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June 17, 2011

अभी हम सभी ने एक हिंदूवादी बाबा को निपटाया है अब भ्रष्ट अन्ना हजारे की बारी है - - - - - - - mangopeople



                                                               लीजिये अन्ना हजारे ने फिर अनशन की धमकी दे कर अपनी राजनीतिक नौटंकी शुरू कर दी | अभी हम सभी ने एक भ्रष्ट, राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले गेरुवा वस्त्रधारी हिंदूवादी बाबा को निपटाया है अब भ्रष्ट अन्ना हजारे की बारी है | आप सभी को आश्चर्य क्यों हो रहा है ,क्या आप को नहीं पता की अन्ना हजारे भी भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गये थे,  बाकायदा उसकी जाँच हुई थी और वो दोषी भी पाये गए थे, वो अलग बात है अपनी ऊँची पहुँच और नाम के चलते वो बच गए | कुछ साल पहले उन्होंने महाराष्ट्र के दो भ्रष्ट कांग्रेसी मंत्रियो के खिलाफ अनशन किया था वहा की सरकार को मजबूर हो कर मंत्रियो को हटाना पड़ा हटाये गए माननीय मंत्री जी ने अन्ना पर अपने ट्रस्ट के पैसे का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया बाकायदा माननीय पूर्व मंत्री जी के आरोप पर एक जाँच बैठाई गई और पता चला अन्ना के जन्मदिवस पर ट्रस्ट के दो लाख रुपये खर्च किये गए | ये भ्रष्टाचार नहीं है तो क्या है क्या लोगो ने ट्रस्ट को पैसे अन्ना के जन्मदिवस के लिए दिया था नहीं, उन्होंने जनता के सेवा के लिए मिले पैसे को अपने निजी कार्यो के लिए खर्चा किया था ( अब उन्होंने किया या उनके लोगो ने किया बात तो एक ही है ना, उन्होंने मना तो नहीं किया तो वो भी इस भ्रष्टाचार में उतने ही दोषी है जितने की कोई अन्य  ) | भ्रष्टाचार तो भ्रष्टाचार होता है चाहे वो हजारो करोड़ का हो या कुछ हजार का ही एक भ्रष्टाचारी को कोई हक़ नहीं बनता की वो किसी दुसरे भ्रष्टाचारी पर किसी तरह का आरोप लगाये उस पर उंगली उठाये या उसे भ्रष्ट तक कहे | जो खुद ये काम कर चूका है हम सभी महान ईमानदार आम जनता उस व्यक्ति का कैसे साथ दे सकते है | इसलिए जरुरी है की हम जैसे उच्च कोटि के ईमानदार आम जनता का नेता बिल्कुल उच्च कोटि का ईमानदार हो | क्योकि गाँधी जी ने कहा था की एक सच्ची और अच्छी चीज को पाने के लिए प्रयोग किये जा रहे साधन भी पवित्र होने चाहिए | क्या आप सभी को गाँधी जी की ये बात याद नहीं है, क्यों नहीं याद है, जब गाँधी जी याद है तो उनके विचार क्यों नहीं याद है शायद इसलिए याद नहीं है की हम सभी भेड़ चाल वाले भारतीय व्यक्ति पूजा में विश्वास करते है हम व्यक्ति का समर्थन करते है व्यक्ति का विरोध करते है, उसने क्या कहा उसके क्या विचार है उससे हमें मतलब नहीं है हम तो उसे सुनने की भी जरुरत नहीं समझते है, तो याद क्या खाक रखेंगे तभी तो गाँधी जी याद है किन्तु उन्होंने कहा क्या था गाँधी जी के विचार क्या थे गांधीवाद क्या था  ये हम सब भूल चुके है | हमें बाबा याद है हमें अन्ना याद है किन्तु वो दोनों कह क्या रहे है वो हममे से किसी को भी याद नहीं है व्यक्ति के आगे मुद्दे गुम हो गये | कोई बाबा का विरोध कर रहा है तो कोई उसका समर्थन कर रहा है हर जगह बस बाबा ही छाये हुए है पर उनके उठाये मुद्दे गुम हो गये है | 
                                   अब अँधा क्या चाहे दो आँखे और सरकार क्या चाहे भ्रष्टाचार के मुद्दे हवा हो जाये और लीजिये जी वो हवा हो गये | अब सरकार से कोई नहीं पूछ रहा है कि आप ने तो बाबा की सारी मांगे मान ली थी तो जरा बतायेंगे की उस पर कमेटिया बनाने के अलावा क्या जमीनी काम चल रहा है क्या बतायेंगे की कमेटिया कब तक अपना काम कर लेंगी, कब तक सरकार को अपनी रिपोर्ट दे देंगी, क्या उनका कोई समय सीमा तय किया है | चलिए वो जाने दीजिये विदेश से जो धन आएगा वो तो आएगा पर देश के अन्दर ही जो कला धन छुपा है उसका क्या हुआ उसको बाहर लाने के लिया आप क्या कर रहे है | सालो पहले आप लोगो ने खूब स्कीम लाई थी इतने प्रतिशत सरकार को दो और अपना सारा कला सफ़ेद में बदला लो | बहुतो ने अपना काला सफ़ेद किया था तब से तो आप को पता होगा ही की किस किस के पास कितना काला है उसके बाद आप लोगो ने उस पर रोक लगाने के लिए क्या कार्यवाही की है | चलिए वो भी छोडिये  कोर्ट ने आप की गर्दन पकड़ कर जब झकझोरा तब जा कर आप ने हसन अली को गिरफ्तार किया अब वो कई राज आप को बता चूका है की उसके पास किस किस का पैसा था सुना था की उसमे दो पूर्व कांग्रेसी मुख्यमन्त्रियो और वर्तमान केन्द्रीय मंत्रियो का पैसा था उनके खिलाफ आप क्या कर रहे है ये सवाल तो आम जनता क्या देश की अदालत भी आप से पूछ पूछ कर परेशान हो चुकी है आप क्या कर रहे है | २ जी में जो सरकारी पैसा डूब गया उसको फिर से पाने के लिए क्या कर रहे है उन कंपनियों पर क्या कार्यवाही कर रहे है जो असल में मंत्रियो द्वारा फर्जी बना कर सारा खेल खेला गया , उन बड़ी कंपनियों पर क्या कार्यवाही कर रहे है जो इन सरे खेल में शामिल थी | इस केस में जो की आप ने एक और विरोधी सांसद के और कोर्ट के दखल के बाद मज़बूरी में कार्यवाही के आलावा दुसरे लोगो के नाम आ रहे है उनके खिलाफ आप क्या करने वाले है आदि आदि आदि सवाल तो कई है  किन्तु आज कोई भी ये सवाल सरकार से नहीं पूछ रहा है क्योकि सरकार ने ऐसे हवा चलाई की ये सारे सवाल हवा में गुम हो गये |
                                                सरकार ने पहले हम सभी को बाबा के कपडे का रंग दिखाया ( वैसे समझ नहीं आता की जब एक दो नहीं तीन तीन केन्द्रीय मंत्री हवाई अड्डे पर बाबा की अगवानी में लगे थे तब क्या उन्हें बाबा के कपड़ो का रंग नहीं दिखाई दे रहा था ) अब वो बता रही है की आन्ना के सफ़ेद कपड़ो के नीचे भी वही गेरुआ कपडे है जिससे हम सभी को डरना चाहिए क्योकि गेरुआ रंग आम जनता के लिए भारत की राजनीति के लिए बड़ा खतरनाक है | पहले उसने बाबा के कपड़ो का रंग दिखा कर उनके मुद्दे को हवा में गुम कर दिया अब वही चाल वो आन्ना के साथ भी चल रही है | और हम व्यक्ति पूजक आम जनता हम तो व्यक्ति के पीछे भागते है हमें तो मुद्दों से कभी ना मतलब था और ना रहेगा हम सदा से व्यक्ति पूजक रहे है और रहेंगे जब तक हमें व्यक्ति अच्छा लगेगा हम उसकी हर बात को कान बंद कर हा में हा मिलाते रहेंगे जिस दिन व्यक्ति हमें ख़राब लगने लगेगा उस दिन हम उसकी अच्छी से अच्छी बात को भी नकारते चलेंगे और इस बात को सरकारे भी खूब जानती है | तभी तो देखिये सरकार के मुंह से जब भी निकालता है तो बाबा या अन्ना ही निकालता है उन्होंने जो सवाल उठाये थे उस बारे में सरकार की मुंह कभी नहीं खुलता है | फिर उसे दिग्गी राजा ने थोड़े काटा है की वो अपने मन से ही इन विषयों पर कुछ बोले जब आम जनता , महान भारितीय बुद्धिजीवी वर्ग और हमारा तथाकथित लोकतंत्र का चौथा खम्बा मिडिया और अपने आप को जबरजस्ती लोकतंत्र का पांचवा खंबा ?? बनाने का प्रयास करने वाला स्वघोषित विद्वान ?? ब्लोगर इस बारे में कुछ नहीं कह रहे है कोई सवाल नहीं कर रहे है तो उसे क्या पड़ी है कुछ भी कहने की | सभी यहाँ अपने निजी विचारो, संकुचित सोच को पोषित करने उसे बढ़ाने सभी से उसे मनवाने और सबसे सही और सभी का भला सोचने वाला साबित करने में लगे है ( मै भी इनमे शामिल हूँ मै कोई दुसरे ग्रह से थोड़े आई हूँ ) | असल में सभी अपने राजनीतिक सोच की खाल से बाहर आने को तैयार नहीं है सभी का अपना ही विचार उत्तम लग रहा है | किसी को तो ये सारा आन्दोलन ही लोकतंत्र पर हमला लग रहा है तो किसी को कांग्रेस विरोधियो बजापा की राजनीतिक साजिस लग रहा है | सही भी है ६० साल से ऊपर चिर निद्रा में सोये हुए हम आम जनता ये कैसे बर्दास्त करे की कोई बेवजह हमारे नीद में खलल डाले हम अपने घरो में सोफे पे पसर कर भ्रष्टाचार पर बकर बकर तो कर सकते है पर जब सड़क पर आ कर कुछ करना हो तो हम हर आन्दोलन में दुनिया जहान के मीन मेख निकाल कर बड़े आराम से इससे बचना चाहते है, हम क्रांति तो चाहते है बदलाव तो चाहते है पर वो सब बस हमारे आराम से बैठे बैठे बकर बकर बकने से आ जाये तो क्या बात है | हा जब बदलाव आ जाये और उसका क्रेडिट लेना होगा तो हम सब माला पहनने के लिए जमीन तक अपना सर और कमर झुकाने के लिए तैयार मिलेंगे | तो चलिए हमारी बकर बकर ख़त्म हुई कुछ आप के मन में हो तो यहाँ बक कर मन हल्का कर लीजिये मेरी तरह , बाकि हम इससे ज्यादा ना तो कर सकते है और ना ही करना चाहते है |