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July 02, 2022

अंधविश्वास या वैज्ञानिक दृष्टिकोण चुनाव आपका है




जब हमें बिटिया होने वाली थी तो अपने देशी मान्यता के अनुसार हमारी माता जी ने पहले ही पता करने का प्रयास किया कि बेटा होगा या बेटी | इसमें होता ये हैं कि हर  दिवाली में हमारे यहाँ काजल पारा जाता हैं | इसमें पूजा करने के बाद दीया  जला कर उसके ऊपर मिटटी का घंटी तिरछा करके  रख दिया  जाता हैं | घंटी की छत पर ढेर साला कालिख या काजल जमा हो जाता हैं फिर उसे घर में सभी सदस्यों को हर दिवाली लगाया जाता हैं | 


जब घर में बच्चे होने वाले हो तो घंटी को हटाया नहीं जाता , रात भर जलते दीये के साथ छोड़ दिया जाता हैं  | नवंबर दिवाली पर  किया गया टोटका मुझे दिखाने के लिए अप्रैल तक  रखा गया था और बेटी होने के बाद मुझे दिखाया गया की देखो कैसे हमें पहले ही पता था कि बेटी होने वाली हैं | 


मुझे भी बड़ी उत्सुकता हुयी की देखूं ऐसा क्या निशानी हैं कि पता चले की बेटी ही होगी | उस घंटी  को देखते ही मेरा  मुंह खुला का खुला रह गया और आँखे फटी की फटी रह गयी |   उस घंटी में अच्छे खासे मोटे  कालिख की परत  से वजाइना , स्त्री योनी  बना था | मुझे खुद अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि वास्तव में वही बना हैं जो मुझे दिख रहा हैं | सोचने लगी ये कैसे संभव हैं , क्या वजह हैं की काजल ऐसे जमा हुआ  | 


पूरा दिन उसे बार बार देखने और सोचने  के बाद समझ आया की ये कैसे बना होगा | दीये की लौ के ऊपरी भाग पर  उंगली रखेंगे तो लौ वहां से दो भागो में बट जाएगा बस यही चीज हुआ था | हुआ ये होगा कि जब दीये पर घंटी रखी गयी तो उसकी लौ घंटी   की छत से टकरा कर दो भागो में बट कर रातभर जलती रही  होगी  और काजल घंटी की छत पर जमा होने की जगह दो अलग दिशा में जमा होने लगा दो पहाड़ नुमा ढलान के साथ | चुकी बीच में लौ थी तो बीच का हिस्सा एक लकीर जैसा एकदम साफ़ था | 


जैसे ही मैंने ये सोचा अचानक से वो वजाइना सा दिखना  बंद हो गया ,  बस काजल के दो पहाड़नुमा ढेर दिखने लगे |  पहले उसका वजाइना सा दिखना भी एक तरह से पहले से बना माइंडसेट , पूर्वाग्रह जैसा था | उसे दिखाने से पहले मुझे कहा गया कि एक ऐसी चीज देखने वाली हूँ जिससे लड़की और लड़का होने का पता चलेगा | अब सोचिये इस माइंडसेट के साथ हम कुछ देखेंगे तो चीजे अपने हिसाब से ही दिखेंगी | जैसे आम चूसना सामान्य शब्द हैं लेकिन कोई बोल दे ये शब्द अश्लील हैं तो हमें वही समझ आने लगता हैं |


घंटी में क्या बनेगा काजल कैसे जमा होगा ये सब कुछ इस बात पर निर्भर हैं कि दीया और घंटी  कितना बड़ा था , उसमे तेल कितना था , बत्ती कितनी बड़ी थी  , दीये पर  घंटी कैसे रखा गया  था , जैसे कुछ लोग जलते दीये के चारो तरफ कुछ  दीया उलटा कर रखते हैं और उसके सहारे घंटी को और ऊँचा रखते हैं | इसतरह ढेर साला काजल जमा कर उसमे घी या तेल मिला सालभर के लिए काजल जमा कर लेते थे  | 

सामने दिख रही चीजों को लेकर सवाल करेंगे तो जवाब खुद बा खुद मिलेगा लेकिन अगर आँखों और दिमाग  पर अन्धविश्वास का पर्दा पड़ा हो तो हम सवाल करना छोड़ कर जो दिख रहा हैं उसी पर सहज विश्वास करने लगते हैं |


  वैसे मुझे भी पता था कि मुझे बेटी ही होगी वो भी बिलकुल वैज्ञानिक तरीके से | हमने एक बड़ा वैज्ञानिक सर्वे पढ़ा था जिसके अनुसार खूबसूरत स्त्रियों को पहले बेटी ही होती हैं | तो हमें तो बेटी होते अपना पता चल गया बाकी  जिनको पहले बेटे हुए हैं वो अपनी खूबसूरती को  शक की  नजर से देखें 😉










   

June 20, 2022

आस्था की परख

 

शेल्डन सिर्फ नौ साल में ही हाई स्कूल में पढ़ने वाला  तेज बुद्धि का  विशेष बच्चा हैं |  विज्ञानं पढ़ने वाला शेल्डन ईश्वर में विश्वास नहीं रखता लेकिन उसकी माँ एक बहुत ही धार्मिक महिला हैं | जब  उनके करीबी की सोलह साल की बेटी की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती हैं तो उनका विश्वास ईश्वर से कुछ हिल जाता हैं | 


पहले वो घर में ही प्रार्थन की जगह बना और ज्यादा ईश्वर की आराधना में लग जाती हैं ताकि ईश्वर के प्रति उनक आस्था और मजबूत हो लेकिन कुछ काम नहीं बनता | वो इस मौत को गॉड प्लान अर्थात ईश्वर की मर्जी और लीला कहती हैं लेकिन खुद उन्हें उस बात पर यकीन नहीं होता हैं | उसके बाद जब उस दुःखी माँ को सांत्वना का कार्ड भेजते रिवाज के अनुसार ये लिखना चाहती हैं कि चिंता न करो कि मृत आत्मा यहाँ से बेहतर जगह अर्थात ईश्वर के पास हैं तो उनके हाथ कांप जाते हैं और वो ये नहीं लिख पाती |  कहतीं हैं भला एक बच्चे के लिए अपने माँ बाप के साथ पास  से बेहतर जगह और कौन सी हो सकती हैं , ईश्वर की जगह भी नहीं  | 


ये टूटती आस्था उन्हें तोड़ने लगती हैं और वो बहुत दुःखी हो जाती हैं और हर तरह की प्रार्थना छोड़ देतीं हैं | शेल्डन के लिए उसकी माँ ही दुनियां में सब कुछ हैं क्योकि उसके तेज बुद्धि उसे बाकियों का दुश्मन बना चुकी हैं | उसे माँ का दुःख देखा नहीं जाता और उन्हें सांत्वना देने के लिए उनके ईश्वर में विश्वास को फिर से बनाने का प्रयास करता हैं | 


कहता हैं आपने कभी सोचा हैं अगर इस यूनिवर्स में ग्रेविटी अगर एक प्रतिशत भी कम होती तो हम अंतरिक्ष में बिखरे कण से ज्यादा कुछ नहीं होते | यदि ग्रेवेटी एक प्रतिशत ज्यादा होती तो दुनिया एक ठोस पत्थर होती जीवन नहीं | सब कुछ इतना सही और परफेक्ट हैं कि लगता हैं जैसे किसी रचनाकार ने ही इसको बनाया हैं | ईश्वर में आस्थाहीन अपने बच्चे के इस प्रयास से माँ अपने प्रति उसके  प्यार की गहराई को  महसूस कर आराम पाती हैं | 


ईश्वर में आस्थावान कई बार जीवन में घट रही घटनाओ के कारण   ईश्वर के प्रति अपने विश्वास को टटोलता हैं या उससे दूर होता हैं लेकिन अंत में उसे  नशे की तरह वापस अपना लेता हैं क्योकि उसके बाहर उसे राहत नहीं मिलती |  ईश्वर में  आस्था सुविधानुसार होती हैं | खुद झूठ बोल रहें , पाप कर रहें , लोगों को धोखा दे रहें , लोगों के साथ गलत कर रहें हैं तो कण कण में रहने वाला सबके कर्मो का हिसाब रखने वाला , सबको हर समय देखने वाला ईश्वर गायब हो जाता हैं | नरक ,जहन्नुम का द्वारा , ईश्वर या क़यामत के दिन की सजा ,अगला जनम ख़राब होना सब भूल जाता हैं | 


क्योकि ईश्वर आस्थावानों के दिमाग में होता हैं जब अपना लाभ , फायदा , धन लालच हो तो दिमाग तुरंत ईश्वर वाला कमरा बंद कर देता हैं और बिना डर लोग हर तरह का पाप करते हैं | बाकि सामान्य दिनों में ईश्वर फिर सबको सब जगह दिखने लगते हैं | सोचिये कि सभी आस्थावान वास्तव में अपने अपने ईश्वर में पूरा विश्वास रखते तो ये दुनिया स्वर्ग से कम ना होती  पाप , गलत , अपराध  से मुक्त होती | इस दुनियां में इतना दुःख ,  दर्द , अभाव , अपराध  इसलिए ही हैं क्योकि लोगों को ईश्वर में ठीक से पक्का विश्वास नहीं हैं | 


वैसे जाते जाते शेल्डन के उस तर्क का भी जवाब दे दूँ की दुनियां को जीवन जीने लायक सही परफेक्ट बनने में लाखो साल लगे हैं ये कुछ दिनों का काम नहीं हैं  | बिंग बैंग से जल और वनस्पति  आने तक , पहले अमीबा से डायनासोर आने तक और जानवर से इंसान बनने का सफर लाखो करोड़ो सालों का हैं | यदि कोई रचनाकार होता तो ये दुनिया छः , आठ , दस दिन में वैसे ही बनती जैसा कि विभिन्न धार्मिक पुरस्तकों में वर्णित हैं |