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September 11, 2019

सलेक्टिव आक्रोश और चुप्पी ------mangopeople

                                        तबरेज अंसारी की चोरी के इल्जाम में भीड़ द्वारा पीट कर हत्या कर देने के बाद से अब तक कितने लोग मॉब लीचिंग में मारे गए हैं , क्या इसकी कोई जानकारी हैं | उन सभी केस में कितने लोगों के खिलाफ  मामले दर्ज हुए हैं और कितने लोगों पर हत्या की धारा लगाई गई हैं क्या इसकी कोई जानकारी हैं | शायद ही ऐसी कोई जानकारी किसी के पास होगी , क्योकि तबरेज की मौत के बाद ना समाज में कोई हलचल इन ढेर सारी मौतों पर दिखी ना मिडिया ने इसे जोरशोर से उठाया ना मरने वालों को इन्साफ दिलाने में किसी की कोई रूचि जगी |
                                      अब अचानक से मिडिया और सोशल मिडिया का एक तबका फिर से मॉब लीचिंग पर जागृत हो गया क्यों की तबरेज की हत्या के आरोपियों से हत्या की धारा ही हटा ली गई हैं | क्या ये जागृत हुए लोग जवाब देंगे जब समाज में बच्चा चोरी , जादूटोना आदि  की अफवाहों में ना जाने कितने  लोग इस बीच मार दिए गयें उसी भीड़ द्वारा , तब उनकी नींद क्यों नहीं खुली जुबान क्यों बंद थे |
                                       जब तक हम समस्या की जड़ को समझ उस पर रोक  नहीं लगायेंगे  और हिन्दू मुस्लिम करके उसका रुख किसी और तरफ   मोड़ते रहेंगे ,  तब तक ये सब ऐसे  ही चलता रहेगा | चाहे पहलू खान का मामला हो या तबरेज का ये बच्चा चोरी और जादूटोना के शक में  मारे गए लोगों का |  समस्या हैं आम लोगों द्वारा कानून को अपने हाथ में लेना और खुद ही इंसाफ करने की सोच | खतरनाक हैं हर कही गई बातों को अफवाहों को तुरंत सच मान लेना और उस पर हिंसक प्रतिक्रिया देना | समस्या भीड़ की हिंसक सोच हैं |
                                     यहाँ पर जरुरत हैं  समाज की सोच को बदलने की , अफवाहों पर लगाम लगाने की , लोगों में कानून के प्रति भरोषा जगाने की और हिंसा करने पर कड़ी सजा मिलेगी का डर बैठने की | लेकिन देश की हालत ये हैं कि बच्चा बच्चा किसी विचारधारा और राजनैतिक सोच की जंजीर में ऐसा जकड़ा हुआ हैं कि उसे हर मामले में धर्म ,  जाति और राजनैतिक दल से सिवा कुछ दिखता ही नहीं हैं | बहुत सोची समझी रणनीति के तहत मामलों को उठाया जाता हैं ( हर तरफ से ) और कुछ मामलों पर चुप्पी साध ली जाती हैं |
                                   किसी को इंसाफ दिलाना , समाज में व्यवस्था ठीक रखना कानून का पालन जैसा किसी की कोई सोच नहीं हैं | ऐसे मामलों में जिसका भी मुंह खुलता हैं एक तय सोच , एक पूर्वाग्रह  के साथ खुलता हैं | मॉब लीचिंग की सभी घटनाओं को एक बड़ी समस्या की तरह देखा जाता और सभी पर रोक के लिए मांग होती | समाज खुल कर सामने आता तो सरकार पर भी दबाव होता और शायद न्यायपालिका भी खुद आगे आती इसके लिए , लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ |
                                  फिर अब  आप पहलू और तबरेज पर रोते रहिये चीखते रहिये , मार्च निकालते रहिये , कुछ नहीं होने वाला हैं | क्योकि उनके आलावा इस हिंसा की भीड़ के शिकार हुए उन  लोगों की आत्माएं आपको धिक्कार रही होंगी , जिनके लिए आपने एक लाइन भी बोलने लिखने की जरुरत नहीं समझी ,  जिनके जीवन की आपने कोई कीमत नहीं समझी | असल में आज ज्यादातर लोग कुछ लोगों की मौत का प्रयोग अपनी सोच और विचारधारा को आगे रखने वाले मौका परास्त लोग हैं  | 



June 08, 2019

क्या किसी को हालात बदलने हैं -------mangopeople

                                          रेप करने के बाद उसने उसके योनि में बारबार चाकू डाल कर फाड़ डाला और उसकी दोनों अतड़ियां तक खींच ली | फिर चाकू से  पेट फ़ाड़ उसकी दोनों किडनियां तक निकाल ली | पूरी पोस्ट मुझसे ना पढ़ी गई  , इतने विस्तार से पूरी घटना को जितना वीभत्स बना सकते हैं बना कर  वर्णन किया गया था जैसे सबकुछ उनके सामने हुआ हो | अपनी कल्पना से ऐसा वीभत्स वर्णन करने वाले सवाल करते हैं समाज में लोग इतने वीभत्स कैसे हो सकते हैं |
                                       एक पत्रकार  पोस्टमार्टम की रिपोर्ट ट्वीट कर देंती हैं | जिसमे लिखा था शरीर से कौन कौन से अंग गायब थे , जिसके आधार पर ही इस तरह के काल्पनिक वीभत्स वर्णन किया गया था | लेकिन पत्रकार ये तथ्य नहीं बताती कि शरीर सड़ चूका था और कुत्ते उसे नोच कर खा रहें थे | 
                                      कुछ अपनी विचारधारा के साथ सामने हैं | उन्हें अपराधी और इन्साफ में कम इस बात से कष्ट ज्यादा हैं कि कितने प्रगतिशील लोगों ने किसी और अपराध पर कुछ कहा था लेकिन अब चुप हैं | उनमे से कुछ को इसपे समस्या हैं कि तब जिन लोगों ने  कड़े शब्दों में विरोध किया था आज  उनके  शब्द उन्हें उतने कड़े नहीं लग रहें हैं  | विरोध के लिए दुसरो पर सलेक्टिव होने का आरोप लगाने वाले खुद सलेक्टिव हैं | तब वो चुप थे आज कोई और चुप हैं तो उन्हें परेशानी हैं | 
                                     कुछ को पीड़ित से कोई मतलब नहीं हैं उनके लिए अपराधी का धर्म बहुत हैं उसके पुरे धर्म को गाली देने के लिए , अपना एजेंडा प्रचारित करने के लिए | कुछ उससे भी महान हैं वो पीड़ित का सरनेम लिख इसमें जाति  का एंगल भी ले आतें हैं | दलित होती तो लोग कितना शोर करते ऊँची जाति से हैं तो लोग चुप हैं | कुछ अपनी  वही घिसी पीटी राग फिर से गाना शुरू कर दिए कि इसके लिए नग्नता जिम्मेदार हैं विकास जिम्मेदार हैं | 
                                    कुछ के लिए लगता हैं किसी बच्ची को मार देना एक बहुत ही मामूली अपराध हैं इसलिए अपराध को बड़ा बनाने के लिए उसके साथ रेप जुड़ना जरुरी है | रेप ना जुड़ा तो अपराध संवेदनशील सहानभूति के लायक नहीं लगेगा | किसी मासूम बच्ची को निर्मम तरीके से मामूली से पैसो के झगड़े के लिए मार देना , ये भी कोई इन्साफ मांगने आंदोलन करने और विरोध प्रदर्शन के लायक का अपराध हुआ | उसके साथ रेप, वीभत्स आदि आदि ना जुड़ा तो मामले में दम नहीं हैं |  भले पोस्टमार्टम में ये नहीं निकल पाया क्योकि शरीर में जाँच के लिए अंग ही पुरे नहीं थे ठीक हालत में नहीं थे  | पुलिस की जाँच के पहले हम बतायेंगे कि अपराध क्या और कैसे हुआ हैं |
कुछ कल तक महिलाओं लड़कियों  को लेकर बेतुके पोस्ट लिख अपनी भड़ास निकाल रहें थे आज वो वीर रस में समाज में महिलाओं की स्थिति पर पोस्ट लिख रहें हैं | 
                                   कुछ मजबूरी में देर से बोल रहें हैं कही उन्हें चुप रहने के लिए आरोपित ना कर दिया जाए | कुछ को इस बात की चिंता ज्यादा हैं कि मामले को सांप्रदायिक रंग क्यों दिया जा रहा हैं | इससे हमारी धर्मनिरपेक्ष समाज का माहौल ख़राब करने का प्रयास किया जा रहा हैं | 
कुछ को चिंता हैं इस विरोध के चक्कर में समाज हिंसक हो रहा हैं | लोगों का विरोध ही समाज का माहौल ख़राब कर  रहा हैं | 
                                   सबके अपना अपना एजेंडा हैं जिसके लिए सब काम कर रहें हैं | इन्साफ के लिए , समाज में , व्यवस्था में बदलाव  के लिए कोई कुछ भी अपनी तरफ से ना कर रहा हैं ना करना चाहता हैं और ना करेगा |