मांफ कर दे | उनका ऐसा कहना था की अचानक से उस समाज  ,जगत के बहुत से  विद्वान् बुद्धिजीवी और आम लोग  निकल कर बाहर आ गये और लगे उन्हें माफ़ करने,  उनकी माफ़ी की सराहना करने और ये बताने की उन्होंने माफ़ी मांग कर कितना बड़ा काम किया है अब तो वो महान लोगो में शामिल हो गये सब ने मिल कर उन्हें माफ़ कर दिया | किन्तु वो बेचारे सब बिलकुल आश्चर्य में पड़ गये जिनको उन्होंने सारा जीवन व्यक्तिगत टिप्पणिया की उन्हें परेसान किया महिलाओ से अश्लील बाते की , वो सोच में पड़ गये की इस व्यक्ति ने अपराध तो हमारे खिलाफ किया है तो ये माफ़ी देने वाले ये कौन लोग है , माफ़ी मांगने वाले ने तो इनके खिलाफ कोई अपराध किया ही नहीं है तो ये माफ़ी क्यों दे रहे है और ये बात भी समझ नहीं आती है जब अपराध करने वाले ने कुछ व्यक्ति विशेष लोगो के खिलाफ परोक्ष और अपरोक्ष रूप से अपराध किया है तो उसे माफ़ी उनसे मांगनी चाहिए या पूरे उस समाज से | बेचारे इस सोच में अपने सर के बाल नोच रहे थे और सोच रहे थे की आज वही लोग उस अपराधी को माफ़ी दे रहे है जो कभी भी अपराध के होते समय उसका विरोध करने नहीं आये आज अचानक से एक अपराधी को माफ़ करने कैसे चले आये |
                                                           
                                                            
                                                                         अब मुद्दा क्या है,  नहीं वो व्यक्ति या उनका व्यवहार मुद्दा नहीं है ( ऐसे लोग तो ध्यान देने के लायक भी नहीं होते है ) मुद्दा है अपराध और अपराधी के प्रति समाज का व्यवहार | क्या अनेक अपराध करने के बाद व्यक्ति माफ़ी मांग ले तो उससे उसका अपराध कम हो जाता है या उस व्यक्ति की पीड़ा कम हो जाती है जो उसके अपराध से पीड़ित है , क्या ये समाज का सही न्याय है की उस अपराधी को माफ़ कर दे | मुझे तो ये बात भी हास्यापद लगती है की अपराध किसी के प्रति और माफ़ी किसी और से , जिसका पूरे मामले से सम्बन्ध ही नहीं है वो कौन होता है माफ़ करने वाला, न्याय देने वाला अधिकारी भी अपराधी का दोष सिद्ध होने पर अपराध और कानून के मुताबिक सजा देता है माफ़ी नहीं , माफ़ी यदि कोई दे सकता है मेरी नजर में तो वो बस और बस पीडित ही हो सकता है | किन्तु वहा ये भी देखा जाना चाहिए की अपराध की प्रकृति क्या है कही ऐसा तो नहीं की किया गया अपराध उस व्यक्ति विशेष के साथ ही पूरे समाज को भी प्रभावित कर रहा है क्योकि फिर ऐसी जगह पर पीड़ित भी माफ़ी देने के लायक नहीं होता है |  इस तरह अपराधी को माफ़ कर दिया जाये तो समाज में दूसरे भी ये सोच कर अपराध करने लगेगे, अपने स्वार्थो के कारण की ठीक है बाद में माफ़ी मांग लेंगे तो सब माफ़ कर देंगे अभी तो अपने स्वार्थो की पूर्ति कर लो,  जिसे जो कहना है जिसके साथ जो करना है कर लो , समाज में इस तरह का सन्देश जाना कभी भी ठीक नहीं है | सजा का कई मायने होते है पहला की अपराधी को उसके किये की सजा मिले , दूसरा पीड़ित को न्याय मिले और तीसरा  समाज में अन्य को भी ये चेतावनी मिले की कोई भी इस तरह की हरकत दुबारा न करे , किन्तु किसी को भी माफ़ी दे कर हम समाज में क्या संदेस दे रहे है खासकर उन लोगो को जो अपराधी प्रवित्ति के है जो बार बार कई तरह के सामाजिक अपराध करते रहते है |  इस तरह के लोगो का समाज के माफ़ कर देने वाले रेवैये से मन बढ़ता है | माफ़ी देने वाले क्या कभी एक बार भी ये सोचते है की वो किस अधिकार से किसी को मांफी दे रहे है, क्या कभी वो देखते है की जिस व्यक्ति को पीड़ा पहुंचाई गई उसका क्या कहना है जुर्म करने वाले के प्रति, उस पर क्या बीती होगी जब उसे भला बुरा या अश्लील बाते कही गई थी , क्या वाकई माफ़ी मांगने वाले का अपराध इतना छोटा और कम है की उसे बिना विचार के ही तुरंत माफ़ कर दिया जाये , शायद नहीं,  वो विद्वानजन और बुद्धिजीवि लोग ये सोचने की जहमत नहीं उठाते होंगे,  उनके हिसाब से जबानी मांफी मांग लेना और उसे माफ़ कर देना ही बड़ी बात है और सभी बड़े होने की होड़ में शामिल हो जाते है | 
                                                                    

                                                                                    ये मुद्दा जितना छोटा आप सोच रहे है उतना है नहीं , क्योकि जो समाज की सोच और रवैया होता है वही सोच उसके कानून में भी झलकता है | सब ने खबर पढ़ी होगी की राष्ट्रपति ने ( तकनीकि रूप शायद इसके पीछे केंद्रीय गृह मंत्रालय है )  एक दो नहीं कुल ३५ फांसी की सजा पाये अपराधियों की सजा को मांफ करके आजीवन कारावास में बदल दिया | ये पढ़ कर घोर निराश हुई कि इन माफ़ी पाने वालो में वो अपराधी भी शामिल है जिसने एक छोटी सी मासूम बच्ची के साथ बलात्कार  कर उसकी हत्या कर दी थी और सामूहिक हत्याकांड को अंजाम देने वाले भी माफ़ी पा गये है यहाँ तक की ५ साल पहले ही अपनी प्राकृतिक मौत पा चूका अपराधी भी माफ़ी पा गया ( ये एक चुक हो सकती है ) | सोचिये उन परिवारों का जो सालो तक हमारी पेचीदा और लम्बे समय तक चलने वाली क़ानूनी लड़ाई को लड़ने के बाद अपने अपराधी को सजा दिला पाये थे अब वो कैसा महसूस कर रहे होंगे ,निश्चित रूप से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे होंगे | उन्होंने अपराधी को सजा दिलाने के लिए तन मन और धन तीनो तरीके से बहुत कुछ सहा होगा तब कही जा कर उस अपराधी को सजा मिली होंगी किन्तु सरकार ने एक झटके में उन सभी के सारे संघर्ष पर पानी फेर दिया |  सरकारों को इस तरह के निर्णय लेने में जरा भी हिचक नहीं होती होगी क्योकि समाज का रवैया ये है की जब अपराधी अपने अपराध का प्रायश्चित करे उसकी माफ़ी मांगे तो उसे माफ़ कर देना चाहिए ( अब वो सारे लोग जो यहाँ वहा सामाजिक अपराधियों को अपनी तरफ से फटाफट माफ़ कर देते है इस पर सोचे की उन्होंने सही किया या गलत ) क्योकि माफ़ी मांगने वाला बड़ा होता है , महान होता है , उसे प्रायश्चित का सुधरने का मौका मिलना चाहिए आदि आदि आदि के ढेर सारे प्रवचन | सरकारों को पता है की समाज में उसके इन फैसलों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा कोई भी इनका विरोध नहीं करेगा, तो वो अपने सोच के हिसाब से जो चाहे निर्णय ले ले | अपनी सोच के हिसाब से इस  लिए कह रही हूँ क्योकि कानून के हिसाब से तो जो सजा उसे मिलनी चाहिए थी वो तो पहले ही उसे देश के सबसे बड़े न्यायाधीस ने दे दिया है ,  निश्चित रूप से सरकार का फैसला कानून की नजर से तो नहीं ही होता होगा ( जहा तक मेरी जानकारी है इसमे भी कोई क़ानूनी पक्ष है तो जानकर बताये  ) | सरकारे अपनी सोच के हिसाब से फैसले लेती होंगी और सरकार में बैठे लोग इस समाज से ही तो जाते है उनका फैसला भी समाज की सोच को ही दिखायेगा | यदि कोई समाज अपराध और अपराधियों के प्रति एक कड़ा रुख अपनाता है तो कभी भी सरकारे समाज की सोच के खिलाफ खासकर इस तरह के मामलों में नहीं जा सकती है | मै तो नीजि रूप से इस बात के भी खिलाफ हूँ की जब देश के सबसे बड़ी अदालत ने किसी व्यक्ति को उसके अपराध की देश के कानून के मुताबिक सजा दे दी है तो उसे कोई और माफ़ी दे , खासकर कानून से इतर जा कर, ( पता नहीं राष्ट्रपति से माफ़ी की अपील का कानून बना  ही क्यों है,  क्या उन्हें लगता है की इतना कानून का जानकर न्यायाधीश भी गलती कर सकता है या  अपराधियों को भी मानवीयता से देखना चाहिए , कम से कम फाँसी की सजा पाया अपराधी तो इस लायक नहीं ही होता है की उसके प्रति कोई मानवीयता दिखाई जाये |)   नतीजा क्या होगा की अब इस आधार पर उन सभी अपराधियों की हिम्मत बढ़ेगी जो इस तरह का अपराध कर चुके है और उनकी भी जो इस तरह के अपराध करने के बाद फायदे में रहेंगे ( अपने देश में संपत्ति, जाति, धर्म और यहाँ तक की इज्जत के नाम पर पूरे परिवार या कहे सामूहिक हत्याओ का इतिहास भी है और भविष्य में कई सम्भावनाये भी और महिलाओ के प्रति किये जा रहे अपराध की तो कोई गिनती है नहीं है  ) उनका तो मन इस तरह के माफियो से और भी बढेगा |  पर समाज और सरकारे इन बातो की परवाह नहीं करती है और न ही उन्हें उन मांफियो के परिणामो और पीडितो के दर्द से मतलब होता है वो अपनी मर्जी और अपने बेमतलब के तर्क से काम करती है |
                                                                               अब सवाल ये है की क्या समाज में सामाजिक,  व्यक्तिगत अपराध करने वालो को माफ़ ही नहीं किया जाये तो जवाब सीधा सा है की ये तो व्यक्ति की माफ़ी मांगने के तरीके से ही पता चला जाता है की उसकी असल मंसा क्या है खाकर सामाजिक अपराध करने वाले | जैसे उदहारण देती हूँ  जब अपराध किसी व्यक्ति के प्रति किया गया है नाम ले कर तब माफ़ी मंगाते समय व्यक्ति का नाम न ले कर केवल समाज से माफ़ी मांगी जाये तो शक होता है कि निश्चित रूप से अपराधी मांफी की जगह केवल समाज में अपना सम्मान पाने की इच्छा रखता है उसको कोई माफ़ी नहीं चाहिए और न ही वो अपने अपराध के प्रति जरा भी शर्मिंदा है और न उसे इस बात की जरा भी फ़िक्र है की उसके किये से उस व्यक्ति को कितनी पीड़ा पहुंची है | अपराधी सीधे समाज में उन लोगो से मांफी मांगता है जो उसे माफ़ कर देंगे, बड़ी आसानी से और उनकी माफ़ी पा कर अपराधी संतुष्ट भी हो जाये उसे जरा भी इस बात कि परवाह न हो कि उसे उन लोगो ने माफ़ किया की नहीं जिसके प्रति उसने अपराध किया है,जिन लोगो को उसने पीड़ा पहुंचाई है | तो ऐसे अपराधी मांफी के लायक नहीं होते है और उन्हें क्षमा कर हर तरह के सामाजिक अपराधो को बढ़ावा ही मिलता है समाज सुधरता नहीं है |