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September 22, 2019

अनर्थशास्त्री -------mangopeople

                                            बात कुछ साल पहले की हैं पतंजलि के उत्पाद बाजरा में जगह बनाना शुरू कर चुके थे | अखबारों में खबर आना शुरू हुए कि टूथ पेस्ट के मामले में उस समय के सबसे ज्यादा बाजार पर कब्ज़ा करने वाले कोलगेट की बिक्री बहुत ज्यादा गिर गई थी | उनकी बिक्री इतनी ज्यादा गिर गई थी कि बड़े बड़े अधिकारीयों को भी मार्केट के चक्कर लगा कर उपभोक्ता से बात तक करनी पड़ी थी | सबको पता था उसका ये हाल बाबा के दंतकांति ने किया था | बाबा का ग्राफ जैसे जैसे बढ़ रहा था कोलगेट का गिर रहा था | साफ था कि उपभोक्ता दांत साफ  करना नहीं बंद कर रहें थे वो एक बाजार पर कब्जे वाली कंपनी के उत्पाद को छोड़ कर किसी नए उत्पाद को खरीद रहें थे |
                                             सोचती हूँ तो अगर ये आज के समय में होता तो शायद ये खबर ऐसे आती कि  बाजार में इतनी ज्यादा मंदी  हैं की लोगों ने टूथपेस्ट तक खरीदना बंद कर दिया हैं कोलगेट की बिक्री में भारी गिरावट | कई जगह पढ़ा गाड़ियां नहीं बिक रही हैं उत्पादन बंद हो रहें हैं , शो रूम बंद हो रहें हैं जबकि बंद या कम होने वालों में एक दो कंपनियों के ही नाम आ रहें हैं सभी के नहीं ,  ऐसा क्यों हैं |
उत्पाद ना बिकने के बाद भी कंपनियों ने उसकी बिक्री बढ़ाने के लिए कोई भी नया ऑफर नहीं लाया बाजार में , कम्पनियाँ लगभग कुछ ना करती हुई दिख रही हैं , जीएसटी कम करों की मांग के अलावा ,ऐसा क्यों हैं |
                                          एक तरफ गाड़ियां ना बिकने की खबर आ रही हैं , दूसरी तरफ  टीवी अख़बारों में लगभग हर दूसरे तीसरे दिन किसी नई कार के बाजार में आने की खबर पढ़ रही हूँ ,  टीवी पर प्री बुकिंग के विज्ञापन आ रहें हैं | तो बस ये सवाल था कि बाजरा में जो कार बिक्री का में गिरावट बताई जा रही हैं वो सभी कारों की बिक्री में हैं या कुछ पुराने कारों में ही गिरावट देखी जा रही हैं | इस गिरावट में जो नई आ रहे गाड़ियों को आज ही बुक कर दिया गया हैं उनको जोड़ा गया हैं की नहीं या उन करों को  जो सीधे विदेश से यहां आ रहीं हैं | क्योकि कार भले ना बिक रहें हो लेकिन दो पहिया की बिक्री में कोई मंदी नहीं हैं | मतलब ये मंदी ज्यादा पैसे वालों के लिए हैं लेकिन माध्यम वर्ग के लिए उतनी नहीं हैं |
#अनर्थशास्त्री