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August 11, 2022

पाकेटमनी ,बचत खर्च

तीन साल पहले जब बिटिया सातवीं में गयीं तो पॉकेट मनी की मांग रख दी , मांग तुरंत ही मान ली गयी क्योकि हम लोगो को भी सातवीं में ही मिलना शुरू हुआ था | हमने पूछा कितना चाहिए तो बोलती हैं डॉली दीदी ( उनसे बस दो साल बड़ी सहेली ) को सौ रूपये हफ्ते का मिलता  हैं , मैं उससे छोटी हूँ तो मुझे पचास रूपये हफ्ते का दे दो | इतना कम पैसा सुन मुझे हँसी आ गयी फिर हमने कहा चलो बढियाँ हैं पैसे को लेकर ज्यादा लालची नहीं हैं | अभी शुरुआत हैं पहले देखती हूँ कि क्या कैसे और किस चीज   पर पैसे खर्च कर रही हैं फिर बढ़ा दूंगी या जरुरत पर दे दूंगी | 


इस हिदायत के साथ पैसे दिया गया कि  उनके पैसे खर्च पर नजर होगी तो सोच समझ कर खर्च करें | जल्द ही पता चल गया कि वो भी बिलकुल हमारी तरह ही फिजूल खर्च नहीं करतीं , खाने पीने पर खर्च भी करतीं तो मुझसे पूछने/बताने  का भी काम करती |  

 फिर आया फ्रेंडशिप डे ,  दोस्तों ने प्लान बनाया  स्टारबग चलते हैं |  हमें बताने लगी  जगह बहुत महँगी हैं मम्मी एक कॉफी भी तीन सौ की मिलती हैं इतने पैसे कॉफी पर कौन खर्च करेगा मैंने मना  कर दिया , बोला  कहीं और चलो | हमारी तो आँखे ही भर आयी ये सुन्दर वचन उनके मुख से  सुन कर , हमने मन ही मन उनकी बल्लैया ली |  अंत में एक मॉल के मैक्डी में गयी , जेब खर्च के बस सौ रुपये बचे थे हमने अपनी तरफ से और पैसे दे दिए उन्हें | जिंदगी में पहली बार दोस्तों के साथ अकेले ( मैं उसी मॉल में ऊपर शॉपिंग कर रही थी ) मस्ती करके आयी | 

आते ही बोलती हैं अगले महीने पैसे मत देना,  तुमने अभी एक्स्ट्रा जो दिए हैं उसे काट लो | सुन कर अच्छा लगा पैसे के हिसाब किताब में बिलकुल  क्लियर हैं | फिर लगा बढियाँ मौका हैं उन्हें जीवन में आगे के लिए पैसे को मैनेज करना सिखाने का | हमने कहा ये सही तरीका नहीं हैं कि किसी एक महीने में ज्यादा पैसे खर्च कर लो और अगली बार बिलकुल खाली हाथ रहों | 

ऐसा करती हूँ हर हफ्ते सिर्फ दस रूपये कम देतीं हूँ कुछ पैसे तुम्हे मिलेंगे भी और जो एक्स्ट्रा पैसे लिए हैं वो बराबर भी हो जायेंगे | उस दिन उन्हें लोन , जरुरत , ईएमआई और आगे के लिए बचत आदि सबका ज्ञान दे दिया |  अगले हफ्ते पूरे  पैसे दे दिए ये बोल कर कि पहली बार हैं तो छोडो जाने दो आगे से ध्यान रखना | सोचा देखतीं हूँ कि ये पैसे आगे की प्लानिंग करके बचाती हैं या मम्मी  से हर जरुरत पर लोन/एडवांस  लेने  का सोचती हैं | 


लेकिन बढियाँ प्लानिंग इन्होने कि जिस महीने मित्रो का जन्मदिन होता तो तोहफ़ों के लिए पहले ही पैसे बचा लेती | हमने भी शुक्र मनाया कि चलों पैसे के मामले में मम्मी जैसी हैं खर्च और बचत दोनों का बराबर संतुलन रख रही हैं , फिजूल खर्च नहीं हैं एक दिन मैं कंजूस बना ही दूंगी  | 

फिर हमारे जीवन में भी वो महान दिन आ ही गया , जो हर माँ बाप के जीवन  में एक दिन आता ही  हैं जब बच्चे कमाने लगते हैं उनके हाथ में चार पैसे आतें हैं | एक दिन  उन्होंने कहा तुम ये चीज नहीं दिलाओगी तो मत दिलाओ मेरे पास अपने पैसे हैं मैं खुद खरीद लुंगी | समझ आया पैसा बड़ो बड़ो का नहीं छोटो छोटो का भी दिमाग ख़राब कर सकता हैं | फिर भी कहा ठीक हैं ये भी ,  अपने पैसो पर अपना अधिकार ऐसे ही जताना चाहिए लड़कियों को वरना कितने ही घरों में देखा हैं लड़कियां कमाती तो हैं लेकिन उनके ही पैसों पर उनका उस तरह अधिकार नहीं होता जैसे किसी लडके का | 

#मम्मीगिरि 

December 14, 2019

भूख और खाने का कदर --------mangopeople



                                 बिटिया जन्म लेने के पहले ही  खाने को लेकर नखरे बाज थी | दो दो बार उन्होंने माँ के पेट में खाना  पीना छोड़ अपना ग्रोथ रोक लिया था , मजबूर हो कर उन्हें समय से पहले बाहर लाना पड़ा था  | जन्म के बाद भी ये जारी रहा हम सहते रहे हर तरह का मान मनौवल करते रहें | नतीजा हमेशा अपने उम्र से उनका वजन बहुत कम होता |

                                 जब कुछ बड़ी  हुई तो जरुरी लगा कि इन्हे समझाया जाए कि खाने का  महत्व क्या हैं और भूखे होने के कष्ट कैसा होता हैं |  तो उन्हें धमकी दी जाती कि खाने से मना करोगी तो खाना ही नहीं दिया जायेगा | कई बार धमकी देती लेकिन फिर मन नहीं मानता कि कैसे उसे भूखा रखूं | खासकर स्कूल से जब आतीं तो लगता सुबह की भूखी हैं टिफिन बॉक्स भी वैसे ही वापस आ गया हैं अब कैसे खाना खिलाने में देर कर सकती हूँ |

                               फिर होता ये हैं कि दो चार बार धमकी देने के बाद बच्चे समझ जाते हैं कि मम्मी खाना तो दे ही देगी या खिला देगी उसकी सुनने की जरुरत नहीं हैं |  फिर वो ऐसी धमकियों को भाव नहीं देते | लेकिन मैं थी तो उनकी अम्मा ही उन्हें समझाने  के लिए उनके  पापा जी से मिली भगत किया गया |
पापा जी को बता दिया गया कि किसी दिन मैंने गुस्से में उसे खाना  नहीं दिया तो ये तुम्हारी ड्यूटी हैं कि तुम कुछ देर बाद उसे समझाओगे , मुझे सॉरी बोलवाओगे और हर हाल में उसे खाना खिलाने के बाद ही सुलाओगे |  बिना खाये वो सो गई तो समझना तुम्हे भी खाना नहीं मिलेगा | उसे समझना चाहिए कि मम्मी सच में ऐसा कर सकती हैं | दो तीन बार में ही कुछ घंटों की भूख ने उन्हें भूख के कष्टों को समझा दिया |

                              लेकिन खाने की कदर करना अभी बाकी था | एक दिन उन्हें स्कूल से लेकर आ रही थी सिग्नल पर एक भिखारी बच्चा आया और कार का शीशा नॉक कर खाना मांगने लगा | बच्चे की हालत ठीक नहीं थी म   मैंने बिटिया से कहा तुम्हारा टिफिन बॉक्स में खाना बचा होगा दो इसे दे देतीं हूँ | पहली बार उनका ध्यान भिखारियों पर गया था और वो पूछने लगी कोई बच्चा इस तरह सड़क पर मुझसे खाना क्यों मांग रहा हैं |

                             घर आ कर उन्हें अच्छे से बताया गया कि कितने लोगों को दुनिया में  खाना नहीं मिलता वो भूखे सोते हैं  और तुम खाना छोड़ देती हो फेक देती हो | मुझे उम्मीद नहीं थी कि वो इस चीज को बहुत अच्छे से एक बार में ही समझ जाएँगी , लेकिन वो समझ गई |

                            वो दिन हैं और आज को दिन ,  वो कभी खाने को नहीं फेकती हैं | ना ना वो अपनी थाली का खाना आज भी पूरा ख़त्म नहीं करती , असल में वो थाली का बचा हुआ खाना या तो अपने पापा को जबरजस्ती खिला कर ख़त्म करतीं हैं या थाली समेत बचा खाना फ्रिज में चुपके से रख देतीं हैं | एक टुकड़ा रोटी छूटा हो या एक दो आलू का टुकड़ा सब मेरे फ्रिज में जाता हैं , जूठी थाली समेत और बाद में जब मुझे दिखता हैं तो वही मेरा उन पर चीखना चिल्लाना आज भी जारी ही हैं | मेरे इन कष्टों से मुझे आज भी मुक्ति नहीं मिली , मेरा चिल्लाना आज भी अनवरत जारी हैं , पता नहीं ये कब उन्हें  समझ आएगा |

#मम्मीगिरि

November 30, 2019

मम्मी तुम डेड होने वाली हो --------mangopeople

जब बिटिया को पता चला कि उनके मम्मी के भी मम्मी पापा होते हैं तो स्वाभाविक रूप से ये भी याद आया की पापा के भी मम्मी पापा होंगे | तो पापा से सवाल किया गया
"तुम्हारे मम्मी पापा कौन हैं पापा "
" तुम्हारे दादा दादी  मेरे मम्मी पापा हैं "
"वो कौन हैं "
"तुम नहीं मिली हो | वो भगवान जी के पास हैं  " तब तक बिटिया को इसका मतलब पता चल चुका था |
"वो कैसे डेड हो गए "
"वो बीमार थे "
"तुम उनकी देखभाल नहीं करते थे क्या " बच्चे कभी कभी इतनी क्रूरता से सवाल कर सकते हैं या ऐसी बाते बोल सकते हैं अपनी मासूमियत में कि हम अंदाजा भी नहीं लगा सकते हैं | ये बाते पापा जी के लिए असहज करने वाली थी और उनकसे जवाब देते ना बना | फिर इस बातचीत के बीच मम्मी को आना पड़ा |
"अरे नहीं बाबू ऐसा नहीं हैं | उनकी मम्मी बहुत बीमार थी तब पापा बहुत छोटे थे वो उनकी देखभाल नहीं कर सकते थे "
" तो बहुत बीमार होने पर लोग डेड हो जाते हैं "
"नहीं हर बार ऐसा नहीं होता कभी कभी हो जाता हैं " इस बार सावधान थी कि कोई गलत मैसेज बिटिया तक ना जाये | वो ये ना समझ ले की बीमार होने के बाद लोग मर जाते हैं |
" और दादा जी की डेथ कैसे हुई "
"वो भी बीमार थे ओल्ड हो गए थे , इसलिए उनकी डेथ हो गई | सभी लोग धीरे धीरे ओल्ड हो जाते हैं और उनकी डेथ हो जाती हैं " लग रहा था किसी तरीके से उसके मन से ये निकाल दूँ की पापा की वजह से उनके मम्मी पापा की डेथ हो गई और यही हो गई असावधानी जो कुछ समय बाद समझ आई |
महीने बीते और एक दिन अपनी मित्र  से फोन पर लंबी बात मजे से किये जा रही थी | बीच में बिटिया दो चार बार मम्मी सुनो कहा हमने उन्हें चुपचाप खेलने को कह बतियाते रहें | जब फोन रखा तो देखा ये दूसरे कमरे में सुबक सुबक रो रहीं हैं | मैं घबरा गई क्या हो गया , बार बार पूछा क्या हुआ तब जा कर इनकी जुबान खुली |
" मम्मी तुम डेड होने वाली हो "
"क्या "  अब ऐसे मौके पर हर भारतीय माँ के मन में जो आता हैं वही मेरे मन में आया |  हाय मेरी मासूम सी बच्ची जरूर किसी ने  मेरी बिटिया से अनाप शनाप सीखाया हैं | कोई तो हैं जिसे हमारी खुशियों से समस्या हैं बताओ ये क्या सीखा दिया इसे |
" नहीं बाबू ऐसा नहीं हैं किसने कहा तुमसे कि  मम्मी की डेथ होने वाली हैं "
" तुम फोन पर कह रही थी ना तुम ओल्ड हो गई हो ,  अब तुम डेड हो जाओगी "
स्यापा सावधानी हटी दुर्घटना घटी | फोन पर बात करते समय मजाक में अपनी मित्र से किसी बात पर मजाक में कह दिया कि ओल्ड हो गई हूँ और बिटिया उसे सुन अपना पिछले मिला ज्ञान से मिला इस नतीजे पर पहुँच गई खुद ब खुद |
"नहीं बाबू मैं ओल्ड नहीं हुई हूँ और ना ही मैं डेड होने वाली हूँ "
" और पापा "
"पापा भी नहीं हुए हैं अभी हमें ओल्ड होने में बहुत समय हैं तुम बहुत बड़ी हो जाओगी तब होंगे "
" मैं बड़ी हो जाऊँगी तब तुम लोग डेड हो जाओगे " ये सुन वो और रोना शुरू कर दी | अब बताइये एक तीन चार साल की बच्ची को जीवन मृत्यु का रहस्य और गीता  तो सुनाया नहीं जा सकता था कि सब नश्वर हैं | बड़ी मुश्किल से उस दिन उन्हें समझाया कि उनके मम्मी पापा अभी बहुत दिन उनके साथ रहने वाले हैं कहीं नहीं जाने वाले |
फिर लगा कितनी भी सावधानी रखो लेकिन बच्चो को एक बात समझाओ तो उससे जुड़े तमाम चीजों के बारे में कितना भी सोच लो कहीं ना कहीं कुछ गलती हो ही जाती हैं |
#मम्मीगिरि

November 28, 2019

मम्मीगिरि --------mangopeople


                                  तीन साल से भी कम की बिटिया को डॉक्टर को दिखा कर आई तो  बुखार एक सौ तीन देख हाथ पैर फूल गए | पापा जी पर चीखते हुए दवा लाने को कहा , क्योकि मेरे कहने पर भी उन्होंने डॉक्टर के पास की दूकान से दवा नहीं लिया था | डॉक्टर ने कहा पानी वाली पट्टी बर्दास्त नहीं कर पा रही तो तुरंत कपडे निकाल कर एसी के सामने बिठा दो | बिटिया कुछ देर तो सामान्य रहीं फिरअचानक से रोना शुरू कर दिया , घबरा कर पूछा कि क्या हुआ तो सुबुकते हुए बोली तुम पापा से प्यार नहीं करती हो |
                               
                                 बचपन से सुन रखा था बुखार तेज होता हैं तो दिमाग में चढ़ जाता हैं और लोग कुछ भी बकने लगते हैं | मुझे भी लगा बिटिया का बुखार दिमाग में चढ़  गया हैं और वो कुछ भी बोल रही हैं | दुबारा चेक किया तो बुखार एक सौ चार हो गया था , मैं एकदम से डर गई  | अबकी तो पापा जी को फोन कर बिफर ही पड़ी कि इतनी देर क्यों कर रहे हो दवा लाने में  | इस पर बिटिया और रोने लगीं , " देखा तुम सच में पापा से प्यार नहीं करती उन्हें डांट दिया , पापा तुमसे कितना  प्यार करते हैं " |सब बर्दास्त था लेकिन ये बात तो सीने में जहर बुझा खंजर लगने जैसा थी कि पापा तो प्यार करतें हैं लेकिन मम्मी नहीं करती | मतलब एक तरफ़ा आरोप मुझ पर , दोनों तरफ लगता तो इतना टेंशन ना होता |

                                 जैसे की हर माँ के मन में ऐसे समय में ख्याल आता हैं कि उसका बच्चा तो कितना   मासूम हैं किसी ने उसे सीखा पढ़ा दिया हैं , माँ के खिलाफ भड़का दिया हैं | तुरंत पूछा किसने कहा ये सब तुमसे , मैं तो कितना प्यार करती हूँ पापा से |
" नहीं तुम नहीं करती , पापा को अपने साथ बैठने भी नहीं देती , पापा को हग भी नहीं करने देती , पापा किस करते हैं तो तुम वो भी मना कर देती हो क्योकि तुम पापा को प्यार नहीं करती |"  बिटिया की मुख कमलों से ये सुन कर माथा ठोक  लिया  मैंने |

                                   दो साल  की बिटिया प्ले स्कूल जाना शुरू हुई , तो वहां हमें मिली एक गुरु माँ , क्योकि हम सभी के पहले बच्चे वहां पढ़ रहें थे जबकि उनका ये दूसरा था | उनके पास बच्चे के लालन पालन का अनुभव हम लोगों से ज्यादा था जो वो अक्सर हम सभी से बांटा करतीं थी | एक दिन उन्होंने देखा उनकी बिटिया स्लमडॉग फिल्म का दृश्य देख अपने गुड़िया के आँख में तेल डाल रही थी | उन्होंने हमें सावधान किया कि बच्चों के सामने कुछ भी करने से पहले सोच लो " बच्चे सब देख समझ रहें हैं " |  फिर चर्चा यहाँ तक पहुंची की भाई पति के साथ रोमांस करते भी सावधान रहो बच्चे  सब समझ रहें हैं |  फिर क्या था घर आते ही पतिदेव को फरमान सूना दिया गया , अब से सारे रोमांस बंद , मतलब बिटिया के सामने   |

                                   जो पति पत्नी विवाह के बाद घर में अकेले रहतें हैं उन्हें अच्छे से पता होगा कि जब वैवाहिक जीवन की शुरुआत सिर्फ आप दोनो घर में अकेले रह कर कर रहें हों तो दोनों के बीच खूब सारा रोमांस पनपता हैं | आपको रोमांस करने , बतियाने, पास बैठने  आदि के लिए रात होने या बैडरूम में जाने का इंतज़ार नहीं करना पड़ता | एक दूसरे को गले लगाना हो , घंटों करीब बैठ कर फिल्म देखना हो , एक दूसरे के गोद में सर रख या हाथ पकड़े बतियाना हो , किचन में साथ साथ  काम करते हुए  एक दूसरे के पास रहना हो या एक दूसरे को किस करना हो , इन सब को करने के लिए समय या जगह का ख्याल नहीं रखना पड़ता हैं | जब ये सब जीवन में पांच साल चले तो फिर ये सब आदत में शुमार हो जाता हैं , खाने नहाने जैसा जरुरी हो जाता हैं और अचानक से उन्हें बंद कर देने का फरमान , अत्याचार था दोनों पर ही  |

                                    नया नया मुल्ला पांच बखत का नमाजी बनता हैं | गुरु माँ की बात का पालन शुरू हुआ , शुरुआत बिटिया के सामने किस न करने से हुआ , गाल , माथे तक पर नहीं , और उसके बाद तो मेरे गोद में सर मत रखों , मुझे गले मत लगाएं , मेरे इतने पास मत बैठे , मुझे ऐसी नजर से मत देखों , मुझे फालतू के इशारे मत करों , सुनो तुम तो मुझे बिटिया के सामने देखों तक मत , तक पहुँच गया | पति बेचारा इस नए नियम से हैरान परेशान | इतने सालों की आदत जाती नहीं और हम उनके आगे बढ़ते ही गुर्राना शुरू कर देतें |

                                   जल्द ही  घर का कामदेव रति वाला श्रृंगारिक माहौल अचानक से रामसीता वाले सात्विक माहौल में बदल गया | सब बच्चे की भलाई के लिए हो रहा था सो कोई कुछ बोल भी नहीं सकता था | उस पर से पतिदेव के लिए बीवी बच्चे के बाद मरकहिं गैय्या जैसी हो गई थी | देखा होगा सीधी से सीधी गैय्या भी बच्चे होते ही हर बात पर सींग चला देती हैं बस वैसे ही हमारी जबान भी पापा जी की एक गलती  बिटिया के प्रति मैं  डांट देती  |

                                  जैसा कि गुरु माँ ने कहा था बच्चे सब देखते और समझते हैं , हमारे घर का भी बच्चा इस बदलते माहौल को देख रहा था और जो समझा वो करीब चार छ महीने बाद मेरे सामने था | मेयर स्थिति होम करत हाथ जरत जैसी थी , जिस बिटिया के लिए ये सब किया गया वही हमें सूना रही थी और  हम माथा पकड़े बैठे थे | "  पापा मुझे प्यार करते हैं हग करते हैं तुम्हे भी करते हैं तो तुम मना  कर देतीं हो , मैं तुमको प्यार करती हूँ तुमको किस करतीं हूँ , पापा भी करते हैं लेकिन तुम उनको मना कर देती हो | क्योकि तुम उनको प्यार ही नहीं करती हो " |

                                  कोई और समय होता तो दिमाग कुछ काम भी करता और उनको जवाब भी देता लेकिन उस समय तो उनका बुखार इतना तेज था कि जो कह रहीं हैं सुनते रहों और  बस  कैसे भी  इन्हे दवा खिला दी जाए और बुखार कम हो पहले | घर आने पर हमारे प्यारे पतिदेव को जब सारा कांड मालुम हुआ तो मुझे इतना प्यार करते थे  कि महीनो तक मुझे ये सूना सूना कर ताना मारते  रहें चिढ़ाते रहें |

                                 क्या करे हम सब ऐसे ही हैं कई बार हम दूसरों की बात पर बिना ज्यादा दिमाग लगाएं सोचे ऐसे अमल करने लगतें हैं जैसे वो बिलकुल सच और सही ही हो | कई बार बातों का गलत मतलब निकाल कुछ ही कर बैठतें हैं | बच्चों की भलाई के नाम पर हम सब करने को तैयार रहतें हैं उसका आगे का परिणाम जाने बिना |

                                 खैर घर का माहौल बिटिया के आने से  पहले वाला तो ना हुआ , आखिर हम थे तो भारतीय मिडिल क्लास सोच वाले , लेकिन उस दिन के बाद कुछ तो सामान्य हो गया था इस सोच के साथ जब बच्चों को किया जा रहा किस हग प्यार हैं और उसे हमें जाताना चाहिए , तो अपने जीवन साथी के साथ किया गया ऐसा व्यवहार कुछ और कैसे हो सकता हैं वो भी उतना ही प्यार है जिसे जताते रहना चाहिए |

#मम्मीगिरि

June 20, 2019

मम्मीगिरि-----mangopeople


  "पार्थवी ऐसे गद्दे पर स्लाइड मत करो गद्दा ख़राब हो जायेगा " 
" तुम्ही ने तो स्लाइड बनाया हैं | मम्मी तुम भी करो मजा आ रहा है " तीन साल की पार्थवी👧
"मै बेड के अंदर से सामान निकल रहीं हूँ इसलिए गद्दा ऐसे रखा हैं | तुम्हारे ऐसे सरकने के लिए नहीं "
"तुम भी अपने बचपन में ऐसी ही स्लाइड करती होगी इस पर , तभी तुमने गद्दा ख़राब कर दिया होगा 👧 "
"नहीं मैं इस पर सरकती ही नहीं थी "
"क्यों तुम्हे मजा नहीं आता था 🤔 "
" अरे मै अपने बचपन में यहाँ थोड़े रहती थी "
"यहाँ नहीं रहती थी तो कहाँ रहती थी😯 "
"अपने घर अपने मम्मी पापा के पास "
" तुम्हारे भी मम्मी पापा हैं 😯"
"क्यों मेरे मम्मी पापा नहीं होंगे क्या 🤦‍♀️ "
"तो तुम्हारे मम्मी पापा कौन हैं 🤔"
"नाना नानी मेरे मम्मी पापा हैं | तुम्हे नहीं पता था क्या " उस दिन पता चला हमारी बिटिया को मेरे और नाना नानी के रिश्ते के बारे में नहीं पता हैं 🤦‍♀️|
"नाना नानी तुम्हारे मम्मी पापा हैं | फिर तुम अपने मम्मी पापा को छोड़ कर यहाँ कैसे आ गई 😯 "
"तुम्हारे पापा से शादी करके "
" शादी करके पापा लोगों के घर आ जाते हैं क्या "
" हा मम्मी लोग पापा लोगों के घर आ जाती हैं "
चार घंटे बाद पार्थवी शाम को मेरे पास आई और बोला
"मम्मी मै शादी नहीं करुँगी 😌 "
कुछ पलो सोचना पड़ा 😯ये अचानक से क्या हुआ कि मेरी इतनी छुटकी सी लड़की ऐसा बोल रही हैं | फिर सुबह की घटना याद आई और ध्यान गया की ये तब से चुपचाप सोफे पर बैठी हैं ना खेली ना मुझसे बात किया | अपने काम केचक्कर में मैंने भी उस पर ध्यान नहीं दिया और ये तब से उसी बात को सोच रही थी उसे समझने की कोशिश कर रही थी | तो हमने भी अंदर की हँसी दबाते हुए बस मुस्कुरा कर कहा
"ओके ठीक हैं मत करना😇 "
"तुम भी मुझे मत कहना की शादी कर लो🙄 "
"ओके कभी नहीं कहूँगी😄 "
"मैं कभी तुम लोगों को छोड़ कर नहीं जाउंगी 🥺 "
"ओके ठीक हैं , जैसी तुम्हारी मर्जी 🤭"
रात में जब पापा जी आयें तो दरवाजा खुद खोलते ही उन्हें सीधा फरमान सुनाया गया "पापा मैं कभी शादी नहीं करुँगी "पापा बेचारे हैरान परेशान 😲ये तीन साल की बिटिया क्या बक रही हैं | उनकी सवालियां नज़रे सीधा मेरी तरफ हमने कहाँ " मुझे क्या देख रहें हो | पार्थवी ने बोला ना वो शादी नहीं करेगी , चलो तुम तो पार्टी दो , मुझे तो बड़ी ख़ुशी हैं 🤗"
"पार्टी किस ख़ुशी में 🙄"
"पार्टी इस ख़ुशी में क्योकि हमारी बिटिया सोच सकती हैं बातों को समझ कर उस पर विचार कर सकती हैं और उस पर निर्णय भी ले सकती हैं और सबसे बड़ी बात बिना किसी डर के वो हमें आ कर अपना डिसीजन सूना भी सकती हैं | मैंने उससे एक बार भी नहीं कहा कि उसकी शादी होगी उसे घर छोड़ कर जाना होगा | उसने खुद से ही अपना दिमाग लगा कर सोचा और ये भी सोचा लिया की वो ऐसा नहीं करेगी | मेरे लिए तो ये पार्टी की बात हैं भाई | लेकिन तुम्हारे लिए ये टेंशन की बात हैं 😅 "
"क्यों 🤔"
" अपने मन का करने वाली बीबी के बाद अब अपने मन का करने वाली बिटिया भी आ गई हैं , वो भी तुम्हारी सुनने वाली नहीं हैं 😆😆 "
उस दिन ख्याल आया की एकल परिवार होने पर बच्चों को बहुत सी बातों की जानकारी नहीं होती जो मुझे अपनी तरफ से सोच कर उसे समझाना हैं | दूसरे हमारी बिटिया के पास सोचने समझने सवाल करने वाला और निर्णय काने वाला दिमाग हैं | वैसे ये किस्सा यहीं ख़त्म नहीं हुआ कभी बार कही बोली जा रही चीजें बड़ी दूर तक जाती है यही इस किस्से के साथ भी हुआ |

August 12, 2018

माँ बापगिरी के मुश्किल फंडे ------ mangopeople


एक मित्र  ने एक मुद्दा उठाया बच्चो को फोन देना चाहिए की नहीं | आखिर हम सब बिना मोबाईल फोन के ही पले  बढे है तो हमारे बच्चे वो कैसे नहीं कर सकते है | मेरा मानना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें एक समय बाद फोन देना ही चाहिए । आज बच्चे अकेले कई जगहों पर जाते है किसी मुसीबत मे फंस गये तो हमे 

कैसे फोन करेगे । खुद हमे उनसे बात करनी हुई उनकी चिंता हुई तो क्या करेगे । ज्यादा हुआ तो स्मार्ट फोन 
नहीं देगे फोन करने लायक साधारण फोन देगें ।

                                                                        हमारे और हमारे बच्चो के जीवन में जमीन आसमान का फर्क हैं | हम केवल स्कूल के लिए  निकलते और उसके बाद सीधा घर | बाकि जगह परिवार के साथ,  हमारा अपना कोई जीवन नहीं था | कहीं गए भी तो अँधेरा घर वापसी का सिग्नल होता | बिटिया का जीवन इससे कही ज्यादा अलग है |  सुबह छ बजे उन्हें बास्केटबॉल के सलेक्शन के लिए लेकर गई घर आ नाश्ता कर तुरंत पेंटिंग क्लास के लिए फिर वहां से आ कर फिर प्रोजेक्ट के सामान के लिए बाजार फिर वापस से पेंटिंग क्लास क्योकि अगले महीने परीक्षा है | कल बैडमिंटन का सलेक्शन था | रोज स्कूल भी छोड़ने जाना होता है गेम्स  के लिए | दोस्तों की बर्थडे पार्टी में रात नौ दस बजते है | शुक्र है अभी टियूशन नहीं लगाया वरना वहां तो रोज ही जाना होगा |  अभी छोटी है तो भाग रहीं हूँ लेकिन कब तक , एक दिन अकेले छोड़ना ही पड़ेगा इन सब भाग दौड़ के लिए फिर उनसे कनेक्ट रहने के लिए फोन देना ही होगा | बिजनेस शुरू किया तो उन्हें अकेले घर में छोड़ कई बार जाना हुआ | कुछ हुआ तो मुझे कैसे फोन करती लैंड लाइन का जमाना गया फोन तो देना ही पड़ा | दर्जन भर उनके स्कूल , क्लास, प्रोजेक्ट , गेम , स्कूल वैन के व्हाट्सप्प समूह है | पहले सब मै देखती थी  अब मैंने वो हैंडिल करना छोड़ दिया है | बिटिया का काम है देखे और अपना काम खुद करे |  ख़राब कोई आधुनिक चीज नहीं होती हम उनका प्रयोग गलत करते है  |
                                                        हमें बच्चो को चीजों का मिस यूज गलत प्रयोग न करने के लिए समझाना चाहिए | वो क्या कर रहे है उन पर नजर रखनी चाहिए | हम खुद फोन का प्रयोग कम करेंगे तो बच्चे भी उसका प्रयोग कम करेंगे | मै किसी को गुडमार्निंग के मैसेज , फिजूल के चुटकुले , वीडियो फॉरवर्ड करना , फालतू की चैटिंग , सेल्फी लेना जैसे काम नहीं करती बिटिया भी ये नहीं करती है |   फोन के जितने भी गलत प्रयोग हो सकते है उनके बारे में जैसे ही सुनती हूँ तो तुरंत बातो बातो में उन्हें उसके नुकशान के बारे में बता देतीं हूँ | अभी महीने भर पहले वो सभी अपना डांस वीडियो यूट्यूब पर देने के बारे में पूछ रहीं  थीं |  तुरंत उसके बारे में उन्हें समझाया उनसे ये भी पूछा की वो ऐसा करना ही क्यों चाहतीं है  | फिर उसके जरुरत और दुष्प्रभावों के बारे में उनसे और उनकी दोस्तों से भी बात किया ,वो सब समझ भी गई और मान भी गई | जबकि ढंग की चीजों के लिए कोई मनाही भी नहीं है | दर्जनो  कलाकारी , क्राफ्ट बनाना , पेंटिंग करना , कीबोर्ड बजाना , हेयर स्टाइल बनाना , जादू के ट्रिक करना , नेल आर्ट , पहेलियाँ बनाना बूझना , बाँसुरी की अनेको धुन सीखना जैसे कितनी ही चीजे बीटिया ने यूट्यूब से सीखे  और हमें भी सिखाया है | मोबाईल के पियानो पर कई गाने मुझे सीखाया  | अभी हाल में बिटिया ने बांसुरी पर हीरो की धुन बजाना भी सिखाया है ,वो स्कूल बैंड में बाँसुरी बजाती है | मै उन्हें कई गेम्स भी खेलने देतीं हूँ जो हिंसक ना हो और जिसमे उनके हर चीज पर ध्यान देने की आदत भी पड़े थोड़ा दिमाग भी तेज चले | कितनी ही बार तो टीचर बोलती है नेट पर ये देख लो | ये सब करने के लिए उन्हें फोन कंप्यूटर आदि ना दे तो जरुरत के समय वो अनाड़ी ना रह जाए |

                                                     इन सब को छोड़ भी दे तो कई अन्य जरुरी चीजें भी है जो दुसरो के लिए जरुरी है | जैसे  हमारे स्टॉप से बच्ची जाती है सिंगल मदर है शाम को वैन पालना घर में छोड़ती है माँ फोन पर उसके स्कूल से निकलने से पहले और पहुंचने के तुरंत बाद  फोन करती है | स्कूल में फोन ले जाने की इजाजत नहीं है इसलिए वह फोन जमा करना पड़ता है और छुट्टी के बाद उन्हें मिलता है | मुंबई में ऐसे हजारो बच्चे है जो घर अकेले पहुंचते है या सभी जगह उन्हें अकेले ही जाना पड़ता है माँ बाप के लिए फोन ही संपर्क बनाये रखने में सहायता देता है | कुछ चीजे वक्त की जरुरत होती है जिन्हे समय के साथ अपना लेने में कोई बुराई मुझे नहीं लगता है | बाकि ये भी सही है कि जरुरी तो कुछ भी नहीं है , देश के हजारो लाखो बच्चे इसके बिना भी जी ही रहे है | इसलिए इस मामले में सभी माँ बाप की अपनी सोच हो सकती है | क्योंकि बच्चे पालने का कोई एक फंडा नहीं होता |